MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे के भूमि अधिग्रहण पर लगाई रोक

 उज्जैन

 मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर निर्मित होने वाला उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे विवादों से बाहर आने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जावरा से लेकर उज्जैन तक किसानों ने इस सड़क का विरोध किया। मजबूरन सरकार ने इसे सामान्य हाईवे बनाने के साथ किसानों को चार गुना मुआवजा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि किसानों को चार गुना मुआवजा मिला नहीं है। वहीं अब मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर स्टे दे दिया है। न्यायालय ने गांव मंगरोला, सोडंग और झिरनिया उन्हेल के किसानों की याचिका पर सुनवाई कर विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इस स्टे पर आगामी सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

भूमि अधिग्रहण के नियमों का नहीं हो रहा पालन- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे। जिन पर प्रशासन द्वारा विधिसम्मत विचार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया। अधिवक्ता विशाल चौहान ने बताया कि उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है।

अन्य किसानों के लिए हो सकता है फायदा
तीन गांवों के किसानों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका लगाने और स्टे मिलने के बाद अन्य किसानों के लिए भी हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। क्योंकि अब भी क्षेत्र के कई किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं सरकार ने चार गुना मुआवजे की घोषणा की थी, परंतु नागदा-खाचरौद विधानसभा के ही कई किसानों को दोगुना मुआवजा ही दिया गया है। यहीं नहीं किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध करने पर प्रशासनिक और पुलिस अमला उन्हें डरा भी रहा है। जिसके कई वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए है। ऐसे में वह किसान जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है और जमीन अधिग्रहण हो रही है, वह भी हाईकोर्ट की शरण ले सकते है।

पनामा नहर पर चीन की चाल से अमेरिका सतर्क, ट्रंप की दो टूक चेतावनी- ‘ऐसा सोचो भी मत’

वाशिंगटन 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाते हुए कहा है कि चीन पनामा नहर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वे अमेरिका को सर्वोपरि रखते हैं और वो इसके लिए कोई भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. इस बार उन्होंने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन को वॉर्निंग दी है, वो भी दुनिया के कुछ अहम जलमार्गों में से एक पनामा नहर को लेकर। 

ट्रंप ने पनामा नहर को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बताते हुए चेतावनी दी कि यह अमेरिका-चीन के बीच नया तनाव का केंद्र बन सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नॉर्थ डकोटा में एक कार्यक्रम में चीन पर निशाना साधते हुए कहा – ‘चीन पनामा नहर पर कब्जा करने की फिराक में है।. हम इसे कभी नहीं होने देंगे. यह हमारा बनाया हुआ है और हम इसे वापस लेंगे अगर जरूरी हुआ.’ डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर को दुनिया की सबसे महंगी और सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली संपत्तियों में से एक बताया। 

पनामा नहर क्यों इतनी महत्वपूर्ण?

    पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला 82 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है. हर साल हजारों जहाज इसके रास्ते गुजरते हैं, जिसमें वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा शामिल है. यह मार्ग जहाजों को हजारों मील की दूरी बचाता है. अमेरिका इसका सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, जबकि चीन दूसरा सबसे बड़ा। 

    अगर चीन इसका नियंत्रण हासिल कर लेता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर उसका दबदबा बढ़ जाएगा. ट्रंप का कहना है कि चीनी कंपनियां नहर के दोनों छोर पर बंदरगाहों का संचालन कर रही हैं, जो रणनीतिक खतरा है. अमेरिका इसे अपने पश्चिमी गोलार्द्ध में चीनी घुसपैठ मानता है। 

ट्रंप वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को परफेक्ट मानते हैं, जहां उन्होंने निकोलस मादुरो की सरकार को उखाड़ फेंकने में सफलता पाई. अब वे ईरान पर भी इसी तरह दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं. ट्रंप ने इसी वजह से चीन पर निशाना साधा है. उन्होंने ईरान पर भी तंज कसा और कहा-

    ‘ईरान कुछ-कुछ वेनेजुएला जैसा हो रहा है, जो पहले मुनाफे वाली थी. हमने वेनेजुएला को काबू में कर लिया और ईरान के साथ भी वैसा ही कर रहे हैं। 

