MP में बदली DRP नीति, अब मेडिकल कॉलेजों के डीन तय करेंगे PG डॉक्टरों की पोस्टिंग

भोपाल.

मध्य प्रदेश सरकार ने जिला रेजिडेंट प्रोग्राम (डीआरपी) नीति में तीन साल बाद बड़ा बदलाव किया है। अब जिला अस्पतालों में तीन माह की सेवा देने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग राज्य स्तर से नहीं होगी। इसके बजाय संबंधित मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय डीआरपी प्लेसमेंट एलोकेशन कमेटी पोस्टिंग का निर्णय करेगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती करना और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, नई नीति में आवास भत्ता समाप्त किए जाने से रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच असंतोष भी देखा जा रहा है।

डीन की अध्यक्षता वाली समिति करेगी पोस्टिंग
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में गठित पांच सदस्यीय समिति रेजिडेंट डॉक्टरों के जिला आवंटन का फैसला करेगी। पहले यह प्रक्रिया राज्य स्तर पर होती थी। अब जिस मेडिकल कॉलेज में जिस क्षेत्र के मरीज अधिक आते हैं, उसी क्षेत्र के जिला अस्पतालों में वहां के रेजिडेंट डॉक्टरों को भेजा जाएगा।

क्षेत्र के अनुसार होगा जिला आवंटन
नई नीति के अनुसार गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती भोपाल, विदिशा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में होगी। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर के डॉक्टरों को इंदौर, धार, झाबुआ और आसपास के जिलों में सेवाएं देनी होंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

आवास भत्ता खत्म, खुद करनी होगी व्यवस्था
नीति में सबसे बड़ा बदलाव आवास भत्ते को समाप्त करना है। अब रेजिडेंट डॉक्टरों को अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। जिला प्रशासन केवल सुरक्षित आवासों की सूची उपलब्ध कराएगा। वहीं महिला और दिव्यांग रेजिडेंट डॉक्टरों को सुविधा के अनुसार नजदीकी जिलों में पदस्थापना देने का प्रयास किया जाएगा। जिला अस्पतालों में मेंटर और रेजिडेंट डॉक्टरों का अनुपात 1:3 रखा गया है।

रेजिडेंट डॉक्टरों ने रखीं मांगें
रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि पहले की तरह आवास भत्ता जारी रखा जाना चाहिए। साथ ही अधिक मेडिकल कॉलेजों वाले क्षेत्रों से बाहर भी जिलों को डीआरपी में शामिल किया जाए। उन्होंने पूरे प्रदेश में डिवीजन से बाहर म्युचुअल ट्रांसफर की सुविधा लागू करने की भी मांग की है।

तेहरान में खामेनेई के जनाजे के दौरान ट्रंप के खिलाफ खुलेआम धमकी, भीड़ ने लगाया नारा

नई दिल्ली
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के दौरान तेहरान की सड़कों पर रविवार को माहौल उस वक्त बेहद गरमा गया, जब मंच संभाल रहे एक आयोजक ने सरेआम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की अपील कर दी। न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, खामेनेई की मौत के बाद यह पहला मौका है, जब आधिकारिक मंच से सीधे ट्रंप की मौत का आह्वान किया गया है। इस नारे के गूंजते ही जनाजे में मौजूद लाखों की भीड़ ने चिल्लाकर इसका समर्थन किया।

‘दुनिया का सबसे खराब इंसान अब तक जिंदा क्यों है?’
यह पूरी घटना रविवार को उस वक्त हुई, जब तेहरान में खामेनेई के लिए एक विशाल शोक सभा चल रही थी। गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के एक साझा हमले में 86 साल के खामेनेई मारे गए थे, जिसके बाद ईरान युद्ध की शुरुआत हुई थी।

जनाजे के दौरान लाउडस्पीकर पर मोहम्मद रसूली नाम के एक कवि ने कमान संभाली। रसूली ने पहले तो भीड़ से ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के पारंपरिक नारे लगवाए, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने अपना रुख सीधे डोनाल्ड ट्रंप की तरफ मोड़ दिया

