बेतवा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की तैयारी, भोपाल समेत 3 जिलों में बनेगी साइंटिफिक प्लानिंग

भोपाल
मध्यप्रदेश सरकार नमामि गंगे मिशन के तहत बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने जा रही है। सरकार का फोकस केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजना के जरिए पूरे नदी तंत्र को पुनर्जीवित किया जाएगा।

इसके लिए भोपाल में अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर पूरे प्रोजेक्ट की योजना तैयार कराई जा रही है। बेतवा नदी के लिए व्यापक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए इंजीनियरों को तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

बेतवा जहां सबसे ज्यादा प्रदूषित, वहीं से होगी संरक्षण की शुरुआत
मध्यप्रदेश में नमामि गंगे परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बेतवा नदी का उद्गम रायसेन जिले के जंगलों में स्थित झिरी नामक स्थान पर है। लेकिन उद्गम के बाद भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों में यह नदी प्रदूषण का शिकार हो रही है।

भोपाल की कलियासोत नदी और बेतवा का संगम भोजपुर के पास होता है, जहां नदी की स्थिति काफी खराब है। वहीं मंडीदीप के पास बेतवा का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढक गया है। ऐसे में इन तीनों जिलों में बेतवा के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है।

सीवेज ट्रीटमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस
भोपाल की कलियासोत नदी से लेकर बेतवा नदी में मिलने वाले सीवेज को रोकने और प्रदूषण कम करने के लिए तीनों जिलों के नगरीय निकायों के इंजीनियरों को विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मंडीदीप में उद्योगों का प्रदूषित पानी सीधे बेतवा में

मंडीदीप में उद्योग स्थापित होने के बाद से अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है। इसके कारण उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे बेतवा नदी में मिल रहा है। इसका असर नदी के साथ-साथ आसपास की खेती पर भी पड़ रहा है। सरकार की कोशिश है कि बेतवा की धारा निर्मल और अविरल बनाई जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि नमामि गंगे भारत सरकार का एकीकृत नदी संरक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। मध्यप्रदेश का गंगा बेसिन 34 जिलों और 283 शहरी निकायों तक फैला है। इसमें चंबल, बेतवा, सिंध, काली सिंध, धसान, केन, क्षिप्रा, गंभीर, टोंस, सोन और पावती जैसी 11 प्रमुख नदियां शामिल हैं।

बेतवा पर बढ़ा प्रदूषण का दबाव
प्रस्तुति में बताया गया कि बेतवा नदी इस समय अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, नदी तटों के कटाव और पर्यावरणीय प्रवाह में कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और टिकाऊ डीपीआर तैयार की जाएगी।

डीपीआर में शामिल होंगे ये प्रमुख बिंदु
डीपीआर में केवल सीवेज प्रबंधन ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट जल एवं ठोस कचरा प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाना, नदी तटों का पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र का उपचार और जनभागीदारी जैसे विषय भी शामिल किए जाएंगे।

अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
सरकार का मानना है कि डीपीआर तैयार करने में क्षेत्रीय अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसलिए उन्हें डेटा संग्रह, विभिन्न विभागों के समन्वय, हितधारकों से परामर्श और परियोजना क्रियान्वयन की तकनीकी जानकारी दी जा रही है, ताकि नमामि गंगे मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

प्रदेश में 824.57 करोड़ की आठ परियोजनाएं पहले से मंजूर
नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण में मध्यप्रदेश को 824.57 करोड़ रुपए की आठ परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन और नागदा में सीवेज प्रबंधन, चित्रकूट की मंदाकिनी, मंदसौर की शिवना, ग्वालियर की मोरार नदी से जुड़े कार्य तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की चार प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण की परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी योजनाओं को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से लागू किया जा रहा है।

नमामि गंगे मिशन (मध्यप्रदेश) की प्रमुख जानकारी
भारत सरकार ने वर्ष 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। पहले चरण में गंगा किनारे के पांच राज्यों में सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और अन्य परियोजनाएं शुरू की गई थीं। दूसरे चरण में गंगा की सहायक नदियों वाले राज्यों, जिनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है, में नदी प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाएं स्वीकृत की गईं।

