पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत

पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3.32 करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर,
छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बकावण्ड की मारकण्डी नदी में ग्राम पाथरी के समीप पाथरी एनीकट निर्माण कार्य के लिए 3 करोड़ 32 लाख 39 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण हो जाने पर क्षेत्र में निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन एवं किसानों द्वारा स्वयं के साधन से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 30 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। योजना के निर्माण कार्यों को कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक: विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी प्रदेश की समृद्धशाली विरासत

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक: विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी प्रदेश की समृद्धशाली विरासत

“बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश”की जिला स्तरीय क्विज 07 अगस्त को होगी आयोजित
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता और उपविजेता टीमों को मिलेगा पर्यटन का आकर्षक उपहार
साल 2025 में 24489 विद्यार्थियों ने लिया था उत्साहपूर्वक हिस्सा, 8163 विद्यालयों ने द्वारा कराया गया था पंजीयन

भोपाल 

मध्यप्रदेश के समृद्धशाली इतिहास, परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विविधताओं, कला, प्राकृतिक संपदा और पर्यटन की असीम संभावनाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘पर्यटन क्विज-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। जिला स्तरीय इस क्विज में भाग लेने के लिए विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन पंजीयन 1 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक शाम 5:30 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट   

https://www.mptourism.com/tourismquiz2026/schools/ के माध्यम से किया जा सकता है। विद्यार्थियों में पर्यटन के माध्यम से सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने, मध्यप्रदेश पर्यटन की संभावनाओं से जुड़े ज्ञान का संचार करने के उद्देश्स से आयोजित हो रहे इस क्विज में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, सी.बी.एस.ई. (CBSE) एवं केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं से 12वीं के अध्ययनरत छात्र-छात्राएं सहभागिता कर सकते हैं।

7 अगस्त को”बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश” की जिला स्तरीय क्विज

मध्य प्रदेश पर्यटन क्विज-2026 “बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश” का जिला स्तरीय आयोजन आगामी 07 अगस्त 2026 को प्रदेश के समस्त जिलों में एक साथ किया जाएगा। पर्यटन क्विज-2026 क्विज में पूछे जाने वाले प्रश्न मध्य प्रदेश के पर्यटन, कला, संस्कृति, धार्मिक, प्राकृतिक परिवेश और ऐतिहासिक संवर्धन पर आधारित होंगे। जिला स्तर पर प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण की लिखित परीक्षा के आधार पर चयनित शीर्ष 06 टीमों के मध्य द्वितीय चरण में ‘ऑडियो-विजुअल/मल्टीमीडिया’ आधारित क्विज का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली विद्यालयीन टीम राज्य स्तरीय क्विज में जिले का प्रतिनिधित्व करेगी।

साल 2025 में 24,489 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया था हिस्सा

मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2016 से (कोविड महामारी के कारण वर्ष 2020-21 को छोड़कर) प्रतिवर्ष पर्यटन क्विज का सफल आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में आयोजित पर्यटन क्विज को विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह प्राप्त हुआ, जिसमें 24,489 विद्यार्थियों ने भागीदारी की तथा 8,163 विद्यालयों ने अपने विद्यार्थियों का पंजीयन कराया। यह उल्लेखनीय सहभागिता विद्यार्थियों में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पर्यटन क्विज-2026 का ध्येय भी विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों से परिचित कराना, उनमें पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अपने गौरवशाली प्रदेश की विरासत और पर्यटन संभावनाओं से जोड़ना है, ताकि भावी पीढ़ी प्रदेश की अनमोल धरोहरों से परिचित हो सके। 

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता टीमों को मिलेगा निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का उपहार

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को पर्यटन के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक जिले की प्रथम तीन विजेता टीमों को मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के होटलों में 2 रात्रि एवं 3 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन प्रदान किया जाएगा। वहीं, अगली तीन उपविजेता टीमों को 1 रात्रि एवं 2 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन दिया जाएगा।इन कूपनों के अंतर्गत विद्यार्थियों के आने-जाने, आवास, भोजन तथा स्थानीय भ्रमण का संपूर्ण व्यय मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।

