मध्य प्रदेश के शरबती गेहूं ने तोड़ा 7 साल का रिकॉर्ड, ₹6,500 प्रति क्विंटल पार; आटा हो सकता है महंगा

भोपाल 
इस साल थाली की रोटी न सिर्फ स्वाद में ‘शाही’ होगी, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ने वाली है। अपनी मिठास और चमक के लिए मशहूर ‘शरबती’ गेहूं ने इस बार बाजार में ऐसा जलवा बिखेरा है कि दाम पिछले 7 साल के उच्चतम स्तर पर जा पहुंचे हैं। बारिश व ओलावृष्टि के कारण फसल क्या बिगड़ी, शरबती के तेवर (MP Sharbati Wheat Price) ही बदल गए। शहर में प्रीमियम 5500 से लेकर 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक चुका। कारोबारियों की मानें तो दीपावली का त्योहार आते-आते यह आंकड़ा 6500 रुपए के पार निकल जाएगा।

आवक की चमक और मौसम की मार
वर्तमान में मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर की मंडियां सीहोर, आष्टा, गंजबासौदा और अशोकनगर के शरबती गेहूं से गुलजार तो हैं, लेकिन इस बार आवक में वो दम नहीं है। अप्रेल-जून के सीजन में अमूमन होने वाली 1.50 लाख क्विंटल की आवक इस बार सिमटती दिख रही है। वजह साफ है-बेमौसम बारिश से गेहूं दागी हो गया, जिससे बढिय़ा क्वालिटी के गेहूं की किल्लत हो गई है।

शरबती के शौकीनों पर पड़ेगा सीधा असर
विशेष स्वाद और मुलायम रोटियों के लिए पसंद किए जाने वाले शरबती गेहूं के उपभोक्ताओं को इस बार अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित आपूर्ति, बेहतर गुणवत्ता (MP Sharbati Wheat Quality) की कमी और त्योहारी मांग बढऩे से आने वाले महीनों में कीमतों में और तेजी आ सकती है।

ब्रांडेड आटा भी हुआ ‘लाल’
थोक बाजार में शरबती गेहूं की बढ़ती कीमतों का असर अब खुदरा बाजार तक पहुंच गया है। ब्रांडेड कंपनियों के पांच किलो आटे के पैकेट 210 से 240 रुपए तक बिक रहे हैं। इससे घरेलू रसोई का मासिक बजट (MP Sharbati Wheat price impact on kitchen budget) और अधिक प्रभावित हो रहा है। हालांकि, सामान्य मिल क्वालिटी के लोकमन गेहूं के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं। दीनारपुर अनाज मंडी में लोकमन का भाव 2,450 से 2,550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है और प्रतिदिन लगभग 500 क्विंटल की आवक दर्ज की जा रही है।

सात वर्षों में ऐसे बढ़ा शरबती का रुतबा 

वर्ष – दाम

2020 – 3,500- 3,800

2021 – 3,600-4,000

2022 – 4,200-4,600

2023 – 4,400-4,800

2024 – 4,800-5,200

2025 – 5,400-5,800

2026 – 5,500-6,200

नोट : दाम प्रति क्विंटल में

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बंगाल TMC चीफ समेत सभी पदों से दिया इस्तीफा

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद शुरू हुए TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी के बुरे दिन खत्म होते नहीं नजर आ रहे. पार्टी विधायक और सांसदों की बगावत के बाद अब बागी गुट ने कोलकाता में पार्टी के हेड ऑफिस पर भी कब्जा जमा लिया. अभी पार्टी दफ्तर पर कब्जे की रार मची ही है, इस बीच ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है. बंगाल टीएमसी के अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर बताया कि वह 3 जून को संभाले गए इस पद को छोड़ रही हैं. चंद्रिमा ने तृणमूल कांग्रेस और उससे जुड़ी संस्थाओं के अलग-अलग बैंक खातों के लिए हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से भी मुक्त किए जाने का अनुरोध किया. इसके अलावा, राज्य की पूर्व मंत्री ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की भूमिका से भी इस्तीफा दे दिया है। 

टीएमसी में मच रही उठापठक के बीच ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार चंद्रिमा का इस तरह अचानक जाना टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। 

 जानकारी के मुताबिक, टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस पत्र में भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल सांगठनिक पदों से मुक्त हो रही हैं, बल्कि उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी ‘साइनिंग अथॉरिटी’ के पद से भी तत्काल प्रभाव से कदम पीछे खींच लिए हैं। 

