किसान चोवाराम एवं बेनीराम ने खाद, बीज के वितरण की व्यवस्था की सराहना की

रायपुर
    
केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु की गई व्यवस्था के तहत बालोद जिले के सहकारी समितियों में नियमित रूप से जिले के कृषकों को नियमित रूप से खाद, बीज का वितरण किया जा रहा है। कलेक्टर मती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले के सभी सहकारी समितियों में शासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की भण्डारण के साथ-साथ वितरण हेतु भी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं। बालोद जिले में खाद, बीज की समुचित वितरण हेतु की गई व्यवस्था की सराहना जिले के कृषकों ने भी की है। आगामी खरीफ सीजन हेतु समुचित मात्रा में खाद, बीज उपलब्ध होने पर गुरूर विकासखण्ड के ग्राम फागुनदाह निवासी कृषक  चोवाराम एवं ग्राम पेण्डरवानी निवासी  बेनीराम साहू ने व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए हितकर बताया है। 
    
समय पर खाद, बीज मिलने से बहुत ही प्रसन्नचित नजर आ रहे किसान  चोवाराम ने बताया कि कुल 02 एकड़ भूमि वाले एक लघु कृषक है।  चोवाराम ने कहा कि उन्होंने एक सप्ताह पहले अपने ग्राम फागुनदाह के सहकारी समिति में पहुँचकर दो बाॅटल नैनो डीएपी, एक बाॅटल युरिया के साथ-साथ दो बोरी युरिया एवं एक बोरी सुपरफास्फेट खाद प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों में की गई बेहतर व्यवस्था के फलस्वरूप उन्हें खाद, बीज प्राप्त करने में 

किसी भी प्रकार की असुविधा नही हुई। इसी तरह जिले में खाद, बीज की वितरण की व्यवस्था की सराहना गुरूर विकासखण्ड के ग्राम पेण्डरवानी के कृषक  बेनीराम ने भी किया है। किसान  बेनीराम ने बताया कि वे कुल 20 एकड़ जमीन वाले बड़े कृषक है। किसान बेनीराम ने बताया कि सहकारी समिति ग्राम पेण्डरवानी में पहुँचकर उन्होंने 05 बोरी स्वर्णा और स्वर्णा सब 1 तथा मांग के अनुरूप अन्य धान, बीज उन्होंने प्राप्त किया है। सहकारी समिति में धान, बीज के प्राप्त करने में उन्हें एवं अन्य कृषकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नही हुई। जिससे हम सभी कृषक प्रसन्नचित होने के साथ-साथ भविष्य में भी समय पर खाद, बीज प्राप्त करने के लिए पूरी तरह आशान्वित है।

आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री शर्मा’

रायपुर

’आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री  शर्मा’

मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के वनांचल क्षेत्र पानाबरस में आदिम आस्था स्थलों के संरक्षण, संवर्धन एवं जनजातीय संस्कृति सुरक्षा अभियान के अंतर्गत महासभा का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री  विजय शर्मा तथा राजनांदगांव लोकसभा सांसद  संतोष पांडे शामिल हुए। कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के मांझी, गायता, ग्राम पटेल, ग्राम प्रमुख एवं समाज प्रमुख शामिल हुए।
         
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज एवं पूजा-अर्चना के साथ किया गया। अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की गई। सभा में जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति एवं पूर्वजों की आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई

         
महासभा में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आदिवासी समाज के मांझी, गायता एवं ग्राम प्रमुखों के साथ सीधा संवाद करते हुए उनकी परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था एवं धार्मिक आस्था से जुड़ी जानकारियां प्राप्त की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं और देवस्थल हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण करना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित देवगुडि़यों, आस्था स्थलों एवं पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े स्थलों का चिन्हांकन कर वहां आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थलों तक पहुंच मार्ग, पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि आने वाली पीढि़यां अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें।
            
उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने समाज प्रमुखों से अपील करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, बोली, रीति-रिवाज और परंपराओं से जोड़कर रखने में सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। राजनांदगांव लोकसभा सांसद  संतोष पांडे ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक आस्था स्थलों का संरक्षण समाज की अस्मिता से जुड़ा विषय है। 
     
उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार जनजातीय समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए अनेक योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही है।  कार्यक्रम में समाज प्रमुखों द्वारा आदिवासी संस्कृति एवं आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती नम्रता सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  भोजेश शाह मांडवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं आदिवासी समाज के विभिन्न समाज प्रमुख एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 4 सेवानिवृत्त़ कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई

भोपाल 

​पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं से माह मई में सेवानिवृत्त 4 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने शुक्रवार को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके विभिन्न स्वत्व (क्लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिस मुख्यालय से लगातार अनुभवी एवं समर्पित अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिनके साथ कार्य करने का उन्हें अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कार्य करना केवल नौकरी नहीं बल्कि चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है, जहां देर रात तक एवं अवकाश के दिनों में भी कर्तव्यों का निर्वहन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आने वाली युवा पीढ़ी को भी इसी ऊर्जा, अनुशासन एवं जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करना होगा, ताकि विभाग की गौरवशाली परंपरा निरंतर बनी रहे।

नवीन पुलिस मुख्यालय भवन कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक किरणलता केरकट्टा एवं अन्य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे।

पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्त मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक अजाक सुनीता सिंह कुशवाह, मानसेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा मोहन लाल मेहरा, कार्यवाहक आंकिक/सूबेदार (एम) केन्द्रीय आवक जावक मुकेश मिश्रा एवं कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक विशेष शाखा दिनेश कुमार सक्सेना को पुलिस मुख्यालय परिवार ने शुक्रवार को भावभीनी विदाई दी।

सहायक पुलिस महानिरीक्षक इरमीन शाह ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कार्यकाल की जानकारी दी। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।

 

मध्य प्रदेश में गर्मी से मिली राहत, प्री-मानसून ने दी दस्तक

 भोपाल

तप रहे मध्य प्रदेश को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रदेश में प्री-मानसून ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार को दिन के औसत तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से ग्वालियर का तापमान 34.5 और दतिया का 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस कम रहा। जबकि छतरपुर के खजुराहो का तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस और नौगांव का 38.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम रहा।

हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ठंडा रहा ग्वालियर

बीते 24 घंटों में हुई बारिश के कारण ग्वालियर का तापमान हिल स्टेशन पचमढ़ी के 37.4 डिग्री सेल्सियस से भी कम रिकॉर्ड किया गया। इस दौरान ग्वालियर, दतिया, खजुराहो, नौगांव और बालाघाट जिले के मलाजखंड सहित कई इलाकों में बारिश हुई, जबकि छतरपुर, पन्ना, रीवा, सीधी और भिंड सहित कई जिलों में धूलभरी आंधी चली।

इस दौरान नरसिंहपुर और रायसेन 43 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहे, जबकि शेष जिलों में पारा इससे कम रहा। छिंदवाड़ा का न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 6.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। यहां गर्म रात रही।

मौसम वैज्ञानिकों का आकलन

मौसम केंद्र के अनुसार राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा तक एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसके प्रभाव से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों में इजाफा हुआ है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के विभिन्न इलाकों में तेज हवाओं, बारिश और ओले गिरने की संभावना जताई गई है।
इन जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी

ऑरेंज अलर्ट: मंदसौर, नीमच, ग्वालियर, दतिया, भिंड, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी, वज्रपात और ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है।
    
येलो अलर्ट: भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, धार, उज्जैन, रतलाम, गुना, शिवपुरी, मुरैना, रीवा, शहडोल और बालाघाट सहित कई जिलों में 40-50 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। वहीं विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, जबलपुर और सागर जैसे क्षेत्रों में आंधी के साथ-साथ हल्की ऊष्ण लहर (लू) का प्रभाव भी बना रह सकता है।

आंधी-बारिश का कहर: भिंड और छतरपुर में छह मौतें

तेज आंधी और बारिश के चलते गुरुवार रात हादसों में भिंड और छतरपुर में तीन-तीन लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल हो गए। कई घंटों तक बिजली सप्लाई बाधित रही। भिंड में गोहद के सर्वा गांव में कृषि उपज मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष के बेटे जितेंद्र सिंह तोमर की दीवार गिरने से मौत हो गई। चार बच्चे घायल हो गए।
खरगोन में भीषण तपिश से पेड़ से गिरकर मरे बगुले

