धार भोजशाला केस: मुस्लिम पक्ष सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ जोड़ने की करेगा मांग

धार.

धार के ऐतिहासिक भोजशाला प्रकरण में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने अपनी कानूनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी का कहना है कि वह 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में मामले का मेंशन कर सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध करेगी, ताकि विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों की समग्र सुनवाई हो सके।

सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष ने पहले ही कैविएट दायर कर दी है। इस दशा में सुप्रीम कोर्ट हिंदू पक्ष की दलील सुने बिना कोई अंतरिम राहत या स्थगन (स्टे) आदेश पारित नहीं करेगा। धार के बहुचर्चित भोजशाला प्रकरण में एक बार फिर कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में संभावित सुनवाई को देखते हुए मुस्लिम पक्ष अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गया है। इस सिलसिले में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के साथ समन्वय भी किया जा रहा है।

कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने बताया कि आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले का मेंशन कराया जाएगा। उनका कहना है कि उनकी मांग रहेगी कि भोजशाला विवाद से जुड़ी विभिन्न अदालतों में लंबित सभी याचिकाओं और प्रकरणों को एक साथ सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाए, जिससे अलग-अलग स्तर पर लंबित मामलों का समग्र निराकरण हो सके।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में मुस्लिम समाज पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी तैयारी कर रहा है। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी आवश्यक कानूनी सहयोग उपलब्ध करा रही हैं। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल यह है कि सभी संबंधित पक्षों की दलीलें एक ही मंच पर सुनी जाएं और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।

ओमान तट जहाज हमले में 10 भारतीय सुरक्षित, एक की तलाश जारी

नई दिल्ली
विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान तट पर एक कमर्शियल जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में बताया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी लापता है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ओमान के तट पर वाणिज्यिक जहाज ‘जीएफएस गैलेक्सी’ को निशाना बनाकर किए गए इस हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था. जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 को तो बचा लिया गया, लेकिन एक लापता भारतीय की तलाश अभी-भी जारी है. ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और चल रहे सर्च-रेस्क्यू ऑपरेशन में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है. भारत ने संकट के इस समय में सहयोग देने के लिए ओमान के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है.

मंत्रालय ने अपने बयान में इस बात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं जो बेहद चिंताजनक हैं. भारत सरकार ने वैश्विक मंच से एक बार फिर दोहराया है कि क्षेत्र में तनाव को तुरंत कम (डी-escalate) किया जाना चाहिए. इसके साथ ही जारी राजनयिक वार्ताओं को किसी तार्किक और शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचाया जाना बेहद जरूरी है, ताकि पूरे क्षेत्र में फिर से शांति और स्थिरता लौट सके.

भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने का ये सिलसिला अब हर हाल में बंद होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सिद्धांतों के अनुरूप, क्षेत्र के सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से मुक्त और बेरोकटोक नौवहन तथा वाणिज्यिक गतिविधियों को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक व्यापार सुरक्षित तरीके से चल सके.

अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज, हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट अनिश्चितकाल के लिए बंद हुआ।

नई दिल्ली
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की जंग एक बार फिर से जोर पकड़ रही है। शनिवार देर रात अमेरिका ने ईरान के ऊपर आरोप लगाया कि उसने साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज पर हमला किया है। इसके बाद अमेरिका की तरफ से ईरान के करीब 140 ठिकानों पर हमला किया गया। इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और कुवैत, बहरीन समेत मिडिल ईस्ट में मौजूद तमाम यूएस ठिकानों और लॉजिस्टिक्स बेसों को निशाना बनाया।’इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका आगे हमला करता है, तो वह तगड़ा पलटवार करेगा।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ, जब ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज के ऊपर क्रज मिसाइल से हमला कर दिया। साइप्रस के झंडे वाले इस जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और एक क्रू मेम्बर लापता हो गया। इसके बाद सेंटकॉम ने कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बुशहर, जस्क जैसे तमाम शहरों में धमाकों की आवाजें सुनाई दी हैं। अमेरिका ने इस हमले के बाद खुले तौर पर कहा कि ईरान ने होर्मुज से निकलने वाले जहाज पर हमला करके गलत किया है। इसका उन्हें जवाब दिया गया है।

ईरान ने साइप्रस के जहाज पर हमले की बात स्वीकारी
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने उस जहाज को रोकने की कोशिश की थी। लेकिन वह ट्रांसपोंडर बंद करके लगातार आगे बढ़ता रहा। इसके बाद उसे रोकने के लिए गोलियां चलाई गईं, लेकिन जब वह नहीं रुका। तो उस पर क्रूज मिसाइल दागी गई। विशेषज्ञों के मुताबिक मामला यहीं बिगड़ गया। शुक्रवार को ही ट्रंप ने ऐलान कर दिया था कि सीजफायर खत्म हो चुका है। अब अगर ईरान कोई हरकत करता है, तो वह हजारों मिसाइलें पहले ही उनकी तरफ तानकर बैठे हैं।

