हासमुंद में उफनते नाले में फंसे 14 मजदूरों का सेना ने किया सफल रेस्क्यू

महासमुंद

जिले में देर रात से जारी मूसलाधार बारिश का असर अब जनजीवन पर दिखाई देने लगा है। खल्लारी थाना क्षेत्र के ग्राम जोगीडीपा में बगनाई नाला उफान पर आने से पुल निर्माण कार्य में लगे 14 मजदूर चारों ओर से पानी में घिर गए। जलस्तर अचानक बढ़ने से मजदूरों का बाहरी संपर्क पूरी तरह टूट गया और वे घंटों तक खेत में बनी अस्थायी झोपड़ी में फंसे रहे। सूचना मिलने पर नगर सेना की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय पर किए गए इस अभियान से बड़ा हादसा टल गया।
लगातार बारिश से बढ़ा जलस्तर

जानकारी के अनुसार, जोगीडीपा गांव में बगनाई नाला पर पुल निर्माण का कार्य चल रहा है। निर्माण एजेंसी के 14 मजदूर कार्यस्थल के पास खेत में बनी अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे। शनिवार रात से लगातार हो रही बारिश के कारण बगनाई नाला तेजी से उफान पर आ गया। देखते ही देखते झोपड़ी के चारों ओर पानी भर गया और तेज बहाव के कारण मजदूर वहां से बाहर नहीं निकल सके।

डायल 112 की सूचना पर शुरू हुआ रेस्क्यू

बताया गया कि प्रशासन ने बाढ़ आपदा नियंत्रण के लिए जिला और तहसील स्तर पर टीमों का गठन कर संपर्क नंबर जारी किए थे, लेकिन सार्वजनिक किया गया केंद्रीय संपर्क नंबर बंद मिला। वहीं, तहसील स्तर पर जिन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, वे रात के समय मौजूद नहीं थे। ऐसे में फंसे मजदूरों ने अपने ठेकेदार से संपर्क किया। ठेकेदार ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद नगर सेना की टीम बिना देर किए घटनास्थल के लिए रवाना हुई।
रस्सियों और सुरक्षा उपकरणों से बचाए गए मजदूर

नगर सेना की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा उपकरणों और रस्सियों की मदद से एक-एक कर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला। पूरे अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरती गई, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में 10 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। राहत की बात यह रही कि किसी भी मजदूर को गंभीर चोट नहीं आई।
प्रशासन ने जारी की सतर्कता की अपील

लगातार हो रही बारिश के कारण जिले के कई नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में जोखिम नहीं लेने की अपील की है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तत्काल स्थानीय प्रशासन या पुलिस को देने को कहा गया है।

सभी विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश

प्रशासन ने संबंधित विभागों को लगातार सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बारिश के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित हादसे को समय रहते टाला जा सके।

 

आईएफसी नर्सरी बनी किसानों की उम्मीद

रायपुर

गुणवत्तापूर्ण पौधों से बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरता

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत जनपद पंचायत धमतरी द्वारा संचालित आईएफसी परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित आजीविका सेवा केंद्र (नर्सरी इकाई) आज किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों का विश्वसनीय स्रोत बन चुकी है। इस पहल ने न केवल किसानों को समय पर स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराए हैं, बल्कि वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दी है।

पहले किसानों को सब्जी एवं फलदार पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर पौधे उपलब्ध नहीं होने या निम्न गुणवत्ता के कारण उत्पादन प्रभावित होता था। आईएफसी नर्सरी की स्थापना के बाद यह स्थिति बदली है। अब स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं।

नर्सरी इकाई में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मूनगा (सहजन), पपीता, कटहल, नारियल सहित विभिन्न सब्जी एवं फलदार पौधों की उन्नत पौध तैयार की जा रही है। इन पौधों का वितरण उत्पादक समूहों एवं क्लस्टरों के माध्यम से विभिन्न ग्रामों के किसानों तक किया जाता है। इससे क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिला है और किसानों ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना शुरू किया है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि नर्सरी का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, नियमित आय और उद्यमिता का अवसर प्राप्त हुआ है। समूह की महिलाएं पौध उत्पादन, देखरेख, विपणन और प्रबंधन जैसे कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

वर्तमान चरण में नर्सरी इकाई द्वारा 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण किया गया है, जिससे ₹1,15,150 की आय अर्जित हुई। यह उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन, उत्पादक समूहों, आईएफसी एंकर तथा क्लस्टर टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