मध्यप्रदेश में स्वीकृत परियोजनाएं
मध्यप्रदेश में कुल आठ परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनकी कुल लागत 824.57 करोड़ रुपए है। इनमें तीन परियोजनाएं नगरीय विकास एवं आवास विभाग (इंदौर, उज्जैन और नागदा) को सीवेज एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिली हैं। एक परियोजना चित्रकूट (सतना) में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण के लिए है।

एक परियोजना मंदसौर में शिवना नदी के पर्यावरण उन्नयन के लिए है। दो परियोजनाएं ग्वालियर में मोरार नदी के पुनर्जीवन और रिवर फ्रंट विकास के लिए हैं। एक परियोजना मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए है। इनमें सबसे बड़ी परियोजना इंदौर की कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना है, जिसकी स्वीकृत लागत 511.15 करोड़ रुपए है।

क्रम परियोजना लागत (करोड़ रु.)
1 ग्वालियर में मोरार नदी का पुनर्जीवन एवं विकास 39.24 (स्वीकृति), 22.19 (अवार्ड) + 18% GST
2 मोरार नदी रिवर फ्रंट विकास (फेज-II), ग्वालियर 32.44
3 मंदसौर में शिवना नदी का पर्यावरण उन्नयन 28.91 (स्वीकृति), 27.12 (अवार्ड)
4 चित्रकूट (सतना) में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण 31.88 (स्वीकृति), 26.22 (अवार्ड)
5 इंदौर में कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण हेतु अतिरिक्त विकेन्द्रीकृत STP 511.15 (स्वीकृति), 416.46 (अवार्ड)
6 उज्जैन में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य 101.57
7 नागदा में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य 65.98
8 MPPCB प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण 13.40

 

 

 

EV Charging Alert: भारत के 45% घर इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के लिए अनफिट, लापरवाही से लग सकती है आग

 नई दिल्ली

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत के लगभग 45% घरों को सुरक्षित रूप से EV चार्ज करने के लिए अपने इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है। 

यह जानकारी ‘द नेट-ज़ीरो ट्रांज़िशन स्टार्ट्स एट होम: इनेबलिंग EV-रेडी रेजिडेंसेस इन इंडिया’ नाम की एक नई रिपोर्ट से मिली है. यह रिपोर्ट भारत के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों के अनुभवों पर आधारित है, इसके लिए स्वतंत्र घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, झुग्गी-बस्तियों और किराए के मकानों में लगे 80,000 से अधिक घरेलू EV चार्जर्स के डेटा का अध्ययन किया गया है। 

ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सरकारें EV को अपनाने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं, जैसे दिल्ली सरकार ने जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-सीएनजी तिपहिया वाहनों और अप्रैल 2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है। 

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल 55 प्रतिशत संभावित EV खरीदारों के पास ही घरेलू चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, जबकि आवासीय चार्जिंग ही इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का सबसे प्राथमिक माध्यम है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में EV से जुड़ी बिजली की खपत साल 2024 में कुल राष्ट्रीय मांग के महज 0.2 प्रतिशत से बढ़कर साल 2035 तक लगभग 6 प्रतिशत हो जाएगी। 
 
पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है, लेकिन घरों में चार्जिंग की सुविधा अभी भी बेहद असमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित और भरोसेमंद चार्जिंग के लिए हर घर को एक न्यूनतम मानक पूरा करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोग सामान्य पावर सॉकेट, अस्थायी एक्सटेंशन केबल और साझा बिजली कनेक्शन जैसे असुरक्षित तरीकों पर निर्भर हैं। 

