18 जिलों में होंगे नर्मदा जयंती कार्यक्रम, नदी संरक्षण से समाज को भी जोड़ें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। यह आबादी नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर ही निर्भर है। नर्मदा हमारी धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे हर तरह से निर्मल और अविरल बनाए रख कर नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न आयोजन किए जायें। नर्मदा और इसकी सहायक नदियों सहित पूरे प्रदेश में नदियों के संरक्षण के लिए समाज को विशेषकर युवाओं को जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की बैठक में इस नदी क्षेत्र के विकास के निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा के विकास से जुड़ना एक पवित्र काम है। सभी विभाग के अधिकारी पूरे समर्पण से यह काम करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूर्णत: अतिक्रमण मुक्त कर पथिकों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाये और परिक्रमा मार्ग पर संकेतक (सूचना पट्टिकाएं) भी लगाए जाए। नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर जहां मंदिर हैं वहां श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र भी स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ कराने की व्यवस्था भी कराएगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्मदा समग्र से समन्वय कर नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सभी आश्रमों की सूचियां तैयार कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देशित किया कि वे सामूहिक प्रयास कर किसानों को घाटी क्षेत्र में नकद फसलों की पैदावार लेने के लिए प्रेरित करें।

बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि नर्मदा नदी के सीमावर्ती प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर आयोजन किए जाएंगे। माँ नर्मदा की भव्य आरती, नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाएंगे।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि माँ नर्मदा के जल को सदैव निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए विभाग द्वारा ‘नमन मिशन’ तैयार किया गया है। यह मिशन मां नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्राधिकृत होगा। मुख्यमंत्री इस नमन मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिशन की साधारण सभा के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव इस मिशन के सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मिशन के सह-सचिव होंगे। मिशन को क्रियान्वित करने के लिए इस साल 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है।

एसीएस श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पहले से विद्यमान 3 समितियों (मंत्रिमण्डल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति) का भी सहयोग लिया जाएगा। मिशन के संचालन में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय विकास, वन, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, वित्त, पर्यटन, विधि, उद्यानिकी, मत्स्य, राजस्व, जनजातीय कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, धर्मस्व, योजना एवं आर्थिकी सांख्यिकी एवं खनिज संसाधन विभाग सदस्य के रूप में तथा 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे। इस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राज्य अनुदान की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने बताया कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए 32 लाख रुपये का योजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी क्षेत्र में करीब 415 हैक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग 2.70 लाख पौधे लगायेगा।

अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नर्मदा घाटों को निर्मल बनाये रखने की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा कोष पोर्टल भी बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों के सीएमओ को नर्मदा क्षेत्र के विकास के लिए नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 एसटीपी तैयार किए जा रहे है। यह काम दिसम्बर 2027 तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के विकास के लिए यहां स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) तैयार की जाएगी। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि महेश्वर में 18 होमस्टे तैयार किए है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 13 गावों में 79 होमस्टे तैयार किए गये हैं।

बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, खनिज साधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, योजना आर्थिकी सांख्यिकी, एवं अन्य विभागों ने भी नर्मदा घाटी क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।

 

78 कार्यालय सहायक ग्रेड- तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति

भोपाल 

मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण एवं युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन के 78 प्रशिक्षुओं की नई भर्ती एवं नियुक्ति की गई है।

नवनियुक्त सभी 78 कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं ने 29 मई को पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेंटर (PDTC), भोपाल में कार्यभार ग्रहण कर प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रारंभिक प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत उन्हें कंपनी के विभिन्न शहर एवं संचालन-संधारण वृत्तों में प्रशिक्षण के शेष मॉड्यूल पूर्ण करने के लिये पदस्थ किया गया है। इससे प्रशिक्षुओं को मैदानी स्तर पर कार्य का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा तथा वे भविष्य में अधिक दक्षता एवं प्रभावशीलता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे।

