बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) होते हैं लोकतंत्र की नींव : मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार

भोपाल 

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार ने इंदौर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधा संवाद करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) एवं मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य अत्यंत पारदर्शी, सुलभ और व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया है। उन्होंने कहा कि जिस दक्षता और पारदर्शिता के साथ यह कार्य मध्यप्रदेश में हुआ है, वैसा उदाहरण देश के अन्य राज्यों में दुर्लभ है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय प्रक्रियाओं में से एक है। मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि इसी पारदर्शिता और दक्षता के कारण भारत आज विश्व के 35 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के संगठन इंटरनेशनल आइडिया (International IDEA) की 2026 की अध्यक्षता कर रहा है।

इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी  राम प्रताप सिंह जादौन, कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  शिवम वर्मा भी विशेष रूप से मौजूद थे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग का विशेष ध्यान वृद्धजन, दिव्यांगजन, प्रवासी श्रमिक, अशिक्षित नागरिकों तथा वंचित समुदायों तक मतदाता सेवाएँ पहुँचाने पर केंद्रित रहा है, जिससे कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे, साथ ही यह सुनिश्चित ‍किया जा रहा है कि किसी भी अपात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो। इसके लिये ‍विशेष गहन पुनरीक्षण का सफलतापूर्वक अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा सरल भाषा में दिशा-निर्देश, सोशल मीडिया जागरूकता अभियान, समाचार पत्र, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप, पंचायत स्तरीय बैठकों एवं मोहल्ला सूचना अभियानों के माध्यम से व्यापक जनजागरण किया गया।  कुमार ने बीएलओ की भूमिका को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क स्थापित करते हैं, नए मतदाताओं का पंजीयन करते हैं तथा मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट तथा अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले बीएलओ की सराहना की।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संचालन विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं। देश में चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में 1 करोड़ 80 लाख चुनावकर्मी शामिल होते हैं। यह संख्या दुनिया की कई बड़ी सरकारी और निजी संस्थाओं से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि इतने विशाल स्तर पर भी भारत की चुनाव प्रणाली पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करती है। चुनाव आयोग के डिजिटल नवाचारों का उल्लेख करते हुए ‘ईसीआई नेट’ (ECI Net) ऐप को पारदर्शिता और सुगमता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह ऐप बीएलओ और मतदाताओं के बीच सीधे संपर्क का माध्यम बना है और देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी इसका सफल उपयोग हो रहा है। मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता समझाते हुए बताया कि मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल, मतदान के दौरान पोलिंग एजेंट की उपस्थिति, फॉर्म 17-सी के माध्यम से रिकॉर्ड सत्यापन और मतगणना के दौरान एजेंटों की मौजूदगी भारत की चुनाव प्रणाली को अत्यंत विश्वसनीय बनाती है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त  कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल आकार में ही नहीं, बल्कि सहभागिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता में भी सबसे सशक्त है। उन्होंने विभिन्न देशों के मतदान प्रतिशतों की तुलना करते हुए कहा कि भारत में स्वैच्छिक मतदान होने के बावजूद मतदान प्रतिशत कई अनिवार्य मतदान वाले देशों से अधिक रहता है, जो लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रमाण है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध करना संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र मतदाताओं को चिन्हित कर सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाया गया है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हुए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने एसआईआर अभियान को उत्कृष्टता के साथ पूरा कर देश के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सभी बीएलओ को लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी बताते हुए उनके समर्पण, परिश्रम और संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए बधाई दी तथा कहा कि सशक्त मतदाता ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने बीएलओ से संवाद करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए प्रेरणा है और इसकी मजबूती में बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) की उपलब्धियों, नवाचारों एवं सफलताओं पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार से सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बीएलओ ने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर मतदाता सूची के परिशोधन एवं अद्यतन कार्य को सफलतापूर्वक संपादित किया गया। संवाद के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त  ने बीएलओ के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश  संजीव कुमार झा ने कहा कि मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम है तथा इस उपलब्धि के लिए उन्होंने सभी अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को बधाई दी। भारत इस वर्ष International IDEA की अध्यक्षता कर रहा है और भारत निर्वाचन आयोग की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को वैश्विक स्तर पर साझा किया जाएगा। यह देश के लिए गर्व का विषय है।  झा ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं से भरा राज्य है, जिसके कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में कई चुनौतियाँ सामने आईं। वर्ष 2003 के पुराने डेटा को वर्तमान सॉफ्टवेयर सिस्टम के अनुरूप परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए विभाग ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि नए निर्देशों के तहत स्थानीय क्षेत्र के बीएलओ की नियुक्ति की गई, जिससे कई पुराने शिक्षकों की जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य मैदानी कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई। इनकी क्षमता वृद्धि के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए गए।  झा ने प्रदेश में हुए कार्यों और प्राप्त उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की सफलता कलेक्टरों, संभागायुक्तों, बीएलओ, राजनीतिक दलों और निर्वाचन टीम के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने बीएलओ को लोकतंत्र की प्रथम कड़ी बताते हुए कहा कि मतदाता सबसे पहले उन्हीं से संपर्क करता है। इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि मतदाता सूची को निरंतर अद्यतन और शुद्ध बनाए रखें। अंत में उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा बीएलओ के मानदेय को 6 हजार रुपये तक बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे उनकी भूमिका और अधिक सशक्त होगी। सभी से आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा और मनोयोग से पालन करने की अपील की। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  शिवम वर्मा ने आभार व्यक्त किया।