क्या पनामा नहर बन रहा नया होर्मुज?
अगर ये मामला गर्माया तो पनामा नहर होर्मुज की खाड़ी की तरह नया संघर्ष का केंद्र बन सकता है. होर्मुज से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, जहां ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव हमेशा रहता है. पनामा नहर भी वैश्विक व्यापार का चोकप्वाइंट है. अगर यहां अमेरिका-चीन की टक्कर बढ़ी तो व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है। 
ट्रंप का आक्रामक रुख दिखाता है कि अमेरिका अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में किसी भी विदेशी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा. हालांकि चीन के खिलाफ सीधे लड़ना या उसे उकसाना अमेरिका के लिए इतना आसान नहीं होगा लेकिन ट्रंप के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए कुछ कहा नहीं जा सकता है। 

इस नहर का सीधा समंदर से कनेक्‍शन नहीं है, बल्कि गाटुन लॉक में जहाजों को पानी भरकर 26 मीटर तक ऊंचा उठाया जाता है और फिर उसे दूसरी तरफ समंदर में उतारा जाता है. इस नहर से जहाजों को तीन चरण में रास्‍ता पार कराया जाता है. अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली इस नहर को इंजीनियरिंग का कमाल कहा जाता है. इसमें 3 लॉक बनाए गए हैं, जिससे जहाज को गुजारा जाता है और प्रशांत महासागर से निकालकर अटलांटिक महासागर में भेजा जाता है। 

पनामा नहर पर अमेरिका ने कैसे किया कब्जा?

    पनामा नहर की कहानी 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ी है. 1901 से 1909 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति रहे थियोडोर रूजवेल्ट ने इसे अमेरिका की बड़ी महत्वाकांक्षा बनाया. फ्रांस पहले इसकी असफल कोशिश कर चुका था। 
    1903 में रूजवेल्ट ने कोलंबिया (जिसका हिस्सा पनामा था) से समझौता करने की कोशिश की, लेकिन कोलंबिया ने मना कर दिया. तब रूजवेल्ट ने पनामा के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया. अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी में पनामा अलग हो गया। 

    नई पनामा सरकार से हाए बुनाउ वरीला संधि (Hay-Bunau-Varilla Treaty) के तहत अमेरिका को 10 मील चौड़ी पट्टी मिल गई. अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर एकमुश्त और सालाना किराया दिया. 1904 से 1914 तक निर्माण चला. रूजवेल्ट खुद 1906 में साइट पर गए और खुदाई मशीन पर खड़े होकर तस्वीर खिंचवाई। 

    1914 में पनामा नहर खुली और रूजवेल्ट ने गर्व से कहा था कि मैंने नहर बनवाई. अमेरिका ने साल 1999 तक नहर पर पूर्ण नियंत्रण रखा. जिम्मी कार्टर के समय टॉरिजोस कार्टर ट्रीटी के तहत पनामा को सौंप दिया गया, लेकिन न्यूट्रैलिटी की गारंटी ली गई। 

ट्रंप का दावा ऐतिहासिक अमेरिकी गौरव और वर्तमान परिस्थितियों पर टिका है. वे कहते हैं कि अमेरिका ने नहर बनाई, उसमें खून-पसीना बहाया, इसलिए उसका हक भी अमेरिका का है. चीन की बढ़ती मौजूदगी को वे आर्थिक और रणनीतिक खतरा मानते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पनामा नहर पर अमेरिका-चीन टकराव बढ़ सकता है, हालांकि इसे कूटनीति से ठीक किया जा सकता है. अगर तनाव बढ़ा तो वैश्विक व्यापार, तेल और सामान की कीमतों पर असर पड़ेगा. ट्रंप का यह बयान न सिर्फ पनामा बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव बहाल करने की उनकी बड़ी रणनीति का हिस्सा लगता है। 

2030 तक तेल संकट से बड़ी राहत! SBI रिपोर्ट में भारत के लिए सामने आया बड़ा प्लान

नई दिल्‍ली

ईरान-अमेरिका जंग के दौरान भारत को कच्‍चे तेल के आयात में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देश से ज्‍यादा कीमत पर कच्‍चे तेल का आयात करना पड़ा, जिस कारण देश का आयात बिल काफी बढ़ गया। 

