स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

दवाओं की मांग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण एवं मरीज तक वास्तविक उपलब्धता को प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के दिए निर्देश
मेडिकल सप्लाई चेन कार्ययोजना की समीक्षा की

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश की मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। दवाओं की मांग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण एवं मरीज तक वास्तविक उपलब्धता की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि दवाओं की समय पर टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए तथा गुणवत्ता परीक्षण उपरांत ही दवाओं का वितरण किया जाए। सभी स्तरों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और डिमांड-सप्लाई गैप की स्थिति निर्मित न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को दवाओं का वितरण सहजता से हो तथा दवा उपलब्धता के संबंध में किसी भी स्तर पर अनावश्यक कठिनाई न आए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि तकनीक आधारित मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था से दवाओं की उपलब्धता और वितरण की सतत निगरानी संभव होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय की गुणवत्ता सुदृढ़ और अधिक प्रभावी होगी।

आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की प्रस्तावित कार्ययोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों पर 10 वेयरहाउस स्थापित किए जाएंगे। इन वेयरहाउसों में दवाओं के सुरक्षित एवं व्यवस्थित भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। हाई-एंड टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस का उपयोग कर दवाओं की रियल टाइम ट्रैकिंग तथा स्टॉक की स्थिति की सतत निगरानी की जाएगी। इससे मेडिकल सप्लाई चेन में एंड-टू-एंड इंटीग्रेशन सुनिश्चित होगा। दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक की स्थिति, मांग एवं वितरण की जानकारी वास्तविक समय में प्राप्त हो सकेगी।

आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने बताया कि यह व्यवस्था क्षेत्रवार, केंद्रवार एवं स्वास्थ्य संस्था स्तर पर दवाओं की मांग का आकलन करने में भी सहायक होगी। इसके आधार पर आवश्यकता अनुरूप बेहतर योजना बनाते हुए दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे अंतिम उपयोगकर्ता अर्थात मरीज तक गुणवत्तायुक्त दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दवाओं की खरीदी की जाएगी। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दवाएं वेयरहाउस तक पहुंचाई जाएंगी। वेयरहाउस में दवाओं का उचित भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा और दवाओं की समय पर गुणवत्ता जांच कराई जाएगी। एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण उपरांत ही दवाओं को वितरण के लिए भेजा जाएगा।

गुणवत्ता परीक्षण के बाद दवाओं का वितरण मेडिकल कॉलेजों, जिला चिकित्सालयों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के औषधि भंडार, सिविल अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। आगामी चरण में इस व्यवस्था का एकीकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। साथ ही मरीज को दवा के वास्तविक वितरण की जानकारी भी रियल टाइम में दर्ज करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। बैठक में मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इंदौर के चर्चित ‘कोबरा कांड’ में बड़ा फैसला, पत्नी की हत्या करने वाले बैंककर्मी को उम्रकैद

इंदौर

इंदौर के बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा दी है। साल 2019 में बैंक अधिकारी अमितेष ने अपनी पत्नी शिवानी की हत्या के लिए एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित साजिश रची थी। वह इंदौर से लगभग 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर जिले से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का एक खतरनाक कोबरा 30 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। आरोपी ने इस सांप को 11 दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा।

इसके बाद जब उसे सही मौका मिला, तो उसने तकिए से अपनी पत्नी का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या को प्राकृतिक रूप देने के लिए उसने कोबरा को मार डाला और उसके दांतों को अपनी मृत पत्नी के हाथ में जबरन गड़ा दिए, ताकि पुलिस और डॉक्टर्स इसे सर्पदंश से हुई सामान्य मौत समझें। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ डॉक्टरों के बयानों ने अदालत के सामने सच्चाई लाकर रख दी।

करीब साढ़े छह साल तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमितेष को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा संरक्षित वन्यजीव कोबरा की हत्या करने के मामले में तीन साल के कारावास व 25 हजार रुपए के जुर्माने और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में दो साल की सजा भी सुनाई गई है।

