धमतरी प्रशासन की अनूठी ‘पहल’: युवाओं को मिलेगी मुफ्त कोचिंग

​रायपुर
     
धमतरी जिले के प्रतिभाशाली और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के सपनों को अब संसाधनों की कमी नहीं रोक पाएगी। जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय और दूरदर्शी कदम उठाते हुए बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (BCS कॉलेज) में “पहल” कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस विशेष योजना के तहत जिले के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पूरी तरह निःशुल्क (Free) कोचिंग दी जाएगी। इस अवसर पर विद्यार्थियों के सही मार्गदर्शन के लिए ‘युवा’ नामक एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

​सफलता के लिए अनुशासन और सही मार्गदर्शन जरूरी: कलेक्टर
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कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इसे युवाओं के भविष्य निर्माण के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन होनहार युवाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर देना है, जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा पाते। इस निःशुल्क कोचिंग के जरिए विद्यार्थियों का बेसिक फाउंडेशन मजबूत होगा, जिससे वे हर प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का परचम लहरा सकेंगे।
    ​कलेक्टर ने बदलते कॉम्पिटिशन के इस दौर में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, कड़े अनुशासन और सही मार्गदर्शन को सबसे जरूरी चाबी बताया और छात्र-छात्राओं से पूरी लगन के साथ मेहनत करने की अपील की।

​क्या है ‘युवा’ प्रोजेक्ट और इसकी खासियतें?
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प्रशासन की यह मुहिम केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्रों की पूरी तैयारी को व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाने के लिए एक मुकम्मल खाका तैयार किया गया है।कोचिंग में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों को बेहतरीन बुक्स और स्टडी मटेरियल मुफ्त दिया जाएगा। तैयारी के स्तर को जांचने और उसमें सुधार करने के लिए समय-समय पर टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। छात्रों के प्रदर्शन की निरंतर समीक्षा की जाएगी, ताकि उनकी कमजोरियों को पहचान कर उन्हें समय पर सुधारा जा सके।
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​इस भव्य शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, बीसीएस कॉलेज के प्राचार्य, उप संचालक पंचायत, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, सहायक संचालक कौशल विकास, युवाओं को प्रशिक्षित करने वाले जिले के युवा मार्गदर्शक सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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जिला प्रशासन की इस अनूठी ‘पहल’ से धमतरी के सैकड़ों युवाओं को न सिर्फ एक बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा, बल्कि सरकारी सेवा में जाकर देश-प्रदेश की सेवा करने के उनके सपनों को एक नई और मजबूत उड़ान मिल सकेगी।

 

सेवा सेतु के माध्यम से राजेश्वरी को दो दिन में मिला आय प्रमाण पत्र

रायपुर

शासन की डिजिटल सेवाएं अब आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा का सशक्त माध्यम बन रही हैं। मुंगेली के लोक सेवा केंद्र (तहसील कार्यालय परिसर) में संचालित सेवा सेतु पोर्टल ने एक छात्रा के भविष्य को समय पर नई दिशा देने का कार्य किया। सुरीघाट निवासी राजेश्वरी निषाद को स्कूल में प्रवेश (एडमिशन) के लिए आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। प्रमाण पत्र नहीं मिलने की चिंता से परिवार परेशान था और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी।

इसी दौरान राजेश्वरी के पिता भगवत निषाद लोक सेवा केंद्र पहुंचे। वहां मौजूद सेवा सेतु के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए। आवेदन का त्वरित निराकरण करते हुए महज दो दिनों के भीतर आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से राजेश्वरी का प्रवेश बिना किसी बाधा के पूरा हो सका। परिवार ने सेवा सेतु की त्वरित, पारदर्शी एवं नागरिक हितैषी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए जिला प्रशासन और लोक सेवा केंद्र के प्रति आभार व्यक्त किया। 

