मुस्कुराहटों के बीच सजे सोलह श्रृंगार, चौक बहु मंडल ने बांटी खुशियां

विवेक झा, भोपाल। चौक बहु मंडल द्वारा आयोजित पारिवारिक मिलन समारोह में समाज की बहुओं ने भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की खूबसूरत झलक पेश की। केरवा डेम स्थित एक निजी स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक भारतीय परिधानों से सजी बहुओं के चेहरों पर मुस्कान और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी संवाद, सामाजिक समरसता और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करना रहा।

सोलह श्रृंगार सामग्री भेंट कर किया स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत चौक बहु मंडल की अध्यक्ष श्रीमती नीलू जैन द्वारा सभी सदस्यों के स्वागत से हुई। इस अवसर पर उन्होंने सोलह श्रृंगार की सामग्री भेंट कर सभी महिलाओं का अभिनंदन किया। स्वागत के दौरान पारंपरिक भारतीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण की भावना भी देखने को मिली।

  

आपसी संवाद से मजबूत हुए रिश्ते

मिलन समारोह में उपस्थित महिलाओं ने एक-दूसरे से खुलकर बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। पारिवारिक माहौल में आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज की महिलाओं को एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानने और समझने का अवसर प्रदान किया। महिलाओं ने सामाजिक और पारिवारिक विषयों पर चर्चा करते हुए रिश्तों को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

गेम्स, नृत्य और फिल्मी तरानों ने बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुराने फिल्मी गीतों और सदाबहार तरानों पर महिलाओं ने नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को आनंदमय बना दिया। कई सदस्यों ने अपनी कला और प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

घर से लाए व्यंजनों का लिया स्वाद

समारोह की एक विशेष आकर्षण सामूहिक भोजन व्यवस्था रही। सभी महिलाएं अपने घरों से विशेष व्यंजन बनाकर लाई थीं। इन व्यंजनों को एक-दूसरे के साथ साझा कर सभी ने स्वाद और अपनत्व का आनंद लिया। इस पहल ने आपसी प्रेम और सहयोग की भावना को और मजबूत किया।

सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय है बहु मंडल

समाज के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चौक बहु मंडल केवल सामाजिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्था की सदस्य शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बहु मंडल द्वारा समय-समय पर सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचता है।

इनकी रही विशेष उपस्थिति

कार्यक्रम में अध्यक्ष श्रीमती नीलू जैन, कोषाध्यक्ष श्रीमती कविता जैन, श्रीमती मंजू जैन, उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता जैन, मंत्री श्रीमती आरती जैन, मंत्री श्रीमती ज्योति जैन, सांस्कृतिक मंत्री श्रीमती आवृत्ति जैन एवं श्रीमती प्रियंका जैन सहित भावना जैन, सोना जैन, ममता जैन, डिंपल जैन, पूजा जैन, प्रीति जैन, संगीता जैन, रीना जैन, रानी जैन, मनीष जैन, विनीता जैन, पायल जैन, माही जैन, सिल्की जैन, मेघा जैन, अलका जैन, कोपल जैन, दीपिका जैन, नेहा जैन, अनिका जैन, अपेक्षा जैन, ऋतु जैन, अंजना जैन, जयति जैन सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहीं।

भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश

चौक बहु मंडल के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि सामाजिक संगठनों के माध्यम से महिलाओं को न केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और सकारात्मकता का वातावरण भी मजबूत होता है। भारतीय परंपरा, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

Smart Manufacturing, Welding Excellence and Skill Development Take Center Stage at CII MP WeldTech Conclave 2026

Vivek Jha, Bhopal, May 29, 2026 : The Confederation of Indian Industry (CII), Madhya Pradesh, successfully organized the second edition of the CII MP WeldTech Conclave 2026 at Sant Shiromani Ravidas Global Skills Park, Bhopal, bringing together industry leaders, technical experts, MSMEs, academicians and students to deliberate on the future of welding and manufacturing technologies.

The conclave focused on advanced welding techniques, automation, quality standards, global best practices and skill development, providing a common platform for stakeholders from the manufacturing and fabrication ecosystem to exchange ideas and explore emerging opportunities.

Need for Modern Technologies in Manufacturing

Welcoming the participants, Siddharth Chaturvedi, Chairman, CII Madhya Pradesh, highlighted the rapid growth of manufacturing, engineering and fabrication industries in the state. He emphasized that the increasing adoption of automation and advanced technologies has created a strong demand for skilled manpower and modern welding solutions.

He stated that CII remains committed to enhancing industrial competitiveness by facilitating knowledge-sharing platforms and industry-focused initiatives.

Growing Global Demand for Skilled Welders

Setting the context for the conclave, Uttam Ganguly, Former Chairman, CII Madhya Pradesh and Managing Director, Bend Joints Pvt. Ltd., pointed out that skilled welders are in high demand worldwide.

He noted that critical sectors such as infrastructure, automotive, defence, energy and manufacturing depend heavily on high-quality welding practices. According to him, platforms like WeldTech play a crucial role in addressing both current and future industry requirements.

Skill Development Key to Industrial Growth

Delivering the special address, Neeraj Sahay, Director, Sant Shiromani Ravidas Global Skills Park, emphasized the importance of skill development in meeting the evolving needs of industries.

He said that the Madhya Pradesh Government is creating world-class skill development infrastructure aligned with industry requirements, which will enhance employability among youth while improving industrial productivity.

Experts Share Insights on Emerging Welding Trends

The technical sessions featured renowned experts from leading organizations across the country.

Amlan Saha from Fronius, Pune, delivered a presentation on “Intelligent Welding Technology for Gen-Z”, explaining how digital technologies, automation and smart welding solutions are making welding processes more efficient, accurate and user-friendly for the next generation workforce.

Focus on Quality Excellence and Future Readiness

Pallavit Dubey from BHEL, Bhopal, spoke on “Quality Excellence in Welding and Fabrication: Industry Expectations and Future Readiness.” He stressed the importance of maintaining global quality standards and preparing industries for future technological advancements.