 

अल्पवर्षा पर CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, किसानों के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान

भोपाल 

 संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी समेत विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि कम बारिश की संभावना को संकट के बजाय बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय रहते तैयारी करने का अवसर माना जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों तक समय पर जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।

 मुख्यमंत्री  यादव ने  कहा कि कम वर्षा की संभावना को चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय पर तैयारी के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने बारिश की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए और किसानों को समय पर मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित न हो।अधिकारियों ने बताया कि यादव ने सचिवालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं अन्य विभागों द्वारा अब तक की गई तैयारियों की समीक्षा की।

किसानों को वैज्ञानिक खेती और कम पानी वाली फसलों के लिए किया जाएगा प्रेरित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का हर किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक तरीके और उचित तैयारी के साथ कर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के बारे में जागरूक किया जाए, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती हैं।

बुआई में जल्दबाजी न करें, पर्याप्त नमी के बाद ही करें खेती
मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह देने के निर्देश दिए कि पर्याप्त नमी बनने से पहले बुआई न करें। खेतों में नमी संरक्षण के उपाय अपनाने के साथ-साथ कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए।

उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सही फसल का चयन किया जा सके। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

दो वर्षों में जल संरक्षण और जलापूर्ति को मजबूत करने की तैयारी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर आपूर्ति की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा होगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिन का विशेष अभियान चलाया जाएगा।

‘जलाभिषेक 2.0’ अभियान के तहत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल संरचनाओं का सर्वे कर उनका जीर्णोद्धार किया जाएगा। मनरेगा के सहयोग से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूजल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगी। “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में” की अवधारणा पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। इसके साथ ही रबी सीजन से पहले नहरों की सफाई और मरम्मत पूरी करने तथा अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

कम पानी वाली खेती और जिला स्तर पर आकस्मिक फसल योजना तैयार
बैठक में जानकारी दी गई कि दलहन, तिलहन और श्रीअन्न जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के साथ प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है।

जलाशयों के संचालन के लिए तय होगा स्पष्ट प्रोटोकॉल
सरकार इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर सहित सभी प्रमुख जलाशयों के संचालन में तय नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। जल उपयोग की प्राथमिकता में सबसे पहले पेयजल, उसके बाद सिंचाई और अंत में विद्युत उत्पादन रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर रियल-टाइम जल डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे, जिससे जलाशयों और जल संसाधनों की लगातार निगरानी की जा सके। “जल गंगा संवर्धन” अभियान की तर्ज पर जनभागीदारी वाले कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए अलग आकस्मिक योजना तैयार होगी।

फसल बीमा, डिजिटल सर्वे और सोशल मीडिया से किसानों तक पहुंचेगी जानकारी
बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के तहत फसल क्षति सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के अधिकारियों का संयुक्त प्रशिक्षण पहले ही पूरा कराया जाएगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से नुकसान का आकलन कर 15 दिनों के भीतर सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

फसल बीमा का दायरा बढ़ाने और दावों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए भी कार्यवाही की जा रही है। राज्य स्तरीय आकस्मिक कार्ययोजना विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। उन्नत बीज वितरण, फसल प्रदर्शन और बलराम तालाब योजना के तहत वर्षा जल संरक्षण के लक्ष्य जिलों को दिए जा चुके हैं।