 

सरकार ने फिर Telegram को भेजा नोटिस, पायरेसी पर मांगा जवाब; 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

 नई दिल्ली

भारत सरकार ने एक बार फिर से टेलीग्राम को नोटिस भेजा है, जिसमें सरकार ने बड़े लेवल होने वाली पायरेसी को लेकर जवाब में मांगा है. इस प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से फिल्म, वेब सीरीज की पायरेसी हो रही है. यह जानकारी एएनआई ने दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि वह पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी (OTT) कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए. सरकार ने टेलीग्राम से 15 दिनों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। 

सरकार का कहना है कि यह कदम भारत की क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म उद्योग, ब्रॉडकास्टर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, फिल्म प्रोड्यूसर्स डिस्ट्रिब्यूटर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं। 

यूजरनेम फीचर क्या है?
यूज़रनेम फीचर का इस्तेमाल करके यूज़र फोन नंबर शेयर किए बिना एक यूनीक यूज़रनेम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं. दरअसल, कुछ दिन पहले व्हाट्सएप ने भारत में यूज़रनेम फीचर को रोलआउट करना शुरू किया, जिसके कुछ घंटों के बाद ही सरकार ने व्हाट्सएप को नोटिस भेज दिया. सरकार ने आशंका जताई है कि इस फीचर के जरिए ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इंपर्सोनेशन के मामलों में तेजी आ सकती है। 

व्हाट्सऐप को तब तक के लिए यह फीचर रोकने का निर्देश भी दिया गया था, जब तक सरकार के साथ सलाह-मशविरा पूरी तरह संतोषजनक ढंग से न हो जाए. व्हाट्सएप को रोकने के बाद सरकार ने इसी मामले की वजह से टेलीग्राम और सिंग्नल ऐप को भी नोटिस भेज दिया है. इन दोनों ऐप्स में भी यूज़रनेम फीचर का इस्तेमाल काफी पहले से ही किया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय ने दोनों कंपनियों को जवाब देने के लिए महज तीन दिन का समय दिया है। 

सरकारी सोर्सेज़ के मुताबिक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम-सिग्नल के मामले एक जैसे तो हैं, लेकिन बिल्कुल एक जैसे नहीं है. टेलीग्राम में यह फीचर पहले से लागू है, जबकि व्हाट्सऐप ने अभी सिर्फ इसका एलान किया है. दोनों के यूजर बेस में भी बड़ा फर्क है, भारत व्हाट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है और यहां इसके पांच सौ मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं, जो टेलीग्राम की पहुंच से कहीं ज्यादा है. व्हाट्सऐप ने अपने बयान में कहा था कि इस फीचर में स्कैम और इंपर्सोनेशन रोकने के पहले से ही कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं. इसके बाद व्हाट्सएप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक विस्तृत FAQ भी जारी किया था। 