गौरतलब है कि सेवा सेतु के माध्यम से नागरिकों को आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र सहित अनेक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। डिजिटल इंडिया की परिकल्पना को साकार करते हुए सेवा सेतु आम नागरिकों तक सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है। यह पहल न केवल समय की बचत कर रही है, बल्कि शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को भी मजबूत बना रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन 4 जुलाई से

रायपुर 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन 4 एवं 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को नई गति देना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना, स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास तथा प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनहितकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि सुशासन केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव होगा। चिंतन शिविर में होने वाला मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा को नई दिशा देगा।

राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव

चिंतन शिविर के प्रथम दिवस की शुरुआत आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास के नेतृत्व एवं जीवन मूल्यों पर व्याख्यान से होगी। इसके बाद अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य की शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

द्वितीय दिवस की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके पश्चात सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं, शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे।

सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को मिलेगा बल

चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण एवं समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुखी प्रशासनिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। साथ ही शासन में प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।

विज्ञान भवन बनेगा अनुसंधान और नवाचार का आधुनिक केंद्र: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

रायपुर

रायपुर में होगा राष्ट्रीय ’साइंस म्यूजियम’ का आयोजन

छत्तीसगढ़ में विज्ञान एवं अनुसंधान गतिविधियों को नई दिशा देने की पहल के तहत प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज रायपुर स्थित विज्ञान केन्द्र का निरीक्षण कर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीजी कॉस्ट) की केंद्रीय प्रयोगशाला सुविधा का जायजा लिया। उन्होंने प्रयोगशालाओं, तकनीकी इकाइयों एवं अन्य वैज्ञानिक सुविधाओं का अवलोकन करते हुए उनके आधुनिकीकरण, संसाधनों के विस्तार तथा गुणवत्ता उन्नयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संभावित आगामी माह दिसम्बर में राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय साइंस म्यूजियम का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। गौरतलब है कि इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर के साइंस सेंटर हिस्सा लेंगे। 

रायपुर में होगा राष्ट्रीय ’साइंस म्यूजियम’ का आयोजन

निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव बोरा ने परिषद की सभी शाखाओं एवं प्रयोगशालाओं के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विज्ञान केन्द्र की लाइब्रेरी को आधुनिक एवं सुव्यवस्थित बनाने, प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करने तथा शोध एवं अनुसंधान गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान केन्द्र को राज्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का उत्कृष्ट केंद्र बनाने के लिए दीर्घकालीन योजना के साथ कार्य किया जाए। प्रमुख सचिव बोरा ने इस मौके  पर विज्ञान केन्द्र परिसर में वृक्षारोपण भी किया।

प्रमुख सचिव बोरा ने निर्देश दिए कि परिषद की वैज्ञानिक सुविधाओं का लाभ केवल परिषद तक सीमित न रहे, बल्कि शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों को भी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों की व्यापक समीक्षा कर उन्हें अधिक उपयोगी एवं सुलभ बनाने तथा युवाओं को विज्ञान गतिविधियों से जोड़ने के लिए विज्ञान केंद्रों की गतिविधियों का सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने विज्ञान भवन में आवश्यक अधोसंरचना एवं गुणवत्ता मानकों का विकास कर शीघ्र आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिषद में संचालित जीआईएस आधारित प्रणाली के कार्यों की सराहना की तथा डीजीपीएस आधारित मैप निर्माण की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की।

प्रमुख सचिव ने परिषद की सभी शाखाओं एवं प्रयोगशालाओं के प्रभारियों को आगामी दो वर्षों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रस्तावित साइंस सिटी परियोजना की तैयारियों में तेजी लाने, आवश्यक मानव संसाधन विकसित करने, नए पदों के सृजन एवं भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने विज्ञान केन्द्र में उपलब्ध वैज्ञानिक उपकरणों एवं भवनों के नियमित रखरखाव और मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने कहा कि केंद्र के बेहतर संचालन एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित समीक्षा की जाएगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर एवं सीजी कॉस्ट के महानिदेशक प्रशांत कवीश्वर, डॉ. शिरीष कुमार सिंह, डॉ. अमित मेश्राम, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अमित राम, सुप्रज्ञा कदम, डॉ. वसीम रजा, क्यूरेटर प्रदीप कुर्रे सहित परिषद के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

