ताइवान पर फिर गरजे शी जिनपिंग, पार्टी स्थापना दिवस पर कहा- ‘एकीकरण होकर रहेगा’

बीजिंग 

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर ताइवान को लेकर अपना सख्त रुख दोहराया है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के 105वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा सुलझाना यानी ताइवान को चीन में शामिल करने का पार्टी का ऐतिहासिक मिशन है. उन्होंने कहा कि यह कम्युनिस्ट पार्टी की अटल प्रतिबद्धता है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। 

अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने ताइवान की आजादी की वकालत करने वाले अलगाववादी समूहों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि चीन ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा और किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि नई परिस्थितियों में ताइवान मुद्दे को हल करने की पार्टी की रणनीति को पूरी तरह लागू किया जाएगा। 

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की हर कीमत पर रक्षा करेगा. उन्होंने दोहराया कि नेशनल यूनिफिकेशन का टारगेट हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा और चीन इस दिशा में लगातार कदम उठाता रहेगा। 

मजबूत देश के लिए मजबूत सेना जरूरी- जिनपिंग
अपने भाषण में राष्ट्रपति जिनपिंग ने सेना को भी मजबूत बनाने पर भी जोर दिया. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत देश के लिए मजबूत सेना जरूरी है और सिर्फ शक्तिशाली सैन्य बल ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ताइवान स्ट्रेट में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। 

चीन के आर्थिक ग्रोथ पर क्या बोले शी जिनपिंग?
शी जिनपिंग ने यह भी स्वीकार किया कि चीन इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां अवसरों के साथ-साथ जोखिम और चुनौतियां भी मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि चाहे दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो, रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो या चुनौतियां कितनी भी गंभीर क्यों न हों, चीन पीछे हटने वाला नहीं है। 

राष्ट्रपति जिनपिंग ने पार्टी नेताओं से अपील की कि वे संकट की भावना को मजबूत करें, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाएं और उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाएं. साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी की शुद्धता और मजबूती को नुकसान पहुंचाने वाले हर तत्व को खत्म किया जाएगा। 

बॉबी देओल की आश्रम सीजन 4 की शूटिंग अगस्त से होगी शुरू जल्द।

बॉबी देओल की सुपरहिट वेब सीरीज ‘आश्रम’ एक बार फिर चर्चा में है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘आश्रम सीजन 4’ की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है. बताया जा रहा है कि मेकर्स अगस्त 2026 से नए सीजन की शूटिंग शुरू करेंगे, जिसमें एक बार फिर बाबा निराला की कहानी आगे बढ़ती नजर आएगी.

 फिर साथ नजर आएगी पूरी स्टारकास्ट
Variety India की रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘आश्रम सीजन 4’ की शूटिंग अगस्त 2026 के बीच से शुरू होने वाली है. इस नए सीजन में एक बार फिर डायरेक्टर प्रकाश झा के साथ बॉबी देओल, अदिति पोहनकर और चंदन रॉय सान्याल जैसे मुख्य कलाकार अपनी-अपनी भूमिकाओं में नजर आएंगे.

फिलहाल, मेकर्स शो की तैयारियों में जुटे हुए हैं. हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि सीजन 4 के साथ बाबा निराला की कहानी खत्म होगी या आगे भी जारी रहेगी. लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि शो की शूटिंग और प्रोडक्शन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है.

त्रिधा चौधरी ने बताया कैसे मिला था शो में रोल
‘आश्रम’ में बबिता का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस त्रिधा चौधरी ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें इस सीरीज में काम कैसे मिला. Bollywood Hungama से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक दिन वह सुपरमार्केट में खरीदारी कर रही थीं, तभी उनकी मुलाकात शो की टीम की माधवी भट्ट से हुई.

त्रिधा के मुताबिक, माधवी भट्ट ने उन्हें देखते ही कहा, “त्रिधा, तुमसे यहां मिलकर बहुत खुशी हुई. मुझे लगता है कि तुम्हें यह शो जरूर करना चाहिए.” इसके बाद उन्हें ऑडिशन और आगे के प्रोसेस के जरिए इस मशहूर वेब सीरीज का हिस्सा बनने का मौका मिला.

क्या है ‘आश्रम’ वेब सीरीज की कहानी?
अगर आपने अभी तक ‘आश्रम’ नहीं देखी है, तो बता दें कि यह एक क्राइम ड्रामा वेब सीरीज है. इसमें बॉबी देओल ने ‘बाबा निराला’ का रोल निभाया है, जो खुद को एक भगवान जैसा साधु बताता है. लोग उस पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं, लेकिन असलियत में वह एक धोखेबाज इंसान होता है जो पर्दे के पीछे गलत काम करता है.