सर्पदंश की झूठी कहानी रची
यह पूरी घटना इंदौर के संचार नगर में 1 दिसंबर 2019 को घटित हुई थी। 35 वर्षीय शिवानी पटेरिया को उसका पति अमितेष और उनका एक किरायेदार निखिल गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों को ससुराल पक्ष द्वारा यह जानकारी दी गई कि शिवानी की मौत सांप के काटने की वजह से हुई है लेकिन शिवानी के मायके पक्ष के लोगों ने घटना की सूचना मिलते ही इसे पूरी तरह संदेहास्पद बताया। जब कनाडिया थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर जांच के लिए पहुंचे, तो उन्हें घर के अंदर एक मरा हुआ कोबरा सांप पड़ा मिला। उस दौरान शिवानी के चाचा प्रभात दीक्षित ने पुलिस के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि उनकी भतीजी की सोची-समझी रणनीति के तहत हत्या की गई है।

बिस्तर पर ही मरा हुआ था सांप
शिवानी अपने घर के पलंग पर मृत अवस्था में पाई गई थी और उसी बिस्तर पर वह सांप भी मरा हुआ मिला था। चाचा का कहना था कि कुछ समय पहले अमितेष ने शिवानी से तलाक लेने का प्रयास किया था, क्योंकि वह दिल्ली की किसी अन्य युवती के लगातार संपर्क में था और हर हाल में शिवानी को अपने जीवन से हटाना चाहता था। मायके पक्ष का यह भी आरोप था कि पति ने पहले भी हत्या का प्रयास किया था, जिसमें एक बार गला दबाने और घटना से दो दिन पहले जहर देने की कोशिश शामिल थी। घटना की सुबह भी यह अफवाह फैलाई गई कि पार्लर में सांप ने काटा है, लेकिन जब बात कराने को कहा गया तो मना कर दिया गया और शाम को मौत की सूचना दी गई। उस वक्त घर में ससुर ओमप्रकाश और ननद ऋचा भी मौजूद थे।

बहन भी साजिश में शामिल थी
शिवानी के पिता आनंद दीक्षित ने पुलिस को दिए अपने बयानों में स्पष्ट कहा था कि उनके दामाद ने अपनी बहन के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित योजना के तहत घटना वाले दिन आरोपी की बहन दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर मॉल चली गई थी ताकि घर खाली रहे। शाम को जब बच्चे वापस लौटे तब तक शिवानी को अस्पताल ले जाया जा चुका था।

दिल्ली में दूसरी महिला के साथ रहता था 
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पिता को बताया कि शिवानी की मृत्यु लगभग 10 से 12 घंटे पहले ही हो चुकी थी। पिता ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि बेटी का शरीर जहर के कारण काला पड़ने के बजाय पूरी तरह पीला था, जिससे साफ था कि मौत सांप के काटने से नहीं हुई थी। पिता ने बताया कि 9 साल पहले उन्होंने बड़े अरमानों से बेटी की शादी की थी, लेकिन शादी के बाद से ही दामाद दिल्ली में किसी दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रह रहा था।

इस बात की जानकारी मिलने पर जब वे दिल्ली गए तो दामाद उस महिला के साथ ही मिला, जिसके बाद वे उसे समझा-बुझाकर वापस इंदौर लेकर आए थे। इसके बावजूद वह लगातार दहेज के नाम पर शिवानी को प्रताड़ित करता रहा और मायके पक्ष की ओर से समय-समय पर करीब 25 लाख रुपए दिए जा चुके थे। पिता ने शुरुआत में ही मांग की थी कि जिस सांप के डसने का दावा किया जा रहा है, उसका किसी वेटरनरी डॉक्टर से पोस्टमॉर्टम कराया जाए ताकि सच सामने आ सके।

पुलिस तफ्तीश के बाद अदालत ने सजा सुनाई
इन बयानों और घटनास्थल के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस का शक गहराता चला गया। कनाड़िया पुलिस ने अमितेष पटेरिया को हिरासत में लेकर दो दिनों तक कड़ी पूछताछ की। शुरुआती दौर में वह पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि शिवानी से उसका आए दिन विवाद होता था, जिससे तंग आकर उसने तकिए से उसका मुंह दबाकर उसे मार डाला।

