मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 112 करोड़ से अधिक के कार्यों का करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 6 जुलाई को रायपुर जिले के समोदा में 112 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 21 करोड़ 67 लाख रुपए के 67 कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ 34 लाख रुपए लागत के 29 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन व लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वन एवं पर्यावरण तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और सांसद  बृजमोहन अग्रवाल कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आरंग क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लोक निर्माण विभाग के 9 करोड़ 43 लाख रुपए के तीन कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 79 लाख रुपए के पांच कार्यों, नगर पंचायत समोदा के 6 करोड़ 67 लाख रुपए के 20 कार्यों तथा आरंग नगर पालिका में 4 करोड़ 78 लाख रुपए के 39 कार्यों का लोकार्पण करेंगे। 

 साय लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने वाले 61 करोड़ 11 लाख रुपए लागत के 8 कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो करोड़ 54 लाख रुपए के 11 कार्यों एवं समोदा नगर पंचायत के 8 करोड़ 70 लाख रुपए के 9 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-17,  कोटरा भाठा में 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 100 बिस्तर अस्पताल का भी भूमिपूजन करेंगे।

डॉ. तीजन बाई के सम्मान में गनियारी के शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का होगा नामकरण – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

रायपुर

स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने आज विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए तथा दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने घोषणा किया कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” के नाम से किया जाएगा।
      
शिक्षा मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की।
     
मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” के नाम से किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा तथा इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।

ड्रोन और मिसाइलों के दौर में भी क्यों खत्म नहीं हुई टैंकों और थल सेना की ताकत?

नई दिल्ली
पहले रूस-यूक्रेन और फिर ईरान बनाम इजरायल-अमेरिका। पिछले कुछ सालों में दुनिया दो बड़ी जंगें देख चुकी है। हालांकि, भारत-पाकिस्तान के बीच भी इस दौरान एक छोटा युद्ध हुआ, लेकिन लंबे कालखंड में रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल की जंग ही चली। इन दोनों जंगों में दुनिया ने देखा कि कैसे आधुनिक युद्ध का मैदान पूरी तरह से बदल चुका है। पैदल सैनिकों, बंदूकों और तोप की जगह अब मिसाइल, एयरक्राफ्ट और ड्रोन ने ले ली है। तो सवाल उठता है कि क्या थल सेना और तोपों की अहमियत अब खत्म हो गई है? इसका जवाब है-नहीं।

डिफेंस एक्सपर्ट से जानें सब
दरअसल, सैन्य एक्सपर्ट्स का तर्क है कि चाहे ड्रोन हों या फाइटर जेट ये दोनों ही जंग के असली मकसद को हासिल नहीं कर सकते, यानी किसी इलाके पर कब्जा नहीं कर सकते। आइए, यूक्रेन से मिले सबक और डिफेंस एक्सपर्ट की राय के आधार पर इस बात का विश्लेषण करते हैं कि युद्ध के तरीकों में तेजी से बदलाव के बावजूद टैंक और जमीनी सेना क्यों अब भी बेहद जरूरी हैं।

टैंक अब भी जरूरी क्यों?
जब 500 डॉलर का ड्रोन और 30,000 डॉलर की एंटी-टैंक मिसाइल करोड़ों की कीमत वाले टैंक को तबाह कर सकती है तो यह सवाल पूछा जा सकता है कि टैंकों पर निवेश क्यों करना चाहिए? ये सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया पर यूक्रेन की सड़कों पर जलते हुए टैंकों के वीडियो भरे पड़े हैं। इससे लोगों को लगने लगा है कि टैंक अब बेकार हो चुके हैं। लेकिन कई सेनाएं बख्तरबंद युद्ध (आर्मर्ड वॉरफेयर) को छोड़ नहीं रही हैं। असल में कुछ सेनाएं तो इस पर और ज्यादा जोर दे रही हैं।

