धान महोत्सव में किसानों की बल्ले-बल्ले! CM डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई को सिवनी से जारी करेंगे ₹2.82 करोड़

सिवनी 
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए 1 जुलाई का दिन खास रहने वाला है. सिवनी में आयोजित होने वाले धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव हजारों किसानों को आर्थिक सौगात देंगे. कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए कोदो और कुटकी की खेती करने वाले 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। 

सरकार की ओर से यह राशि 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दी जा रही है. इसका उद्देश्य श्रीअन्न यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसान इस फसल की ओर ज्यादा आकर्षित हों और उनकी आय में भी इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि इस पहल से प्रदेश में कोदो और कुटकी के उत्पादन को नई रफ्तार मिलेगी। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के 3,941 कोदो एवं कुटकी उत्पादक किसानों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी के जरिए अंतरित करेंगे।यह राशि 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।

सिवनी में धान महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में
धान महोत्सव का आयोजन सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जिला प्रशासन ने आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

कलेक्टर नेहा मीना की निगरानी में प्रशासन ने हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक की व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी सभी जरूरी सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं. अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके। 

विकास परियोजनाओं की भी देंगे सौगात
धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सिर्फ किसानों को प्रोत्साहन राशि ही नहीं देंगे, बल्कि जिले को कई विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी. कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा. इससे जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। 

सरकार का मानना है कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देना भविष्य की कृषि नीति का अहम हिस्सा है. ऐसे में धान महोत्सव किसानों के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का मंच भी साबित हो सकता है। 

वर्ष 2026 ‘कृषक कल्याण वर्ष’: आयोजित होगा धान महोत्सव
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में खरीफ सीजन की शुरुआत के मौके पर कार्यक्रम स्थल पर ‘धान महोत्सव’ का भी आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में अच्छी बारिश, बेहतर पैदावार और अन्नदाताओं की समृद्धि की कामना के साथ ही किसानों को आधुनिक तरीके से धान की बोनी करने का संदेश दिया जाएगा।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़ी संख्या में जुटेंगे किसान
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह, अपर कलेक्टर सीएल चनाप सहित सभी संबंधित विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी वीआईपी और आम नागरिकों के लिए पार्किंग, पेयजल, बिजली और स्वच्छता की पुख्ता व्यवस्था समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले के किसानों और आम जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना है।

प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख आकर्षण होंगे—

    धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र
    प्राकृतिक एवं प्रमाणित बीजों की प्रदर्शनी
    कस्टम हायरिंग सेंटर
    प्राकृतिक एवं नैचुरल फार्मिंग मॉडल
    जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद
    पीएमएफएमई योजना के उत्पाद
    आम की विभिन्न उन्नत किस्में
    स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद
    लघु वनोपज आधारित उत्पाद
    स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद
    पोषण आहार प्रदर्शनी
    कृषिका एप की जानकारी

प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कृषि नवाचारों और विकास उपलब्धियों की जानकारी किसानों एवं नागरिकों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रशासन ने तैयारियों को दिया अंतिम रूप
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, यातायात प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के अधिकारी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

 

42 साल में पहली बार इतना सूखा बरगी डैम, जलस्तर इतना गिरा कि दिखने लगी तलहटी; विशेषज्ञों ने जताई चिंता

जबलपुर 
बरगी बांध में 42 सालों बाद इतना पानी कम हो गया है कि बांध के तल से अनोखी चीजें निकलकर सामने आ रही है. कहीं, अचानक पुरानी नाव सामने आने से चर्चा का विषय बनी हुई है तो कहीं मंदिर दिखाई देने से लोग हैरान हैं. वहीं, बरगी बांध के दक्षिणी तट का गेट पूरी तरह ऊपर दिखाई देने लगा है, जिसे पिछले 42 सालों में लोगों ने जल भराव के बाद कभी नहीं देखा था। 