टेलीग्राम पर सरकार की नज़र
बीते कुछ महीनों मसे टेलीग्राम पर सरकार की कड़ी नज़रें बनी हुई है. नीट परीक्षा के लीक पेपर और फर्जी कंटेंट फैलाने के आरोप में सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर एक हफ्ते का बैन भी लगाया था. हालांकि, नीट परीक्षा खत्म होने के बाद टेलीग्राम को भारत में फिर से चालू कर दिया गया था। 

इस बीच Zoho समर्थित देसी मैसेजिंग ऐप अराट्टई (Arattai) ने भी नियामकीय बदलावों का पालन करते हुए अपने यूजरनेम-बेस्ड अकाउंट फीचर को बंद करने का फैसला लिया है, जिससे जानकारी कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने खुद सोशल मीडिया पर दी। 

डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम लगातार बढ़े
बुधवार को केंद्र सरकार ने WhatsApp के ‘यूज़रनेम’ फ़ीचर को लेकर Meta को एक नोटिस भेजा है. सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और किसी और का रूप धरकर (इम्पर्सोनेशन) किए जाने वाले हमलों में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार ने WhatsApp को यह भी निर्देश दिया था कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फ़ीचर को रोक दिया जाए. सूत्रों के अनुसार, सरकार ने अब दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की भी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। 

व्हॉट्सएप से पूछा गया कार्रवाई क्यों ना की जाए
PTI के सूत्रों अनुसार IT मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी पत्र लिखा है (जिनमें पहले से ही यूज़रनेम फ़ीचर मौजूद है) और पूछा है कि वे धोखाधड़ी और इम्पर्सोनेशन से जुड़ी चिंताओं को कैसे दूर कर रहे हैं. WhatsApp को भेजे नोटिस में सरकार ने चिंता जताई थी कि प्रस्तावित यूज़रनेम फ़ीचर से ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और इम्पर्सोनेशन हमलों के मामलों में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि इससे गलत इरादे वाले लोग पीड़ितों से संपर्क कर सकते हैं और उन्हें मैसेज भेज सकते हैं. साथ ही Meta से यह बताने को कहा गया था कि WhatsApp के नए फ़ीचर, जिससे साइबर अपराध बढ़ सकते हैं, के लिए IT एक्ट और नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। 

व्हॉट्सएप ने जारी किया था बयान
केंद्र ने Meta को यह भी याद दिलाया कि एक अहम सोशल मीडिया मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) होने के नाते, WhatsApp IT एक्ट और नियमों के तहत ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य है. बुधवार को एक बयान में WhatsApp ने इस फीचर का बचाव करते हुए कहा कि इसमें स्कैम और इम्पर्सोनेशन को रोकने और यूज़र्स की सुरक्षा के लिए पहले से ही सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाज़ार है और 50 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स के साथ, Telegram की तुलना में यहां इसका यूज़र बेस काफ़ी बड़ा है। 

सरकार ने लगाया था प्रतिबंधन
पिछले महीने, धोखाधड़ी, इम्पर्सोनेशन और संवेदनशील कंटेंट के प्रसार से जुड़ी चिंताओं के कारण भारत में Telegram नियामक जांच के दायरे में आ गया था. भारत सरकार ने Telegram और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने कहा था कि प्लेटफ़ॉर्म लीक हुए और फ़र्ज़ी नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा के पेपर, भ्रामक कंटेंट और देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के प्रसार को रोकने में नाकाम रहा. हालांकि, एक हफ़्ते के सरकारी प्रतिबंध की अवधि खत्म होने के बाद यह इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म भारत में फिर से चालू हो गया। 

 

MP कांग्रेस में बगावत! राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी-जीतू पटवारी पर साधा निशाना, इस्तीफा देकर मचाई हलचल

इंदौर
 मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव ने कहा कि पार्टी में अब कार्यकर्ताओं की बात सुनने के बजाय सवाल पूछने वालों को नोटिस देकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