‘चिरायु’ दल ने लौटाई मुस्कान, जन्मजात कटे होंठ और तालु से मिली मुक्ति

रायपुर

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित ‘चिरायु’ दल दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण है।

जन्म से थी गंभीर समस्या

माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस कारण उसे भोजन करने, साफ बोलने और सामान्य जीवन जीने में काफी परेशानी होती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज कराना संभव नहीं था।

स्कूल में जांच के दौरान हुई पहचान

आरबीएसके के ‘चिरायु’ दल ने स्कूल में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत रायपुर रेफर किया गया।

निःशुल्क सर्जरी से मिली नई जिंदगी

25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और 30 जून 2026 को उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

इलाज का पूरा खर्च शासन ने उठाया

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सर्जरी, जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था तथा उपचार के दौरान रहने और भोजन सहित पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इससे परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

नई मुस्कान, नया आत्मविश्वास

आज माड़कम हुंगा पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहा है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का ‘चिरायु’ दल दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यह पहल बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद का आधार बन रही है।

भिंड के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल 04 व्यक्तियों को त्वरित सहायता देकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

भिंड जिले के थाना मेहगाँव क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से देर रात सड़क दुर्घटना में घायल हुए 04 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की त्वरित सहायता से सभी घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी।

03 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल में सूचना प्राप्त हुई कि थाना मेहगाँव क्षेत्र अंतर्गत एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई है, जिससे उसमें सवार कुछ व्‍यक्ति घायल हो गए है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना मेहगाँव क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ सैनिकश्री अरविन्द यादव एवं पायलट श्री नारायण शर्मा ने मौके पर पहुँचकर पाया कि कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर जाने से उसमें सवार 04 व्यक्ति घायल हो गए थे।डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को डायल 112 वाहन से सुरक्षित शासकीय अस्पताल मेहगाँवपहुंचाया। समय पर मिली सहायता के कारण घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध हो सका।

डायल-112 हीरोजश्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं सहित हर संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर तत्पर है।

 

सरकार गांव, गरीब और किसानों की तरक्की के लिए प्रतिबद्ध-मंत्री टंक राम वर्मा

​रायपुर

 राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों के चहुंमुखी विकास और बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। इसी कड़ी में आज  बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम पंचायत झोंका में विकास कार्यों की बड़ी सौगात मिली। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने यहाँ विभिन्न जनकल्याणकारी और विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर क्षेत्र के विकास को और गति देने के लिए 27 लाख रुपये से अधिक की नई विकास योजनाओं की घोषणा भी की।
     
 ​ग्राम झोंका में आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्व मंत्री वर्मा ने महामाया मंदिर सामुदायिक भवन, केश डबरी प्रवेश द्वार, पचरी निर्माण, महतारी सदन, मुक्तिधाम शेड, तालाब गहरीकरण तथा रंगमंच भवन सहित विभिन्न अधोसंरचना कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने कुर्मी पारा में नवनिर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण कर उसे आम जनता को समर्पित किया।

​गांवों के चहुँमुखी विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध
      
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांव, गरीब और किसानों की तरक्की के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना हमारी प्राथमिकता है ताकि ग्रामीणों का जीवन स्तर और बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में राशि की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।

