Datia Assembly By Election 2026: दतिया विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई को मतदान, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे

दतिया 

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की अधिसूचना छह जुलाई को जारी की जाएगी। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे।

दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा। इसके बाद तीन अगस्त को मतगणना होगी। निर्वाचन आयोग के अनुसार, चार अगस्त तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण हो रहा उपचुनाव
बता दें कि दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती विधायक थे। उन्हें एक मामले में दो वर्ष से अधिक की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसके बाद यह सीट रिक्त हो गई। अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशी आमने-सामने होंगे।

आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू
निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार अब दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। मतदान सभी केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट के माध्यम से कराया जाएगा।

विजयवर्गीय बोले- बीजेपी ही जीतेगी
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- दतिया उपचुनाव में निश्चित रूप से भाजपा ही जीतेगी।इस सवाल पर कि क्या बीजेपी के उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा ही होंगे, विजयवर्गीय बोले- ये कहना अभी जल्दबाजी होगी। जो उम्मीदवार आएगा, आपको बताया जाएगा।

विधायक राजेन्द्र भारती की सदस्यता खत्म हुई थी
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सीट खाली घोषित कर दी।

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस बनाम भारत संघ फैसले, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) के तहत की गई।

जानें क्या था मामला?
दतिया के भूमि विकास सहकारी बैंक से जुड़े 25 साल पुराने घोटाले में अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी पाया गया था। आरोप था कि बैंक अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने 10 लाख रुपए की एफडी में हेरफेर कर अधिक ब्याज का लाभ लिया गया था। कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं 120B, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और जुर्माना भी लगाया था।

2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हुई थी हार
गौरतलब है कि 2023 में दतिया की विधानसभा सीट हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी ने राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी। भाजपा के प्रत्याशी और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर वो इस सीट से विधायक चुने गए थे। राजेंद्र भारती को 88977 वोट मिले थे। जबकि नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट ही मिले थे।

बैंक एफडी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला
साल 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया। आरोप था कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर एफडी की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई।

इसके आधार पर 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेन्द्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी भी थे। बाद में मामले की जांच हुई और आरोपपत्र दायर किया गया।

1 अप्रैल को कोर्ट ने राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया
1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने 28 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में राजेन्द्र भारती को दोषी ठहराया। दोषसिद्धि के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

2 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि बरकरार रही।

इसी दिन मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी। साथ ही दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को भेज दी गई।

विधानसभा ने तुरंत सीट रिक्त क्यों घोषित की?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर वह अयोग्य हो जाता है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के बाद ऐसी स्थिति में सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करने से सदस्यता बहाल नहीं होती। इसके लिए उच्च अदालत को दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगानी होती है।

अब जानिए क्यों हारे नरोत्तम मिश्रा और ढाई साल में राजेंद्र भारती ने क्या किया?

पिछला चुनाव: क्यों नहीं दोहराया गया ‘बसई चमत्कार’
2023 में नरोत्तम मिश्रा की हार में बसई का शहरी क्षेत्र सबसे बड़ी वजह रहा। 13 राउंड में से वे सिर्फ 3 राउंड में बढ़त बना पाए। 10वें राउंड तक राजेंद्र भारती 8 हजार वोटों से आगे थे। बीजेपी को 2018 जैसा ‘चमत्कार’ दोहराने की उम्मीद थी, जब बसई से मिले वोटों ने मिश्रा को जीत दिलाई थी।

2023 में 11वें और 12वें राउंड में वे क्रमशः 866 और 379 वोटों से पीछे रहे। आखिरी राउंड में 735 वोटों की बढ़त भी नाकाफी रही और नरोत्तम 7,742 वोटों से चौथा चुनाव हार गए।

जनता की राय: ओवर कॉन्फिडेंस और भीतरघात बना हार का कारण
एडवोकेट इतरत अली जैदी के अनुसार विकास कार्य हुए, लेकिन मिश्रा के करीबी लोगों की कार्यशैली से जनता नाराज थी। वे 2022 के नगर पालिका चुनाव में कथित धांधली और स्थानीय समस्याओं के समाधान में देरी को हार की प्रमुख वजह मानते हैं। उदाहरण के तौर पर ‘लाला का तालाब’ की टूटी दीवार अब तक नहीं बनने का मुद्दा आज भी लोगों में नाराजगी पैदा करता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि मिश्रा को संगठन के भीतर ही नुकसान पहुंचा। परसराम श्रीवास्तव और राजू त्यागी के अनुसार कार्यकर्ता जरूरत के मुताबिक जमीन पर सक्रिय नहीं रहे। वे अति आत्मविश्वास में रहे। बीजेपी कार्यालय प्रभारी रोहित दुबे भी मानते हैं कि कार्यकर्ता जीत को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त थे।

राजेंद्र भारती का कार्यकाल: जनता की मिली-जुली राय
राजेंद्र भारती के ढाई साल के कार्यकाल पर स्थानीय लोगों की राय सख्त है। परसराम श्रीवास्तव के अनुसार वे जनता से दूर रहे। इतरत अली जैदी कहते हैं कि भारती प्रशासन और पुलिस पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव का हवाला देते थे।

राजू त्यागी और शलस त्रिपाठी आरोप लगाते हैं कि विधायक निधि का उपयोग क्षेत्र से बाहर हुआ और विधानसभा के सवाल अफसरों पर दबाव बनाने के लिए उठाए गए। वहीं, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेंद्र दांगी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि असहयोग के बावजूद भारती ने विधायक निधि से जितने संभव थे, उतने काम किए।

चुनावी मैदान: प्रमुख दावेदार और रणनीति
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस में टिकट के लिए कई दावेदार मैदान में हैं। अयोग्य घोषित किए गए राजेन्द्र भारती अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी टिकट के प्रमुख दावेदार हैं।

