डिंडौरी में आदिवासियों ने चंदा जुटाकर बना दिया सरकारी स्कूल, 3 साल तक नहीं मिली सरकारी मदद

डिंडौरी
सरकारी दावों और खोखले आश्वासनों से जब मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के आदिवासियों का सब्र टूट गया, तो उन्होंने सिस्टम के भरोसे बैठना छोड़ दिया। जिले के समनापुर ब्लॉक के एक आदिवासी बहुल गांव में ग्रामीणों ने मिलकर खुद ही अपने बच्चों के लिए स्कूल की इमारत खड़ी करने का फैसला कर लिया। इसके लिए न केवल फंड जुटाया गया, बल्कि गांव के पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग खुद राजमिस्त्री और मजदूर बनकर तगाड़ी-फावड़ा उठाए नजर आ रहे हैं।

दरअसल, इस आदिवासी टोले में एकमात्र सरकारी प्राथमिक स्कूल था, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने तीन साल पहले ‘जर्जर और असुरक्षित’ घोषित कर जमींदोज कर दिया था। अधिकारियों ने तब जल्द ही नया भवन बनाने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी वहां एक ईंट तक नहीं रखी गई।

100 परिवारों ने जोड़े 500-500 रुपये
सरकारी फाइलों में बजट की लेट-लतीफी से बच्चों की पढ़ाई दांव पर लगी देख, इस महीने गांव के करीब 100 परिवारों ने एक आपात बैठक बुलाई। तय हुआ कि हर घर से 500-500 रुपये का योगदान दिया जाएगा ताकि निर्माण सामग्री खरीदी जा सके। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पूरा गांव मिलकर सीमेंट का मसाला तैयार कर रहा है, ईंटें ढो रहा है और स्कूल की नींव तैयार कर रहा है।

प्रशासन को ‘गिफ्ट’ करेंगे स्कूल
ग्रामीणों का कहना है कि दर्जनों अर्जियां और अफसरों के साथ कई बैठकें बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने यह सामूहिक कदम उठाया है। ताज्जुब की बात यह है कि ग्रामीणों ने तय किया है कि वे स्कूल तैयार होने के बाद इसे जिला प्रशासन को ‘गिफ्ट’ कर देंगे ताकि वहां शिक्षक भेजे जा सकें।

उधर, इस पूरे मामले पर जिला परियोजना समन्वयक (DPC) दिवाकर तिवारी ने ग्रामीणों के गुस्से को जायज ठहराया है। उन्होंने दबी जुबान में अपनी लाचारी कबूल करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग को अभी तक स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी फंड ही प्राप्त नहीं हुआ है।

ग्वालियर की धरोहर को मिलेगी वैश्विक पहचान, 10 जुलाई को एक्शन प्लान पर होगा मंथन

ग्वालियर
मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा ग्वालियर किले और राज्य पुरातत्व संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। यह बैठक आगामी 10 जुलाई को दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉक्टा अभय अरविंद बेड़ेकर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह बैठक इंडिगो और आगाखान हेरिटेज ट्रस्ट के साथ चल रहे प्रोजेक्ट के सिलसिले में होगी।

इस बैठक का आयोजन वर्चुअली (आनलाइन) किया जाएगा, जिसमें जिला कलेक्टर सहित प्रोजेक्ट कमेटी के सदस्य भाग लेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा ग्वालियर किले के संरक्षण, आकर्षक लाइटिंग और अन्य प्रस्तावित कार्यों की योजना तैयार करना है। बैठक के दौरान पिछली प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और इम्प्लीमेंटेशन कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णयों और एक्शन टेकन रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी। यह पूरी योजना इंडिगो और आगाखान हेरिटेज ट्रस्ट के साथ 21 फरवरी 2025 को हुए एमओयू के तहत बनाई गई है, जिससे ग्वालियर के ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल सके।

ग्वालियर किले पर एमओयू के बाद की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मप्र टूरिज्म, इंडिगो एयरलाइंस और एकेसीएसएफ की टीम निरीक्षण कर चुकी है। इस एमओयू में ग्वालियर किले के कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण शामिल है।

राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं।

 

2053 तक स्वच्छ रहेगी बेतवा नदी, 30 साल का मास्टर प्लान तैयार; पहले रुकेंगे नाले, फिर पहुंचेगा साफ पानी

भोपाल 
बेतवा नदी पुनर्जीवन परियोजना को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान आवश्यकताओं पर आधारित नहीं होगी, बल्कि वर्ष 2053 तक की अनुमानित आबादी, सीवेज उत्पादन और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के बावजूद नदी को प्रदूषण से मुक्त रखना और बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता को कम करना है।

डीपीआर में इंटरसेप्शन नेटवर्क, सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता भविष्य की जरूरतों के अनुसार तय की जाएगी। इसके साथ ही अतिरिक्त क्षमता और विस्तार की व्यवस्था भी डिजाइन का हिस्सा होगी, ताकि आने वाले वर्षों में सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

नदी में मिलने से पहले रोका जाएगा हर गंदा नाला

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंटरसेप्शन और डायवर्जन सिस्टम होगा। इसके तहत बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान और मैपिंग की जाएगी। प्रत्येक नाले के प्रवाह का आकलन करने के बाद नदी में मिलने से पहले इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर बनाकर गंदे पानी को रोक लिया जाएगा।

इसके बाद सीवेज को सीवर नेटवर्क या राइजिंग मेन के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। जहां गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रवाह संभव नहीं होगा, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। वहीं, बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए अलग बायपास सिस्टम बनाया जाएगा, जिससे एसटीपी पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।

मंडीदीप और विदिशा बने प्रमुख प्रदूषण स्रोत
प्रस्तुति में बेतवा नदी की मौजूदा स्थिति का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार मंडीदीप क्षेत्र से घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) नहीं होने से प्रदूषण की समस्या और गंभीर बनी हुई है।

इसके अलावा विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना उपचार किया गया सीवेज भी सीधे बेतवा नदी में छोड़ा जा रहा है। कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। कई स्थानों पर जलकुंभी (वाटर हायसिंथ) और अत्यधिक जैविक प्रदूषण (यूट्रोफिकेशन) की स्थिति भी सामने आई है।

15 वर्ष तक संचालन और ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था
परियोजना में केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि 15 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी भी शामिल की जाएगी। एससीएडीए (SCADA) और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के माध्यम से संयंत्रों के प्रदर्शन और जल गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।

सर्वे से लागत तक हर चरण होगा तय
डीपीआर चरणबद्ध तरीके से तैयार होगी। सबसे पहले नदी, नालों, जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी और भू-आकृति का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसके बाद सीवेज की मात्रा का आकलन, उपचार तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, ड्रॉइंग, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवहार्यता और पर्यावरणीय स्वीकृतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

परियोजना लागत का निर्धारण नवीनतम शेड्यूल ऑफ रेट (एसओआर) के आधार पर किया जाएगा। प्रस्तुति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृति के बाद लागत बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय भार परियोजना लागू करने वाली एजेंसी को उठाना पड़ सकता है, इसलिए प्रारंभिक लागत का सटीक आकलन किया जाएगा।

दीर्घकालिक नदी संरक्षण पर रहेगा फोकस
बेतवा नदी पुनर्जीवन परियोजना को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे दीर्घकालिक नदी संरक्षण योजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के चार प्रमुख आधार—पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय स्थिरता, संस्थागत जवाबदेही और सामाजिक भागीदारी—रहेंगे।

परियोजना का उद्देश्य नदी की जल गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषण भार को कम करना, स्थानीय निकायों के लिए संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना तथा आम लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरी योजना को वर्ष 2053 तक प्रभावी बनाए रखने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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EPFO Interest Update: 8 करोड़ PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी, जल्द खाते में आएगा ब्याज का पैसा