इससे पहले वह योजना के मुताबिक अलवर से कोबरा लाया था, जिसे मारकर उसने पत्नी के शव के पास रख दिया ताकि यह एक हादसा लगे। पुलिस ने जांच पूरी कर अमितेष, उसके पिता ओमप्रकाश पटेरिया और बहन ऋचा चतुर्वेदी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। 24 जून 2026 को अदालत ने अपने फैसले में माना कि अमितेष ने ही तकिए से मुंह दबाकर हत्या की और इसे प्राकृतिक रूप देने के लिए सांप के काटने का नाटक रचा था।

पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच से खुला राज
इस पूरे आपराधिक मामले में सबसे निर्णायक मोड़ पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट से आया। डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने साफ कर दिया कि शिवानी के शरीर में सांप के जहर का कोई अंश नहीं था, बल्कि उसकी मृत्यु तकिए या किसी भारी वस्तु से मुंह और नाक दबाए जाने के कारण दम घुटने से हुई थी। शव पर पाए गए अंदरूनी और बाहरी चोटों के निशान, बिस्तर की बिखरी हुई स्थिति और घटनास्थल से संकलित किए गए भौतिक साक्ष्यों ने हत्या की पुष्टि की।

फोरेंसिक विशेषज्ञों को बिस्तर की चादर, तकिए के कवर और मृत कोबरा से कई महत्वपूर्ण सबूत मिले। घटनास्थल पर चादर का बहुत ज्यादा अस्त-व्यस्त होना और तकिए के कवर पर लार के धब्बे मिलना इस बात का गवाह थे कि मौत से पहले संघर्ष हुआ था, जिसने पुलिस की तफ्तीश को सही दिशा दी।

कॉल रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य बने आधार
अदालती कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी अमितेष और उसकी बहन के बीच हुई मोबाइल फोन की बातचीत की रिकॉर्डिंग को एक मुख्य सबूत के तौर पर पेश किया। इस ऑडियो रिकॉर्डिंग में घटना को अंजाम देने और उसके बाद साक्ष्यों को छुपाने की पूरी साजिश के पुख्ता संकेत मिले थे। अदालत ने कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड, वॉइस सैंपल्स की मैचिंग रिपोर्ट, फोरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों के बयानों को बेहद अहम कड़ी माना। आस-पड़ोस के लोगों ने भी गवाही दी कि घटना के वक्त घर में केवल शिवानी और उसका पति अमितेष ही मौजूद थे, जिसके बाद पति ने अचानक शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया और कोबरा के डसने की झूठी कहानी सुनाई।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अतिरिक्त सजा
इस हत्याकांड का एक और गंभीर कानूनी पहलू यह था कि इसमें एक संरक्षित वन्यजीव यानी कोबरा सांप का क्रूरता से इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह पूरी तरह साबित हुआ कि अमितेष ने अपनी पत्नी की हत्या को छुपाने के लिए कोबरा को तड़पाकर मारा और उसके दांतों का इस्तेमाल किया।

इसी वजह से कनाड़िया पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 को भी मामले में जोड़ा था। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि एक मूक और संरक्षित वन्यजीव की तस्करी करना, उसे मारना और एक जघन्य अपराध में उसका इस्तेमाल करना बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध है। 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सांप के काटने का कोई जैविक साक्ष्य नहीं मिला  
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के वेटरनरी विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव ने अदालत में अपनी रिपोर्ट और बयान में स्पष्ट किया था कि वह सांप अत्यधिक विषैली कोबरा प्रजाति का ही था, जिसके पास जहर ग्रंथि और दांत मौजूद थे, जिसका काटना किसी भी इंसान को पंगु बना सकता है या उसकी जान ले सकता है।

हालांकि, शिवानी के शरीर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सांप के काटने का कोई जैविक साक्ष्य नहीं मिला और यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हुआ कि मौत सिर्फ और सिर्फ गला दबाने से हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, एक जीवित व्यक्ति को सांप के काटने और एक मृत शरीर पर सांप के दांत गड़ाने के वैज्ञानिक साक्ष्यों में जमीन-आसमान का अंतर होता है, जिसे फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स आसानी से पकड़ लेते हैं। भले ही शिवानी की मौत सांप से नहीं हुई, लेकिन आरोपी द्वारा कोबरा की हत्या करने का जुर्म साबित होने पर कोर्ट ने उसे इस कानून के तहत तीन साल की सश्रम सजा भुगतने का आदेश दिया। 