बीजेपी की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। आजाद समाज पार्टी (एएसपी) की ओर से दामोदर यादव उम्मीदवार होंगे। दामोदर यादव का कहना है कि पार्टी उन्हें दतिया से उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है।

1. नरोत्तम मिश्रा (बीजेपी): डैमेज कंट्रोल मोड में
राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद मिश्रा लगातार सक्रिय हैं। वे सामाजिक सम्मेलनों के जरिए नाराज कार्यकर्ताओं और समुदायों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो महीनों में एक दर्जन से ज्यादा कार्यक्रम कर चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार, वे दतिया के लिए बड़ी सरकारी घोषणा की तैयारी में हैं और 1 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिल चुके हैं। बीजेपी का दावा है कि इस बार संगठन पिछली गलतियों से सबक लेकर मैदान में उतरेगा।

2. कांग्रेस: एक अनार, तीन बीमार
टिकट को लेकर पार्टी में खींचतान दिखाई दे रही है। राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट मांग रहे हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद टिकट न मिलने पर बागी होने की चर्चा है। पिछले चुनाव में टिकट का त्याग करने वाले अवधेश नायक खुद को स्वाभाविक दावेदार मान रहे हैं, जबकि पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं।

हालांकि, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक दांगी ने गुटबाजी से इनकार करते हुए कहा कि टिकट सर्वे के आधार पर तय होगा।

3. दामोदर यादव (आजाद समाज पार्टी): बिगाड़ सकते हैं खेल
दामोदर यादव किसान सम्मेलन और बैठकों के जरिए संगठन मजबूत करने में जुटे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता उनके साथ आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी मजबूत मौजूदगी कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।

मुद्दों पर भारी पड़ेंगे जातिगत समीकरण

वरिष्ठ पत्रकार रवि ठाकुर के अनुसार उपचुनाव में जातिगत समीकरण निर्णायक रहेंगे।

यादव वोट (18 हजार): 2023 में इन्होंने बीजेपी का साथ नहीं दिया था। अब दामोदर यादव की मौजूदगी से 60% यादव वोट आजाद समाज पार्टी की तरफ जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस का वोट बैंक कटेगा।

कुशवाहा वोट (37 हजार): यह समाज दो धड़ों में बंटा है। यदि कोई सजातीय उम्मीदवार मैदान में आता है, तो बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस को नुकसान होगा।

ब्राह्मण वोट (35 हजार): यदि कांग्रेस किसी ब्राह्मण को टिकट देती भी है, तब भी इस वर्ग का बड़ा हिस्सा नरोत्तम मिश्रा के साथ ही रहने की संभावना है।

 

MP में Combined Land Use का नया नियम, अब घरों से भी शुरू कर सकेंगे कारोबार

भोपाल 

प्रदेश सरकार अब हर तरह के लैंडयूज में उसके सभी प्रकार का इस्तेमाल और गतिविधियों की राह खोलने जा रही है। सिर्फ भूमि उपयोग के अनुसार, तय गतिविधियां ही प्रतिबंधित रहेंगी। भूमि और भवनों का मिश्रित उपयोग की अनुमति होगी, चाहे वो हॉरीजॉन्टल हो या वर्टिकल हो। इससे अब प्रतिबंधित को छोड़कर आवासीय क्षेत्र में कमर्शियल और औद्योगिक गतिविधियां भी चल सकेंगी।

हालांकि आवासीय क्षेत्र में गोदाम, प्रदूषणकारी उद्योग, बूचडख़ाने, कबाडख़ाने, संक्रामक रोग अस्पताल, थोक व्यापार, सुअर पालन, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, बड़े परिवहन टर्मिनल आदि को प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ एफॉर्डेबल हाउसिंग संबंधी नियमों में भी संशोधन कर इनके ज्यादा संछया में निर्माण का रास्ता खोला जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसके लिए भूमि विकास नियमों में संशोधन कर रहा है। संशोधन के ड्राट का गजट नोटिफिकेशन कर 15 दिन में सुझाव और आपढिायां मांगी गई हैं। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।

प्रदेश में ज्यादा बनेंगे एफॉर्डेबल आवास
सरकार अब ज्यादा एफॉर्डेबल आवास बनाने का रास्ता खोलने जा रही है। इसके लिए भूमि विकास नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इस ड्राफ्ट के अनुसार, एफॉर्डेबल आवासों का निर्माण तीन तरह से हो सकेगा। इसमें भूखंड विकास, छलैट, समूह गृह निर्माण के साथ अब एकल स्वामित्व वाले भूखंड पर ऊर्धवाधर वृद्धिशील आवास को भी जोड़ा जा रहा है।

बनेंगी हाईराइज इमारतें
संशोधन में उपलब्ध जमीन के अनुसार, प्रति हेलटेयर आवासीय इकाइयों के अधिकतम घनत्व संबंधी प्रावधान को खत्म किया जाएगा। इसके तहत अधिकतम चार हेलटेयर क्षेत्र में अधिकतम चार मंजिला भवन निर्माण और 350 ईडय्ल्यूएस और 260 एलआइजी आवास निर्माणों की ही अनुमति थी। लेकिन अब संख्या का बंधन खत्म हो जाएगा। एकल स्वामित्व वाले भूखंड में किसी मकान को ऊपर की ओर बढ़ाने की भी अनुमति मिल सकेगी। स्वतंत्र एफॉर्डेबल हाउस परियोजनाओं में आवासीय इकाई का अधिकतम निर्मित क्षेत्र 60 वर्ग मीटर तक हो सकेगा। इसके लिए एफएआर भी 3 तक मिलेगा।