बरगी बांध के बुरे हाल, कभी नहीं सूखा इतना पानी
जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने इस विशाल डैम में रोजाना 5 सेंटीमीटर के करीब पानी कम हो रहा है. बरगी बांध का कुछ पानी गर्मी की वजह से उड़ जाता है, तो वहीं कुछ हिस्सा नर्मदा नदी में प्रवाह बनाए रखने, पावर प्लांट चलाने और नहरों के लिए निरंतर प्रवाहित किया जाता है. खरीफ के मौसम में किसानों को धान की खेती के लिए नहरों से पानी भेजा जाता है, जिससे अब बांध का पानी रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी और बांध के प्रभारी राजा राम रोहित ने बताया, ”बांध में रोज 5 सेंटीमीटर पानी की कमी आ रही है और बांध का वर्तमान जलस्तर समुद्र तल से 407.45 मीटर है. इसके अनुसार बांध में अब मात्र 5.5 मीटर पानी ही शेष बचा है। 

आज तक बांध का ऐसा हाल नहीं देखा
बरगी नगर में रहने वाले स्थानीय निवासी नीरज मिश्रा ने कहा, ” बचपन से ही बरगी नगर में ही रहे हैं लेकिन बांध में इतना कम पानी पहले कभी नहीं देखा. बरगी बांध का पानी कम होने के साथ ही बांध के कुछ ऐसे नजारे भी देखने को मिल रहे हैं, जो पहले लोगों ने कभी नहीं देखे. बरगी बांध में बायीं ओर से नहर से पानी नरसिंहपुर जिले के लिए जाता है और दायीं ओर पानी को सतना तक ले जाने की तैयारी है. फिलहाल यह पानी कटनी जिले तक जा रहा है। 

पहली बार 407 मीटर तक गिरा बरगी डैम का जलस्तर
बरगी डैम को फुल टैंक लेवल 422.76 मीटर है, वहीं इसकी दायीं नहर का गेट लगभग 409 मीटर पर लगा हुआ है और डैम का पानी कभी 408 मीटर के नीचे नहीं जाता था. लेकिन इस साल यह पानी 407 मीटर के स्तर तक गिर गया है. इसकी वजह से बांध की दायीं ओर का कैनाल गेट पानी के ऊपर नजर आ रहा है. नीरज मिश्रा ने कहा, ” बरगी बांध में पहली बार पानी 42 साल पहले भरा गया था और 42 साल में यह पहला मौका है जब यह गेट पानी के बाहर आया है। 

इतना बड़ा है डैम का कैनाल गेट
पानी से बाहर नजर आ रहा बरगी डैम का कैनाल गेट लगभग 50 फीट चौड़ाई और 100 फीट ऊंचाई का एक भीमकाय स्ट्रक्चर है, जिसमें 50 फीट हिस्सा हमेशा पानी में डूबा रहता है. बांध के इस हिस्से से जो पानी छोड़ा जाता है उससे दायीं नहर में पानी जाता है, यह नहर किसी नदी से कम नहीं है. इस हिस्से में लोहे के तीन बड़े गेट हैं. जब इससे पानी छोड़ा जाता है तो दायीं नहर में लगभग 20 फीट पानी होता है. यह इंजीनियरिंग का एक बड़ा नमूना है. इसी पानी को जबलपुर से कटनी और कटनी के आगे स्लीमनाबाद टनल से होते हुए सतना तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। 

बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार बांध का जलस्तर प्रतिदिन करीब 5 सेंटीमीटर घट रहा है। कम पानी के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दो में से एक बिजली उत्पादन यूनिट बंद कर दी गई है, जबकि दूसरी यूनिट का संचालन भी सीमित कर दिया गया है।

15 साल में सबसे खराब स्थिति
बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो घटकर अब 407.45 मीटर रह गया है। यानी करीब 40 सेंटीमीटर पानी कम हो चुका है। वर्तमान में बांध में केवल 12.59 प्रतिशत पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जल भंडारण करीब 22 प्रतिशत था।