मंच से खुली धमकी देते हुए रसूली ने अमेरिकी राष्ट्रपति का जिक्र करते हुए भीड़ से पूछा, “दुनिया का सबसे खराब इंसान अब तक जिंदा क्यों है?” इस बयान के आते ही वहां मौजूद लाखों लोगों ने शोर मचाकर अपनी सहमति जताई।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स रोते और चिल्लाते हुए कह रहा है, “हम उसे क्यों नहीं मार देते जिसने हमारे इमाम को मारा? यह हमारा फर्ज है। अगर हमने तुम्हारे कातिल को नहीं मारा, तो आगे हमारे लिए सिर्फ कफन ही बचेगा। मैं तुम्हारे खून की कसम खाता हूं कि हम ट्रंप को मार डालेंगे।” हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि वीडियो में दिख रहा शख्स वही कवि है या कोई और।

तेहरान की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
शनिवार के मुकाबले रविवार को तेहरान की सड़कों पर कहीं ज्यादा भारी भीड़ देखी गई। काले कपड़ों में लिपटे लाखों लोग खामेनेई की तस्वीरें, बैनर और झंडे लेकर बढ़ रहे थे। भीड़ में कई लोग ऐसे पोस्टर भी थामे हुए थे जिन पर ट्रंप को मारने की बात लिखी थी। पूरे ईरान में इस वक्त ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मारने की मांग करने वाले पोस्टर और ग्रैफिटी (दीवारों पर लिखे नारे) नजर आ रहे हैं।

उधर, जिस वक्त तेहरान में ट्रंप को मारने की कसमें खाई जा रही थीं, ठीक उसी वक्त वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ के जश्न में शामिल हो रहे थे। वहां अमेरिकी सेना की तारीफ करते हुए ट्रंप ने ईरान पर तीखा तंज कसा। ट्रंप ने कहा, “हमें जबरदस्त कामयाबी मिली है। आप वेनेजुएला को देखिए, आप ईरान को देखिए। हमने सब खत्म कर दिया, हमने उनकी मिलिट्री को पूरी तरह मिटा दिया।”

बातचीत के बीच नए सुप्रीम लीडर का शक्ति प्रदर्शन
खामेनेई की मौत के बाद ईरान के शासकों के लिए यह जनाजा एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का जरिया बन गया है। इसके जरिए देश के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई के लिए जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है।

यह सब ऐसे नाजुक समय पर हो रहा है जब ईरान, युद्ध को हमेशा के लिए रोकने के लिए वाशिंगटन के साथ पर्दे के पीछे बातचीत की मेज पर बैठा है। ईरान इस बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने रणनीतिक दबदबे का इस्तेमाल कर अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश में है। हालांकि, ईरान के भीतर इस बात का डर अब भी बना हुआ है कि इजरायल कभी भी उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। जंग चलने की वजह से ही इस जनाजे को पहले टाल दिया गया था, और जब तक यह युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक शांति समझौते की उम्मीदें अधर में लटकी हुई हैं।

पद्मश्री डॉ. तीजन बाई का पार्थिव शरीर दुर्ग के गनियारी पहुंचा, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

दुर्ग.

पंडवानी गायिका पद्मश्री डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर को एम्स से दुर्ग जिले के गनियारी गांव लाया जा चुका है. उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई है. राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. पार्थिव शरीर को लेकर परिजन मुक्ति धाम लेकर पहुंचेंगे.

अंतिम दर्जन के लिए उनके शिष्य, ग्रामीणों के साथ राजनीतिक और समाजिक प्रतिनिधियों के पहुंचने का सिलसिला जारी है. जानकारी के मुताबिक, गनियारी में दुर्ग कलेक्टर, एसएसपी समेत उच्च स्तरीय अधिकारी मौजूद हैं. अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई है. पूरे गांव में शोक की लहर है. नम आंखों के साथ बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. 

एम्स में हुआ निधन
रायपुर एम्स में लगभग 38 दिनों से जारी इलाज के बाद रविवार सुबह प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन हुआ. 72 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री साय और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने एम्स अस्पताल पहुंचकर उन्हें क श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान परिजनों से मुलाकात कर दिवंगत आत्मा को शांति देने की प्रार्थना की.