असुरक्षित चार्जिंग से जुड़े बड़े खतरे
शोधकर्ताओं ने कड़ी चेतावनी दी है कि घरेलू स्तर पर किए जाने वाले इस तरह के अनौपचारिक या जुगाड़ू चार्जिंग इंतजामों से आग लगने का भारी खतरा रहता है, साथ ही इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और महंगे उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. जब इन सामान्य सर्किट्स पर अत्यधिक लोड पड़ता है, तो इससे वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव, तारों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना , ट्रांसफार्मर का खराब होना और स्थानीय इलाकों में बिजली गुल होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसके अलावा, असुरक्षित तरीके से की जाने वाली चार्जिंग से न सिर्फ वाहन के चार्ज होने की निरंतरता प्रभावित होती है, बल्कि गाड़ी की बैटरी भी समय से पहले तेजी से खराब हो सकती है। 

85% भारतीयों को AI पर भरोसा, भविष्य को लेकर भी बेहद आशावादी: रिपोर्ट

नई दिल्ली 
 भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें।

अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे।

उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे।

अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

सिंधु जल विवाद पर भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान को एक बूंद पानी नहीं देने की दोहराई बात

नई दिल्ली

सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है. केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि 23 अप्रैल 2025 से सिंधु जल संधि को स्थगित (Abeyance) रखा गया है और यह फैसला तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और स्थायी रूप से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता. ऐसे में पाकिस्तान की ओर से लगातार उठाई जा रही आपत्तियों और पत्राचार का भारत की नीति पर फिलहाल कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। 

इसी बीच पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल अप्रैल से अब तक भारत के अपने समकक्ष को चिनाब नदी के जल प्रवाह में उतार-चढ़ाव को लेकर चार पत्र लिखे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला. उनका कहना है कि सबसे हालिया पत्र उन्होंने सोमवार रात भेजा, जिसमें चिनाब के जलस्तर में महत्वपूर्ण बदलाव पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। 

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में शाह ने कहा कि चिनाब नदी के प्रवाह में हो रहा उतार-चढ़ाव केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि रणनीतिक जोखिम है. उनके मुताबिक नदी के जल प्रवाह से जुड़ा डेटा साझा न होने से पाकिस्तान के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि बदलाव प्राकृतिक कारणों से हुआ है या फिर ऊपरी हिस्से में किसी मानवीय गतिविधि के कारण। 

हालांकि भारत की घोषित नीति बिल्कुल स्पष्ट है. 23 अप्रैल 2025 को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह फैसला लिया था कि 1960 की सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखा जाएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से बंद नहीं करता. भारत का कहना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। 

क्या है सिंधु जल संधि
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया. संधि के तहत दोनों देशों के बीच जल प्रवाह से जुड़ा डेटा साझा करने, निरीक्षण करने और विवादों के समाधान के लिए स्थायी तंत्र भी बनाया गया था. लेकिन संधि स्थगित होने के बाद दोनों देशों के बीच यह संस्थागत संवाद लगभग ठप पड़ गया है। 

पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त का कहना है कि पिछले एक वर्ष में उनके देश ने संधि के तहत डेटा साझा करना जारी रखा, बैठकों का प्रस्ताव भेजा, निरीक्षण और परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी मांगी, लेकिन भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. उन्होंने दावा किया कि मई 2022 के बाद दोनों देशों के आयुक्तों की कोई बैठक नहीं हुई और अगस्त 2023 के बाद कई महत्वपूर्ण संधि संबंधी पत्रों का भी जवाब नहीं आया। 

शाह ने यह भी कहा कि किसी भी निचले प्रवाह वाले देश (डाउनस्ट्रीम स्टेट) के लिए जल प्रवाह का नियमित डेटा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिचालन आवश्यकता है. उनके अनुसार यदि जानकारी नहीं मिलेगी तो यह तय करना मुश्किल होगा कि नदी के प्रवाह में बदलाव प्राकृतिक है या फिर ऊपरी हिस्से में किसी परियोजना के संचालन का परिणाम। 