अमेरिका का मानना है कि होर्मुज को पूरी तरह से सब के लिए खुला रहना चाहिए। लेकिन अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। ईरान की तरफ से साफ किया जा चुका है कि होर्मुज से अगर किसी को निकलना है, तो उसे तेहरान की इजाजत लेनी होगी।

हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अनिश्चितकाल के लिए किया बंद
अमेरिका की तरफ से हुए हमले और फिर ईरान के पलटवार के बाद एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट पर संकट खड़ा हो गया है। IRGC की तरफ से कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट फिलहाल बंद है। यह तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करना बंद नहीं कर देता। ईरान ने इसके साथ ही बताया कि उनकी मंजूरी के बिना स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे एक और जहाज को निशाना बनाया गया है।

ईरान के इस ऐलान के बाद एक बार फिर से वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा होना शुरू हो गया है। 60 दिनों का युद्धविराम समाप्त होने के बाद एक बार फिर से अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर हैं।

16 जून को हुई डील का सम्मान करे अमेरिका-ईरान
इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच ईरान ने अमेरिका से 16 जून को हुई डील का सम्मान करने के लिए कहा है। ईरानी सेना की तरफ से कहा गया कि अमेरिका को 16 जून को हुई डील का सम्मान करना चाहिए। अगर अमेरिका इसे नहीं मानता है, तो ईरान को अपने हितों की रक्षा के लिए पश्चिम एशिया में मौजूद सभी यूएस ठिकानों को निशाना बनाना पड़ेगा। वहीं, दूसरी तरफ ईरान की तरफ से अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने वाले गालिबेफ ने कहा कि अब एक तरफा डील करने का दौर खत्म हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “एक तरफा डील करने का दौर अब खत्म हो गया है। हमने कहा था कि या तो अपने शब्दों पर कायम रहना या फिर कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना। हकीकत अब आपके सामने है।”

इसके साथ ही गालिबेफ ने डील के आर्टिकल 5 का भी जिक्र किया। इसमें लिखा था कि ईरान होर्मुज से निकलने वाले जहाजों के लिए रास्ता तैयार करेगा और सुरक्षा की व्यवस्था करेगा।

आपको बता दें, दोनों देशों के बीच में यह युद्ध ऐसे समय में बढ़ता दिख रहा है, जब दोनों देश शांति वार्ता में लगे हुए हैं। हालांकि, दोनों के बीच में अविश्वास की खाई काफी गहरी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पश्चिम एशिया से अपने ठिकाने हटाने होंगे, वहीं अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियार न रखने और होर्मुज को पूरी तरह से खुला रखने का दबाव बना रहा है।

हाल ही में खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के नारे लगाए गए थे। इसका जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा था कि अगर उनके ऊपर कोई हत्या का प्रयास किया जाता है, तो उन्होंने पहले ही आदेश दे दिए हैं। 1000 से ज्यादा मिसाइलें ईरान की तरफ रुख किए हुए हैं। कुछ गलत होने पर ईरान को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा।

नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, इजरायल में नई राजनीतिक बहस तेज हुई

 नई दिल्ली
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के परिवार से जुड़ा एक और नया विवाद सामने आया है। नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर योनातन हुन कर लिया है। लीक हुए डेटा के मुताबिक, नेतन्याहू के बेटे ने यह काम पिछले दो सालों के दौरान ही किया है। क्योंकि 2024 में टैक्स भरने के दौरान उन्होंने अपने जन्म वाले नाम का ही प्रयोग किया था। लेकिन 2026 में जब उन्होंने टैक्स फाइलिंग की, तो अपना नाम बदलकर ‘योनातन हुन’ कर लिया है।

इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू परिवार टैक्स और भ्रष्टाचार के मामलों में फंसा हुआ है। ऐसे में प्रधानमंत्री के बड़े बेटे के इस कदम को भी शक की नजर से देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि 34 साल के एक्टिविस्ट और पीएम नेतन्याहू के बेटे ने किन वजहों से यह नाम बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने नाम में यह बदलाव रेगुलेटरी अपडेट उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किया गया है। इसमें उन्होंने अपना रेसिडेंशियल एड्रेस बस ‘बाल्फोर 0’ के नाम से दिया है। यह एड्रेस इजरायल के प्रधानमंत्री आवास की तरफ इशारा करता है।