जून में सिर्फ डेढ़ इंच बारिश
सामान्य तौर पर 30 जून तक जबलपुर में करीब 8 इंच बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल करीब 1.5 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी मंडला के आसपास है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है।

बिजली उत्पादन पर असर
कम जलस्तर का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बरगी बांध की दो उत्पादन इकाइयों में से एक को 27 जून से बंद कर दिया गया है। दूसरी यूनिट, जो पहले 8 से 10 घंटे चलती थी, अब केवल 3 घंटे प्रतिदिन संचालित की जा रही है।

डैम के तल में नजर आया मंदिर और पुरानी बोट
बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में पानी कम होने की वजह से एक मंदिर भी चर्चा में है, जो हमेशा पानी में डूबा रहता था. इस बार ये मंदिर पानी के बाहर नजर आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ बरगी बांध के पुनर्वास विभाग की एक नाव भी चर्चा में है, जो लावारिस छोड़ दी गई थी और पानी कम होने की वजह से अब दिख रही है. बरगी बांध में अचानक इतना पानी कम क्यों हुआ यह चर्चा और जांच का विषय है. जांच ये होनी चाहिए कि बांध का पानी केवल जलवायु परिवर्तन की वजह से कम हुआ है या कोई लापरवाही बरती गई है. क्योंकि बांध से इस तरह पानी कम होना भविष्य में संकट की ओर इशारा कर रहा है। 

पानी की सप्लाई और सिंचाई पर बढ़ सकता है संकट
बरगी बांध से नर्मदा का पानी जबलपुर समेत कई शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए भेजा जाता है। इसी बांध से निकलने वाली नहरों से जबलपुर और नरसिंहपुर में सिंचाई होती है और भविष्य में कटनी व सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है।

लोग देखने पहुंच रहे सूखता बांध
जबलपुर निवासी आकाश कोष्ठा ने बताया कि बरगी बांध के सूखने की चर्चा सुनकर वे मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि बांध का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। नर्मदा के कई घाटों पर चट्टानें दिखाई देने लगी हैं और नदी का पानी भी पहले की तुलना में कम व गंदला नजर आ रहा है।

अल नीनो का असर भी माना जा रहा कारण
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई तो मध्य प्रदेश के कई जलाशयों में जल संकट गहरा सकता है और इसका असर बिजली उत्पादन, सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

ममता बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, TMC के अकाउंट फ्रीज मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार

कलकत्ता

कलकत्ता हाईकोर्ट से मंगलवार को ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ दायर याचिका पर अर्जेंट सुनवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य कर रहे हैं. उन्होंने ममता गुट की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि इस केस की सुनवाई भी आम मामलों की तरह ही होगी, यानी जो नंबर तय है, उसी लिस्टिंग के अनुसार सुनवाई की जाएगी। ममता गुट के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट को बताया कि टीएमसी के तीन बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है. इस वजह से इन खातों से किसी भी तरह का पेमेंट और लेन-देन नहीं हो पा रहा है. वकील ने कहा कि इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की भारी रकम फंसी हुई है. उन्होंने इस संकट को देखते हुए कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की, लेकिन अदालत ने उनकी ये मांग मानने से साफ इनकार कर दिया।

बैंक खातों में 440 करोड़ जमा
तृणमूल कांग्रेस के जिन तीन बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कुछ विधायकों द्वारा बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद की गई है। शिकायत में उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर खातों की विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।विधायकों ने अपनी शिकायत में बैंक खातों में जमा धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए सभी लेन-देन की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का आग्रह किया कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या फिर कथित अवैध गतिविधियों, जैसे ‘कट मनी’ की वसूली, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घोटालों से अर्जित रकम से जुड़ा हुआ है। बता दें कि फलता के चुनाव के बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें लोगों को कटमनी वापस की गई थी। दरअसल सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए वसूला गया धन कट मनी कहा जाता है। आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार में धड़ल्ले से लोगों से कटमनी वसूली जाती थी।