अब देश अपने आयात बिल को कम करने पर फोकस कर रहा है. साथ ही एनर्जी को लेकर दूसरे देशों से निर्भरता को कम कर रहा है. जिसे लेकर सरकार ने इलेक्‍ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है और इसे प्रमोट भी कर रही है. नियामकी चीजों में ढील भी दी गई है. हर तरफ से सरकार का फोकस कच्‍चे तेल को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है. इस बीच, SBI की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया गया है। 

SBI की रिपोर्ट कहती है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2030 तक भारत एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा, जिससे उसका आयात बिल 1 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है, जिससे भारत को एक बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, इसके लिए भारत को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं…

2030 तक हो सकता है ये बड़ा बदलाव
दरअसल, रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ऐसा लगता है कि 2027 से 2030 के बीच 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं. अगर 2030 तक घरेलू ऑटो मार्केट में 20 फीसदी ईवी का हिस्‍सा होता है तो भारत का इम्‍पोर्ट बिल 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मार्च से जून महीने के दौरान, हर महीने एवरेज 2.30 लाख ईवी वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. यह 2025 तक हर महीने 1.3 लाख था. इसका मतलब है कि हर महीने ईवी रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या में करीब 1 लाख की बढ़ोतरी हुई है। 

चार्जिंग इंफ्रा बढ़ाने पर जोर 
SBI की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अलग-अलग राज्‍यों में चार्जिंग स्‍टेशनों को लेकर लोड अलग-अलग है. कुछ राज्‍यों में हर चार्जिंग स्‍टेशन 200 से ज्‍यादा ईवी की सेवा देते हैं और दूसरे राज्‍यों में यह संख्‍या 50 वाहनों तक ही सीमित है. भारत में ईवी चार्जिंग की सफलता, चार्जिंग स्‍टेशनों और ईवी इंफ्रा पर निर्भर करेगी. भारत में कुल 29,151 चार्जिंग स्‍टेशन हैं. इसमें भी कर्नाटक और महाराष्‍ट्र में कुल देश का 35 फीसदी ईवी इंफ्रा डेवलप है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सबसे पहले हर राज्‍यों में चार्जिंग इंफ्रा को बढ़ाने पर जोर देना होगा। 

दूसरे देशों पर निर्भरता होगी कम 
अगर सरकार और राज्‍य पूरी क्षमता के साथ ईवी को प्रमोट करते हैं और उसके सफलता के लिए सही प्रयास किए जाते हैं तो यह कच्‍चे तेल के आयात में बड़ी कटौती कर सकती है. देश में पेट्रोल-डीजल पंपो की संख्‍या कम हो सकती है, क्‍योंकि ईवी के आने से ईंधन भरवाने की समस्‍या कम हो जाएगी. इस वजह से दूसरे देशों-खासकर मिडिल ईस्‍ट और अमेरिका जैसे दशों से कच्‍चे तेल की निर्भरता कम हो जाएगी। 

20 जुलाई से शुरू हो सकता है संसद का मॉनसून सत्र, PM-CM की कुर्सी से जुड़े बड़े बिल पर नजर

नई दिल्ली

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस बार मॉनसून सत्र तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति में इसपर कोई फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर चार सप्ताह तक मॉनसून सत्र चलता है और इसमें 20 बैठकें होती हैं। हालांकि इस बार बैठकों की संख्या कम भी हो सकती है।

बता दें कि पश्चिम बगाल, असम और पुदुच्चेरी में बीजेपी की जीत और कई पार्टियों में चल रही अंदरूनी कलह के बीच यह सत्र हो रहा है। ऐसे में सदन में कई मामलों को लेकर हंगमा होने के भी आसार हैं। टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन करने का ऐलन कर दिया है। इसके अलावा शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के साथ सात सांसद पहले ही बीजेपी के साथ आ गए हैं। अब एनसीपी (SP) में भी टूट के कयास लगाए जा रहे हैं।

