राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, तकनीक आधारित नवाचारों तथा नागरिकों एवं किसानों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नागरिकों को बिना अनावश्यक कार्यालयीन आवागमन के गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

बैठक में डिजिटल किसान किताब एवं भूमि संबंधी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें तहसील अथवा पटवारी कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन एवं किसानों के जीवन से जुड़ा विभाग है, इसलिए शासन के सभी सुधारों एवं नवाचारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों का त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरबीसी 6-4 की ऑनलाइन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसके लागू होने पर आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध होगी। उन्होंने अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से संपादित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष बल देते हुए सीमांकन प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने तथा समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों की जिला-वार नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नकल शाखा को पूर्णतः ऑनलाइन करने के लिए इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया जाएगा। इससे प्रमाणित अभिलेखों का निर्गमन कुछ ही मिनटों में संभव होगा तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित ग्रामों, विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राजस्व अभिलेख तैयार हो सकें, भूमि अभिलेख अद्यतन हों तथा स्थानीय नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि एवं नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री एवं एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह एवं विश्वासपूर्ण राजस्व व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और इसे और अधिक प्रभावी बनाना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बैठक में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व सेवाएं केंद्रीकृत एवं पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर नागरिक हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए।

बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली, रेवेन्यू बोर्ड एवं संभागीय आयुक्त कार्यालयों में ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था, नक्शा डिजिटाइजेशन, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन तथा भू-अर्जन से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धमतरी, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में नक्शा परियोजना का पायलट कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक एवं अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, तहसीलों के अधोसंरचना विकास तथा तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

बैठक में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक, राजस्व विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, विशेष सचिव मती इफ़्फत आरा, संचालक भू-अभिलेख  विनीत नंदनवार, संयुक्त सचिव  अरविन्द एक्का सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा

रायपुर

    
ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0श् लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।
        
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।
      
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।

अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना
        
पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है।

उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी
     
यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है।

रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता
     

वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है।

जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर
     

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन
     

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी।

वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल   

छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया जाएगा “दीदी के गोठ” का वार्षिकोत्सव

रायपुर

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मा…h

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने की सौजन्य भेंट

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री  राधाकृष्ण किशोर ने सौजन्य भेंट की। 

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य ही नहीं हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जशपुर क्षेत्र का झारखंड से वर्षों पुराना आत्मीय जुड़ाव रहा है, जिसने दोनों राज्यों के लोगों के बीच विश्वास और निकटता को निरंतर मजबूत किया है।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा परस्पर अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।

गैर-मुस्लिम महिला से निकाह पर नए नियम, वक्फ बोर्ड में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य; उल्लंघन पर मौलाना पर कार्रवाई संभव

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में फर्जी निकाह रोकने छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने नए नियम बनाए हैं. गैर मुस्लिम महिला से निकाह के लिए अब वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलाना पर कार्रवाई हो सकती है.

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा, नए नियम के तहत अब वक्फ बोर्ड से रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा पाएंगे. अगर कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है तो पहले वक्फ बोर्ड से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा. इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. डॉ. सलीम राज ने कहा, बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. केवल रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा सकेंगे.

वक्फ बोर्ड का कहना है कि इससे फर्जी पहचान, दस्तावेज छिपाकर विवाह कराने और विवादित मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी. हर निकाह का पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा. निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड के माध्यम से जारी किया जाएगा. वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली हैं, इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीथमपुर में लियूगोंग इंडिया के मेन्युफेक्चरिंग यूनिट का 8 जुलाई को करेंगे भूमि-पूजन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 8 जुलाई को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लियुगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नए विनिर्माण संयंत्र का भूमि-पूजन करेंगे। चीन की अग्रणी बहुराष्ट्रीय निर्माण उपकरण निर्माता कंपनी गुआंग्शी लियुगोंग मशीनरी कंपनी लिमिटेड की भारतीय इकाई द्वारा किया जा रहा यह विस्तार मध्यप्रदेश को निर्माण उपकरण विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

पीथमपुर में स्थापित होने वाला नया संयंत्र लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 272 करोड़ रूपये का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र में प्रारंभिक चरण में प्रतिवर्ष 6,500 निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से एक्सकेवेटर का निर्माण किया जाएगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम होगी तथा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