टैंक में आज भी ये खूबियां
वर्तमान स्थिति में टैंकों को छोड़ना नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल के तरीके पर फिर से सोचना ही समझदारी का काम है। दरअसल, टैंकों में आज भी ऐसी खूबियां हैं जिनका मुकाबला शायद ही कोई और हथियार कर सके। इसमें तेजी से चलने की क्षमता (मोबिलिटी), सुरक्षा और जबरदस्त मारक क्षमता (फायरपावर) एक अनोखा मेल है।

टैंक की खासियत
    ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चल सकते हैं
    ऐसे हमले झेल सकते हैं, जिनसे गाड़ियां तबाह हो जाएं
    मजबूत ठिकानों पर जबरदस्त हमला कर सकते हैं
    टैंक कॉम्बिनेशन ‘शॉक इफेक्ट’ पैदा करता है

घुटने टेकने पर करते हैं मजबूर
टैंकों से एक ऐसा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक फायदा मिलता है, जो बिना तैयारी वाले बचाव करने वालों को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है। आधुनिक युद्ध अब सिर्फ टैंकों के अकेले काम करने तक सीमित नहीं है। आज के जमाने में अलग-अलग तरह की सेनाओं को एक साथ मिलाकर काम करना ही सबसे बेहतर माना जाता है। ‘कंबाइंड आर्म्स ऑपरेशन्स’ में टैंक पैदल सेना (इन्फैंट्री), UAV, इंजीनियर और आर्टिलरी के साथ मिलकर बहुत अच्छी तरह से तालमेल बिठाकर हमले करते हैं।

टैंकों को बचाती है पैदल सेना
हमने हाल ही में देखा है कि गाजा या दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना शायद ही कभी पैदल सेना की सुरक्षा और लगातार ड्रोन की निगरानी के बिना मर्कावा टैंक तैनात करती है। पैदल सेना टैंकों को RPG जैसे करीबी खतरों से बचाती है, ड्रोन आगे जाकर जानकारी जुटाते हैं और आर्टिलरी दुश्मन के मजबूत ठिकानों को दबाती है। जब यह तालमेल सही तरीके से किया जाता है तो अकेले काम करने पर टैंकों को जिन खतरों का सामना करना पड़ता है, वे काफी कम हो जाते हैं।

 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र, पंचक्की से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह को ‘सहकार प्रेरणा सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम में प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की के अनंत स्व-सहायता समूह को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सहकार प्रेरणा पुरस्कार एवं लाभांश राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह समूह वन विभाग के अंतर्गत संचालित वन धन विकास केंद्र से जुड़ा है।

अनंत स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं सामूहिक रूप से च्यवनप्राश सहित विभिन्न औषधीय उत्पादों का निर्माण करती हैं। समूह द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति आयुष विभाग सहित अन्य संस्थानों एवं उपभोक्ताओं को की जाती है। वर्ष 2024-25 के दौरान समूह ने लगभग 36 लाख रुपये के उत्पादों का विक्रय कर महिला स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय ने देश में श्सहकार से समृद्धिश् के लक्ष्य को नई गति दी है। राज्य सरकार सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूती प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इसके लिए अब तक 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक सुमन बिल्ला का रायपुर एयरपोर्ट पर हुआ आत्मीय स्वागत

रायपुर

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन सुमन बिल्ला के रायपुर आगमन पर छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने रायपुर विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया। बिल्ला भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में पर्यटन विषय के प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुए।

इस अवसर पर सुमन बिल्ला, डॉ. एस. भारती दासन एवं विवेक आचार्य के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि छत्तीसगढ़ में पारिस्थितिकी पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, पुरातात्विक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, जनजातीय पर्यटन तथा ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का योजनाबद्ध विकास कर राज्य में रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की जा सकती है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन विकास का ऐसा मॉडल विकसित करने पर भी सहमति बनी, जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

बैठक में पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल प्रचार-प्रसार, गृह-आवास (होम-स्टे) व्यवस्था को बढ़ावा देने, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने तथा जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार और राज्य की सशक्त पहचान स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

