बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा सियासी मोड़, प्रशांत किशोर जन सुराज के उम्मीदवार बने

 पटना
 बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर पर होने वाले उपचुनाव में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे। रविवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी गई।

कोर कमेटी की बैठक में हुआ पीके पर फैसला
इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने प्रशांत किशोर को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए जन सुराज का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया।

प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा पिछले कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में थी, लेकिन अब पार्टी के औपचारिक एलान के साथ इस पर विराम लग गया है।

जन सुराज इसे केवल एक उपचुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत और वैकल्पिक राजनीति की परीक्षा के रूप में देख रही है।

पांच बार से लगातार जीतते रहे हैं न‍ित‍िन नवीन
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट का प्रतिनिधित्व लगातार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करते रहे हैं।

उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला सीधे तौर पर हाई-प्रोफाइल बन गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर के उम्मीदवार बनने से इस सीट पर चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति, जन सुराज के जनाधार और विपक्षी राजनीति की दिशा पर भी नजर रहेगी।

तेज प्रताप की पार्टी ने भी ठोका है दावा
तेज प्रताप यादव ने इस सीट पर वीणा मानवी को जेजेडी का उम्‍मीदवार बनाया है। बताया जा रहा है क‍ि महागठबंधन की ओर से पीके को समर्थन क‍िया जाएगा।

भाजपा जहां अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं जन सुराज इस चुनाव को अपने संगठन और राजनीतिक अभियान की बड़ी परीक्षा के रूप में पेश करेगी।

उल्लेखनीय है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। अब सभी प्रमुख दलों की नजर इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।

छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर, घरों में घुसा पानी, दर्जनभर गांवों का संपर्क टूटा

गरियाबंद.

छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियां तेज हो रही है. प्रदेश के सभी संभागों के अधिकांश जिलों में पिछले 24 घंटों में जमकर बारिश हुई. आसमान में काले बादलों ने डेरा डाला हुआ है. भारी बारिश के कारण गरियाबंद जिले के कुसमी-छुरा मार्ग पर पुराना कुसुमबोड़ा पुल टूट गया है. दर्जनभर गांव का छुरा मुख्यालय से संपर्क टूट गया है, जिससे आवाजाही पूरी तरह से थम गई है.

दर्जन भर गांव का टूटा संपर्क
जानकारी के मुताबिक, कई गावों को छुरा मुख्यालय से जोड़ने वाला कुसुमबोड़ा पुल लगभग 40 साल से भी ज्यादा पुराना था. समय के साथ यह पुल काफी जर्जर हो चुका था. पुल टूटने से कोसमी, नवापारा, सारागांव, चुरकीदादार, दुल्ला, बम्हनी सहित दर्जनों गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है. यह मार्ग ओडिसा के नुआपड़ा जिले को भी जोड़ता है, जहां से अंतरराज्यीय व्यापार होता आ रहा था. प्रभावित ग्रामीणों की प्रशासन से मांग है कि आवाजाही के लिए नए पुल का निर्माण किया जाए. छुरा और फिंगेश्वर तहसील में पिछले 24 घंटे में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. दोनों तहसील में अबतक सर्वाधिक 100 मिमी से ऊपर बारिश अब तक दर्ज की जा चुकी है.

फिंगेश्वर का कुम्हार पारा हुआ जलमग्न
बारिश के चलते तापमान में गिरावट तो आई पर बारिश कुछ परिवार के लिए मुसीबत बन गई. फिंगेश्वर के कुम्हार पारा में जल भराव की स्थिति निर्मित हो गई. यहां कई कुम्हार मिट्टी को बर्तन बनाए हुए थे, लेकिन उनके घरों के पानी घुसने से बर्तन टूट गया है. कुम्हार परिवारों को दोहरा क्षति हुआ है. घरो में घुसे पानी को निकालन प्रभावित परिवार देर रात से जुटा हुआ है.

