नंदनवन जू घूमना अब पड़ेगा महंगा, टिकट से लेकर AC बस किराए तक में 50% बढ़ोतरी

रायपुर.

नवा रायपुर के नंदनवन जू और जंगल सफारी में घूमना पर्यटकों के लिए अब महंगा हो सकता है. वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जू के प्रवेश शुल्क, सफारी राइड और अन्य सुविधाओं की नई दरें जारी कर दी है. कई श्रेणियों में टिकट रेट 50% तक बढ़ाई गई हैं, जबकि कुछ कैटेगरी में यह बढ़ोतरी दोगुनी से भी अधिक है.

नई प्रस्तावित दरों के अनुसार 6 से 12 साल तक के बच्चों का टिकट 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये और 12 वर्ष से अधिक आयु के आगंतुकों का टिकट 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये किया गया है. विदेशी नागरिकों के लिए यह शुल्क 200 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है. वहीं दिव्यांगजन और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को वैध पहचान पत्र के आधार पर फ्री एंट्री जारी रहेगी. हालांकि सुविधा यह वीकेंड, सार्वजनिक अवकाश और सरकारी छुट्टियों पर लागू नहीं होगी.

सफारी टिकट भी महंगी
सफारी के लिए 6 से 12 वर्ष के बच्चों का टिकट सामान्य बस में 100 रुपये, एसी बस में 150 रुपये और इलेक्ट्रिक बस में 175 रुपये लगेंगे. वयस्कों के लिए यह 150, 200 और 250 रुपये होगा. विदेशी पर्यटकों के लिए सफारी के लिए 750 रुपये से 1250 रुपये तक के रेट तय किए गए हैं.

जिप्सी सफारी के नए रेट
जिप्सी से सफारी घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 700 रुपए और पूरी जिप्सी लेने पर 3,500 रुपए देना होगा. वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए यह दर 350 रुपये प्रति व्यक्ति और 2,000 रुपये प्रति जिप्सी रखी गई है. वहीं विदेशी पर्यटकों को प्रति व्यक्ति 1,500 रुपये और प्रति जिप्सी 7,000 रुपये शुल्क देना होगा.

फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर लगेगा भी शुल्क
अगर आपको जंगल सफारी और नंदनवन जू में फोटोग्राफी करनी है तो इसके लिए एक दिन का 5000 रुपये और कमर्शियल वीडियोग्राफी या फिल्म शूटिंग के लिए एक दिन का 15,000 रुपये शुल्क देना होगा. यह अनुमति संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति के अधीन होगी.

शैक्षणिक भ्रमण पर मिलेगी छूट
सरकारी स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को फ्री एंट्री दी जाएगी. वहीं कक्षा 9 से 12 तक के सरकारी स्कूलों के बच्चों को 50 प्रतिशत और निजी स्कूलों के छात्रों को 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

फल मंडी में बड़ा खुलासा! केमिकल से पकाए जा रहे थे केले, खाद्य विभाग ने मारा छापा

खैरागढ़.

खैरागढ़ जिले में गर्मियों के मौसम में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाते ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। तीन दिनों तक चले विशेष जांच अभियान में सड़े-गले फल नष्ट कराए गए, गंदगी मिलने पर जूस सेंटर बंद कराया गया और केमिकल से फल पकाने वाले प्रतिष्ठान पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में केले जब्त किए गए।

कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान का नेतृत्व अभिहित अधिकारी सिद्धार्थ पांडे ने किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी दीपक धृतलहरे की टीम ने जिले के फल बाजारों, मंडियों और प्रतिष्ठानों में लगातार निरीक्षण किया। छुईखदान के नया बस स्टैंड क्षेत्र में जांच के दौरान करीब 20 किलो सड़े-गले आम, 5 दर्जन केले, पपीता और अंगूर मौके पर नष्ट कराए गए। इसी दौरान एक गन्ना जूस सेंटर में भारी गंदगी और खुले में रखी बर्फ मिलने पर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए दुकान तत्काल बंद करा दी गई। इतवारी बाजार और पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 15 किलो खराब आम, 20 दर्जन केले और 3 तरबूज नष्ट कराए गए।