तय समय से होगी सुनवाई
सोमवार को मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग किये जाने पर अदालत ने बैंक, पुलिस और राज्य सरकार को पक्षकार बनाने तथा उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था. मंगलवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फिर से त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. न्यायमूर्ति ने दोहराया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी. इस मामले में राज्य सरकार भी एक पक्ष है. राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि यदि त्वरित सुनवाई संभव नहीं है, तो कम से कम गुरुवार को पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया जाये। 

बागी विधायकों की शिकायत पर हुई कार्रवाई
टीएमसी के इन बैंक खातों पर ये कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े कुछ विधायकों की शिकायत के बाद हुई है. इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने इस मामले की पूरी जांच करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। 

इन बागी विधायकों ने खातों में जमा करोड़ों रुपयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने जांच टीम से मांग की है कि इस पैसे के सोर्स की जांच की जाए. वे पता लगाना चाहते हैं कि ये पैसा ईमानदारी की कमाई का है या फिर किसी गलत काम से आया है. उन्हें शक है कि ये पैसा कट-मनी (कमीशन), पब्लिक फंड की हेराफेरी और किसी बड़े घोटाले का हो सकता है। 

इक्का ट्रेलर लॉन्च पर भावुक हुए सनी देओल, कहा मैं हमेशा पापा का बेटा हूं

मुंबई में 29 जून को नेटफ्लिक्स की फिल्म इक्का का ट्रेलर लॉन्च किया गया. इस मौके पर जब फिल्म के ट्रेलर में दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र को ट्रिब्यूट दिया गया. ट्रेलर में सनी को “धर्मेंद्र का बेटा, सनी देओल” कहकर क्रेडिट किया गया. इस बारे में बात करते हुए सनी काफी भावुक हो गए.

सनी देओल ने कहा- मैं हमेशा पापा का बेटा हूं और हमेशा रहूंगा
जब सनी देओल से पूछा गया कि मेकर्स ने उन्हें “धर्मेंद्र का बेटा” कहकर क्यों क्रेडिट किया, तो उन्होंने बहुत ही भावुक अंदाज में कहा, “मैं हमेशा अपने पापा का बेटा हूं और हमेशा रहूंगा… बस इससे आगे कुछ नहीं.”

‘इक्का’ ट्रेलर में दिखा कोर्टरूम ड्रामा
फिल्म ‘इक्का’ का ट्रेलर एक इंटेंस कोर्टरूम ड्रामा की झलक दिखाता है, जिसमें सनी देओल एक वकील अर्जुन मेहरा का किरदार निभा रहे हैं. कहानी में वह अपने अतीत के एक व्यक्ति का केस लड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिसे अक्षय खन्ना निभा रहे हैं. फिल्म में तिलोत्तमा शोम एक सख्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की भूमिका निभा रही हैं. जबकि दिया मिर्जा, सनी की पत्नी का रोल निभा रही है. इसके अलावा फिल्म में संजेदा शेख, शिशिर शर्मा और आकांक्षा रंजन कपूर भी हैं.

फिल्म को लेकर डायरेक्टर ने क्या कहा?
फिल्म के डायरेक्टर सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने बताया कि ‘इक्का’ सिर्फ एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि इसमें रिश्तों, इमोशंस और न्याय की जटिलताओं को भी दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ इस कहानी को पर्दे पर लाना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा. फिल्म की कहानी इक्का को अल्थिया कौशल और मयंक तिवारी ने लिखा है. यह फिल्म 10 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी.

वेलकम टू द जंगल 4 दिनों में 100 करोड़ पार, वेलकम 4 पर बड़ा अपडेट

 अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल स्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई और रिलीज होते ही इसने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त पकड़ बना ली. कॉमेडी और एक्शन से भरपूर यह फिल्म दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रही है और लगातार कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है. सिर्फ 4 दिनों में ही इसने वर्ल्डवाइड 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है. इसकी शानदार सफलता के बीच डायरेक्टर अहमद खान ने फिल्म के बजट और ‘वेलकम 4’ को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने फैंस की एक्साइटमेंट और भी बढ़ा दी है.