सरकार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, खेती से जुड़ी सलाह और आवश्यक जानकारी लगातार उपलब्ध कराएगी। सभी जिलों के कलेक्टरों को सिंचाई, जलभराव, जीवन रक्षक सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता और सूखे की स्थिति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। 26 से 30 जून के बीच आयोजित ग्राम सभाओं में भी आकस्मिक कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर और सही निर्णय लेने और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय के साथ, राज्य कम वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों को उन फसलों की खेती के महत्व के बारे में व्यापक रूप से शिक्षित करें जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है और इसमें समय भी कम लगता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को मोटे अनाज और दलहन फसलों जैसे ज्वार, बाजरा, काले चने, हरे चने, अरहर और कोदो-कुटकी का चयन करना चाहिए क्योंकि वे कम पानी में भी बेहतर पैदावार दे सकते हैं।यादव ने किसानों से जल्दबाजी में बुवाई से बचने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में पर्याप्त नमी होने के बाद ही ऐसा किया जाना चाहिए और नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के सुझावों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाना चाहिए ताकि वे उपयुक्त फसलों का चयन कर सकें। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता
किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार का कर्तव्य है। खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गतिविधियों को प्राथमिकता पर लिया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कृषकों के हित संवर्धन के लिए लागू कार्यक्रमों और योजनाओं का क्रियान्वयन मिशन मोड में किया जाए। किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष रूप से सहायक है। किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के केन्द्रों का अधिक से अधिक विस्तार हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत अब तक हुए कार्यक्रमों की मंत्रालय में समीक्षा कर रहे थे। बैठक में आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन हो

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक किया जाए। फसल चक्र में परिवर्तन और प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए वातावरण बनाना आवश्यक है। खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय पर्व और त्यौहारों तथा फसल चक्र के अनुसार किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। सुगमता और सरलता सुनिश्चित करते हुए सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाए।

सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव और संभागीय मुख्यालयों पर होंगे फूड फेस्टिवल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि ऑनलाईन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और किसानों के लिए ई-पासबुक सुविधा का शुभारंभ जुलाई माह में ही किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन भी होगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले मैदानी कार्यकर्ताओं तथा पशुपालकों को पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे और सभी संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल होंगे।

इंदौर में होगा सब्जी महोत्सव और एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम

बैठक में बताया गया कि खरगौन में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन और कपास एवं मिर्च महोत्सव के आयोजन की योजना है। अन्तर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर जबलपुर में कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार जबलपुर में ही कुक्कुट पालकों और उद्यमियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। बुरहानपुर में केला महोत्सव, उज्जैन में हाईटेक नर्सरी और संरक्षित खेती पर कार्यशाला, सागर और रतलाम में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का राज्य स्तरीय सम्मेलन, नीमच में उद्यानिकी में आधुनिक तकनीक पर कार्यशाला, इंदौर में सब्जी महोत्सव तथा एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम और भोपाल पराली प्रबंधन पर कार्यशाला के साथ ही नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव के.सी गुप्ता, नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा, उमाकांत उमराव, आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।

 

MPESB Recruitment 2026: कृषि विस्तार अधिकारी के 2784 पदों पर आवेदन शुरू, ग्रेजुएट उम्मीदवार तुरंत करें अप्लाई

भोपाल 

 मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB), भोपाल ने किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत ग्रुप-2, सब-ग्रुप-1 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 2,784 रिक्तियां भरी जाएंगी। इच्छुक उम्मीदवार 17 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आज से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। अभ्यर्थी 17 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 2 अगस्त से भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी।

यह भर्ती परीक्षा समूह-2, उप समूह-1 के तहत आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

73% आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट
कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती में राज्य की आरक्षण व्यवस्था लागू की है। अनुसूचित जाति (SC) को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत (न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। 73 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट

इस भर्ती में कुल 73 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अनुसूचित जाति को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

2 अगस्त को दो पालियों में होगी परीक्षा
कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा।

परीक्षा में आधार सत्यापन अनिवार्य
परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य रहेगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र भी साथ लाना होगा। पहचान पत्र के बिना परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा।

मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित
परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। परीक्षा शुरू होने के बाद से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इन उम्मीदवारों को आवेदन की पात्रता नहीं
कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी तय की हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं, वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे।

जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष भी इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे।

ऐसे करें आवेदन
योग्य और पात्र अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर 17 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 अगस्त से परीक्षा आयोजित की जाएगी।