मकान और दुकान का होगा एक साथ उपयोग
अब मकान और दुकान एक ही स्थान पर हो सकेंगे। राज्य सरकार ने टीएंडसीपी (Town and Country Planning) के नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत घरों में दुकानें और कार्यालय खोलने की मंजूरी दी जाएगी।

किस तरह मददगार साबित होगा यह बदलाव
टीएंडसीपी आयुक्त श्रीकांत बनोठ ने बताया कि सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। इन बदलावों से व्यापारियों को नई मंजूरी मिलेगी। अब वे अपने घरों में कारोबार कर सकेंगे। इससे न केवल व्यापारियों, बल्कि आम जनता को भी लाभ होगा। रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

भूमि विकास नियम 2012 में अहम बदलाव
टीएंडसीपी ने भूमि विकास नियम 2012 के नियम 36 में बदलाव किया है। इससे मिक्स लैंड यूज और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (Transit Oriented Development) को शामिल किया गया है।

इसके अलावा, नियम 37 में भी बदलाव किया गया है। इससे अब आवासीय (residential) क्षेत्रों में लगाए गए प्रतिबंध (restrictions) को हटा दिया गया है।

इसमें विद्युत, तेल, जल और अन्य मशीनी शक्ति के उपयोग शामिल है। ऐसे में अब यह संभावना बढ़ गई है कि आने वाले समय में मोहल्लों और कॉलोनियों में छोटे-मोटे उद्योगों का भी विस्तार हो सकता है।

किस क्षेत्र में कौन सी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी

-आवासीय क्षेत्र : हानिकारक और खतरनाक उद्योग, भारी विनिर्माण उद्योग, गोदाम, प्रदूषणकारी उद्योग, बूचड़ख़ाने, कबाड़ख़ाने, संक्रामक रोग अस्पताल और अन्य।

-वाणिज्यिक क्षेत्र : भारी उद्योग, खतरनाक और विषाक्त रसायनों का भंडारण, विस्फोटक भंडारण, थोक भंडारण डिपो, हानिकारक और खतरनाक उद्योग और अन्य।

-औद्योगिक क्षेत्र : पूरी तरह से आवासीय टाउनशिप, विद्यालय, हानिकारक और खतरनाक उद्योग, भारी विनिर्माण उद्योग, गोदाम, प्रदूषणकारी उद्योग कसाईखाना, तेल डिपो, पेट्रोलियम, संक्रामक बीमारी वाले अस्पताल व अन्य।

-कृषि क्षेत्र : शहरी आवासीय अभिन्यास, शहरी वाणिज्यिक परिसर, बड़े वाणिज्यिक परियोजनाएं, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बड़े मॉल और अन्य।

-ग्रामीण आबादी, चारदीवारी शहरी क्षेत्र : हानिकारक-घातक उद्योग, असंगत भारी औद्योगिक गतिविधियों, हानिकारक और खतरनाक उद्योग भारी विनिर्माण उद्योग, गोदाम व अन्य।

जल निकाय, तालाब क्षेत्र : भूमि भराव, स्थायी निर्माण, औद्योगिक अपशिष्ट, डंपिंग, अतिक्रमण, खनन गतिविधियां, सुअर पालन, दुग्ध एवं मुर्गी पालन, दाह संस्कार, श्मशान, विद्युत दाह संस्कार।

वाणिज्यिक क्षेत्रों पर असर
वाणिज्यिक क्षेत्रों में अब खतरनाक रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि, ग्रीन श्रेणी के उद्योगों को अनुमति मिल सकती है। इससे ट्रैफिक और पार्किंग की समस्याएं बढ़ सकती हैं।

इससे पहले यूपी में मिली थी मंजूरी
बता दें की माकान में व्यापार करने की मंजूरी इससे पहले यूपी में दी गई थी। यहां फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक में लिया गया था। इसमें लोग बिना किसी बड़ी कानूनी प्रक्रिया के अपने घर के साथ व्यापार की मंजूरी दी गई थी।

उज्जैन में Apple का विरोध, ‘जय श्री राम’ और ‘सलाम वालेकुम’ प्रतिक्रिया के दावे पर मचा विवाद

उज्जैन

धार्मिक नगरी उज्जैन में तकनीक और आस्था आमने-सामने आ गए हैं। यहां एप्पल की वॉइस असिस्टेंट फीचर सिरी (Siri) अब हिंदू संगठनों के निशाने पर है। आरोप है कि सिरी जय श्री राम या जय माता दी बोलने पर कोई जवाब नहीं देती, जबकि सलाम वालेकुम कहने पर तुरंत प्रतिक्रिया देती है।ज्योतिषाचार्य, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने इसे धार्मिक भेदभाव बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। मांग की गई है कि एप्पल अपने फीचर्स में सुधार करे, अन्यथा आईफोन का बहिष्कार किया जाएगा।

सिरी सलाम वालेकुम पर तुरंत प्रतिक्रिया देती है- पवन पाठक
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी एप्पल का वॉइस असिस्टेंट सिरी उज्जैन में विवादों में घिर गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित पवन पाठक का दावा है कि उन्होंने 10 से 15 आईफोन पर इसकी जांच की। उनका कहना है कि जय श्री राम या जय माता दी बोलने पर सिरी कोई स्पष्ट जवाब नहीं देती या शांत रहती है, जबकि सलाम वालेकुम पर तुरंत प्रतिक्रिया देती है। वीएचपी के जिला अध्यक्ष राजेश आंजना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र में इसे सुनियोजित जिहाद करार दिया है। साथ ही हिंदू मानदंडों और आस्था पर कुठाराघात बताया है। पत्र के जरिए प्रदेश भर में खुले एप्पल के स्टोर को बंद करने की मांग की गई है। 