पर्यटन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ राज्य को दिलाने, पर्यटन स्थलों के समग्र विकास तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।

उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में सुमन बिल्ला ने “सतत समृद्धि के आधार के रूप में पर्यटन : छत्तीसगढ़ में आजीविका सृजन, संस्कृति का संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। इसके पश्चात उन्होंने “आगे की राह – विचार मंथन” विषय पर आयोजित संवादात्मक सत्र का संचालन भी किया। इन सत्रों में पर्यटन को सुशासन, सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका से जोड़ने के व्यावहारिक मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई।

श्री सुमन बिल्ला के सुझावों तथा केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का पर्यटन क्षेत्र नई दिशा प्राप्त करेगा। इससे राज्य की जैव विविधता, ऐतिहासिक धरोहर, जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

पुरुषों के बीच कपालिक शैली में गाकर बनीं पहचान, ऐसे मिली तीजन बाई को विश्वभर में प्रसिद्धि

दुर्ग.

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव के साधारण परिवार में 8 अगस्त 1956 को तीजन बाई का जन्म हुआ। उन्होंने बचपन में नाना बृजलाल पारधी से महाभारत की कथाएं सुनकर पंडवानी सीखनी शुरू की। हालांकि, फिर उमेद सिंह देशमुख से उन्होंने विधिवत प्रशिक्षण लिया।

स्वभाव के विपरीत उन्हें शांत बैठकर पारंपरिक वेदमती शैली में गाना पसंद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाली खड़े होकर गाने वाली कपालिक शैली को चुना। पद्म विभूषण तीजन बाई कपालिक शैली में गाने वाली पहली महिला पंडवानी गायिका थीं। 7 दशक पहले तक यह शैली एक तरह से लगभग पुरुषों के वर्चस्व वाली थी या यूं कहें कि महिलाओं के लिए वर्जित मानी जाती थी।

13 वर्ष की उम्र में पहले कार्यक्रम के मिले थे 10 रुपए
महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुर्ग जिले के चंद्रखुरी गांव में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम किया, जिसके लिए उन्हें 10 रुपए पारिश्रमिक मिला था। लोगों के ताने और विरोध के बीच कपालिक शैली में अपने हाव-भाव और अभिनय से अपनी एक अलग पहचान बनाई।

भारत एक खोज में महाभारत के अंशों की दी थी प्रस्तुति
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने भारत एक खोज में महाभारत से जुड़े अंशों की प्रस्तुति दी थी। उनका अधिकांश गायन मंचीय प्रस्तुतियों और महाभारत के प्रसंगों पर आधारित रहा है। हालांकि, भारत सरकार, संगीत नाटक अकादमी या तीजन बाई ने कभी कार्यक्रमों की संख्या सार्वजनिक नहीं की।

इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देशों में पहुंचाई कला
1980 के दशक से उन्होंने भारत के लगभग सभी राज्यों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। साथ ही, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ट्यूनीशिया, साइप्रस, रोमानिया, मॉरीशस समेत अनेक देशों में कार्यक्रम किए। हालांकि, उनके आखिरी विदेश या देश के कार्यक्रम की अधिकृत जानकारी नहीं है।

छत्तीसगढ़ का पंडवानी लोकगायन क्या है?
महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी शैली असल में सिर्फ छत्तीसगढ़ राज्य का पारंपरिक लोकगायन ही नहीं, बल्कि कथावाचन, लोकनाट्य और अभिनय का भी मिश्रण है। जिसे संवाद, हाव-भाव और संगीत के जरिए प्रस्तुत किया जाता है। 

पांडवों की कथा में गायन
पंडवानी का शाब्दिक अर्थ पांडवों की वाणी या पांडवों की कथा है। इसमें कलाकार भीम, अर्जुन, द्रौपदी, कर्ण और अन्य पात्रों के प्रसंगों का मंचन करता है। मुख्य कलाकार के हाथ में एकतारा और तंबूरा होता है। कुछ कलाकार भीम की गदा, अर्जुन के धनुष और कभी अन्य प्रतीकों के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।