 नई दिल्ली

8 करोड़ लोगों के लिए गुड न्यूज आई है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ (EPFO) के सदस्यों के पीएफ खातों में जमा रकम (PF Account Balance) में बढ़ोतरी होने वाली है. दरअसल, ताजा अपडेट की बात करें, तो ईपीएफओ ने संगठन के सदस्यों के खातों में 8.25% ब्याज क्रेडिट करने का आदेश दिया है. क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश जारी किए गए हैं, इसके अलााव नए सिस्टम अपग्रेड के साथ ट्रांसफर प्रोसेस तेजी से होने की संभावना है। 

8 करोड़ लोगों को फायदा
ईपीएफ के करीब 8 करोड़ सदस्यों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भविष्य निधि अंशदान पर 8.25% ब्याज दर की आधिकारिक घोषणा करने के बाद क्षेत्रीय कार्यालयों को PF Interest Money सदस्य खातों में जमा करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, EPF Scheme के अनुच्छेद 60(1) के तहत केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है कि 2025-26 के लिए ईपीएफ योजना के प्रत्येक सदस्य के खाते में इस दर से ब्याज का पैसा जमा किया जाएगा. EPFO के हाल ही में जारी एक सर्कुलर ये सामने आया है। 

तेजी से ट्रांसफर होगा PF का पैसा 
EPFO से जुड़ा ये बड़ा अपडेट ऐसे समय में सामने आया है, जबकि रिटायरमेंट फंड मैनेजर ने बीते एक सप्ताह में डेटाबेस के एकीकरण और सॉफ्टवेयर अपग्रेड का एक बड़ा काम पूरा कर लिया है. इससे उम्मीद है कि करोड़ों सदस्यों के खातों में पीएफ ब्याज का भुगतान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से ट्रांसफर किया जाएगा. यानी अब यह प्रोसेस पहले की तरह धीमा नहीं होगा, जिसमें सभी सदस्यों के लिए भुगतान पूरा होने में एक या दो महीने का समय लग जाता था। 

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में लिए गए फैसले के बाद से ईपीएफओ सदस्य अपने पीएफ खातों में ब्याज जमा होने का इंतजार कर रहे हैं. EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) ने इस साल मार्च में 8 करोड़ से अधिक ईपीएफओ ग्राहकों के लिए वित्त वर्ष 2026 के लिए 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दी थी. बता दें कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब इस PF Interest Rate को इस दर को बरकरार रखा गया है. ईपीएफओ द्वारा मंजूरी के बाद, प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा जाता है, जो इसे अनुमोदित करता है, वित्त मंत्रालय ने इस साल जून में ब्याज दर को अपनी मंजूरी दे दी थी। 

इन तरीकों से जानें, जमा हुआ ब्याज
EPF खाते में जमा राशि को आप कई तरह से चेक कर सकते हैं. अगर आपका UAN और मोबाइल नंबर EPFO के साथ रजिस्टर्ड है, तो आप सिर्फ एक SMS भेजकर अपने खाते की जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा उमंग ऐप (Umang App), ईपीएफओ सदस्य ई-सेवा पोर्टल (EPFO E-Service Portal), मिस्ड कॉल सेवा (Missed Call Service) के जरिए स्टेटस जांच सकते हैं। 

SMS भेजकर जानें बैलेंस: एसएमएस के जरिए पीएफ खाते का बैलेंस चेक करने के लिए आपको अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के मैसेज बॉक्स में जाकर EPFOHO और UAN फिर भाषा लिखकर मोबाइल नंबर 7738299899 पर SMS करना होगा. इसके तरीके को उदाहरण के तौर पर समझें, तो आप इंग्लिश में अपने EPF की खाते की डिटेल्स पाने के लिए EPFOHO UAN ENG टाइप करेंगे. इसके बाद मैसेज के जरिए आपके पीएफ खाते के बैलेंस की जानकारी आपको मिल जाएगी। 

ऑनलाइन बैलेंस चेक: ऑनलाइन पीएफ बैलेंस चेक के लिए https://passbook.epfindia.gov.in/MemberPassBook/Login को अपने मोबाइल या लैपटॉप के ब्राउजर में ओपन करें. इसके बाद अब UAN नंबर और पासवर्ड डाले. फिर कैप्चा कोड भरें. अब आपके सामने एक नया पेज खुलकर आएगा. इस पेज पर ड्रॉप डाउन लिस्ट से अपना पीएफ नंबर सेलेक्ट करें. इसके बाद आपके सामने पीएफ अकाउंट की डिटेल्स खुल जाएगी। 