Zoom को दिए इंटरव्यू में डायरेक्टर अहमद खान ने फिल्म के बजट को लेकर खुलकर बात की. अहमद खान ने कहा कि लोग उन्हें महंगा डायरेक्टर समझते हैं, लेकिन यह बिल्कुल गलत है. उन्होंने साफ कहा कि वह कभी भी ज्यादा खर्च करके फिल्म नहीं बनाते, बल्कि हमेशा प्रोड्यूसर के फायदे और बजट का ध्यान रखते हैं. उनके मुताबिक, वह अपनी फिल्मों को तय बजट के अंदर ही पूरा करते हैं.

अहमद खान ने यह भी कहा कि उनके बारे में कई तरह की झूठी बातें फैलाई जाती हैं. उनका मानना है कि 200 या 250 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट कई बार बेकार खर्च होता है और इससे फिल्मों में सिर्फ फिजूलखर्ची बढ़ती है.

फिल्म का बजट कितना है?
डायरेक्टर अहमद खान ने बताया कि फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल‘ को बनाने में करीब 115 से 125 करोड़ रुपये का खर्च आया है. इस बजट में एक्टर्स की फीस, गाने और एक्शन सीन शामिल हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म रिलीज से पहले ही डिजिटल राइट्स, सैटेलाइट (टीवी) राइट्स, म्यूजिक और ओवरसीज राइट्स बेचकर पूरा खर्च पहले ही वसूल कर लिया गया था. इसका मतलब है कि फिल्म का बजट पहले ही निकल चुका है और अब थिएटर से होने वाली हर कमाई सीधे तौर पर मुनाफा (प्रॉफिट) मानी जाएगी.

 क्या आएगी ‘वेलकम 4’?
जब अहमद खान से पूछा गया कि क्या वह इस फिल्म का चौथा पार्ट यानी ‘वेलकम 4’ भी बनाएंगे? तो उन्होंने कहा, “अभी तक ऐसा कोई प्लान नहीं है. लेकिन दर्शकों से किरदारों को जो प्यार मिल रहा है, उसे देखकर लगता है कि अगला पार्ट बनना चाहिए. पर इसमें अभी काफी समय लगेगा.”

 क्या उदय-मजनू के साथ होगी जॉन अब्राहम की एंट्री?
जब उनसे पूछा गया कि क्या अगले पार्ट में नाना पाटेकर (उदय भाई) और अनिल कपूर (मजनू भाई) वापस आएंगे, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि कुछ भी हो सकता है. शायद अगले पार्ट में जॉन अब्राहम की एंट्री भी देखने को मिल सकती है.

रतलाम से पैदल भोपाल पहुंचे दो कांग्रेस कार्यकर्ता, निष्कासन के विरोध में PCC कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे

भोपाल 

मध्य प्रदेश कांग्रेस में इस समय ऊपर से नीचे तक सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश के जिलों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा नवीन जिला कार्यकारिणी पर सवाल खड़े करने का सिलसिला जारी हैं। अब कार्यकर्ताओं को सवाल खड़े करने पर उसका खामयाजा भी भुगतना पड़ रहा है। 

रतलाम के कांग्रेस कार्यकर्ता गौरव पोरवाल और संजय रावत को 6 साल के लिए जिला कांग्रेस कमेटी ने निष्कासित किया है, उससे नाराज होकर उन्होंने न्याय के लिए रतलाम से भोपाल तक पैदल पद यात्रा की और सोमवार सुबह से ही वह दरी बिछाकर कांग्रेस कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। हालांकि इस दौरान पीसीसी कार्यालय में आयोजित बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पहुंचे थे, उन्होंने कार्यकर्ताओं को देखा भी लेकिन उनसे मुलाकात करना जरूरी नहीं समझा और चलो चलो कहते हुए आगे बढ़ गए, प्रदेश अध्यक्ष के इस रवैया से भी कांग्रेस के दोनों कार्यकर्ता हताश होते हुए नजर आए। 