पंडवानी लोकगायन की वेदमती और कपालिक दो शैलियां
पंडवानी की दो प्रमुख शैलियां हैं। जिसमें कलाकार वेदमती शैली बैठकर शांत ढंग से कथा गाकर सुनाता है। जबकि कपालिक शैली में कलाकार खड़े होकर अभिनय, संवाद, हाव-भाव और नाटकीय अंदाज में प्रस्तुति देता है। यह अधिक ऊर्जावान और प्रभावशाली शैली माती जाती है। 

ऋतु वर्मा, उषा बारले और शांतिबाई आगे बढ़ा रहीं कला
तीजन बाई ने परंपरा को तोड़ा। जिसके बाद कई अन्य महिला कलाकारों ने पंडवानी की कपालिक शैली को आगे बढ़ाया। इनमें मुख्य रूप से ऋतु वर्मा, उषा बारले और शांतिबाई चेलक शामिल हैं, जो लोककला का सफलतापूर्वक मंचन कर रही हैं।

यह प्रमुख पुरस्कार और सम्मान

  • पद्म श्री 1988 में मिला।
  • संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1995
  • मानद डी लिट 2003
  • पद्म भूषण 2003
  • एम.एस. सुब्बुलच्मी शताब्दी पुरस्कार 2016
  • फुकुओका पुरस्कार जापान 2018
  • पद्म विभूषण 2019
  • अकादमी रत्न संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप 2023

इनके अलावा कई राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।

सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित सहकारी सप्ताह समारोह

भोपाल 

सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में महिलाओं की सोसायटी बनाकर अग्रणी राज्य बनेगा। इस नवाचार की शुरूआत अगले माह से की जायेगी। मंत्री सारंग रविवार को अपेक्स बैंक में आयोजित “सहकारी सप्‍ताह” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश जल्द ही बीज के मामले में भी लीड करेगा। इसके पहले कम्प्यूटराइजेशन के साथ पिछले साल ऑनलाइन ऑडिट में भी मध्यप्रदेश का सहकारिता विभाग आगे रहा। यही नहीं मध्यप्रदेश ऑनलाइन केसीसी देने वाला पहला राज्य भी बना है।

समाज के निचले वर्गों को आत्म-निर्भर बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका

सहकारिता मंत्रालय भारत सरकार की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारी सप्ताह समारोह में मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता में अधिकारी-कर्मचारी समाज के उन्नयन के लिये योगदान दे रहे हैं। साथ ही अलग-अलग आयामों पर काम किया जा रहा है। युवा, महिला, किसान सहित हर वर्ग के कल्याण पर ध्यान दिया जा रहा है। रोजगार की दिशा में समाज के निचले वर्गों को आत्म-निर्भर बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

राष्ट्र के उन्नयन में राज्य का समावेश होना जरूरी

मंत्री सारंग ने कहा कि राष्ट्र के उन्नयन में राज्य का समावेश होना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश सहकारिता की दिशा में नित नये आयाम गढ़ रहा है। किसान, जवान, विज्ञान और अनुसंधान के जरिये सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी जा रही है। कॉर्पोरेट और को-ऑपरेटिव को जोड़कर नई अवधारणा बनाई जा रही है।

पुरस्कृत होना अन्य लोगों के लिये करता है प्रेरणा-स्रोत का कार्य

मंत्री सारंग ने कहा कि कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी का ठीक ढंग से निर्वहन किया। यह लोग दूसरों के लिये प्रेरणा-स्रोत बने हैं। इससे जिन्हें पुरस्कार नहीं मिले हैं वे लोग भी अच्छा कार्य कर सम्मानित हो सकेंगे और अपनी नई पहचान बना सकेंगे।