पाकिस्तान जता रहा चिंता
हाल के महीनों में चिनाब नदी के जल प्रवाह में बदलाव को लेकर पाकिस्तान कई बार चिंता जता चुका है. वहीं भारत के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकार पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के अधिकतम उपयोग की दिशा में काम कर रही है. भारत लंबे समय से यह भी कहता रहा है कि संधि के तहत उसे पश्चिमी नदियों पर मिलने वाले अधिकारों का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है और अब वह अपने वैध अधिकारों के अनुरूप परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर देगा। 

पाकिस्तान लगातार मांग कर रहा है कि भारत एकतरफा तरीके से नदी के प्रवाह में बदलाव न करे और संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाए. साथ ही उसने सिंधु जल आयोग की बैठक दोबारा बुलाने, डेटा साझा करने और संयुक्त निरीक्षण शुरू करने की भी अपील की है। 

भारत का रुख
हालांकि मौजूदा हालात में भारत का रुख बदलता नहीं दिख रहा. नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर निर्णायक और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी. यानी जल सहयोग का भविष्य अब केवल तकनीकी या कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के रवैये से जुड़ गया है। 

रायपुर में होगा राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन और सहकार संकल्प दौड़ का भव्य आयोजन

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में 3 और 4 जुलाई को राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकार संकल्प दौड़ का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप करेंगे।

इस आयोजन का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाना, किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त करना तथा “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। सम्मेलन में प्रदेशभर से सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे।

3 जुलाई को होगी सहकार संकल्प दौड़

सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत 3 जुलाई को सुबह 6 बजे रायपुर के मरीन ड्राइव, तेलीबांधा में सहकार संकल्प दौड़ आयोजित की जाएगी। इस दौड़ का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सहकारिता के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है।
दो दिवसीय राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन
3 और 4 जुलाई को सुबह 11 बजे से कृषि मंडपम ऑडिटोरियम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन में सहकारी नीतियों, कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

प्रदेशभर के सहकारिता प्रतिनिधि होंगे शामिल

सम्मेलन में अपेक्स बैंक, राज्य सहकारी संघ, मार्कफेड, लघु वनोपज सहकारी संघ, हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ, अन्त्यावसायी वित्त एवं विकास निगम सहित विभिन्न जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के अध्यक्ष, सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि अपनी सहभागिता देंगे।

सहकार से समृद्धि का मिलेगा संदेश

सहकारिता विभाग और अपेक्स बैंक ने प्रदेश के किसानों, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, युवाओं और आम नागरिकों से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है। यह आयोजन सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास, किसान सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करेगा।

संकट की घड़ी में बना सहारा: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से मिला दो लाख रुपये का आर्थिक संबल

रायपुर

 मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदूर वनांचल तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने एक जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देकर संवेदनशील शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
 

दुख की घड़ी में मिला आर्थिक संबल

सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम आरलमपल्ली की दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ी बिहान की दीदी दुधी सन्नी का 8 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल गई।

दो महीने में मिला दो लाख रुपये का बीमा दावा

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारीमुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में बिहान योजना की टीम ने तुरंत बीमा दावा तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की दोरनापाल शाखा को भेजा। बैंक ने भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूरी कीं।
संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मृतिका के पति एवं नामिनी दुधी सोमा के बैंक खाते में 27 मई 2026 को मात्र दो महीने के भीतर 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि जमा हो गई। यह सहायता राशि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा नायक द्वारा हितग्राही को प्रदान की गई।

टीमवर्क से मिली समय पर राहत

इस कार्य में भारतीय स्टेट बैंक दोरनापाल के शाखा प्रबंधकआनंद सिंह, बिहान की पीआरपी श्रीमती रूकमणी कर्मा तथा एफएलसीआरपी कुमारी शालिनी ओडला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार को बिना अनावश्यक विलंब के आर्थिक सहायता मिल सकी।

गरीब परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बन रही योजना

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन रही है। परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में मिलने वाली बीमा राशि संकट की घड़ी में बड़ा सहारा साबित होती है।
दुधी सन्नी के परिवार की यह कहानी बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो वह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को नया संबल और विश्वास भी प्रदान करता है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

रायपुर

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

क्षेत्रीय अधिकारी श्री पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला में राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह एवं श्री पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता श्री योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ श्रीमती नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

 कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

स्‍वच्‍छ एवं हरित विद्यालय की राष्‍ट्रीय रेटिंग में मध्‍यप्रदेश की उल्‍लेखनीय उपलब्‍ध‍ि

भोपाल

स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग भारत सरकार द्वारा घोषित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2025-26 में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय चयन सूची में मध्यप्रदेश के 10 विद्यालय विभिन्न श्रेणियों में चयनित हुए हैं, जिसमें शहरी वर्ग के अंतर्गत रतलाम जिले के सांदीपनि विद्यालय जावरा ने प्रथम और राजधानी भोपाल के कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय ने द्वितीय स्‍थान प्राप्‍त किया है। वहीं, देवास जिले की शासकीय माध्‍यमिक शाला झिकड़ाखेड़ा ग्रामीण श्रेणी में दूसरे स्‍थान पर है।

उल्लेखनीय है कि “स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’’ भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसके अंतर्गत सुरक्षित पेयजल, बाल-अनुकूल शौचालय, हाथ धुलाई सुविधाएं, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, वर्षा जल संचयन, हरित परिसर विकास, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली गतिविधियों तथा व्यवहार परिवर्तन आधारित गतिविधियों सहित विभिन्न मानकों पर विद्यालयों का मूल्यांकन किया जाता है। इस प्रतिष्ठित सूची में स्‍थान पाने के लिए विद्यालय स्‍व-मूल्‍यांकन कर आवेदन करते हैं।

प्रदेश के 78 हजार से अधिक स्‍कूलों की सहभागिता

इस वर्ष राज्य स्तर पर व्यापक जन-भागीदारी एवं जागरूकता के परिचायक के रूप में प्रदेश की कुल 78,149 शालाओं द्वारा ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ अंतर्गत स्व-मूल्यांकन प्रक्रिया में सहभागिता की गई थी। विभिन्न तकनीकी एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं के आधार पर राज्य स्तर से कुल 20 विद्यालयों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर के लिए नामांकित किया गया था, जिसमें से मध्यप्रदेश के 10 विद्यालयों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है।

चयनित विद्यालयों को मिलेगी 1 लाख की प्रोत्‍साहन राशि

इन सभी 10 चयनित विद्यालयों को भारत सरकार द्वारा मेरिट प्रमाण-पत्र के साथ स्वच्छता एवं हरित गतिविधियों के सतत सुदृढ़ीकरण के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, इन विद्यालयों के संस्था प्रमुखों के लिए विशेष शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण भी आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

चयनित 10 में से 8 शासकीय विद्यालय

राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रदेश के 10 विद्यालयों में से 3 सांदिपनी विद्यालयों सहित कुल 8 शासकीय विद्यालय शामिल हैं। जिनमें रतलाम जिले का उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय जावरा, भोपाल का शासकीय कमला नेहरू कन्या उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय, देवास जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला झिकड़ाखेड़ा, सीहोर जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला महुआखेड़ी टाकीपुर, शाजापुर जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला भराड़, जबलपुर जिले का सांदीपनि विद्यालय कुंडम, शिवपुरी जिले का पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी करेरा, डिंडोरी जिले की आश्रम शाला इंग्लिश मीडियम शाहपुरा सहित 2 निजी विद्यालय इंदौर जिले का दिल्ली पब्लिक स्कूल निपानिया तथा कटनी जिले का दिल्ली पब्लिक स्कूल शामिल हैं।

सांदीपनि विद्यालयों का उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन

मध्यप्रदेश शासन की विशेष शैक्षणिक पहल सांदीपनि विद्यालय अंतर्गत संचालित विद्यालयों ने भी ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से रतलाम जिले के उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय, जावरा ने शहरी श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है, जबकि भोपाल जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कमला नेहरू ने इसी श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही जबलपुर जिले का सांदीपनि विद्यालय कुंडम ने ग्रामीण श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर 10वां स्थान प्राप्त कर राज्य की उपलब्धियों को और अधिक गौरवपूर्ण बनाया है। इन विद्यालयों द्वारा स्वच्छता, हरित परिसर विकास, जल संरक्षण, व्यवहार परिवर्तन आधारित गतिविधियों एवं छात्र सहभागिता के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए गए हैं।

संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र ने दी बधाई

भारत सरकार के स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा घोषित राष्‍ट्रीय रेटिंग में प्रदेश के 10 स्‍कूलों के चयन पर संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र श्री हरजिंदर सिंह ने सभी चयनित विद्यालयों को बधाई दी है। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि, यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर विकास के क्षेत्र में राज्य द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है। यह सफलता राज्य शासन, लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, जिला प्रशासन, विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, समुदाय एवं यूनिसेफ मध्यप्रदेश टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करना केवल अधोसंरचना विकास का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, गरिमा, सीखने के वातावरण एवं सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। चयनित विद्यालयों की श्रेष्ठ प्रथाओं एवं नवाचारों का व्यापक दस्तावेजीकरण एवं प्रसार किया जाएगा, जिससे प्रदेश के अन्य विद्यालय भी इन मॉडलों से प्रेरणा लेकर स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पहल को और अधिक प्रभावी बना सकें।

 

अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाए, व्यापार में मिली बड़ी राहत।

नई दिल्ली
 भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जल्दी ही सहमति बन सकती है। बताया जा रहा है कि यह फाइनल स्टेज में है। इससे पहले अमेरिका की ओर से भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने अपनी उस पाबंदी सूची से चार भारतीय कंपनियों के नाम हटा दिए हैं, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को उन्नत तकनीक और उपकरण सप्लाई करने के आरोप लगे थे।

अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की। इन कंपनियों को अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की विशेष रूप से नामित नागरिकों और अवरुद्ध व्यक्तियों (SDN) की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
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कौन सी हैं ये 4 भारतीय कंपनियां?
प्रतिबंधों की सूची से हटाए गए नामों में दो कंपनियां हैदराबाद की, एक अहमदाबाद की और एक नई दिल्ली की है। इन चारों के नाम इस प्रकार हैं:

    आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद)
    लोकेश मशीन्स लिमिटेड (हैदराबाद)
    गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड (अहमदाबाद)
    शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली)

इन कंपनियों पर क्या थे आरोप?
साल 2024 में अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के आरोप में इन कंपनियों पर पाबंदियां लगाई थीं। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि ये कंपनियां रूस को दोहरे उपयोग वाले सामान और तकनीक भेज रही थीं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड: अक्टूबर 2024 में इस कंपनी पर आरोप लगा था कि उसने रूसी संस्थाओं को रोलर बियरिंग्स और रोलर असेंबली जैसे दर्जनों संवेदनशील सामान निर्यात किए थे।
शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी पर रूस को रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशन सहायता उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भेजने का आरोप था।
आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज: अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने ब्लैकलिस्टेड रूसी फर्म आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक की 100 से अधिक खेप भेजी थीं।
लोकेश मशीन्स लिमिटेड: इस कंपनी पर विभिन्न रूसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को दर्जनों मशीन टूल्स निर्यात करने का आरोप लगाया गया था।

क्या हैं इस फैसले के मायने?
अमेरिकी सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों को सूची से हटाने की कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की है। हालांकि, माना जा रहा है कि भारत सरकार द्वारा लगातार अमेरिकी प्रशासन के साथ किए गए कूटनीतिक संवाद और भारतीय कंपनियों द्वारा निर्यात नियमों के कड़ाई से पालन के आश्वासनों के बाद यह कदम उठाया गया है।

कंपनियों के लिए बड़ी राहत
अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में होने के कारण इन कंपनियों के वैश्विक व्यापार, बैंक लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पूरी तरह रोक लग गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि वैश्विक वित्तीय प्रणालियां काफी हद तक अमेरिकी डॉलर और वहां के नियमों से जुड़ी हैं। अब पाबंदियां हटने के बाद ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य रूप से अपना बिजनेस दोबारा शुरू कर सकेंगी।