जैसे-जैसे बाबा की ताकत बढ़ती है, बड़े-बड़े नेता भी अपने फायदे के लिए उसके पास आते हैं. वहीं पुलिस के कुछ जांबाज अफसर चुपके से इस आश्रम के काले कारनामों का पर्दाफाश करने में जुटे रहते हैं. इस शो का पहला सीजन साल 2020 में आया था और अब फैंस को इसके चौथे सीजन का बेसब्री से इंतजार है. 

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार रहेगा अनिवार्य, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र बोले- आदेश वापस नहीं होगा

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार के आदेश को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है. आदिवासी संगठन, ईसाई संस्थाओं के साथ कांग्रेस ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस घटनाक्रम के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंन्द्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है.

उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार देने के उद्देश्य से मंत्रोच्चार कराने का फैसला लिया गया, लेकिन दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई है. शिक्षा गजेन्द्र यादव का कहना है कि फिलहाल सरकारी स्कूलों में निर्बाध रूप से मंत्रोच्चार चलेगा. मामले में कोर्ट जो फैसला सुनाएगी, उसके अनुसार आगे होगा. सरकार अपने आदेश पर कायम है और अदालत का जो भी फैसला आएगा, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी.

रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र 2026-27 के दौरान रिटायर होने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत दी गई है. वह पूरे शैक्षणिक सत्र तक पढ़ा सकेंगे. इस फैसले को लेकर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र के बीच अगर कोई शिक्षक रिटायर होता है तो वह सत्र के आखिर तक स्कूलों में पढ़ा सकेगा. हालांकि अगर कोई ऐसा नहीं करना चाहता है, तो यह अलग विषय है, लेकिन ज्यादातर लोगों की इस पर सहमती रहती है.

डिजिटल इंडिया से जीवन हुआ है सरल और सुगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

डिजिटल इंडिया से जीवन हुआ है सरल और सुगम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया की 11 वर्षों में हुई प्रगति के लिए माना उनका आभार

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘डिजिटल इंडिया’ की 11 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा का पूर्ण होना गर्व का विषय है। ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते डिजिटल कदमों से देशवासियों का जीवन सरल व सुगम हुआ है। साथ ही देश में समृद्धि के नए द्वार भी खुले है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया की इन 11 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा के लिये आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल यात्रा की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी साझा करते हुए अपने संदेश में बताया कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटल क्रांति ने यूपीआई से 81 प्रतिशत डिजिटल भुगतान सुनिश्चित किया, 2.18 लाख ग्राम पंचायतें भारत नेट से जुड़ीं, 45 हजार से अधिक जीपीयू से ए.आई. मिशन को गति मिली और 2.23 लाख स्टार्ट-अप्स ने 23.36 लाख रोजगार सृजित किए।

 

MP के 2 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 9 साल बाद पदोन्नति का रास्ता साफ; मोहन सरकार ने शुरू की तैयारी

भोपाल 
मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। लगभग नौ वर्षों से लंबित प्रमोशन को लेकर सरकार को महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की कानूनी राय मिलने के बाद प्रशासन ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कर्मचारियों को पदोन्नति न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन मिलेगी। सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन से कानूनी राय ली थी। राय में स्पष्ट किया गया कि इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित जरूर हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने नियमों के क्रियान्वयन पर कोई अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। इसलिए नियम पूरी तरह प्रभावी हैं और इनके तहत पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। 

सभी विभागों और कलेक्टरों को भेजे गए निर्देश
कानूनी राय मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों और सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर राय का परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जल्द ही विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला
कानूनी राय में सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम विनय कुमार बबेले’ मामले सहित हाईकोर्ट के कई आदेशों का उल्लेख किया गया है। इनमें कहा गया है कि केवल नियमों को अदालत में चुनौती दिए जाने भर से सरकार पदोन्नति प्रक्रिया नहीं रोक सकती। हालांकि, सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। 

मौखिक आश्वासन को नहीं माना गया बाध्यकारी
राय में यह भी कहा गया कि जब पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुरुआती सुनवाई हुई थी, तब सरकार की ओर से केवल मौखिक रूप से यह कहा गया था कि सुनवाई पूरी होने तक पदोन्नति नहीं की जाएगी। लेकिन यह आश्वासन किसी न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं बना था, इसलिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता।

नई बेंच करेगी सुनवाई
17 फरवरी 2026 को याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन इस बीच एक न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने और दूसरे के स्थानांतरण के कारण फैसला नहीं आ सका। अब यह मामला नई खंडपीठ के समक्ष फिर से सुना जाएगा। ऐसे में अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है, जिससे सरकार को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का कानूनी आधार मिल गया है।

कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
यदि सरकार कानूनी राय के अनुरूप कार्रवाई करती है तो करीब दो लाख कर्मचारियों की वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि, सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

 

एनएमडीसी ने पहली तिमाही की अब तक की सर्वाधिक मात्रा दर्ज की, 60 एमटी लक्ष्य के लिए गति बनाई

हैदराबाद

 भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक और जिम्मेदार खनिक एनएमडीसी ने स्थापना के बाद से अपनी पहली तिमाही का अबतक का सर्वोच्च उत्पादन और बिक्री दर्ज करके वित्त वर्ष 27 की शुरुआत की है, जिससे भारत की इस्पात मूल्य-श्रृंखला की रीढ़ के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हुई है ।

कंपनी ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान 15.10 एमटी लौह अयस्क का उत्पादन किया, जो वर्ष-दर-वर्ष 26% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि बिक्री 11.75 एमटी हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2% की वृद्धि दर्शाती है । यह रिकॉर्ड तिमाही प्रदर्शन निरंतर घरेलू मांग, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में अपने खनन परिसरों में परिचालन उत्कृष्टता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर कंपनी के निरंतर ध्यान को दर्शाता है ।

तिमाही को और अधिक गतिशील बनाते हुए एनएमडीसी ने 5.15 एमटी के उत्पादन और 3.98 एमटी की बिक्री के साथ जून माह में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया, जो वर्ष-दर-वर्ष क्रमशः 44% और 11% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है । 
इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने कहा, “बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र में भारत का निरंतर निवेश लौह अयस्क की मांग को मजबूत करता है, और एनएमडीसी इस आवश्यकता को पैमाने, दक्षता और जिम्मेदारी के साथ पूरा कर रहा है । हमारी अब तक की सबसे मजबूत पहली तिमाही हमारे संचालन की सुस्थिरता, हमारे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और घरेलू इस्पात उद्योग द्वारा हम पर रखे गए विश्वास को दर्शाती है । जैसे-जैसे हम खनन क्षमताओं का विस्तार करते हैं, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करते हैं और अपने बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करते हैं, हम एक वैश्विक खनन पावरहाउस बनने की अपनी दीर्घकालिक आकांक्षा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं ।”

इस्पात की मजबूत घरेलू मांग और सरकार के बुनियादी ढांचे के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर, एनएमडीसी अपने खनन कार्यों के चरणबद्ध संवर्धन, रणनीतिक खदान विकास और आधुनिक निकासी बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से अपनी क्षमता-विस्तार रोडमैप में तेजी ला रहा है । यह पहलें लगातार कंपनी की उत्पादन क्षमताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे यह अपने महत्वाकांक्षी 100 एमटी क्षमता के दृष्टिकोण पर दृढ़ता से आगे बढ़ रही है, साथ ही भारत के दीर्घकालिक इस्पात विकास का समर्थन करने के लिए लौह अयस्क की एक विश्वसनीय और उच्च-गुणवत्ता वाली आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है । 

रिकॉर्ड तिमाही प्रदर्शन ने वित्त वर्ष 27 के लिए मजबूत गति प्रदान की है, जिससे एनएमडीसी को अपने दीर्घकालिक 100 एमटी विजन की ओर तेजी से आगे बढ़ाते हुए अपने 60 एमटी उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी ।

GST कलेक्शन से सरकार की बल्ले-बल्ले, जून में ₹1.94 लाख करोड़ की रिकॉर्ड वसूली

नई दिल्ली

 सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है। 

कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई? 
कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए। 

GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है।

सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य
जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया।

घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई।
यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है।

खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला।

राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?

    महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.
    कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है। 

    बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया। 
    तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई। 

कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

सीमावर्ती गांवों को बड़ी सौगात, अब छत्तीसगढ़ से मिलेगी बिजली सप्लाई

बीजापुर-सुकमा.

सीमावर्ती गांवों में बिजली व्यवस्था अब नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। घने जंगल और सुरक्षा चुनौतियों के कारण वर्षों से तेलंगाना से बिजली ली जा रही थी। अब छत्तीसगढ़ की ओर से बिजली पहुंचाने का काम तेज कर दिया गया है।

पामेड़ समेत कई गांव अभी तेलंगाना के ग्रिड से जुड़े हुए हैं। विद्युत विभाग ने लाइन विस्तार का कार्य शुरू कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द सभी गांव राज्य के अपने नेटवर्क से जुड़ेंगे। इलाके में लाइनमैन और हेल्पर की स्थायी तैनाती भी की गई है। फाल्ट आने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था बनाई गई है।