​इन महत्वपूर्ण कार्यों की हुई घोषणा
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ग्रामीणों की पुरजोर मांग और क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए राजस्व मंत्री ने कार्यक्रम के मंच से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं,जिसमे ​प्राथमिक शाला में सुलभ शौचालय निर्माण हेतु 2 लाख रुपये,​ छापड़ तालाब के गहरीकरण के लिए 10 लाख रुपये,​ मुक्तिधाम में शेड निर्माण के लिए 7 लाख रुपये,​ तालाबों में पचरी निर्माण के लिए 3 लाख रुपये और ​सामुदायिक भवन एवं ज्योति कक्ष निर्माण हेतु 5 लाख रुपये देने का ऐलान किया। इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए उन्होंने जागृति महिला मंडल को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की भी सहर्ष घोषणा की।
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इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष, बलौदाबाजार जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा ग्राम पंचायत झोंका के सरपंच हरीराम धुव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

मानव दुर्व्‍यापारके विरुद्ध प्रभावी विवेचना, समन्वय एवं पुनर्वास को लेकर पुलिस मुख्यालय में एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित

भोपाल 

महिला सुरक्षा शाखा, पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय के नवीन भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में “Capacity Building Seminar on Investigation & Response to Human Trafficking Cases” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के अधिकारी, महिला अपराधों की विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कार्यशाला का शुभारंभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा)श्री अनिल कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मानव दुर्व्‍यापारएक बहुआयामी एवं संगठित अपराध है, जिसकी प्रभावी रोकथाम केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हो सकती।

उन्होंने जागरूकता, रोकथाम, बचाव एवं पुनर्वास को मानव दुर्व्‍यापारनिरोधक तंत्र के चार प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि पुलिस, अन्य विभागों एवं समाज के समन्वित प्रयासों से ही इस अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने सभी जिलों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को और अधिक सक्रिय बनाते हुए लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा तथा पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए।

उप पुलिस महानिरीक्षकसिमाला प्रसाद ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की भूमिका, सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा मानव दुर्व्‍यापारकी संवेदनशील एवं प्रभावी विवेचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गुमशुदगी के प्रकरण में मानव दुर्व्‍यापारकी आशंका का गंभीरता से परीक्षण कर पूरे नेटवर्क का पता लगाना आवश्यक है। उन्होंने घटना के बाद पहले 48 घंटे को “गोल्डन आवर” बताते हुए त्वरित कार्रवाई, पीड़ित-केंद्रित एवं निष्पक्ष विवेचना, जनजागरूकता तथा मानव दुर्व्‍यापारसे जुड़े अपराधियों का व्यवस्थित डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डीआईजी डॉ. किरणलताकेरकेट्टा ने “Bridging the Gaps: Strengthening Investigation & Prosecution of Child Trafficking Cases” विषय पर व्याख्यान देते हुए बाल तस्करी के मामलों में सशक्त विवेचना, प्रभावी अभियोजन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

आवाज़ एनजीओ के निदेशक प्रशांत कुमार दुबे ने “Born to Live, Not to be Sold: Address the Trafficking of Newborn and Adolescent Girls”विषय पर व्याख्यान देते हुए मध्यप्रदेश के नवजात शिशुओं एवं किशोरियों की तस्करी, अवैध दत्तक ग्रहण (Illegal Adoption) तथा इससे जुड़े संगठित अपराधों के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ऐसे अपराधों की प्रभावी रोकथाम के लिए संवेदनशील एवं वैज्ञानिक विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई तथा विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय), इंदौर डॉ. सीमा अलावा ने भी अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए अवैध दत्तक ग्रहण एवं बाल तस्करी से जुड़े मामलों में साक्ष्य संकलन, पीड़ित-केंद्रित जांच तथा पुलिस, न्यायपालिका एवं संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (IJM) की एडवोकेट तृप्ति पाटिल ने “AHTUs As Guardians of Childhood: Combating Trafficking through Early Intervention” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि प्रारंभिक हस्तक्षेप, संवेदनशील समुदायों की पहचान तथा समय रहते की गई कार्रवाई से बाल तस्करी की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।

कार्यशाला में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एएचटीयू की भूमिका केवल पीड़ित के रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित के सुरक्षित पुनर्वास, काउंसलिंग, संरक्षण, न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग तथा भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना भी इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संस्थागत समन्वय, त्वरित जांच एवं समयबद्ध विचारण पर दिए गए निर्देशों की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई।