परीक्षा केंद्र के लिए जरूरी नियम
– परीक्षा में शामिल होने के लिए बायोमेट्रिक (आधार आधारित) सत्यापन अनिवार्य होगा।
– प्रवेश पत्र के साथ एक वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र लाना जरूरी है।
– परीक्षा केंद्र पर तय रिपोर्टिंग समय के बाद एंट्री नहीं मिलेगी।
– मोबाइल, स्मार्ट वॉच और कैलकुलेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बैन रहेंगे।
– परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर खत्म होने से पहले उम्मीदवार कक्ष नहीं छोड़ सकेंगे।

ये लोग नहीं कर पाएंगे आवेदन
– जिन उम्मीदवारों के 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते।
– यदि पुरुष का विवाह 21 वर्ष और महिला का विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हुआ हैए तो वे पात्र नहीं होंगे।
– महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी सिद्ध पाए गए पुरुष आवेदक भी इस भर्ती के लिए अयोग्य होंगे।
– योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

कौन कर सकता है आवेदन?

    आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक होगा। 

    आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है।

    अनारक्षित (UR) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है।

    SC/ST/OBC/EWS/PwD, महिला उम्मीदवार, पूर्व सैनिक एवं संविदा कर्मचारी न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष की आयु तक आवेदन कर सकते हैं।

    पूर्व सैनिकों को सेवा अवधि के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ भी मिलेगा।

    आयु में छूट मध्य प्रदेश शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को प्रदान की जाएगी।

 

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र करें तैयार

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, रीवा में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक एवं विस्तार गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के सृजन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। परिसर के लिए कुल 243 पदों के सृजन तथा उनकी पूर्ति तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद सम्मिलित हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परिसर में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने परिसर के संधारण एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पदों की स्वीकृति से श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा। साथ ही संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारम्परिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। परिसर में संस्कृत, वैदिक अध्ययन तथा भारतीय शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विषयों में अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन सीमित मानव संसाधनों से किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पद सृजित किए जाने के लिए प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।

 

पाकिस्तान में बड़ा सड़क हादसा, खाई में गिरी ओवरलोडेड बस; 40 लोगों की मौत

इस्लामाबाद
 पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है. यहां यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में गिर गई. अधिकारियों के मुताबिक हादसा उस समय हुआ जब बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले के दाना सर इलाके से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा में प्रवेश कर रही थी. मिल रही जानकारी के मुताबिक घटना में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि अब तक 8 लोगों के जख्मी होने की खबर है। 

बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने घटना के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि हादसे में जख्मी हुए लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. दुर्घटना के तुरंत बाद इलाके में बचाव अभियान शुरू कर दिया गया. बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने भी राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके. ट्रिब्यून एक्सप्रेस के मुताबिक बस क्वेटा से रवाना हुई थी, जिसके खराब होने के बाद यात्रियों को दूसरी बस में बिठाया गया, जिससे वो ओवरलोड हुई और हादसा हुआ। 

घटना की जांच जारी
शेरानी के डिप्टी कमिश्नर हजरत वाली काकर ने बताया- ‘घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. मरने वालों की लाशों को निकालने और शिफ्ट करने का काम जारी है.’ डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि बस क्वेटा से 36 यात्रियों के साथ रवाना हुई थी, लेकिन रास्ते में एक दूसरी बस खराब हो जाने के कारण कुछ और यात्री इस बस में सवार हो गए थे. इससे बस पर सवारियों की संख्या बढ़ गई थी. प्रशासन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस की तेज रफ्तार या सड़क की खराब स्थिति हादसे की वजह हो सकती है. बलूचिस्तान की पहाड़ी सड़कें अक्सर खतरनाक होती हैं और यहां बस व ट्रक दुर्घटनाएं आम हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसा रात के समय हुआ, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आई। 

घायलों को इलाज के लिए क्वेटा और अन्य नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है. पाकिस्तान में सड़क सुरक्षा एक बड़ी समस्या बनी हुई है. हर साल सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। खराब सड़कें, ओवरलोडेड वाहन, ड्राइवरों की लापरवाही और खराब मौसम अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं. अभी गुरुवार इसी इलाके में मौजूद एक पर्यटन स्थल पर नाव पलट जाने की वजह से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। 

