शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बस्तर संभाग की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा की

रायपुर

 शिक्षा मंत्री   गजेंद्र यादव ने आज  बुधवार को बस्तर कलेक्टोरेट के प्रेरणा सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के बेहतर एवं प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि बस्तर के समग्र विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों को पुनर्जीवित करने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया।

 उन्होंने प्राथमिक स्तर पर गणित, हिंदी और अंग्रेजी की मजबूत आधारशिला तैयार करने के लिए कैलेंडरवार, शालावार एवं विषयवार समय-सारणी के अनुसार पढ़ाई कराने तथा नियमित रिवीजन टेस्ट आयोजित करने के निर्देश दिए।
बैठक में शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक  ऋतुराज रघुवंशी, कलेक्टर  आकाश छिकारा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन, संभागीय संयुक्त संचालक  एच.आर. सोम सहित सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, बीईओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समीक्षा के दौरान आधार बेस ऐप के माध्यम से कार्यालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति तथा वीएसके ऐप में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की जानकारी ली गई। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा नेटवर्क विहीन स्कूलों की सूची कलेक्टर के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। शिक्षा मंत्री ने अन्य विभागों में पदस्थ शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर वापस भेजने संबंधी निर्देशों के पालन की भी समीक्षा की।

 यादव ने बसाहटवार प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति, नए विद्यालयों की आवश्यकता, बंद स्कूलों को पुनः प्रारंभ करने की कार्ययोजना, बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए पोटा केबिनों में अंतरजिला विद्यार्थियों को प्रवेश देने के निर्देश दिए। उन्होंने वार्षिक परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर विषयवार यूनिट टेस्ट एवं तिमाही परीक्षाएं आयोजित करने तथा कमजोर विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक लेकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जिला एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को दिए।

बैठक में विद्यार्थियों के नामांकन, उपस्थिति, ड्रॉपआउट की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त एवं युक्तियुक्तकरण किए गए पदों, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की कार्ययोजना एवं गैप एनालिसिस की प्रगति की भी समीक्षा की गई। छात्रवृत्ति, गणवेश, पाठ्यपुस्तक वितरण, सरस्वती सायकल योजना, मध्यान्ह एवं न्यौता भोजन, निर्माण कार्यों तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

 शिक्षा मंत्री  यादव  ने स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों को पीएम  स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने, जर्जर विद्यालय भवनों को नियमानुसार ध्वस्त कराने, विद्यालयों की आवश्यक मरम्मत एवं छोटे कार्यों में उपलब्ध बजट का उपयोग करने तथा पाठ्यपुस्तकों का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अवितरित पुस्तकों का संकुल एवं विद्यालय स्तर पर व्यवस्थित रिकॉर्ड संधारित करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बैठक में संभाग में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों एवं योजनाओं की प्रगति से मंत्री को विस्तारपूर्वक अवगत कराया।

बैठक से पूर्व शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कलेक्टोरेट परिसर में सरस्वती सायकल योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को निःशुल्क सायकल एवं उपहार वितरित किए तथा उन्हें मेहनत, लगन और नियमित अध्ययन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने से पहले सरकार ने प्रभावित परिवारों को दिया पक्का आवास

रायपुर 

नया रायपुर के ग्राम नकटी की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच शासन -प्रशासन ने अतिक्रमण प्रभावित 65 परिवारों को बेघर छोड़ने के बजाय उन्हें नया रायपुर अटल नगर के सेक्टर-30 स्थित सर्वसुविधायुक्त ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित परिवारों को केवल पक्का मकान ही नहीं, बल्कि बिजली, पेयजल, सड़क, सीवर, सामुदायिक भवन, उद्यान और अन्य शहरी सुविधाओं से युक्त आवासीय परिसर उपलब्ध कराया जा रहा है। पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो, इसके लिए आठ सदस्यीय समिति भी गठित कर दी गई है।

ग्राम नकटी की शासकीय भूमि पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा  लगभग 38 एकड़ भूमि में से करीब 12 एकड़ भूमि विशेष योजना के लिए उपयोग होगी, जबकि शेष 26 एकड़ भूमि पर मंडल की स्ववित्तीय सामान्य आवास योजना विकसित की जाएगी।