 

इंडोनेशिया की संसद में PM मोदी का बड़ा संदेश, बोले- ‘भारत विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है’

जाकर्ता

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि इं​डोनेशिया की संसद में आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. मैं यहां मिले भव्य स्वागत से अभिभूत हूं. पीएम मोदी ने कहा, ‘मेरे लिए आप सभी के बीच उपस्थित होना बहुत बड़े सौभाग्य की बात है. 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि के रूप में, लोकतंत्र की जननी भारत के एक सौभाग्यशाली नागरिक के रूप में, मैं आप सभी को समस्त भारतवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। 

पीएम मोदी ने कहा’ ‘इंडोनेशिया के लोगों, यहां के प्यारे बच्चों, युवाओं और मातृशक्ति ने आज के इस दिन को मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बना दिया है. आज सुबह इंडोनेशिया के लोगों ने जिस तरह मुझ पर स्नेह और प्रेम बरसाया, जिस आत्मीयता के साथ मेरा स्वागत और अभिनंदन किया, उसे मैं जीवन भर कभी नहीं भूल पाऊंगा। 

भारत की नीति विस्तारवाद नहीं विकासवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ अपने प्रगाढ़ संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति प्रबोवो ने कॉपीराइट की बात की. मैं कहना चाहता हूं कि सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता. राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मेरी मित्रता भी किसी कॉपीराइट की सीमाओं में बंधी नहीं है.’ उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का वह देश है, जो विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की नीति में विश्वास रखता है. इसलिए भारत का मंत्र है, ‘सबका साथ, सबका विकास है. इसी मंत्र और इसी भावना के साथ मैं आज इंडोनेशिया की संसद के सभी सम्मानित सदस्यों के बीच उपस्थित हुआ हूं। 

इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पाना सौभाग्य
इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक व सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया. राष्ट्रपति प्रबोवो  ने उन्हें यह सम्मान दिया. पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज सुबह मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने का भी सौभाग्य मिला. मैं करोड़ों भारतीयों की ओर से इंडोनेशिया के लोगों के इस स्नेह और सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं. यह सम्मान हमारे दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों, हमारी साझा विरासत और भारत-इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों का सम्मान है. मैं आप सभी साथियों, इंडोनेशिया की सरकार और यहां की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। 

समुद्र भारत-इंडोनेशिया के बीच सेतु का प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा कि भले ही हमारी राजधानियों के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी हो, लेकिन समुद्र के रास्ते हमारे बीच की दूरी महज 150 किलोमीटर है. दुनिया के कई देशों में समुद्र, सीमाओं और दूरियों का प्रतीक रहा है, लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र कभी दूरी का नहीं, बल्कि एक सेतु का प्रतीक रहा है. यही समुद्र हमारे साझा भविष्य का भी केंद्र है. भारत और इंडोनेशिया केवल समुद्र ही साझा नहीं करते, बल्कि हमारा इतिहास भी एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है. हमारे रिश्तों की जड़ें रामायण और महाभारत की विरासत में हैं. सदियों पहले नालंदा के ज्ञान से भी हमारा जुड़ाव रहा है. हमारा संबंध वायांग की नृत्य और संगीत परंपरा से भी जुड़ा है. हम बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे भव्य स्मारकों से जुड़े हैं. हम इंडोनेशिया के राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ से जुड़े हैं. हम बाली की यात्राओं और वहां के उत्सवों की उमंग से भी जुड़े हुए हैं। 

इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर स्वाद की बात करें, तो यहां केरुपुक है और भारत में पापड़. यह कहना मुश्किल है कि दोनों में ज्यादा कुरकुरापन किसमें है, लेकिन इतना तय है कि भारत के मसाले और इंडोनेशिया के बुम्बु (मसाला मिश्रण) दोनों ही हमारे जीवन में स्वाद घोलते हैं. पिछले दो दशकों में इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है और करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए हैं. आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. पिछले एक दशक में हमारे यहां 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं. जब भारत और इंडोनेशिया साथ खड़े होते हैं, तो दुनिया का यह विश्वास और मजबूत होता है कि लोकतंत्र अवसर देता है, लोकतंत्र विश्वास देता है और लोकतंत्र भविष्य का निर्माण करता है। 

भारत और इंडोनेशिया प्रमुख समुद्री शक्तियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और लोकतंत्र की जननी है, जबकि इंडोनेशिया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है. भारत में सैकड़ों भाषाएं और अनेक परंपराएं हैं, ठीक उसी तरह इंडोनेशिया भी सैकड़ों भाषाओं और विविध सांस्कृतिक परंपराओं का देश है. भारत का मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ है, जबकि इंडोनेशिया का राष्ट्रीय दर्शन ‘भिन्नेका तुंग्गल इका’ (विविधता में एकता) है. हम दोनों ने अपनी इस विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत और एकता का आधार बनाया है. हम दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले समाजों में शामिल हैं. हम दोनों प्रमुख समुद्री शक्तियां हैं. हम दोनों ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज हैं. हम प्राचीन सभ्यताएं हैं और भविष्य के लिए स्वाभाविक साझेदार भी हैं। 

दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले वर्ष भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया. आज 100 से अधिक भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया में कार्यरत हैं. हम साथ मिलकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे सामने सहयोग की अभी भी असीम संभावनाएं मौजूद हैं. भारत स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक का प्रबल समर्थक है. भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता का समर्थन करता है. इसके लिए हमने आसियान (ASEAN) को केंद्र में रखा है. हमारी एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) भी आसियान-केंद्रित है. आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत और इंडोनेशिया हमेशा एक साथ खड़े रहे हैं. पिछले वर्ष भारत के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद इंडोनेशिया ने मजबूती से भारत का समर्थन किया. इसके लिए मैं इंडोनेशिया का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. हमारे दोनों देश संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। 

भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद शुरू करने का प्रस्ताव
पिछले वर्ष इंडोनेशिया ब्रिक्स (BRICS) का पूर्ण सदस्य बना और इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. हम दोनों मिलकर ब्रिक्स के इस मंच को और अधिक व्यावहारिक, अधिक संतुलित तथा ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के प्रति और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं. मैं आप सभी के समक्ष ‘गंगा-महाकम विजन’ प्रस्तुत करना चाहता हूं. यह विजन हमारी साझेदारी को केवल आज की जरूरतों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा, समृद्धि और साझा प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करता है. हम अपनी साझा सभ्यतागत विरासत को नई पीढ़ी की चेतना और सोच से जोड़ेंगे. रामायण से लेकर बोरोबुदुर तक, हम अपने साझा इतिहास को भविष्य की ताकत में बदलेंगे. इसी उद्देश्य से हमें भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद (India-Indonesia Civilisation Dialogue) की शुरुआत करनी चाहिए। 

राम गोपाल यादव के WhatsApp पर लगी रोक, रोज 5 हजार लोगों को भेजते थे

 लखनऊ

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव हर सुबह करीब 5 हजार लोगों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं. लेकिन अब यह सिलसिला कुछ समय के लिए रुक गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि 31 जुलाई तक वह अपने नियमित व्हाट्सएप संदेश नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि व्हाट्सऐप ने उनके अकाउंट से संदेश भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है। 

रामगोपाल यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह प्रतिदिन सुबह लगभग पांच हजार लोगों को सुप्रभात संदेश भेजते थे और उनके अच्छे दिन की कामना करते थे. उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप ने 31 जुलाई तक उनके द्वारा भेजे जाने वाले संदेशों पर रोक लगा दिया है. इसी वजह से वह इस अवधि में अपने शुभचिंतकों तक रोजाना पहुंचने वाला संदेश नहीं भेज सकेंगे। 