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में नहीं बिकेगा Sting एनर्जी ड्रिंक

 मुंबई
 महाराष्ट्र में स्कूल परिसर के अंदर स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में भी इन ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। मॉनसून सत्र के दौरान, श्रीगोंडा-नगर निर्वाचन क्षेत्र के बीजेपी विधायक विक्रम पचपुते ने यह सवाल उठाया था। इसके बाद, मंत्री नरहरि झिरवल ने पूरे राज्य में स्कूल क्षेत्रों में स्टिंग ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए।

स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, भले ही वे नियमों का पालन करते हों, लेकिन बच्चे इनकी लत का शिकार हो सकते हैं। बोतल पर ही लिखा होता है कि यह ड्रिंक छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं है। इसे छोटे बच्चों को नहीं बेचा जाना चाहिए।

विक्रम पचपुते ने विधानसभा में कहा कि स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स शराब से भी ज़्यादा हानिकारक हैं। यह मानते हुए कि स्कूल परिसर में स्टिंग बेची जा रही है, मंत्री नरहरि झिरवल ने सदन को आश्वासन दिया कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों के साथ-साथ स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।.

एफएसएसएआई ने गलत ब्रांडिंग और भ्रामक दावों के लिए छह एनर्जी ड्रिंक ब्रांडों- रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, पेप्सिको की एड्रेनालाईन रश एनर्जी ड्रिंक, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कैम्पा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी और कोका-कोला समर्थित मॉन्स्टर एनर्जी- को नोटिस जारी किया था।

‘एनर्जी ड्रिंक’ की कोई खाद्य श्रेणी
FSSAI का कहना है कि भारत में फिलहाल “एनर्जी ड्रिंक” की कोई आधिकारिक खाद्य श्रेणी तय नहीं है, फिर भी कंपनियां अपने उत्पादों को इसी नाम से बेच रही हैं. इसके अलावा “शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है”, “फोकस बढ़ाता है”, “कमजोरी दूर करता है” और “एनर्जी लेवल बढ़ाता है” जैसे दावों पर भी नियामक ने आपत्ति जताई है. उसके मुताबिक, खाद्य उत्पादों के लिए इस तरह के साइंटिफिक दावे कानून के अनुरूप नहीं हैं। 

एनर्जी ड्रिंक थकान दूर नहीं थोड़ी देर के लिए दबा देती है!
स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से एनर्जी ड्रिंक को लेकर चिंता जताते रहे हैं. उनका कहना है कि इनमें मौजूद कैफीन और चीनी की अधिक मात्रा शरीर को वास्तविक ऊर्जा नहीं देती, बल्कि कुछ समय के लिए थकान को दबा देती है. अधिक मात्रा में या लगातार इनका सेवन करने से बच्चों और युवाओं में दिल की समस्या, नींद की समस्या, बेचैनी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। 

केतन हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सिया-चेतन कथित तौर पर ‘कोड वर्ड’ में करते थे बात; दूसरा मोबाइल जब्त

 पुणे
केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. अब पुलिस ने अदालत से मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. हालांकि कोर्ट ने इसे नामंजूर करते हुए दोनों आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पता चला है कि दोनों आपस में बातचीत के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे, जिनका मतलब और उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। 

मामले की जानकारी देते हुए जांच अधिकारी मनोज पवार ने बताया कि जांच के दौरान चेतन से घटनाक्रम की आमने-सामने पड़ताल की गई, जबकि सिया से उसके पासपोर्ट और अन्य पहलुओं पर पूछताछ की गई. इसी बीच गुरुवार सुबह सिया का दूसरा मोबाइल फोन भी जब्त किया गया. इससे पहले दोनों आरोपियों के एक-एक मोबाइल फोन पहले ही पुलिस अपने कब्जे में ले चुकी थी। 