Importance of Standards and Lean Practices

Satish P. Sawant from the Institute of Welding and Testing Technology addressed the topic “Role of Welding Standards, NDT and Lean Practices in Building Globally Competitive Industries.”

He highlighted the significance of quality standards, non-destructive testing (NDT) and lean manufacturing practices in enhancing industrial competitiveness and ensuring product reliability.

Practical Solutions for MSMEs

R. Nipin Shankar from Lincoln Electric, Mumbai, delivered a session on “Reducing Rework, Improving Quality: Practical Welding Solutions for MSMEs.”

He shared cost-effective and practical approaches that can help small and medium enterprises improve quality, reduce production losses and enhance operational efficiency.

Modern Welding Engineering Requires Global Skills

Partha Pratim Brahma from TWI India, Chennai, discussed “Standards and Skills in Modern Welding Engineering.” He emphasized the growing need for globally recognized skills and industry-aligned training to meet future demands in welding engineering.

Robotic Welding Demonstration Draws Attention

One of the major attractions of the conclave was a live robotic-arm welding demonstration, which provided participants with a firsthand experience of advanced robotic welding technologies.

The demonstration showcased how automation can improve precision, safety, productivity and ease of operation in modern manufacturing environments. Participants witnessed the transformative impact of robotics on welding processes and industrial efficiency.

Strengthening Industry-Academia Collaboration

Speakers unanimously emphasized the need for stronger collaboration between industry, technical institutions and skill development organizations to bridge the skill gap and prepare a future-ready workforce.

Driving Manufacturing Excellence in Madhya Pradesh

The conclave concluded with a networking session where participants exchanged ideas and explored collaborative opportunities. CII reaffirmed its commitment to promoting manufacturing excellence, technological innovation, skill development and global competitiveness across industries in Madhya Pradesh.

About CII MP WeldTech Conclave

The CII MP WeldTech Conclave is a dedicated initiative aimed at bringing together industry professionals, manufacturing companies, welding experts, technical institutions and policymakers on a common platform. The conclave focuses on emerging technologies, quality standards, skill development and future trends in welding, fabrication and manufacturing industries, fostering meaningful dialogue and industry growth.

वेल्डिंग तकनीक में बदलाव की आहट: स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक वेल्डिंग और स्किल डेवलपमेंट पर मंथन

विवेक झा, भोपाल। विनिर्माण और फैब्रिकेशन उद्योगों में तेजी से बदलती तकनीक, ऑटोमेशन और कुशल मानव संसाधन की बढ़ती जरूरतों के बीच भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित द्वितीय सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव-2026 में देशभर के विशेषज्ञों ने स्मार्ट वेल्डिंग तकनीकों, गुणवत्ता मानकों और कौशल विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में आयोजित इस कॉन्क्लेव में उद्योग, तकनीकी संस्थानों, एमएसएमई इकाइयों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने का मंच बना कॉन्क्लेव

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीआईआई मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग, विनिर्माण और फैब्रिकेशन क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में आधुनिक वेल्डिंग तकनीकों, ऑटोमेशन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक औद्योगिक वातावरण में टिके रहने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाना आवश्यक है और सीआईआई भविष्य में भी उद्योगों को ऐसे ज्ञानवर्धक मंच उपलब्ध कराता रहेगा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रही कुशल वेल्डरों की मांग

कॉन्क्लेव की भूमिका प्रस्तुत करते हुए सीआईआई मध्यप्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं बेंड जॉइंट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक उत्तम गांगुली ने कहा कि दुनिया भर में कुशल वेल्डरों की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि आधारभूत संरचना, रक्षा, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और भारी विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की सफलता काफी हद तक गुणवत्तापूर्ण वेल्डिंग पर निर्भर करती है। ऐसे आयोजनों से उद्योगों को वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।

स्किल डेवलपमेंट से बढ़ेगी युवाओं की रोजगार क्षमता

संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के निदेशक नीरज सहाय ने कहा कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य में कौशल विकास सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विश्वस्तरीय प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित कर रही है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।

जेन-ज़ेड के लिए स्मार्ट और डिजिटल हो रही वेल्डिंग

तकनीकी सत्रों में फ्रोनियस, पुणे के विशेषज्ञ अमलान साहा ने “इंटेलिजेंट वेल्डिंग टेक्नोलॉजी फॉर जेन-ज़ेड” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन वेल्डिंग प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, सरल और प्रभावी बना रहे हैं। नई पीढ़ी के तकनीकी पेशेवरों के लिए यह क्षेत्र तेजी से आकर्षक बनता जा रहा है।

गुणवत्ता और भविष्य की तैयारी पर विशेष जोर

बीएचईएल भोपाल के विशेषज्ञ पल्लवित दुबे ने उद्योगों में गुणवत्ता उत्कृष्टता और भविष्य की तैयारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन करना भी आवश्यक है। गुणवत्ता आधारित उत्पादन से ही भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।

वैश्विक मानकों और निरीक्षण प्रणाली की अहम भूमिका

इंस्टीट्यूट ऑफ वेल्डिंग एंड टेस्टिंग टेक्नोलॉजी के सतीश पी. सावंत ने अपने संबोधन में वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स, नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (एनडीटी) और लीन प्रैक्टिसेज की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण प्रणालियां किसी भी उद्योग की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

एमएसएमई को बताए लागत घटाने के उपाय

लिंकन इलेक्ट्रिक, मुंबई के आर. निपिन शंकर ने एमएसएमई इकाइयों के लिए व्यावहारिक वेल्डिंग समाधानों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से रीवर्क कम किया जा सकता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और गुणवत्ता में सुधार आता है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।

आधुनिक वेल्डिंग इंजीनियरिंग में कौशल सबसे बड़ी जरूरत

द वेल्डिंग इंस्टीट्यूट (टीडब्ल्यूआई) इंडिया, चेन्नई के पार्थ प्रतिम ब्रह्मा ने आधुनिक वेल्डिंग इंजीनियरिंग में कौशल और अंतरराष्ट्रीय मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने होंगे।