नक्सल प्रभाव कम होने से विकास कार्यों को गति मिलने लगी है। राज्य में पर्याप्त बिजली उत्पादन होने के बावजूद खरीद की मजबूरी रही है। नई लाइन बनने के बाद यह निर्भरता समाप्त होने की उम्मीद है। बिजली पहुंचने से सीमावर्ती गांवों के विकास को नई रफ्तार मिलने की संभावना है।

मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बड़वानी और निमाड़ की धरती संतों, संस्कृति और लोक परंपराओं से समृद्ध रही
बाबा खाटू श्याम का त्याग, वीरता-विनम्रता और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाटू श्याम मंदिर तलून बड़वानी के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को किया वर्चुअली संबोधित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बड़वानी और निमाड़ की धरती संतों, संस्कृति और लोक परंपराओं से समृद्ध रही है। भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सही दिशा दिखाई है, उनके मार्गदर्शन से समाज में सद्भाव, संयम और सेवा की भावना विकसित होती है। गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों की सेवा ही सच्ची भक्ति है, समाज तभी आगे बढ़ता है जब धर्म और सेवा साथ चलते हैं, यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। बड़वानी जिले के तलून में बनने वाला खाटू श्याम मंदिर इस गौरवशाली विरासत को मजबूत करेगा और आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तलून में खाटू श्याम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और 21 कुंडीय महायज्ञ कार्यक्रम को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

बाबा खाटू श्याम ने धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए त्याग किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का अवसर केवल मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का पर्व है। बाबा खाटू श्याम की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। बाबा खाटू श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के दु:ख हरने वाले देवता माने जाते हैं। बाबा खाटू श्याम को बर्बरीक का स्वरूप माना जाता है। महाभारत में उन्होंने धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया था। उनका यह अद्वितीय त्याग भारतीय संस्कृति में वीरता, विनम्रता और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। मां नर्मदा जी की परिक्रमा के बाद महंत शशि गिरि जी महाराज के मन में खाटू श्याम मंदिर बनाने का विचार आया और शहर के भक्तों के सहयोग से मंदिर का सपना साकार हुआ।

राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। यह मंदिर भी उस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा खाटू श्याम से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य तथा प्रदेश के विकास और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिए प्रार्थना की। कार्यक्रम में सांसद गजेन्द्र पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष बड़वानी बलवंत पटेल, महंत महामण्डलेश्वर हरि सुरेन्द्र गिरी जी महाराज, अध्यक्ष खाटू श्याम मंदिर बड़वानी शशि गिरि जी महाराज तथा अन्य संतगण, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

 

सिंधु जल विवाद पर बिलावल भुट्टो का भड़काऊ बयान, भारत को दी परमाणु धमकी

इस्लामाबाद

सिंधु जल संधि (इंडस वॉटर्स ट्रीटी) को लेकर भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की है. पाकिस्तान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बिलावल ने कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी को रोकने की कोशिश की गई तो इसे सिर्फ पर्यावरण या कूटनीतिक विवाद नहीं, बल्कि देश के अस्तित्व पर हमला माना जाएग। 

बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु सिद्धांत (न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन) में कुछ ऐसी परिस्थितियां तय की गई हैं, जिनमें देश की अर्थव्यवस्था या जल संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंचाने की कोशिश राष्ट्रीय अस्तित्व के लिए खतरा मानी जाती है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के पानी को रोकना “न्यूक्लियर आर्मागेडन” जैसी स्थिति बनाता है, तो इसका जवाब भी उसी गंभीरता से दिया जाएगा। 

जरदारी ने आरोप लगाया कि भारत पानी को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है. बिलावल ने कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए कोई सौदेबाजी का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है. इसलिए पाकिस्तान अपने पानी, अपनी संधि, अपनी संप्रभुता और अपने भविष्य की रक्षा हर हाल में करेगा। 

बिलावल भुट्टो जरदारी ने आगे और क्या कहा?
बिलावल ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन सम्मान के साथ. हम बातचीत चाहते हैं, लेकिन कानून के दायरे में. हम साथ रहना चाहते हैं, लेकिन किसी के सामने झुककर नहीं.” उन्होंने दावा किया कि अगर कोई यह सोचता है कि पाकिस्तान अपने पानी के अधिकार छोड़ देगा, तो वह पाकिस्तान की जनता को नहीं जानता। 

पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था एक्शन
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित (अबेयंस) कर दिया था. इसके बाद से पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है. पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है, इसलिए इस संधि को वहां बेहद अहम माना जाता है। 

यह पहली बार नहीं है जब बिलावल ने इस मुद्दे पर धमकियों भरा बयान दिया है. 2025 में भी उन्होंने कहा था कि “या तो सिंधु में हमारा पानी बहेगा या उनका खून.” अब एक बार फिर उन्होंने परमाणु सिद्धांत का हवाला देकर संकेत दिया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व से जोड़कर देख रहा है। 

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