‘एप्पल की डेटा फीडिंग में पक्षपात’
पंडित पाठक ने इसे एप्पल की डेटा फीडिंग में पक्षपात बताया। उन्होंने कहा कि भारत एप्पल के लिए एक बड़ा बाजार है और यहां करोड़ों यूजर्स हैं। ऐसे में सभी धर्मों का समान सम्मान होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसमें सुधार नहीं किया गया तो उपभोक्ताओं से आईफोन का बहिष्कार करने की अपील की जाएगी।

‘धार्मिक भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा’
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज ने भी इसका समर्थन किया। स्थानीय आईफोन यूजर्स में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि तकनीक में किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद, जिला उज्जैन और बजरंग दल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। 

फिलहाल इस पर एप्पल की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई 
विहिप का कहना है कि जब तक एप्पल इस कथित तकनीकी खामी को दूर नहीं करता, तब तक प्रदेश में आईफोन के सभी स्टोर्स बंद कराए जाएं। फिलहाल एप्पल की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, उज्जैन से उठा यह विरोध अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है और बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

 

PM मोदी-जापान PM ताकाइची की अहम मुलाकात, फार्मा-डिफेंस समेत कई क्षेत्रों में हुए बड़े समझौते

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जापानी समकक्ष सनाए ताकाइची के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने जापानी पीएम को अपनी छोटी बहन और दूरदर्शी नेता बताया। दोनों देशों के बीच कितने करार हुए? दोनों प्रधानमंत्रियों ने किन बातों को खास तौर पर रेखांकित किया? 

भारत और जापान के बीच आज अहम द्विपक्षीय समझौते हुए। दोनों देशों के बीच हुए वार्षिक सम्मेलन के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अलावा फार्मा सेक्टर से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वार्ता भी की। अपनी गर्मजोशी और प्रधानमंत्री पद से इतर इंसानी रिश्ते के लिए दुनियाभर में मशहूर पीएम मोदी ने जापानी समकक्ष को अपनी छोटी बहन बताया।

पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ‘मेरी छोटी बहन, प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, दोनों प्रतिनिधिमंडलों के सम्मानित सदस्य, मीडिया के सदस्य, नमस्कार और कोनिचिवा (इसका मतलब जापानी भाषा में हैलो होता है)। 

उन्होंने आगे कहा कि भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तकाइची की भारत की पहली यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। इसके  साथ ही एक दूरदर्शी और व्यापक रूप से सम्मानित नेता भी हैं। वे नारा प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक प्रमुख केंद्र है।’

शिखर वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े फैसलों का ऐलान किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सनाए ताकाइची की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय लिख रही है. उन्होंने ताकाइची को ‘जापान फर्स्ट प्रधानमंत्री’ और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि भारत और जापान मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा विजन पर काम कर रहे हैं. इस दौरान रक्षा, निवेश, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। 

भारत-जापान रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाले बड़े फैसले

    16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते एक साल में भारत और जापान के बीच 120 नए कारोबारी समझौते हुए हैं. अब दोनों देशों का लक्ष्य अगले 10 सालों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश को आकर्षित करना है. यह निवेश विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। 

    रक्षा सहयोग भी इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा. भारत और जापान ने अपने पहले रक्षा सह-विकास (Defence Co-development) प्रोजेक्ट पर साइन किए. इसके तहत दोनों देश संयुक्त रूप से रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे. सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है। 

आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर बनी नई रणनीति
दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर साझा रोडमैप तैयार करने का भी ऐलान किया. इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाया जाएगा. साथ ही दोनों देशों ने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करने पर भी सहमति जताई, ताकि वैश्विक संकटों के दौरान उद्योगों पर असर कम पड़े। 

ग्रीन एनर्जी में नई शुरुआत, बायोगैस मिशन लॉन्च
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गोवर्धन पहल’ के तहत भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव की शुरुआत का भी ऐलान किया. इस पहल के जरिए देशभर में आधुनिक बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे. जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की ग्रामीण क्षमता को जोड़ने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। 

भारत-जापान में किन मुद्दों पर सहमति बनी?
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सप्लाई चेन, निवेश और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच सिर्फ आर्थिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों का भी मजबूत रिश्ता है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के विकास के साथ-साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि में भी अहम भूमिका निभाएगी। 

इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति
दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे मुक्त, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं. समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान को लेकर दोनों नेताओं ने साझा प्रतिबद्धता दोहराई. रक्षा अभ्यास, समुद्री सहयोग और आधुनिक तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनी। 

प्रधानमंत्री मोदी ने सनाए ताकाइची को ‘छोटी बहन’ क्यों कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने यह संबोधन दोनों देशों के बीच विश्वास, आत्मीयता और मजबूत रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताते हुए दिया. यह भारत-जापान संबंधों की गहराई और व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर बेहतर तालमेल को भी दर्शाता है। 

भारत-जापान शिखर सम्मेलन में सबसे बड़ा समझौता कौन-सा रहा?
सबसे अहम समझौता दोनों देशों के पहले रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट पर हुआ. इसके अलावा 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य, आर्थिक सुरक्षा रोडमैप और भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव भी बड़े फैसलों में शामिल रहे। 

भारत को इन समझौतों से क्या फायदा होगा?
जापानी निवेश बढ़ने से भारत में रोजगार, विनिर्माण, हाई-टेक उद्योग, बुनियादी ढांचे और हरित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. वहीं रक्षा और तकनीकी सहयोग भारत की रणनीतिक क्षमता को भी बढ़ाएगा। 

इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र पर पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री तकाइची की इस यात्रा के साथ, हम अपनी ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। आज, भारत और जापान दोनों ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियमों पर आधारित ‘इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र हमारी साझा प्राथमिकता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर, हमने आज कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। 