रोबोटिक वेल्डिंग डेमो बना आकर्षण का केंद्र

कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण रोबोटिक आर्म आधारित लाइव वेल्डिंग डेमोंस्ट्रेशन रहा। प्रतिभागियों ने अत्याधुनिक रोबोटिक वेल्डिंग तकनीक को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। प्रदर्शन के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक के उपयोग से वेल्डिंग प्रक्रिया अधिक सटीक, सुरक्षित और उत्पादक बन रही है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ मानवीय त्रुटियों में भी कमी आती है।

उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास के बीच मजबूत समन्वय की जरूरत

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि उद्योगों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और कौशल विकास केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की मांग है। इससे उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल मिलेगा और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

मध्यप्रदेश को विनिर्माण हब बनाने की दिशा में पहल

कॉन्क्लेव के समापन पर सीआईआई ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। संस्था का उद्देश्य तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और गुणवत्ता आधारित उत्पादन को बढ़ावा देकर प्रदेश के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है।

क्या है सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव?

सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य वेल्डिंग, फैब्रिकेशन और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थानों और पेशेवरों को एक मंच पर लाना है। यहां नवीनतम तकनीकों, गुणवत्ता मानकों, कौशल विकास और उद्योग की भविष्य की आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया जाता है।

MP में तबादलों की तैयारी तेज, विभागों ने मांगी पदस्थापना डिटेल; NHM 2 जून तक लेगा आवेदन

भोपाल 

प्रदेश  में तबादलों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की तैयारी तेज कर दी गई है। खासतौर पर राजस्व विभाग और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय स्तर पर अधिकारियों की सूचियां तैयार होना शुरू हो गई हैं। तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जिले और अनुभाग में पदस्थ अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों सहित कई अधिकारी प्रभावित होंगे।

तबादले की अवधि नजदीक आने के साथ प्रदेश के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों ने विभागीय तबादला नीति जारी करने के साथ जिलों में पदस्थ अलग-अलग कैडर के अफसरों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है।

लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों की वर्तमान पोस्टिंग, पदनाम और अतिरिक्त प्रभार की जानकारी मांगी है तो स्कूल शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय में पदस्थ एक-एक शिक्षक का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के तबादले के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन बुला लिए हैं, तो पीएचक्यू ने आरक्षक से सब इंस्पेक्टर तक के तबादले पांच जून तक करने की डेडलाइन तय कर दी है।

मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के राज्य और जिला संवर्ग स्तर पर तबादले की पॉलिसी जारी कर दी है। इसमें तबादले की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर विभागों को ऑनलाइन आवेदन मंगाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी सरकार द्वारा तय टारगेट को अचीव नहीं कर पाता है तो उसे प्रशासनिक आधार पर तीन साल की अवधि के पहले भी स्थानांतरित किया जा सकता है।

जल संसाधन विभाग ने मांगी इंजीनियरों की पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार की जानकारी
जल संसाधन विभाग ने आयुक्त कमांड क्षेत्र और विकास संचालनालय, आयुक्त भू अर्जन और पुनर्वास बाणसागर रीवा, सभी मुख्य अभियंता, परियोजना संचालक, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल, जहां से वेतन निकलता है वहां की जानकारी के साथ गृह जिला, सेवानिवृत्ति तिथि, जिन पदों के अतिरिक्त प्रभार में हैं उस पद और कार्यालय का नाम तथा तारीख की जानकारी शासन को भेजें।

स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादले के पहले मांगा हर टीचर की पोस्टिंग का ब्यौरा
उधर स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एजुकेशन 3.0 पोर्टल पर हर विद्यालय में विषय वार पदस्थ शिक्षकों का ब्यौरा एंट्री करने के लिए कहा है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि विद्यालय वार और विषय वार एंट्री कराएं और जिन शिक्षकों की मृत्यु हो गई है या रिटायर हो गए हैं, उनके नाम विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की सूची से हटाएं ताकि जब विभाग द्वारा तबादले की कार्यवाही की जाए तो यह स्थिति न बने कि विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक पदस्थ हों और अतिरिक्त पदस्थापना हो जाए या फिर पद भरे होने की जानकारी पोर्टल पर हो जबकि वास्तव में टीचर न हों तो वहां पोस्टिंग न हो पाए। लोक शिक्षण आयुक्त इसकी जिलावार समीक्षा 30 मई को करेंगे।

जनगणना में लगे शिक्षकों के तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे
लोक शिक्षण आयुक्त ने एक अन्य निर्देश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे। ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक है जो जनगणना ड्यूटी में लगे हैं। इसलिए एक जून 2026 तक ऐसे सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एंट्री करने के लिए कहा गया है जो जनगणना में लगे हैं।

एनएचएम ने 2 जून तक मांगा संविदा कर्मचारियों की डिटेल
दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने एनएचएम में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के ऑनलाइन प्रस्ताव 2 जून तक मांगे हैं। इसके लिए संविदा तबादले की पॉलिसी भी जारी कर दी गई है। ऑनलान आवेदन 27 मई से लेने का सिलसिला पोर्टल पर शुरू हुआ है और 2 जून की रात 12 बजे तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद तबादले किए जाएंगे।

निर्देशों में कहा गया है कि तबादले के लिए तीन माह की सार्थक एप की उपस्थिति भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के लिए किए जा सकेंगे। रिक्त पद पर तबादले के लिए कम से कम और अधिकम 5 संस्थाओं की एंट्री आवेदन में करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जिनकी नियुक्त दो साल के भीतर हुई है तथा दो साल में जिनका तबादला हो चुका है, उनके तबादले पर प्रतिबंध रहेगा।

5 जून तक आरक्षक से एसआई तक के तबादले करेंगे पुलिस आयुक्त-एसपी
इसी तरह गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस मुख्यालय ने भोपाल, इंदौर के पुलिस आयुक्त, एसपी रेल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि किसी एक थाने में आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना पांच साल से अधिक नहीं होना चाहिए।

साथ ही एक बार पोस्टिंग के बाद संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना दोबारा उसी थाने में नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग पदों पर पदस्थापना के मामले में किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग में तीन साल का अंतर होना चाहिए।

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी को एक ही पुलिस अनुविभाग में दस साल से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पुलिस मुख्यालय ने इस आधार पर पांच जून तक तबादला करके सूची मुख्यालय को भेजने कहा है।

सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन जल्द ही तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके पहले ही विभागों में अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा जिलों में पदस्थापना के लिए राजनीतिक संपर्क साधने में जुट गए हैं। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के यहां सिफारिशी पत्रों का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जिन अधिकारियों पर लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे रहने के आरोप लगते रहे हैं। उन्हें हटाने की तैयारी है। वहीं पुलिस विभाग में भी थाना प्रभारियों, एसडीओपी और अन्य अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट को ध्यान में रखते हुए सरकार इस बार बड़े पैमाने पर बदलाव कर सकती है। 

F-35 को बनाने में अमेरिका को लगे 72 महीने, भारत का AMCA सिर्फ 30 माह में भर सकता है उड़ान!

बेंगलुरु 
भारत ने रक्षा तकनीक की दुनिया में एक ऐसा दांव चला है, जिसने दुनिया के बड़े सैन्य विशेषज्ञों को चौंका दिया है. पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस मीडियम कंबैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA के लिए जारी हुए आरएफपी ने सिर्फ एक नए विमान की कहानी शुरू नहीं की, बल्कि भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल मॉडल को ही बदलने का संकेत दे दिया है. इसमें सबसे बड़ा संदेश यह है कि करीब सात दशक तक लड़ाकू विमान निर्माण में अकेले खिलाड़ी रहे सरकारी कंपनी एचएएल का एकाधिकार अब टूटता दिख रहा है. पहली बार भारत सरकार ने AMCA जैसे रणनीतिक और अत्यंत संवेदनशील प्रोजेक्ट के लिए निजी कंपनियों को आगे कर दिया है। 

एलएंडटी-बीईएल, टाटा एडवांस सिस्टम्स और भारत फोर्ज-बीईएचएल जैसे निजी समूह अब उस दौड़ में हैं, जो भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में ला सकती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत वाकई 30 महीने में वह कर सकता है, जिसके लिए अमेरिका जैसी सुपरपावर को 5 से 6 साल लगे थे?

AMCA सिर्फ फाइटर जेट नहीं, भारत का टेक्नोलॉजिकल टेस्ट है
AMCA परियोजना को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान सिर्फ एक एयरक्राफ्ट नहीं होता. यह उड़ने वाला सुपरकंप्यूटर होता है. इसमें स्टील्थ डिजाइन, सेंसर फ्यूजन, AI आधारित एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, सुपरक्रूज क्षमता और अत्याधुनिक हथियार एक साथ काम करते हैं. दुनिया में अभी तक केवल अमेरिका, चीन और सीमित स्तर पर रूस ही इस तकनीक को पूरी तरह विकसित कर पाए हैं. भारत अब इसी क्लब में प्रवेश करना चाहता है।
 
 लेकिन असली कहानी यहां टाइमलाइन की है. अमेरिका को 72 महीने, भारत को सिर्फ 30 महीने!

AMCA के RFP के अनुसार:

    पहला प्रोटोटाइप 24 महीने में तैयार करना होगा
    30 महीने के भीतर उसकी पहली उड़ान होगी
    कुल 1800 शॉर्टिज सात वर्षों में पूरी करनी होंगी
    उसके बाद ही सीरियल प्रोडक्शन शुरू होगा

यानी अगर सब कुछ समय पर हुआ तो 2034-35 तक AMCA भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है. अब इसकी तुलना अमेरिका से कीजिए। 

F-22 और F-35 का उदाहरण
अमेरिका ने 1991 में लॉकहीड मार्टिन-बोइंग टीम को F-22 रैप का कॉन्ट्रैक्ट दिया था. लेकिन पहला प्रोटोटाइप 1997 में रोलआउट हुआ और उसी साल उसकी पहली उड़ान हुई. यानी पहली उड़ान में करीब 72 महीने लगे. F-35 की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. F-35 लाइटिंग-II का कॉन्ट्रैक्ट 2001 में दिया गया. पहला प्रोटोटाइप 2006 में तैयार हुआ. यानी यहां भी लगभग 60 महीने लगे. अब भारत कह रहा है कि वह 30 महीने में पहली उड़ान करा देगा. यही वजह है कि दुनिया की नजरें इस प्रोजेक्ट पर टिक गई हैं। 

HAL का युग खत्म या नई शुरुआत?
AMCA प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा राजनीतिक और औद्योगिक संदेश यह है कि भारत अब सरकारी मॉडल से आगे बढ़कर निजी रक्षा उद्योग पर भरोसा कर रहा है. एचएएल ने दशकों तक मिग-21, जैगुआर, सुखोई-30MKI और तेजस जैसे विमानों का निर्माण किया. लेकिन तेजस प्रोग्राम में हुई लंबी देरी ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या भारत को तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए नए मॉडल की जरूरत है? फिर यहीं से निजी क्षेत्र की एंट्री हुई. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि प्रोटोटाइप निर्माण के बाद जब AMCA के बड़े पैमाने पर उत्पादन की बारी आएगी, तब एचएएल फिर से रेस में शामिल हो सकता है. क्योंकि HAL के पास मौजूदा असेंबली लाइनें हैं. एयरफोर्स के साथ दशकों का अनुभव है. सप्लाई चेन पहले से विकसित है. बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है. लेकिन जिस निजी कंपनी को शुरुआती प्रोटोटाइप कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा, उसे तकनीकी बढ़त मिल जाएगी. इसलिए यह लड़ाई सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट की नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के एयरोस्पेस इकोसिस्टम की है। 

सबसे बड़ी चुनौती- अनुभव की कमी
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय निजी कंपनियां इतनी जल्दी फाइटर जेट निर्माण की क्षमता विकसित कर पाएंगी? सच्चाई यह है कि किसी भी निजी कंपनी ने अभी तक फाइटर जेट की फाइनल असेंबली लाइन नहीं बनाई है. टाटा ने जरूर एयरबस के साथ मिलकर C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लाइन बनाई है, लेकिन वह फाइटर जेट नहीं है. स्टील्थ कोटिंग, सेंसर फ्यूजन और सुपरसोनिक डिजाइन जैसी तकनीकें भारत के लिए नई हैं। 

इसके अलावा RFP में साफ कहा गया है कि नई कंपनी भारतीय नियंत्रण में होगी. विदेशी शेयर होल्डिंग सीमित रहेगी. सीईओ, सीएफओ और बोर्ड भारतीय नागरिक होंगे. विदेशी कंपनियों की प्रत्यक्ष भागीदारी लगभग नहीं होगी. यानी भारत को यह लड़ाई लगभग अकेले लड़नी होगी। 

क्या भारत चुपके से डिफेंस टेक सुपरपावर बन रहा है?
ऐसे में यह बड़ा सवाल बन गया है. यहां एक बड़ा बदलाव दिखाई देता है. पिछले दस वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में कई बड़े परिवर्तन किए हैं. जैसे-

    मिसाइल टेक्नोलॉजी में तेज प्रगति
    स्वदेशी रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम
    ड्रोन और AI आधारित युद्ध प्रणालियां
    ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्षमता

    तेजस Mk1A और टीईडीबीएफ जैसी परियोजनाएं

अब AMCA उस पूरी रणनीति का अगला चरण है. सरकार शायद यह समझ चुकी है कि अगर भारत को भविष्य के युद्धों में आत्मनिर्भर बनना है, तो उसे अब सिर्फ लाइसेंस प्रोडक्शन से आगे बढ़ना होगा. यही वजह है कि AMCA को केवल रक्षा परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय तकनीकी मिशन की तरह देखा जा रहा है। 

AMCA की सबसे बड़ी ताकत उसकी महत्वाकांक्षा है और सबसे बड़ा खतरा भी वही है. अगर टाइमलाइन फिसली तो लागत कई गुना बढ़ सकती है. एयरफोर्स की क्षमता प्रभावित होगी. विदेशी लड़ाकू विमानों पर निर्भरता बढ़ेगी. निजी क्षेत्र का भरोसा भी हिल सकता है. तेजस परियोजना पहले ही दिखा चुकी है कि भारत में जटिल एयरोस्पेस प्रोजेक्ट समय से पीछे जा सकते हैं. ऐसे में 30 महीने की समय सीमा कई विशेषज्ञों को अवास्तविक लग रही है। 

असली गेमचेंजर क्या हो सकता है?
फिर भी इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत अब टेक्नोलॉजी रिस्क लेने को तैयार दिख रहा है. पहले भारत विदेशी तकनीक खरीदता था. अब भारत खुद प्लेटफॉर्म डिजाइन करना चाहता है. पहले सरकारी कंपनियां केंद्र में थीं. अब निजी उद्योग को रणनीतिक जिम्मेदारी दी जा रही है. पहले भारत रक्षा बाजार था. अब वह रक्षा निर्माता बनने की कोशिश कर रहा है. यही बदलाव आने वाले 20 वर्षों में भारत की सैन्य और औद्योगिक शक्ति तय करेगा। 

AMCA सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं है. यह भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा, औद्योगिक आत्मविश्वास और रणनीतिक स्वतंत्रता की सबसे बड़ी परीक्षा है. अमेरिका को F-22 और F-35 जैसे स्टील्थ जेट विकसित करने में पांच से छह साल लगे. भारत अब दावा कर रहा है कि वह महज 30 महीनों में पहली उड़ान कराएगा. यह लक्ष्य बेहद कठिन है, शायद जोखिम भरा भी. लेकिन अगर भारत इसका आधा हिस्सा भी समय पर हासिल कर लेता है, तो यह साफ संकेत होगा कि देश चुपचाप दुनिया की नई डिफेंस टेक शक्तियों में शामिल हो रहा है। 

अजीत डोभाल की कूटनीति का असर? रूस पहुंचते ही पुतिन-तालिबान के बीच हुई बड़ी डील

नई दिल्ली

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी-कभी एक ही दिन की घटनाएं आने वाले कई वर्षों की रूपरेखा तैयार कर देती हैं. गुरुवार को कुछ ऐसा ही हुआ. इस्लामाबाद में बैठकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तालिबान और भारत के खिलाफ जहर उगल रहे थे. उसी समय रूस में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और तालिबान एक साथ पाकिस्तान की फील्डिंग सेट कर रह थे. हालांकि दोनों के तरीके अलग-अलग थे, लेकिन जो कदम उठाए वह पाकिस्तान खिलाफ था. रूस में पहला इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम आयोजित किया गया, जिसमें 120 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे. भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधि भी यहां थे. भारत के NSA अजीत डोभाल ने कहा कि आतंकवाद पर ‘दोहरा मापदंड नहीं चलेगा’. वहीं दूसरी तरफ रूस और तालिबान के बीच सैन्य सहयोग समझौते पर मुहर लग रही थी. रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान अफगानिस्तान ने एयर डिफेंस सिस्टम भी मांगे. तीनों घटनाओं को अलग-अलग देखने पर तस्वीर अधूरी लग सकती है. लेकिन इन्हें एक साथ जोड़ें तो पाकिस्तान के लिए उभरती नई रणनीतिक चुनौती साफ दिखाई देती हैं। 

शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की वर्षगांठ पर दिए संदेश में शहबाज शरीफ ने आरोप लगाया कि तालिबान सरकार भारत के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं. डूरंड लाइन पर झड़पें बढ़ी हैं और पाकिस्तान की एयरफोर्स कई बार अफगानिस्तान के अंदर हवाई और सैन्य कार्रवाई कर चुकी है. लेकिन जब शहबाज शरीफ जहर उगल रहे थे, तब रूस में कुछ और ही हो रहा था। 

रूस में क्या हो रहा था?
रूस में आयोजित इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम में NSA अजीत डोभाल ने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया. डोभाल ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड नहीं हो सकता. जिम्मेदार देशों को तय करना होगा कि वे आतंकवाद के प्रायोजकों का समर्थन करेंगे या उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई. डोभाल ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन आतंकवाद को लेकर भारत का रुख लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ रहा है. यानी जिस दिन शहबाज भारत और तालिबान पर आरोप लगा रहे थे, उसी दिन भारत रूस के मंच से आतंकवाद पर अपनी लाइन दुनिया के सामने रख रहा था. लेकिन पाकिस्तान को इसकी आदत है. इसीलिए पाकिस्तान के लिए असली बुरी खबर अफगानिस्तान से आई। 

असली कहानी रूस-तालिबान डील में छिपी है
द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा घटनाक्रम रूस और तालिबान के बीच हुआ सैन्य सहयोग समझौता है. रूस पहले ही जुलाई 2025 में तालिबान सरकार को मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है. अब उसने रक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ा दिया है. हालांकि समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन अफगानिस्तान की प्राथमिकताओं को देखकर कई सवाल उठ रहे हैं. तालिबान की सबसे बड़ी सैन्य चिंता पाकिस्तान की सीमा पार कार्रवाई है. पाकिस्तान ने पिछले कई महीनों में कई बार आतंकवाद विरोधी अभियान के नाम पर अफगान क्षेत्र में हवाई हमले किए हैं. अफगानिस्तान की नजर में यह उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है. यही वजह है कि अफगानिस्तान अब रूस से आधुनिक एयर डिफेंस क्षमता विकसित करना चाहता है ताकि भविष्य में अगर कोई उसकी हवाई सीमा का उल्लंघन करे तो जवाब दिया जा सके। 

पाकिस्तान की टेंशन क्यों बढ़ सकती है?
अभी तक पाकिस्तान के पास एक बड़ा रणनीतिक फायदा था. अफगानिस्तान के पास आधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क नहीं है. लेकिन अगर रूस किसी स्तर पर एयर डिफेंस, रडार, सैन्य प्रशिक्षण, उपकरणों की मरम्मत या पुराने लेकिन प्रभावी रक्षा सिस्टम उपलब्ध कराता है, तो स्थिति बदल सकती है. तालिबानी रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब ने एयर डिफेंस मांगा है. हो सकता है कि भविष्य में रूस उसे S-400 या पैंटसिर एयर डिफेंस सिस्टम दे. यह भी हो सकता है कि अपने पुराने मिग या सुखोई जेट भी अफगानिस्तान को दे. इसका मतलब यह नहीं कि कल ही अफगानिस्तान को मिग या सुखोई विमान मिल जाएंगे. लेकिन यह जरूर है कि तालिबान पहली बार किसी बड़ी सैन्य शक्ति के साथ औपचारिक रक्षा साझेदारी बना रहा है. और यह बात पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका को परेशान कर सकती है। 

हिंदू-सिख पर क्या बोला तालिबान?
मॉस्को में तालिबान के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब ने हिंदू और सिख समुदायों को अफगानिस्तान लौटने का खुला निमंत्रण भी दिया. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान उनका भी देश है और तालिबान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. यह सिर्फ सामाजिक बयान नहीं था. इसे तालिबान की उस कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है जिसमें वह दुनिया के सामने खुद को सिर्फ एक उग्रवादी संगठन नहीं बल्कि एक ‘सामान्य सरकार’ के रूप में पेश करना चाहता है। 

बंगाल कार्रवाई के बाद बढ़ा अलर्ट, आशंका- कहीं इस राज्य में न घुस आएं बांग्लादेशी घुसपैठिये

भुवनेश्वर

ओडिशा सरकार ने पश्चिम बंगाल के साथ सीमा साझा करने वाले अपने जिलों को बांग्लादेशी घुसपैठियों के संभावित प्रवेश को लेकर सतर्क किया है। ओडिशा सरकार ने यह कदम पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी प्रशासन द्वारा बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ ‘पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो’ की नीति अपनाए जाने के बाद उठाया है।

पश्चिम बंगाल से सटे बालासोर और मयूरभंज जिलों के अधिकारियों को ओडिशा सरकार ने यह निर्देश तब जारी किए गए, जब उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट उप-मंडल स्थित हाकिमपुर जांच चौकी पर बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों के एकत्र होने की खबर सामने आई।

सीमा पर अलर्ट
पुलिस उपमहानिरीक्ष
क (पूर्वी परिक्षेत्र) पिनाक मिश्रा ने कहा, ‘चूंकि संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों ने पश्चिम बंगाल के भीतर आवाजाही शुरू कर दी है, इसलिए उनके ओडिशा में प्रवेश की आशंका है। इसी कारण हम सतर्क हैं और ऐसी किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।’ ओडिशा-पश्चिम बंगाल सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि राज्य में किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके।

मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से घुसपैठियों का पता लगाकर उन्हें कानून के तहत भारत से निर्वासित करने का स्थायी निर्देश है और हम उसी के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों विशेषकर सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाया है। घुसपैठियों के जलमार्गों से प्रवेश की संभावना को लेकर मिश्रा ने बताया कि इसके लिए संबंधित पुलिस थानों को सतर्क कर दिया गया हैं।

दो जिलों में ज्यादा सतर्कता
बालासोर और मयूरभंज ओडिशा के दो ऐसे जिले हैं, जिनकी सीमा पश्चिम बंगाल से लगती है। बालासोर जिले के भोगराई और जलेश्वर ब्लॉक पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों से सटे हुए हैं, जबकि मयूरभंज जिले की पूर्वी सीमा का एक हिस्सा पश्चिम मेदिनीपुर जिले से लगता है।

राजनीतिक बयानबाजी शुरू
इस बीच, ओडिशा में बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया।

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि घुसपैठिये राज्य के लिए एक बड़ी समस्या हैं और राज्य सरकार उनकी पहचान तथा निर्वासन के लिए अभियान पहले ही शुरू कर चुकी है, जबकि बीजद नेता गणेश्वर बेहरा ने इस दावे को खारिज कर दिया।

बेहरा ने कहा, ‘ओडिशा में घुसपैठिये ही केवल बड़ी समस्या नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में स्थिति अलग है, वहां उनकी संख्या लाखों में है। ओडिशा में उनकी संख्या 150 से भी कम है। साढ़े चार करोड़ की आबादी वाले राज्य में घुसपैठियों की संख्या करीब 150 हो सकती है। यह बहुत छोटा मुद्दा है, लेकिन राज्य सरकार प्रचार पाने के लिए राई का पहाड़ बना रही है।’

हालांकि, हरिचंदन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ओडिशा में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों ‘बच नहीं सकते’। उन्होंने कहा कि हम राज्य में रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों को निर्वासित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

1000Km रेंज और पेट्रोल बैकअप के साथ BYD Dolphin लॉन्च, EV मार्केट में मचाएगी धमाल

 नई दिल्ली

BYD की नई टेक्नोलॉजी DM-i की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है. कंपनी इस टेक्नोलॉजी के बदौलत लोगों की रेंज एंजायटी को दूर कर सकती है. इस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड कार कंपनी भारत में भी लॉन्च करने वाली है. खैर फिलहाल कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड Dolphin G DM-i प्लग-इन हाइब्रिड को अनवील किया है। 

ये हैचबैक यूरोपीय बाजार के लिए तैयार की गई है. बीवाईडी ने इस कार को यूरोपीय मार्केट की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है. भारत के लिए भी कंपनी इस टेक्नोलॉजी को टीज कर चुकी है. इसका मतलब है कि बीवाईडी जल्द ही भारतीय बाजार में अपनी पहली हाइब्रिड कार को लॉन्च कर सकती है। 

किनसे है कार का मुकाबला? 
बात करें डॉल्फिन जी डीएम-आई की, तो ये कार 4160 एमएम लंबी है. इस कार का यूरोप में सीधा मुकाबला फॉक्सवैगन पोलो, रेनो क्लिओ (Renault Clio) और टोयोटा यारिस से होगा. जहां इस कार से मुकाबला करने वाली दूसरी गाड़ियों में माइल्ड हाइब्रिड या स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड सिस्टम मिलता है. वहीं डॉल्फिन जी प्लग-इन हाइब्रिड सेटअप के साथ आएगी। 

नई कार के जरिए कंपनी उन यूजर्स को टार्गेट कर रही है, जो ईवी जैसे ड्राइविंग तो चाहते हैं, लेकिन पूरी तरह से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं. इस कार की डिलीवरी यूरोप में 2026 के अंत तक शुरू हो सकती है. कार की कीमतों का ऐलान फिलहाल नहीं हुआ है। 

1000Km की रेंज
कंपनी का दावा है कि ये कार 1000 किलोमीटर (621 मील) की रेंज के साथ आएगी. यूरोप में मिलने वाली ज्यादातर हैचबैक इलेक्ट्रिक कार के मुकाबले ये रेंज ज्यादा है. हालांकि, बीवाईडी ने अभी इस कार की सभी डिटेल्स को रिवील नहीं किया है। 

ब्रांड ने बताया है कि DM-i सिस्टम इलेक्ट्रिक ड्राइविंग को तवज्जो देता है और पेट्रोल इंजन एक रेंज एक्सटेंडर की तरह काम करता है. इससे लंबी दूरी का सफर आसान से किया जा सकता है. डॉल्फिन जी डीएम-आई में भी कंपनी इसी सेटअप का इस्तेमाल कर सकती है. इसमें 1.5 लीटर का पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है। 

कार फ्रंट माउंटेड इलेक्ट्रिक मोटर और बीवाईडी ब्लेड बैटरी टेक्नोलॉजी के साथ आएगी. ऐटो 2 डीएम-आई में कंपनी इस टेक्नोलॉजी को ऑफर करती है. ये कार 164 पीएस और 212 पीएम की पावर वेरिएंट के हिसाब से ऑफर करती है. रिपोर्ट्स की मानें, तो इस कार को कंपनी यूरोप में ही तैयार कर सकती है। 

 

डीके शिवकुमार के सामने बड़ी चुनौती! 24 महीने में खुद को साबित नहीं किया तो टूट सकता है राहुल गांधी का बड़ा सपना

बेंगलुरु

कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन सिर्फ चेहरा बदलने की कहानी नहीं है, यह कांग्रेस के भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है. सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने जा रही है. लेकिन यह ताज फूलों का नहीं बल्कि कांटों का माना जा रहा है. कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब पार्टी दक्षिण भारत में अपनी सबसे मजबूत सरकार को किसी भी कीमत पर बचाए रखना चाहती है. राहुल गांधी की रणनीति साफ है. कर्नाटक को 2028 चुनाव तक कांग्रेस का मॉडल राज्य बनाना है. लेकिन मुश्किल यह है कि पिछले चार दशक में यहां कोई भी सत्ताधारी दल लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी नहीं कर पाया है. ऐसे में शिवकुमार के सामने सिर्फ सरकार चलाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि उन्हें इतिहास बदलने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी. यही वजह है कि दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक इस बदलाव को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है। 

डीके शिवकुमार को संगठन का मजबूत खिलाड़ी माना जाता है. संकट के समय विधायकों को संभालने से लेकर पार्टी को टूटने से बचाने तक उन्होंने कई बार अपनी उपयोगिता साबित की है. लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे. अब उन्हें विपक्ष के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के भीतर असंतोष को भी साधना होगा. सिद्धारमैया भले ही कुर्सी छोड़ चुके हों, लेकिन उन्होंने राज्यसभा जाने से इनकार कर यह संकेत दे दिया है कि वह अभी भी कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे. इसका मतलब साफ है कि शिवकुमार को हर फैसले में राजनीतिक संतुलन बनाकर चलना होगा. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि अगर जातीय समीकरण बिगड़े तो भाजपा और जेडीएस इसका बड़ा फायदा उठा सकते हैं। 

40 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती
    कर्नाटक में पिछले 40 सालों से कोई भी सरकार लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में नहीं लौटी है. कांग्रेस चाहती है कि डीके शिवकुमार इस मिथक को तोड़ें. पार्टी का मानना है कि उनकी आक्रामक शैली और संगठन पर पकड़ आगामी चुनावों में फायदा दिला सकती है. लेकिन यह राह आसान नहीं होगी, क्योंकि सत्ता विरोधी लहर को रोकना सबसे मुश्किल काम माना जाता है। 

    सिद्धारमैया के हटने से कुरुबा समुदाय में नाराजगी की संभावना जताई जा रही है. कांग्रेस इसे संतुलित करने के लिए उनके बेटे यतींद्र को बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. दूसरी ओर, वोक्कालिगा समुदाय में डीके शिवकुमार की मजबूत पकड़ पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ बन सकती है. कांग्रेस को उम्मीद है कि जेडीएस का पारंपरिक वोट बैंक धीरे-धीरे उसकी तरफ शिफ्ट होगा। 

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवकुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘फाइटर’ वाली छवि है. वह जमीनी नेता माने जाते हैं और गांधी परिवार के बेहद करीबी भी हैं. यही कारण है कि राहुल गांधी उन्हें भविष्य के बड़े चेहरे के रूप में देख रहे हैं. हालांकि भाजपा पहले ही कांग्रेस के भीतर संभावित खींचतान को मुद्दा बनाना शुरू कर चुकी है। 

सिद्धारमैया की मौजूदगी बनेगी दबाव?
सिद्धारमैया का दिल्ली राजनीति से दूरी बनाना कई संकेत देता है. वह बेंगलुरु में रहकर अपनी राजनीतिक पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते. इससे डीके शिवकुमार पर लगातार दबाव बना रहेगा. कांग्रेस नेतृत्व भले इसे सहज परिवर्तन बता रहा हो, लेकिन अंदरखाने दोनों खेमों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। 

डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2028 विधानसभा चुनाव से पहले एंटी-इंकंबेंसी को नियंत्रित करना होगी. कर्नाटक में पिछले चार दशक से कोई भी सरकार दोबारा सत्ता में नहीं लौटी है. ऐसे में उन्हें विकास, संगठन और जातीय संतुलन तीनों मोर्चों पर सफल होना पड़ेगा. अगर सरकार के खिलाफ माहौल बनता है तो इसका सीधा असर कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान पर भी पड़ेगा। 

सिद्धारमैया का सक्रिय रहना कांग्रेस के लिए फायदा है या नुकसान?
यह दोनों तरह से असर डाल सकता है. सिद्धारमैया का अनुभव और AHINDA वोट बैंक कांग्रेस के लिए बड़ी ताकत है. लेकिन अगर उनके समर्थकों में असंतोष बढ़ता है तो डीके शिवकुमार के लिए फैसले लेना मुश्किल हो सकता है. इसलिए हाईकमान को दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर रखना होगा। 

राहुल गांधी के लिए कर्नाटक इतना अहम क्यों है?
कर्नाटक इस समय दक्षिण भारत में कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ है. पार्टी इसे 2029 लोकसभा चुनाव से पहले ‘गवर्नेंस मॉडल’ के तौर पर पेश करना चाहती है. अगर कांग्रेस यहां दोबारा सत्ता में लौटती है तो राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति को बड़ी मजबूती मिलेगी. इसलिए मुख्यमंत्री परिवर्तन को भविष्य की बड़ी चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। 

वोक्कालिगा समीकरण से कांग्रेस को उम्मीद
डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं. कांग्रेस को भरोसा है कि इससे जेडीएस का प्रभाव कमजोर होगा. दक्षिण कर्नाटक की कई सीटों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. यही वजह है कि पार्टी इस बदलाव को सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों के पुनर्गठन के रूप में भी देख रही है 

भाजपा की नजर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर
भाजपा पहले ही कांग्रेस के भीतर संभावित गुटबाजी को मुद्दा बनाने की तैयारी में है. पार्टी का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद असंतोष बढ़ सकता है. अगर कांग्रेस अंदरूनी संतुलन नहीं संभाल पाई तो भाजपा इसे अगले चुनाव में बड़ा हथियार बना सकती है। 

 

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन

भोपाल

राज्‍य शासन द्वारा घोषित ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत किसानों को सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन आसानी से उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी के कार्यक्षेत्र में किसानों को अब मात्र 5 रूपये के प्रारंभिक शुल्‍क में नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 01 लाख 10 हजार 478 कृषि पम्‍प कनेक्‍शन उपलब्‍ध करा दिये गये हैं।

भोपाल रीजन के 8 जिलों के 9 हजार 305 गावों में 85 हजार 362 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने तथा ग्‍वालियर रीजन के 8 जिलों के 7 हजार 284 गावों में 25 हजार 116 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन योजना का लाभ उठाया है। कंपनी द्वारा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए ऐसे कृषक जिनके खेत विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं, उनको प्रारंभिक शुल्‍क 5 रूपये में स्थाई कृषि पंप कनेक्शन प्रदान किये जा रहे हैं। कनेक्‍शन की शेष शुल्‍क राशि का भुगतान मासिक देयकों के साथ किश्‍तों में लिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि आवेदक 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी विद्युत केन्‍द्र/जोन अथवा कंपनी के कॉल सेन्‍टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

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