राकेश सिंह यादव ने कहा कि वे पिछले 30 से 35 वर्षों से कांग्रेस में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करते रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग पदों पर संगठन की जिम्मेदारियां निभाईं लेकिन पहली बार उन्हें ऐसा माहौल देखने को मिला जहां अपनी बात रखने पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा की जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाने के योग्य नहीं हैं और उनके नेतृत्व में संगठन लगातार कमजोर हुआ है।

टीवी डिबेट में जाने पर मिला नोटिस
यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रदेश कांग्रेस की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें नेताओं को टीवी डिबेट में शामिल नहीं होने और मीडिया के सामने बयान देने से मना किया गया था। साथ ही तीन दिन के मौन सत्याग्रह का निर्देश भी दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी ने मुख्यमंत्री और वीर भूमि न्यास से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था तब उसके समर्थन में क्या सबूत पेश किए गए।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से सिर्फ इतना पूछा था कि जिन आरोपों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई उनके दस्तावेज कहां हैं। लेकिन जवाब देने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस भेज दिया गया कि उन्होंने टीवी डिबेट में हिस्सा क्यों लिया। यादव का कहना है कि अपनी बात रखना और सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है और कांग्रेस के संविधान में मीडिया के बहिष्कार जैसा कोई प्रावधान नहीं है।

वीर भूमि न्यास मामले में उठाए सवाल
राकेश सिंह यादव ने कहा कि वीर भूमि न्यास को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह सरकारी ट्रस्ट है और सरकार की जमीन एक विभाग से दूसरे विभाग को दी गई है। कांग्रेस सरकारों के समय भी कई अस्पतालों, सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक ट्रस्टों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित की गई थी। ऐसे मामलों को भ्रष्टाचार या घोटाला बताना उचित नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिना दस्तावेजों के इतने बड़े आरोप लगाने से पार्टी खुद सवालों के घेरे में आ गई है। यदि वास्तव में सबूत होते तो उन्हें दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक किया जाता।

जीतू पटवारी और हरीश चौधरी पर लगाए गंभीर आरोप
राकेश सिंह यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर संगठन में मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान के दौरान पैसों के आधार पर नियुक्तियां की गईं जिससे संगठन को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए भी जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी जिम्मेदार हैं। यादव ने हरीश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में टिकट बेचे और जीतू पटवारी ने उनका बचाव किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चौधरी एक डिफेंडर वाहन लेकर आए और उसके बदले कई पदों का बंटवारा किया गया।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में गलत लोगों को संरक्षण मिल रहा है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ऐसे लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनकी वजह से कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं की भी बात नहीं सुनी जा रही है।

नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जताई चिंता
यादव ने कहा कि यदि संगठन की कार्यशैली में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो सकती है। प्रदेश की 16 नगर निगमों में पार्टी किसी भी महापौर सीट पर मजबूत स्थिति में नजर नहीं आ रही है।

बीजेपी में जाने के सवाल पर क्या बोले?
बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर राकेश सिंह यादव ने साफ कहा कि फिलहाल उनकी किसी भी दल से कोई बातचीत नहीं हुई है। भविष्य में क्या होगा इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यादव ने यह भी कहा कि यदि राजनीति का उद्देश्य जनता के बीच काम करना है तो वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह न दलाली कर सकते हैं और न ही संगठन में पैसों के लेन-देन की राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

 

विजय सरकार की कैबिनेट बैठक पर विवाद, भाजपा ने राज्यपाल से की शिकायत; बाहरी लोगों की मौजूदगी पर उठाए सवाल

चेन्नई

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार एक नए राजनीतिक विवाद में घिर गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक में दो अनाधिकृत व्यक्तियों ने हिस्सा लिया, जो सीधे तौर पर संवैधानिक ‘गोपनीयता की शपथ’ का उल्लंघन है। इस मामले को लेकर प्रदेश बीजेपी ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से हस्तक्षेप और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने विशेष रूप से जॉन आरोकियासामी और विष्णु रेड्डी का नाम लेते हुए दावा किया है कि ये दोनों अनाधिकृत व्यक्ति कैबिनेट की बैठक में मौजूद थे। नागेंद्रन का तर्क है कि ये व्यक्ति मंत्री पद से नहीं जुड़े हैं, इसलिए बैठक में उनकी उपस्थिति प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है।

