जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे दादा ईश्वरदास रोहाणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे दादा ईश्वरदास रोहाणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, विधि, पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 12 विभूतियों का सम्मान
स्व. ईश्वरदास रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का किया विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में गौरव शिखर सम्मान समारोह-2026 को किया संबोधित
जबलपुर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिभाओं ने संपूर्ण देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे दादा स्व. ईश्वरदास रोहाणी स्मृति गौरव शिखर सम्मान 2026 में 12 महान विभूतियों का सम्मान गौरवशाली क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है। हम विश्व को एक परिवार मानते हैं। इसी प्रकार स्व. रोहाणी भी अपने कार्यों के बलबूते आज समाज कल्याण के प्रतीक बने। वे एक कर्मयोगी थे, जिन्होंने गरीब से गरीब के जीवन को रोशन करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन निर्माण के प्रति समर्पित राष्ट्र-साधक स्व. रोहाणी का अद्वितीय योगदान प्रेरणादायी रहेगा। उनकी शुचिता और विराट व्यक्तित्व यादगार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जबलपुर में आयोजित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रोहाणी की पावन स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह चंद्रा ने की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राचीन समृद्ध संस्कृति गुरुकुल परंपरा से पल्लवित थी। भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल बनीं, जो आज भी हमें कठिन समय में अपने मित्रों की सहायता के लिए प्रेरित करती है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने समाज को कर्म की श्रेष्ठता का संदेश दिया है।

इन 12 हस्तियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में समाज के विभित्र क्षेत्रों में अपनी साधना और उत्कृष्ट योगदान से राष्ट्र निर्माण में संलग्न 12 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए सुरेखा चुडास्मा, समाज सेवा में जीवन समर्पित करने वाले डॉ. कैलाश गुप्ता, महिला सशक्तिकरण के लिए सुज्ञानेश्वरी दीदी, संस्कृति एवं कुटुंब प्रबोधन के लिए नंदलाल नेगांधी, युवा प्रेरणा के लिए सरबजीत सिंह कलासी, सनातन ज्ञान के लिए पंडित रोहित दुबे, उद्योग के क्षेत्र में नितिन चंडोक, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. वाई. आर. यादव, पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्याम कटारे, सेवानिवृत्त अधिकारियों की श्रेणी में सब लेफ्टिनेंट (रिटा.) आर. एन. तिवारी, विधि के क्षेत्र में पूर्व सांसद आर. एन. सिंह, न्याय क्षेत्र में जस्टिस देवव्रत माधव धर्माधिकारी का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यक्रम में सम्मानित हुईं विभूतियों के कार्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम के आयोजक और विधायक अशोक रोहाणी ने कहा कि स्व. रोहाणी ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित करने की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि ऐसे आयोजन से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, विधायक नीरज सिंह लोधी, विधायक संतोष बरकड़े, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अजय विश्नोई, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

 

Amarnath Yatra 2026: ‘बम बम भोले’ के जयघोष के बीच पहला जत्था रवाना, एलजी मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

 जम्मू
 जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा।

अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’

पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। 

जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। 

कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला
यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया। 

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी
इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं। 

हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की।

जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की।

अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है।

इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।

भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और कहा कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा किए गए व्यापक प्रबंध श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाएंगे।

Microsoft में फिर छंटनी की तैयारी? 5,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट, रिपोर्ट में बड़ा दावा

नई दिल्ली

Microsoft एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर रही है. रॉयटर्स ने बिजनेस इंसाइडर की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि कंपनी अगले कुछ दिनों में हजारों कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है। 

हालांकि इस बार छंटनी का असर कंपनी के कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से कम लोगों पर पड़ने की उम्मीद है. माइक्रोसॉफ्ट के दुनियाभर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी हैं. ऐसे में यह संख्या करीब 5 हजार या उससे कम हो सकती है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार सबसे ज्यादा असर सेल्स, कंसल्टिंग और Xbox गेमिंग डिविजन पर पड़ सकता है. कंपनी की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई क्रेडिबल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नए फाइनांशियल ईयर की शुरुआत के साथ यह फैसला लिया जा सकता है। 