नाम बदलने के मकसद को लेकर लोगों में छिड़ी बहस
पिछले कई सालों से युद्ध में उलझे इजरायल के लोगों के बीच में प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर काफी चर्चा है। लोग इस फैसले के पीछे के मकसद को लेकर बंटे हुए हैं। क्योंकि एक तरफ जहां युद्ध के लिए सभी रिजर्व सैनिकों को बुलाया जा चुका है, वहीं 34 वर्षीय योनातन हुन 2023 से फ्लोरिडा में रह रहे हैं। विदेश में रहने की वजह से इजरायल में उनकी कड़ी आलोचना भी हुई थी। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने युद्ध में लड़ने से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई है, वहीं कई लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं।

‘योनातन हुन’ नाम में है ऐतिहासिक संदर्भ
इजरायल के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार ने भले ही बेटे के नाम बदलने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हो, लेकिन लोगों ने इसका मतलब निकालना शुरू कर दिया है। इजरायली मीडिया के मुताबिक उनका पहला नाम ‘योनातन’ मुख्य रूप से उनके चाचा ;योनी नेतन्याहू’ को श्रद्धांजलि है। वह 1976 में एक युगांडा में एक मिशन को दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद वह इजरायल में एक हीरो के तौर पर देखे जाने लगे थे। बेंजामिन नेतन्याहू के शुरुआती करियर के दौरान उन्हें इसका काफी फायदा मिला था।

दूसरी ओर ‘हुन’ नाम नेतन्याहू परिवार की पुरानी जड़ों की पहचान करवाता है। नेतन्याहू परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल में आकर बसे थे, तब उनका नाम बेन नहीं था। यह नाम उन्होंने यहां इजरायल में आकर ही परिवर्तित किया था। आते समय उनका नाम सैमुअल हुन था। इन्हीं की याद में नेतन्याहू के बड़े बेटे ने अपना नाम के दूसरे शब्द में हुन शब्द का प्रयोग किया है। हालांकि, इससे पहले भी युवा नेतन्याहू अपने एक पॉडकॉस्ट के दौरान यायर हुन नाम का प्रयोग कर चुके हैं। लेकिन अब सरकारी काम में उपयोग करने से यह नाम पक्का हो चुका है।

इजरायल के प्रधानमंत्री के बेटे द्वारा नाम बदलने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नेतन्याहू या उनके ऑफिस की तरफ से भी इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।

नए वोटर बनने के नियम बदले, माता-पिता की वोटर जानकारी भी देनी होगी।

 नई दिल्ली
देश के कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद नए वोटर बनने के नियमों में भी परिवर्तन किया गया है। चुनाव आयोग के फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। इसके मुताबिक अब नए वोटर्स को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए बताना होगा कि पिछले एसआईआर में उनके माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम दर्ज था या नहीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह बदलाव अभी केवल ऑनलाइन फॉर्म में ही दिखाई दे रहा है। वहीं वेबसाइट से फॉर्म की हार्ड कॉपी डाउनलोड करने में यह ऑप्शन नहीं दिखाई देता है।

बता दें कि 10 राज्यों में एसआईआर के बाद कम से कम 5.58 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। ऐसे में उन परिवारों के नए मतदाताओं के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि यह बात स्पष्ट नहीं की गई है कि अगर किसी के माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट में नहीं है तो उनके बच्चों या फिर पोते पोतियों का नाम शामिल किया जाएगा या नहीं ।

बंगाल में एसआईआर को लेकर खूब हुआ विवाद
पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई थी। इसको लेकर खूब विवाद भी हुआ। अकेले पश्चिम बंगा में 27 लाख वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया और वे विधानसभा चुनाव में वोट भी नहीं कर पाए।

चुनाव आयोग के ECINRT पोर्टल पर उपलब्ध डिक्लेरेशन फॉर्म 6 में ‘J’ और ‘K’ सेक्शन को जोड़ा गया है। इसी में आवेदक के माता पिता या फिर दादा दादी की डीटेल मांगी गई है। इसमें तीन ऑप्शन दिए गए हैं।

पहला विकल्प- मेरा नाम पिछळी एसआईआर मतदाता सूची में है
दूसरा विकल्प- मेरे माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में है

तीसरा विकल्प- ना तो मेरा और ना ही मेरे पाता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर मतदाता सूची में था

तीसरा विकल्प चुनने पर क्या होगा?
अब अगर आवेदक पहला और दूसरा विकल्प चुनता है तो उससे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची का सीरियल नंबर भी भरना होगा। अगर तीसरा विकल्प चुनता है तो आगे कोई डीटेल नहीं मांगी जाएगी। हालांकि इस कॉलम को अनिवार्य नहीं बताया गया है। यह भी नहीं बताया गया है कि तीसरा विकल्प चुनने पर आगे क्या होगा।