ममता के लिए ये कितना बड़ा झटका?
चंद्रिमा को ममता का करीबी माना जाता है। वे सरकार से लेकर संगठन तक में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। पार्टी में जारी हालिया उथल-पुथल के बीच भी वे ममता के साथ खड़ी नजर आई थीं। हालांकि, उनके बेटे सौरव बसु को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठक में देखा गया था। तबसे ही कई अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने ममता से दूरी बना ली है।    

चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा रही हैं और सरकार से लेक संगठन तक में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने बंगाल के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। 

रायपुर : 11 हजार दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए मिलेगा ऋण, कौशल प्रशिक्षण भी होगा अनिवार्य: लोकेश कवाडि़या

रायपुर : 11 हजार दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए मिलेगा ऋण, कौशल प्रशिक्षण भी होगा अनिवार्य: लोकेश कवाडि़या

राज्य सरकार की पहल से दिव्यांगजन बनेंगे आत्मनिर्भर उद्यमी, व्यवसाय संचालन और विपणन सहायता भी मिलेगी

रायपुर

प्रदेश के दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम ने बड़ी पहल करते हुए 11 हजार दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण, उद्यमिता मार्गदर्शन और विपणन सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कवाडि़या ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (एनडीएफडीसी) से अधिकृत विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों की बैठक लेकर स्वरोजगार ऋण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की।

बैठक को संबोधित करते हुए कवाडि़या ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाकर प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार के माध्यम से दिव्यांगजन आत्मसम्मान के साथ आजीविका अर्जित कर सकेंगे और आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगे। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार ऋण प्राप्त करने वाले प्रत्येक हितग्राही के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा। निगम द्वारा विकसित किए जा रहे प्रशिक्षण केंद्रों में तकनीकी दक्षता के साथ वित्तीय प्रबंधन, उद्यमिता विकास तथा व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे लाभार्थी अपने उद्यम का सफलतापूर्वक संचालन कर सकें।

कवाडि़या ने कहा कि दिव्यांग उद्यमियों को व्यवसायिक परामर्श, नियमित मार्गदर्शन और विपणन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। निगम प्रतिष्ठित व्यावसायिक संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर रहा है, ताकि लाभार्थी लॉन्ड्री, किराना, रेडीमेड वस्त्र, जूते-चप्पल तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं से जुड़े व्यवहारिक और लाभकारी व्यवसाय स्थापित कर सकें।

बैठक में राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (एनडीएफडीसी) के मुख्य महाप्रबंधक ने आश्वस्त किया कि सभी वित्तीय रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं को पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत और वितरित किए जाने के बाद एनडीएफडीसी द्वारा पुनर्वित्त (रिफाइनेंस) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी ऋण प्रकरण छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से संचालित किए जाएंगे, जिससे हितग्राहियों का समग्र डाटाबेस तैयार किया जा सके तथा योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। बैठक में बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, आईडीबीआई बैंक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, एपेक्स बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक तथा एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैंक प्रतिनिधियों ने निगम की पहल की सराहना करते हुए ऋण वितरण प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का सुझाव दिया। बैठक में निगम के प्रबंध संचालक, महाप्रबंधक, सलाहकार एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस पहल से प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ ही उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिलने की उम्मीद है।

रायपुर : वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता : नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

रायपुर : वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता : नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल

सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती

रायपुर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई

वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाडि़यां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता

वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री श्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर भीषण जाम, भैरूघाट में अजनार ब्रिज की मरम्मत से घंटों फंसे वाहन

धार 
 अगर आप राष्ट्रीय राजमार्ग आगरा-मुंबई हाईवे पर सफर कर रहे हैं और धामनौद इलाके से गुजरने की सोच रहे हैं तो जरा रुकिए. मानपुर के भेरूघाट के अजनार नदी पुल पर वाहनों का रेला लगा हुआ है. एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत के दौरान एक वाहन के चढ़ जाने से एक हिस्सा दोबारा टूट गया. अब 4 जुलाई तक पुल की एक लेन बंद रहेगी. भीषण जाम से वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। 

मरम्मत के ठीक बाद हैवी वाहन ने काम बिगाड़ा
NHAI ने प्री-मानसून चेकिंग में भेरू मंदिर की ओर वाले एक्सपेंशन जॉइंट में दरार पकड़ी थी. 4 दिन पहले माइक्रो कंक्रीट से रिपेयर कर बैरिकेडिंग की गई, लेकिन रात में एक भारी वाहन बैरिकेड तोड़कर उस पर चढ़ गया. इससे 1 जुलाई को मजबूरन दोबारा मरम्मत शुरू करनी पड़ी. NHAI इंजीनियरों का कहना है कि माइक्रो कंक्रीट को पूरी ताकत पाने में 3 से 6 दिन लगते हैं. समय से पहले हैवी ट्रैफिक चला तो पुल का स्लैब क्रैक हो सकता है. इसलिए रिस्क न लेते हुए एक लेन बंद है और वन-वे ट्रैफिक चल रहा है। 