टीएमसी और शिवसेना सांसदों पर भी होगा फैसला
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को टीएमसी के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को लेकर भी फैसला करना है। इन सांसदों ने उन्हें अलग गुट की मान्यता देने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले भी इसपर फैसला हो सकता है। राज्यसभा में सत्तापक्ष के समीकरण काफी मजबूत हो गए हैं।

महिला आरक्षण विधेयक फिर पेश कर सकती है सरकार
पिछले सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर गया था। लोकसभा में संख्या कम होने की वजह से निचले सदन में ही विधेयक पारित नहीं हो पाए थे। हालांकि अगर इस बार मॉनसून सत्र से पहले ही स्पीकर फैसला करते हैं तो सत्तापक्ष दोनों सदनों में मजबूत हो सकता है। ऐसे में सरकार महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक 2029 को लोकसभा में पेश कर सकती है।

जानकारी के मुताबिक सरकार इन विधेयकों का मसौदा फिर से तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया जा सकता है। दक्षिण के राज्यों का कहना था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के निर्धारण से उनका प्रतिनिधित्व संसद में कमजोर हो जाएगा। इसी समस्या को टालने के लिए सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का विधेयक लाया जा सकता है।

पीएम-सीएम जेल वाला बिल
सरकार इस सत्र में पीएम और सीएम की कुर्सी छीनने वाला बिल भी ला सकती है। बताया जा रहा है कि संशोधन विधेयक के लिए ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं कि सजा होने पर सीएम और पीएम की कुर्सी छीन ली जाए। इसके अलावा कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए अन्य सिफारिशें भी की जा सकती है। एक देश एक चुनाव बिल को पारित कराने के लिए भी सरकार जोर लगा सकती है। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एफसीआरए बिल, एंटी डोपिंग बिल भी पेश किया जा सकता है।

गुजरात ATS का बड़ा एक्शन, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 8 संदिग्ध गिरफ्तार; दो राज्यों में छापेमारी

 गांधीनगर

गुजरात ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 8 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी गुजरात में आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय नेटवर्क बनाने के लिए काम कर रहे थे।

इस बारे में जानकारी देते हुए गुजरात एटीएस ने बताया कि इन सभी 8 आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 13, 17, 18, 38, 39 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 148 और 61 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ATS ने इन आठ संदिग्धों को दबोचा
ATS ने बताया कि आरोपियों की पहचान अहमद, पिता अब्दुल्ला गाज़ीवाला, इब्राहिम घाघा, पिता मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर, पिता अब्दुल्ला गाजीवाला, जकारिया दुर्रानी, ​​पिता मोहम्मद अम्मार घाघा, मुफ्ती फौज़ान, पिता इस्माइल दौवा, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल, पिता रहमान सावदी और बिलाल मोहम्मद, पिता अम्मार घाघा के रूप में हुई है।

इससे एक दिन पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए गुरुवार को पुलिस अधिकारी ने बताया कि, इस बाबत तीन आरोपियों को पंजाब से और एक को दिल्ली से पकड़ा गया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने का काम सौंपा था।

दिल्ली में आतंकी गतिविधि को देना चाहते थे अंजाम
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभदीप सिंह उर्फ विशाल (23), गुरजंत सिंह उर्फ ऋषि (22), साजन सिंह उर्फ हनी (28) और गगनप्रीत (24) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि ये आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।
बचने के लिए विदेशी नंबरों का कर रहे थे इस्तेमाल
एक अधिकारी ने बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी अपने पाकिस्तानी आकाओं द्वारा मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सशस्त्र कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आरोपियों से इतने हथियार बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक जिगाना पिस्तौल, एक .30 बोर पिस्तौल, नौ कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विशेष प्रकोष्ठ को खुफिया जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान स्थित आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहा है और इसके लिए उसने पंजाब के युवाओं को भर्ती किया है।

EPFO का बड़ा अपडेट! UAN Activation का तरीका बदला, वेबसाइट फिर हुई शुरू; जानिए नए नियम और सुविधाएं