यह विकल्प उन राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर है जिनमें 2025-26 में एसआईआर किया गया है। हालांकि बिहार को इससे अलग रखा गया है। बिहार में सबसे पहले एसआईआर करवाया गया था। वहीं असम में एसआईआर नहीं करवाया गया है। बता दें कि पिछले साल जून में एसआईआर शुरू होने के बाद से फॉर्म- 6 में कोई सुधार नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग नहीं बदल सकता है फॉर्म-6
केंद्र सरकार के पास रिप्रजंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट 1950 सेक्शन 28 के तहत नियमों में बदलाव करने का अधिकार है। हालांकि संविधान के आर्टिकल 326 के मुताबिक भारत में रहने वाले वयस्क को वोटर लिस्ट में नाम शामिल करवाने का अधिकार है, जब तक कि उसे किसी वजह से अयोग्य ना ठहराया गया हो। सेक्शन 28 में कहा गया है कि चुनाव आयोग से सलाह करने के बाद केंद्र सरकार ऑफिशल गजेट में नोटिफिकेशन जारी करके नियम बना सकती है।

एक अधिकारी ने कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव करने से पहले कानून मंत्रालय का नोटिफिकेशन जारी करना जरूरी है। यह अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। उन्होंने कहा चुनाव आयोग अपने मन से फॉर्म में एक कॉमा भी नहीं लगा सकता है। वहीं 2021 में संसद में कानून में संशोधन करके चुनाव आयोग को मतदाताओं के आधार कार्ड लेने का अधिकार दिया गया था। 17 फरवरी 2022 को इसका नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था।

तमिलनाडु में ऑपरेशन L तेज, AIADMK के 10 विधायक जल्द TVK में शामिल होंगे।

नई दिल्ली
तमिलनाडु की राजनीति में इस समय एक बड़ा सियासी भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्रि कड़गम (TVK) बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है। खबर आ रही है कि मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) के करीब 10 और असंतुष्ट विधायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर 15 अगस्त से पहले औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो सकते हैं। विजय की पार्टी के भीतर इस योजना को ऑपरेशन एल (Operation L) का नाम दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि विधायकों के इस्तीफे की यह टाइमिंग बेहद सोच-समझकर तय की गई है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही विधानसभा उपचुनावों का ऐलान कर सकता है। वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “इस्तीफे और दलबदल की यह पूरी प्रक्रिया स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरी कर ली जाएगी। मुख्य उद्देश्य यह है कि चुनाव आयोग द्वारा उपचुनावों की तारीखों की घोषणा करने से पहले इसे अंतिम रूप दे दिया जाए।”

यह राजनीतिक उठापटक पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जारी है। मई महीने में जिन 25 AIADMK विधायकों ने अपनी ही पार्टी के व्हिप का उल्लंघन कर सरकार बनाने के लिए विजय का समर्थन किया था, उनमें से लगभग आधे या तो TVK का दामन थाम चुके हैं या शामिल होने की कगार पर हैं।

तमिलनाडु में क्या है सीटों का गणित
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा की वर्तमान में 227 विधायकों की क्षमता है। 7 सीटें फिलहाल खाली हैं। सत्तारूढ़ TVK के 107 विधायक हैं। वहीं, विपक्षी AIADMK में लगातार इस्तीफों के कारण घटकर विधायकों की संख्या 41 हो गई है। हाल ही में एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री सी. विजयभास्कर और एम. आर. विजयभास्कर ने अपने पद से इस्तीफा देकर TVK की सदस्यता ली थी। इनके अलावा पूर्व मंत्री एम.एस.एम. आनंदन, एस. वलारमथी और कई पूर्व विधायक व जिला स्तरीय पदाधिकारी भी पाला बदल चुके हैं। इससे विपक्ष लगातार कमजोर हो रहा है और सत्तारूढ़ दल बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है।

सूत्रों का दावा है कि बागी विधायकों के अगले जत्थे में एआईएडीएमके के सबसे बड़े और प्रभावशाली क्षेत्रीय क्षत्रप माने जाने वाले एस. पी. वेलुमणि और सी. वी. शनमुगम के करीबी नेता शामिल हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक ये दोनों दिग्गज नेता खुद भी टीवीके में शामिल हो सकते हैं।

कैबिनेट मंत्री पद और टिकट का भरोसा
इस्तीफा देने वाले विधायकों को आगामी उपचुनावों में TVK के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा। वरिष्ठ नेताओं से वादा किया गया है कि दोबारा जीतकर आने पर उन्हें विजय मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री का पद सौंपा जाएगा। अन्य नेताओं को संगठन में जिला सचिव या राज्य स्तर पर पदाधिकारी बनाकर समायोजित किया जाएगा।

