मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत ऑनलाईन आवेदन 31 अगस्त तक आमंत्रित

भोपाल 

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किये गए है। सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को शिक्षा, तकनीक और गतिशीलता से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के मार्ग को सरल और सुलभ बनाएगी। उन्होंने पात्र विद्यार्थियों से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने तथा जिला अधिकारियों को योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

आयुक्त, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने बताया कि योजना का संपूर्ण संचालन ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनेगी। उन्होंने सभी संयुक्त एवं उप संचालकों को निर्धारित समय-सीमा का पालन करते हुए पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 से पूर्व ऑनलाइन आवेदन कर इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ अवश्य प्राप्त करें। छात्र-छात्राओं से 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करने की अपील की है। योजना का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा उन्हें आधुनिक संसाधनों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।

निर्देशानुसार पात्र छात्र-छात्राएं स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। जिला कार्यालयों में प्राप्त आवेदनों का परीक्षण कर पात्रता के आधार पर उन्हें स्वीकृत किया जाएगा। आवेदन परीक्षण एवं स्वीकृति की प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक पूर्ण की जाएगी। इसके उपरांत 15 अक्टूबर 2026 तक स्वीकृत विद्यार्थियों के लिए नियमानुसार लैपटॉप अथवा मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल क्रय की कार्रवाई की जाएगी।

योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विश्व दिव्यांग दिवस (3 दिसंबर 2026) के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में लैपटॉप एवं मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल वितरित किए जाएंगे। विभाग ने सभी जिलों को वितरण की जानकारी एवं फोटो 5 दिसंबर 2026 तक पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी दिए हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिवपुरी में करेंगे 2,500 करोड़ रुपए के अत्याधुनिक अडानी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार 5 जुलाई को शिवपुरी में अडानी समूह द्वारा स्थापित किए जा रहे लगभग 2,500 करोड़ रुपए की लागत वाले अत्याधुनिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास करेंगे। यह परियोजना प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के औद्योगिक विकास के विज़न को नई गति प्रदान करेगी। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री  सिंधिया 211.29 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया भी जाएगा।

रोजगार के अवसर और स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसमें स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही क्षेत्र के छोटे एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को रक्षा उत्पादन की सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

 

रेल यात्रियों को बड़ी राहत! अब खंडवा में भी रुकेगी यह एक्सप्रेस, नेपाल से महाराष्ट्र तक सफर होगा आसान

खंडवा
 रेलवे बोर्ड ने ट्रेन संख्या 17631/17632 नांदेड़–टनकपुर–नांदेड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस के नियमित संचालन को मंजूरी दे दी है। 12 जुलाई से शुरू होने वाली इस नई रेल सेवा से खंडवा सहित निमाड़ क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा होगी। ट्रेन के खंडवा जंक्शन पर ठहराव से यात्रियों को उत्तराखंड के टनकपुर और नेपाल सीमा तक सीधी रेल सुविधा मिलेगी। वहीं सिख समाज के श्रद्धालुओं के लिए पवित्र तख्त सचखंड श्री हुजूर साहिब, नांदेड़ तक यात्रा भी पहले से अधिक आसान हो जाएगी।

मध्य रेल समिति सदस्य मनोज सोनी ने बताया कि खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने इस रेल सेवा को क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

क्या रहेगी नई ट्रेन की समय-सारणी

    समय-सारणी के अनुसार ट्रेन संख्या 17631 प्रत्येक रविवार रात 11:40 बजे नांदेड़ से रवाना होकर सोमवार सुबह 9:30 बजे खंडवा पहुंचेगी और आगे टनकपुर जाएगी।

    वापसी में ट्रेन संख्या 17632 प्रत्येक मंगलवार टनकपुर से चलकर बुधवार सुबह 6:45 बजे खंडवा पहुंचेगी और फिर नांदेड़ के लिए रवाना होगी। इसका नियमित संचालन 14 जुलाई से होगा।

इन प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा ठहराव, 6 जुलाई को उद्घाटन स्पेशल ट्रेन
ट्रेन का ठहराव नांदेड़, पूर्णा, बसमत, HINGOLI, वाशिम, अकोला, मलकापुर, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा और बरेली सहित प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा। इस नई सेवा से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। उद्घाटन स्पेशल ट्रेन को छह जुलाई को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव टनकपुर से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

 

खनिज संपदा और निवेश से प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत मिशन को नई गति दे रहा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खनिज संपदा की प्रचुरता और निवेश अनुकूल नीतियों से मध्यप्रदेश देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन को भी बल मिलेगा। बैतूल से आलीराजपुर तक फैली खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिलने से प्रदेश देश के उभरते ‘क्रिटिकल मिनरल हब’ के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इस बेल्ट में हाई फिक्स्ड कार्बन और उत्कृष्ट फ्लेकी गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट पाया गया है। इसे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह खोज मध्यप्रदेश को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने के साथ देश को हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट, औद्योगिक विकास का नया आधार

प्रदेश ग्रेफाइट संसाधनों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के बैतूल, आलीराजपुर और सीधी जिलों में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों से प्राप्त ग्रेफाइट में उच्च स्थिर कार्बन की मात्रा होने के कारण यह इलेक्ट्रोड निर्माण, बैटरी उद्योग तथा अन्य उच्च तकनीकी औद्योगिक उपयोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अकेले बैतूल जिले में लगभग 11 मिलियन मीट्रिक टन ग्रेफाइट संसाधनों का अनुमान लगाया है। बैतूल जिले के चिखलार, गौठाना और गोलीघाट क्षेत्र प्रमुख ग्रेफाइट ब्लॉकों के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

कोल इंडिया के प्रवेश से व्यावसायिक खनन को मिलेगी गति

प्रदेश में ग्रेफाइट खनन के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन तब आया जब सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने गैर-कोयला खनन क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आलीराजपुर जिले के खट्टाली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण किया। इससे प्रदेश में बड़े स्तर पर व्यावसायिक ग्रेफाइट खनन का मार्ग प्रशस्त हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार बैतूल क्षेत्र के ग्रेफाइट शिस्ट में वेनेडियम जैसे महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल मिलने की भी संभावना है। इससे यह क्षेत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण बहु-खनिज क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा।

ईवी क्रांति का बनेगा सशक्त आधार

ग्रेफाइट लिथियम-आयन बैटरियों के एनोड निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है। विश्वभर में इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की बढ़ती मांग के कारण इसकी आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में मिल रहा उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट ईवी उद्योग को गति देगा, ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को सशक्त बनायेगा और पवन एवं सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बैटरी निर्माण में सहायक बनेगा। इसके साथ ही रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी घरेलू स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध कराएगा। इसके परिणाम स्वरूप ग्रेफाइट के आयात पर देश की निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।

आयात निर्भरता होगी कम

वर्तमान में भारत अपनी ग्रेफाइट आवश्यकताओं का अधिकांश आयात करता है। मध्यप्रदेश में बड़े स्तर पर खनन प्रारंभ होने से आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

बैतूल, आलीराजपुर तथा आस-पास के आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में ग्रेफाइट आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों तथा रिफाइनरी परियोजनाओं की स्थापना से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

कम लागत वाले खनन और उद्योगों की अपार संभावनाएं

प्रदेश में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के कारण कम लागत पर खनन संभव होगा। इसके साथ ही राज्य में कम लागत वाले इलेक्ट्रोड निर्माण उद्योग विकसित किए जा सकेंगे। इससे प्रदेश राष्ट्रीय बैटरी एवं इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

खनिज संपदा से समृद्ध मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश देश के सबसे समृद्ध खनिज राज्यों में शामिल है। प्रदेश देश के 26 प्रतिशत मैंगनीज अयस्क भंडार के साथ सबसे बड़ा उत्पादक राज्य, 73 प्रतिशत तांबा अयस्क भंडार के साथ अग्रणी राज्य, चूना पत्थर उत्पादन में देश का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, कोयला उत्पादन में देश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक और देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है। हीरा, तांबा, कोयला, मैंगनीज, चूना पत्थर, स्वर्ण अयस्क, डोलोमाइट, ग्रेफाइट तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है।

कटनी बन रहा है माइनिंग एवं औद्योगिक हब

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कटनी जिला भी तेजी से देश के प्रमुख माइनिंग हब के रूप में विकसित हो रहा है। यहां स्वर्ण अयस्क, डोलोमाइट, तांबा, लेड, जिंक और चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों के विशाल भंडार सामने आए हैं। स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए खनन लीज प्रदान की जा चुकी है और बड़वारा क्षेत्र में डोलोमाइट ब्लॉकों का विकास भी जारी है। ‘माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0’ में प्रदेश को ₹56,414 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिससे खनिज आधारित उद्योगों का तेजी से विस्तार होने की संभावना बलवती हुई है।

रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज से बढ़ी संभावनाएं

प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज भी तेज हो गई है। खनिज संसाधन विभाग और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के सहयोग से कटनी एवं जबलपुर सहित विभिन्न जिलों के खनिज नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है। इस पहल से रणनीतिक महत्व के नए खनिज भंडारों की पहचान, वैज्ञानिक डेटा संग्रहण तथा भविष्य की खनिज अन्वेषण योजनाओं को नई दिशा मिलेगी।

सिंगरौली में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज

प्रदेश के सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) की महत्वपूर्ण उपलब्धता भी सामने आई है। इन तत्वों का उपयोग रक्षा उपकरणों, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, उच्च क्षमता वाले मैग्नेट, मेडिकल उपकरण तथा अंतरिक्ष तकनीक में किया जाता है। यह खोज भारत की चीन सहित दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

डिजिटल माइनिंग की दिशा में अग्रणी मध्यप्रदेश

प्रदेश सरकार खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू कर रही है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के टेक्समिन फाउंडेशन, भू-विज्ञान एवं खनिज निदेशालय तथा मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम के बीच हुए समझौते के तहत जीआईएस आधारित डिजिटल मिनरल डेटाबेस विकसित किया जा रहा है, एआई आधारित माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए जा रहे हैं, ब्लॉकचेन आधारित मॉनिटरिंग से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है, आधुनिक तकनीक आधारित कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं और पर्यावरण-अनुकूल एवं सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण

उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट, स्वर्ण, रेयर अर्थ मिनरल्स, तांबा, मैंगनीज, कोयला, डोलोमाइट तथा अन्य बहुमूल्य खनिजों की उपलब्धता, आधुनिक तकनीक आधारित खनन व्यवस्था, वैज्ञानिक अन्वेषण, बड़े निवेश और औद्योगिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण मध्यप्रदेश देश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक राज्यों में तेजी से उभर रहा है।

बैतूल से अलीराजपुर तक फैली ग्रेफाइट बेल्ट की खोज केवल एक खनिज उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, हरित अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, रणनीतिक खनिज आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रही है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के क्रिटिकल मिनरल, एडवांस्ड मटेरियल एवं हरित औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

 

उप मुख्यमंत्री अरुण साव की पहल पर सभी संभागीय एवं जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों में लगेंगी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति

रायपुर

देश के पहले उद्योग मंत्री, प्रख्यात शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को अक्षुण्ण रखने राज्य के संभागीय और जिला मुख्यालय वाले सभी नगरीय निकायों में उनकी मूर्ति स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा के अनुपालन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा ऐसे 32 नगरीय निकायों में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा लगाने 10 करोड़ 60 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा लगाने और इसके परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए 5 संभागीय मुख्यालयों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर के लिए 50-50 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। वहीं जिला मुख्यालय वाले 27 नगरीय निकायों के लिए 30-30 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। जिला मुख्यालय वाले नगरीय निकायों में 4 नगर निगम और 23 नगर पालिका शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 6 जुलाई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती है। उप मुख्यमंत्री साव की घोषणा के बाद विभाग ने तत्परता दिखाते हुए नगरीय निकायों में मूर्ति स्थापना के लिए राशि स्वीकृति के प्राविधिक आदेश जारी कर दिए हैं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रख्यात शिक्षाविद एवं राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा थे। “एक देश, एक निशान, एक विधान और एक प्रधान” के संकल्प की अगुआई करते हुए भारत की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 

श्री साव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी समाज और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। प्रदेश के प्रमुख नगरीय क्षेत्रों में उनकी प्रतिमाओं की स्थापना से नागरिकों, विशेषकर युवाओं को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त होगी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव प्राप्त है। मात्र 23 वर्ष की उम्र में सबसे युवा सीनेट सदस्य होने के 10 वर्ष बाद सिर्फ 33 वर्ष की युवावस्था में कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसे विख्यात शिक्षण संस्थान के कुलपति बन शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने अभूतपूर्व योगदान दिया। उनकी प्रतिमा को देखकर युवा पीढ़ी उनके इस योगदान को भी याद कर प्रेरणा हासिल करेगी।

श्री साव ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के साथ-साथ परिसर का आकर्षक एवं व्यवस्थित सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, जिससे शहरों में बेहतर सार्वजनिक स्थल विकसित होंगे तथा नागरिकों को स्वच्छ, सुंदर एवं प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध होगा। उन्होंने संबंधित नगरीय निकायों के अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नागरिकों को शीघ्र ही इन विकसित स्थलों का लाभ मिल सके।

​रायपुर : ‘सुपर अल नीनो’ की चुनौती: धमतरी में कृषक मित्रों को मिला अल्प वर्षा से निपटने का गुरुमंत्र

​रायपुर : ‘सुपर अल नीनो’ की चुनौती: धमतरी में कृषक मित्रों को मिला अल्प वर्षा से निपटने का गुरुमंत्र

​वैज्ञानिक खेती, सीधी बुवाई और फसल बीमा से सुरक्षित होगी किसानों की उपज,गांव-गांव फैलेगा जागरूकता का संदेश

रायपुर

जलवायु परिवर्तन और ‘सुपर अल नीनो’ (Super El Niño) के कारण संभावित अल्प एवं अनियमित वर्षा की चुनौती से निपटने के लिए धमतरी के कृषि विभाग में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक्सटेंशन रिफॉर्म्स ‘आत्मा’ योजना के तहत आयोजित इस विशेष सत्र में जिलेभर के कृषक मित्रों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और फसल बीमा के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे इस ज्ञान को गांव-गांव तक पहुंचा सकें।

​विपरीत मौसम में भी बेहतर प्रबंधन, विशेषज्ञों की सलाह

     ​प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने कम वर्षा की स्थिति में फसलों को बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कृषक मित्रों को प्रेरित किया गया कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को समय रहते जागरूक करें।

     ​वैज्ञानिकों ने विपरीत मौसम की परिस्थितियों से निपटने के लिए पारंपरिक फसलों के स्थान पर कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, दलहनी (दालें) और तिलहनी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। पानी की बचत के लिए वैज्ञानिक तरीके से ‘डायरेक्ट सीडेड राइस’ (धान की सीधी बुवाई) तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया। इसी तरह खेतों में उपलब्ध पानी का सही उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन और मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।

     प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुविभागीय कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ, आत्मा के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक सहित आत्मा योजना के जिला व विकासखंड स्तरीय अधिकारी- कर्मचारी और कृषक मित्र उपस्थित थे।

​फसल बीमा बनेगा किसानों का सुरक्षा कवच

      ​प्राकृतिक आपदाओं और सूखे के जोखिम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। योजना के जिला प्रबंधक ने धान, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी और रागी जैसी अधिसूचित फसलों की बीमा प्रक्रिया, पात्रता और अंतिम तिथि की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कृषक मित्रों से अपील की कि वे अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक किसानों का फसल बीमा सुनिश्चित कराएं ताकि किसी भी नुकसान की भरपाई हो सके।

​उत्पादन और आय बढ़ाना मुख्य लक्ष्य

          ​कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने कृषक मित्रों का आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण में सीखी गई आधुनिक कृषि तकनीकों और शासकीय योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रसारित करें। जब किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती करेंगे, तभी विपरीत मौसम में भी जिले का कृषि उत्पादन और किसानों की आय सुरक्षित रह सकेगी।

सहकारिता सप्ताह में कृषक संगोष्ठी आयोजित

रायपुर

सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत शनिवार को दंतेवाड़ा जिले के संयुक्त कलेक्टरेट भवन के सभाकक्ष में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक  चैतराम अटामी थे। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

विधायक  अटामी ने कहा कि सहकारिता की भावना ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि की मजबूत नींव है। उन्होंने किसानों से खेती के इस महत्वपूर्ण मौसम में आपसी सहयोग से रोपाई और अन्य कृषि कार्य समय पर पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की कमी की समस्या दूर होगी और खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा।

जल संरक्षण और जैविक खेती पर दिया जोर

विधायक  अटामी ने किसानों को वर्षा जल संरक्षण के लिए डबरी और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण करने की सलाह दी। उन्होंने अनुभवी किसानों के मार्गदर्शन में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक और प्राकृतिक खेती से उत्पादन बढ़ने के साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है।

शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील

उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए, ताकि खेती लाभकारी बने और उनकी आय में वृद्धि हो।

खेती के साथ पौधरोपण का भी दिया संदेश

विधायक  अटामी ने किसानों से खेतों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पौधरोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील की।

किसानों को योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की दी गई जानकारी

संगोष्ठी में कृषि, पशुधन विकास, मत्स्य, उद्यानिकी तथा सहकारिता विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा सहकारिता से जुड़ी शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विधायक  चैतराम अटामी ने छह किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित कर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं और सहकारी गतिविधियों की जानकारी भी प्रदान की।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के उप संचालक  सूरज पंसारी, पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. योगेश मिश्रा, मत्स्य विभाग के सहायक संचालक  योगेश देवांगन, उद्यानिकी विभाग के उद्यान अधीक्षक  प्यारे लाल जुरी, प्रगतिशील जैविक कृषक  सुरेश कुमार नाग, कृषक संघ के अध्यक्ष  मधुसूदन ठाकुर, सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त  गौतम ठाकुर, सहकारिता विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार आम नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। इसी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल, सेमरा के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसके ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है।

कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन द्वारा नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह कार्रवाई 22 जून 2026 को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के उपचार से जुड़े मामले की जांच के बाद की गई। घटना के पश्चात परिजनों और नागरिकों द्वारा उठाई गई शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण कराया।

जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण में पाया गया कि गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों का भी अभाव पाया गया। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लिए जाने संबंधी शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में यह भी पाया गया कि

एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों एवं पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था, जिसे जांच में गंभीर लापरवाही माना गया।

प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्राप्त जवाब और जांच प्रतिवेदनों के परीक्षण के बाद प्रशासन ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत कई तथ्य जांच में सही नहीं पाए गए तथा संबंधित अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। जांच के दौरान एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही के तथ्य सामने आए।

सभी तथ्यों, जांच प्रतिवेदनों और संबंधित अधिकारियों की अनुशंसाओं के आधार पर जिला प्रशासन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर एवं आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने तथा अस्पताल का पंजीयन अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त करने का आदेश जारी किया। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन की कार्यशैली को भी रेखांकित करती है। राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों तथा चिकित्सीय लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के मामलों में बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।

एथेनॉल की बढ़ती मांग से चीनी के दाम में ऐतिहासिक उछाल, ₹4,700 प्रति क्विंटल पहुंचा भाव

ग्वालियर

त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल की मानें तो जुलाई की शुरुआत के साथ ही भाव अप्रत्याशित उछले हैं। राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने बताया, गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि व एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर इसका कारण है। इससे मिलों का फोकस शकर उत्पादन से हटकर एथेनॉल पर हो गया।

इन तीन कारणों से महंगी हुई मिठास 
एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ता जोर: सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने का उपयोग हो रहा है। चीनी (Sugar Price Ethanol Production) मिलों में कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई।

गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि: अधिकांश राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य बढऩे से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर शकर की कीमतों पर दिख रहा है।

12 साल में सबसे कम जून की बारिश: इस वर्ष जून में 12 साल की तुलना में सबसे कम वर्षा हुई। देश में सामान्य से 38त्न कम वर्षा व जुलाई में भी कमजोर मानसून की आशंका से शकर उत्पादन 80 लाख टन तक कम हो सकता है।

कैसे बनाया जाता है एथेनॉल? भारत में किससे तैयार हो रहा?
एथेनॉल बनाने वाली सामग्री को फीड स्टॉक (Sugar Price Hit Record 2026) कहा जाता है। कई तरह के एथेनॉल उत्पादन संयंत्र अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग करते हैं। इसके लिए मक्का, गेहूं या अन्य प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया एक ही जैसी होती है। जबकि भारत में गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरू होती है। पकने के बाद गन्नों की कटाई की जाती है। इसके बाक प्रसंस्करण के लिए चीनी मिलों और डिस्टिलरी में ले जाया जाता है।

जानें गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया से पेट्रोल पंप तक का सफर

    चीनी मिल में गन्नों को पेराई मशीनों में डाला जाता है। यह गन्ने का रस निचोड़ लेती हैं। यह रस चीनी और एथेनॉल के उत्पादन के लिए आधार सामग्री तैयार होती है।

    गन्ने के रस को संशोधित कर चीनी बनाई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान गुड़, नामक एक गाढ़ा गहरे रंग का सिरप उप उत्पाद के रूप में मिलता है। गुड़ परम्परागत रूप से भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से माना जाता है।

    मॉडर्न एथेनॉल संयंत्र गुड़ और गन्ने के रस दोनों से एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इन कच्चे माल को आसवन संयंत्रो तक पहुंचाया जाता है जहां इनले जैव ईंधन एथेनॉल शुरू किया जाता है।

    कच्चे माल के मिश्रण में सबसे पहले खमीर उठाया जाता है। फिर सूक्ष्मजीव शर्करा का सेवन करते हैं और प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया द्वारा उन्हें अल्कोहल में बदला जाता है। उत्पादन की विधियों (Sugar Price break record 2026) के आधार पर यह चरण चंद घंटों से लेकर कुछ दिन तक का हो सकता है।

    किण्वित द्रव में अल्कोहल, पानी और अन्य यौगिक होते हैं। अब आसवन विधि से अल्कोहल को अलग कर लिया जाता है और फिर सांद्रित किया जाता है। इस विधि से उच्च शुद्धता वाला एथेनॉल तैयार होता है।

    संयंत्र से निकाले जाने से पूर्व एथेनल की गुणवत्ती की कड़ी जांच होती है। इसके बाद उत्पादक शुद्धता स्तर, रासायनिक संरचना और ईंधन के मानकों के अनुपालन की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सरकारी विनिर्देशों के पूरा करता है या नहीं। 

    मंजूरी के बाद एथेनॉल को टैंकरों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों के डिपो तक पहुंचाया जाता है। ये सुविधाएं ईंधन के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले मिश्रण प्रक्रिया संभालती हैं।

    अंतिम चरण में अनुमोदित मिश्रण अनुपात के मुताबिक एथनॉल (Sugar Price Hike making fuel) को पेट्रोल में मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रित ईंधन को देशभर के पेट्रोल पंपों पर वितरित कर दिया जाता है।

 

कम पानी एवं कम अवधि वाली फसलों का बढ़ाएं रकबा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक खेती में बड़ा स्कोप है। यह बड़े मुनाफे का काम है। किसानों को चाहिए कि वे परम्परागत खेती के स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनायें। मुख्यमंत्री ने इस साल अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे अपने कृषि कार्यों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक योजना बनाएं तथा कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को विशेष प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं कृषि उत्पादन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रही है। कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों के माध्यम से जिलेवार सतत समीक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जल संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग का विशेष महत्व है। किसान भाई-बहन खेतों में उपलब्ध नमी का संरक्षण करें, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का अधिकाधिक उपयोग करें। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग द्वारा जारी तकनीकी सलाह का पालन करते हुए परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से विशेष रूप सेअन्न (मोटा अनाज) जैसे कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा सहित अन्य कम पानी में सफलतापूर्वक पैदा होने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये फसलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप होने के साथ कम लागत, अधिक पोषण एवं किसानों की आय वृद्धि के बेहतर विकल्प की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भीअन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाकर ही उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का अन्नदाता अपने अनुभव, परिश्रम और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा परिस्थितियों के अनुरूप हर संभव सहयोग सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि किसी भी किसान को कठिनाई का सामना न करना पड़े। कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों के हित भी हर तरह से सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कृषि और अन्नदाता प्रदेश के साथ देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है। इसी आशय से प्रदेश में वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

किसानों को कर रहे जागरूक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को मानसून और बारिश की अपडेट्स के लिए सोशल मीडिया आधारित मैसेजिंग सिस्टम पर विशेष जोर दिया है। बारिश कम होने की स्थिति में बीज उपचार, बुवाई की तकनीक, कम पानी में उपज देने वाली फसलों जैसे- बाजरा, ज्वार, उड़द, मूंग, अरहर, कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ऐसी फसलें कम पानी और कम अवधि में बेहतर उत्पादन के लिए अच्छा विकल्प हैं। इसके अलावा किसानों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर भी मौसम के पूर्वानुमान से जुड़ी सलाह दी जा रही है।

 

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