आखिर Microsoft फिर कर्मचारियों की छंटनी क्यों कर रही है?
पिछले कुछ सालों में माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रिकॉर्ड निवेश किया है. कंपनी OpenAI के साथ साझेदारी बढ़ा रही है, नए AI डेटा सेंटर बना रही है और Copilot जैसे AI प्रोडक्ट्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है. ऐसे में दूसरी तरफ ऑपरेटिंग खर्च कम करने के लिए कंपनी लगातार अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोसॉफ्ट लागत कम करने के साथ-साथ अपने बिजनेस को AI के हिसाब से दोबारा तैयार करना चाहती है. यही वजह है कि जिन टीमों में ऑटोमेशन या AI की मदद से काम हो सकता है, वहां कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है। 

Xbox टीम पर भी असर पड़ सकता है
माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग बिजनेस यानी Xbox में भी बदलाव की तैयारी चल रही है. पिछले कुछ समय से Xbox के अंदर बड़े स्तर पर रीस्ट्रक्चरिंग की चर्चा है. नई लीडरशिप के आने के बाद बिजनेस को रीसेट करने की योजना बनाई जा रही है. इसी वजह से गेमिंग डिविजन में भी कई पद खत्म किए जा सकते हैं और कुछ टीमों का पुनर्गठन हो सकता है। 

पहले भी हो चुकी है बड़ी छंटनी
यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों की संख्या घटा रही है. पिछले साल भी कंपनी ने अलग-अलग चरणों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की थी. उस समय भी कंपनी ने AI में निवेश बढ़ाने और खर्च कम करने को इसकी बड़ी वजह बताया था। 

माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है. 2026 में मेटा, ऐमेजॉन, ओरैकल, लिंक्डइन, कॉइनबेस, गूपऑन और कई दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी हैं या इसकी घोषणा कर चुकी हैं. कई कंपनियां खुलकर कह चुकी हैं कि AI की वजह से काम करने का तरीका बदल रहा है और फ्यूचर में कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम किया जाएगा। 

WhatsApp के नए Username फीचर पर सरकार की नजर, फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच

 नई दिल्ली

WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे। 

कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। 

WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा। 

अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है। 

इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी
हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं। 

टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है। 

सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं। 

वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके। 

इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

भारत में गहराता जल संकट! 18% आबादी के लिए सिर्फ 4% पानी, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

 नई दिल्ली

भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है। 

तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी। 

PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है। 

आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, “भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है। 

सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम 
भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं। 

PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है। 

इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

क्या फटने वाला है AI बबल? RBI ने AI स्टॉक्स को लेकर जारी की बड़ी चेतावनी

 नई दिल्‍ली

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी चेतावनी दी है. यह वॉर्निंग ग्‍लोबल मार्केट में AI की वजह से आई बड़ी गिरावट को लेकर है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि ग्‍लोबल मार्केट में कॉरपोरेट अर्निंग में ग्रोथ के रिवैल्‍यूएशन और AI रिलेटेड स्‍टॉक के वैल्‍यूएशन के कारण आई गिरावट भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर सकती है। 

RBI ने अपनी फाइनेंशियल स्‍टैबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में कहा है कि AI से रिलेटेड निवेश अब बॉन्‍ड मार्केट्स समेत बाकी कैपिटल मार्केट के अन्‍य सेक्‍टर्स में भी फैल रहे हैं. साउथ कोरिया, ताइवान और जापान समेत कई मार्केट्स में हाल ही में AI से सबंधित शेयरों में तेजी और उच्‍च अस्थिरता देखी गई थी। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI से संबंधित टेक कंपनियों के एक छोटे ग्रुप के कारण फोकस ज्‍यादा बना हुआ है, जो एआई को अपनाने में टॉप इकोनॉमी देशों या इसकी सप्‍लाई चेन में भाग लेने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शेयर मार्केट के प्रदर्शन को तेजी से प्रभावित कर रहा है। 