पलानीस्वामी पर तानाशाही के आरोप
पाला बदलने की तैयारी कर रहे एआईएडीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आंतरिक कलह को उजागर करते हुए कहा कि यह कदम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि सालों की हताशा का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया, “पलानीस्वामी यानी कि EPS अपने आखिरी दिन तक पार्टी के महासचिव बने रहना चाहते हैं। जिला सचिव का पद छिन जाने के बाद भी हम में से कई लोगों ने इंतजार किया, लेकिन संकट को सुलझाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं हुआ।” एआईएडीएमके द्वारा वेलुमणि जैसे बड़े नेताओं के वफादार जिला सचिवों को हटाए जाने के कारण पार्टी के भीतर असंतोष की आग और भड़क गई थी।

वाशिंग मशीन से तुलना
इस पूरे दलबदल पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस खेल के पीछे भारी-भरकम वित्तीय प्रलोभन यानी कि हॉर्स-ट्रेडिंग शामिल है। इसके अलावा डीएमके (DMK) के नेताओं ने तंज कसते हुए इसे पॉलिटिकल वाशिंग मशीन करार दिया है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच का सामना कर रहे पूर्व मंत्रियों जैसे कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर को बचाने के लिए यह सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। हालांकि, टीवीके ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कानूनी जांच अपनी जगह स्वतंत्र रूप से चलती रहेगी

इस बार मुख्यमंत्री विजय की रणनीति अन्य राजनीतिक दलों से काफी अलग है। वे थोक में दलबदल कराने के बजाय चरणों में नेताओं को शामिल कर रहे हैं। साथ ही वे इस बात पर अड़े हैं कि किसी भी विपक्षी विधायक को पार्टी के सिंबल पर रहते हुए शामिल नहीं किया जाएगा। उन्हें पहले इस्तीफा देना होगा और फिर उपचुनावों के जरिए जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करना होगा।

चुनाव के बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में कम से कम 5 बड़े एआईएडीएमके चेहरों को जगह मिल सकती है। इस कदम से मुख्यमंत्री विजय न केवल सहयोगियों पर अपनी निर्भरता कम करेंगे, बल्कि राज्य के जमीनी स्तर पर मजबूत विपक्षी चुनावी मशीनरी को अपनी नई नवेली पार्टी में समाहित कर लेंगे

दतिया टिकट विवाद के बाद नरोत्तम मिश्रा नरम पड़े, बीजेपी उम्मीदवार का करेंगे समर्थन।

भोपल
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. इन उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मध्य प्रदेश सरकार में कभी नंबर दो यानी गृह मंत्री रह चुके नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है. बीजेपी ने नरोत्तम की जगह एक अन्य ब्राह्मण चेहरे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी की ओर से यह ऐलान किए जाने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थक भड़क उठे.

दतिया उपचुनाव में टिकट कटने के बाद समर्थक हिंसक प्रोटेस्ट पर उतर आए. चर्चे नरोत्तम के निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरने के भी होने लगे. शिवसेना (यूबीटी) ने तो यहां तक ऑफर दे दिया कि मशाल पर चुनाव लड़िए, उद्धव ठाकरे खुद प्रचार करने दतिया आएंगे. पिछले दो दिन से बनी असमंजस की स्थित के बीच नरोत्तम मिश्रा के सुर अब नरम पड़ते नजर आ रहे हैं.

नरोत्तम मिश्रा ने शनिवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल से मुलाकात की थी. अब नरोत्तम मिश्रा दिल्ली रवाना हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक रविवार की सुबह नरोत्तम मिश्रा ने पहली फ्लाइट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी.

चर्चा है कि दिल्ली में नरोत्तम मिश्रा बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर सकते हैं. नितिन नवीन के साथ उनकी मुलाकात के दौरान दतिया के हालिया घटनाक्रम पर चर्चा हो सकती है. एक दिन पहले सीएम मोहन यादव और पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं के साथ बैठक के बाद नरोत्तम मिश्रा के तेवर बदले नजर आ रहे हैं.

उन्होंने संगठन को सर्वोपरि बताते हुए इस बात का ऐलान कर दिया कि वह दतिया सीट से बीजेपी उम्मीदवार आशीष तिवारी के नामांकन में शामिल रहेंगे. नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रमुख नेताओं से मुलाकात के बाद कहा कि बैठक में अच्छी चर्चा हुई. हमने दतिया में जीत सुनिश्चित करने को लेकर बातचीत की. उन्होंने दतिया में बीजेपी की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा. अपने समर्थकों से कहा है कि धैर्य और शांति बनाए रखें. नरोत्तम मिश्रा ने यह भी कहा कि दतिया पहुंचकर आशुतोष तिवारी के नामांकन में मौजूद रहूंगा.