बेंगलुरु में ISRO मुख्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; परिसर खाली कराया गया

बेंगलुरु
कर्नाटक की राजधानीबेंगलुरु में स्थित इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के हेडक्वार्टर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया गया। मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड हेडक्वार्टर में जांच-पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के ऑफिस को धमकी भरा ईमेल आया था। इसके बाद इसरो के कैंपस को खाली कराया गया। कई टीमें संदिग्ध वस्तुओं की जांच की। अधिकारियों के अनुसार इसरो को धमकी भरा मेल गाजियाबाद से भेजा गया था। वहां पर उस व्यक्ति का पता लगाकर उसे पकड़ लिया गया है।

कैंपस खाली करवाकर सर्च ऑपरेशन
पुलिस के मुताबिक एहतियात के तौर पर सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया और इमारत की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली और बाद में धमकी को झूठा करार दिया गया है। पुलिस ने ईमेल भेजने वाले से पूछताछ कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में न्यू बीईएल रोड पर स्थित ‘अंतरिक्ष भवन’ में स्थित है।

29 जून को बम धमकी के फर्जी ईमेल भेजने वाला पकड़ा गया
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कई संगठनों और एक एयर इंडिया की उड़ान को बम की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़ा है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह व्यक्ति गाजियाबाद का निवासी है। 36 वर्षीय आरोपी 2008 से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है।

29 जून को भेजे गए इन ईमेल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय  सहित कई उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों में बम होने का दावा किया गया था। नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान के लिए भी एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया। इससे तत्काल सुरक्षा जांच शुरू हुई और कई एजेंसियों को सतर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि सभी संबंधित संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया गया था। मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया और धमकियां फर्जी पाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें ईमेल के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया गया। तकनीकी जांच के दौरान, पुलिस ने दो मेल खातों का विश्लेषण किया। इन खातों का उपयोग ईमेल भेजने के लिए किया गया था। ईमेल ट्रेल की विस्तृत जांच से जांचकर्ताओं को खातों से जुड़े एक मोबाइल नंबर तक पहुंचने में मदद मिली।

तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए, पुलिस दल ने 30 जून को संदिग्ध को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में खोज निकाला। पुलिस मौके पर पहुंची और उसके निवास पर संदिग्ध निशांत त्यागी की जांच की। पुलिस के अनुसार, त्यागी ने ओपन स्कूलिंग के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी की थी। उसने 2010 में स्नातक डिग्री कार्यक्रम में दाखिला लिया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया।

मानसिक स्वास्थ्य और आगे की जांच
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर 2008 से मानसिक बीमारी से पीड़ित है। वह वर्षों से विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में इलाज करा रहा है। उसके परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस को उसके लंबे चिकित्सा इतिहास के बारे में बताया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई। ईमेल भेजने के पीछे के मकसद और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है, जिसके परिणाम के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसरो का गतिविधियों का होता है प्रबंधन
इसरो का मुख्यालय होने के कारण इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक चौबंद रहती है। बेंगलुर से इसरो की सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों का प्रबंधन किया जाता है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। मूल इकाई (INCOSPAR) के रूप में यह 1962 में अस्तित्व में आया था और 1972 में इसे अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत लाया गया। अंतरिक्ष भवन जो कि इसरो का प्रशासनिक केंद्र है। यह लगभग 4.3 एकड़ (17,400 वर्ग मीटर) के परिसर में फैला हुआ है। इसरो के मुख्यालय को उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स की गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरु पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस के संपर्क में है। अरेस्ट किए गए शख्स से पूछताछ करने के साथ उसका बैकग्राउंड खंगाला जा रहा है। 

‘अल्फा’ एडवांस बुकिंग सुस्त, पहले दिन 5-8 करोड़ की ओपनिंग का अनुमान

आलिया भट्ट और शर्वरी वाघ की एक्‍शन स्‍पाई फिल्‍म ‘अल्‍फा’ शुक्रवार 03 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ‘एक था टाइगर’ के साथ 2012 में शुरू हुए ‘YRF स्पाई यूनिवर्स’ की यह 7वीं फिल्‍म है। बुधवार, 01 जुलाई से इसकी एडवांस बुकिंग शुरू गई है, लेकिन पहले 24 घंटों में टिकट बुकिंग के जो आंकड़े आए हैं, वह सुस्‍त हैं। गुरुवार दोपहर 3 बजे तक फिल्‍म के लिए महज 18579 टिकटों की प्री-बुकिंग हुई है। ‘धुरंधर’ फ्रैंचाइजी की ऐतिहासिक सफलता के बाद देश में जासूसी फिल्‍मों को लेकर एक बहुत ऊंचा पैमाना तय हो चुका है। यही कारण है कि ‘अल्‍फा’ को ऑनलाइन आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में फिल्‍म को बॉक्‍स ऑफिस पर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जैसे हालात हैं, कम से कम ओपनिंग डे पर यह ‘YRF स्पाई यूनिवर्स’ की सबसे कमजोर शुरुआत होने वाली है।

इसमें कोई दोराय नहीं है कि ALPHA यदि ‘धुरंधर फ्रैंचाइजी’ से पहले रिलीज हुई होती, तो इसकी किस्‍मत कुछ और होती। लेकिन आदित्‍य धर की फिल्‍म को लेकर दर्शकों में जैसा क्रेज रहा है, उसके बाद अब किसी भी स्‍पाई फिल्‍म की तुलना सामान्‍य घटना है। एक और समस्‍या यह है कि फिल्‍म में भले ही बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे दिग्‍गज भी हैं, लेकिन आलिया भट्ट एक ऐसा नाम हैं, जिनकी काबिलियत के बावजूद सोशल मीडिया उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती रही है। इन सब का असर फिल्‍म पर भी पड़ेगा।