खरगोन के कसरावद में तीव्र लू का प्रभाव रहा। कई स्थानों पर बगुले मर कर पेड़ से नीचे गिर गए। इसका चित्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

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प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान

प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान

शहर (City)

अधिकतम तापमान (°C)

न्यूनतम तापमान (°C)

भोपाल

40.6

29.9

इंदौर

39.4

26.4

ग्वालियर

34.5

24.4

जबलपुर

40.1

27.4

नोटतापमान डिग्री सेल्सियस में

 

प्लांट डॉक्टर किसानों के लिए एआई आधारित स्मार्ट समाधान

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। किसानों की आय वृद्धि, कृषि में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर नवाचारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि में एआई, ड्रोन, सेंसर आधारित तकनीक और डिजिटल समाधानों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसी क्रम में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के एम.टेक. छात्र  आर्यन चंद्रा द्वारा विकसित “प्लांट डॉक्टर” नामक एआई आधारित स्मार्ट डिवाइस किसानों के लिए उपयोगी तकनीकी समाधान के रूप में सामने आया है।

किसानों को फसल रोगों की त्वरित पहचान एवं उपचार संबंधी सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से  चंद्रा ने लगभग 10 माह के शोध एवं परिश्रम के बाद “प्लांट डॉक्टर” नामक पोर्टेबल स्टैंड अलोन एआई डिवाइस विकसित की है। यह नवाचार किसानों को खेत स्तर पर ही रोगों की पहचान, उपचार के सुझाव तथा वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने में सहायक है।

56 प्रकार के फसल रोगों की पहचान में सक्षम

यह डिवाइस 10 प्रमुख फसलों में होने वाली 56 प्रकार की बीमारियों की पहचान करने में सक्षम है। इसकी विशेषता यह है कि इसे संचालित करने के लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है। डिवाइस का उपयोग बेहद सरल है। किसान पहले संबंधित फसल का चयन करता है, इसके बाद प्रभावित पत्तियों अथवा पौधे का चित्र डिवाइस में लगे कैमरे से लिया जाता है। कुछ ही सेकंड में डिवाइस एआई आधारित विश्लेषण कर रोग की पहचान के साथ उपचार एवं दवा संबंधी सुझाव उपलब्ध करा देती है।

ऑफलाइन उपयोग और कम लागत की विशेषता

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और नेटवर्क की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए “प्लांट डॉक्टर” को पूरी तरह ऑफलाइन मोड पर विकसित किया गया है, जिससे खेतों में बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी इसका प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। लगभग 8 हजार 500 रुपये की अनुमानित लागत वाला यह डिवाइस कम खर्च में फसल रोगों की त्वरित पहचान एवं उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराती है। कम लागत और आसान उपयोग के कारण इसका उपयोग सामुदायिक स्तर, कृषक उत्पादक संगठनों और कृषि विस्तार गतिविधियों में भी किया जा सकता है।

99 प्रतिशत तक सटीक परिणाम

“प्लांट डॉक्टर” विभिन्न फसलों में 88 से 99 प्रतिशत तक सटीक परिणाम उपलब्ध कराता है। उच्च स्तर की सटीकता के कारण यह डिवाइस किसानों को फसल रोगों की त्वरित एवं विश्वसनीय पहचान में सहायता प्रदान कर सकता है, जिससे उपचार के लिये निर्णय अधिक प्रभावी ढंग से लिए जा सकेंगे।

स्मार्ट खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

“प्लांट डॉक्टर” कृषि क्षेत्र में नवाचार और एआई के उपयोग का प्रभावी उदाहरण है। यह तकनीक किसानों को खेत स्तर पर ही रोगों की पहचान और उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक होगी। ऐसे नवाचार कृषि को आधुनिक बनाने, उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के प्रयासों को नई गति प्रदान कर सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एआई आधारित तकनीकों का विस्तार भविष्य की स्मार्ट खेती की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

भोपाल में आइसक्रीम फैक्ट्रियों पर छापेमारी, गंदगी और मिलावट मिलने पर नोटिस जारी

भोपाल

भीषण गर्मी के चलते आइसक्रीम की मांग बढ़ने के साथ-साथ मिलावट की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए कसाटा स्लाइस, पिस्ता टब सहित अन्य आइसक्रीम के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। जिनकी रिपोर्ट आने के बाद मिलावट का खुलासा हो सकेगा।
विभिन्न प्रतिष्ठानों से नामी ब्रांड्स के नमूने जब्त