भूमि पर अवैध रूप से निवासरत परिवारों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने 65 पात्र परिवारों की सूची गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को सौंपी है। इस सूची में शामिल परिवारों को 29 जून 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सेक्टर-30 में निर्मित रिक्त ईडब्ल्यूएस आवासों का अस्थायी आवंटन कर दिया गया।

पुनर्वास को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए सरकार ने आवासों को रहने योग्य बनाने का काम भी तेज़ी से शुरू किया। आवासों में ट्यूबलाइट, पंखे और विद्युत व्यवस्था पूरी कर दी गई है ।

सरकार ने पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्यालय के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में उपयुक्त, कार्यपालन अभियंता, संपदा अधिकारी और सहायक अभियंताओं सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र परिवार को निर्धारित आवास मिले और पुनर्वास पूरी तरह पारदर्शी एवं बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हो।

सेक्टर-30 में कुल 1376 ईडब्ल्यूएस (जी+3) आवास निर्मित हैं। इनमें चतुर्थ तल पर उपलब्ध 109 रिक्त आवास पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए हैं। 31.45 वर्गमीटर (338.40 वर्गफीट) क्षेत्रफल वाले इन आवासों के परिसर में पक्की कंक्रीट सड़कें, वॉकिंग ट्रैक, सार्वजनिक उद्यान, सामुदायिक भवन, यूटिलिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीवर नेटवर्क और नियमित जलापूर्ति जैसी सभी आवश्यक शहरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता केवल शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसी सोच के साथ आवासों के आवंटन से लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक हर चरण की निगरानी की जा रही है।

पीडिया में 21 साल बाद गूंजी स्कूल की घंटी, 539 बच्चों के जीवन में लौटी शिक्षा की नई उम्मीद

रायपुर

 मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।
प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत

पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।
बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई

माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।
इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन
जिला शिक्षा अधिकारीराजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य

कलेक्टरविश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

बदलते बस्तर की नई पहचान

पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

डीजीपी कैलाश मकवाणा से यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव शोको इशिकावा ने की सौजन्‍य भेंट

भोपाल 

महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। इसी क्रम में आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव सु शोको इशिकावा ने सौजन्‍य भेंट की। इस अवसर पर महिला सुरक्षा, जेंडर समानता, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराधों की रोकथाम, नशा मुक्ति, बालिकाओं की सुरक्षा तथा पुलिस-समुदाय सहभागिता को सुदृढ़ बनाने जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर यूएन विमन इंडिया की डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सु जोयात्री रे, पीएसओ टू डीजीपी डॉ विनीत कपूर तथा एसओ टू डीजीपी  मलय जैन उपस्थित थे।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बालिका सुरक्षा के क्षेत्र में संचालित विभिन्न अभियानों, नवाचारों एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ समाज में विश्वास, सहभागिता एवं सुरक्षा का वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को निरंतर सशक्त बना रही है।

उन्‍होंने कहा कि महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा बहुआयामी अभियान संचालित किए जा रहे हैं। ऑपरेशन मुस्कान एवं विशेष ऑपरेशन मुस्‍कान के माध्यम से गुमशुदा बच्चों एवं बालिकाओं का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों से मिलाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। वहीं ‘सृजन’ अभियान के अंतर्गत बालक-बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, जागरूकता एवं सशक्तिकरण से जोड़कर उन्हें आत्मविश्वासी बनाने के साथ-साथ बाल विवाह, बाल हिंसा, मानव तस्करी तथा महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक संरक्षण एवं सशक्तिकरण का भी प्रभावी मॉडल विकसित कर रही है।

बैठक में महिलाओं के लिए सामुदायिक पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। इस दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, शिकायतों के त्वरित एवं संवेदनशील निराकरण, सुरक्षित सार्वजनिक वातावरण के निर्माण, पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने तथा महिला सहभागिता आधारित सामुदायिक पहलों को और सुदृढ़ करने के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए गए।

