एआई तकनीक से हाथी-मानव संघर्ष पर लगी लगाम, सुरक्षित हुए गांव और वन्यजीव

रायपुर

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में शुरू किया गया एआई आधारित ‘एलीफेंट अलर्ट सिस्टम’ हाथी-मानव संघर्ष को कम करने में बड़ी सफलता साबित हुआ है। इस अभिनव पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और प्रतिष्ठित एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू ने भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

समय पर मिल रही सूचना, बढ़ी ग्रामीणों की सुरक्षा

हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग थर्मल सेंसर युक्त इन्फ्रारेड ड्रोन की मदद से दिन-रात हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। घने जंगल और अंधेरे में भी यह तकनीक हाथियों का सटीक पता लगा लेती है। जैसे ही हाथियों का दल किसी गांव की ओर बढ़ता है, नियंत्रण कक्ष से ग्रामीणों और वन अमले को एसएमएस, फोन कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से तुरंत सूचना भेज दी जाती है।

पहले से सतर्क होकर टल रही दुर्घटनाएं

इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को पहले ही सतर्क कर दिया जाता है। सूचना मिलते ही ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। वहीं वन विभाग की टीम भी समय पर मौके पर पहुंचकर हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास करती है। इससे हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है और जनहानि का खतरा भी घटा है।

तकनीक और संवेदनशील प्रशासन का सफल मॉडल

वन विभाग की इस पहल से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। साथ ही हाथियों के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। आधुनिक तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली के कारण वन्यजीवों तथा लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।

दूसरे राज्यों के लिए बना प्रेरणास्रोत

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ का यह नवाचार आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। एआई आधारित एलीफेंट अलर्ट सिस्टम यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन और जनभागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी सफलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सकती है। आज यह पहल छत्तीसगढ़ को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयासों से रायगढ़ के खनन प्रभावित क्षेत्रों को बड़ी सौगात

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 35 करोड़ 76 लाख 94 हजार रुपये की लागत के 13 महत्वपूर्ण विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों से धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार विकासखंडों में शिक्षा, कौशल विकास, कृषि अधोसंरचना तथा ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

डीएमएफ निधि के माध्यम से स्वीकृत इन परियोजनाओं का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं

तमनार, घरघोड़ा, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ विकासखंडों में पुस्तकालय भवन निर्माण तथा अन्य संबंधित कार्यों के लिए 6 करोड़ 39 लाख 64 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आधुनिक अध्ययन संसाधनों से युक्त इन पुस्तकालयों से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन का वातावरण मिलेगा।

आईटीआई भवनों के उन्नयन से बढ़ेगा कौशल विकास

स्थानीय युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय आईटीआई घरघोड़ा के भवन के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपये तथा शासकीय आईटीआई धरमजयगढ़ के भवन के उन्नयन हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे प्रशिक्षण सुविधाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

कृषि अधोसंरचना को मिलेगा नया आधार

तमनार विकासखंड में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ 21 लाख 81 हजार रुपये की लागत से व्यावसायिक परिसर तथा 1 करोड़ 5 लाख 20 हजार रुपये की लागत से बाजार शेड यार्ड का निर्माण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से किसानों को कृषि उत्पादों के भंडारण, विपणन और व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

24.73 करोड़ रुपये से मजबूत होगा ग्रामीण सड़क नेटवर्क

धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार विकासखंडों में लगभग 24 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से आठ महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इनमें पीपराही-डीपापारा, सुबरा-कटकलिया, कोंडकेल-गेरूपानी, ढाप-भवानीपुर, किलकिला-उड़ीसा बॉर्डर, बरमुड़ा-उकारीपाली, टेरम-छिरभौंना तथा बाम्हनबहरी-पुलाईआंट मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।

इन सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप 365 दिनों के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

सिंधिया राजघराने के 37 साल पुराने विवाद का होगा अंत, 8 जुलाई को कोर्ट में पूरी होगी औपचारिक प्रक्रिया