अभियान की सबसे बड़ी कार्रवाई 29 मई को गंडई तहसील के वार्ड नंबर 7 स्थित खंडेलवाल फल भंडार में हुई, जहां बिना खाद्य पंजीयन के हानिकारक केमिकल से फल पकाने का मामला उजागर हुआ। टीम ने छापेमारी के दौरान गोल्डन टच एथिलीन रिपनर, टैग पूरन 3G और टैगपान लिक्विड जैसे केमिकल बरामद किए। कच्चे आम और केले के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जबकि अस्वच्छ तरीके से रखे गए 60 कैरेट केले जब्त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 50 से 60 हजार रुपए बताई जा रही है।

जांच के दौरान अधिकारियों ने साफ कहा कि कृत्रिम तरीके से फल पकाने, रसायनों के इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर अब सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारी सिद्धार्थ पांडे ने कहा कि आमजन की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

ट्रंप के दावे पर ईरान का पलटवार, होर्मुज ‘पीस डील’ को बताया झूठ; अब किस मोड़ पर पहुंचेगी जंग?

तेहरान 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओऱ से ईरान के साथ संभावित समझौते का दावा किए जाने के तुरंत बाद ईरानी मिलिट्री के जुड़ी मीडिया ने उनके बयानों को खारिज कर दिया. ट्रंप ने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए ‘मजबूर’ हो गया है, लेकिन ईरान ने इसे तथ्यों और झूठ का मिश्रण बताते हुए कहा कि यह तेहरान में विचाराधीन समझौते का सही ड्रॉफ्ट नहीं है। 

‘काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश में ट्रंप’
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी समाचार एजेंसी फर्स न्यूज ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के बयान “काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश” हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘Commitment for Commitment’ नाम से प्रस्तावित समझौता ईरान में अंतिम मंजूरी के चरण में है, हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. व्हाइट हाउस में वेस्ट एशिया क्राइसिस को लेकर एक अहम बैठक में शामिल होने से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगी पाबंदियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं और समुद्री यातायात सामान्य होने लगा है. यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 

क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा?
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईरान
तुरंत बचे हुए बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा. हमारी अभूतपूर्व नौसैनिक नाकेबंदी अब हटाई जा रही है और जलडमरूमध्य में फंसे जहाज अपने घर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘अगली सूचना तक कोई धनराशि का आदान-प्रदान नहीं होगा’ और कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बन चुकी है। 

‘होर्मुज को फिर खोलने की प्रोसेस ईरान की शर्तों पर’
हालांकि ईरानी मीडिया ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया ईरान की शर्तों के अनुसार होगी. इसमें जहाजों की निगरानी, निरीक्षण, समुद्री सेवाएं और सुरक्षा संबंधी उपाय शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बिना किसी शुल्क या शर्त के जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने का ट्रंप का दावा गलत है और मसौदा समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। 

फ्रीज संपत्तियों को जारी करना भी ड्राफ्ट का हिस्सा
फर्स न्यूज ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अपने परमाणु सामग्री भंडार को नष्ट करेगा. रिपोर्ट के अनुसार, जानकार सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि समझौता ज्ञापन (MoU) में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के ड्राफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को तत्काल जारी करना है. तेहरान का कहना है कि जब तक यह राशि जारी नहीं की जाती, तब तक वह बातचीत के अगले स्टेप में आगे नहीं बढ़ेगा। 

इसके अलावा लेबनान में पूर्ण युद्धविराम, जो हिज्बुल्लाह के रुख के अनुरूप हो, भी बातचीत का एक अहम मुद्दा बताया गया है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उसकी प्रमुख शर्तें पूरी होंगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किसी भी अंतिम समझौते का आधार ईरान की “रेड लाइन्स” और अमेरिका के प्रति उसका ‘पूर्ण अविश्वास’ रहेगा। 
 