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस महिला एवं बालिका सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील, उत्तरदायी एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं एवं नागरिक संगठनों के सहयोग से महिला सुरक्षा एवं लैंगिक समानता के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक ने प्रदेशव्यापी “सेफ क्लिक 2.0” साइबर जागरूकता अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि डिजिटल युग में महिलाओं, बालिकाओं, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी व्यवहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है, जिससे नागरिक डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग कर सकें।

उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस के “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान की भी जानकारी साझा की। इस अभियान के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों एवं समुदाय को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। अभियान में पुलिस के साथ शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव सु शोको इशिकावा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों की सराहना की। उन्होंने शक्ति कैफे जैसी पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता आधारित पहल, थानों में महिलाओं के लिए विकसित संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण तथा जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग के लिए अपनाए गए मध्यप्रदेश पुलिस मॉडल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग को प्रशिक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है, जिससे नागरिक-केंद्रित और अधिक संवेदनशील पुलिस व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सके।

 

आपदा प्रबंधन में जेंडर संवेदनशीलता की दिशा में मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास

भोपाल

आपदा प्रबंधन को अधिक समावेशी, संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश का पहला जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन मॉडल विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा यूएन वूमेन (UN Women) के मध्य’प्रवाह फेज-2’कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु मंगलवार को होमगार्ड मुख्यालय, भोपाल में सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू होमगार्ड महानिदेशकश्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तवकी गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोकोइशिकावातथा होमगार्ड एवं राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की ओर से उप पुलिस महानिरीक्षकश्री अमित सांघीने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

‘प्रवाह फेज-2’ का उद्देश्य आपदा प्रबंधन व्यवस्था में महिलाओं, बालिकाओं एवं अन्य संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना है। इसके अंतर्गत ‘प्रवाह फेज-1’ में विकसितजेंडर रिस्पॉन्सिवडिजास्टर रिस्क रिडक्शन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी)का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। साथ ही वर्तमान मानसून एवं अन्य आपदाओं के दौरान इस एसओपी के व्यावहारिक परिणामों का मूल्यांकन कर भविष्य के लिए और अधिक प्रभावी रणनीति एवं कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने आपदा प्रबंधन में महिलाओं की आवश्यकताओं और सहभागिता को व्यवस्थित रूप से शामिल करते हुए विशेष एसओपी तैयार की है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में महिलाओं के विस्थापन, राहत, बचाव एवं पुनर्वास के दौरान आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह एसओपी रेस्क्यू टीमों को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी ढंग से कार्य करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी। वर्तमान मानसून के दौरान इसके प्रभावों का परीक्षण कर आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे।

यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव  शोकोइशिकावा ने कहा कि आपदाएं महिलाओं, बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों को असमान रूप से प्रभावित करती हैं। इसलिए आपदा प्रबंधन में जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार एवं होमगार्ड विभाग की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगी। यूएन वूमेन महिलाओं के नेतृत्व को सशक्त बनाने तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण की प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाने के लिए इस साझेदारी के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

‘प्रवाह फेज-2’ के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, सहभागिता तथा विशेष आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके परिणामस्वरूप राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली अधिक संवेदनशील, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित बनेगी तथा भविष्य में जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

 

PM मोदी और शहबाज शरीफ को लिखी 100 हस्तियों की चिट्ठी पर BJP का हमला, जानें किन नेताओं के नाम शामिल

 नई दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से शांति और कूटनीतिक संबंध बहाल करने की मांग को लेकर एक नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 100 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी नेताओं व सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है।

हालांकि, इस चिट्ठी के सामने आते ही सत्तारूढ़ बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इन नेताओं को ‘आतंकी समर्थक’ करार दिया है। इस अपील का समन्वय नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ के प्रमुख ओ.पी. शाह ने किया है। चिट्ठी में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से दक्षिण एशिया में शांति, बातचीत और सहयोग की बहाली के लिए सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