‘अल्‍फा’ की एडवांस बुकिंग रिपोर्ट
Sacnilk के मुताबिक, ‘अल्‍फा’ के लिए गुरुवार सुबह 10 बजे तक एडवांस बुकिंग से महज ₹44.89 लाख की ग्रॉस कमाई हुई थी। जबकि दोपहर 3 बजे तक यह ₹69.36 लाख तक ही पहुंची है। ब्‍लॉक सीटों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा ₹2.06 करोड़ तक पहुंचता है। इस रफ्तार से प्री-बुकिंग की कमाई में बहुत ज्यादा अंतर होता नहीं दिख रहा है। यदि नेशनल मल्‍टीप्‍लेक्‍स चेन्स के शुरुआती डेटा को देखें तो फ‍िल्म अभी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। 24 घंटे पहले, बुधवार दोपहर तक ‘अल्फा’ के तीन प्रमुख स‍िनेमा चेन्स में 700 टिकट बिके थे। इनमें INOX के 500 से ज्यादा टिकट, PVR के 150 टिकट और सिनेपोलिस के 50 टिकट शामिल हैं। दुखद बात यह है कि प्री-बुकिंग की रफ्तार में वह तेजी नहीं दिख रही है, जिससे उम्‍मीद जगे।

बांद्रा में स्पॉट हुईं ‘अल्फा गर्ल्स’ आलिया भट्ट और शरवरी वाघ, देखिए दोनों कितनी खूबसूरत लग रहीं

‘धुरंधर’ की सफलता के बाद दर्शकों का नकारात्मक भाव
रणवीर सिंह स्‍टारर ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ न सिर्फ बॉक्स ऑफ‍िस पर ब्‍लॉकबस्‍टर रही, बल्‍क‍ि इसने कई नए रिकॉर्ड बनाए। हाल के समय में भारतीय सिनेमा की यह सबसे यादगार फ‍िल्मों में शामिल है। आदित्‍य धर की इस फिल्‍म ने स्पाई-जॉनर के अंदाज और उमंग, दोनों को बदलकर रख दिया है। एक ऐसा बेंचमार्क सेट किया है, जहां तक पहुंचना ‘YRF स्पाई यूनिवर्स’ की स्टाइलिश और कर्मश‍ियल एक्शन फ‍िल्मों के लिए थोड़ा मुश्‍क‍िल है। ‘धुरंधर फ्रैंचाइजी’ की कहानी असल जिंदगी से प्रेरित थी। अंदाज रॉ था। यही कारण ही दर्शक और आलोचक, दोनों ने इसकी तारीफ की। ऐसे में अब पर्दे पर दर्शक इस जॉनर की फिल्‍मों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए कंटेंट को लेकर दशर्कों में नाराजगी की भावना है। इसका नकारात्‍मक प्रभाव ‘अल्‍फा’ के बिजनस पर पड़ेगा।

नॉन हॉलिडे रिलीज के कारण भी ‘अल्‍फा’ पर असर
‘अल्फा’ एक नॉन-हॉलिडे रिलीज है। यानी यह बिना छुट्टी वाले शुक्रवार को सिनेमाघरों में आ रही है। यदि यह किसी छुट्टी के दिन रिलीज होती, तो ओपनिंग डे इसे ज्यादा कमाई करने का मौका मिलता। लेकिन अब इसे दर्शक की कमी का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही अक्षय कुमार की फ‍िल्‍म ‘वेलकम टू द जंगल’ भी है, जो फैमिली ऑडियंस को हंसा रही है। इस कारण स्क्रीन शेयरिंग में भी कुछ दिक्कतें आ सकती हैं।

‘अल्फा’ बॉक्‍स ऑफिस प्रेडिक्‍शन: पहले दिन कितनी होगी कमाई
कुल मिलाकर, ‘अल्‍फा’ YRF के ‘स्पाई यूनिवर्स’ की फिल्‍म होने के बावजूद पहले दिन संघर्ष करती हुई दिख रही है। बल्‍क‍ि, यह ओपनिंग डे पर इस फ्रैंचाइजी की सबसे कमजोर फिल्‍म साबित होने वाली है। सुस्‍त एडवांस बुकिंग, ‘धुरंधर’ के बाद बदली जनभावना और ‘वेलकम टू द जंगल’ से कंपीटिशन को ध्‍यान में रखते हुए, अनुमान यही है कि ALPHA पहले दिन भारतीय बॉक्‍स ऑफिस ₹5-₹8 करोड़ की नेट कमाई ही कर पाएगी। हां, यदि फिल्‍म वाकई जबरदस्‍त हुई तो वर्ड-ऑफ-माउथ के बूते यह पहले वीकेंड में धूम मचाने का दम भी रखती है।

‘YRF स्पाई यूनिवर्स’ की फिल्में और ओपनिंग डे पर देश में नेट कमाई:
    एक था टाइगर – ₹32.92 करोड़ (2012)
    टाइगर जिंदा है – ₹34.10 करोड़ (2017)
    वॉर – ₹53.35 करोड़ (2019)
    पठान – ₹57.00 करोड़ (2022)
    टाइगर 3 – ₹44.50 करोड़ (2023)
    वॉर 2 – ₹52.00 करोड़ (2025)