भिंड के गोहद सिविल अस्पताल में जलभराव, प्रसूति वार्ड खाली कराना पड़ा

भिंड. गोहद में रुक-रुककर लगातार हो रही बारिश ने कस्बे की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। शनिवार को सिविल अस्पताल परिसर और वार्डों में बारिश का पानी भर जाने से मरीजों, प्रसूताओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालात इतने बिगड़ गए कि पानी प्रसूति वार्ड तक पहुंच गया, जिसके चलते मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए वार्ड खाली कराना पड़ा।

विधायक अस्पताल पहुंचे
सूचना मिलने पर गोहद विधायक केशव देसाई अस्पताल पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बीएमओ से अस्पताल में भरे पानी की निकासी को लेकर सवाल किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बीएमओ ने कहा कि पानी निकालना उनका काम नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। विधायक ने जब पूछा कि तत्काल यह काम कौन करेगा तो बीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं की ओर इशारा किया, लेकिन उन्होंने भी यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।

विधायक ने सीएमएचओ से की शिकायत
बीएमओ के रवैये से नाराज विधायक ने मौके से ही सीएमएचओ डॉ. जेएस यादव को फोन कर अस्पताल की स्थिति से अवगत कराया। सीएमएचओ ने तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और पानी की निकासी के निर्देश देने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधायक ने भिंड कलेक्टर केएल मीना से भी चर्चा कर अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अवगत कराया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

स्कूल और बैंक परिसर में भी भरा पानी
पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण गोहद में नालों का पानी उफान पर है। जल निकासी व्यवस्था ठप होने से सड़कों के साथ सरकारी भवनों में भी पानी भर गया। सिविल अस्पताल के अलावा सीएम राइज स्कूल और एक बैंक शाखा भी जलभराव से प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में वर्षों से जल निकासी की समस्या बनी हुई है और हर बारिश में यही हालात बनते हैं।

विधायक बोले- व्यवस्था में सुधार जरूरी
विधायक केशव देसाई ने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर जलभराव गंभीर लापरवाही है। मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी –
गोहद सिविल अस्पताल में जलभराव की सूचना मिली है। तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और पानी की निकासी के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
– डॉक्टर जेएस यादव, सीएमएचओ भिंड

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल की तैयारी, NDA सरकार के सामने दो-तिहाई बहुमत की बड़ी चुनौती

नई दिल्ली
केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण को 2029 से ही लागू करने के लिए एक नया संविधान संशोधन विधेयक और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) लाने की तैयारी में है। हालांकि, इन ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की होगी। संसद के पिछले बजट सत्र में संख्या बल की कमी के कारण 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था, जिसके बाद साधारण बहुमत से पास होने वाले परिसीमन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया था। इस बार सरकार नए सिरे से रणनीति बना रही है।

दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है NDA?
संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन अनिवार्य है। मौजूदा स्थिति में पाला बदलने वाले सांसदों को जोड़ने के बाद भी एनडीए बहुमत के आंकड़े से पीछे है। लोकसभा में एनडीए की वर्तमान ताकत 319 सांसदों की हो चुकी हैं। इनमें टीएमसी 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद भी शामिल हैं। अब भाजपा को संसद में 41 सीटों की आवश्यक्ता है। आपको बता दें कि 543 सीटों वाले लोकसभा में दो तिहाई बहुत में के लिए 360 सांसदों की जरूरत होती है।

राज्यसभा का क्या है समीकरण
राज्यसभा में NDA की वर्तमान ताकत 152 सांसदों की है। दो-तिहाई बहुमत के लिए 161 सांसदों की जरूरत है। भाजपा को यहां भी 9 सांसदों के समर्थन की आवश्यक्ता है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार को या तो विपक्षी दलों का सीधा समर्थन चाहिए होगा या फिर मतदान के समय वॉकआउट के जरिए दो-तिहाई के लिए जरूरी कुल संख्या को कम करना होगा।

तमिलनाडु का बदलता समीकरण
विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का समर्थन हासिल करने के लिए नए विधेयक में उनकी चिंताओं को दूर करना सबसे अहम होगा। 22 लोकसभा सांसदों वाली द्रमुक (DMK) का रुख हमेशा से सीटों के आवंटन पर मौजूदा स्थिति बनाए रखने का रहा है। डीएमके का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों की सीटें कम नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद सी. जोसेफ विजय की पार्टी TVK के सत्ता में आने से राज्य के राजनीतिक समीकरण बदले हैं, जिससे भाजपा के प्रति डीएमके के कड़े रुख में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। हालांकि डीएमके सांसद तिरुची शिवा का कहना है कि आधिकारिक प्रस्ताव सामने आने से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