यह भर्ती कंपनी के मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे प्रदेश के योग्य एवं शिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही कंपनी के विभिन्न कार्यालयों एवं क्षेत्रीय इकाइयों में मानव संसाधन की आवश्यकता की पूर्ति की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया गया है। कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति से कंपनी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक गति मिलेगी तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त होगी।

 

UP के 3.7 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 7वें साल भी नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम

लखनऊ 
 उत्तर प्रदेश के करीब 3.70 करोड़ बिजली ग्राहकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बिजली दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि राज्य में फिलहाल बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. इसके साथ ही नोएडा के ग्राहकों को मिलने वाली 10 फीसदी बिजली दर छूट भी पहले की तरह जारी रहेगी. आयोग के इस फैसले से घरेलू, कमर्शियल और औद्योगिक ग्राहकों को महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिलेगी। 

लगातार 7वें साल नहीं बढ़ीं बिजली दरें
आयोग के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. बीते 7 वर्षों से प्रदेश में बिजली की टैरिफ दरें स्थिर रखी गई हैं, जिससे करोड़ों ग्राहकों पर एक्‍स्‍ट्रा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कई राज्यों में बिजली दरों में संशोधन किए जा चुके हैं। 

नियामक आयोग ने नोएडा क्षेत्र के उपभोक्ताओं को मिलने वाली 10 प्रतिशत बिजली दर छूट को भी जारी रखने का फैसला किया है. इससे नोएडा के लाखों घरेलू और व्यावसायिक ग्राहकों को पहले की तरह रियायती दरों पर बिजली मिलती रहेगी। 

EV चार्जिंग स्टेशनों को मिलेगा विशेष लाभ
उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के मकसद से आयोग ने ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी अहम फैसला लिया है. अब सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. माना जा रहा है कि इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहन मिलेगा। 

उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का आभार व्यक्त किया है. परिषद का कहना है कि बिजली दरों को स्थिर रखने का निर्णय प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में है और इससे आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों को भी राहत मिलेगी। 

अमेरिका में गर्भवती विदेशी महिलाओं की एंट्री पर लग सकती है रोक, Birthright Citizenship के बाद ट्रंप का नया प्लान

वॉशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई सालों से जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) खत्म करने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन अदालत से उनके इस कदम को बड़ा झटका लगा है. हालांकि फिर भी उन्होंने अपनी कोशिशों को जारी रखा हुआ है. ट्रंप प्रशासन ने इसे लेकर एक नई योजना पर काम करना शुरू किया है. अब इसे उन महिलाओं की तरफ मोड़ा जा रहा है जो बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आती हैं, ताकि उनका बच्चा बर्थराइट सिटिजनशिप के तहत अमेरिका का नागरिक बन सके। 

बाहरी प्रेग्नेंट महिलाओं की एंट्री बैन की तैयारी
अमेरिकी वेबसाइट एक्सिओस की खबर के मुताबिक, अगर ट्रंप प्रशासन इसके खिलाफ नियम बनाने में कामयाब हुआ तो प्रेग्नेंसी, यात्रा और नागरिकता को लेकर एक नया इमिग्रेशन बैटल शुरू हो जाएगा. इससे बहस अमेरिका में चाइल्ड बर्थ के अधिकारों को चुनौती देने से हटकर दूसरे देशों से अमेरिका आने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं पर बैन लगाने की ओर मुड़ जाएगी. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने के उनके आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की थी. ट्रंप ने अदालत से अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता देने से इनकार करने की मांग की थी जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। 

बर्थ राइट सिटीजनशिप पर ट्रंप का नया प्लान
कोर्ट से झटका लगने के बाद फेडरलिस्ट पार्टी के संस्थापक शॉन डेविस जैसे MAGA समर्थकों ने सुझाव दिया कि प्रेग्नेंट विदेशी महिलाओं के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए. ट्रंप के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कोर्ट के  फैसले के बाद कहा कि देश को इस बारे में सावधानी से सोचने की जरूरत है, भले ही यह अस्थायी रूप से ही क्यों न हो. उन्होंने कहा कि बर्थ राइट सिटीजनशिप से दूसरे देशों के नागरिकों के बच्चे अमेरिकी नागरिक बनकर सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठा सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने एक्सियोस को ईमेल से भेजे एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप बर्थराइट सिटीजनशिप के मूल्य की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, यही वजह है कि अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस को इस मामले पर तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास अमेरिकी नागरिकता की सुरक्षा के लिए कई उपाय हैं। 