चिट्ठी में की गई हैं ये मुख्य मांगें

  • पत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाने की वकालत की गई है।
  •     पूर्ण कूटनीतिक संबंधों को फिर से बहाल करना और नई दिल्ली व इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति करना।
  •     सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करना और जम्मू-कश्मीर समेत सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत शुरू करना।
  •     2004-2007 के कश्मीर फ्रेमवर्क पर पुनर्विचार करते हुए दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए सैन्य वापसी।
  •     साथ ही व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर को फिर से खोलना।
  •     श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, लाहौर-दिल्ली बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू करना।
  •     कारगिल-स्कर्दू मार्ग पर यात्रा की अनुमति देना।
  •     कमर्शियल उड़ानों के लिए दोनों देशों का हवाई क्षेत्र फिर से खोलना और मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस देना।
  •     करतारपुर साहिब कॉरिडोर और नीलम घाटी (पाकिस्तान) स्थित शारदा पीठ को फिर से खोलना। मीडिया और पत्रकारों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना।

किन प्रमुख चेहरों ने किए हस्ताक्षर?
भारत से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पूर्व रॉ चीफ ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, प्रो. सैफुद्दीन सोज और प्रो. अपूर्वानंद आदि ने इस पर साइन किए हैं।

पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी, शिक्षाविद परवेज हुदभॉय, पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर, बीना सरवर, सलीमा हाशमी और ए.एच. नय्यर आदि ने साइन किए हैं।

‘ पहले आतंकियों का समर्थन बंद करे पाकिस्तान’
प्रेम शुक्ला ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के ‘पाकिस्तान से संवाद’ वाले बयान पर साफ कहा, ‘पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन करना बंद कर दे तो बातचीत शुरू हो जाएगी.’ हाल ही में RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को ‘पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिएं.’ हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के प्रति कड़े रुख में कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए। 

भारत-पाक के 117 प्रमुख लोगों ने लिखा ओपन लेटर
भारत-पाक के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग को लेकर भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख लोगों ने संयुक्त शांति प्रस्ताव के तहत पत्र पर साइन किया है. इसमें भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा और हुमायूं कबीर समेत 61 हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं. डिजिटल फॉर्मेट पर नेताओं ने हस्ताक्षर किया है। 

सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखे गए ओपन लेटर में भारत-पाक के बीच बातचीत, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग की है. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक आवाजाही को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है। 

ये रहे 61 भारतीय जिन्होंने लेटर पर साइन किए हैं- 

क्रमांक साइन करने वाले भारतीयों के नाम
1. डॉ. फारूक अब्दुल्ला
2. मीरवाइज उमर फारूक
3. महबूबा मुफ्ती
4. मणिशंकर अय्यर
5. प्रो. मनोज झा
6. ए.एस. दुलत
7. जवाहर सरकार
8. मोहम्मद यूसुफ तारिगामी
9. आगा सैयद हसन मोसावी
10. शाहिद सिद्दीकी
11. रीता मनचंदा
12. संदीप पांडे
13. प्रो. सैफुद्दीन सोज़
14. आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी
15. इमरान अहमद हसन
16. डॉ. जॉन दयाल
17. ललिता रामदास
18. हुमायूं कबीर
19. जयंत घोषाल
20. प्रो. अपूर्वानंद
21. मुजफ्फर शाह
22. दया सिंह
23. एम.एम. अंसारी
24. डॉ. फुआद अली हलीम
25. जफर मिन्हास
26. बिलाल गनी लोन
27. अरविंद सहारन
28. आई.डी. खजूरिया
29. बी.एल. सराफ
30. फादर सुनील रोसारियो
31. सैयद इरफान शेर
32. डॉ. मुस्लिम जान
33. गोपा मुखर्जी
34. डॉ. रमेश रैना
35. कुमार प्रशांत
36. एन.डी. पंचोली
37. प्रह्लाद गोयनका
38. सुभाष कालरा
39. रीता चक्रवर्ती
40. रूबी अरुण
41. के.एस. सुब्रमण्यम
42. सज्जाद अजहर
43. बलकार सिंह
44. सैयद सलीम गिलानी
45. बिमल शर्मा
46. मालती सुब्रमण्यम
47. अनिल हेब्बार
48. अमिताव दत्ता
49. डॉ. सुनीलम
50. सलीम इंजीनियर
51. सुजादा बशीर
52. बिन्नी यादव
53. रुमान मेक्की
54. तौसीफ अहमद खान
55. संतोष खजूरिया
56. एडवोकेट यासमीन
57. राकेश यादव
58. कुणाल बनर्जी
59. रोहिणी सिंह
60. सुनील वट्टल
61. ओ.पी. शाह