रामगोपाल यादव की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई. कई समर्थकों ने उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जल्द प्रतिबंध हटने की उम्मीद जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने यह जानने की उत्सुकता दिखाई कि व्हाट्सऐप ने इतनी बड़ी संख्या में संदेश भेजने पर यह अस्थायी रोक क्यों लगाई। 

गौरतलब है कि व्हाट्सएप की नीतियों के तहत एक साथ बड़ी संख्या में संदेश भेजने या असामान्य गतिविधि पाए जाने पर सुरक्षा कारणों से कुछ अकाउंट्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, रामगोपाल यादव के मामले में व्हाट्सएप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए प्रतिबंध का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। 

रायपुर में फर्जी अंकसूची के सहारे GST विभाग में मिली नौकरी, दो कर्मचारी बर्खास्त

रायपुर.

फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी विभाग ने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए।

दोनों कर्मचारियों पर वर्ष 2013 की भृत्य भर्ती में कक्षा आठवीं की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी हासिल करने का आरोप था। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में हुई भृत्य भर्ती के दौरान दोनों अभ्यर्थियों ने कक्षा आठवीं की अंकसूची में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए थे। इसी मेरिट के आधार पर उनका चयन हुआ। बाद में दोनों की पदोन्नति होकर सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति हो गई। मामले में किशोर पटेल का नाम उस समय भी चर्चा में आया था, जब वह कर्मचारी संघ का नेता बन गया था। बताया जाता है कि तत्कालीन विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के समन्वय कक्ष में पदस्थापना के दौरान टाइपिंग कार्य को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद किशोर पटेल ने कर्मचारी संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी। यह मामला मीडिया में भी प्रमुखता से सामने आया था।

बलौदाबाजार के कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि किशोर पटेल और भागवत पटेल की कक्षा आठवीं की अंकसूचियां फर्जी हैं। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित मिडिल स्कूल की परीक्षा परिणाम पंजी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में सामने आया कि समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। आरोप है कि इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रधान पाठक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया।

शिकायत मिलने पर जीएसटी आयुक्त की ओर से अंकसूचियों के सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था। उस समय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में अंकसूचियों को सही बताया था। हालांकि बाद में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और अंततः दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित करने और कथित संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल बर्खास्तगी ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने का भी प्रावधान है। फिलहाल इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जब्त मवेशियों की कस्टडी पर बड़ा फैसला आएगा, हाईकोर्ट तय करेगी कोर्ट के अधिकार

बिलासपुर.

हाईकोर्ट ने गोवंश की जब्ती और उनकी अंतरिम कस्टडी को लेकर एक कानूनी सवाल पर सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट यह तय करने जा रहा है कि क्या गोवंश तस्करी या अवैध परिवहन के मामलों में दर्ज एफआईआर के बाद, ट्रायल आपराधिक अदालतों को जब्त मवेशियों को अंतरिम कस्टडी में सौंपने का अधिकार है, या विशेष कानून के चलते इस पर कोई पाबंदी है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने इस संवेदनशील और जटिल कानूनी विषय पर अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली को न्याय मित्र नियुक्त किया है। साथ ही राज्य के महाधिवक्ता को भी कोर्ट में उपस्थित रहकर इस मामले में विशेष सहयोग देने के लिए कहा है। मामले किनअगली सुनवाई15 जुलाई को होगी। हाई कोर्ट ने 18 मार्च 2021 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न के उत्तर के लिए मामले को लार्जर बेंच को रेफर किया था। यदि पुलिस गोवंश से जुड़े किसी मामले में मवेशियों को जब्त करती है, तो क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट को उन मवेशियों को अंतरिम रूप से किसी को सौंपने का अधिकार है, या ‘छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004’ की विशेष धाराएं अदालत के इस अधिकार को पूरी तरह रोक देती हैं।