महिलाओं का अमेरिकी नागरिकता वाला प्लान 
उन्होंने इसे बर्थ टूरिज्म बताते हुए कहा कि ये तब होता है जब बाहरी महिलाएं अमेरिका में खात तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए आती हैं, ताकि उनके बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके. न्याय विभाग ने  मंगलवार को एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें इस बात की जांच करने की अपील की गई है। 

सहायक अटॉर्नी जनरल कॉलिन मैकडॉनल्ड ने एक्स को भेजे गए मैमो में कहा कि अमेरिका के आपराधिक कानून पहले से ही इन तथाकथित बर्थ टूरिज्म स्कीम्स को प्रतिबंधित करते हैं. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कई स्कीम्स झूठे वीजा आवेदन से शुरू होती हैं, लोग झूठ बोलकर अमेरिका में रहने का समय और मकसद को छिपाते हैं। 

हर साल बाहरी महिलाएं 20,000 से 26,000 बच्चों को देती हैं जन्म

उन्होंने कहा कि इनमें से कई मामलों में वीजा धोखाधड़ी के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन  वायर धोखाधड़ी, स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर पहचान चोरी के आरोपों पर भी विचार किया जाना चाहिए. आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी सरकार विदेशी महिलाओं से पैदा हुए बच्चों की संख्या का रिकॉर्ड नहीं रखती है, लेकिन अनुमान के मताबिक, हर साल 20,000 से 26,000 के करीब बच्चे अमेरिका में जन्म लेते हैं। 

बेंगलुरु की खदान में ग्रेनाइट का विशाल पत्थर गिरा, मध्य प्रदेश के 5 और छत्तीसगढ़ के 1 मजदूर की मौत

बेंगलुरु

कर्नाटक के बेंगलुरु शहरी जिले में गुरुवार को एक ग्रेनाइट खदान में हुए भीषण हादसे में सात प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। मृतकों में पांच मजदूर मध्य प्रदेश, एक छत्तीसगढ़ और एक कर्नाटक के यादगीर जिले का निवासी था। पुलिस ने शुरुआती जांच में हादसे के पीछे गंभीर लापरवाही की आशंका जताई है।

यह हादसा बेंगलुरु शहरी जिले के मडापट्टना क्षेत्र में हुआ, जहां खदान में ऊपर से ग्रेनाइट का विशाल पत्थर खिसककर नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। पत्थर की चपेट में आने से सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय खदान में कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें चार मजदूर सुरक्षित बच गए।

खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे

सेंट्रल रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एस. गिरीश ने बताया कि खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे। ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक एक बड़ा ग्रेनाइट पत्थर नीचे खिसक गया और वहां काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा। उन्होंने कहा कि इस हादसे में घायल सभी पांच मजदूरों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।

शुरुआती जानकारी में हुई थी मृतकों की पहचान में गलती

हादसे के तुरंत बाद पुलिस सूत्रों ने बताया था कि अधिकांश मृतक बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन बाद में जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि पांच मृतक मध्य प्रदेश के निवासी थे। वहीं, कुछ समय के लिए मृतकों की संख्या आठ होने की भी चर्चा रही, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। अधिकारियों के अनुसार हादसे में कुल सात लोगों की ही जान गई है।
मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा

खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अधिकारी रंगप्पा ने बताया कि खदान संचालक ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है।

नई खनन गाइडलाइन बनाएगी सरकार

हादसे पर शोक जताते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में खनन गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन लागू करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि मिट्टी और चट्टान के खिसकने के कारण हुआ है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता हादसे के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना है। मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी, लेकिन उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि खदान संचालन की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी। यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्य में अवैध खनन गतिविधियों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार इन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगी।