जिला कार्यकारिणी पर सवाल उठाए
रतलाम से आए कांग्रेस के निष्कासित कार्यकर्ता गौरव पोरवाल ने भास्कर को बताया कि हम तीन सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए भोपाल आए हैं। गौरव ने बताया हम इसलिए आए हैं क्योंकि अभी रतलाम की जिला कार्यकारिणी बनी थी तो किसी को तीन पद दे दिए, किसी को चार पद दे दिए तो हमने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष जी को मैसेज पहुंचाया था कि आप संगठन में एक व्यक्ति को तीन चार पद दे रहे हैं तो ये शोभा नहीं देता।

हमारी जिलाध्यक्ष से बात हुई थी। वे कह रहे थे हमारे पास कार्यकर्ता नहीं हैं। गकांग्रेस की इतनी स्थिति खराब हो गई है कि नए कार्यकर्ता नहीं मिल रहे इसलिए आप एक-एक व्यक्ति को तीन-तीन पद दे रहे हो।

कार्यकर्ताओं को दो-दो पद देने के आरोप
गौरव पोरवाल ने चर्चा करते हुए बताया कि 21 जून को उन्होंने कार्यकर्ता सम्मान पदयात्रा रतलाम से शुरू की थी, निरंतर 8 दिन 300 किलोमीटर चलने के बाद वह भोपाल पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि रतलाम जिले की नवीन कार्यकारणी में जिला अध्यक्ष ने एक ही कार्यकर्ता को दो से तीन पद दे दिए हैं। गौरव पोरवाल और संजय रावत ने बीते चार जून को इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। 

मुलाकात के दौरान उन्होंने जिला कार्यकरणी में मूल कार्यकर्ताओं की अपेक्षा करने की शिकायत की। दोनों का प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात करना जिला अध्यक्ष को अच्छा नहीं लगा। उसके बाद जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत के निर्देश पर संगठन महासचिव जगदीश पाटीदार ने दोनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने मुख्य संगठन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं के सम्मान में पदयात्रा निकालने का निर्णय लिया और रास्ते भर वह कार्यकर्ता सम्मान का संदेश देते हुए भोपाल पहुंचे। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती वह भोपाल में ही डटे रहेंगे और जरूरत पड़ी तो आगे दिल्ली तक भी पदयात्रा कर राहुल गांधी के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

वापसी नही हुई तो बाहर से करेंगे कांग्रेस के लिए कार्य 
गौरव ने  बातचीत करते हुए कहा कि वह कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता है, जिस दिन उनका निष्कासन हुआ उसी दिन बीजेपी की ओर से उन्हें पार्टी में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने बीजेपी में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया। गौरव ने यह भी कहा कि उन्हें कोई पद की लालसा नहीं है। वह कोई पद नहीं चाहते हैं वह एक आम कार्यकर्ता बनाकर कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए कार्य कर कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहां कि अगर कांग्रेस का मुख्य संगठन उन्हें स्पष्ट कर की उनका निष्कासन समाप्त नहीं होगा तो वह बाहर से भी बिना कांग्रेस का कार्यकर्ता होते हुए भी पार्टी के लिए काम करेंगे।

जीतू पटवारी से मिले तो जिला कांग्रेस ने निष्कासित कर दिया
गौरव ने बताया 4 जून को नामली में हम यही दरी लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के पास गए थे। उनसे बात की तो उन्होंने हमें गले लगाया और साथ में बिठाकर लेकर गए थे। उसके बाद जिला कांग्रेस कमेटी को प्रदेश अध्यक्ष से मिलना इतना बुरा लगा कि हमें पार्टी से निष्कासित कर दिया। उन्होंने हमारे पर आरोप लगाया लेकिन उनके पास ठोस सबूत आज भी नहीं हैं कि किस कारण से निष्कासित किया है।