30 फरवरी बना मुसीबत! हाईकोर्ट ने मुस्लिम महिला की भारतीय नागरिकता पर उठाए सवाल

गुवाहाटी 
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम महिला को भारतीय नागरिक मानने से इनकार करने वाले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बेहद अजीबोगरीब तथ्य को उजागर किया। अदालत ने पाया कि महिला ने अपने दस्तावेजों में अपनी जन्मतिथि 30.02.1990 (30 फरवरी 1990) बताई थी, जो पूरी तरह से अमान्य और असंभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार फरवरी के महीने में कभी 30 दिन होते ही नहीं हैं।

जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस प्रांजल दास की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बिना किसी मजबूत दस्तावेजी सबूत के केवल मौखिक गवाही के आधार पर महिला का अपने पूर्वजों से संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिसंबर 2006 का है। दरंग मंगलदोई के पुलिस अधीक्षक ने महिला की राष्ट्रीयता पर संदेह जताते हुए एक संदर्भ फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल को भेजा था। ट्रिब्यूनल से इस मामले पर राय मांगी गई थी। नोटिस मिलने के बाद महिला ट्रिब्यूनल के सामने पेश हुई और खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए अपने लिखित बयान के साथ 9 दस्तावेज और गवाह पेश किए। उसने खुद को आकाश अली नाम के व्यक्ति का वंशज बताया, जिनका नाम 1966 की मतदाता सूची में शामिल था।

कोर्ट ने क्यों खारिज किए दावे?
महिला ने ट्रिब्यूनल के सामने कई दस्तावेज पेश किए थे। उनमें 1966 की मतदाता सूची भी थी, जिसमें उसके कथित दादा आकाश अली का नाम था। 1993 की मतदाता सूची में नूर इस्लाम (आकाश अली के बेटे) और जहूरा के नाम थे, जिन्हें महिला ने अपने माता-पिता बताया था। अदालत और ट्रिब्यूनल ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

दस्तावेजों को साबित नहीं किया जा सका
ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल दस्तावेज जमा कर देने से उनके भीतर लिखी बातें सच साबित नहीं हो जातीं। दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि उन गवाहों द्वारा की जानी चाहिए जो उनके प्रामाणिक होने की गवाही दे सकें। महिला ने अपने हलफनामे में यह भी दावा किया कि उसके दादा आकाश अली का नाम 2010 की मतदाता सूची में अबू बकर के रूप में दर्ज था और ये दोनों नाम एक ही व्यक्ति के थे, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई जन्मतिथि 30 फरवरी 1990 पूरी तरह से अमान्य थी।

केवल मौखिक गवाही काफी नहीं
याचिकाकर्ता के वकील एम. देव ने दलील दी कि जमा की गई मतदाता सूचियां प्रमाणित प्रतियां थीं, जो साक्ष्य अधिनियम की धारा 74 के तहत सार्वजनिक दस्तावेज हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ट्रिब्यूनल की इस आपत्ति को छोड़ भी दिया जाए तब भी सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या याचिकाकर्ता अपने पूर्वज आकाश अली के साथ अपना संबंध साबित कर पाई? अदालत ने कहा, “यह पूरी तरह स्थापित कानून है कि ऐसे मामलों में केवल मौखिक गवाही लिंक स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है। इसके लिए पुख्ता दस्तावेजी सबूत अनिवार्य हैं।”

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि दस्तावेजों के मूल लेखकों या संबंधित अधिकारियों ने इसकी गवाही नहीं दी थी, इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा इन सबूतों को स्वीकार न करना किसी भी तरह से गैर-कानूनी नहीं था। इसी के साथ अदालत ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी।