प्रत्येक जिले की एएचटीयू को राज्य स्तर पर स्थापित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो (AHTB) के साथ सतत समन्वय बनाए रखते हुए कार्य करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी जिलों को लंबित मानव दुर्व्‍यापारप्रकरणों की समीक्षा कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों एवं अपराध के पैटर्न की पहचान कर लक्षित कार्रवाई करने के लिए भी निर्देशित किया गया।

महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम सहित अन्य संबंधित विभागों तथा सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ नियमित समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानव दुर्व्‍यापारजैसे संगठित अपराधों की रोकथाम में पुलिस एवं अन्‍यविभागों तथा सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ही प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में नियमित समन्वय बैठकें आयोजित कर सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने तथा लंबित प्रकरणों की सतत समीक्षा किए जाने की आवश्यकता बताई गई।

कार्यशाला के दौरान मानव दुर्व्‍यापारके मामलों में पुनर्वास की प्रक्रिया को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि केवल पीड़ित की काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों की भी समुचित काउंसलिंग की जानी चाहिए, ताकि पारिवारिक परिस्थितियों को समझते हुए पीड़ित का सफल एवं स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम के अंत में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा)प्रियंका शुक्ला ने सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की

रायपुर

 लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज अधिकारियों की बैठक लेकर विभाग द्वारा किए जा रहे विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं, कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय कार्यप्रणाली को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सुव्यवस्थित, तेज और प्रभावी बनाने के साथ ही कार्यों में आधुनिक तकनीकों व उपकरणों का अधिकतम उपयोग करने को कहा। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में अधिकारियों को भवनों, सड़कों और पुलों के विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों में उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ सामग्रियों के उपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा खरीदी गई सामग्री के जीएसटी बिल अनिवार्य रूप से जमा कराने को कहा। उन्होंने शासकीय भवनों में स्थापित सभी विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का समग्र ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे परिसंपत्तियों के रखरखाव और प्रबंधन में पारदर्शिता तथा दक्षता आएगी।

विभागीय सचिव ने मरम्मत, रखरखाव तथा विभिन्न आयोजनों से संबंधित बिलों के भुगतान नियमित रूप से एक माह के भीतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-ऑफिस के माध्यम से भुगतान की कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने चालू जुलाई माह में 30 जून 2026 तक के सभी लंबित बिलों के भुगतान करने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने प्रमुख अभियंता को कार्यपालन अभियंताओं के लिए आवश्यक बजट आबंटन जारी करने को कहा।

बंसल ने बैठक में यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों में तेजी लाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन कार्यों के कारण निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने शहरों के बीच की सड़कों पर स्थापित स्ट्रीट लाइटों के संचालन, संधारण एवं मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों को सौंपने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने शासकीय भवनों के हैंडओवर के समय ही वहां स्थापित लिफ्टों के संचालन, संधारण और मरम्मत की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। 

उन्होंने विभिन्न शासकीय आयोजनों एवं कार्यक्रमों में लगने वाली व्यवस्थाओं के लिए ठेकेदारों एवं वेंडर्स से रेट-कॉन्ट्रैक्ट व रेट-इम्पैनलमेंट करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अन्य राज्यों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्हें लागू करने को कहा। 

बंसल ने विद्युत एवं यांत्रिकी ठेकेदारों के साथ भी बैठक कर कार्यों में आने वाली समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने विद्युत एवं यांत्रिकी कार्यों में सुदृढ़ता एवं तेजी लाने के लिए उनसे सुझाव भी मांगे। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, विद्युत एवं यांत्रिकी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता टी.आर. कुंजाम और जी.एस. मंडावी, अधीक्षण अभियंता सुरेश भूपल और एन.के. लाल सहित सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा उप संभागों के अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध

रायपुर

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। बता दें कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।   

वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है। 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है।

इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

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