वहीं, मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी ने आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है. कुछ कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे दिए हैं, लेकिन कोई इस्तीफा मुझे नहीं मिला है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व ने तय किया है कि कोई भी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा. नरोत्तम मिश्रा को बीजेपी का वरिष्ठ नेता बताते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हम उनके ही मार्गदर्शन में चुनाव लड़ेंगे और बड़े अंतर से जीतेंगे.

एमपी बीजेपी ने भी बयान जारी कर बैठक में चुनाव की तैयारियों और संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा की जानकारी दी. एमपी बीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बैठक में यह तय किया गया कि संगठन सबसे ऊपर है और बीजेपी के सभी कार्यकर्ता पार्टी के निर्णय के साथ मजबूती से खड़े हैं. कुछ कार्यकर्ताओं ने भावनाओं में आकर इस्तीफे दिए हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा. सभी मिलकर आशुतोष तिवारी को विजयी बनाने के लिए काम करेंगे.

बैठक के बाद नरोत्तम मिश्रा के बयान में अच्छी चर्चा, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा जैसे शब्दों का होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उनको सम्मानजनक तरीके से कहीं एडजस्ट करने का आश्वासन सरकार और संगठन की ओर से मिला है. इससे पहले, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने उम्मीदवार बदलने के कयासों पर विराम लगाते हुए कहा था कि बीजेपी में इस तरह की परंपरा नहीं है.

दतिया चैप्टर पर कांग्रेस ने घेरा
वहीं, दतिया में बीजेपी उम्मीदवार के ऐलान के बाद घटनाक्रम पर विपक्षी कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस की जीत का दावा करते हुए कहा कि बीजेपी चुनाव हारने जा रही है. बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या के लिए कोर्ट का इस्तेमाल किया. उन्होंने भरोसा जताया कि दतिया की जनता कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को हटाने की साजिश का जवाब देगी.

जीतू पटवारी ने दतिया में नरोत्तम समर्थकों के हिंसक प्रोटेस्ट को लेकर प्रशासन पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि जो जिलाधिकारी-पुलिस अधीक्षक कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए. कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी तंज करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में बीजेपी बनाम बीजेपी की लड़ाई साफ दिखाई दे रही है. यह लोकतांत्रिक पार्टी नहीं है, जहां कार्यकर्ता अपनी बात रख सकें. असंतोष सड़कों पर दिखाई दे रहा है.

दतिया में 30 जुलाई को उपचुनाव
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर 2023 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने हरा दिया था. राजेंद्र भारती को पिछले दिनों धोखाधड़ी के मामले में दोषसिद्धि के बाद विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहरा दिया गया था. राजेंद्र भारती की अयोग्यता के बाद रिक्त हुई दतिया सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. उपचुनाव में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है. मतदान 30 जुलाई को होगा और नतीजे 3 अगस्त को आने हैं.
 

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ट्रंप की 1000 मिसाइलों वाली धमकी से मचा हड़कंप

नई दिल्ली
ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को एक हवाई हमले से हुई थी जिसमें 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. ईरान ने इस सप्ताह खामेनेई को दफनाया. इससे पहले कई दिनों तक अंतिम संस्कार समारोह चला, जिसमें उनके शव को ईरान और इराक दोनों देशों के शहरों में ले जाया गया. खामेनेई की अंतिम यात्रा के बाद सुलह से ज्यादा संग्राम का जो डर लग रहा था, वो सही साबित होता दिख रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं.

वहीं सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अब बातचीत से इनकार कर दिया है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रुख से पीछे नहीं हटता, तब तक किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं होगी.

बता दें, इस पूरे हफ्ते अमेरिका और ईरान में सिर्फ बयानों का वार-पलटवार ही नहीं हुआ, मिसाइलों का प्रहार भी जमकर हुआ. होर्मुज में जहाजों पर हमलों से शुरू हुई लड़ाई कुछ ही घंटों में ईरान के अलग-अलग शहरों में बमबारी तक पहुंच गई.

एक तरफ ईरान अली खामेनेई को दफनाने की तैयारियों में जुटा था तो दूसरी तरफ उसे अमेरिका के हमले का जवाब देने के लिए कतर और बहरीन तक सैन्य ठिकानों पर निशाने लगाने पड़े. दोनों इतने पर ही नहीं रुके. अमेरिका ने तेहरान के आसपास कई इलाकों में ताबड़तोड़ हमले किए, पुल उड़ा डाले और ऑयल रिफाइनरी तक को निशाना बनाया.