पुलिस के अनुसार, डिजिटल जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन बातचीत के दौरान कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करते थे. अब दूसरे मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के जरिए इन कोड वर्ड्स का मतलब, उनके इस्तेमाल का उद्देश्य और हत्या की साजिश से उनका संबंध पता लगाया जाएगा. इसी वजह से दोनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई है। 

सरकारी पक्ष की ओर से पेश वकील ने बताया कि नया मोबाइल मिलने के बाद दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि जिन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया, उनका सही अर्थ केवल सिया और चेतन ही बता सकते हैं. इसलिए जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोनों का आमना-सामना कराना आवश्यक है। 

पुलिस ने सीन किया था री-क्रिएट
इससे पहले गुरुवार सुबह पुलिस सिया गोयल को पुणे के लुल्लानगर स्थित उस स्थान पर भी लेकर गई, जहां उसने और चेतन ने कथित तौर पर लोहागढ़ किले से केतन अग्रवाल को धक्का देने की रिहर्सल की थी. पुलिस का दावा है कि मई महीने में दोनों ने हत्या की योजना को अंजाम देने से पहले वहां अभ्यास किया था. सिया ने मौके पर उस स्थान की पहचान भी की। 

जांच के दौरान पुलिस ने सिया के घर से घटना वाले दिन पहने गए कथित कपड़े भी बरामद किए हैं. इसके अलावा दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए भी अदालत से अनुमति मांगी गई है. पुलिस का कहना है कि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध में बाधा बनने के कारण केतन अग्रवाल की कथित तौर पर हत्या की गई थी। 

ई-रिक्शा विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन, Google Play Store से हटाया गया BAT-BMS App

नई दिल्ली

सरकार के निर्देश पर ई-रिक्शा को बंद करने वाले ऐप BAT BMS App को Google Play Store और Apple App Store से हटा दिया गया है. इस कार्रवाई के तहत दो ऐप्स डिलीट किए गए हैं. आरोप है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से (रिमोट के जरिए) बंद करने के लिए किया जा रहा था.  सुरक्षा और संभावित गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी। 

हाल ही में सोशल मीडिया पर BAT BMS App से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए हैं. इनमें दावा किया गया कि इस ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर रहे थे, जिससे कई चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. ई-रिक्शा अचानक बंद होने की घटनाओं और चालकों की बढ़ती शिकायतों के बाद इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी। 

क्या है BAT BMS App?
कई सस्ते ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी लगी होती है. इन बैटरियों के अंदर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है, जो बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है. यह बताता है कि बैटरी में कितना चार्ज बचा है, वह ज्यादा गर्म तो नहीं हो रही और कहीं कोई तकनीकी खराबी तो नहीं है.  कुछ सस्ती, खासकर चीन में बनी बैटरियों में इस BMS के साथ ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है। 

अगर इस ब्लूटूथ पर पासवर्ड या सुरक्षा लॉक नहीं लगाया गया हो, तो आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से उससे कनेक्ट हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे बिना पासवर्ड वाले वाई-फाई या खुले ब्लूटूथ से कोई भी जुड़ सकता है. BAT-BMS ऐप इसी ब्लूटूथ कनेक्शन का इस्तेमाल करके बैटरी के सिस्टम तक पहुंच सकता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बड़ा रिस्क माना जा रहा है। 

क्या है ब्लूटूथ कनेक्शन की रेंज?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सुरक्षा लॉक नहीं होता, उनमें ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक होती है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति सड़क किनारे, पास खड़े वाहन या बाइक से भी ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से जोड़ने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में ई-रिक्शा अचानक बंद हो सकता है और चालक को ये भी समझ ही नहीं आता कि रिक्शा में क्या दिक्कत आई है। 

हालांकि, अच्छी और ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है, इसलिए उन पर इस तरह का रिस्क नहीं माना जाता है. यह रिस्क ज्यादातर से कम कीमत वाली और बाद में लगाई गई (आफ्टरमार्केट) बैटरियों में देखी जा रही है, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में ई-रिक्शा में किया जाता है। 

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