क्या हैं संवैधानिक अड़चनें?
इस पूरे विवाद और नए विधेयक के केंद्र में अनुच्छेद 81 के दो मुख्य कड़े नियम हैं। अंतर-राज्यीय सीटों का आवंटन यानी कि अनुच्छेद 81(2)(a)। यह नियम कहता है कि राज्यों को लोकसभा सीटें उनकी आबादी के अनुपात में मिलनी चाहिए। आपको बता दें कि देश में राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को बनाए रखने के लिए 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों के आवंटन को पिछले 50 वर्षों से फ्रीज किया गया है। पहला फ्रीज 1976 में और दूसरा 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान लगाया गया था। इसकी मियाद 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े आने पर समाप्त हो जाएगी।

2011 की जनगणना का पेंच
यदि सरकार 2011 की जनगणना को आधार बनाकर नया परिसीमन लाती है तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटें दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी, क्योंकि उत्तर भारत की आबादी तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार अन्य दलों का समर्थन हासिल करने के लिए अनुच्छेद 81 में संशोधन करके इस फ्रीज की समयसीमा को कुछ और दशकों के लिए आगे बढ़ा सकती है, जिससे राज्यों की मौजूदा सीटों का अनुपात सुरक्षित रहे।

राज्य के भीतर का परिसीमन
यह नियम राज्य के भीतर ही अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को तय करता है ताकि राज्य के भीतर सभी क्षेत्रों में जनसंख्या का अनुपात बराबर रहे। वर्तमान में इसके लिए 2001 की जनगणना को आधार माना गया है। सरकार नए विधेयक में इसे बदलकर 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित करने का प्रस्ताव दे सकती है, जिस पर विपक्षी दलों में व्यापक सहमति बनने की संभावना अधिक है।

‘पंडवानी अम्मा’ तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी और सीएम साय ने दी श्रद्धांजलि, बताया लोककला की अपूरणीय क्षति

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की पहचान और पंडवानी लोकगायन शैली की विश्वविख्यात स्तंभ, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने उनके निधन कला व संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एम्स रायपुर पहुंचकर महान कलाकार के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने न केवल छत्तीसगढ़ की माटी का मान बढ़ाया, बल्कि पंडवानी जैसी लोक विधा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि तंबूरे की थाप पर महाभारत की गाथाओं को जीवंत करने वाली तीजन बाई का जाना लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन है।

दुनिया भर में दिलाई लोक कला को विशिष्ट पहचान
सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और…
– Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026

जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धाजंलि
इस अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा भी उपस्थित थे। सभी जनप्रतिनिधियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार उनकी स्मृतियों को संजोने और लोक कला के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्षों और सफलता की वह गाथा है जो आने वाले समय में कलाकारों के लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करेगी।

ग्वालियर में सहेली के भाई ने किशोरी को किडनैप कर किया दुष्कर्म

ग्वालियर.

शहर के माधौगंज इलाके में रहने वाली किशोरी के साथ उसकी सहेली के भाई ने ही दुष्कर्म किया। वह उसे भाई मानती थी, उसे अगवा कर अपने दोस्त के कमरे पर ले गया। यहां जान से मारने की धमकी देकर गलत काम किया। इस घटना के बाद भी वह उसे धमकाता रहा। परेशान होकर पीड़िता ने स्वजन को घटना बताई। इसके बाद यह लोग थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।

दादी के साथ रहती है किशोरी
माधौगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत डांग वाले बाबा पहाड़ी के पास रहने वाली 14 वर्षीय बालिका के माता-पिता जयपुर में रहते हैं। यहां वह अपनी दादी के साथ रहती है। उसकी सहेली का भाई लोकेंद्र विश्वकर्मा उसके घर आता-जाता था। वह उसे भाई मानती थी। दो जून को जब किशोरी की दादी घर पर नहीं थी, तब लोकेंद्र घर में घुस आया। उसने गलत हरकत की। विरोध करने पर उसकी दादी की हत्या की धमकी दी। 28 जून को उसने किशोरी को फोन किया। घर के पास बुलाया और अपने साथ काल्पी ब्रिज कालोनी में रहने वाले अपने दोस्त के कमरे पर ले गया। यहां उसके साथ फिर गलत काम किया। इसके बाद उसे धमकाया कि अगर किसी से कुछ भी कहा तो जान से मार देगा। किशोरी डरी-सहमी घर पर थी। छात्रा जब घर से गायब दिखी तो उसकी दादी ने फोन किया। बाइक से आरोपी उसे घर के पास छोड़ गया। फिर जब दादी ने बात की तब उसने पूरी घटना बताई। फिर यह लोग थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।