कौन से व्यक्तियों को तीन-चार पद दिए गए हैं? एक रवि तिवारी हैं जिनके पास तीन पद हैं। प्रकाश पाटीदार के पास भी ऐसे ही पद हैं। सुनील पोरवाल के पास दो पद हैं। वे युवा कांग्रेस में भी हैं और जिला कांग्रेस में भी पद दिया गया है। मैं किसी पद पर नहीं हूं। मैं आम कार्यकर्ता हूं।

सवाल- आपकी क्या मांग है? गौरव: मेरी यही मांग है कि मुझे पद नहीं चाहिए लेकिन जो मजबूती से कांग्रेस के लिए काम करते हैं उनका सम्मान होना चाहिए।

सवाल- जीतू पटवारी से आप मिले? गौरव: जीतू पटवारी हमसे नहीं मिले। वो आए थे तो उन्होंने कहा चलो-चलो…. ये बातें शोभा नहीं देती। कार्यकर्ता अगर इतनी दूर से पैदल आया है तो उनको हमसे बात करनी चाहिए। ऐसे अगर चलो-चलो करने में रहेंगे तो फिर क्या स्थिति रहेगी। हम पार्टी का विरोध करने नहीं बैठे हैं।

सवाल: आप कब तक धरने पर बैठेंगे? गौरव: जब तक हमारी बात नहीं मानी जाती तब तक बैठेंगे। अगर लगा कि हमारी बात नहीं सुनी जा रही तो दिल्ली पैदल-पैदल जाएंगे। और अपनी बात पार्टी के सीनियर नेताओं को बताएंगे।

UP Election: राजेंद्र गौतम ने सपा को दिया साफ संदेश, बोले- कांग्रेस बड़ी पार्टी, सीट शेयरिंग में बराबरी की हिस्सेदारी चाहिए

लखनऊ
 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन इंडिया अलायंस में सीट शेयरिंग को लेकर अभी से खींचतान शुरू हो गई है. यूपी चुनाव में संभावित गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस ने खुद को सपा से बड़ी पार्टी बताते हुए ज्यादा सीटों की डिमांड की है. नवनियुक्त कांग्रेस यूपी प्रभारी राजेंद्र गौतम ने  कहा कि यूपी में सीटों में बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए. कांग्रेस बड़ा भाई है. राजेंद्र गौतम ने यूपी में समाजवादी पार्टी से गठबंधन से जुड़े सवाल पर ये बातें कहीं। 

राजेंद्र गौतम ने कांग्रेस को बताया बड़ा भाई
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग के सवाल पर कांग्रेस के राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है. कांग्रेस के नेतृत्व में आजादी मिली और देश का निर्माण हुआ. बीजेपी का मुकाबला करने की हिम्मत क्षेत्रीय पार्टियों में नहीं. इस सच को स्वीकार करना होगा. बीजेपी ने क्षेत्रीय पार्टियों के सांसदों और विधायकों को तोड़ा. कांग्रेस ही बीजेपी को हरा सकती है. कांग्रेस तो बड़ा भाई है ही, क्योंकि हम राष्ट्रीय पार्टी हैं. यूपी में हम बराबर के साझेदार हैं, भाई-भाई हैं. हिस्सेदारी और सम्मान बराबर का होनी चाहिए। 

बीएसपी को गठबंधन के लिए भेजा सिग्नल
मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी के खिलाफ संविधान बचाने वालों को एकजुट होना चाहिए. जो देश को बचाना चाहते है उन्हें एकजुट होना चाहिए. मेरा स्पष्ट मानना है कि बीजेपी के खिलाफ संविधान में विश्वास करने वाले को एक साथ होना चाहिए. कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करेंगे. हम हर तरह के लोगों से मिलेंगे। 