अमेरिकी बाजार में आ सकती है बड़ी गिरावट
हाल ही में कुछ उभरते बाजारों के बेहतर प्रदर्शन की खास वजह व्‍यापक मजबूती के बजाय एआई से जुड़ी कंपनियां रही हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये दोनों ही वित्तीय अस्थिरता के सोर्स बने हुए हैं, क्‍योंकि इन कंपनियों में बिकवाली से अमेरिका में व्‍यापक बाजार में गिरावट आ सकती है और आय संबंधी प्रभावों के माध्‍यम से अन्‍य बाजारों में भी इसका असर फैल सकता है।  

लोन देने वाली कंपनियां भी हो सकती हैं प्रभावित
आरबीआई के रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे हाइपरस्केल कंपनियां घटते फ्री कैश फ्लो के बीच एआई बिल्डआउट पर कैपिटल एक्‍सपेंडेचर बढ़ा रही हैं , उन्होंने इन निवेशों को फंडिंग जारी के लिए पिछले दो वर्षों में बड़ा लोन लिया है. खर्च में और अधिक विस्तार होने के साथ ही लोन फंड में भी बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है. आरबीआई ने कहा कि इसलिए, एआई बेस्‍ड असेट वैल्‍यू में गिरावट इस चैनल के माध्यम से जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बैंक पर्सनल लोन फर्मों और एआई बूम को फंडिंग करने वाले अन्य फर्म भी प्रभावित हो सकते हैं। 

एआई बबल की फटने की आशंका बढ़ी
गौरतलब है कि अमेरिका में कई पैमानों पर इक्विटी वैल्‍यूवेशन के मापदंड ऐतिहासिक सीमा के ऊपरी स्‍तर पर बने रहे. वहीं आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी इक्विटी बाजारों में बाकी विश्व का निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, और मार्च 2020 में 7.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर मार्च 2026 में अमेरिकी इक्विटी में सकल विदेशी हिस्सेदारी 21 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। 

जबकि दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार एक सप्ताह पहले 10% गिर गया, जिससे लोअर सर्किट लग गया और ट्रेडिंग रुक गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एआई बबल के फटने की आशंकाएं बढ़ गईं. भारतीय बाजार समेत अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। 

समय पर मिली सम्मान निधि, किसानों की उम्मीदों को मिली नई उड़ान

रायपुर

 मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को मजबूती देने का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली राशि किसानों को समय पर बीज, उर्वरक तथा अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करने में सहायक सिद्ध हो रही है, जिससे खेती की लागत का दबाव कम होने के साथ कृषि कार्य भी निर्धारित समय पर पूरे हो रहे हैं।

गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सारबहरा के किसानएवन सिंह इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त की राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने बीज, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक कृषि कार्यों में किया।एवन सिंह का कहना है कि समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता ने खेती की तैयारियों को आसान बनाया है। इससे कृषि कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होती और खेती की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायता मिलती है।

इसी ग्राम पंचायत के किसाननरेश यादव, जो लगभग चार एकड़ भूमि में खेती करते हैं, भी योजना का नियमित लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। योजना से प्राप्त राशि के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री खरीदना आसान हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उनका मानना है कि समय पर मिलने वाली सहायता किसानों को बेहतर योजना बनाकर खेती करने के लिए प्रेरित करती है और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जा रहा है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पात्र किसानों तक केंद्र सरकार की सभी कृषि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना इसी दिशा में किसानों के लिए एक भरोसेमंद आर्थिक सहारा बनकर उभरी है।

योजना का सफल क्रियान्वयन किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर मिलने वाली सहायता से किसान खेती की बेहतर तैयारी कर रहे हैं, आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति उत्साहित हो रहे हैं तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की समृद्धि ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है। इसी सोच के अनुरूप किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि को गति देने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों की सफलता की कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि समय पर मिलने वाला आर्थिक सहयोग खेती को नई ऊर्जा देने के साथ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है।

CM हेल्पलाइन में 1.77 लाख शिकायतें 3 महीने से लंबित, जनता की सुनवाई पर लगा ब्रेक!