पुलिस ने ढूंढा तो घर छोड़ गया था आरोपी
जब किशोरी घर से गायब मिली तो दादी ने पुलिस को भी सूचना दी थी। पुलिस ने उसे ढूंढना शुरू किया, इसके बाद उसे आरोपित घर के पास छोड़ गया। छह दिन तक पीड़िता डरी सहमी रही। उस दिन थाने में भी उसने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी। अब उसने दुष्कर्म की बात बताई।

 

खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, ईरान को दी खुली धमकी

 वाशिंगटन
 ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को खुली धमकी दी है। ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका सिर्फ ‘एक गोली’ से वहां जुटे ईरान के बचे हुए सभू नेतृत्व को खत्म कर सकता है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई बचेगा ही नहीं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरानी नेता अब समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चल रहा है। इस शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत समेत दुनियाभर के प्रतिनिधि ईरान पहुंचे हुए हैं।

नकली आंसू
शनिवार को अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को रोते हुए देखा गया।

इस पर ट्रंप ने अंतिम संस्कार में ईरानियों के रोने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं हो सकता है ये नकली आंसू हों।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यक्रम समाप्त होने तक एक सप्ताह के लिए वार्ता स्थगित करने का निर्णय लिया है। ट्रंप ने कहा कि इस दौरान कोई भी पक्ष दूसरे पर हमला नहीं करेगा।

9 जुलाई को समाप्त होगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम
गौरतलब है कि ईरान ने अपने पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार की शुरुआत के लिए 4 जुलाई का दिन चुना। इस दिन अमेरिका अपनी स्वतंत्रता दिवस मनाता है। अंतिम संस्कार की रस्मों में 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर कोम में कार्यक्रम और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शामिल होंगे। यह 9 जुलाई को खामेनेई के गृह नगर, पूर्वोत्तर के पवित्र शहर मशहद में दफनाने के साथ समाप्त होगा।

ईरान में लाखों लोगों की भीड़
खामनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लाखों लोग ईरान की सड़कों पर जमा हो रहे हैं। यह अंतिम संस्कार दुनिया भर में सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले आयोजनों में से एक बन गया है।

एक सप्ताह की छुट्टी दी
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान को एक अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की छुट्टी दी है। ट्रंप ने कहा , “हमने वेनेजुएला को एक ही दिन में हरा दिया, और ईरान को बुरी तरह से मात दी, वे समझौता करने के लिए बेताब हैं। वे समझौता करना बहुत बुरी तरह से चाहते हैं। हमने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की छुट्टी दी क्योंकि हम अच्छे लोग हैं।”

 

सिंधु जल समझौता स्थगित होने के बाद बढ़ी पाकिस्तान की मुश्किलें, भारत ने दोहराया सख्त रुख

नई दिल्ली
भारत और पाकिस्तान के बीच जल को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। एक साल पहले भारत की ओर से सिंधु जल समझौता स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान में हालात खराब हैं और मौजूदा अल नीनो संकट से उसकी मुसीबतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से कई बार बयानबाजी भी की जा रही हैं, लेकिन भारत ने दो टूक कहा है कि जब तक आतंकवाद जारी रहेगा पाकिस्तान को जल आपूर्ति बंद रहेगी।

वहीं, इस साल पूरी दुनिया गंभीर अल-नीनो से जूझ रही है। इस कारण न केवल तापमान वृद्धि से तमाम देशों को जूझना पड़ रहा है, बल्कि अतिवृष्टि और अल्पवृष्टि का संकट भी बढ़ रहा है। ऐसे में सिंधु जल समझौते के स्थगित होने से पाकिस्तान को न तो भारत से जल मिल रहा है और न ही कोई सूचना। सिंधु बेसिन की नदियों में ज्यादा जल बढ़ने पर उनको छोड़ा जा रहा है और कम होने पर रोका जा रहा है। पाकिस्तान के अपने जल प्रबंधन की नाकामी भी उसकी दिक्कतें बढ़ा रही है, क्योंकि उसके पास जल भंडारण क्षमता बेहद सीमित है।