सीएम योगी को बताया डरा हुआ सीएम
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बौखलाहट में नजर आ रहे हैं. कहा कि बीजेपी भगवान श्रीराम के चंदा चोरों को बचा रही है. चंदा चोरी से बीजेपी की मंशा सामने आई है. बीजेपी का बस चले तो भविष्य में चुनाव न कराएं. न्यायपालिका डरी हुई है और चुनाव आयोग बीजेपी के लिए काम कर रहा है। 

आरोप लगाया कि सीएम योगी ने पुलिस को हत्यारा बना दिया है, गरीबों के घर बुलडोजर चल रहा है. योगी डरे हुए हैं और उनकी सत्ता जाने वाली है. चंदा चोर को बचाने की कोशिश है. कांग्रेस नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा और जीता जाएगा। 

राजेंद्र गौतम ने कहा कि यूपी चुनाव में जिस भी पार्टी के साथ गठबंधन होगा उससे बात करके ही घोषणापत्र तैयार किया जाएगा. उन्होंने ऐलान किया कि एक जुलाई से यूपी का दौरा शुरू करेंगे। 

उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली किसान की किस्मत, खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

सफलता की कहानी 
उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर

खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

रायपुर
खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।

                 सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक श्री खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

4 एकड़ में खीरे की व्यावसायिक खेती

        श्री गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया।

पारंपरिक से वैज्ञानिक खेती का सफर

       पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण श्री गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

भविष्य की योजनाएं और संदेश

         अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्री खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ।

       उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

सेवा सहकारी समिति मुनुंद में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्धता

सेवा सहकारी समिति मुनुंद में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्धता

 कालाबाजारी रोकने प्रशासन सतर्क

रायपुर,
राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन के कृषि अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए जांजगीर-चांपा जिले में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है तथा खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए नियमित निरीक्षण एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

कृषि विभाग के अनुसार सहकारी क्षेत्र में 39,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध वर्तमान में 21,362 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें से 7,826 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 26,130 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 13,487 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है तथा 10,150 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जिला जांजगीर-चांपा के नवागढ़ विकासखंड की सेवा सहकारी समिति मुनुंद में वर्तमान में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जिंकेटेड सुपर फॉस्फेट तथा नैनो उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को निरंतर वितरण किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि किसानों को उनके खेती के रकबे के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शनिवार एवं रविवार सहित अवकाश दिवसों में भी सेवा सहकारी समितियों को संचालित कर खाद वितरण जारी रखा गया है। खाद की कालाबाजारी एवं वितरण में अनियमितता रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उर्वरक निरीक्षक दल द्वारा निजी कृषि केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान शासकीय दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव

सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण सनिश्चित करें-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न

रायपुर, 
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सामाजिक अंकेक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से हुई चर्चा

          मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से अंकेक्षण रिपोर्ट दिया जाना आवश्यक है। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इस वर्ष प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण एवं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के सामाजिक अंकेक्षण कराये जाने पर बल दिया गया। 

सामाजिक अंकेक्षण नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम

         बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2025-26 में अब तक किए गए सामाजिक अंकेक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना एवं बजट का भी अनुमोदन किया गया। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा हुई। सामाजिक अंकेक्षण कार्य में नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु डेवलपमेंट एजेंसी के सहयोग के लिए भी चर्चा हुई।  बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के विस्तार हेतु अन्य योजनाओं से निश्चित विकास निधि के निर्धारण के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। 

सामाजिक अंकेक्षण कार्यों के संपादन पदों को भरने के प्रस्ताव पर चर्चा 

        बैठक में मनरेगा योजना को संशोधित नवीन योजना वीबीजीरामजी में सामाजिक अंकेक्षण के प्रावधान का अवलोकन, आत्मसात करने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा सहित अन्य योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण के कार्यों के संपादन हेतु विभिन्न पदों को नियमानुसार भरने के लिए आवश्यक नियमों के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अनुमोदन किया गया।  

       बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के सामान्य सभा के सदस्यों ने भाग लिया।

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