Hero लाएगी देश की पहली 100% फ्लेक्स-फ्यूल बाइक, 3 जून को होगा बड़ा लॉन्च

नई दिल्ली

स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero MotoCorp आगामी 3 जून को अपनी एक नई मोटरसाइकिल बाजार में उतारने वाली है. इस बाइक को लेकर खास बात यह है कि यह बाइक 100 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल यानी E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) पर चलेगी और यह कंपनी की पहली फ्लेक्स-फ्यूल बाइक होने वाली है। 

यह लॉन्च कंपनी के अल्टरनेटिव फ्यूल की तरफ बढ़ने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि इस मोटरसाइकिल को पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी की मौजूदगी में लॉन्च किया जाएगा। 

नए फ्यूल के विकल्प
Hero MotoCorp की इस मोटरसाइकिल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने की क्षमता है. यह बात इसे भारत में अभी बिक रहे फ्लेक्स-फ्यूल टू-व्हीलर्स से बिल्कुल अलग बनाती है. उदाहरण के लिए बता दें कि Suzuki Gixxer SF 250 और Honda CB 300F फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें हैं, लेकिन ये प्योर इथेनॉल का इस्तेमाल नहीं करती हैं, बल्कि E85 फ्यूल के लिए ट्यून की गई हैं। 

कंपनी ने यह लॉन्च ऐसे समय में रखा है कि जब सरकार फ्यूल में ज़्यादा विविधता लाने पर ज़ोर दे रही है. पश्चिम एशिया संकट के बाद, तेल कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर फ्लेक्स-फ्यूल की उपलब्धता बेहतर करने के लिए बढ़ावा दिया गया है, जिससे इन अल्टरनेटिव फ्यूल गाड़ियों को बाज़ार में ज़्यादा मज़बूत इस्तेमाल मिल रहा है। 

Hero HF Deluxe का फ्लेक्स फ्यूल वर्जन किया था प्रदर्शित
Hero MotoCorp ने 2025 भारत मोबिलिटी एक्सपो में अपने फ्लेक्स-फ्यूल डायरेक्शन का प्रीव्यू पहले ही कर दिया था. वहां, कंपनी ने जयपुर में अपने सेंटर फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (CIT) में डेवलप की गई Hero HF Deluxe का इथेनॉल-बेस्ड वर्जन प्रदर्शित किया था। 

कंपनी ने उस प्रोटोटाइप में 100cc का BS6 इंजन इस्तेमाल किया था और इसे E20 से E85 तक के इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के साथ काम करने के लिए इंजीनियर किया गया था. इस मोटरसाइकिल को सरकार की क्लीनर और रिन्यूएबल फ्यूल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की कोशिशों के चलते डिजाइन किया गया था। 

फ्लेक्स फ्यूल क्यों है जरूरी
बता दें कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां पेट्रोल और इथेनॉल के मिश्रण पर चलने के लिए बनाई जाती हैं, जिनमें इथेनॉल की मिलावट अलग-अलग होती है. इसका उद्देश्य फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना और स्टैंडर्ड पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के मुकाबले उत्सर्जन को कम करना है. भारत के लिए, यह तकनीक ट्रांसपोर्ट फ्यूल में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की बड़ी कोशिशों में भी फिट बैठती है। 

TCS को बड़ा झटका! कनाडा के सबसे बड़े बैंक ने खत्म किया सालों पुराना कॉन्ट्रैक्ट

मुंबई 

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (Tata Consultancy Services) को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. कनाडा के सबसे बड़े बैंक, रॉयल बैंक ऑफ कनाडा (Royal Bank of Canada) ने टीसीएस के साथ अपना बरसों पुराना कॉन्ट्रैक्ट यानी काम का समझौता आंशिक रूप से खत्म कर दिया है. आसान शब्दों में कहें तो बैंक ने अपने काम का एक हिस्सा अब टीसीएस से वापस ले लिया है और उसे एक दूसरी बड़ी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) को सौंप दिया है. इस बड़े फैसले के बाद, इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 150 कर्मचारियों को दूसरी कंपनी में शिफ्ट किया जाएगा, जिसे कॉर्पोरेट की भाषा में ‘रीबैजिंग’ कहते हैं. इसका मतलब यह है कि ये कर्मचारी काम तो उसी बैंक के सिस्टम पर करेंगे, लेकिन अब वे टीसीएस के बजाय एक्सेंचर के कर्मचारी कहलाएंगे और सैलरी भी वहीं से मिलेगी। 