मीरवाइज ने किया बचाव- जब अमेरिका-ईरान बात कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस अपील का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को भी संवाद करना चाहिए। उनका तर्क है कि युद्ध से विवाद हल नहीं होते, केवल बातचीत ही कश्मीर समेत अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान कर सकती है।

 बीजेपी का करारा प्रहार- ‘शहीदों का अपमान कर रहे हैं ये नेता’

इस कदम के बाद बीजेपी ने हस्ताक्षरकर्ताओं पर करारा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इन नेताओं को ‘आतंक का समर्थक’ बताते हुए इनकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब ‘पहलगाम आतंकी हमले’ के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त नीति अपना रहा है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा। पूनावाला ने सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने के भारत के फैसले को याद दिलाते हुए कहा कि ‘नया भारत’ आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना और आतंक के पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय, ये नेता बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, “ये वही लोग हैं जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए थे। इनका यह नया कदम देश के शहीदों और सशस्त्र बलों का सीधा अपमान है।”

 

TMC के तीनों गुटों पर शुभेंदु अधिकारी का सियासी वार, एक ही दिन में मिले तीन बड़े झटके

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की कमान अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हाथों में है, सरकार बदलने के बाद तृणमूल कांग्रेस इतिहास के अपने सबसे बड़े संगठनात्मक और राजनीतिक संकट से गुजर रही है. महज दो महीनों के भीतर 28 साल पुरानी टीएमसी न सिर्फ सत्ता से बाहर हुई, बल्कि तीन अलग-अलग धड़ों में बंट गई है. अब तीनों ही गुट शुभेंदु सरकार के निशाने पर है। 

टीएमसी में टूट का आगाज चुनाव से पहले ही हो गया था. हुमांयू कबीर टीएमसी से अलग होकर अपनी पार्टी बना लगी थी और दो सीटों से चुनाव जीतने में सफल रहे थे. चुनाव नतीजे के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों और काकोली घोष की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसद ने ममता बनर्जी से अलग राह चुन ली. एक धड़ा ममता बनर्जी के वफादार का भी है। 

बंगाल की सत्ता पर काबिज बीजेपी और उसकी अगुवाई कर रहे सीएम शुभेंदु अधिकारी की सरकार के निशाने पर इन दिनों टीएमसी के तीनों धड़े हैं. ममता बनर्जी का वफादार खेमा हो या फिर बागी गुट. इसके अलावा हुमायूं कबीर पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। 
 
ममता बनर्जी गुट पर सरकार की टेंढी नजर
विधानसभा चुनाव की शिकस्त और पार्टी में हुई ऐतिहासिक टूट (80 में से करीब 60 विधायकों का साथ छोड़ना) के बाद ममता बनर्जी अपने बचे-खुचे वफादार नेताओं के साथ सड़क पर संघर्ष कर रही हैं. हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा के पटल से साफ एलान कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस अब एक बंद अध्याय है और ममता कभी सत्ता में नहीं लौटेंगी। 

शुभेंदु सरकार अब पूरी तरह ममता बनर्जी गुट को सियासी रूप से पूरी तरह पंगु बनाने के लिए 2011 से 2026 के शासनकाल के दौरान हुए ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’, भाई-भतीजावाद और राशन-भर्ती घोटालों की जांच को तेज कर रही है, शाहजहां शेख, शौकत मोल्ला और जहांगीर खान जैसे ममता के करीबी और बाहुबली नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसना सीधे तौर पर ममता गुट की रीढ़ तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है। 