लियुगोंग विश्व की अग्रणी निर्माण उपकरण निर्माता कंपनियों में शामिल है तथा व्हील लोडर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी पहचान रखती है। कंपनी व्हील लोडर, एक्सकेवेटर, मोटर ग्रेडर, माइनिंग डंप ट्रक, बुलडोजर, स्किड-स्टियर लोडर, फोर्कलिफ्ट, कोल्ड प्लेनर तथा अन्य आधुनिक निर्माण एवं खनन उपकरणों का निर्माण करती है।

कंपनी वर्ष 2008 से पीथमपुर में अपनी विनिर्माण इकाई का संचालन कर रही है। 44 एकड़ से अधिक क्षेत्र में स्थापित इस संयंत्र में प्रतिवर्ष 3 हजार व्हील लोडर एवं मोटर ग्रेडर के निर्माण की क्षमता है। वर्ष 2009 में इसी इकाई से पहला मेड इन इंडिया व्हील लोडर तैयार किया गया था। पीथमपुर स्थित इकाई में अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित हैं, जहां 500 से अधिक भारतीय युवा पेशेवर कार्यरत हैं। यह इकाई मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

देशभर में सड़क निर्माण, खनन, जलविद्युत एवं पाइपलाइन परियोजनाओं सहित विभिन्न आधारभूत संरचना कार्यों में कंपनी के 4 हजार से अधिक निर्माण उपकरण उपयोग में लाए जा रहे हैं। पीथमपुर में प्रस्तावित नया संयंत्र इस बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, उत्कृष्ट औद्योगिक अधोसंरचना, सरल प्रक्रियाओं तथा निवेशक हितैषी नीतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक निवेश केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लियुगोंग इंडिया का यह विस्तार राज्य में बढ़ते वैश्विक निवेशकों के विश्वास की एक और बड़ी मिसाल बनेगा।

 

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों से टी.टी. नगर स्टेडियम में मिले मंत्री सारंग

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों से टी.टी. नगर स्टेडियम में मिले मंत्री सारंग

खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन कहा – मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रचेंगे नया इतिहास
सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

भोपाल

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को टी.टी. नगर स्टेडियम में आगामी एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद कर उनकी तैयारियों, प्रशिक्षण, फिटनेस और आगामी प्रतियोगिताओं को लेकर विस्तार से चर्चा की तथा उन्हें शुभकामनाएं देते हुए पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का आह्वान किया।

मंत्री सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के लिए मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का बड़ी संख्या में चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। यह उपलब्धि खिलाड़ियों के अथक परिश्रम, प्रशिक्षकों के समर्पण तथा प्रदेश सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और यहां के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। खिलाड़ियों को आधुनिक खेल अधोसंरचना, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक कोचिंग, खेल विज्ञान, पोषण, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को हर स्तर पर आवश्यक सहयोग और अवसर प्राप्त हों।

मंत्री सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश के लिए गौरव अर्जित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्हें पूरा विश्वास है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ अपनी तैयारियां जारी रखें। पूरे प्रदेश की शुभकामनाएं और विश्वास उनके साथ हैं। उन्होंने प्रशिक्षकों और खेल विभाग के अधिकारियों की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्पण का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि आगामी एशियन गेम्स के लिए मध्यप्रदेश के 22 खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल विधाओं में क्वालिफाई किया है। इनमें एथलेटिक्स, शूटिंग, रायफल, कैनो स्लालम, कैनोइंग, कायाक, शॉटगन, क्लाउड जुडो, घुड़सवारी सहित विभिन्न खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से प्रदेश को उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने की बड़ी उम्मीदें हैं।

इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव संजीव सिंह, संचालक अंशुमन यादव, उपसचिव अजय श्रीवास्तव, खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षक, खेल अकादमियों के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। मंत्री सारंग ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनके साथ खड़ा है और उन्हें विश्वास है कि वे अपने प्रदर्शन से देश और प्रदेश को गौरवान्वित करेंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीथमपुर में लियूगोंग इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का 8 जुलाई को करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीथमपुर में लियूगोंग इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का 8 जुलाई को करेंगे शुभारंभ

परियोजना 20 एकड़ क्षेत्र में होगी विकसित
2.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर का होगा निवेश

पीथमपुर 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 8 जुलाई को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लियुगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नए विनिर्माण संयंत्र का भूमि-पूजन करेंगे। चीन की अग्रणी बहुराष्ट्रीय निर्माण उपकरण निर्माता कंपनी गुआंग्शी लियुगोंग मशीनरी कंपनी लिमिटेड की भारतीय इकाई द्वारा किया जा रहा यह विस्तार मध्यप्रदेश को निर्माण उपकरण विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