ग्वालियर

 सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग चार दशक से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब समाधान की ओर बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए आपसी समझौते की औपचारिक प्रक्रिया आठ जुलाई को न्यायालय में पूरी की जाएगी। इसके लिए ये दोनों पक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। बता दें कि वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जबकि यशोधरा राजे मध्य प्रदेश में मंत्री रह चुकी हैं।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने पर राजी हो गए हैं। समझौते का प्रार्थनापत्र ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों को राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे और 90 दिनों के भीतर पूरे विवाद का समाधान कर उसकी पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को पुनः बहाल किया जा सकता है।

 

ई-रिक्शा चालकों के सामने नई मुसीबत, ‘चाइनीज ऐप’ से हैक हो रहे वाहन

 ग्वालियर

ग्वालियर की सड़कों पर इन दिनों ई-रिक्शा चालकों के सामने एक अजीबोगरीब और बेहद परेशान करने वाली मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती और सिरफिरे युवक राह चलते ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। ये युवक ‘चाइनीज मोबाइल एप्लीकेशन’ का इस्तेमाल कर चलते-चलते ही ई-रिक्शा की इलेक्ट्रिक बैटरी को रिमोटली लाक कर देते हैं।

बैटरी लॉक होते ही गाड़ी का चक्का जाम हो जाता है और वह टस से मस नहीं होती। इस नए किस्म की खुराफात से न सिर्फ गरीब ई-रिक्शा चालक परेशान होना पड़ रहा है, बल्कि पुलिस महकमा भी हैरान है। पुलिस के पास ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी पेंच और अचानक गायब हो जाने वाले ऐसे सिरफिरों के कारण पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।

ऐसे दिया जा रहा वारदात को अंजाम

पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इन दिनों बाजार में आने वाले नए ई-रिक्शा आधुनिक फीचर्स और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी से लैस हैं। शरारती तत्व इसी का फायदा उठा रहे हैं।
  
कनेक्टिविटी की कमजोरी: शरारती युवक ई-रिक्शा के पास आते हैं या पीछे बैठते हैं और अपने मोबाइल ऐप के जरिए रिक्शा के ब्लूटूथ सिग्नल को हैक कर लेते हैं।
   
 बैटरी लॉक: ऐप के जरिए वे रिक्शा के ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ में सेंध लगाकर उसे लाक कर देते हैं।
 
 एजेंसी के चक्कर: एक बार बैटरी लॉक होने के बाद रिक्शा सड़क पर ही ठप हो जाता है। इसे दोबारा चालू करने का कोई तरीका चालकों के पास नहीं होता। मजबूरी में उन्हें भारी-भरकम किराया देकर रिक्शा खिंचवाकर संबंधित कंपनी की एजेंसी ले जाना पड़ता है, जहां साफ्टवेयर के जरिए ही इसे दोबारा अनलाक किया जाता है।

दिनभर की कमाई बैटरी खुलवाने में चली गई

ग्वालियर थाने पहुंचे रमेश कुमार, नवीन कुशवाह सहित करीब आधा दर्जन ई-रिक्शा चालकों के साथ ऐसा हुआ। इन लोगों ने बताया कि पूरे दिन में 400 से 500 रुपये की कमाई होती है। ई-रिक्शा लाक होने के कारण एक बार में करीब एक हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक

यह मामला बीएमएस हैकिंग से जुड़ा है। कई चाइनीज और सस्ते ई-रिक्शा या उनकी बैटरियों में डिफाल्ट ब्लूटूथ पासवर्ड (जैसे 0000 या 1234) होता है। शरारती तत्व इंटरनेट पर मौजूद एपीके फाइलों या चाइनीज क्लोन ऐप्स के जरिए इन डिफाल्ट पासवर्ड को क्रैक कर लेते हैं। या कई कंपनियां पासवर्ड से लैस ही नहीं करती। ब्लूटूथ आन रख देती हैं।
ई-रिक्शा चालक रखें इन बातों का ध्यान

 डिफाल्ट पासवर्ड बदलें: ई-रिक्शा खरीदते ही चालक सबसे पहले अपनी बैटरी के ब्लूटूथ का डिफाल्ट पासवर्ड बदलें।
 ब्लूटूथ विजिबिलिटी बंद रखें: यदि संभव हो, तो रिक्शा के ब्लूटूथ की ‘विजिबिलिटी’ को ‘हिडन’ मोड पर रखें ताकि कोई बाहरी डिवाइस उसे सर्च न कर सके।