वहीं, ईरान ने तेल अवीव और कई इलाकों में इजरायल के मिलिट्री बेस को बर्बाद कर दिया. सीजफायर की धज्जियां उड़ाते इन हालातों ने ट्रंप का गुस्सा और बढ़ा दिया. पहले उन्होंने बयान दिया कि हमने अच्छे होने की वजह से ईरान को एक हफ्ते की छुट्टी दी है ताकि वो अपने नेता को अंतिम विदाई दे पाएं, फिर ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध में हमारे हाथों पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. लेकिन अब ट्रंप का जो ताजा बयान आया है, उसने तो हड़कंप मचा दिया है.

एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखने को तैयार
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट में कहा है कि अगर ईरान की सरकार ने अपनी उस धमकी पर अमल किया, जिसमें उसने अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति (यानी मुझपर) जानलेवा हमला करने या हत्या करने की बात कही है, तो ईरान पर 1000 मिसाइलें दागी जाने के लिए तैयार हैं. इसके तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी. इसके लिए आदेश दिए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार और सक्षम है कि वो एक साल तक ईरान पर हमले जारी रखे और ईरान के हर इलाके को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर दे.

ट्रंप ने इस पोस्ट के जरिए एक तरफ जहां अमेरिकी सेना के महायुद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का संदेश दिया है, वहीं ये भी साफ कर दिया है कि फिलहाल जो हालात हैं, उनमें युद्ध किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है. वैसे भी वो बार बार दोहरा रहे हैं कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है.

ईरान भी अमेरिका पर ही आरोप लगा रहा है कि ये सब उसी का किया धरा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर लिखा, ईरान ने अब तक अपना वादा निभाया है, जबकि अमेरिका ने MoU के पैरा 9 का उल्लंघन किया. अमेरिका एक के बाद एक उल्लंघन कर रहा है. सीजफायर के स्थायी होने की सारी उम्मीदें फिलहाल टूट चुकी हैं. अब दोनों देशों की मिसाइलें तैयार हैं. गरजने के लिए भी, बरसने के लिए भी.

भारत-न्यूजीलैंड के बीच बड़ा समझौता, ₹1.72 लाख करोड़ निवेश से UPI तक; 10 पॉइंट में जानें अहम बातें

 नई दिल्‍ली

भारत के पीएम नरेंद्र मोदी न्‍यूजीलैंड दौरे पर हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच 10 खास समझौते और 18 बड़े फैसले हुए हैं. भारत और न्‍यूजीलैंड ने दोनों देशों के बीच कारोबार को 2030 तक 35,000 करोड़ रुपये करने का टारगेट रखा है. भारत न्‍यूजीलैंड को केमिकल्‍स, प्रोसेसिंग फूड, एग्री प्रोडक्‍ट्स और अन्‍य चीजों की सप्‍लाई करेगा. वहीं न्‍यूजीलैंड से किवी, अन्‍य फल और क्रिटिकल्‍स मिनिरल्‍स समेत कई चीजें सस्‍ती कीमतों पर भारत आएंगी। 

पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक में डील साइन की गई है. पीएम मोदी ने कहा कि रिकॉर्ड 9 महीने में दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किया गया है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का मतलब है कि भारत से न्‍यूजीलैंड जाने वाली ज्‍यादातर चीजों पर शून्‍य टैक्‍स लगेगा. वहीं न्‍यूजीलैंड से आने वाली वस्‍तुओं पर भी कम या शून्‍य टैक्‍स लगाया जाएगा। 

इस डील के तहत न्‍यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत 1.72 लाख करोड़ (20 अरब डॉलर) निवेश करेगा. यह एक बड़ा निवेश है, जिससे भारत के विकसित होने में मदद मिलेगा.  आइए 10 पॉइंट में समझतें हैं भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच खास डील… 