बड़ी संख्या में पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी
मानपुर, धामनोद, किशनगंज पुलिस के साथ NHAI, क्रेन, एंबुलेंस, रेस्क्यू टीम 24 घंटे मौके पर तैनात है. NHAI ने साफ किया है कि ये यात्रियों की सुरक्षा का मामला है. जल्दबाजी में बड़ा हादसा हो सकता है. 4 जुलाई तक धैर्य रखें. प्रशासन ने रूट डायवर्जन भी किया हैं, जिससे इंदौर की ओर से आने वाले वाहन मानपुर से बगड़ी होते हुए निकल रहे हैं. कई वाहन इंदौर से जाम घाट होते हुए महेश्वर की ओर से निकाले जा रहे हैं. प्रशासन ने सभी से धैर्य और सहयोग की अपील की है। 

इंदौर जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं
धामनोद एसडीओपी मोनिका सिंह ने बताया “पुल की मरम्मत का काम NHAI द्वारा किया गया है. लगभग 1 किलोमीटर के पैच का ट्रैफिक डायवर्ट करते हुए दूसरी साइड से निकाल रहे हैं. धामनोद से इंदौर जाने के लिए पलाश होते हुए आप डाइवर्जन पॉइंट ले सकते हैं. आप धार फाटक होते हुए, बगड़ी होते हुए भी इंदौर जा सकते हैं। 

“महेश्वर होते हुए भी इंदौर जा सकते हैं. ट्रैफिक स्लो गति से चल रहा है, थोड़ा सा लेट चल रहा है. आप लेट होंगे, लेकिन किसी प्रकार की वहां पर फंसने जैसी स्थिति नहीं है. हमने बहुत सारे पॉइंट्स पर पुलिस बल, ट्रैफिक बल लगाया है. मानपुर पुलिस द्वारा भी बल लगाया गया है ताकि किसी भी यात्री को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। 

मोहन सरकार ने UCC कमेटी का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ाया, विधानसभा सत्र 24 जुलाई को होगा समाप्त

भोपाल

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून अब विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
सरकार ने UCC का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है, जबकि विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में इस सत्र में विधेयक पेश होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने 30 जून को जारी अधिसूचना में समिति के सदस्य सचिव के अनुरोध और ड्राफ्ट तैयार करने की प्रगति को देखते हुए कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया। समिति के गठन से जुड़े अन्य सभी प्रावधान यथावत रहेंगे।

गुजरात मॉडल पर तैयार हो रहा ड्राफ्ट
सूत्रों के अनुसार, अब तक तैयार ड्राफ्ट का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा गुजरात UCC के प्रावधानों पर आधारित है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों के लिए सभी समुदायों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

CM के बयान से बने हुए हैं कयास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले कह चुके हैं कि जुलाई में होने वाले मानसून सत्र के दौरान UCC कानून का रूप ले सकता है। 2 जुलाई को मुख्यमंत्री के समक्ष UCC ड्राफ्ट का प्रेजेंटेशन भी हो चुका है। ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि समिति का कार्यकाल बढ़ने के बावजूद सरकार ड्राफ्ट को अंतिम रूप देकर विधेयक लाने का प्रयास कर सकती है।

सिया-केतन केस पर सियासत तेज, BJP सांसद ने उठाई पुरुष आयोग बनाने की पुरानी मांग

नई दिल्ली

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने समाज में एक नई बहस छेड़ दी है। मंगेतर सिया गोयल की बेवफाई और हत्या की खौफनाक साजिश सामने आने के बाद अब पुरुषों के अधिकारों और उनकी कानूनी सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। इसी कड़ी में भाजपा राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल ने इस घटना को बेहद विचलित करने वाला बताते हुए देश में ‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग’ बनाने की पुरजोर मांग उठाई है। इस मामले में 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन को गिरफ्तार किया गया है।

सांसद ने शेयर किया अपना पुराना प्राइवेट बिल
सांसद मित्तल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया। यह वीडियो दिसंबर 2025 की राज्यसभा कार्यवाही का है, जब उन्होंने पुरुष आयोग बनाने के लिए संसद में एक ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ पेश किया था।

मित्तल ने एक्स पर लिखा, “पुणे का केतन अग्रवाल मामला बहुत परेशान करने वाला है। केतन और उनके परिवार को निष्पक्ष, पूरी और बिना किसी भेदभाव के जांच मिलनी चाहिए, और सबसे बढ़कर, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। मैंने संसद में ‘नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल’ पेश किया था। हर पीड़ित को न्याय, मदद और कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। केतन का मामला यह याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें संस्थागत मदद, कानूनी सुरक्षा और एक ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी बात सुनी जा सके। लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना, न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।”

बता दें कि अशोक कुमार मित्तल पंजाब से सांसद चुने गए थे। जब उन्होंने यह बिल पेश किया था, तब वे आम आदमी पार्टी (AAP) का हिस्सा थे। हालांकि, इसी साल अप्रैल में राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले 7 AAP सांसदों के गुट के हिस्से के रूप में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का दावा किया था।

क्या है प्राइवेट मेंबर बिल का इतिहास?
संसद में किसी भी प्राइवेट मेंबर बिल के पास होने की संभावना बहुत कम होती है और यह मुश्किल से ही कभी वोटिंग के चरण तक पहुंच पाता है। इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक सिर्फ 14 प्राइवेट बिल ही कानून का रूप ले पाए हैं। वहीं, साल 1970 के बाद से कोई भी ऐसा बिल संसद के दोनों सदनों से पास नहीं हो सका है।

केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब तक क्या-क्या हुआ?

पुणे के इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी अहम बातें इस प्रकार हैं।

26 वर्षीय पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी 20 वर्षीय मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

3 जुलाई को पुणे की एक अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को 16 जुलाई तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है।

लोनावला ग्रामीण पुलिस ने आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। पुलिस दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ (लाई-डिटेक्टर) टेस्ट कराना चाहती थी, लेकिन दोनों आरोपियों के आधिकारिक रूप से इनकार करने के बाद कोर्ट ने इस अर्जी को भी नामंजूर कर दिया है।

​रायपुर : धमतरी में माफियाओं पर प्रशासन का ‘सख्त’: राजस्व और खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई

​रायपुर : धमतरी में माफियाओं पर प्रशासन का ‘सख्त’: राजस्व और खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई

अवैध रेत परिवहन करते 8 ट्रैक्टर जब्त

कोलियारी मार्ग पर रेत का अवैध खेल उजागर

​रायपुर

धमतरी जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन करने वाले माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर के कड़े निर्देशानुसार आज राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रेत का परिवहन कर रहे 8 ट्रैक्टरों को रंगे हाथों जब्त किया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

       ​मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन को लगातार कोलियारी-धमतरी मार्ग पर अवैध रेत परिवहन की शिकायतें मिल रही थीं। इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए राजस्व और खनिज विभाग की एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया गया। टीम ने जब मार्ग पर घेराबंदी कर रेत ले जा रहे ट्रैक्टरों को रोका और उनसे खनिज परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज (रॉयल्टी पर्ची/अनुमति) की मांग की, तो वाहन चालक कोई भी संतोषजनक कागजात पेश नहीं कर सके।

​     वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी 8 ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया। इन सभी वाहनों को सुरक्षित अभिरक्षा में रखवा दिया गया है और खनिज अधिनियम के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

​प्रशासन की चेतावनी: आगे भी जारी रहेगा अभियान

     जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के बाद रेत और अन्य खनिज माफियाओं को कड़ा संदेश दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन या भंडारण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान आगे भी इसी तरह बिना रुके जारी रहेगा और पकड़े जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने वाहन संचालकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और केवल वैध अनुमति के साथ ही खनिजों का परिवहन करें।

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

         रायपुर, 
नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

         कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

       यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सुकमा : बंदूक छोड़ विकास की राह पर बढ़े मड़कम भीमा, शासकीय योजनाओं ने बदली जिंदगी

सुकमा : बंदूक छोड़ विकास की राह पर बढ़े मड़कम भीमा, शासकीय योजनाओं ने बदली जिंदगी
 
 पक्का घर, रोजगार और सम्मान: मड़कम भीमा की प्रेरक कहानी

सुकमा
जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली निवासी मड़कम भीमा की कहानी इस परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है, जिन्होंने हिंसा और भय के रास्ते को छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन, सुरक्षा बलों और शासन की समन्वित पहल ने उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित होने का अवसर प्रदान किया।

    मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उनके जीवन को नई दिशा दी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत आर्थिक सहायता से उनका पक्का आवास बनकर तैयार हुआ, जिसने उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार दिया। यह पहल न केवल एक घर उपलब्ध कराने तक सीमित रही, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व और विश्वास की नई भावना भी लेकर आई।

    आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से जोड़ा गया। गांव के विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी करते हुए उन्होंने सम्मानजनक मजदूरी अर्जित की, जिसकी राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने की नई प्रेरणा भी मिली।

    मड़कम भीमा की सफलता की यह कहानी बताती है कि सुकमा जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल, प्रभावी पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों। 

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