सहकारिता सप्ताह के दौरान जिलों में भी हुए उत्साहवर्धक कार्य

अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि सहकारिता सप्ताह के दौरान जिलों में भी उत्साह के साथ कार्यक्रम हुए। इस दौरान अधिक से अधिक पौध-रोपण भी किया गया। अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन दिया। अंत में सहकारी संघ के प्रबंध संचालक ऋतुराज रंजन ने आभार माना।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति और संस्था हुईं पुरस्कृत

अमानत संग्रहण लक्ष्य के विरुद्ध पूर्ति में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक विदिशा को 21 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। इसी में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दतिया को 15 हजार रुपये और तृतीय स्थान प्राप्त करने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दतिया को 11 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। पैक्स सदस्यता महाभियान में सर्वप्रथम लक्ष्य प्राप्ति के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक झाबुआ को सम्मानित किया गया।

इसी प्रकार अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह में विभिन्न प्रतियोगिताएँ हुईं। जरी-जरदोजी क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम यासमीन खान, द्वितीय गुड़िया और तृतीय आशिया खान रहीं। जूट क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम धीरू पटेल, द्वितीय संगीता यदुवंशी और तृतीय पूजावास्तव रहीं। कढ़ाई क्रॉफ्ट प्रतियोगिता में प्रथम दामिनी सोलंकी, द्वितीय सोनल महोबे और तृतीय रागिनी वर्मा नहीं। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में कृष कुमार साहू, दीपक कुमार सोनी और तृप्ति कुशवाहा अव्वल रहीं। निबंध प्रतियोगिता में सृष्टि जैन, वेदिका दीक्षित, टीना कारा क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी में प्रथम स्थान पर सोलर पॉवर विस्तार सहकारी संस्था खरगोन, दूसरे स्थान पर प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति रेहटी, सीहोर और तृतीय स्थान पर सुविधा साख सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल रहीं। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी में विशिष्ट प्रस्तुतिकरण के लिये मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ सहकारी मर्यादित भोपाल और मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक संघ भोपाल को पुरस्कृत किया गया।

 

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर व्यक्त किया शोक

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि तीजन बाई का निधन लोककला एवं सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी विलक्षण प्रतिभा, कठोर साधना और समर्पण के माध्यम से उन्होंने पंडवानी गायन को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका योगदान भारतीय लोक-संस्कृति और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सदैव समृद्ध करता रहेगा।

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। 

दुश्मन पर कहर बरपाएंगी शिवपुरी में बनीं मिसाइलें, 5 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, जानें कैसे?

भोपाल/शिवपुरी

मध्यप्रदेश के लिए 5 जुलाई का दिन ऐतिहासिक रहा। अब मध्यप्रदेश देश की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा। यहां से बनीं मिसाइलें दुश्मनों के घरों में घुसकर उन्हें ढेर करेंगीं। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिवपुरी जिले में 2,500 करोड़ की लागत के अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास किया। उनके साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, अदाणी ग्रुप के युवा नेतृत्व करण अदाणी, जीत अदाणी भी मौजूद थे। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने 211 करोड़ की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किया।  

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज यहां अद्भुत समागम हो रहा है। यहां एक साथ स्नेहा का लेपन और प्रेम का वातारवरण उमड़ पड़ा है। चंबल की ये धरा कई सौ साल से अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रही है। यहां के बांके लड़ाके, सेना के जवान, अफसर, यहां के नागरिक अपनी जान की बाजी लगाकर सीमा पर देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि चंबल ने जब-जब भी कदम बढ़ाया, तब-तब देशभक्ति का नया गीत गाया है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आज नया इतिहास लिखा गया है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने मथुरा में कंस को मारने के बाद मध्यप्रदेश में शिक्षा ग्रहण की। लेकिन, जब तक वे गुजरात जाकर द्वारिकाधीश नहीं हुए, तब तक आनंद नहीं आया। चाहे महात्मा गांधी का समय हो, सरदार वल्लभ भाई पटेल का समय हो, या नरेंद्र मोदी-अमित शाह का समय हो, गुजरात जो करता है सबसे अलग करता है। उन्होंने कहा कि आज शिवपुरी से डिफेंस का नया अध्याय शुरू हो रहा है। यहां से जो मिसाइल बनेगी, वो लंबी दूरी तय करके दुश्मन के देश में गिरेगी और भारत का मान-सम्मान बढ़ाएगी। आज हमारा ये सपना भी साकार हो रहा है। 