2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहम्मद वासिम कुरैशी के अधिवक्ता ऋषिकांत महोबिया ने कोर्ट को बताया, मूल मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रहा मुकदमा ट्रायल कोर्ट में पहले ही पूरा हो चुका है और उसे दोषमुक्त किया जा चुका है। इस लिहाज से व्यक्तिगत तौर पर इस याचिका में अब कुछ शेष नहीं बचा है। डिवीजन बेंच ने कहा, भले ही मुख्य आरोपी बरी हो चुका हो, लेकिन सिंगल जज द्वारा ‘लार्जर बेंच’ के सामने जो बुनियादी कानूनी सवाल भेजा गया है, उसका जवाब तय होना राज्य के अन्य सभी मामलों के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य के लिए स्थिति साफ हो सके।

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने डिवीजन बेंच के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि यह विषय काफी महत्वपूर्ण कानूनी बारीकियों से जुड़ा है, इसलिए उन्हें इस केस का अध्ययन करने और अपनी तैयारी पूरी करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है, न्याय मित्र नौशीना आफरीन अली को पूरी याचिका, संलग्न दस्तावेजों और अब तक की सभी ऑर्डर शीट्स का एक पूरा सेट तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

MP सरकार ने फिर लिया ₹3,600 करोड़ का कर्ज, राज्य पर कुल देनदारी ₹5.61 लाख करोड़ के पार

भोपाल

मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह राशि दो अलग-अलग किश्तों में 18 वर्ष और 30 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.6114 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है।

वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि बॉन्ड जारी कर और सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की नीलामी के माध्यम से जुटाई जाएगी। ऋण की राशि का उपयोग राज्य में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और विभिन्न सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। इस उधारी के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई है।

18 और 30 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया ऋण
अधिसूचना के मुताबिक, पहली किश्त 1,600 करोड़ रुपए की है, जिसे 18 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया है। इस पर ब्याज का भुगतान निर्धारित अवधि तक प्रत्येक वर्ष किया जाएगा।

दूसरी किश्त 2,000 करोड़ रुपए की है, जिसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2056 तक रहेगी। दोनों ऋणों पर राज्य सरकार 7.90 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का भुगतान करेगी। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि ऋण राशि का भुगतान बुधवार को होगा।

ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए हुई नीलामी
राजपत्र के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित की गई, जिसमें पात्र और संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। गैर-प्रतिस्पर्धी निवेशकों के लिए भी निर्धारित सीमा तक निवेश की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

31 मार्च तक प्रदेश पर था 4.88 लाख करोड़ का कर्ज
सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का ऋण था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपए के मार्केट लोन का है। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय लघु बचत निधि और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी कुल देनदारियों में शामिल हैं।

विकास कार्यों पर खर्च होगा ऋण
राज्य सरकार का कहना है कि इस ऋण का उपयोग सिंचाई, कृषि, ऊर्जा, सड़क, संचार, पेयजल, सहकारी संस्थाओं के विकास और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। सरकार ने यह भी दावा किया है कि राज्य की परिसंपत्तियों का मूल्य उसकी कुल देनदारियों से अधिक है, जिससे वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है।

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित

5वीं में 80% और 8वीं में 74 % से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण
सत्र 2025-26 में पांचवीं में कुल 98.89 और आठवीं में 98.19 % हुआ परीक्षा फल

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग ने मंगलवार को कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। विद्यार्थी व अभिभावक राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल पर परिणाम देख सकते हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पुन: परीक्षा में कक्षा 5वीं में 80.42 एवं कक्षा 8वीं में 74.16 % परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं, मुख्य वार्षिक परीक्षा और पुन: परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या को मिलाकर इस सत्र में कक्षा 5वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.89 एवं कक्षा 8वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.19 प्रतिशत रहा है।

राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह ने बताया कि विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण उक्त परिणामों को राज्य शिक्षा केन्द्र के https://www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नम्बर डालकर देख सकते हैं। साथ ही शिक्षक, संस्था प्रमुख भी अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम इसी पोर्टल पर देख सकते हैं।

गौरतलब है कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा 16 से 23 जून के बीच कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 71, 548 तथा कक्षा 8वीं के 76, 274 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। इन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश में कुल 322 केन्द्र बनाए गए थे। 17, 000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई थी।

वहीं कक्षा पांचवीं में शासकीय स्कूलों के कुल 46, 665 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 36, 217 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा में 581 में से 352 विद्यार्थी पास हुए हैं, तो वहीं अशासकीय स्कूलों के 24, 302 विद्यार्थियों में से 20, 971 विद्यार्थी परीक्षा में पास हुए हैं। इसी प्रकार कक्षा 8वीं में शासकीय स्कूलों के कुल 56,738 विद्यार्थियों में से 40, 315 उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा के 423 में से 268 और अशासकीय विद्यालयों के 19, 113 में से 15,978 विद्यार्थी पास हुए हैं।

 

दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ तस्करी मामले में आरोपियों को 2 वर्ष का सश्रम कारावास

दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ तस्करी मामले में आरोपियों को 2 वर्ष का सश्रम कारावास

10 वर्ष पुराने प्रकरण में अदालत ने सुनाया फैसला, प्रत्येक पर ₹5 हजार का जुर्माना

भोपाल 

भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ की तस्करी से जुड़े लगभग 10 वर्ष पुराने मामले में 2 आरोपियों को 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय अपराध क्रमांक 59/2016 (दिनांक 22 अगस्त 2016) में 29 जून 2026 को सुनाया गया।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश तथा क्राइम ब्रांच भोपाल को प्राप्त सूचना के आधार पर 22 अगस्त 2016 को राहुल नगर झुग्गी बस्ती स्थित मंदिर के पास मुख्य मार्ग से 2 संदिग्धों को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में उनकी पहचान भोपाल निवासी अमन वामने और वरुण विश्वकर्मा के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद कपड़े के थैले से एक जीवित दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ बरामद किया गया। क्राइम ब्रांच ने वन्यजीव को विधिवत जब्त कर दोनों आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच के साथ स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश के तीन शासकीय अधिकारियों ने अभियोजन पक्ष के साक्षी के रूप में न्यायालय में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। विशेष लोक अभियोजकों की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

 

पाकिस्तान में बड़ा आतंकी हमला, पुलिस चौकी पर अंधाधुंध फायरिंग; 9 जवानों की मौत

इस्लामाबाद

आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि जियारत जिले में सोमवार देर रात आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने लगे। इस हमले में दो एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मी मारे गए। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने पांच जवानों को अगवा भी कर लिया है। वहीं, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें 15 आतंकवादी मारे गए।

घटना की पुष्टि करते हुए जियारत के पुलिस अधीक्षक अब्दुल कुदूस ने बताया कि हमलावरों ने मांगी फेज-तीन क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी को निशाना बनाया। रात भर चली गोलीबारी बेहद भीषण रही, जिसमें दोनों तरफ से भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ। मारे गए पुलिस अधिकारियों में मांगी थाने के एसएचओ मोहम्मद हुसैन, कोवास थाने के एसएचओ सोहबत खान और एंटी-टेररिस्ट फोर्स के इंचार्ज हेड कांस्टेबल सैफुल्लाह शामिल हैं। मारे गए जवानों के शवों को जियारत जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

हमले में टीटीपी का हाथ?
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि मांगी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया क्लियरेंस ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट, स्पेशल ऑपरेशंस विंग और एंटी-टेररिज्म फोर्स ने भाग लिया। शाहिद रिंद ने आगे बताया कि अभियान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 15 आतंकवादी मारे गए। रिंद ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित अभियान और तेज किए जाएंगे। वहीं, अगवा किए गए पांच पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने की घटना की निंदा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शरीफ ने कहा कि हम बलूचिस्तान की शांति को नुकसान पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं देंगे। शांति के दुश्मनों को पूरी तरह समाप्त किए बिना हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कायराना हमले न तो शांति भंग कर सकते हैं और न ही आतंकवाद के खिलाफ देश के दृढ़ संकल्प को कमजोर कर सकते हैं।

इलाके में तनाव, सड़कें जाम
हमले की खबर फैलते ही जियारत और आसपास के इलाकों में गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय कबीलों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस कारण सैकड़ों यात्री बसें और माल ढोने वाले वाहन सड़कों पर फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने कहा कि लापता जवानों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त सैन्य व पुलिस बल भेजे गए हैं।

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