रॉयल बैंक ऑफ कनाडा और टीसीएस का यह साथ आज का नहीं, बल्कि करीब दो दशक पुराना है. दोनों कंपनियों का यह सफर साल 2007 में शुरू हुआ था, जब बैंक की एक सहायक कंपनी ने टीसीएस को अपना मुख्य टेक्नोलॉजी पार्टनर चुना था. उस समय टीसीएस का काम बैंक के बुनियादी ढांचे को संभालने से जुड़ा था. इसे आप कोर बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Core Banking Infrastructure) से जुड़ा काम भी कह सकते हैं. कोर बैंकिंग का मतलब बैंक का वह मुख्य सॉफ्टवेयर और सिस्टम होता है, जिससे ग्राहकों के खातों, पैसों के लेन-देन और पासबुक जैसी तमाम बुनियादी चीजें चलती हैं. टीसीएस ने तब बैंक के कई अलग-अलग सिस्टम्स को मिलाकर एक मजबूत और इकलौता प्लेटफॉर्म तैयार किया था। 

शुरुआत में हुआ था हंगामा
समय के साथ यह रिश्ता सिर्फ बुनियादी काम संभालने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि काफी बड़ा हो गया. साल 2012-13 के दौरान जब बैंक ने टीसीएस को अपना काम बड़े पैमाने पर आउटसोर्स किया, तब कनाडा में इस पर काफी हंगामा और सार्वजनिक चर्चा भी हुई थी क्योंकि वहां कर्मचारियों के काम में बदलाव हो रहे थे. इसके बाद भी दोनों का काम चलता रहा और साल 2020 में टीसीएस ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बड़े गर्व से बताया था कि उसने बैंक के ग्लोबल रिसर्च प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से नया रूप दे दिया है. टीसीएस ने उस प्लेटफॉर्म को क्लाउड पर डेटा सुरक्षित रखने वाली तकनीक और एआई (AI – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सर्च क्षमताओं से लैस किया था, ताकि ग्राहकों को बेहतर सुझाव मिल सकें. टीसीएस खुद को इस बैंक का एक बेहद करीबी और रणनीतिक डिजिटल पार्टनर मानती थी, जो बैंक को भविष्य की तकनीक के लिए तैयार कर रहा था। 

क्या है काम छिनने की वजह?
अब बात करते हैं कि आखिर इतना पुराना और मजबूत रिश्ता अचानक क्यों बदला. सूत्रों के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर बड़े बैंक और वित्तीय संस्थान आजकल इस बात पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं कि वे बाहरी आईटी कंपनियों से किस तरह का काम करवाएं. आजकल हर बैंक का पूरा ध्यान एआई (AI) के जरिए अपने काम को ज्यादा से ज्यादा आसान, तेज और किफायती बनाने पर है. साथ ही, ये बैंक अब अपनी मुख्य टेक्नोलॉजी यानी कोर ऑपरेशन्स पर बाहरी कंपनियों के भरोसे रहने के बजाय खुद ज्यादा कंट्रोल और नियंत्रण रखना चाहते हैं. इसी रणनीतिक बदलाव के चक्कर में रॉयल बैंक ऑफ कनाडा ने इस पुराने कॉन्ट्रैक्ट के ढांचे को बदला है, जिससे टीसीएस के हाथ से काम का एक हिस्सा निकल गया। 