विपक्ष और केंद्रीय मंत्री ने सरकार को घेरा

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया और प्रभावशाली लॉबी मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी कर केवल मुनाफे पर ध्यान दे रही है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।

वहीं, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने भी राज्य सरकार को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में मजदूरों की जान से खिलवाड़ न हो।
घटनास्थल का मंजर था बेहद भयावह

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। विशाल ग्रेनाइट पत्थर के नीचे आने से माल ढोने वाले वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक ट्रैक्टर भी बुरी तरह चकनाचूर हो गया। मृतकों और घायलों के परिजनों के विलाप से पूरे इलाके में मातम पसरा रहा।

यादगीर निवासी एक मृतक के परिजन ने बताया कि वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और बेटियों की शादी के बाद कर्ज चुकाने के लिए बेंगलुरु में मजदूरी कर रहा था। उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

 

पीएमईजीपी योजना से बदली रमेश नाग की जिंदगी

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शासकीय योजनाएं प्रभावी साबित हो रही हैं। इन्हीं योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ने बीजापुर जिले के निवासी रमेश नाग के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। इस योजना की मदद से उन्होंने सीमेंट ब्रिक्स निर्माण इकाई स्थापित कर अपना सफल व्यवसाय शुरू किया है।

पूंजी की कमी बनी थी सबसे बड़ी चुनौती

रमेश नाग लंबे समय से अपना सीमेंट ब्रिक्स निर्माण व्यवसाय शुरू करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो पा रहा था। उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, बीजापुर से संपर्क किया, जहां उन्हें पीएमईजीपी योजना की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन मिला।

10 लाख रुपये का ऋण और 3.50 लाख रुपये का अनुदान मिला

योजना के तहत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बीजापुर के सहयोग से रमेश नाग को 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके साथ ही उन्हें लगभग 3.50 लाख रुपये का मार्जिन मनी (अनुदान) भी प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने आधुनिक मशीनों के साथ सीमेंट ब्रिक्स निर्माण इकाई स्थापित की।

स्वरोजगार के साथ दूसरों को भी मिला रोजगार

आज रमेश नाग की इकाई में गुणवत्तापूर्ण सीमेंट ब्रिक्स का उत्पादन हो रहा है। इससे स्थानीय निर्माण कार्यों की जरूरतें पूरी हो रही हैं और आसपास के लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई है।

सरकारी योजना ने पूरा किया आत्मनिर्भर बनने का सपना

रमेश नाग बताते हैं कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) का लाभ नहीं मिलता, तो अपना उद्योग शुरू करना संभव नहीं था। आज वे सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बना यह प्रयास

रमेश नाग की सफलता यह साबित करती है कि यदि शासकीय योजनाओं का सही समय पर लाभ लिया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भर बनना संभव है। उनकी सफलता आज बीजापुर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दे रही है।

वीबी जी राम जी योजना का सरगुजा जिले में शुभारंभ

रायपुर

 विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी के लिए जिला स्तरीय जन सम्मेलन सह शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को अंबिकापुर जिला पंचायत सभाकक्ष में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आंध्रप्रदेश राज्य के तिरुपति जिले से केन्द्रीय  ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना का राष्ट्रीय स्तर पर किया गया।

कार्यक्रम में मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन है। इसका उद्देश्य गांव को समृद्ध बनाना, श्रम को सम्मान देना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य की मजबूत नींव हमारे गांव में रखी जाएगी, जब गांव सशक्त होंगे, तभी भारत विकसित होगा। पहले 100 दिन का रोजगार था, अब 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
भारत सरकार ने श्रमिकों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई 2026 से मनरेगा श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 से 300 रूपए कर दी है। यह केवल मजदूरी में वृद्धि नहीं, बल्कि हमारे श्रमिक भाई-बहनों के परिश्रम, समर्पण और आत्म सम्मान का सम्मान है। अब हमारा लक्ष्य केवल अस्थायी कार्य नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी एवं उपयोगी परियोजनाओं का निर्माण करना है, जो आने वाले हमारे पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी हो। व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, जल संरक्षण, खेत तालाब और सिंचाई सुविधा का विस्तार करना, ग्रामीण अधोसंरचना के निर्माण काम को प्राथमिकता देना है। इन कार्यों से रोजगार भी मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा।