इस मुद्दे पर नागेंद्रन ने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति और तमिलनाडु प्रभारी अरविंद मेनन के साथ राज्यपाल अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। लोक भवन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ज्ञापन में कहा गया है कि मंत्रियों के अलावा दो निजी व्यक्तियों का बैठक में शामिल होना एक “अवैध कृत्य” है और यह भविष्य में दोबारा नहीं होना चाहिए।

सत्ताधारी TVK का स्पष्टीकरण
विपक्षी दल (BJP और DMK) लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सत्ता के केंद्र में कुछ खास लोगों का प्रभाव बढ़ रहा है। हालांकि, सत्तारूढ़ टीवीके ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आरोकियासामी और रेड्डी अब निजी व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है।

बीजेपी द्वारा लगाए गए अन्य गंभीर आरोप
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान बीजेपी नेताओं ने राज्य सरकार पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। बीजेपी नेता ने राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन पर बच्चियों के प्रति “अनुचित व्यवहार” का गंभीर आरोप उठाया है। नागेंद्रन ने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि टीवीके के सत्ता संभालने के मात्र 54 दिनों के भीतर आपराधिक गतिविधियों में भारी वृद्धि हुई है। इसमें 151 यौन उत्पीड़न, 85 से अधिक हत्याएं और नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएं शामिल हैं।

राज्यपाल के अधिकारों का बचाव
एक सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी नेता नागेंद्रन ने मदुरै में स्थानीय अधिकारियों के साथ राज्यपाल अर्लेकर द्वारा की गई समीक्षा बैठक का भी बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत राज्यपाल के पास सरकारी कार्यक्रमों के निरीक्षण और पारदर्शिता की मांग करने का पूरा अधिकार है।

सेवा सेतु से घर बैठे मिल रही समयबद्ध शासकीय सेवाएं

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। शासन की महत्वाकांक्षी पहल सेवा सेतु पोर्टल आम नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के नागरिक विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल लोगों का समय और आर्थिक व्यय बच रहा है, बल्कि सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की समस्या से भी उन्हें राहत मिली है।

कोरबा जिले की पोड़ी उपरोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम सुतर्रा निवासी कुमारी निधि सेन, पिता प्रकाश चन्द्र सेन, सेवा सेतु पोर्टल की सफलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। उन्होंने निवास प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ग्राम सुतर्रा स्थित लोक सेवा केंद्र के माध्यम से सेवा सेतु पोर्टल पर आवेदन किया। आवश्यक दस्तावेजों तथा पटवारी प्रतिवेदन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनका आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर निराकृत किया गया और उन्हें मात्र एक सप्ताह में निवास प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया।

कुमारी निधि सेन ने बताया कि आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। उन्हें किसी भी सरकारी कार्यालय के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़े, जिससे समय और धन दोनों की बचत हुई। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से अब आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और प्रभावी हो गई है।

उन्होंने राज्य सरकार की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए कहा कि सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत किया है। समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह सेवा वितरण की यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है, जहां अब लोग बिना किसी अनावश्यक परेशानी के आवश्यक शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को जन-जन तक पहुंचाने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी तथा नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का प्रभावी उदाहरण है, जिसने शासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी कम करते हुए सेवाओं की उपलब्धता को अधिक सरल, त्वरित और भरोसेमंद बनाया है। यह पहल प्रदेश में सुशासन की अवधारणा को सशक्त करने के साथ-साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित हो रही है।

वीबी-जीरामजी योजना से दिव्यांगजनों को मिला सम्मान और रोजगार

रायपुर

शासन की विकसित भारत-जीरामजी (ग्रामीण रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन) योजना दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना से उन्हें अधिक रोजगार, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य मिल रहा है। पहले जहां मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मिलता था, वहीं अब वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है। इससे दिव्यांग हितग्राहियों की आय बढ़ी है और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।

मेट की जिम्मेदारी ने बढ़ाया आत्मविश्वास

राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी दिव्यांग  चंद्रप्रकाश साहू को वीबी-जीरामजी योजना के तहत 100 मजदूरों के लिए मेट की जिम्मेदारी दी गई है। वे बताते हैं कि पहले उन्हें मनरेगा के अंतर्गत 100 दिनों का रोजगार मिलता था, लेकिन अब 125 दिनों तक काम और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि मेट की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए गर्व की बात है। इससे उन्हें समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

सम्मान ने बढ़ाया हौसला

 चंद्रप्रकाश साहू को राजनांदगांव प्रवास के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री  गजेन्द्र यादव ने शॉल, फल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। वे बताते हैं कि यह सम्मान उनके जीवन का अविस्मरणीय पल है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और आगे बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है।

रंभा मंडावी बनीं आत्मनिर्भर

विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम कोहका की दिव्यांग सु रंभा मंडावी को भी वीबी-जीरामजी योजना के तहत मेट का कार्य मिला है। पहले उन्हें मनरेगा में 261 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के साथ 100 दिनों का रोजगार मिलता था। अब उन्हें 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है, जिससे उनकी आय बढ़ी है और परिवार को आर्थिक संबल मिला है।

योजनाओं की जानकारी देकर भी कर रही हैं सहयोग

सु रंभा मंडावी ने बताया कि वे मेट के रूप में कार्य करने के साथ-साथ गांव के लोगों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी देती हैं, ताकि पात्र हितग्राही समय पर योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
उन्हें भी जिले के प्रभारी मंत्री  गजेन्द्र यादव ने शॉल, फल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से उनका उत्साह और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।

दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद बनी योजना

दोनों हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी योजना दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक आजीविका का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना के तहत बढ़े कार्य दिवस, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण दायित्व ने उनके जीवन में नई उम्मीद, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा का संचार किया है।

लगातार तीसरे वर्ष सजा मंत्रियों का चिंतन शिविर, सुशासन पर होगा मंथन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर

चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने “इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़” विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।

कृषि विषयक सत्र “कृषि से समृद्धि” में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के लिए दो दिवसीय सेमीनार सम्पन्न

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वित्तीय प्रशासन को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं दक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल में प्रदेश की विभिन्न पुलिस इकाइयों से आए उप पुलिस अधीक्षक एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के लिए दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार का उद्देश्य अधिकारियों को वित्तीय नियमों, लेखा प्रक्रियाओं, कल्याणकारी योजनाओं एवं आधुनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों की अद्यतन जानकारी प्रदान कर उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों के प्रभावी एवं दक्ष निर्वहन के लिए सक्षम बनाना था।

सेमीनार का समापन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कल्याण)  सोलोमन यश कुमार मिंज की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व किसी भी शासकीय संस्था की कार्यकुशलता के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव का अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी उपयोग करते हुए वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक सुचारु, नियमसम्मत एवं पारदर्शी बनाने का आह्वान किया।

सेमीनार के उद्घाटन सत्र में उप पुलिस महानिरीक्षक (लेखा एवं कल्याण), पुलिस मुख्यालय, भोपाल  अवधेश गोस्वामी ने प्रतिभागियों को वित्तीय प्रबंधन में अद्यतन नियमों की जानकारी रखने तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारियों की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने की आवश्यकता पर बल दिया।

दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के कार्य एवं उत्तरदायित्व, मध्यप्रदेश भण्डार क्रय एवं उपार्जन नियम-2015 (यथासंशोधित-2022), वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, पुलिस विभाग की कल्याणकारी गतिविधियां, आईएफएमआईएस (IFMIS) प्रणाली, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, पेंशन नियम, दंडों का प्रभावी क्रियान्वयन, देय स्वत्व, टी.ए./डी.ए., अवकाश नियम, जीपीएफ संबंधी कार्यवाहियों में बरती जाने वाली सावधानियां तथा मध्यप्रदेश वित्तीय शक्ति अधिकार पुस्तिका-2025 एवं बजट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस मुख्यालय, वित्त विभाग तथा आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय के विशेषज्ञ अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

समापन समारोह में पुलिस अकादमी के उप निदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल, सहायक पुलिस महानिरीक्षक कल्‍याण मती इरमीन शाह, सहायक निदेशक (प्रशिक्षण) मती रश्मि पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक, पीटीएस मती यास्मीन जहरा सहित अकादमी का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

मध्यप्रदेश पुलिस का यह प्रयास वित्तीय प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ अधिकारियों की क्षमता संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे पुलिस इकाइयों में वित्तीय प्रबंधन और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

 

इंदौर में मानसून का धमाका, अगले हफ्ते फिर शुरू होगा भारी बारिश का दौर

इंदौर

प्रदेश में अब तक सर्वाधिक वर्षा वाले जिलों में देवास के साथ इंदौर अव्वल है। पिछले सप्ताह में शहर में हुई झमाझम वर्षा ने न सिर्फ औसत कोटा पूरा किया, बल्कि इंदौर में अब तक के औसत से 90 फीसद ज्यादा वर्षा हो चुकी है।

इंदौर में अगले सप्ताह भी झमाझम वर्षा का दौर जारी रहेगा। रविवार को इंदौर में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। उसके बाद दो दिन मध्यम वर्षा होगी और फिर भारी वर्षा होने की संभावना है।
इन तीन मौसम प्रणालियों (सिस्टम) के कारण हो रही है झमाझम बारिश

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक वर्तमान में एक सियर जोन (दो अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाओं का मिलन) मुंबई के पास बना हुआ है। इसके वजह से अरब सागर से आर्द्रता पश्चिमी मप्र की ओर आ रही है। इसके अलावा मानसून द्रोणिका उत्तर पश्चिम राजस्थान से मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़ होते हुए उत्तरी उड़ीसा तक जा रही है। इसके प्रभाव से इंदौर सहित संभाग के जिलों में झमाझम वर्षा का दौर दिखाई दे रहा है।

शनिवार को एक निम्न दाब क्षेत्र उत्तरी उड़ीसा पर बना हुआ है। यह अगले तीन दिन में उत्तरी छत्तीसगढ़ होते हुए मप्र की ओर बढ़ेगा। ऐसे में इंदौर में सप्ताह के मध्य में भी शहर में भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
अगले 7 दिनों का मौसम और तापमान पूर्वानुमान
दिनांक     अधिकतम तापमान     न्यूनतम तापमान     वर्षा की संभावना
5 जुलाई     29     22     भारी
6 जुलाई     29     22     मध्यम
7 जुलाई     29     22     मध्यम
8 जुलाई     29     22     भारी वर्षा
9 जुलाई     30     22     भारी वर्षा
10 जुलाई     30     23     हल्की से मध्यम
11 जुलाई     30     23     हल्की से मध्यम

नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है।

 

राजगढ़ में बाल विवाह पर बड़ी कार्रवाई, नाबालिगों की शादी कराने के आरोप में 16 लोगों पर केस

 राजगढ़
जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका और नाबालिग युवक का विवाह कराने के मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।

आरोपियों में दोनों पक्षों के परिजन और विवाह आयोजन में शामिल अन्य लोग शामिल हैं।

बाल विवाह की मिली थी सूचना
पुलिस के अनुसार ग्राम झंझाड़पुर, प्रेमपुरा और खोखरिया के लोगों ने 17 वर्षीय बालिका और 18 वर्षीय युवक का विवाह कराया था। प्रशासन को मामले की सूचना मिलने के बाद जांच की गई, जिसमें सामने आया कि विवाह 12 जून को संपन्न हो चुका है।

इसके बाद पुलिस ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

इन पर केस दर्ज हुआ
प्रकरण में झंझाड़पुर निवासी कांताबाई, कोयलबाई, शिवसिंह, कनीराम, शैतानबाई, कैलाश, मदन, पांचूबाई और देवसिंह सहित प्रेमपुरा और खोखरिया निवासी थानसिंह, रामनाथ, भगवानसिंह, इंदरसिंह, बीरम, हेमराज और शिवनारायण तंवर को आरोपी बनाया गया है।

पुलिस का कहना है कि बाल विवाह सामाजिक कुरीति है और इसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिस या प्रशासन को अवगत कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

 

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