कोलकाता की राजनीति में21 जुलाई का ‘शहीद दिवस’ की अपनी सियासी अहमियत है. टीएमसी के लिए यह केवल एक तारीख नहीं, बल्कि पार्टी की आत्मा है. ममता बनर्जी का आधिकारिक खेमा इस दिन रैली करने की तैयारी की है, लेकिनप्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू कर कार्यक्रम के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इसके चलते ममता खेमे के शक्ति प्रदर्शन की तैयारी पर पुलिस की सख्ती ने पानी फेर दिया। 

ऋतब्रत बनर्जी की खिलाफ सरकार गुई सख्त
मई 2026 में दिल्ली के बंगा भवन में सीएम शुभेंदु अधिकारी से एक ‘आकस्मिक मुलाकात’ के बाद टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी  ने पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था. अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से नाराज ऋतब्रत बनर्जी ने 60 विधायकों को अपने साथ मिला लिया और विधानसभा में खुद को ‘असली टीएमसी’ बताते हुए विपक्ष के नेता बन गए। 

हालांकि, शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी की बगावत से शुभेंदु को फायदा हुआ, लेकिन अब ऋतब्रत गुट सरकार के निशाने पर है. हाल ही में जब शुभेंदु सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता(UCC) विधेयक की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा, तो ऋतब्रत बनर्जी  के नेतृत्व वाले इस बागी गुट ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। 

सीएम शुभेंदु ने साफ कर दिया है कि सरकार के एजेंडे में बाधा डालने वाले किसी भी गुट को बख्शा नहीं जाएगा. ममता बनर्जी की तरह ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई वाले बागी गुट ने शहीद दिवस पर रैली करने की योजना बनाई थी. इसे बागी गुट एक नई शुरुआत के तौर पर पेश करना चाहता है, लेकिन शुभेंदु सरकार ने शहीद दिवस पर होने वाले कार्यक्रम के लिए इजाजत नहीं दिया. इस तरह ऋतब्रत बनर्जी के गुट के सियासी अरमानों पर पानी फिर गया है। 

हुमायूं कबीर के खिलाफ कसता कानूनी शिकंजा
टीएमसी से निलंबित होने के बाद ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) बनाने वाले नौदा के विधायक हुमायूं कबीर इस समय शुभेंदु सरकार के सबसे तीखे निशाने पर हैं. मुर्शिदाबाद में एक जनसभा के दौरान हुमायूं कबीर ने भाजपा नेतृत्व को धमकी देते हुए कहा था कि जिस दिन मैंने हजारों मुस्लिमों को एकजुट कर सड़कों पर उतार दिया, उस दिन इतना कड़ा प्रहार करूंगा कि भाजपा का झंडा उठाने वाला कोई नहीं बचेगा। 

हुमांयू कबीर के भड़काऊ और सांप्रदायिक बयान पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब बहुत हुआ, ऐसे तत्वों को स्थायी सबक सिखाने का समय आ गया है. शुभेंदु सरकार ने कबीर के खिलाफ रेजिनगर और शक्तिपुर थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं. शुभेंदु ने चेतावनी देते हुए कि यह हुमायूं कबीर का आखिरी ऐसा बयान होगा और राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए गुंडागर्दी को पूरी तरह कुचल दिया जाएगा। 
 
बंगाल में हुमायूं कबीर जैसे नेताओं पर भड़काऊ बयानों के लिए कानूनी चाबुक चलाकर,शुभेंदु सरकार ने यह साफ संदेश दे दिया है कि टीएमसी का कोई भी धड़ा यदि उनके एजेंडे के आड़े आया, तो सियासी अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। 

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच, वार्षिक आयोजनों के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच, वार्षिक आयोजनों के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित

15 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन, शास्त्रीय संगीत, लोककला, नाट्य एवं वाद्ययंत्र प्रस्तुतियों के लिए होगा चयन

रायपुर
 छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान देने और लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2026-27 के वार्षिक सांस्कृतिक आयोजनों के लिए कलाकारों एवं    सांस्कृतिक दलों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। विभाग द्वारा आयोजित इन प्रतिष्ठित आयोजनों के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा, वहीं विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को भी नई गति मिलेगी।