भोपाल में होटल बंद होने से तनाव में थी 35 वर्षीय महिला, आत्महत्या की घटना से सनसनी

भोपाल.

छोला मंदिर थाना क्षेत्र स्थित शिवनगर में होटल का कारोबार मंदा पड़ने से परेशान एक महिला होटल संचालिका ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। प्रारंभिक जांच में मामला आर्थिक तनाव से जुड़ा माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार मृतका क्रांति ठाकुर (35) शिवनगर में अपने परिवार के साथ रहती थीं। परिवार का चाय-नाश्ते का होटल है, जिसका संचालन महिला और उसका पति मिलकर करते हैं। पति ने पुलिस को बताया कि पिछले कुछ समय से होटल का कारोबार ठीक नहीं चल रहा था। आय में लगातार गिरावट आने के कारण क्रांति मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थीं।

फंदे पर लटकी मिली महिला
घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य घर पर नहीं थे। जब उन्होंने कमरे में जाकर देखा तो क्रांति फंदे पर लटकी मिलीं। उन्हें तत्काल नीचे उतारकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। छोला मंदिर थाना पुलिस ने मौत के कारणों की जांच कर रही है।

भारत का सबसे बड़ा तेल-गैस खोज अभियान शुरू, 2.5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र की होगी खोज

नई दिल्ली
 मिडिल ईस्ट संघर्ष ने भारत समेत कई देशों को एनर्जी को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की सीख दी। भारत बहुत पहले से ही कच्चे तेल और गैस में आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। और अब भारत जल्द ही अपने इतिहास के सबसे बड़े तेल और गैस खोज अभियान की शुरुआत करने जा रहा है।

केंद्र सरकार करीब 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के ऐसे क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की तलाश शुरू करेगी, जहां अब तक बड़े पैमाने पर खोज नहीं हुई है। इस अभियान का मकसद घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रूस, सऊदी अरब, इराक समेत दूसरे देशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही इन नए क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए नीलाम करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और अब समय आ गया है कि देश अपने ही संसाधनों का अधिकतम उपयोग करे। इसके लिए भारत लगभग 95 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा

जहां नहीं हुई खोज वहां महाअभियान चलाएगा भारत
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऑयल मिनिस्ट्री के अनुसार, 2025-2026 में देश में कच्चे तेल का उत्पादन 25.98 मिलियन मीट्रिक टन था। यह भारत की कच्चे तेल की जरूरतों का सिर्फ 10 प्रतिशत है, जो लगभग 5,22,000 बैरल प्रति दिन (bpd) के बराबर है। यह आंकड़ा 2011 में 9,00,000 bpd से ज्यादा के पीक प्रोडक्शन से काफी कम है। भारत ने ईरान, वेनेजुएला, रूस से ज्यादा खरीद और कई अफ्रीकी देशों सहित कच्चे तेल के सप्लायर देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 करके ऊर्जा संकट का सामना किया। अब कच्चे तेल की निर्भरता दूसरे देशों पर कम करने के लिए भारत अपने यहां बड़े स्तर महाअभियान चलाएगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने AFP को बताया, “हम अभी लगभग 2,50,000 वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के ऐसे इलाके की बोली लगाने की प्रक्रिया में हैं, जहा अभी तक कोई खोज नहीं हुई है।”

उन्होंने कहा, “हम 10 अरब डॉलर (लगभग 95 हजार करोड़ रुपये) के प्रोग्राम के जरिए तेल और गैस की खोज में बड़े पैमाने पर पैसा लगा रहे हैं।”

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर ने यह साफ कर दिया कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी वजह से सरकार ने घरेलू तेल और गैस खोज अभियान को तेज करने का फैसला लिया है।

समुद्र में छिपा है तेल का खजाना!
सरकार की नजर खासतौर पर समुद्र के गहरे इलाकों पर है। अंडमान एवं निकोबार के आसपास के अपतटीय क्षेत्रों को तेल और गैस के लिहाज से काफी संभावनाशील माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हाइड्रोकार्बन समृद्ध क्षेत्रों जैसी है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मौजूद “ऊर्जा के मौकों के भंडार” की तारीफ की है। यह द्वीप समूह 800 किलोमीटर (500 मील) लंबी द्वीपों की एक श्रृंखला है, जो पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील हैं और थाईलैंड व इंडोनेशिया से सटे समुद्रों में स्थित हैं।

हालांकि गहरे समुद्र में तेल निकालना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक, भारी निवेश और कई वर्षों तक लगातार काम करने की जरूरत होती है। इसी कारण सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों का भी सहयोग ले रही है।

पीएम मोदी ने की थी ‘समुद्र मंथन मिशन’ की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण के दौरान “समुद्र मंथन” मिशन की शुरुआत की। यह नाम हिंदू पौराणिक कथाओं की एक अहम घटना से लिया गया है, जिसका अर्थ है “समुद्र का मंथन”।

पीएम मोदी ने उस समय कहा था, “हम समुद्र के नीचे तेल और गैस के भंडार खोजने के लिए मिशन मोड में काम करना चाहते हैं और इसलिए भारत ‘नेशनल डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ शुरू करने जा रहा है।”

तमिलनाडु में सियासी घमासान: TVK सरकार पर हॉर्स ट्रेडिंग के गंभीर आरोप

 नई दिल्ली
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही है। राज्य की तीन बड़ी पार्टियों (DMK, AIADMK, BJP) ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को तीनों पार्टियों के नेताओं ने राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के साथ अलग-अलग समय पर मुलाकात की और सत्ताधारी पार्टी के ऊपर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगाए। इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर सरकारी मशीनरी के गलत उपयोग और राज्य कैबिनेट की मीटिंग में गैर अधिकृत लोगों के प्रवेश का भी आरोप लगाया।

राज्यपाल से मिलकर आए डीएमके नेता आरएस भारती ने मीडिया के सामने अपने तर्कों को रखा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की विजय सरकार मशीनरी का गलत उपयोग कर रही है और विधायकों की खरीद फरोख्त करने की कोशिश कर रही है। इसके खिलाफ ऐक्शन होना ही चाहिए। उन्होंने कहा, “हमने गवर्नर से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात है और उन्हें तमिलनाडु में जारी हॉर्स ट्रेडिंग और सत्ता के गलत इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी। दो लोग जॉन और विष्णु रेड्डी, जिनका सरकार से कोई संबंध नहीं है वह राज्य के मंत्रियों से ज़्यादा ताकतवर लगते हैं। वे सभी हाई-लेवल मीटिंग में शामिल होते हैं और अधिकारियों को आदेश देते हैं। तमिलनाडु में ऐसी खराब स्थिति पैदा हो गई है। हमने पहले भी एक याचिका दी थी, लेकिन गवर्नर शहर में नहीं थे, इसलिए आज हमने मुलाकात की और इन सभी मुद्दों पर जोर दिया।

बता दें, यह पहली बार नहीं है जब राज्य की डीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री विजय के ऊपर आरोप लगाए गए हों। एक हफ्ते पहले ही स्टालिन की पार्टी ने हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप में विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की थी।

CM थलपति विजय पर लगा विधायकों को तोड़ने का आरोप
एक हफ्ते पहले ही MDMK के नेता वाइको ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री विजय ने व्यक्तिगत रूप से भी विधायकों को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने DMK के दो विधायकों को विधानसभा से इस्तीफा देने और उनके साथ जाने के लिए मनाने की कोशिश की है। इस दावे को लेकर डीएमके ने सीधे तौर पर राज्यपाल से इसकी शिकायत की। इसके अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने विधायकों को भरोसा दिलाया कि अगर वह अपनी सीट छोड़ देते हैं, तो उन्हें उपचुनाव के दौरान TVK से टिकट और आर्थिक मदद दी जाएगी।

भाजपा और AIADMK ने भी की राज्यपाल से मुलाकात
DMK के अलावा AIADMK और भाजपा ने भी राज्यपाल से मुलाकात करके राज्य में चल रही गतिविधियों पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की। दोनों पार्टियों ने मुख्यमंत्री विजय के ऊपर हॉर्स ट्रेडिंग और राज्य कैबिनेट में निजी लोगों को शामिल करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने गवर्नर से संविधान के अनुच्छेद 167 का इस्तेमाल करते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगने और ज़रूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया। भारतीय जनता पार्टी ने भी लगभग समान आरोप लगाते हुए जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया और विजय के खिलाफ जांच की मांग की।

राज्यपाल ने तीनों पार्टियों के नेताओं से मिलने की पुष्टि की
शनिवार को हुई इन हाई प्रोफाइल बैठकों से राज्य की राजनीति भी गर्म रही। राज्यपाल विश्वानाथ आर्लेकर ने इन पार्टियों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि की। लोकभवन ने एक बयान जारी करके बताया कि डीएमके ने अपने ज्ञापन में पुलिस मशीनरी के गलत इस्तेमाल से कथित गैर-कानूनी गिरफ्तारी, कस्टडी में दबाव डालने और चुने हुए प्रतिनिधियों को पाला बदलने के लिए उकसाने की कोशिशों पर चिंता जताई गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों को पाला बदलने के लिए लालच दिया गया और सरकारी कामकाज में निजी लोगों की भागीदारी पर सवाल उठाए।

‘जॉन और विष्णु अब मुख्यमंत्री के सलाहकार’ TVK ने दिया जवाब
तीन तरफ से आए इस हमले का जवाब थलपति विजय की पार्टी ने भी जोरदार तरीके से दिया। पार्टी की तरफ से कहा गया कि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। जहां तक जॉन और विष्णु रेड्डी के कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने की बात है। उन दोनों को मुख्यमंत्री का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसलिए अब वह निजी व्यक्ति नहीं रह गए बल्कि सरकारी मशीनरी का हिस्सा हैं।

धमतरी में पेट्रोलिंग वाहन देखकर भागा युवक, हार्ट अटैक से हुई मौत

धमतरी.

धमतरी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस पेट्रोलिंग वाहन को देखकर भाग रहे एक युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. बहरहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है.

मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के लालबगीचा वार्ड का है. बताया गया 27 वर्षीय योगेश जांगड़े अपने कुछ दोस्तों के साथ रात में बैठा हुआ था, इसी दौरान नियमित गश्त पर निकली पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी वहां पहुंची. पेट्रोलिंग वाहन को देखते ही वहां मौजूद युवक अचानक भागने लगा. बताया जा रहा है कि भागते समय योगेश जांगड़े की सांस फूलने लगी और उसकी हालत बिगड़ गई. युवक के दोस्तों ने इसकी सूचना परिजनों को दी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में उपचार शुरू किया गया लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत और गंभीर हो गई डॉक्टरों ने जांच के बाद योगेश जांगड़े को मृत घोषित कर दिया.

घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है. डॉक्टरों के अनुसार, युवक की मौत हार्ट अटैक के कारण हुई है. हालांकि, घटना के कई पहलुओं की जांच की जा रही है. वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर पुलिस पेट्रोलिंग वाहन को देखकर युवक और उसके साथी अचानक क्यों भागने लगे. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.

देवास से गिरफ्तार आतंकी बिलाल की जांच तेज, गुजरात ATS खंगाल रही पूरी कुंडली

देवास.

गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) द्वारा देवास (मप्र) के वारसी नगर क्षेत्र से गिरफ्तार किए गए बिलाल दुर्रानी (18) की पृष्ठभूमि और उसकी गतिविधियों को लेकर जांच जारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार बिलाल प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक माड्यूल से जुड़ा है।

अब तक की जानकारी के अनुसार, बिलाल का परिवार मूल रूप से गुजरात के पालनपुर क्षेत्र का रहने वाला है। वर्ष 1997-98 में परिवार देवास आकर बस गया था। परिवार वारसी नगर क्षेत्र में रहता है। बिलाल के चार भाई हैं। उसका एक भाई गुजरात के मदरसे से एटीएस की कार्रवाई में हिरासत में लिया गया, जिसके बाद पूछताछ के आधार पर टीम देवास पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से बिलाल को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद एटीएस उसे अपने साथ गुजरात ले गई। बताया जा रहा है कि घटना के बाद परिवार के सदस्य भी देवास से गुजरात चले गए हैं। बिलाल भी मदरसे में पढ़ा है और टाइल्स का काम भी करता था।

पिता चाहते थे मदरसे में पढ़ाए, बिलाल ने चुना दूसरा काम
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बिलाल के पिता मोहसिनपुरा स्थित एक मदरसे में पढ़ाते थे। एक बार सभी बच्चों को पास कर दिया, तो निकाल दिए गए। बाद में दवाइयां देने का काम करने लगे। परिवार चाहता था कि बिलाल भी धार्मिक शिक्षा लेकर मदरसे में पढ़ाए। इसके लिए उसकी तालीम भी कराई गई थी, लेकिन बाद में वह ठेकेदारों के साथ टाइल्स लगाने का काम करने लगा। वह अलग-अलग निर्माण स्थलों पर काम करता था और अक्सर काम के सिलसिले में गुजरात भी जाता था। पड़ोसियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, बिलाल का मोहल्ले में ज्यादा मेलजोल नहीं था। वह समय-समय पर गुजरात जाता था और कुछ दिन बाद वापस देवास लौटकर काम करने लगता था।

जांच एजेंसियां अब उसके यात्रा रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। आरोप है कि बिलाल कथित तौर पर कुछ कट्टर डिजिटल समूहों से जुड़ा था और उनमें साझा होने वाली सामग्री को आगे भेजता था। इनमें वीडियो, फोटो और संदेश शामिल बताए जा रहे हैं। यह भी जांच की जा रही है कि इन गतिविधियों में उसकी भूमिका क्या थी और क्या वह केवल सामग्री साझा करता था या किसी बड़े नेटवर्क से भी जुड़ा था। इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पेड़ों की अवैध कटाई पर बड़ा एक्शन, प्रधान पाठक निलंबित, अध्यक्ष और सचिव पर होगी FIR

बालोद.

बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़भूम परिसर में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है. स्कूल परिसर में बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के 29 हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया.

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. कलेक्टर के निर्देश पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) गुरूर ने बीते 2 जुलाई को विद्यालय का आकस्मिक और विस्तृत निरीक्षण किया, जिसमें अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की बात पूरी तरह सच और प्रमाणित पाई गई. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीईओ ने 3 जुलाई को गुरुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आवेदन दिया है. इसके साथ ही मुख्य आरोपी प्रधान पाठक के निलंबन की अनुशंसा उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है.

समिति ने बाकायदा बैठक कर पास किया था प्रस्ताव
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पेड़ों की इस अवैध कटाई की बाकायदा साजिश रची गई थी. इसके लिए 23 अप्रैल को शाला विकास समिति की एक बैठक हुई, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर पेड़ों को काटने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया. शाला विकास समिति के अध्यक्ष जीवन लाल उईके और सदस्य निर्मला उईके मुख्य तौर पर घटनाक्रम में शामिल रहे.

प्रधान पाठक की भूमिका रही मुख्य
पूरी प्रक्रिया में माध्यमिक स्तर के प्रधान पाठक और शाला विकास समिति के सचिव डोमर सिंह निषाद की मुख्य भूमिका रही, जिनकी सीधी देखरेख में सरकारी संपत्ति और पर्यावरण को यह नुकसान पहुँचाया गया. नियमानुसार पेड़ों की कटाई से पहले वन विभाग या राजस्व विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है.

कड़ी कार्रवाई की तैयारी
गुरूर बीईओ ललित चंद्राकर ने कहा कि मामले में नियमों का घोर उल्लंघन और पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग पाया गया है. थाना प्रभारी को नामजद FIR दर्ज करने के लिए पत्र दे दिया गया है. साथ ही संबंधित प्रधान पाठक डोमर सिंह निषाद एवं अन्य संलिप्त कर्मचारियों के निलंबन के लिए औपचारिक अनुशंसा उच्चाधिकारियों को भेजी गई है.

दतिया उपचुनाव: वोटिंग में बचे 24 दिन, आज BJP का शीर्ष नेतृत्व करेगा रणनीतिक मंथन

भोपाल.

दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने रविवार को भोपाल में दिग्गज नेताओं की बड़ी बैठक प्रस्तावित की है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश भी रविवार को भोपाल में रहेंगे। शिवप्रकाश भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ बैठक करेंगे।

कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता
कांग्रेस भी आपसी मतभेद भुलाकर दतिया चुनाव में जुट गई है। इसे देखते हुए भाजपा उप चुनाव में कोई कोताही नहीं बरतना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी के भोपाल जिले के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के साथ उप चुनाव की रणनीति पर मंथन करेंगे।

30 जुलाई है मतदान
बता दें कि चुनाव आयोग ने दतिया उपचुनाव की घोषणा कर दी है, यहां 30 जुलाई को मतदान है। ऐसे में चुनाव प्रचार को केवल 24 दिन शेष है। इन 24 दिनों की चुनावी रणनीति तय कर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जाएगी। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 2 जुलाई को बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई थी।

आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामले में सजा
राजेंद्र भारती को आर्थिक अनियमितता से जुड़े एक मामले में अदालत ने तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। उन्होंने इस निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी है, लेकिन अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची के आधार पर उपचुनाव कराया जाएगा।

उपचुनाव कार्यक्रम
– 6 जुलाई – अधिसूचना जारी, नामांकन प्रक्रिया शुरू
– 13 जुलाई – नामांकन की अंतिम तिथि
– 14 जुलाई – नामांकन पत्रों की जांच
– 16 जुलाई – नाम वापसी की अंतिम तिथि
– 30 जुलाई – मतदान
– 3 अगस्त – मतगणना

गौरतलब है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। अब इस सीट पर होने वाला उपचुनाव प्रदेश की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रूस की बांडेरोल मिसाइल ने यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम की बढ़ाई मुश्किलें

नई दिल्ली
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में तकनीक और हथियारों का स्तर लगातार बदल रहा है. इस कड़ी में रूस द्वारा तैनात की गई नई S8000 बांडेरोल (Banderol) क्रूज मिसाइल ने यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. यह हथियार पारंपरिक क्रूज मिसाइल और सुसाइड ड्रोन का एक घातक मिश्रण है, जिसका इस्तेमाल हाल ही में कीव पर हुए बड़े हमलों में बड़े पैमाने पर देखा गया है. सुरक्षा विशेषज्ञों और यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस मिसाइल को मार गिराना इतना कठिन क्यों है?

मशीन गन की पहुंच से बाहर
बांडेरोल मिसाइल को मार गिराने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति और इसका इंजन है. यूक्रेनी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस मिसाइल की क्रूज गति 520 से 560 किमी/घंटा है, जो अधिकतम 650 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है. यूक्रेन की सेना अक्सर मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के लिए मोबाइल फायर टीमों का उपयोग करती है, जो जमीन पर मौजूद भारी मशीन गन से हवाई टारगेट्स पर निशाना साधती हैं.

बांडेरोल की जेट इंजन की वजह से गति इतनी अधिक है कि ये मैन्युअल मशीन गन टीमें इसका पीछा करने और सटीक निशाना लगाने में पूरी तरह बेकार साबित हो रही हैं. इसे रोकने के लिए ‘गेपार्ड’ जैसी अत्यधिक एडवांस और ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों की आवश्यकता होती है, जो तेज गति से चलने वाले लक्ष्यों को ट्रैक कर सकें.  

छोटा आकार और बेजोड़ चालाकी
पारंपरिक रूसी क्रूज मिसाइलों (जैसे Kh-101 या कैलिबर) की तुलना में बांडेरोल का आकार काफी छोटा है. लगभग 5 मीटर लंबाई और 2.2 मीटर विंगस्पैन के साथ यह रडार की नजरों से आसानी से बच निकलती है. यूक्रेनी सैन्य खुफिया विभाग (HUR) की रिपोर्ट से पता चलता है कि यह मिसाइल बेहद कम जगह में मुड़ने के साथ हवा में तेजी से मैन्यूवर कर सकती है. इसकी यही चालकी इसे यूक्रेन के हवाई सुरक्षा रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देती है, क्योंकि इसके फ्लाइट पाथ का अनुमान लगाना बेहद कठिन होता है.

जैमिंग-रोधी ‘कोमेटा’ एंटीना तकनीक
हवाई सुरक्षा को भेदने के लिए इस मिसाइल में रूस की एडवांस कोमेटा (Kometa) डिजिटल सैटेलाइट नेविगेशन एंटीना प्रणाली का उपयोग किया गया है. यह तकनीक यूक्रेन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यानी जैमिंग सिस्टम को पूरी तरह से बेअसर कर देती है. जब यूक्रेन की सेना मिसाइल के जीपीएस या नेविगेशन को बाधित करने की कोशिश करती है, तो यह जैमिंग-रोधी एंटीना मिसाइल को सुरक्षित रूप से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद करता है. इस वजह से इसे बिना भौतिक रूप से नष्ट किए, केवल सिग्नल ब्लॉक करके रोकना लगभग असंभव हो जाता है.   

रूस की बेहतरीन ई-कॉमर्स वाली चालाकी
इस मिसाइल का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका निर्माण और सप्लाई चेन है. यूक्रेन के ‘वॉर एंड सैंक्शंस’ पोर्टल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद इस मिसाइल में 30 अलग-अलग विदेशी कंपनियों के 20 से अधिक मुख्य पार्ट्स और लगभग 20 माइक्रोचिप्स लगाए गए हैं.

इसमें सबसे महत्वपूर्ण है इसका इंजन- चीन का Swiwin SW800Pro जेट इंजन, जो आमतौर पर रिमोट-कंट्रोल विमानों के लिए उपयोग किया जाता है. यह ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘AliExpress’ पर मात्र $16,000 में आसानी से मौजूद है. इसके अलावा, इसमें जापान की मुराता बैटरियां, साउथ कोरिया के डायनामिक्सल सर्वो मोटर्स और अमेरिकी तथा स्विस मूल के वोल्टेज रेगुलेटर और माइक्रोकंट्रोलर्स शामिल हैं.

प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने आर्मेनिया, कजाकिस्तान, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देशों के मध्यस्थों और शेल कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया है, जिसके माध्यम से ये कलपुर्जे रूसी वितरकों तक पहुंच जाते हैं.   

बड़े हमलों में रणनीति का हिस्सा
रूस इस मिसाइल का उपयोग स्वतंत्र रूप से करने के बजाय एक सोची-समझी रणनीति के तहत कर रहा है. इसे बड़े पैमाने पर ‘शहीद’ ड्रोनों और भारी बैलिस्टिक मिसाइल के साथ मिलाकर दागा जाता है. जब सैकड़ों हथियार एक साथ यूक्रेन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो वहां की हवाई सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह व्यस्त हो जाती है. ऐसे समय में अपनी गति, छोटे आकार और चपलता के कारण बांडेरोल मिसाइलें सुरक्षा घेरे को तोड़कर नागरिक और बुनियादी ढांचों पर भारी तबाही मचाने में सफल हो जाती हैं.

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