कनाडा के बाजार में इस तरह के बैंकिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स बहुत मजबूत माने जाते हैं और कंपनियां सालों-साल एक ही पार्टनर के साथ काम करती हैं. ऐसे में टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी के हाथ से इस बड़े बैंक का काम निकलना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. बता दें कि टीसीएस अपनी कुल कमाई का लगभग 48 फीसदी हिस्सा उत्तरी अमेरिका के बाजार से हासिल करती है, जिसमें कनाडा भी शामिल है. हालांकि, इस पूरे मामले पर जब टीसीएस, रॉयल बैंक ऑफ कनाडा और एक्सेंचर से सवाल पूछे गए, तो किसी भी कंपनी ने अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। 

कर्नाटक कांग्रेस में नए सत्ता समीकरण की तैयारी, 4 डिप्टी CM फॉर्मूले पर मंथन तेज

बेंगलुरु 
मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलफेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनने जा रही नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आज दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा करेंगे। जिसमें चार डिप्टी सीएम को लेकर भी मंथन होगा।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दरमैया, डीके शिवकुमार और AICC के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक के दौरान राज्यसभा उम्मीदवारों, MLC उम्मीदवारों और मंत्रिमंडल में फेरबदल पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा।

चार डिप्टी सीएम बनाने की संभावना
सूत्रों ने आगे बताया कि सिद्दरमैया के मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना कम है। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

सिद्दरमैया के बेटे को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, सिद्दरमैया के बेटे और विधान परिषद के सदस्य यतींद्र को डीके शिवकुमार की कैबिनेट में शामिल किए जाने की पूरी उम्मीद है। उन्हें कोई अहम मंत्रालय मिलने की संभावना है, ताकि सिद्दरमैया की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जा सके।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक की तारीख आज तय की जाएगी जो कि अब महज एक औपचारिकता ही लगती है। इसके बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी।

कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर होने हैं चुनाव
कर्नाटक में राज्यसभा की जिन चार सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से कांग्रेस दो सीटें आसानी से जीतती दिख रही है। तीसरी सीट पर भी उसे बढ़त हासिल है, जिसके लिए उसे बस कुछ और वोटों की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि AICC के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला तीन में से दो राज्यसभा सीटों के लिए नामों का पैनल पेश करेंगे, और खड़गे को राज्यसभा में दोबारा मौका दिया जाएगा।

इसके अलावा, राज्य में विधान परिषद (MLC) की सात सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए भी संभावित नामों का एक पैनल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपा जाएगा।

राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बीते गुरुवार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने गुरुवार दोपहर तीन बजे लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन राज्यपाल की अनुपस्थिति के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था। आज राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सिद्दरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

राज्यपाला ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए लिखा, “मैं थावरचंद गहलोत भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।” 

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन

मात्र 5 रुपये में 1 लाख 10 हजार से अधिक किसानों को मिला नया स्थाई कृषि पंप कनेक्शन

भोपाल 

राज्‍य शासन द्वारा घोषित ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत किसानों को सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन आसानी से उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी के कार्यक्षेत्र में किसानों को अब मात्र 5 रूपये के प्रारंभिक शुल्‍क में नए बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 01 लाख 10 हजार 478 कृषि पम्‍प कनेक्‍शन उपलब्‍ध करा दिये गये हैं।

भोपाल रीजन के 8 जिलों के 9 हजार 305 गावों में 85 हजार 362 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने तथा ग्‍वालियर रीजन के 8 जिलों के 7 हजार 284 गावों में 25 हजार 116 कृषि पम्‍प उपभोक्‍ताओं ने 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन योजना का लाभ उठाया है। कंपनी द्वारा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिए ऐसे कृषक जिनके खेत विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं, उनको प्रारंभिक शुल्‍क 5 रूपये में स्थाई कृषि पंप कनेक्शन प्रदान किये जा रहे हैं। कनेक्‍शन की शेष शुल्‍क राशि का भुगतान मासिक देयकों के साथ किश्‍तों में लिया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि आवेदक 5 रूपये में नवीन कनेक्‍शन के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए नजदीकी विद्युत केन्‍द्र/जोन अथवा कंपनी के कॉल सेन्‍टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

मध्यप्रदेश में वरिष्ठजनों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की सुदृढ़ व्यवस्था

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं और पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।

कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव

वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं।

प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं।

अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।

संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल

प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा

भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है।

हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ

वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है।

इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है।

सम्मान और सामाजिक स्वीकृति

वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है।

नवाचार और सुधार

राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है।

यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम—इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

बदलती खेती में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी बन रहे किसानों की नई पसंद

रायपुर

खेती में बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पैदा हो रही चुनौतियों के बीच अब नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक उपयोगी और लोकप्रिय विकल्प बन गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से इनका उपयोग करें तो इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बेहतर बनाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाए रखने के लिए उर्वरकों के उपयोग के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी होगा। यही कारण है कि अब किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को लेकर रुचि बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ सहित देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में सामान्यतः प्रति एकड़ 2 से 3 बोरी यूरिया और 1 बोरी डीएपी का उपयोग किया जाता है।

मौजूदा कीमतों के अनुसार एक बोरी यूरिया की कीमत लगभग 270 रुपये और एक बोरी डीएपी की कीमत लगभग 1350 रुपये है। इस प्रकार केवल यूरिया और डीएपी पर प्रति एकड़ करीब 1900 से 2200 रुपये तक खर्च हो जाता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर माना जाता है। फसल में दो चरणों में छिड़काव के जरिए पारंपरिक यूरिया की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यदि किसान 2 बोरी ठोस यूरिया की जगह 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करते हैं तो अनुमानित खर्च 100 रुपये प्रति एकड़ बचत होती है। दो बोरी पारंपरिक यूरिया का मूल्य लगभग 540 रुपये है। इसके स्थान पर 2 बोतल नैनो यूरिया| लगभग 450-500 में आता है। यानि सीधे खाद लागत में बचत के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और मजदूरी खर्च में भी कमी आती है।

इसी प्रकार कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा उपयोग करने के बजाय यदि किसान 25 किलो डीएपी के साथ 500 मिली नैनो डीएपी का उपयोग करें तो प्रति एकड़ लगभग 75 से 150 रुपये तक की बचत होती है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पारंपरिक यूरिया का बड़ा हिस्सा मिट्टी, पानी और वातावरण में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो यूरिया के सूक्ष्म कण सीधे पौधों द्वारा तेजी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक संतुलित उपयोग की स्थिति में इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आए है।फसल की बढ़वार बेहतर होती है। पौधों की हरियाली लंबे समय तक बनी रहती है। दानों का भराव मजबूत होता है।उत्पादन की गुणवत्ता सुधरती है। उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। कई कृषि परीक्षणों में 5 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि के संकेत भी मिले हैं।

कृषि क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा रासायनिक अवशेष कम होते हैं।भूजल प्रदूषण घटता है।मिट्टी की जैविक सक्रियता बेहतर बनी रहती है।पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।इसी कारण वैज्ञानिक खेती में अब संतुलित उर्वरक उपयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है ।
वैज्ञानिक सलाह के अनुसार संतुलित रूप से नैनो उर्वरकों का उपयोग बढ़ाते हैं तोआयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी है।विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। देश में उर्वरक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन इकाइयों में रोजगार बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में पारंपरिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रायपुर जिले की समितियों में वर्तमान मे यूरिया की उपलब्धता  9,102 मीट्रिक टन और कुल भंडारित यूरिया की मात्रा 10,732 मीट्रिक टन है, जब कि डीएपी की उपलब्धता 3,092 मीट्रिक टन और कुल भंडारित डीएपी की मात्रा 3,927 मीट्रिक टन है। इसके साथ ही कृषि सेवा केंद्रों और समितियों के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है ताकि किसान आवश्यकता और उपयोगिता के आधार पर इन विकल्पों का इस्तेमाल कर सकें।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक तकनीकों का समन्वय ही खेती को अधिक लाभकारी बनाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प माना जा रहा है, जो कम लागत, बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सुरक्षा तीनों मोर्चों पर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

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