इस पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ जैविक खेती, पोषण वाटिका, फसल विविधीकरण तथा वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित तकनीकों को भी बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर गुणवत्ता के पौधों के कारण फसलों की वृद्धि, उत्पादन एवं आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।

यह उल्लेखनीय पहल कलेक्टर  अबिनाश  मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गजेंद्र सिंह ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक (आजीविका)  अनुराग मिश्रा, जनपद पंचायत धमतरी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सु वर्षा रानी चिकन्जूरी तथा ब्लॉक परियोजना प्रबंधक  प्रेमचंद सिन्हा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।

  आईएफसी नर्सरी इकाई यह सिद्ध कर रही है कि यदि महिलाओं की सहभागिता, आधुनिक कृषि तकनीक और संस्थागत सहयोग का प्रभावी समन्वय हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। धमतरी की यह पहल आज अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है और ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।

चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री

रायपुर

 विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

दूसरे दिन आयोजित ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ  सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर लोकसभा सदस्य  शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ‘अमृत प्रयास’, ‘बनयान रिवोल्यूशन’ और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा।

समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता है कि विचार अब धरातल पर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि समृद्धि तथा विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा तथा नैतिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है।

‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़’ विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल समावेशन, नवाचार, रोजगार सृजन और सेवा वितरण में छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का भी उल्लेख किया।

‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। 

चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया।

दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।

पदोन्नति की तैयारी तेज, डीपीसी के बाद जारी होंगे प्रमोशन आदेश

भोपाल

 राज्य शासन से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश मिलने के बाद निगम प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए विभिन्न विभागों से पात्र कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जा रही है और सूची तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि शासन ने 31 जुलाई तक प्रक्रिया पूरी करने का समय दिया है, लेकिन प्रयास है कि निर्धारित समय-सीमा से पहले ही आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए।
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश

हाल ही में यह स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश में पदोन्नति पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों, विभागाध्यक्षों और अन्य कार्यालयों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विधानसभा सचिवालय ने दो जुलाई को 12 अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति के आदेश भी जारी कर दिए।

डीपीसी की तैयारी

वहीं, भोपाल नगर निगम में फिलहाल विभागवार पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिसके बाद विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
  
शासन के निर्देशों के अनुसार सभी पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार पदोन्नति दी जाएगी। अलग-अलग विभागों से जानकारी एकत्र कर सूची तैयार की जा रही है। शासन ने 31 जुलाई तक का समय निर्धारित किया है और इस समय-सीमा के भीतर ही पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।- वरुण अवस्थी, अपर आयुक्त, नगर निगम

 

MP Weather: मध्य प्रदेश में फिर बारिश का अलर्ट, 6 जिलों में ऑरेंज और भोपाल समेत 43 जिलों में येलो अलर्ट

भोपाल 

प्रदेश में मानसून की जोरदार वर्षा हो रही है। रविवार को राजधानी भोपाल सहित अधिकांश जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की वर्षा हुई। शाम करीब साढ़े चार बजे राजधानी भोपाल में अचानक घने काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसे हालात बन गए। दृश्यता कम होने के कारण वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर आवाजाही करना पड़ा। यही हाल सीहोर और ग्वालियर का रहा, जहां घने काले बादलों की वजह से अंधेरा छा गया। उसके बाद झमाझम वर्षा हुई।

छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट, भोपाल समेत 43 में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने प्रदेश के बैतूल, अलीराजपुर, देवास, अनूपपुर, दमोह और सागर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं विदिशा, रायसेन, भोपाल समेत 43 जिलों को येलो अलर्ट में रखा है। केंद्र के अनुसार प्रदेश में अगले पांच दिनों तक मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं है।

छिंदवाड़ा में ढाई इंच (67 मिलीमीटर) बरसात हुई। हरदा में झमाझम वर्षा के कारण फसलें बह गईं और विदिशागुना में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ। पांढुर्णा जिले के सीतापार के पगड़ी गांव में बिजली गिरने से 48 वर्षीय सुलोचना तड़ाम की मौत हो गई।

मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के पूर्वी इलाके अभी तप रहे हैं। वहां का अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री से लेकर 39.0 डिग्री तक रिकॉर्ड किए गए। वहीं पश्चिमी इलाकों में लगातार वर्षा की वजह से रविवार को दिन के तापमान में 4.7 डिग्री तक गिरावट हुई। यहां पारा 27.0 डिग्री से लेकर 36.2 डिग्री तक रहे। केंद्र के अनुसार अगले पांच दिनों तक मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना जताई गई है।

हरदा में बाढ़ से किसानों की मेहनत पर पानी

हरदा जिले में एक दिन पहले हुई भारी वर्षा के बाद नदीनाले उफान पर गए। इससे खेतों में बोई गई मक्का, सोयाबीन और उड़द की अंकुरित फसलें मिट्टी सहित बह गईं। किसानों का कहना है कि कई खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है, जिससे दोबारा बोवनी की चिंता बढ़ गई है।

विदिशा और गुना में जलभराव की परेशानी

विदिशा की सौराई स्थित राजीव आवास कॉलोनी में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद वर्षा के समय जलभराव और कीचड़ की समस्या बनी हुई है। यहां नाले पर बनी पुलिया नीची होने से वर्षा के बाद रास्ता बंद हो जाता है और करीब 300 परिवारों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

गुना के वार्डदो के रहवासी भी चिंतित हैं। दरअसल नदी की सफाई का वादा किया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है। वर्षा शुरू होने के बाद लोगों को फिर बाढ़ का खतरा सताने लगा है।

शाम साढ़े पांच बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा (फैक्ट फाइल)

शहर

मिलीमीटर

छिंदवाड़ा

67.0

सिवनी

22.0

श्योपुर

20.0

उज्जैन

19.0

टीकमगढ़

15.0

ग्वालियर

10.0

मंडला

8.0

रीवा

7.0

सागर

6.0

गुना

5.0

सीधी

5.0

जबलपुर

3.0

बालाघाट जिले के मलाजखंड

3.0

नरसिंहपुर

2.0

इंदौर

1.0

राजगढ़

1.0

दतिया

0.8

प्रदेश के चार बड़े शहरों के तापमान

शहर

अधिकतम तापमान

न्यूनतम तापमान

भोपाल

32.2

25.4

इंदौर

30.9

22.8

ग्वालियर

37.7

28.3

जबलपुर

34.0

24.4

(नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है)

 

मध्यप्रदेश में बैंकों का पैसा कहां पहुंच रहा, कहां नहीं, क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात की बड़ी खाई

विवेक झा, भोपाल। मध्यप्रदेश में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार लगातार हो रहा है, लेकिन बैंकों द्वारा जमा राशि के मुकाबले ऋण वितरण (क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो) में जिलों के बीच भारी असमानता सामने आई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की मार्च 2026 तक की रिपोर्ट बताती है कि जहां आगर-मालवा जिले में प्रत्येक 100 रुपए की जमा राशि पर करीब 229 रुपए का ऋण दिया जा रहा है, वहीं सिंगरौली में 100 रुपए की जमा पर केवल 12.72 रुपए का कर्ज वितरित हो रहा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि प्रदेश का औसत क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो 83.20 प्रतिशत है, लेकिन कई जिले इससे काफी ऊपर और कई बहुत नीचे हैं।

क्या होता है CD रेशियो और क्यों है महत्वपूर्ण

क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो यह बताता है कि बैंक जमा की गई राशि का कितना हिस्सा ऋण के रूप में बाजार में वापस दे रहे हैं। यदि किसी जिले में यह अनुपात अधिक है तो इसका अर्थ है कि वहां उद्योग, व्यापार, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बैंक अधिक निवेश कर रहे हैं। वहीं कम CD रेशियो यह संकेत देता है कि जिले से जमा तो हो रही है, लेकिन उसी अनुपात में ऋण नहीं दिया जा रहा। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और निवेश की गति प्रभावित होती है।

आगर-मालवा बना प्रदेश का नंबर-1 जिला

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक CD रेशियो आगर-मालवा का 228.50 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके बाद शाजापुर (184.49%), राजगढ़ (170.21%), रायसेन (144.08%), हरदा (141.69%), रतलाम (135.23%), देवास (135.05%), सीहोर (129.60%) और इंदौर (102.43%) प्रमुख जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में बैंक जमा राशि से कहीं अधिक ऋण वितरित कर रहे हैं, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर क्रेडिट मांग का संकेत है। कुल 24 जिलों का CD रेशियो 100 प्रतिशत से अधिक है।

सिंगरौली सबसे पीछे, छह जिले 40 प्रतिशत से भी नीचे

प्रदेश के छह जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। सिंगरौली का CD रेशियो केवल 12.72 प्रतिशत है, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है। इसके अलावा मऊगंज (24.33%), अनूपपुर (32.51%), निवाड़ी (32.84%), उमरिया (34.58%) और सीधी (39.50%) भी 40 प्रतिशत से नीचे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जिलों में जमा राशि की तुलना में ऋण वितरण बेहद कम है, इसलिए यहां बैंकिंग हस्तक्षेप और वित्तीय समावेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

भोपाल-जबलपुर जैसे बड़े शहर भी 100% से नीचे

राजधानी भोपाल का CD रेशियो 74.52 प्रतिशत है, जबकि ग्वालियर 69.29 प्रतिशत, जबलपुर 67.62 प्रतिशत, छिंदवाड़ा 80.89 प्रतिशत, बुरहानपुर 87.81 प्रतिशत, मुरैना 87.23 प्रतिशत, सिवनी 83.50 प्रतिशत और सागर 64.23 प्रतिशत के साथ मध्यम श्रेणी में हैं। इन जिलों में बैंकिंग गतिविधियां संतुलित हैं, लेकिन ऋण विस्तार की अभी भी पर्याप्त संभावना बनी हुई है।

प्रदेश का औसत CD रेशियो थोड़ा घटा

रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 में प्रदेश का CD रेशियो 83.51 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 में मामूली गिरावट के साथ 83.20 प्रतिशत रह गया। यानी राज्य स्तर पर ऋण वितरण स्थिर बना हुआ है, लेकिन जिलावार असमानता लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम CD रेशियो वाले जिलों में उद्योग, कृषि, स्वरोजगार और एमएसएमई के लिए ऋण वितरण बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिल सके।

कम CD रेशियो वाले जिलों पर रहेगा विशेष फोकस

SLBC ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि जिन जिलों का CD रेशियो 40 प्रतिशत से कम है, वहां क्रेडिट पेनिट्रेशन बढ़ाने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और उत्पादक क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे न केवल स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार और निवेश में भी तेजी आएगी।

फैक्ट फाइल

प्रदेश का औसत CD रेशियो (मार्च 2026): 83.20%

सबसे अधिक CD रेशियो वाले जिले

  • आगर-मालवा : 228.50%
  • शाजापुर : 184.49%
  • राजगढ़ : 170.21%
  • रायसेन : 144.08%
  • हरदा : 141.69%

सबसे कम CD रेशियो वाले जिले

  • सिंगरौली : 12.72%
  • मऊगंज : 24.33%
  • अनूपपुर : 32.51%
  • निवाड़ी : 32.84%
  • उमरिया : 34.58%
  • सीधी : 39.50%

अन्य प्रमुख जिले

  • भोपाल : 74.52%
  • ग्वालियर : 69.29%
  • जबलपुर : 67.62%
  • इंदौर : 102.43%

MP स्कूल शिक्षा विभाग में 5,017 शिक्षकों की होगी भर्ती, DPI ने जारी किया आदेश

भोपाल.

मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने 5 हजार 17 शिक्षकों का नियु​क्ति आदेश जारी कर दिया है। मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती-2024 के तहत 5017 कैंडिडेट्स का चयन किया गया था। 3 और 4 जुलाई को संभागीय संयुक्त संचालकों के जरिए नियुक्तियां जारी की गईं, जिसमें 4 हजार 67 माध्यमिक और 950 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इन शिक्षकों को इसी सत्र से स्कूलों में पढ़ाने का मौका मिलेगा।

गायन-वादन विषयों में भी शिक्षक नियुक्त
स्कूल शिक्षा विभाग ने माध्यमिक स्तर पर हिंदी, गणित, अंग्रेजी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, खेल और गायन-वादन विषयों में शिक्षकों की नियुक्ति की है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 21 जून 2026 तक चॉइस फिलिंग करा चुका है। करीब एक सप्ताह बाद विभाग ने नियुक्ति आदेश जारी किया है।

कैंडिडेट्स कर रहे 28 हजार पद पढ़ाने की मांग
प्रदेश में लंबे समय से शिक्षक पात्रता परीक्षा पास वर्ग 2 और वर्ग 3 के हजारों कैंडिडेट्स आंदोलन कर रहे हैं। कैंडिडेट्स प्रदेश में दोनों कैटेगरी में कुल 28 हजार से अधिक पदों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अब तक स्कूल शिक्षा विभाग से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है।

डेढ़ लाख पद खाली, फिर भर्ती क्यों नहीं ?
कैंडिडेट्स का कहना है कि मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। सरकार 8-10 हजार पदों पर भर्ती करती है। भर्ती प्रक्रिया 4 साल चलती है। जिस वजह से हजारों योग्य उम्मीदवार, जो परीक्षा (TET) पास करके आते हैं उनका सिलेक्शन नहीं हो पता है।

दो-दो परीक्षाएं पास करने के बाद भी नौकरी नहीं
एक अन्य कैंडिडेट ने बताया कि पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा यानी दो-दो परीक्षाएं क्वालिफाई करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही है। 

20 साल से ESB की फीस भर रहे
बताया गया कि जनजाति कार्य विभाग में शिक्षकों के करीब 50 हजार पद रिक्त हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) एक लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं और 50 हजार अभ्यर्थी दो-दो परीक्षा पास कर चुके हैं, लेकिन कम पदों पर भर्ती के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। ओवर ऐज हो जाते हैं। 20-20 साल तक ESB (मप्र कर्मचारी चयन मंडल ) की फीस भरते हैं, फिर भी बेरोजगार हैं। 

ये हैं कैंडिडेट्स की मांगें

  • शिक्षक वर्ग-3 (प्राथमिक शिक्षक) में 25 हजार पदों पर पद वृद्धि की जाए
  • शिक्षक वर्ग 2 (माध्यमिक शिक्षक) में प्रत्येक विषय में तीन-तीन हजार पदों पर पद वृद्धि करने की मांग है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 जुलाई को करेंगे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क सतगढ़ी का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिये औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार, निवेश-अनुकूल वातावरण के निर्माण और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजधानी भोपाल को आधुनिक औद्योगिक पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 6 जुलाई (सोमवार) को सतगढ़ी में विकसित किए जा रहे ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क’ का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास करेंगे। राष्ट्रवादी चिंतक एवं भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के लगभग 200 से अधिक प्रमुख उद्योगपति, निवेशक और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

लगभग 173 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का नया आधार बनेगा। परियोजना में आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना, उत्कृष्ट सड़क एवं परिवहन संपर्क, आईटी एवं एआई आधारित सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स तथा भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे निवेशकों को विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

यह परियोजना ‘वर्क-लिव-ग्रो’ मॉडल पर आधारित होगी, जहां उद्योगों के साथ कौशल विकास, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक सुविधाओं का समन्वित विकास किया जाएगा। पार्क में उच्च मूल्य विनिर्माण, गारमेंट, टॉयज, आईटी, एआई, लॉजिस्टिक्स तथा उभरती तकनीकों से जुड़े उद्योगों को स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इससे राजधानी में विविध औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा और नए निवेश के अवसर सृजित होंगे।

सतगढ़ी में विकसित हो रहा यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क कोलार क्षेत्र के विकास की दिशा भी बदलेगा। अब तक मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित कोलार आने वाले समय में निवेश, उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनेगा। परियोजना से 15 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है, जिनका लाभ विशेष रूप से भोपाल और आसपास के युवाओं को मिलेगा। इसके साथ ही बढ़ती औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त होगी।

परियोजना की एक विशेष उपलब्धि यहां विकसित किया जाने वाला विश्वस्तरीय कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर होगा। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परिसर 10 हजार से अधिक लोगों की क्षमता वाला होगा, जहां राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निवेशक सम्मेलन, औद्योगिक प्रदर्शनियां, व्यापारिक आयोजन और वैश्विक व्यवसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेन्टिव्स, कॉन्फ्रेंसेस एण्ड एग्जिबिशन) गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार मिलेगा।

रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतगढ़ी क्षेत्र राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, कोलार रोड तथा प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास से बेहतर संपर्क के कारण निवेशकों के लिए सुविधाजनक औद्योगिक गंतव्य के रूप में विकसित होगा। यह कनेक्टिविटी उद्योगों की स्थापना, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पार्क को पर्यावरण अनुकूल एवं स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत एससीएडीए आधारित जल प्रबंधन प्रणाली, जल एवं सीवेज शोधन संयंत्र, ऑटोमेटेड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था तथा अत्याधुनिक यूटिलिटी कॉरिडोर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण-संरक्षण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क राजधानी भोपाल में औद्योगिक निवेश, आधुनिक विनिर्माण और रोजगार सृजन के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह परियोजना औद्योगिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के साथ प्रदेश की निवेश क्षमता को और मजबूत करेगी तथा भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

राज्य में 30 जून की स्थिति में 13.16 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भण्डारण

रायपुर

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।   

वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है। 

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।

यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है।

इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

लोककला की अमर स्वर-सरिता को राजकीय सम्मान: पद्म विभूषण तीजन बाई को अश्रुपूरित विदाई

रायपुर

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया।

डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।

भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्म, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया।

राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया।

डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

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