हर क्षेत्र में हो रहा विकास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। अब यहां रोजगार का नया मौका मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से करीब 5 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। आज माधव नेशनल पार्क पर्यटन का नया केंद्र बना है। कुछ दिनों पहले गुना में सीमेंट फैक्ट्री का उद्घाटन हुआ। इस तरह यह पूरा ग्वालियर-गुना क्षेत्र बदलने वाला है। आज मध्यप्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वर्णिम भविष्य लिखा गया है। उन्होंने कहा कि सुदामा-कृष्ण की जोड़ी हमारे लिए सबक है। अगर संकट के समय दोस्त आपके पास आए तो आप उसे नहीं भूलना। मित्रता के समय भाव बराबर होना चाहिए, पैसा तो आता-जाता रहेगा। भगवान कृष्ण ने सुदामा को अपने पास 8 महीने रखा, जाते वक्त कुछ हाथ में नहीं दिया। सुदामा की आंखें नीची न हों, इसके लिए पीठ पीछे उनका महल बनवा दिया। उन्होंने कहा कि हम दोनों के गुरु के नाम पर प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय बनवा रहे हैं। हमारा सांदीपनि विद्यालय देश का सबसे अच्छा स्कूल है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कीं ये घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में तो स्कूल में बैठने के लिए टाट-पट्टी नहीं मिलती थी। आज हालत यह है कि लोग प्राइवेट स्कूल छोड़कर सांदीपनि स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं। शिवपुरी को पर्यटन का केंद्र बनाएंगे। शिवपुरी को नेशनल हाईवे से जोड़ने के लिए 120 करोड़ की लागत से 14 किमी की फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी यूनिट की स्थापना की जाएगी। खोड में कला-वाणिज्य-विज्ञान का नया कॉलेज स्थापित किया जाएगा। शिवपुरी में नवीन तहसील सुभाषपुरा बनाई जाएगी। पिछोर में एक नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया जाएगा। करेगा-भितरवार रोड से समोहा डैम तक नई सड़क बनाई जाएगी। खनियाधाना कृषि उपज मंडी की स्थापना की जाएगी। ग्राम पंचायत खतौरा में सांदीपनि विद्यालय की स्थापना की जाएगी। शिवपुरी में 200 बिस्तरों का मातृ-शिशु अस्पताल स्थापित किया जाएगा।

लिखी जा रही नई इबारत

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि आज नए इतिहास की इबारत लिखी जा रही है। भगवान शिव संकल्प-शक्ति और विजय के देव हैं। इसलिए भगवान शिव की शिवपुरी में आधार शिला रखी जा रही है। एक नया इतिहास एक नया सवेरा राष्ट्र निर्माण का, एक इतिहास एक नया सवेरा राष्ट्र सेवा का हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत बन रहा है। उनके नेतृत्व में भारत का मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि संकट के समय विश्व की भारत की ओर आशा से देखता है। विकसित भारत-2047 मां भारती का लक्ष्य बन चुका है। शिवपुरी नया सितारा बन कर चमकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों का विश्वास जीता है। अदाणी समूह के युवा नेतृत्व जीत अदाणी ने कहा कि आज खास दिन है। यहां मिशन रेडी मिसाइल बनाई जाएंगी। मध्यप्रदेश सबसे तेजी से विकास कर रहा है। डॉ. मोहन यादव की मेहनत का परिणाम है कि यह राज्य प्रगति के पथ पर अग्रसर है। अदाणी समूह राज्य के कई जिलों में निवेश कर रहा है। यह निवेश केवल किसी योजना में नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की जनता और उसके भविष्य में निवेश है। शिवपुरी में इस योजना से 5 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