पीथमपुर में स्थापित होने वाला नया संयंत्र लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग 2.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र में प्रारंभिक चरण में प्रतिवर्ष 6,500 निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से एक्सकेवेटर का निर्माण किया जाएगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम होगी तथा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

लियुगोंग विश्व की अग्रणी निर्माण उपकरण निर्माता कंपनियों में शामिल है तथा व्हील लोडर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी पहचान रखती है। कंपनी व्हील लोडर, एक्सकेवेटर, मोटर ग्रेडर, माइनिंग डंप ट्रक, बुलडोजर, स्किड-स्टियर लोडर, फोर्कलिफ्ट, कोल्ड प्लेनर तथा अन्य आधुनिक निर्माण एवं खनन उपकरणों का निर्माण करती है।

कंपनी वर्ष 2008 से पीथमपुर में अपनी विनिर्माण इकाई का संचालन कर रही है। 44 एकड़ से अधिक क्षेत्र में स्थापित इस संयंत्र में प्रतिवर्ष 3 हजार व्हील लोडर एवं मोटर ग्रेडर के निर्माण की क्षमता है। वर्ष 2009 में इसी इकाई से पहला मेड इन इंडिया व्हील लोडर तैयार किया गया था। पीथमपुर स्थित इकाई में अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित हैं, जहां 500 से अधिक भारतीय युवा पेशेवर कार्यरत हैं। यह इकाई मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

देशभर में सड़क निर्माण, खनन, जलविद्युत एवं पाइपलाइन परियोजनाओं सहित विभिन्न आधारभूत संरचना कार्यों में कंपनी के 4 हजार से अधिक निर्माण उपकरण उपयोग में लाए जा रहे हैं। पीथमपुर में प्रस्तावित नया संयंत्र इस बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, उत्कृष्ट औद्योगिक अधोसंरचना, सरल प्रक्रियाओं तथा निवेशक हितैषी नीतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक निवेश केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लियुगोंग इंडिया का यह विस्तार राज्य में बढ़ते वैश्विक निवेशकों के विश्वास की एक और बड़ी मिसाल बनेगा।

 

MP में 10 साल बाद प्रमोशन प्रक्रिया को मिली रफ्तार, 190 तहसीलदार बने डिप्टी कलेक्टर; देखें पूरी सूची

भोपाल
 मध्य प्रदेश सरकार ने करीब एक दशक से लंबित तहसीलदारों की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया को पूरा करते हुए 190 तहसीलदार, अधीक्षक भू-अभिलेख (एसएलआर) और प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 7 जुलाई को इस संबंध में आदेश जारी किए।

इस फैसले के साथ वर्षों से रुकी पदोन्नतियों का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, फिलहाल पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही कार्य करते रहेंगे।

राजस्व विभाग से जीएडी के अधीन आए अधिकारी

सरकार के आदेश के अनुसार, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सभी पदोन्नत अधिकारियों को राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही वे अब राजस्व विभाग के बजाय सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में माने जाएंगे।

आदेश में उन अधिकारियों को भी पदोन्नति का लाभ दिया गया है, जिन्होंने पहले प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अथवा अधीक्षक भू-अभिलेख के रूप में कार्य करने की स्वीकृति दी थी, लेकिन कार्यवाहक उच्च पद का प्रभार ग्रहण नहीं किया था।

5400 ग्रेड पे पर होंगे पदोन्नत
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के साथ ही एक बड़ा ढांचागत बदलाव भी हुआ है. अब तक ये अधिकारी राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत थे लेकिन इस नियमित पदोन्नति के बाद इन सभी 190 अधिकारियों को सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) का अधिकारी माना जाएगा. जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान (पे-मैट्रिक्स लेवल-12, 15600-39100 + 5400 ग्रेड पे) में पदोन्नत किया गया है। 

प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
सरकार के इस निर्णय से लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही जिला प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने से प्रशासनिक कार्यों में भी गति आएगी।

अब नायब तहसीलदारों की पदोन्नति की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक अब राजस्व विभाग नायब तहसीलदारों की पदोन्नति प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर सकता है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्तमान में प्रभारी तहसीलदार के रूप में कार्यरत करीब 200 नायब तहसीलदारों को नियमित तहसीलदार पद पर पदोन्नत करने के आदेश अगले एक-दो दिनों में जारी हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में बैकलॉग भर्ती होगी तेज, मुख्य सचिव ने सचिवों को दिए खाली पद भरने के निर्देश

रायपुर.

मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों की भर्ती के लिए शीघ्र कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए है।

मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने शासन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों के अंतर्गत भू-अर्जन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव आर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव भुवनेश यादव सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।

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