 लागिन-पासवर्ड याद रखें: जब ई-रिक्शा खरीदते हैं तो कंपनी द्वारा लागिन-पासवर्ड, कंपनी का एप डाउनलोड कर दिया जाता है। इसे हमेशा याद रखें। कंपनी सामान्य पासवर्ड रखती है। इसके अपने हिसाब से बदल दें।

पुलिस की अपील- संदिग्धों की तुरंत दें सूचना

इस मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें लगातार मिल रही हैं। साइबर सेल को इस मामले की जांच में लगाया गया है और उस ऐप को भी ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है जिससे यह लाक किया जा रहा है। आरोपित राह चलते या सवारी बनकर इस हरकत को अंजाम देते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पकड़ना चुनौती बना हुआ है।

पुलिस ने चालकों से अपील की है कि यदि कोई सवारी रिक्शा में बैठकर मोबाइल पर संदिग्ध हरकत करती दिखे, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें।

आटो-टेंपो चालकों पर शक और सोशल मीडिया का असर

पुलिस को इस मामले में आटो-टेंपो चालकों पर शक है। ऐसा इनपुट मिला है। सवारी के चक्कर में आटो, टेंपो चालक यह हरकत कर रहे हैं।

ई-रिक्शा लाक करने की वीडियो इंस्टा, फेसबुक, यूट्यूब पर इन दिनों खूब चल रही हैं। इसी में एप का प्रचार भी हो रहा है।

 

खिवनी अभयारण्य से लाए गए घायल बाघ “युवराज” का वन विहार में हो रहा उपचार

भोपाल

खिवनी अभयारण्य, देवास में आपसी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए नर बाघ ‘युवराज’ का वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल के रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बाघ को 27 जून 2026 को रेस्क्यू कर वन विहार लाया गया था। शुक्रवार को उसकी स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण राज्य पशु चिकित्सालय, जहांगीराबाद के वरिष्ठ वेटरिनरी सर्जन डॉ. एस.के. तुमड़िया, वन विहार के वरिष्ठ वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल गुप्ता तथा वन विहार के पशु चिकित्सक डॉ. विनीत द्वारा किया गया।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बाघ के आगे के दोनों पैर और पिछले बाएं पैर में गहरे घाव हैं। एक्स-रे परीक्षण से आगे के दोनों पंजों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। उसके पिछले बाएं पैर में गहरा घाव होने के कारण छह टांके लगाए गए हैं। उपचार के दौरान बाघ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है। डॉ. अतुल गुप्ता घायल बाघ की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान वन विहार के संचालक  विजय कुमार, सहायक संचालक डॉ. रूही हक तथा सफारी प्रभारी  सीता काकोड़िया भी उपस्थित रहीं।

 

 

भारत और जर्मनी दो भाईयों की तरह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को जर्मनी के 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के कार्यकारी बोर्ड की सदस्या एवं बैंक की सीईओ सु क्रिस्टियाने लाईबेक, कंट्री डायरेक्टर  वूल्फन मूथ, जर्मन दूतावास के प्रतिनिधि  गॉटफ्रीड वॉन और अन्य सदस्य, प्रबंध संचालक म.प्र. औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड  चंद्रमौली शुक्ला,  विशेष गढ़पाले सहित केन्द्र सरकार के अधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्यनमंत्री डॉ. यादव ने भारत एवं जर्मनी के बीच दशकों पुरानी मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश भाईयों की तरह हैं। इनमें आपसी साझेदारी को और अधिक प्रबल बनाने में मध्यप्रदेश बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। सरकार जर्मनी के उद्योगपतियों और निवेशकों से लगातार सम्पर्क में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा क्षेत्र में केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के सहयोग की सराहना करते हुए आशा जताई कि हमारी साझेदारी दिन-ब-दिन और भी सुदृढ़ होगी। जर्मनी के सहयोग से हमारा मध्ययप्रदेश एक ऊर्जा दक्ष हरित और समृद्ध राज्य बनेगा।