भोपाल 

प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन खुद धीमी पड़ती नजर आ रही है। सरकारी समीक्षा में सामने आया है कि एक लाख 77 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी निपटारा नहीं हो सका। सबसे ज्यादा लंबित मामले राजस्व, गृह और नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़े हैं। इन विभागों से संबंधित शिकायतें महीनों तक अटकी रहने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यहीं नहीं 200 से ज्यादा शिकायतों को तो अटेंड भी नहीं किया गया। यही वजह है कि सीएम हेल्पलाइन में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।   

सबसे ज्यादा दबाव राजस्व विभाग पर
लंबित शिकायतों के मामले में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। विभाग में 1.02 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं, जबकि इनमें 30 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन्हें 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। भूमि सीमांकन, नामांतरण, खसरा सुधार और अवैध कब्जे जैसे मामलों में लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। अकेले अवैध कब्जे से जुड़ी हजारों शिकायतें अब भी लंबित हैं। 

पुलिस से जुड़ी शिकायतों में भी नहीं मिल रही राहत
गृह विभाग में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां 54 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं और इनमें करीब 16 हजार मामले 100 दिन की सीमा पार कर चुके हैं। सबसे अधिक शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं होने, पुलिस जांच में देरी और गिरफ्तारी नहीं किए जाने से जुड़ी हैं। इससे कानून व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के निराकरण पर सवाल उठ रहे हैं।

शहरों की बुनियादी सुविधाओं के मामले भी अटके
नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी हजारों शिकायतों का समाधान तय समय में नहीं हो पाया है। साफ-सफाई, सीवेज, पेयजल, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़कों की मरम्मत और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में लोग लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। 

शिकायतें बढ़ीं, समाधान की रफ्तार घटी
इस वर्ष जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 81 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो अभी तक संबंधित स्तर पर लंबित है। वहीं एल-3 और एल-4 स्तर पर भी करीब 1.92 लाख शिकायतें तय समय सीमा के बाद भी निपटारे का इंतजार कर रही हैं। वहीं, राजस्व विभाग के  अधिकारी का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है और उनका निदान किया जाता है। कुछ शिकायतें नीतिगत होने के कारण उनमें समय लगता हैं।  

भोपाल में महिला अपराध 20% बढ़े, विशेषज्ञ ने बताया- बेटियों को स्मार्टफोन देने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

भोपाल
 राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों के बीच एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार तेजी आ रही है। स्थिति कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामलों में सीधे 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भोपाल इस वक्त महिला सुरक्षा के मामले में एक तरह से ‘बारूद के ढेर’ पर बैठा है।

हर दिन एक रेप और एक छेड़छाड़ की वारदात
पुलिस से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भोपाल में दुष्कर्म के 305 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 367 हो गए। इस साल यानी 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के आंकड़े भी डराने वाले हैं। इस अवधि में अब तक 167 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 164 मामले आए थे। इसका सीधा मतलब यह है कि राजधानी में औसत रूप से हर दिन एक दुष्कर्म और एक छेड़छाड़ का मामला पुलिस स्टेशन पहुंच रहा है। हालांकि, इस साल छेड़छाड़ के मामलों में 7% की मामूली गिरावट (155 केस) देखी गई है।

60% मामलों में ‘सोशल मीडिया’ का खूनी खेल
इस पूरे ट्रेंड पर चिंता जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक गहरे और नए खतरे की ओर इशारा किया है, वह है सोशल मीडिया। भोपाल में हो रहे महिला और बाल अपराधों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।