पीएम मोदी पर टिप्पणी कर घिरे ख्वाजा आसिफ, भारत ने दिया करारा जवाब

नई दिल्ली
सेशेल्स के नए राष्ट्रपति सम्मान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करना पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को भारी पड़ गया है। भारत सरकार ने उनके इस बयान पर बेहद तीखा और कड़ा पलटवार किया है। सरकारी सूत्रों ने ख्वाजा आसिफ की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके पास कोई काम धंधा नहीं है और वे उन मामलों पर बचकाने कमेंट करके अपना वक्त काट रहे हैं, जिनकी उन्हें रत्ती भर भी समझ नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री को आड़े हाथों लिया। सूत्रों ने तंज कसते हुए कहा कि ख्वाजा आसिफ को रक्षा मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलना ही आज के पाकिस्तान के बदतर हालात को बयां करता है।

भारत सरकार के सूत्रों ने कहा, “यह हर कोई जानता है कि ख्वाजा आसिफ मानसिक रूप से अस्थिर हैं। उन्हें मौजूदा जिम्मेदारी सौंपा जाना आज के पाकिस्तान के बारे में बहुत कुछ बताता है। साफ है कि उनके पास दिन भर करने के लिए कोई काम नहीं है। वे उन चीजों पर फालतू की टिप्पणी करके समय बर्बाद करते हैं, जिनका उन्हें कोई ज्ञान नहीं है। नफरत से भरे किसी व्यक्ति के भीतर से जब ईर्ष्या (जलन) बाहर आती है, तो वह बहुत ही घटिया लगती है।”

यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब आसिफ ने पीएम मोदी को मिले सेशेल्स के सम्मान का मजाक उड़ाया था और इसे ‘पहले से सेटिंग करके’ तैयार किया गया सम्मान बताया था।

पीएम मोदी को मिला है सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान
दरअसल, पिछले हफ्ते सेशेल्स के दौरे पर गए पीएम मोदी को वहां के नए राष्ट्रपति सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से नवाजा गया था। पर्यावरण संरक्षण और छोटे द्वीपीय देशों के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।

पीएम मोदी इस पुरस्कार को पाने वाले दुनिया के पहले नेता बने हैं। दिलचस्प बात यह है कि सेशेल्स सरकार ने पीएम मोदी के दौरे से कुछ हफ्ते पहले ही अपनी पुरानी पुरस्कार प्रणाली को बदलकर इस नए राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत की थी।

अवॉर्ड पर क्यों हुआ विवाद?
इस अवॉर्ड को लेकर भारत के भीतर भी सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया पर इस अवॉर्ड के ऑफिशियल साइटेशन (प्रशस्ति पत्र) की एक तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया था कि इसमें स्पेलिंग और टाइपिंग की कई गलतियां हैं। विपक्ष का यह भी आरोप था कि इस सर्टिफिकेट को AI टूल्स की मदद से जल्दबाजी में तैयार किया गया है।

विवाद बढ़ता देख सेशेल्स सरकार ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान पूरी तरह असली और प्रामाणिक है। उन्होंने बताया कि देश में पुराना अवॉर्ड सिस्टम राजनीतिक विवादों के कारण रद्द कर दिया गया था और नया सिस्टम बनाया जा रहा था। इस नए सम्मान को वहां की कैबिनेट ने 24 जून को ही मंजूरी दी थी, यानी पीएम मोदी के पहुंचने से महज कुछ दिन पहले।

गलतियों के मुद्दे पर सेशेल्स ने माना कि जो तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वह दरअसल एक ‘वर्किंग ड्राफ्ट’ थी जो गलती से बाहर आ गई। अब असली और पूरी तरह जांचा हुआ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। समय की कमी के कारण इस सर्टिफिकेट को बनाने में डिजिटल डिजाइन टूल्स (AI) की मदद ली गई थी।

इस बीच, सत्ताधारी भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पीएम मोदी को उनकी ‘ग्रीन लीडरशिप’ के लिए यह सम्मान मिलना पूरे देश के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है।

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