YRF ने थ‍िएटर्स और मल्‍टीप्‍लेक्‍स चेन्‍स को दिए हैं खास न‍िर्देश
हालांकि, ‘अल्‍फा’ की रिलीज के लिए YRF ने डिस्ट्रिब्यूशन की खास रणनीति बनाई है। इसके लिए एग्‍ज‍िबिटर्स को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कोई शो सुबह जल्दी शुरू नहीं होगा। फिल्‍म का पहला शो शुक्रवार सुबह 9:30 बजे ही शुरू हो। इसके अलावा टिकट की कीमतें भी हिसाब से तय की गई हैं। कोश‍िश यही है कि ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को थ‍िएटर पर खींचा जा सके। स्क्रीन-शेयरिंग के लिए भी कड़े नियम बनाए हैं। इसके लिए 2-स्क्रीन वाले सिनेमाघरों में कम से कम 4 शो, बड़े 4-स्क्रीन वाले मल्टीप्लेक्स में कम से कम 8 शो रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इन सब का कितना फायदा मिलता है, यह रिलीज के बाद ही पता चलेगा।

 

CM साय के निर्देश पर अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, JCB समेत कई वाहन जब्त, लाखों का जुर्माना

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा सख्त और सतत अभियान चलाया जा रहा है। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, पत्थर, मिट्टी एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है।

वाहनों को जब्त कर नियमानुसार अर्थदंड एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शासन का उद्देश्य प्रदेश के खनिज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है।

राजनांदगांव में 52 मामलों में कार्रवाई, 18.95 लाख रुपये का अर्थदंड
इसी क्रम में राजनांदगांव जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के 52 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इनमें अवैध उत्खनन के 9, परिवहन के 41 तथा भंडारण के 2 प्रकरण शामिल हैं। वहीं डोंगरगढ़ तहसील के ग्राम आसरा में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान नदी में रेत उत्खनन प्रतिबंधित पाया गया तथा मौके पर कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली।

बालोद में चेन माउंटेड मशीन जब्त
बालोद जिले के ग्राम कसही में अवैध पत्थर उत्खनन करते पाए जाने पर एक चेन माउंटेड (PC-130-7) मशीन को जब्त कर सील किया गया। संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है।

बलरामपुर में टिपर और 90 घनमीटर रेत जब्त
बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने राजपुर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुर और बसंतपुर में कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक टिपर जब्त किया। वहीं बसंतपुर स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स इकाई में अवैध रूप से भंडारित लगभग 90 घनमीटर रेत भी जब्त कर संचालक को नोटिस जारी किया गया।

सरगुजा में जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहन जब्त
सरगुजा जिले में शिकायतों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध मिट्टी, मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में प्रयुक्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहनों को जब्त किया गया। सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है। संशोधित नियमों के अनुसार अब शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2 हजार रुपये प्रति टन, जो भी अधिक होगा, के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का बाजार मूल्य भी वसूला जाएगा।

नियमित गश्त और संयुक्त अभियान आगे भी रहेंगे जारी
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और संयुक्त प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

कमजोर मानसून पर CM साय का किसानों को भरोसा, बोले- सरकार साथ है, बारिश के हिसाब से करें खेती

रायपुर.

अल नीनो के असर से मानसून के कमजोर होने पर मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि किसानों के साथ सरकार है. मौसम विभाग ने पहले से ही बता दिया है कि मानसून कमजोर रहेगा. हम भी किसानों को लगातार अवगत करा रहे हैं कि मानसून के हिसाब से खेती-किसानी की योजना बनाएं.

जांजगीर चांपा और सक्ती के दौरे पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज सक्ती जा रहे हैं, वहाँ पर भाजपा जिला कार्यालय का भूमिपूजन है. इस दौरान मंत्रालय में गत दिवस हुई समीक्षा बैठक के संबंध में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस साल के बजट में पाँच मिशन बनाये हैं, उसमे एक AI मिशन भी है. जिस तरह से AI की उपलब्धता हर क्षेत्र में बढ़ रही हैं, उसके प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई है. चरण पादुका को लेकर जारी टेंडर पर हाईकोर्ट के रोक लगाए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि संज्ञान लिए हैं.

पिछली कांग्रेस सरकार में योजना बंद हुई थी. अब हमारी सरकार ने फिर से शुरू किया है. लगातार हर साल इसका लाभ देंगे. वहीं IIM में 4 और 5 जुलाई को होने वाले चिंतन शिविर के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंतन शिविर का यह तीसरा साल होगा. गुड गवर्नेंस को लेकर चर्चा होगी. सरकार के कामकाज पर फोकस रहेगा. उससे सरकार चलाने में बहुत मदद मिलती है.

3 जुलाई को रायपुर में दौड़ेगा छत्तीसगढ़, होगा भव्य ‘सहकार संकल्प दौड़’ का आयोजन

3 जुलाई को रायपुर में दौड़ेगा छत्तीसगढ़, होगा भव्य ‘सहकार संकल्प दौड़’ का आयोजन

सहकारिता, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देने एक साथ जुटेंगे प्रदेशवासी

रायपुर, 
 छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग द्वारा सहकारिता की भावना को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के उद्देश्य से 3 जुलाई को राजधानी रायपुर में ‘सहकार संकल्प दौड़’ का भव्य आयोजन किया जाएगा।
यह आयोजन “सहकारिता की भावना के साथ, एक कदम समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर” थीम पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य लोगों में सहयोग, एकता, स्वास्थ्य और सामूहिक विकास का संदेश देना है।

सुबह 6 बजे मरीन ड्राइव से होगी शुरुआत
सहकार संकल्प दौड़ का आयोजन 3 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 6 बजे रायपुर के मरीन ड्राइव (तेलीबांधा) में किया जाएगा। इसमें प्रदेशभर से नागरिक, युवा, विद्यार्थी, किसान, सहकारी संस्थाओं के सदस्य और विभिन्न वर्गों के लोग भाग लेंगे।

विजेताओं को मिलेंगे आकर्षक पुरस्कार
दौड़ में पुरुष और महिला वर्ग के प्रतिभागियों के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इससे नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा।