जानकारी के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग के दो दिवसीय अभियान के तहत शुक्रवार को संभागीय उड़नदस्ता (भोपाल-नर्मदापुरम संभाग) की टीम ने शहर के प्रमुख होलसेलर्स, रिटेलर्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से नामी ब्रांड्स की आइसक्रीम के नमूने जब्त किए हैं।

इन जगहों पर टीम ने दी दबिश

जिनमें जेके रोड, मिनाल रेसीडेंसी स्थित महाकाल इंटरप्राइजेज से हैट्सन एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड (तमिलनाडु) द्वारा निर्मित “फ्लेवर्ड आइसक्रीम कसाटा स्लाइस” और “फ्लेवर्ड आइसक्रीम पिस्ता टब” के नमूने लिए हैं। जबकि कटारा हिल्स स्थित रिलायंस रिटेल लिमिटेड से मशहूर “अमूल आइसक्रीम”, लहारपुर सनी इंटरप्राइजेज से “क्वालिटी वाल्स” की आइसक्रीम के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं।

 

विभिन्न वार्डो में 01 करोड़ 80 लाख रू. के विकास कार्यो का हुआ भूमिपूजन एवं लोकार्पण

रायपुर

नगर पालिक निगम केारबा के 09 वार्डो में आज 01 करोड़ 80 लाख रूपये के विभिन्न विकास कार्यो का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया गया, प्रदेश के उद्योग, श्रम, सार्वजनिक उपक्रम व आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य एवं महापौरमती संजूदेवी राजपूत की अध्यक्षता में इन विकास कार्यो का भूमिपूजन एवं लोकार्पण सम्पन्न हुआ। 

नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्र. 07 अंतर्गत गायत्री स्कूल से आलू गोदाम तक 07 लाख 95 हजार रूपये की लागत से पेवर ब्लाक बिछाने का कार्य, वार्ड क्र. 07 सिंधी मोहल्ला से शारदा गुप्ता घर के सामने 05 लाख रूपये की लागत से मंच निर्माण, वार्ड क्र. 06 अंतर्गत प्रायमरी स्कूल सीतामणी में 01 लाख 86 हजार रूपये की लागत से बालिका शौचालय का निर्माण, वार्ड क्र. 08 मोतीसागरपारा सीतामणी पवन टेंट के पास गोकुलगंज तक 20 लाख रूपये की लागत से सड़क डामरीकरण कार्य, वार्ड क्र. 01 अंतर्गत बालक मिडिल स्कूल कोरबा में 08 लाख 07 हजार रूपये की लागत से अतिरिक्त कक्ष का निर्माण, वार्ड क्र. 05  इंदिरा नगर में 15 लाख रूपये की लागत से सतनामी समाज के सामुदायिक भवन का निर्माण, वार्ड क्र. 14 अमरैयापारा स्वास्थ्य केन्द्र में 07 लाख रूपये की लागत से शौचालय एवं अतिरिक्त सुविधा का कार्य, वार्ड क्र.02 मिशन रोड कोरबा कलचुरी भवन के समीप 25 लाख रूपये की लागत से डोम एवं सामुदायिक भवन निर्माण तथा वार्ड क्र.01 कोरबा जोन अंतर्गत पेट्रोल पम्प के पास 19 लाख 56 हजार रूपये की लागत से ओव्हरब्रिज सौदंर्यीकरण का कार्य कराया जाना हैं, आज इन सभी कार्यो का भूमिपूजन उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन एवं महापौरमती संजूदेवी राजपूत के द्वारा किया गया। इसी प्रकार वार्ड क्र. 14 अमरैयापारा राधाकृष्ण मंदिर के समीप निगम द्वारा निर्मित भवन के ऊपर तल में 10 लाख रूपये की लागत से आर.सी.सी. छत व अन्य विस्तार का कार्य किया गया है, वहीं वार्ड क्र. 06 रानी गेट दशहरा मैदान में स्थित सामुदायिक मंच के पास 04 लाख रूपये की लागत से किचन शेड एवं शौचालय का निर्माण कराया गया है। इसी प्रकार वार्ड क्र.10 अंतर्गत रापाखर्रा बस्ती में 06 लाख रूपये की लागत से मंच का निर्माण, वार्ड क्र. 10 इमलीडुग्गू केबिन के पास 05 लाख रूपये की लागत से मंच का निर्माण तथा वार्ड क्र. 09 सीतामणी में 37 लाख 24 हजार रूपये की लागत से भवन का डिस्मेंटल व नवीन भवन का निर्माण कार्य कराया गया है, जिसका लोकार्पण आज उद्योग मंत्री देवांगन एवं महापौरमती राजपूत के हाथों किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उद्योग मंत्री लखनलाल देवंागन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में राज्य का तेजी विकास हो रहा है, जहाॅं तक कोरबा के विकास का प्रश्न है तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के लगभग ढाई साल के इस कार्यकाल में 1000 करोड़ रूपये के कार्य स्वीकृत किये गये हैं, उन्होने कहा कि कोरबा के विकास के लिये फण्ड की कोई कमी नहीं हो रही है तथा करोड़ों रूपये के विकास कार्य लगभग हर वार्ड में हो रहे हैं। उद्योग मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान हमारी सरकार ने जो वायदें किये थे, उन सभी वायदों को व मोदी की गारंटी को पूरा किया गया हैं, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से समाज के सभी वर्ग के लोगों को लाभान्वित कराया जा रहा है, उद्योग मंत्री देवांगन ने कोरबा के विकास की चर्चा करते हुये कहा कि महापौरमती संजूदेवी राजपूत लगातार सक्रियता के साथ कार्य कर रही हैं, लोगों की समस्याएं सुन रही है,ं उनका निराकरण करा रही हैं, तो दूसरी ओर लगातार विकास कार्य भी निगम क्षेत्र में हो रहे हैं। इस अवसर पर महापौरमती संजूदेवी राजपूत ने अपने  उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किये गये अपने हर वायदें को पूरा कर रही हैं, प्रदेश की 70 लाख बहनों को प्रतिमाह 01 हजार रूपये दिया जा रहा है तथा जो-जो घोषणाएं की गई थी, वे सभी पूरी की जा रही हैं। उन्होने कहा कि विगत 10-11 वर्ष पूर्व से कोरबा विकास में पिछड़ गया था, किन्तु अब निगम क्षेत्र में विकास को तेज गति व सही दिशा मिली हैं, उद्योग मंत्री देवांगन कोरबा के विकास के लिये लगातार कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन एवं महापौरमती संजूदेवी राजपूत की अगुवाई में नगर पालिक निगम कोरबा के सभी 67 वार्डो में बिना किसी भेदभाव के तेजी के साथ विकास कार्य हो रहे है, जिसके लिये मैं उन्हें धन्यवाद देता हूॅं, उन्होने कहा कि वास्तव में कोरबा में व्यापक पैमाने पर विकास कार्य हो रहे हैं तथा लोगों की समस्याएं तेजी के साथ दूर हो रही है। वही पार्षद नरेन्द्र देवांगन ने कहा कि पहले 05-05 लाख रूपये के विकास कार्य स्वीकृत कराने हेतु लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती थी, किन्तु अब करोड़ों रूपये के विकास कार्य बड़ी सरलता के साथ स्वीकृत हो रहे हैं। उद्योग मंत्री देवांगन ने चुनाव के समय जो विकास कार्य संबंधी वायदे किये थे, वे आज सब पूरे हो रहे हैं।

    कार्यक्रम के दौरान  पार्षद नरेन्द्र देवंागन, राधा महंत, उपेन्द्र पटेल, रूबीदेवी सागर, युगल कैवर्त, टामेश अग्रवाल, ईश्वर पटेल, प्रभा टीकम राठौर, धनश्री साहू, सरोज शांडिल्य, मुकुंद सिंह कंवर, रामशंकर साहू, पूर्व पार्षद सुफल दास महंत, मण्डल अध्यक्ष योगेश मिश्रा, वैभव शर्मा, नरेन्द्र पाटनवार, जोन कमिश्नर नीरज कौशिक, सहायक अभियंता पीयूष राजपूत, विनोद नेताम, आकाशवास्तव, लक्ष्य चतुर्वेदी, अनिल यादव, मनोज सिंह राजपूत, आत्माराम गंर्धव, सुशीला सिंह, सुरेन्द्र राजवाडे़, मनीष जायसवाल, राजेन्द्र जायसवाल, राहुल कुमार, सुकेश दलाल, टीकम राठौर, विनोद यादव, अनिल यादव, जे.पी.कौशिक, मनमोहन कौशिक, मोनू आदिले, कुलदीप यादव, बजरंग यादव आदि के साथ काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन 30-31 मई को भोपाल में