10 पॉइंट में समझें भारत-न्‍यूजीलैंड समझौता

  •     2030 तक सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया जाएगा. दोनों देश मिलकर व्‍यापार, डिफेंस, एजुकेशन, एग्रीकल्‍चर, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चर और टुरिज्‍म पर फोकस करेंगे और व्‍यापार को 35,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाएंगे। 
  •     डिफेंस और समुद्री मार्ग में दोनों देश सहयोग बढ़ाएंगे. संयुक्‍त अभ्‍यास और आपदा में राहत सहयोग करेंगे. इससे समुद्री निगरानी मजबूत होगी. नौसैनिक चार्ट और डेटा भी शेयर किया जाएगा। 
  •     दोनों देश की सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक दूसरे को लॉजिस्टिक सुविधा भी देंगी. इससे रक्षा सहयोग बढ़ेगा।
  •     आतंकवाद के खिलाफ संयुक्‍त कार्य समूह बनाया जाएगा, ताकि आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा शुरू किया जा सके. खुफिया जानकारी भी शेयर करने को लेकर समझौता किया गया है। 
  •     डेयरी और पशुपालन को लेकर नई टेक्‍नोलॉजी और विशेषज्ञता शेयर की जाएगी, जिससे किसानों और खाद्य सुरक्षा को लाभ मिलेगा। 
  •     दोनों देशों के बीच पर्यटन को लेकर भी समझौता हुआ है. दोनों देश आवागमन को आसान बनाएंगे, जिससे पर्यटन सेक्‍टर में नए रोजगार के अवसर खुलेंगे। 
  •     हाई परफॉर्मेंश स्‍पोर्ट्स, स्‍पोर्ट्स साइंस और स्‍पोर्ट्स मेडिसिन में सहयोग . रग्‍बी, रोइंग, एथ‍लिट्स और गोल्‍फ जैसे स्‍पोर्ट्स को सपोर्ट मिलेगा। 
  •     रोजगार, कारोबार और निवेश को बढ़ाने के लिए 2030 तक 35,000 करोड़ के कारोबार का लक्ष्‍य रखा गया है। 
  •     फूड टेक्‍नोलॉजी और सुरक्षा में सहयोग बढ़ेगा. कीवी को लेकर नया एक्‍शन प्‍लान तैयार किया जाएगा। 
  •     न्‍यूजीलैंड कई तरीके से अगले 15 साल में 1.72 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा और भारत-न्‍यूजीलैंड के बीच ज्‍यादातर चीजें ‘शून्‍य’ टैक्‍स पर आयात-निर्यात होंगी। 
  •     भारत के UPI को न्यूजीलैंड के फास्ट पेमेंट सिस्टम से जोड़ने पर सहमति बनी है, जिससे डिजिटल पेमेंट बेहद आसान हो जाएगा। 

गौरतल है कि पीएम मोदी की मौजूदगी में ये डील साइन हुआ है. पीएम मोदी 6 से 11 जुलाई तक अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड हैं. यह 40 साल बाद किसी भारतीय पीएम की न्यूजीलैंड यात्रा है. इससे पहले 1986 में राजीव गांधी न्यूजीलैंड गए हुए थे। 

खाद वितरण में खैरागढ़ जिला प्रदेश में प्रथम, 83.82 प्रतिशत उर्वरक का हुआ वितरण

रायपुर

खाद वितरण में खैरागढ़ जिला प्रदेश में प्रथम, 83.82 प्रतिशत उर्वरक का हुआ वितरण

खरीफ वर्ष 2026 में किसानों को समय पर रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए किए गए सुनियोजित प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला उर्वरक वितरण के मामले में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। 09 जुलाई 2026 की स्थिति में जिले में कुल 21,452 टन रासायनिक खाद का भंडारण किया गया, जिसमें से 17,980 टन खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है। इस प्रकार जिले में 83.82 प्रतिशत उर्वरक वितरण दर्ज किया गया है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।

कलेक्टर  इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल द्वारा खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरक भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। उनके निर्देशन में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक तथा सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की उपलब्धता, परिवहन और वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की गई। यही कारण है कि जिले में किसानों को आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद उपलब्ध हो रही है तथा वितरण व्यवस्था बिना किसी बाधा के संचालित हो रही है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले की सभी सेवा सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में जिले के किसी भी क्षेत्र से खाद की कमी की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। किसानों को डीएपी, यूरिया एवं अन्य आवश्यक उर्वरक सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति भी की जा रही है।

नोडल अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं सहकारिता विभाग ने बताया कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ही समितियों में उर्वरकों का अग्रिम भंडारण कराया गया था। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में प्रतिदिन वितरण की समीक्षा की जा रही है। समितियों को आवश्यकतानुसार अतिरिक्त खाद भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय है।

जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सेवा सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक क्रय करें तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल कृषि विभाग अथवा संबंधित समिति को अवगत कराएं। प्रशासन द्वारा खरीफ सीजन में किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि खेती-किसानी के कार्य प्रभावित न हों।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों ने समय पर खाद उपलब्ध होने पर संतोष व्यक्त किया है। विकासखंड खैरागढ़ के सेवा सहकारी समिति मदुराकोही के किसान  कोमल राम ने बताया कि इस वर्ष समिति में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है और उन्हें बिना किसी परेशानी के आवश्यक उर्वरक मिल गया। उन्होंने कहा कि समय पर खाद मिलने से बुआई एवं फसल प्रबंधन के कार्य सुचारू रूप से हो रहे हैं।

वहीं विकासखंड छुईखदान के किसान शिवकुमार ने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार व्यवस्था अधिक बेहतर है। उन्हें खाद के लिए भटकना नहीं पड़ा और आवश्यकता अनुसार उर्वरक आसानी से उपलब्ध हो गया। उन्होंने जिला प्रशासन एवं सहकारी समितियों की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि समय पर खाद मिलने से किसानों को काफी राहत मिली है।

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