उन्होंने उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों, स्वयं सहायता समूहों के दीदियों, युवाओं तथा ग्रामीण नागरिकों से आग्रह करते हुए कहा कि इसे केवल योजना न समझें, बल्कि अपने गांव के विकास का जन अभियान बनाएं। जब समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करेंगे, तभी विकसित गांव और विकसित भारत का सपना साकार होगा। प्रत्येक कार्य पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ किया जाए, प्रत्येक कार्य का भौगोलिक चिन्हांकन तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। गांव सशक्त होगा तो प्रदेश सशक्त होगा और प्रदेश सशक्त होगा तो हमारा देश सशक्त होगा। आप सभी इस मिशन से जुड़ें, अधिक से अधिक लोगों को जोड़ें और अपने गांव के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

जिला पंचायत अध्यक्ष मती निरुपा सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने दिशा में वीबी जी राम जी योजना मील का पत्थर साबित होगी। योजना के तहत वे काम होंगे जिनकी उस गांव में आवश्यकता होगी। कलेक्टर  अजीत वसंत ने कहा कि योजना के माध्यम से हम ग्रामीण विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जिले स्तर पर इसकी बेहतर मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि लोगों को योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  विनय कुमार अग्रवाल द्वारा पीपीटी के माध्यम से योजना की विस्तृत प्रस्तुति दी गई। जिसमें योजना के संबंध में बिंदुवार जानकारी तथा कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गई।

इस अवसर पर जिले में पूर्व में क्रियान्वित किए गए कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई गई , जिसे अतिथियों एवं आमजनों द्वारा सराहा गया। साथ ही योजना के हितग्राहियों ने मंच से पूर्व की योजना से प्राप्त लाभ एवं जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में अपने अनुभव साझा किए ।कार्यक्रम के अंत में नवाबांध की मुस्कान महिला समूह को नवा तरिया में मक्का की खेती हेतु बीज वितरण किया गया तथा 15 कृषकों को कृषि विभाग के सहयोग से अरहर के बीज वितरण किया गया। सम्मेलन में शामिल सभी को कटहल,मुनगा,जामुन,आम आदि के पौधें वितरित किये गये। इस दौरान जिला पंचायत उपाध्यक्ष  देवनारायण यादव, जिला पंचायत सदस्य  विजय अग्रवाल, मती पायल सिंह तोमर,मती राधा रवि, मती नानमणि पैकरा सहित जनपद सदस्य , सरपंच, सचिव एवं समूह की महिलाएं तथा ग्रामीणजन उपस्थित थे ।

बता दें विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम-जी, अधिनियम 2025
1 जुलाई 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हो गई है। यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार, आजीविका सुरक्षा और गांवों के सतत विकास को नई मजबूती देगा। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत मजदूरों को 300 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।

सुकमा में होगी ‘तेजस कार्यशाला’, स्टार्टअप, ODOP और फूड प्रोसेसिंग के अवसरों पर मिलेगा मार्गदर्शन

सुकमा में आयोजित होगी ‘तेजस कार्यशाला’

स्टार्टअप, ओडीओपी और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े अवसरों की मिलेगी जानकारी
रायपुर