भोपाल 

‘मेनस्ट्रीमिंग-एलआईएफईः पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ शहरी आवासों का निर्माण’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में 30 एवं 31 मई को आयोजित किया जाएगा। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, पर्यावरणविदो और नागरिक पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली और उससे संबंधित शहरी विकास के संबंध में विचार-विमर्श करेंगे। सम्मेलन का आयोजन सोसाइटी ऑफ नेचर हीलर्स एंड कंज़र्वेटर्स (एसएनएचसी इंडिया) द्वारा मध्यप्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड के सहयोग से किया जा रहा है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में शहरी जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सस्टेनेबल शहरी विकास, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा होगी। सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच शहरों को अधिक पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और जलवायु-सक्षम बनाने के लिए व्यवहारिक समाधान एवं नीति-आधारित सुझावों को बढ़ावा देना है। एसएनएचसी इंडिया विगत कई वर्ष से पर्यावरण संरक्षण, शहरी जैव-विविधता संवर्धन तथा जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। हाल ही में सम्मेलन के आधिकारिक पोस्टर एवं ब्रोशर का विमोचन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख,  शुभरंजन सेन तथा मध्यप्रदेश राज्य जैव-विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव एवं भारतीय वन सेवा (सेवानिवृत्त) अधिकारी  सुदीप सिंह द्वारा किया गया।

सम्मेलन केवल पर्यावरणीय चुनौतियों पर चर्चा का मंच नहीं होगा, बल्कि नागरिकों को अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित भी करेगा। सम्मेलन का मूल उद्देश्य प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित लाइफ (Lifestyle for Environment) की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाना और उसे व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित करना है।

देशभर से विभिन्न आयु वर्गों, व्यवसायों एवं पृष्ठभूमियों से आने वाले प्रतिभागियों की सहभागिता से यह सम्मेलन ज्ञान-विनिमय, नीति संवाद और सामूहिक कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष एवं सुझाव सतत शहरी नियोजन, जैव-विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

 

पेंच टाइगर रिजर्व में पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम से होगी वन्यजीव संरक्षण की निगरानी

भोपाल

पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थापित की गई अत्याधुनिक पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम (PAWS) तकनीक ने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है। एआई आधारित कैमरा नेटवर्क की सहायता से रिजर्व के कोर क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कर मछली पकड़ने आए एक व्यक्ति को त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया है। पेंच टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित PAWS प्रणाली ने 26 मई को कोर क्षेत्र में मानव गतिविधि का अलर्ट जारी किया। यह क्षेत्र बाघों एवं अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की उच्च उपस्थिति वाला प्रतिबंधित इलाका है। अलर्ट प्राप्त होते ही वन विभाग का मैदानी अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और अवैध रूप से मछली पकड़ने आए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय, छिंदवाड़ा में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

इस सफल कार्रवाई ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग को प्रमाणित किया है। समय पर प्राप्त अलर्ट और त्वरित कार्रवाई से न केवल अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाया गया, बल्कि संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति को भी टालने में सफलता मिली। संबंधित क्षेत्र में बाघों की नियमित आवाजाही रहती है, जिससे किसी भी अनाधिकृत मानव प्रवेश से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

पेंच टाइगर रिजर्व द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली को मैदानी कार्यवाहियों के साथ जोड़कर कोर क्षेत्र की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण तथा मानव सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। पीएडब्ल्यूएस तकनीक भविष्य में भी वन अपराधों की रोकथाम और संरक्षित क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री  मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत

विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण

परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार

परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक

परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

व्यापक अधोसंरचना निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है।

यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।

महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार

आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर विकसित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा पौधरोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकास, संपर्क और समृद्धि का नया अध्याय

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली विकास यात्रा है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, कम ईंधन खपत, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर मध्य भारत के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा।

 

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