हमने जितने मामलों का विश्लेषण किया है, उनमें से लगभग 60% मामलों का कोई न कोई लिंक सोशल मीडिया से जुड़ा है। छोटी बच्चियों, किशोरियों और यहां तक कि नाबालिग लड़कों को भी ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा है। पॉक्सो के कई मामलों में बच्चों को ऑनलाइन बातचीत के जरिए प्रभावित किया गया। आरोपी फर्जी नाम, गलत उम्र और झूठी पहचान बताकर पहले बच्चों का भरोसा जीतते हैं, और फिर यह दोस्ती प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण में बदल जाती है।

अर्चना सहाय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व डायरेक्टर, चाइल्डलाइन, भोपाल

‘माता-पिता की बात सुनना बंद कर रही हैं लड़कियां’
अर्चना सहाय ने पारिवारिक ताने-बाने पर पड़ रहे इसके असर को लेकर सचेत किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लड़कियां ऑनलाइन बने दोस्तों के प्रभाव में इस कदर आ जाती हैं कि वे अपने माता-पिता की बातें सुनना तक बंद कर देती हैं। कुछ मामलों में तो बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी या घर से भागने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को स्मार्टफोन देने से पहले पैरेंट्स उन्हें सायबर सेफ्टी के बारे में जरूर शिक्षित करें।

अधिकांश मामलों में ‘अपराधी’ कोई अनजान नहीं
इधर, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़िता का कोई परिचित, रिश्तेदार या सोशल मीडिया का करीबी दोस्त ही निकलता है। हालांकि, मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे पुलिस का तर्क है कि अब समाज में जागरूकता बढ़ी है, जिससे लोग चुप रहने के बजाय थानों में आकर एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है।

 

MP में UCC विधेयक की तैयारी तेज, मतांतरित आदिवासियों को लेकर समिति कर रही कानूनी मंथन

भोपाल
 मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें आदिवासियों के साथ-साथ मतांतरित आदिवासी भी कानून के दायरे से बाहर रखे जा सकते हैं। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई वाली समिति को जन परामर्श में बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं। अधिकतर का पक्ष है कि जब आदिवासी मतांतरित हो गया तो फिर उसे आदिवासियों को मिलने वाले अधिकार व सुविधा नहीं मिलने चाहिए। सैद्धांतिक तौर पर सभी इससे सहमत भी हैं लेकिन समिति कानूनी प्रावधान देख रही है।

जन परामर्श में मिले विविध सुझाव
जन परामर्श के दौरान भोपाल में पूर्व न्यायाधीश मोहन पी तिवारी ने आदिवासियों को लेकर यह तर्क रखा था कि इनकी अपनी परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं, इसलिए इन्हें कानून के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। जहां तक बात मत परिवर्तन करने वाले आदिवासियों की है, तो वे मतांतरण के बाद आदिवासी तो रह नहीं गए। ब्राह्मण व ऊंची जातियों के बच्चों से विवाह कर रहे हैं, फिर भी आदिवासी बने हुए हैं।

वनवासी कल्याण आश्रम एसएस कुमरे ने भी इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की लड़की अगर दूसरी जाति में विवाह करती है तो उस पर यूसीसी लागू होना चाहिए। इसी तरह के अन्य सुझाव भी आए हैं।

कानूनी पहलुओं का अध्ययन
सूत्रों का कहना है कि समिति में इस विषयों को लेकर काफी विचार-विमर्श हुआ है। कानूनी पहलू देखे गए। दरअसल, संविधान के प्रविधान अनुसार अनुसूचित जनजातियों के लिए धर्म आधारित कोई रोक-टोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी व्यक्ति किसी भी धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) को अपना ले, फिर भी वह कानूनी रूप से अपना अनुसूचित जनजाति का दर्जा और उससे जुड़े अधिकार बनाए रख सकता है। जाति प्रमाण पत्र भी बनते हैं और आरक्षण का लाभ भी मिलता है।

 

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