किदवई डॉक्ट्रिन की चर्चा
पाकिस्तान में जल संकट इतना है कि उसके नेता अब युद्ध और परमाणु हमले की बात कह रहे हैं। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर में मात खा चुके पाकिस्तान को भी पता है कि उसने यदि एक भी गलती की तो भारत का पलटवार उसके लिए बेहद भारी पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान में किदवई डॉक्ट्रिन की काफी चर्चा है जो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के बारे में कुछ स्थितियों का उल्लेख करती है।

पलटवार नहीं झेल पाएगा पाकिस्तान
पाकिस्तान में इस तरह की कई स्थितियां बन रही हैं, पर वह यह भी जानता है कि भारत को उसके उन ठिकानों का पता है, जहां वह सटीक पलटवार कर उसकी रीढ़ तोड़ सकता है। इसलिए बयान देना अलग बात है, आगे बढ़ना अलग। दूसरी ओर, भारत ने सिंधु बेसिन में काफी तैयारियां की हैं। वह न केवल जल भंडारण बढ़ा रहा, बल्कि अपने क्षेत्रों में अधिकतम उपयोग भी कर रहा है।

चेनाब व्यास नहर टनल से चेनाब का जल लाएंगे
भारत ने चेनाब पर दुलहस्ती बांध जल विद्युत परियोजना में 70 मीटर ऊंचे व 186 मीटर लंबे बांध में गाद हटाकर और टनल के जरिए ज्यादा भंडारण क्षमता हासिल कर ली है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना पूरी होने पर रावी का अतिरिक्त जल पाक नहीं जा सकेगा, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ व सांबा जिलों में मोड दिया जाएगा। चेनाब व्यास नहर टनल से चेनाब का जल व्यास में लाया जाएगा।

शोपियां में दूसरे दिन भी एनकाउंटर जारी, लश्कर के A++ कमांडर समेत दो आतंकी घेरे में

नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रविवार को भी एनकाउंटर जारी है। सुरक्षा बलों ने शनिवार से ही लश्कर-ए-तैयबा के दो खूंखार आतंकवादियों को घेर रखा है। ये दोनों आतंकी स्थानीय हैं। अभी भी मीमंदर इलाके के एक घने बाग के भीतर घिरे हुए हैं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है ताकि वे भाग न सकें। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार को कुछ अपुष्ट खबरों में दावा किया गया था कि दोनों आतंकी मारे गए हैं, लेकिन रविवार को अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आतंकियों को पकड़ने या उन्हें मार गिराने के लिए ऑपरेशन अभी भी जारी है।

सुरक्षा बलों की तकनीकी निगरानी के दौरान शुक्रवार को इन दोनों आतंकियों की गतिविधि मीमंदर इलाके में देखी गई थी। शनिवार को जब सेना की एक टीम तलाशी लेते हुए आगे बढ़ी, तो आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मुठभेड़ में बदल गई।

एक A++ श्रेणी का कमांडर
खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार फंसे दोनों आतंकियों की पहचान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासियों के रूप में हुई है।

जाकिर गनी: यह लश्कर-ए-तैयबा का एक खूंखार ऑपरेटिव है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने A++ श्रेणी के आतंकवादियों की सूची में रखा है। जाकिर साल 2024 से घाटी में सक्रिय है और कई आतंकी मामलों में वॉन्टेड है। अक्टूबर 2025 में कुलगाम की एक एनआईए (NIA) अदालत ने उसके खिलाफ उद्घोषणा नोटिस भी जारी किया था।

लतीफ भट: लतीफ पिछले साल ही इस आतंकी संगठन में शामिल हुआ था और जाकिर के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था।

विक्टर फोर्स ने संभाला मोर्चा
गर्मियों के इस मौसम में बागों के घने पत्तों और पेड़ों के कारण सुरक्षा बलों को ब्लाइंड स्पॉट्स का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने मोर्चा संभाला है। इलाके में रोशनी की व्यवस्था की गई है। रात के समय आतंकियों के भागने की कोशिशों को रोकने के लिए पूरे बाग को हाई-बीम लाइटों से रोशन किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शनिवार शाम तक सेना ने आस-पास के चार गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया है, जबकि मुख्य घेराबंदी को और मजबूत कर दिया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑपरेशन?
शोपियां जिला ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल श्रृंखला से जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर रहा है। ऐसे में जाकिर गनी और लतीफ भट जैसे स्थानीय कमांडरों को बेअसर करना लश्कर के लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय युवाओं की नई भर्ती को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल, अंतिम रिपोर्ट मिलने तक दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है और सुरक्षा बल बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

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