सहकारिता और स्वस्थ जीवन का संदेश
सहकार संकल्प दौड़ केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि जनजागरण का अभियान है। इसके माध्यम से सहकारिता को मजबूत बनाने, समाज में सहयोग की भावना विकसित करने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया जाएगा।
इस आयोजन का उद्देश्य “सहकारिता से समृद्धि”, “साथ चलें, साथ बढ़ें” और “स्वस्थ समाज, समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील
छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की है। विभाग का मानना है कि जनभागीदारी से ही सहकारिता का अभियान और अधिक मजबूत होगा तथा समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प साकार होगा।

MP में जी-राम-जी स्कीम लागू, 125 दिन रोजगार की गारंटी; 15 दिन में काम नहीं तो मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

भोपाल 

केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025′ (VB-G Ram-G) के तहत संशोधित मजदूरी दरों को लागू कर दिया है. नया कानून एक जुलाई से लागू हो गया है. इसमें मनरेगा में 100 की बजाय अब 125 दिनों की रोजगार गारंटी मिलेगी.सरकार के अनुसार, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत राष्ट्रीय औसत मजदूरी बढ़कर 327.4 रुपये रोजाना हो गई है. मनरेगा में पहले यह 298.8 रुपये प्रतिदिन थी. इसमें करीब 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि एक जुलाई से प्रभावी नई मजदूरी दरें सभी 34 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और मजदूरी क्षेत्रों में बढ़ाई गई हैं.मंत्रालय ने बताया कि 300 रुपये प्रतिदिन की नयी अंतरिम आधार मजदूरी दर तय की गई है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना के तहत अधिसूचित कोई भी मजदूरी इससे कम न हो. सरकार के अनुसार, देशभर में औसतन मजदूरी दरों में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। 

रोजगार की गारंटी 125 दिन होगी
मंत्रालय ने कहा कि नया अधिनियम पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिन तक मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है, जबकि मौजूदा ढांचे में यह सीमा 100 दिन थी. 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर 300 रुपये की नई अंतरिम आधार दर तक पहुंचाया गया है. वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी. अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में लगभग 24.5 प्रतिशत की सबसे अधिक वृद्धि की गई है।

15 दिन में मजदूरी का भुगतान नहीं होने पर 16वें दिन से हर दिन की देरी पर 0.05% प्रतिदिन की दर से कंपनसेशन मिलेगा। योजना के प्रस्तावित नियम कैबिनेट में पेश किए जाने थे, लेकिन मंगलवार और बुधवार को कैबिनेट की बैठक नहीं हुई।

इसलिए नियमों का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया। मप्र सरकार जल संरक्षण और बांध जैसे बड़े प्रोजेक्ट में भी इसे लागू करने की तैयारी कर रही है। योजना का क्रियान्वयन 60:40 के अनुपात में होगा, यानी केंद्र 60 फीसदी पैसा देगा और राज्य सरकार को 40 फीसदी वित्तीय भार उठाना पड़ेगा।

1. कितने दिन का रोजगार मिलेगा? योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक पात्र परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन का अकुशल रोजगार मिलेगा। यह मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है। परिवार के वयस्क सदस्य स्वेच्छा से काम कर सकेंगे।

2. 15 दिन में काम नहीं मिला तो क्या होगा? यदि आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक दैनिक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले 30 दिन के लिए मजदूरी दर का 25 फीसदी और उसके बाद में 50 फीसदी भत्ता मिलेगा।

3. मजदूरी कब और कैसे मिलेगी? काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी साप्ताहिक आधार पर दी जाएगी। किसी भी स्थिति में काम करने की तारीख से 15 दिन के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा।

4. मजदूरी में देरी हुई तो क्या होगा? यदि मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन बाद भी मजदूरी नहीं मिलती, तो 16वें दिन से भुगतान होने तक बकाया मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05% की दर से मुआवजा (कंपनसेशन) दिया जाएगा। इससे समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।

5. आवेदन की प्रोसेस क्या होगी? रोजगार के लिए आवेदन मौखिक, लिखित या डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। आवेदन ग्राम पंचायत, वार्ड सदस्य, कार्यक्रम अधिकारी या अधिकृत पोर्टल पर किया जा सकेगा। आवेदन की रसीद भी अनिवार्य रूप से मिलेगी।

6. कौन कर सकेगा आवेदन? जिस ग्रामीण परिवार का पंजीकरण होगा और जिसके वयस्क सदस्य का नाम रोजगार गारंटी कार्ड में दर्ज होगा, वही योजना के तहत काम मांग सकेगा। परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य आवेदन कर सकता है।

7. गांवों में किस तरह के काम होंगे? योजना के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कें, सिंचाई, आजीविका बढ़ाने वाले कार्य, मूलभूत ग्रामीण अधोसंरचना और जलवायु परिवर्तन से बचाव से जुड़े विकास कार्य कराए जाएंगे। इनका उद्देश्य गांवों की स्थायी संपत्ति तैयार करना है।

8. मॉनिटरिंग कैसे और कौन करेगा? योजना में जीपीएस, मोबाइल आधारित उपस्थिति, रियल-टाइम डेशबोर्ड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा। इससे फर्जीवाड़ा रोकने, भुगतान की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया गया है।

9. कमजोर और वंचित वर्ग को प्राथमिकता राज्य सरकार वंचित और जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता से रोजगार उपलब्ध कराएगी। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों की आजीविका सुरक्षा को मजबूत करना है।

10. सिर्फ रोजगार नहीं, गांवों के विकास पर भी फोकस योजना का लक्ष्य केवल मजदूरी देना नहीं, बल्कि ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के तहत गांवों का समग्र विकास करना है। पंचायत स्तर की योजनाओं को जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विकास योजनाओं से जोड़कर दीर्घकालिक ग्रामीण विकास सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

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