 नई दिल्‍ली
कई बार डेडलाइन बढ़ाने और 8 दिनों तक लगातार बंद रखने के बाद फाइनली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) की वेबसाइट को फिर से बहाल कर दिया गया है, लेकिन अब भी कई सर्विसेज को यूज करने में थोड़ी दिक्‍कत आ सकती है। 

EPFO ने अपने पोर्टल पर जानकारी शेयर करते हुए कहा है कि सर्विस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और मेंबर एक्‍सप्रीएंस को बेहतर बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण डेटाबेस और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. सदस्‍य और नियोक्‍ता सर्विस सही तरीके से शुरू कर दी गई हैं और उपयोग के लिए उपलब्‍ध हैं। 

EPFO ने आगे कहा कि क्‍लेम और सर्विस रिक्वेस्‍ट को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से प्रॉसेस किया जाएगा. साथ ही शुरुआती 2 सप्ताह की अवधि के दौरान सटीकता तय करने के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन और अथेंटिफिकेशन जांच भी की जाएगी। 

EPFO ने स्पष्ट किया है कि अब UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा पूरी तरह UMANG App पर शिफ्ट कर दी गई है, यानी अगर किसी कर्मचारी को अपना UAN एक्टिवेट करना है या पहली बार UAN बनवाना है, तो उसे अब EPFO पोर्टल की बजाय UMANG ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इस प्रक्रिया में आधार आधारित Face Authentication (FAT) का उपयोग किया जाएगा, जिससे पहचान की पुष्टि अधिक सुरक्षित और आसान होगी।

अगर आपका UAN अभी तक एक्टिव नहीं है, तो सबसे पहले अपने मोबाइल में UMANG App डाउनलोड करें। इसके बाद ऐप खोलकर EPFO Services में जाएं। यहां “UAN Services Through Face Auth” के अंदर “UAN Activation” विकल्प चुनें। फिर स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें। इसके बाद आपका UAN सफलतापूर्वक एक्टिवेट हो जाएगा।

पहले EPFO पोर्टल के जरिए सीधे नया UAN बनाया जा सकता था, लेकिन अब यह सुविधा भी वेबसाइट से हटा दी गई है। अगर किसी कर्मचारी का PF अकाउंट है लेकिन अभी तक UAN नहीं बना है, तो वह UMANG App में “UAN Allotment and Activation” विकल्प चुनकर अपना नया UAN प्राप्त कर सकता है। इसके लिए मोबाइल नंबर सत्यापित करना होगा, आवश्यक सदस्य विवरण भरना होगा और आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा।

नए EPFO पोर्टल पर UAN Retrieval की प्रक्रिया पहले से कहीं आसान कर दी गई है। अगर आपको अपना UAN याद नहीं है, तो पोर्टल पर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और मांगे गए पहचान या पते से जुड़े दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करके आप आसानी से अपना UAN दोबारा प्राप्त कर सकते हैं।

EPFO ने यह भी स्पष्ट किया है किडेथ क्लेम यानी सदस्य की मृत्यु के बाद क्लेम करने की सुविधा अभी भी यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर उपलब्ध रहेगी। नामांकित व्यक्ति (Nominee) या लाभार्थी पेंशन और अन्य दावों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी का आधार से लिंक मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए और बैंक खाते की जानकारी तैयार रखनी होगी। आवेदन के दौरान मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और जन्म तिथि का प्रमाण जैसे दस्तावेज PDF फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे। हर फाइल का साइज 2 MB से कम होना चाहिए और फाइल के नाम में स्पेस नहीं होना चाहिए।

UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) भारत सरकार का आधिकारिक मोबाइल ऐप है, जिसके जरिए नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। EPFO की अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं भी अब इसी ऐप के माध्यम से उपलब्ध हैं। इससे कर्मचारियों को EPFO कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी और अधिकांश काम घर बैठे मोबाइल से ही पूरे किए जा सकेंगे।

EPFO के नए पोर्टल और UMANG ऐप के जरिए सेवाओं को अधिक डिजिटल, सुरक्षित और आसान बनाने की कोशिश की गई है। अगर आप EPF सदस्य हैं, तो अब UAN से जुड़ी सेवाओं के लिए UMANG ऐप का इस्तेमाल करना ही सबसे आसान और आधिकारिक तरीका होगा।

ईपीएफओ ने दी ये सलाह
सदस्यों और नियोक्ताओं से अनुरोध है कि वे धैर्य रखें, क्योंकि इस अवधि के दौरान क्‍लेम्‍स और कुछ सेवाओं के प्रॉसेस में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है. सदस्यों से यह भी अनुरोध है कि वे व्यस्त समय के दौरान ऑनलाइन सेवाओं का बार-बार उपयोग करने या बार-बार अनुरोध करने से बचें. EPFO अपने सभी सदस्‍यों के धैर्य और सहयोग की सराहना करता है और अपने सभी सदस्‍यों के लिए सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। 

क्‍या-क्‍या चीजें हुईं अपडेट? 
ईपीएफओ ने सिर्फ इतनी जानकारी दी है कि सभी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर दिया गया है. हालांकि, उसने इस चीज की जानकारी नहीं दी कि क्‍या-क्‍या नई चीजें शुरू हुई हैं या क्‍लेम या अन्‍य प्रॉसेस अब कितना आसान हो जाएगा? सिर्फ इतना बताया गया है कि मेंटेनेस काम और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है। 

एक हफ्ते तक बंद थी साइट 
ईपीएफओ की वेबसाइट पिछले 7 दिनों से बंद की गई थी. ईपीएफओ का कहना है कि यह सर्विस इसलिए बंद थी, क्‍योंकि वह जरूरी डेटा और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा था, ताकि सदस्‍यों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।  

गौरतलब है कि शुरुआत में, ईपीएफओ ने कहा था कि मेंटेनेस के लिए 28 जून को समाप्त हो जाएगा और सेवाएं 29 जून को फिर से शुरू हो जाएंगी. बाद में उसने समयसीमा में संशोधन किया और डेडलाइन को 1 जुलाई की रात 11:59 बजे तक बढ़ा दिया, और अंत में घोषणा की कि सेवाएं 3 जुलाई, 2026 को फिर से शुरू हो जाएंगी, लेकिन आज दोपहर बाद ये सेवाएं बहाल की गई हैं। 

अगला प्रधानमंत्री कौन? अमित शाह, योगी आदित्यनाथ या कोई और… सर्वे में सामने आई बड़ी तस्वीर

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 से प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान संभाल रहे हैं। हाल ही में वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह हमेशा चर्चा का मुद्दा रहता है कि भारतीय जनता पार्टी में उनके बाद इस पद को कौन संभाल सकता है। हालांकि, भाजपा नेता पीएम मोदी के ही लगातार नेतृत्व की बात करते रहे हैं। हाल ही में उनके उत्तराधिकारी को लेकर एक पोल किया गया था।

लाइव हिन्दुस्तान की तरफ से जून में पोल किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के संभावित उम्मीदवार को लेकर जनता की राय पूछी गई थी। आंकड़े बताते हैं कि इस रेस में सबसे आगे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चल रहे हैं। पोल में शामिल आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने उनके नाम का चुनाव किया है।

क्या रहे नतीजे
पोल के मुताबिक, 58 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगाई। जबकि, 22 प्रतिशत लोग केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन में थे। 5 प्रतिशत लोगों ने नितिन गडकरी और 3 फीसदी लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नाम का विकल्प चुना। जबकि, 9 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी और नेता के विकल्प का चुनाव किया।

PM मोदी के नाम रिकॉर्ड
मोदी 10 जून को भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले व्यक्ति बन चुके हैं। वह लगातार 4,399 दिन से इस पद पर हैं और उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे थे।

मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में भी 9000 से भी अधिक दिन तक कार्य कर चुके हैं। उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में नौ जून 2024 को शपथ ली थी।

बने रहेंगे पीएम
बीते साल अप्रैल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद भी मोदी ही देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा था, ‘यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के बारे में सोचने का सही समय नहीं है, क्योंकि 2029 में मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।’

योगी आदित्यनाथ का क्या था जवाब
बीते साल पीटीआई से बातचीत में भावी पीएम उम्मीदवार को लेकर आदित्यनाथ से सवाल किया गया था। तब उन्होंने कहा था, ‘देखिए, मैं एक राज्य का मुख्यमंत्री हूं। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश की जनता के लिए यहां लगाया है और राजनीति मेरा फुल टाइम जॉब नहीं है। फिलहाल, हम यहां काम कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं योगी हूं।’

राजनाथ सिंह ने दिया इस्तीफा तो मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी? अमित शाह के प्रमोशन की भी चर्चा तेज

नई दिल्ली

केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस नई कैबिनेट में अमित शाह गुट के नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है।

आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के कैबिनेट से इस्तीफा देने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की तरफ से वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई टीम लगभग तैयार है। कल रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी बैठक की है। अब सबकी नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह भी चर्चा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कुछ केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति बनाने की क्यों अटकलें?
2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यह राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। इसलिए बीजेपी देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राजनाथ सिंह को आगे कर सकती है। राजनाथ सिंह को बीजेपी के सबसे अनुभवी और सर्वमान्य नेताओं में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और मौजूदा रक्षा मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करता है।

लखनऊ सीट से कौन लड़ेगा चुनाव?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर राजनाथ सिंह राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट खाली हो सकती है। उनके बेटे नीरज सिंह के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।

अमित शाह को भी मिलेगा प्रमोशन?
कैबिनेट फेरबदल की संभावना के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ जानकारों का मानना ​​है कि आगामी फेरबदल में उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। अमित शाह अभी सरकार, संगठन और प्रशासनिक फैसलों में बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाए या नहीं, इससे उनपर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हां, अगर अमित शाह को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो इसे भविष्य के नेतृत्व को लेकर बीजेपी की तरफ से एक अहम राजनीतिक संकेत माना जाएगा।

8th Pay Commission: न्यूनतम ₹69,000 सैलरी की मांग क्यों? HRA और फैमिली फैक्टर का पूरा गणित समझिए

नई दिल्ली

8वें वित्त आयोग के पास कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े संगठन लगातार सुझाव दे रहे हैं। संगठनों की तरफ से जो प्रमुख मांगें अधिक फिटमेंट फैक्टर के अलावा है वो एचआरए, फैमिली काउंच, डीए और टीटीपीए को बढ़ाना है। इन संगठनों का कहना है कि लेवल 1 और 2 के कर्मचारियों को दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा पे स्केल पर अपनी जरूरतों को पूरा करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि क्या मांग की जा रही है?

क्या कहना है फेडरेशन का? (8th Pay Commission demands)
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आल इंडिया एनपीएस एप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसीडेंट मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा समय में एंट्री लेवल पर बेसिक पे 18000 रुपये का है। इसमें एचआरए 5400 (दिल्ली जैसे शहरों के लिए) है। और टीटीपीए 2800 रुपये (जिसमें 60 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी) मिल रहा है। मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा 5400 रुपये एचआरए और 2800 रुपये टीटीपीए दिल्ली जैसे शहर के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि संगठन लगातार फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

8th pay commission: फिटमेंट फैक्टर्स भी बढ़ाने पर है जोर
36% HRA की मांग (8th Pay Commission HRA)

पटेल का कहना है कि मौजूदा खर्च को देखते हुए कर्मचारियों का एचआरए कम से कम 36 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं, फैमिली काउंट 4.4 होना चाहिए। इसके अलावा 8वें वित्त आयोग से लेवल एक कर्मचारी के लिए कम से कम 9000 रुपये टीपीटीए की मांग की गई है। उनका कहना है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर रखने पर सैलरी में कम से कम 65 प्रतिशत का इजाफा होगा।

25 प्रतिशत डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA)

AINPSEF ने पे कमीशन से डीए के 25 प्रतिशत होने पर बेसिक पे के साथ मर्जर की डिमांड की है। इसके अलावा इस संगठन ने 8वें पे कमीशन से फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की डिमांड की है। अगर ऐसा हुआ तो बेसिक कर्मचारियों का कम से कम 69000 रुपये का हो जाएगा। बता दें, लगभग सभी संगठनों की तरफ से 8वें वित्त आयोग से फैमिली काउंट को बढ़ाने की मांग हुई है।

मौजूदा समय में 3 है फैमिली काउंट (8th Pay Commission family Count)

7वें वित्त आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के लिए फैमिली काउंट को तीन रखा था। इसमें कर्मचारी के लिए 1.0, पत्नी के लिए 0.8 और दो बच्चों के लिए 0.6-0.6 यूनिट था। AINPSEF ने फैमिली यूनिट को 4.4 करने की मांग की गई है। इसमें माता-पिता के लिए भी 0.7-0.7 यूनिट जोड़ने की डिमांड की गई है।

फैमिली यूनिट बढ़ने से क्या लाभ

अगर फैमिली यूनिट को 8वें पे कमीशन की तरफ से 4.4 किया गया तब की स्थिति में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 2.05 गुना बढ़ेगी।

कैसे HRA बढ़ने पर बढ़ जाएगी सैलरी?

मौजूदा समय में बेसिक सैलरी 18000 रुपये है।

डीए 58 प्रतिशत जोकि 10800 रुपये होता है।

एचआरए 30 प्रतिशत जोकि 5400 रुपये होता है।

टीपीटीए 1800 + 58% = 1800 + 1800 =2880 रुपये होता है।
AINPSEF ने 2.1 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 37800 रुपये बेसिक पे की बात कही है।

इसमें 2 प्रतिशत डीए को जोड़ ले तो 756 रुपये महंगाई भत्ता होता है। एचआरए को अगर 36 प्रतिशत जोड़ लिया जाए तो यह 13608 रुपये होगा। बता दें, टीपीटीएए 9000 रुपये + 2% = 9180 रुपये होगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी 37800 रुपये से बढ़कर 8वें वित्त आयोग के लागू होने के बाद 61344 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ओवर आल कुल 65 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।

Crypto पर RBI की बड़ी चेतावनी, कहा- भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बन सकता है बड़ा खतरा; सरकार से की अहम मांग

नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को आगाह किया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. आरबीआई का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी को कानूनी मान्यता बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने आरबीआई ने यह बात मजबूती से रखी है। 

देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा
समिति की बैठक में ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट और आगे की राह’ विषय पर चर्चा हुई. इस दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. केंद्रीय बैंक ने चिंता जताई कि इस डिजिटल पैसे का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने (टेरर फंडिंग) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरनाक और गैरकानूनी कामों में आसानी से किया जा सकता है। 

विदेशी कंपनियों पर लगाम कसना मुश्किल
आरबीआई ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया कि क्रिप्टो करेंसी का व्यापार ज्यादातर भारत के बाहर सक्रिय विदेशी कंपनियों (ऑफशोर एंटिटीज) के जरिए होता है. इन बाहरी कंपनियों पर भारतीय रेगुलेटरी संस्थाओं के लिए नजर रखना और उन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल है. अपनी बात को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने वैश्विक स्तर के उदाहरण भी दिए. केंद्रीय बैंक ने बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने इस तरह की सभी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसे बहुत ही कड़े नियमों के दायरे में रखा हुआ है। 

आईसीएआई (ICAI) ने दिया कानून का समर्थन
इसी संसदीय समिति के सामने देश की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था, ‘इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. आईसीएआई ने कहा कि वह वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाने के पक्ष में है. संस्था ने भरोसा दिया कि वे सरकार और निवेशकों की मदद के लिए एक खास वित्तीय और अकाउंटिंग फ्रेमवर्क तैयार कर सकते हैं। 

पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर
आईसीएआई ने सुझाव दिया कि वे विभिन्न प्रकार की डिजिटल एसेट्स के आर्थिक व्यवहार पर गहन रिसर्च कर सकते हैं. इस रिसर्च के आधार पर वे ऐसा गाइडेंस नोट या नियम तैयार करेंगे, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को पारदर्शिता से दिखाया जा सके. इससे देश में टैक्स चोरी रुकेगी और डिजिटल संपत्ति का सही लेखा-जोखा मिल सकेगा। 

संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद पुष्टि की कि रिजर्व बैंक देश में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति फिलहाल आयकर कानून के तहत डिजिटल एसेट्स के ऑडिट और टैक्स से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। 

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