 युवाओं, महिलाओं, किसानों और नए उद्यमियों को स्वरोजगार तथा उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, सुकमा द्वारा 3 जुलाई को शबरी ऑडिटोरियम, सुकमा में एक दिवसीय ‘तेजस कार्यशाला’ का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला स्टार्टअप इंडिया (DPIIT) के अंतर्गत आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला का उद्देश्य जिले के युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों, किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों (एमएसएमई) तथा स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक लोगों को शासकीय योजनाओं और नए व्यवसाय के अवसरों की जानकारी देना है।
कार्यशाला में विशेषज्ञ प्रतिभागियों को स्टार्टअप पंजीकरण, विभिन्न शासकीय योजनाओं, बैंक ऋण, वित्तीय सहायता, मार्केटिंग, ब्रांडिंग तथा व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के बारे में सरल एवं उपयोगी जानकारी देंगे। साथ ही वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी), फूड प्रोसेसिंग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इस कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों, चेंबर ऑफ कॉमर्स, एमएसएमई इकाइयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, लाइवलीहुड कॉलेज, शासकीय महाविद्यालयों, एफपीओ, कृषक उत्पादक संगठनों तथा जिले के इच्छुक युवाओं और उद्यमियों को आमंत्रित किया गया है।
यह कार्यशाला स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, नए रोजगार के अवसर सृजित करने, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा सुकमा जिले में उद्यमिता और आर्थिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पिछड़ा वर्ग आयोग को रिकवरी के आदेश देने का अधिकार नहीं

बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सलाहकार और सिफारिश करने वाली संस्था है। उसे कमर्शियल विवाद में पैसे की रिकवरी का आदेश देने का अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि हालांकि ”छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995” के तहत आयोग की सलाह आमतौर पर राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी हो सकती है, लेकिन वह असल में रिकवरी का आदेश जारी करके किसी सक्षम अधिकारी की शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा 23 सितंबर 2022 को जारी आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ता कमला मोटर्स ने 21 लाख रुपये में एक हार्वेस्टर बेचने का सौदा किया। इसके लिए 30,000 रुपये का एडवांस दिया गया। चूंकि तय समय के भीतर बैंक फाइनेंस का इंतजाम नहीं हो सका और कोविड-19 महामारी के कारण डिलीवरी में भी देरी हुई, इसलिए यह सौदा पूरा नहीं हो सका। हालांकि प्रतिवादी को फाइनेंस मिलने के बाद गाड़ी डिलीवरी के लिए उपलब्ध करा दी गई, लेकिन रेस्पॉन्डेंट ने सौदा रद्द किया और उसके बाद आयोग सहित कई अधिकारियों के पास शिकायतें दर्ज कराईं।

आयोग ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता से 1,26,500 रुपये वसूलें और यह रकम खरीदार को दें। याचिकाकर्ता का तर्क था कि आयोग को पैसे की रिकवरी का आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है और अधिनियम, 1995 के तहत उसकी शक्तियां केवल सिफारिश करने तक सीमित हैं। ”छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995” की धारा 9 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि आयोग के काम मुख्य रूप से सलाहकार और सिफारिश करने वाले स्वभाव के हैं।

कोर्ट ने कहा कि हालांकि आयोग की सलाह आमतौर पर राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी होती है, लेकिन कानून उसे न्यायिक शक्तियां नहीं देता है। विभिन्न पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच या पूछताछ के मकसद से सिविल कोर्ट की कुछ शक्तियां दिए जाने से आयोग सिविल कोर्ट नहीं बन जाता। कोर्ट ने कहा कि आयोग के सामने आया विवाद हार्वेस्टर मशीन की बिक्री से जुड़े कमर्शियल सौदे से पैदा हुआ। याचिकाकर्ता से ₹1,26,500 की वसूली करने और उसे प्रतिवादी नंबर 3 को भुगतान करने का निर्देश देकर आयोग ने अपनी कानूनी शक्तियों के दायरे से बाहर जाकर काम किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे निर्देश को सिर्फ़ एक सिफ़ारिश नहीं माना जा सकता और यह आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर का काम था।

प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती-किसानी में तेजी

रायपुर

 प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

प्रदेश के किसानों को अब तक 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 7.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 10 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 96.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।  

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4.30 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.09 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 62 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 2.67 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है।   

अधिकारियों बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। खरीफ सीजन 2026 के लिए 30 जून की स्थिति में 5525 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 4517 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

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