केएफडब्ल्यू बैंक के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया गया कि एनर्जी रिफार्म प्रोग्राम अन्तर्गत वितरण कंपनियों में स्मार्ट मीटर की स्थापना एवं फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिए लगभग 1120 करोड़ रूपये का वित्त पोषण किया जा रहा है। बैंक द्वारा इस साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए एनर्जी रिफार्म फेज-2 अंतर्गत प्रदेश में विद्युत वितरण अधोसंरचना निर्माण तथा सौर घंटों में कृषि फीडरों की आपूर्ति के लिये अधोसंरचनात्मक निर्माण कार्यों के लिए लगभग 200 मिलियन यूरो के वित्तीय सहयोग पर भी रूचि दिखाई है।

 

मध्यप्रदेश के लिए रूपए 5,00,856 करोड़ की वार्षिक ऋण योजना 2026-27 जारी

भोपाल

मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने मंत्रालय में शुक्रवार को वित्त विभाग के अधिकारियों और राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के समन्वयक से कहा है कि वे जिलों से प्राप्त जिला स्तरीय क्रेडिट प्लान का हर हाल में क्रियान्वयन कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएं। मुख्य सचिव  जैन ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा प्रस्तुत वार्षिक साख योजना 2026-27 का विमोचन कर जारी की। विमोचन के दौरान अपर मुख्य सचिव वित्त  मनीष रस्तोगी, आयुक्त संस्थागत वित्त सु सोनिया मीना, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक सु सुजाता लाल, उपमहाप्रबंधक नाबार्ड  विजेंद्र सिंह, उपमहाप्रबंधक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति  पवन कुमार अग्रवाल, भारतीय स्टेट बैंक के महाप्रबंधक  निशंका रॉय सहित अन्य बैंक के अधिकारी उपस्थित हुये।

जारी क्रेडिट प्लान के अनुसार कुल वार्षिक ऋण योजना रुपए 5,00,856 करोड़ निर्धारित की गई है। जो गत वर्ष के लक्ष्य 4,19,110 करोड़ रूपए का 119.50 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फार्म क्रेडिट के लिए 1,28,866 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य का 106.56 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 120.56 प्रतिशत अधिक है।

फसल ऋण (Crop Loan) का लक्ष्य रुपए 88,638 करोड़ रूपये रखा गया है, जो गत वर्ष के लक्ष्य का 101.22 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 122.36 प्रतिशत है। कुल कृषि क्षेत्र के लिए रुपए 1,65,117 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य से 113.07 तथा उपलब्धि का 121.85 प्रतिशत है।

मध्यप्रदेश शासन की उद्योगोन्मुखी नीतियों को देखते हुए एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,62,967 करोड़ रुपए का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो पिछले वर्ष के लक्ष्य का 121.64 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 120.90 प्रतिशत है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस क्षेत्र का लक्ष्य गत वर्ष के लक्ष्य की तुलना में 731.11 प्रतिशत तथा उपलब्धि की तुलना में 167.70 प्रतिशत बढ़ाया गया है। प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के लिए कुल 3,45,915 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो कुल वार्षिक ऋण योजना का लगभग 69 प्रतिशत है तथा गत वर्ष के लक्ष्य का 117.76 प्रतिशत एवं उपलब्धि का 121.58 प्रतिशत है।

बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि समस्त बैंकों के साथ ही राज्य शासन के विभागों, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड तथा सभी संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयास से वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य में समयबद्ध ऋण प्रवाह सुनिश्चित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की जाएगी।

 

विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय : मंत्री परमार

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान केंद्र हैं, जहाँ समाज की समस्याओं का समाधान करने वाले श्रेष्ठ, संवेदनशील, नैतिक एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार के योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम, उत्तरदायी एवं नवाचारी बनाना है। विश्वविद्यालयों को इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा। मंत्री  परमार बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित “शिक्षा संवाद” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी-केंद्रित व्यवस्था के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक निर्णय विद्यार्थी हित, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया जाए।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज को दिशा देने वाले सशक्त शैक्षणिक संस्थान बनें।

मंत्री  परमार ने कहा कि आदर्श विश्वविद्यालय वही है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समयबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ, अनुशासित व्यवस्था, शोध की सशक्त संस्कृति, नवाचार तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त न करें, बल्कि समाज एवं राष्ट्र की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने वाले सक्षम नागरिक बनकर निकलें।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से दर्ज की जायेगी, जिससे नियमित उपस्थिति, अनुशासन, कक्षाओं में सहभागिता तथा शिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

मंत्री  परमार ने कहा कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं। परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, तकनीक आधारित एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सर्वोपरि हैं और उनसे किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालयों में शोध एवं नवाचार की सशक्त संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि अनुसंधान केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि समाज, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान से जुड़ा हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं, कौशल आधारित शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योगों के साथ समन्वय को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, अनुसंधान की प्रवृत्ति एवं राष्ट्रभावना का विकास करना है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम हो।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को ऐसे आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ से ज्ञान, कौशल, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण विद्यार्थी निकलकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ।

मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित, अनुशासित एवं विद्यार्थी-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, खेल सुविधाएँ, डिजिटल संसाधन, शोध अवसंरचना, प्लेसमेंट गतिविधियाँ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शोध, उद्योगों से समन्वय, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बनाने पर बल दिया।

विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया संवाद

मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने परीक्षा, शोध, छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, डिजिटल सुविधाओं, प्लेसमेंट, खेल गतिविधियों एवं अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े सुझाव और समस्याएँ गंभीरता से सुनीं।

मंत्री  परमार ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जहाँ विद्यार्थियों की प्रत्येक समस्या का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ समाधान हो तथा संवाद की संस्कृति निरंतर सशक्त होती रहे।

गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का किया निरीक्षण

मंत्री  परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, अध्ययन कक्ष, स्वच्छ शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाए। छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा, समाजसेवी  चेतस सुखाड़िया, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सुनवाई में केतन-सिया का भी हुआ जिक्र

इंदौर 

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि सोनम जमानत पर पहले ही रिहा हो चुकी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे सुनवाई की आवश्यकता है।

मेघालय सरकार का तर्क- सोनम के फरार होने का खतरा,
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। पहले भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं और यह मामला केवल गिरफ्तारी के दौरान हुई एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती का नहीं है। मेघालय सरकार का तर्क है कि यदि सोनम बाहर रही तो उसके फरार होने का खतरा बना रहेगा।

सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए। उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?

मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है।

हाईकोर्ट से भी राज्य सरकार की अपील खारिज
वहीं, मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलांग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।

जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक) शिलांग के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस आदेश में गिरफ्तारी में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने के बाद सोनम को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शिलांग कोर्ट ने सोनम को जमानत देते समय कहा था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा।

सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए. उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?

सोनम अगली सुनवाई तक जमानत पर रहेंगी
सोनम के वकील ने यह भी दलील दी कि मामले में अब कोई बरामदगी बाकी नहीं है. उन पर पहले से ही सख्त शर्तें लागू हैं और वह शिलॉन्ग में रह रही हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. अदालत ने यह भी माना कि सोनम लंबे समय से जेल में थीं और कानून का सिद्धांत है कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद.” हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल सोनम की जमानत बरकरार रहेगी। 

देवास के वारसी नगर से जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई

देवास

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने गुरुवार को देवास के वारसी नगर से जैश ए मोहम्मद के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है।

एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि गुजरात एटीएस ने पुख्ता इंटेल के बाद देवास में डेरा डाला था। एटीएस ने स्थानीय पुलिस काे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद देवास पुलिस के सहयोग से आराेपित को चिन्हित कर पकड़ा गया।

सूत्रों के अनुसार पकड़े गए आरोपित का नाम बिलाल दुर्रानी घाघरा है। शंका है कि संदिग्ध गुजरात में जैश ए मोहम्मद का आतंकी नेटवर्क खड़ा करने के लिए यह स्लीपर सेल की तैयारी कर रहे थे।

बता दें कि शहर का वारसी नगर क्षेत्र नाहर दरवाजा थाना क्षेत्र में आता है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती है। गिरफ्तारी के संबंध में स्थानीय पुलिस ने अधिक जानकारी नहीं दी है।

हालांकि बताया जा रहा है कि एटीएस आरोपित काे लेकर रवाना हो चुकी है। इधर देवास से संदिग्ध पकड़ाने के बाद देवास पुलिस भी सतर्क हो गई है। मामले में जांच की जा रही है।

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