दिग्विजय सिंह पर कांग्रेस महासचिव का बड़ा हमला, बोलीं- पुत्र मोह में संगठन को पहुंचा रहे नुकसान

भोपाल
उज्जैन के वीर भारत न्यास को कथित तौर पर एक रुपए में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन आवंटित किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस का अंदरूनी विवाद और गहरा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब संगठन के भीतर खुली नाराजगी में बदलती नजर आ रही है। कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता को प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक मंच से बयान देकर पार्टी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति थी तो उसे संगठन के भीतर उठाया जाना चाहिए था, न कि मीडिया के सामने।

पीसी में पटवारी के दावों को खारिज करने पर कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तक कर डाली।

निधि चतुर्वेदी पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी हैं। उन्होंने अपनी लिखा दिग्विजय का नागपाश, कांग्रेस पर प्रहार…उन्होंने लिखा कि उज्जैन भूमि विवाद में कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें कटघरे में खड़ा करना किसी भी वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता।

उन्होंने कहा कि यदि जीतू पटवारी से कोई गलती हुई थी तो दिग्विजय सिंह उन्हें फोन पर, आमने-सामने या पार्टी के आंतरिक मंचों पर अपनी बात बता सकते थे। इसके बजाय उज्जैन जाकर मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना पार्टी अनुशासन के खिलाफ है।

मंत्री सारंग बोले- अगर कांग्रेसी ही आरोप लगा रहे तो पार्टी को ध्यान देना चाहिए
कांग्रेस में मची अंर्तकलह पर एमपी के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- कांग्रेस के नेता ही दिग्विजय सिंह को स्लीपर सेल कह रहे हैं। सही मायनों में कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस की गुटबाजी और आंतरिक कलह अब पूरी तरह जमीन पर उतर आई है।

कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी के बयान पर मंत्री सारंग ने कहा- यदि कांग्रेस का कोई नेता ऐसा आरोप लगा रहा है तो कांग्रेस को इस पर ध्यान देना चाहिए।

‘पुत्र-मोह’ में उठाया कदम
निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह का यह व्यवहार उनके “पुत्र-मोह” का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की महत्वाकांक्षा में दिग्विजय सिंह पार्टी अनुशासन भूल चुके हैं।

‘भाजपा को ऑक्सीजन दे रहे’
पोस्ट में उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा और संघ की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, तब पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से कमजोर करना विपक्ष को राजनीतिक फायदा पहुंचाने जैसा है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान पर चोट बताया।

व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा संगठन पर भारी
निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पुत्र-मोह के कारण संगठन को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने बेटे जयवर्धन सिंह को आगे बढ़ाने की राजनीति में पार्टी अनुशासन की अनदेखी की जा रही है।

बीजेपी को मिल रहा राजनीतिक फायदा
फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब कांग्रेस भाजपा और आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रही है, तब अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा करना विपक्ष को मजबूत करने जैसा है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।

2020 से राज्यसभा चुनाव तक का जिक्र
निधि ने अपनी पोस्ट में 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने, 2023 विधानसभा चुनाव, 2024 लोकसभा चुनाव और हालिया राज्यसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार अंदरूनी खींचतान से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने इसे संगठन के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

हाईकमान से कार्रवाई की मांग
पोस्ट के अंत में निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि संगठन की साख और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए शीर्ष नेतृत्व को हस्तक्षेप करना चाहिए।

बीजेपी ने भी साधा निशाना
कांग्रेस में बढ़ते विवाद पर प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जब कांग्रेस के नेता ही दिग्विजय सिंह पर सवाल उठा रहे हैं तो पार्टी को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है। 

क्या है पूरा मामला
दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को करीब 500 करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपए में आवंटित की गई। इसके बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इस आरोप से असहमति जताई। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए, जिन्हें अब निधि चतुर्वेदी की पोस्ट ने और हवा दे दी। 

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