संस्कृति विभाग प्रतिवर्ष प्रदेशभर में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन करता है, जिनमें शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, लोकसंगीत, लोकनृत्य, नाट्य प्रस्तुतियां तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां शामिल रहती हैं। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 के लिए पावस प्रसंग (शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य), रंगतरंग वाद्ययंत्र संगम, रंगपरब नाट्य श्रृंखला तथा लोकरंग पर्व के लिए कलाकारों का चयन किया जाएगा।

विशेष रूप से लोकरंग पर्व के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं एवं लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा, गम्मत, सुआ, करमा, पंथी, बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत, संस्कार गायन सहित अन्य पारंपरिक लोकविधाओं में दक्ष कलाकार आवेदन कर सकते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य प्रदेश की  लोक-सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और कलाकारों को सशक्त मंच उपलब्ध कराना है।

आवेदन करने वाले कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों का चिन्हारी पंजीकरण होना आवश्यक है तथा समूह प्रस्तुति के इच्छुक कलाकार निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, द्वितीय तल, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल व्यवसायिक परिसर, सेक्टर-27, नवा रायपुर स्थित कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। निर्धारित ई-मेल Sanskriti.rajbhasha@gmail.com के माध्यम से भी आवेदन भेजने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

संस्कृति विभाग ने आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 निर्धारित की है। विभाग ने प्रदेश के पात्र कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत कर इन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता सुनिश्चित करने तथा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की अपील की है।

सुकमा में विकसित भारत जी-राम-जी (VBGRAM-G) अभियान की शुरुआत

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में सुकमा जिले में विकसित भारत जी-राम-जी (VBGRAM-G) अभियान का शुभारंभ किया गया। शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में जिले के सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कलेक्टरअमित कुमार तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारीमुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य “विकसित गांव से विकसित भारत” के संकल्प को साकार करना और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति देना है।
125 दिनों तक मिलेगा रोजगार

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को योजना की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी गई। बताया गया कि योजना के तहत पात्र परिवारों को अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही बेरोजगारी भत्ता का भी प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण श्रमिकों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए दैनिक मजदूरी 262 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।

ग्रामीण विकास के प्रमुख कार्यों पर रहेगा फोकस

योजना के अंतर्गत जल संरक्षण एवं जल संवर्धन, ग्रामीण अधोसंरचना का विकास, आजीविका के नए अवसर, बाढ़ प्रबंधन तथा अन्य जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
ग्राम पंचायतों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजनाओं के प्रभावी संचालन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से गांवों का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

इस अवसर पर जानकारी दी गई कि 2 जुलाई 2026 को विकसित भारत जी-राम-जी (VBGRAM-G) योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय कार्यक्रम के अवसर पर सुकमा जिले में भी जिला स्तरीय आयोजन किया जाएगा। यह अभियान ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न

रायपुर

 मुख्य सचिवविकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ सचिवों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।  बैठक में ’ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (डीरिग्युलेशन एंड फैसिलिटेशन) बिल, 2026’ के प्रारूप तथा निवेश संवर्धन, डिजिटल सुविधा और व्यवस्थित नियामकीय सुधारों के लिए तैयार किए गए परिचालन ढांचे पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने, निवेश को प्रोत्साहित करने तथा नागरिकों को शासकीय सेवाएं सुगमता से उपलब्ध कराने के उपायों की समीक्षा की गई। परिचालन ढांचे के अंतर्गत ’इन्वेस्ट छत्तीसगढ़’ के माध्यम से  प्रशासनिक व्यवस्था , पांच प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित कार्यप्रणाली, 180 शासकीय सेवाओं का सरलीकरण तथा नौ विभागों को इस व्यवस्था से जोड़ने संबंधी प्रावधानों पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ प्रक्रियाओं के सरलीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार तथा निवेशकों के लिए सुगम, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था से राज्य में निवेश को गति मिलेगी, उद्योगों के लिए कारोबार करना और अधिक सहज होगा तथा नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, त्वरित एवं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवअविनाश चम्पावत, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिवरजत कुमार, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिवअंकित आनंद, मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिवमुकेश कुमार बंसल, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu