ICMR Report: कोरोना के बाद बदली लोगों की लाइफस्टाइल, नींद की गोलियों की बिक्री में बड़ा उछाल

जबलपुर 

 भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है।

एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं।

शरीर की जैविक जरूरत
मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं।

सेहत पर असर
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है।

अनिद्रा के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं-

डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग।

बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं।

सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव।

नींद लाने के लिए करें ये काम
-समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें।
-भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता
-रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है।
-शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें।
-सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
-बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।

नीरव मोदी की भारत वापसी का रास्ता साफ! ब्रिटेन में आखिरी कानूनी लड़ाई भी हारे, प्रत्यर्पण की राह आसान

नई दिल्ली

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. दस्तावेजों के मुताबिक नीरव मोदी ने अपनी आखिरी कानूनी कोशिश भी हार दी है. उन्होंने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में जो अपील दायर की थी, उससे भी राहत नहीं मिली. सूत्रों के मुताबिक, अब नीरव मोदी के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में अब ब्रिटेन की सरकार उनके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर भारत भेज सकती है। 

मिल रही जानकारी के मुताबिक नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था. इससे पहले ब्रिटेन की अदालतें उनकी सभी अपीलें खारिज कर चुकी थीं. अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की व्यवस्था और उनके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं. सूत्रों का कहना है कि अब प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है और ब्रिटेन की एजेंसियों ने नीरव मोदी को भारत के हवाले करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। 

आपको बता दें कि नीरव मोदी मार्च, 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद हैं. उन्हें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन और ईडी ने पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत लाने की मांग की है. ऐसे में कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण कभी भी हो सकता है। 

किन-किन मामलों में फंसा है नीरव मोदी?
भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी भारत में तीन अलग-अलग मामलों में वांछित है. इनमें पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की सीबीआई जांच, मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी मामला और सबूतों- गवाहों से छेड़छाड़ का मामला शामिल है. अप्रैल, 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद नीरव मोदी की सभी जमानत याचिकाएं और कानूनी अपीलें खारिज हो चुकी हैं. मार्च 2026 में उसने भारत भेजे जाने के खिलाफ आखिरी अपील भी हार दी. इसके बाद उसने फ्रांस स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां से भी उसे राहत नहीं मिली है और अब उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो चुका है। 

WhatsApp Username विवाद: सरकार ने Meta को 9 जुलाई तक का समय दिया, कहा- बढ़ सकते हैं ऑनलाइन फ्रॉड के मामले

नई दिल्ली

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा।

दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी।

सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला? 
दरअसल, पूरा बवाल वॉट्सऐप में यूजरनेम फीचर को लेकर है. मेटा का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप पर यूजरनेम बेस्ट अकाउंट को रोलआउट किया जाना है. इसके लिए कंपनी ने यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया. कंपनी ने बताया कि वह इस साल के अंत तक यूजरनेम फीचर को रोल आउट कर देगी। 

क्या है वॉट्सएप का यूजरनेम फीचर
मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफॉर्म वॉट्सएप ने हाल ही में एक नए यूजरनेम फीचर की घोषणा की थी। इस फीचर की मदद से यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना भी दूसरों से बातचीत कर सकेंगे। यह यूजर्स के लिए एक ऑप्शनल यूनिक आइडेंटिफायर (पहचान) की तरह काम करेगा।

यह यूजरनेम हमेशा ‘@’ सिंबल से शुरू होगा, जैसे- @Name123। इसका इस्तेमाल करके दूसरे लोग आपको मैसेज या कॉल कर सकेंगे और आपका फोन नंबर पूरी तरह से प्राइवेट रहेगा। यह यूजरनेम आपके प्रोफाइल पर दिखने वाले डिस्प्ले नेम से अलग होगा। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हर अकाउंट के लिए बिल्कुल यूनिक होगा।

एप में ऐसे काम करेगा यह नया सिस्टम 
वॉट्सएप के लेटेस्ट वर्जन में यूजर्स ‘सेटिंग्स’ में जाकर, फिर ‘अकाउंट’ और उसके बाद ‘यूजरनेम’ पर क्लिक करके अपनी पसंद का यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं। जिन लोगों के पास आपका फोन नंबर सेव नहीं है, उन्हें ग्रुप चैट, डायरेक्ट मैसेज या कॉल के दौरान डिफॉल्ट रूप से आपका यूजरनेम ही दिखाई देगा।

मेटा के मुताबिक, अगर आपकी पसंद का यूजरनेम पहले से किसी ने ले रखा है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा। इसके अलावा, कुछ खास यूजरनेम बिजनेस, सरकारों या पब्लिक फिगर्स के लिए सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें कोई दूसरा व्यक्ति क्लेम नहीं कर सकता है।

मेटा को सरकार ने भेजा है नोटिस 
इस फीचर को लेकर सरकार ने बुधवार को मेटा को नोटिस भी भेजा था. साथ ही इसे रोलाउट करने के निर्देश दिए थे. इसके अलावा 3 दिन के भीतर  जवाब देने को कंपनी को कहा गया था. सरकार को आशंका है कि यूजरनेम बेस्ड फीचर को लेकर सरकार ने साइबर ठगी के खतरे की आशंका जाहिर की. यूजरनेम से लोग कन्फ्यूज हो सकते हैं. साथ ही फर्जी नाम का इस्तेमाल कर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं और लोगों को चुना लगा सकते हैं। 

मुश्किल हो सकती है यूजर बेस्ड अकाउंट की पहचान
यूजरनेम बेस्ड अकाउंट की पहचान मुश्किल हो सकती है. साथ ही मिलते जुलते यूजरनेम का इस्तेमाल कर लोग साइबर ठगी कर नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा फर्जी पहचान होने का खतरा रहेगा. साइबर ठग इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. इसमें असली नकली का भेद मिट जाएगा. ब्रांड और सेलिब्रिटी की नकल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा. स्पैम मैसेज में बढ़ोतरी हो जाएगी. ईडी जैसी जांच एजेंसी के लिए एक चुनौती हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग अटैक का भी खतरा बढ़ेगा। 

सरकार को इस फीचर से क्या परेशानी है?
मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वॉट्सएप का यह नया फीचर धोखाधड़ी, ऑनलाइन स्कैम और रूप बदलकर ठगी करने की घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है। सरकार का मानना है कि फीचर इनेबल होने के बाद पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को यूजर का फोन नंबर नहीं दिखेगा, जिससे अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा।

मंत्रालय ने 1 जुलाई को भेजे अपने नोटिस में साफ कहा है कि इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इम्पर्सनेशन हमलों के मामले काफी बढ़ सकते हैं। इससे गलत इरादे रखने वाले अपराधियों को पीड़ितों को ढूंढने और उन्हें मैसेज भेजने में आसानी हो जाएगी।

इसके अलावा, इस फीचर से पहचान चुराना भी आसान हो जाएगा। अपराधी आम लोगों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते यूजरनेम रखकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं।

यूजरनेम vs डिस्प्ले नेम
डिस्प्ले नेम को बदला जा सकता है और वह कई लोगों का एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम हमेशा यूनिक (यूनिवर्सल) होगा।

सुरक्षित यूजरनेम
सरकार, बिजनेस और वीआईपी लोगों के नाम वाले यूजरनेम को कोई भी आम यूजर बुक नहीं कर पाएगा, ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके।

इधर, मेटा की मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सएप ने कहा है कि सेलिब्रिटी, और पब्लिस स्पेस में पॉपुलर लोगों के यूजरनेम को रिजर्व रखा जाएगा. यह एक ऑप्शनल सर्विस है। 

 

Crude Oil Production: तेल बाजार में बड़ा खेल! 7 देशों के फैसले से बदल सकते हैं कच्चे तेल के दाम

 नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई। 

Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है। 

Crude की कीमतों में गिरावट जारी
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी।

संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है। 

इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है। 

एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश
गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है। 

OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, ‘बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा। 

क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel? 
अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।  

हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं। 

पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत 
मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी। 

Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा। 

 

MP Traffic: Google Maps के डेटा से बदलेगा ट्रैफिक सिस्टम, 6 शहरों में बनेंगे एलिवेटेड कॉरिडोर

भोपाल

 प्रदेश के बड़े शहरों के भीतर ट्रैफिक के दवाब को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने डी-कंजेशन पॉलिसी पर काम करना शुरू कर दिया है। शहर के सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव वाले लोकेशन पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। शुरुआत में 6 शहरों का चयन कर काम शुरू किया गया है। इसमें जबलपुर में एक कॉरिडोर तैयार किया भी जा चुका है। इसके अलावा शहर में ही एक और नया कॉरिडोर बनाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, राजधानी भोपाल में भी 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ऐसे 6 शहरों में डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने हैं।

इन एलिवेटेड कॉरिडोर से बड़े शहरों का ट्रैफिक दबाव होगा कम
-भोपाल
: शहर के बैरागढ़ इलाके में स्थित लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किमी का 306 करोड़ से कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिसका 80 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है।

-इंदौर : शहर के एलआइजी से नवलखा चौराहे तक 7.44 किमी का 306 करोड़ से एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का काम शुरू किया जा चुका है।

-उज्जैन : शहर के हरिफाटक फ्लाइओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक दाने वाले 5.32 कि.मी का 945 करोड़ की लागत से कॉरिडोर बनाने का काम शुरू किया जा चुका है।

-जबलपुर : शहर में 7 कि.मी का एक कॉरिडोर 1019 करोड़ से बनकर तैयार किया जा चुका है। जबकि, दूसरा बनाने की तैयारी विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है।

-ग्वालियर: आईआईआईटीएम महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्ण रेखा नदी, गिरबाई एबी रोड पर 13.3 किमी का 1065 करोड़ से फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण काम 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

-रीवा : शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर की डीपीआर बनाई जा रही है, जल्द काम शुरु किया जाएगा।

डिजाइन तैयार करने से पहले इन पर विश्लेषण

-प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या
-पीक आवर में जाम की स्थिति
-सड़क की क्षमता दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड
-भविष्य के यातायाता का अनुमान

गूगल से डेटा परीक्षण कर बनेगी डिजाइन
एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने से पहले वैज्ञानिक आधारों पर परीक्षण किया जाता है। खास बात यह है कि गूगल से पहले हर घंटे का डेटा एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इस बात का विश्लेषण करते हैं कि, सबसे पीक ऑवर में यहां ट्रैफिक की क्या स्थिति रहती है। उसके आधार पर कॉरिडोर का लेआउट-डिजाइन तैयार करते हैं। इसका डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय से तैयार करवाया जा रहा है। साथ ही रोड सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा रहा है।

इंदौर के ग्रीन बॉन्ड मॉडल पर चलेगा रायपुर, ₹100 करोड़ जुटाने की तैयारी शुरू

 इंदौर
 देश में ग्रीन बांड के जरिए शहरी विकास के लिए पूंजी जुटाने का सफल माडल पेश करने वाले इंदौर नगर निगम के नक्शे कदम पर अब रायपुर नगर निगम भी चल पड़ा है। इंदौर की कार्यप्रणाली और अनुभव के आधार पर रायपुर नगर निगम करीब 100 करोड़ रुपये का बांड जारी करने जा रहा है।

बांड जारी करने की पूरी प्रक्रिया में इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक मार्गदर्शन दिया है। यह बांड जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह के बीच जारी हो जाएगा।

उम्मीद जताई जा रही है कि इंदौर के ग्रीन बांड की तर्ज पर रायपुर के बांड को भी निवेशकों का अच्छा प्रतिसाद मिलेगा। ग्रीन बांड से मिलने वाली राशि का उपयोग रायपुर नगर निगम शहर में इलेक्ट्रानिक मार्केट और कमर्शियल कांप्लेक्स विकसित किए जाएंगे।

एए रेटिंग मिली है रायपुर के बांड को
रायपुर नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए जारी किए जाने वाले बांड को एए रेटिंग मिली है, जबकि इंदौर नगर निगम द्वारा जारी बांड को एए प्लस रेटिंग मिली थी। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि एए रेटिंग को सामान्यत: अच्छा माना जाता है। रायपुर नगर निगम ने बांड से जुटाई जाने वाली राशि से किए जाने वाले विकास कार्यों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है।

शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे नागरिक
बांड के माध्यम से शहर के विकास के लिए राशि जुटाने के इंदौर नगर निगम के माडल ने नगरीय निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन विकसित करने का नया रास्ता खोल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ और नगरीय निकाय भी हैं, जो इसी तर्ज पर बांड लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम नागरिक अपने शहर के विकास में हिस्सेदारी निभा रहे हैं।

यह है इंदौर का बांड मॉडल

    जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए इंदौर नगर निगम ने 10 फरवरी 2023 को ग्रीन बांड जारी किया था।

    सिर्फ तीन दिन में ही यह छह गुना अधिक सब्सक्राइब हो गया था।

    ग्रीन बांड के माध्यम से नगर निगम ने 244 करोड़ रुपये जुटाए थे।

    इस राशि से स्थापित किए गए सोलर प्लांट से निगम को प्रतिमाह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।

    इंदौर नगर निगम ग्रीन बांड होल्डर्स को 8.25 प्रतिशत ब्याज दे रहा है

    ग्रीन बांड के लगभग 18 हजार बांड होल्डर हैं।

कई निकाय भी ले रहे हैं सलाह
    इंदौर एक दौर है। सिर्फ रायपुर ही नहीं, कई अन्य नगरीय निकाय भी इंदौर के बांड माडल को अपनाने जा रहे हैं। ये निकाय भी विकास कार्यों के लिए जनता से राशि जुटाना चाहते हैं। इंदौर ग्रीन बांड के बाद अब जल्द ही ब्लू बांड भी जारी हो जाएगा। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर

सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा ब्लू बांड
नर्मदा के चौथे चरण के लिए एक हजार करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम द्वारा लाया जाने वाला ब्लू बांड सितंबर के अंत तक जारी हो जाएगा। सीए संतोष मुछाल ने बताया कि निगम ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए हैं। लगभग सभी अनुमतियां मिल गई हैं।

एमपी ट्रांसको की 593 ईएचवी लाइनों ने बनाया चार वर्षों से बिना ब्रेकडाउन के बिजली पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान : ऊर्जा मंत्री तोमर

एमपी ट्रांसको की 593 ईएचवी लाइनों ने बनाया चार वर्षों से बिना ब्रेकडाउन के बिजली पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल 

आंधी-तूफान, तेज बारिश, बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक चुनौतियों और अन्य अप्रत्याशित व्यवधानों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) की 593 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों ने पिछले चार वर्षों (करीब 1500 दिन) से बिना किसी ब्रेकडाउन के निर्बाध विद्युत पारेषण का उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इससे विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और मजबूती प्रमाणित हुई है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी के अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों तथा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में संलग्न आउटसोर्स कर्मियों की प्रतिबद्धता, दक्षता और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन लाइनों की इस उपलब्धि के पीछे सतत एवं सजग मेंटेनेंस, प्रभावी मॉनिटरिंग तथा अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों की निरंतर तत्परता प्रमुख कारण रहा है।

आधुनिक तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल से मिली सफलता

ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि प्रदेश में विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय एवं सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीकों के उपयोग, विभिन्न नवाचार,नियमित मेंटेनेंस, समयबद्ध निरीक्षण तथा प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में ईएचवी लाइनें लंबे समय से बिना किसी ब्रेकडाउन के सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। साथ ही इस उपलब्धि के पीछे ट्रांसमिशन लाइनों की नियमित पेट्रोलिंग, थर्मो-विजन निरीक्षण, संवेदनशील स्थलों की विशेष निगरानी, प्री-मानसून मेंटेनेंस अभियान तथा एससीएडीए आधारित सतत मॉनिटरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा लाइन कॉरिडोर का प्रभावी प्रबंधन, पेड़ों की समयबद्ध कटाई-छंटाई, इंसुलेटर, कंडक्टर, जंपर एवं अन्य हार्डवेयर का निवारक अनुरक्षण तथा संभावित तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उनका निराकरण किए जाने से ब्रेकडाउन की स्थितियों को प्रभावी रूप से रोका जा सका।

 

उमरिया की बहू प्रियंका सिंह मसराम ने MPPSC में रचा इतिहास, हिंदी की असिस्टेंट प्रोफेसर बनीं

उमरिया
 जब हौसले बुलंद हों और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो, तो बंदिशें और संसाधन कभी आड़े नहीं आते। संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत आने वाले उमरिया जिले के सुदूर आदिवासी अंचल, पाली विकासखंड के ग्राम कुमूर्दु की बहू प्रियंका सिंह मसराम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। प्रियंका ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्राध्यापक (हिन्दी) भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

ग्रामीण पृष्ठभूमि और पारंपरिक जिम्मेदारियों के बीच प्रियंका की यह छलांग सिर्फ एक व्यक्तिगत नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि यह इस आदिवासी बेल्ट में महिलाओं की बदलती सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का एक बड़ा जमीनी दस्तावेज है।

खुद की मेहनत से बनाई अलग पहचान
प्रियंका के पति धर्मपाल सिंह वर्तमान में बैतूल जिले की मुलताई जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर तैनात हैं। प्रशासनिक माहौल घर में होने के बावजूद प्रियंका ने अपनी पढ़ाई की निरंतरता को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी इस सफलता से साबित किया कि शादी और पारिवारिक दायित्वों के बाद भी अगर जिद पक्की हो, तो देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक को भी पास किया जा सकता है।

ग्रामीण अंचल में जश्न और प्रेरणा की नई लहर
कुमूर्दु गांव और आसपास के इलाकों में प्रियंका की इस कामयाबी के बाद से खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है:

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    यह सफलता अंचल की अन्य युवतियों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति एक नया आत्मविश्वास पैदा करेगी।

    पांचवीं अनुसूची वाले इस पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा को लेकर समाज का नजरिया तेजी से बदलेगा।

    प्रियंका की यह जीत आने वाली पीढ़ी के लिए अब एक गाइडिंग लाइट (प्रेरणा स्रोत) की तरह काम करेगी।

स्थानीय स्तर पर परिजनों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने प्रियंका सिंह मसराम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

 

MP Weather Update: मध्य प्रदेश के 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें कब तक एक्टिव रहेगा मानसून

भोपाल
 मध्य प्रदेश में मानसून ने पूरी ताकत के साथ एंट्री मार दी है. मानसून ने मध्य प्रदेश को पूरे तरीके से कवर कर लिया है. भोपाल, इंदौर सहित हर जिले में बारिश का दौरा देखने को मिल रहा है. इसी बीच बिजली गिरने सहित हादसों की खबरें भी सामने आ रही है. अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. अब चूंकि इस बार मध्य प्रदेश में मानसून तय टाइम से देरी से आया था. ऐसे में मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी भरपाई के लिए मानसून अधिक समय तक सक्रिय रह सकता है. आर्टिकल में जानिए मानसून की गतिविधियां। 

कब तक एक्टिव रहेगा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है. इसलिए फिलहाल सितंबर तक इसके प्रभावी बने रहने की संभावना है. लेकिन मानसून की सक्रियता पूरी तरह मानसूनी ट्रफ की स्थिति पर डिपेंड करती है. ऐसे में बीच-बीच में कुछ दिनों के लिए बारिश कम हो सकती है. इसके बाद ट्रफ के अनुकूल होने पर बारिश का दौर फिर से तेज होने की संभावना रहेगी. सितंबर के बाद मानसून लौटना शुरु हो जाएगा। 

मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ”मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव सामान्यतः जून से सितंबर तक रहता है. इस दौरान मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं रहता, बल्कि इसकी तीव्रता मानसून ट्रफ की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है. वहीं बीच-बीच में ब्रेक की स्थिति भी बन सकती है, लेकिन फिर मानसून दोबारा सक्रिय हो जाता है. मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई सामान्यतः सितंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी होती है। 

कैसे आता है मानसून, कैसे बनते हैं बादल
मानसून भारत में सबसे पहले केरल में पहुंचता है. मानसून के बनने का प्रोसेस भी काफी रोचक है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून गर्मियों में जमीन के तेजी से गर्म होने और समुद्र से उठने वाली नमी वाली हवाओं के कारण आता है. हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर हवाएं भारत की ओर आती हैं. नमी वाली हवाएं ठंडी होकर घने बादलों में तब्दील हो जाती हैं और बारिश होने लगती है. मानसून 15 जून से भारत में एक्टिव हो जाता है. जो सितंबर तक चलता है. सिंतबर के बाद मानसून विदा लेने लगता है। 

22 जिलों में होगी भारी बारिश
7 जुलाई सुबह 8:30 से 8 जुलाई सुबह 8:30 तक विदिशा, रायसेन, शहडोल और उमरिया जिलों में अति भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास, सीधी, रीवा, मऊगंज, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, सिंगरौली, सतना और अनूपपुर सहित 22 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात एवं तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल सहित 28 जिलों में झंझावात, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। 

7 जुलाई सुबह 8:30 से 9 जुलाई सुबह 8:30 तक रायसेन, गुना, अशोकनगर और सागर जिलों में अति भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है. विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, श्योपुरकलां, कटनी, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित 16 जिलों में भारी वर्षा के साथ वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट है. वहीं भोपाल सहित 34 जिलों में झंझावात, वज्रपात और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। 

9 जुलाई सुबह 8:30 से 10 जुलाई सुबह 8:30 तक गुना और अशोकनगर में अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है. राजगढ़, आगर, मंदसौर, नीमच, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, श्योपुरकलां, कटनी, पन्ना, दमोह, सागर और छतरपुर सहित 13 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है. इसके अलावा भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा सहित 39 जिलों में वज्रपात, झंझावात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की गई है। 

दतिया उपचुनाव 2026: 13 जुलाई से नामांकन शुरू, क्या फिर आमने-सामने होंगे नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती के परिवार?

दतिया
 दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां पहले से ही तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने बैठक कर संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की है।

भाजपा की भोपाल स्थित 74 बंगला में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा कर पैनल तैयार किया गया, जिसे उसी दिन केंद्रीय नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दिया गया।

13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान
निर्वाचन आयोग ने दतिया उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 30 जुलाई को होगा और मतगणना 4 अगस्त को की जाएगी।

भाजपा ने शुरू की चुनावी रणनीति
भाजपा नेतृत्व ने चुनाव जीतने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं की टीम दतिया में उतारने की रणनीति बनाई है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संगठन बूथ से लेकर जिला स्तर तक लगातार सक्रिय है और उपचुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत
सूत्रों के अनुसार भाजपा में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सबसे प्रमुख दावेदार हैं। वे पिछले कुछ समय से लगातार दतिया के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुनावी माहौल तैयार कर रहे हैं। पार्टी के भीतर भी उन्हें सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

कांग्रेस में टिकट को लेकर कई दावेदार
    कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और सिद्धार्थ कुशवाहा की समिति गठित की है, जो राजनीतिक हालात का आकलन कर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को रिपोर्ट सौंपेगी। टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक घनश्याम सिंह, अवधेश नायक और अन्य नेता सक्रिय हैं।

    सूत्रों के अनुसार आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। माना जा रहा है कि वह अपने बेटे अंकित भारती को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वह पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात करा चुके हैं।

आसपा ने घोषित किया प्रत्याशी
दतिया उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवार के रूप में दामोदर यादव के नाम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही दतिया का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावनाएं भी चर्चा में हैं, हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है।

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