UMANG App में चेक करें: इसके लिए सबसे पहले UMANG App डाउनलोड करना होगा. लॉगइन करके ऑल सर्विस सेक्शन में जाएं. अब EPFO सर्च करके, एम्प्लॉई सेंट्रिक सर्विसेस ऑप्शन चुनें, इसके बाद दिख रहे View Passbook विकल्प पर क्लिक करें, इसके बाद अपना UAN भरें और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP को डालें, फिर बैलेंस सामने दिख जाएगा। 

मिस्ड कॉल से PF बैलेंस: अगर मिस्ड कॉल करके भी पीएफ खाते में मौजद रकम के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 9966044425 नंबर मिलाएं, दो घंटी के बाद ऑटोमटिक कॉल कट हो जाएगी और इस मिस्ड कॉल प्रोसेस के बाद आपके फोन पर SMS के जरिए पीएफ खाते का बैलेंस बता दिया जाएगा। 

मलक्का में भारत की रणनीतिक एंट्री, सबांग पोर्ट बनेगा हिंद महासागर का नया गेमचेंजर

 नई दिल्ली

32 किलोमीटर का एक समुद्री पैसेज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की राजनीति और कूटनीति में कैसे उथल-पुथल मचा सकता है. ईरान वॉर के दौरान इसे पूरी दुनिया ने देख लिया. ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर के मुल्कों का ईंधन सप्लाई चोक कर दिया. कच्चे तेल की कीमतें दनादन बढ़ने लगी. आखिर दुनिया की 20 फीसदी इंधन सप्लाई इसी होर्मुज से होती है। 

अब भारत और इंडोनेशिया मिलकर हिंद महासागर में अपना ‘होर्मुज’ बनाएंगे. ये ‘होर्मुज’ स्ट्रेट ऑफ मलक्का के एंट्री पॉइंट पर स्थित है. यहां से भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित इंदिरा पॉइंट मात्र 100 मील की दूरी पर है. इस कदम के साथ भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर में चीन का सारा गेम प्लान बदल देंगे। 

दरअसल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री रणनीति को नई धार देते हुए भारत और इंडोनेशिया ने सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है.  सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह को विकसित करने पर सहमति बनाई है. इसे आधुनिक रूप दिया जाएगा और इस द्वाप पर भारत का दखल बढ़ेगा। 

इंडोनेशिया दौरे पर गए पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। सबांग बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार पर स्थित है.खास बात यह है कि सबांग पोर्ट भारत के महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से लगभग 100 मील की दूरी पर है। 

आइए मलक्का स्ट्रेट को थोड़ा विस्तार से समझें और इसकी अहमियत को जानें

चन्नई से दक्षिण पूर्व में आगे बढ़ते चले जाएं. एकदम आगे. चेन्नई के तट से समुद्री रास्ते पर आगे बढ़ें, तो जहाज पहले बंगाल की खाड़ी पार करता है, फिर अंडमान सागर की ओर जाता हुआ मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंचता है। 

हजारों साल पहले, जब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मसालों की खुशबू समुद्री हवाओं के साथ फैल रही थी, तब नाविकों ने एक संकरे लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ते को पहचानना शुरू किया. यह स्ट्रेट यानी कि जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। 

आज यहां से दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत व्यापार होता है. इसमें तेल, चीनी सामान, कोयला और पाम ऑयल अहम है. सिंगापुर इसके दक्षिणी छोर पर स्थित विश्व का प्रमुख बंदरगाह है। 

सबांग पोर्ट मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है.
भारत के लिए इसका महत्व अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक है. भारत का पूर्वी एशिया जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ होने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. भारत के पेट्रोलियम उत्पादों, कोयले, मशीनरी और कंटेनर व्यापार के लिए यह समुद्री जीवनरेखा जैसा है. साथ ही “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क मजबूत करने में भी इसकी अहम भूमिका है। 

वैश्विक स्तर पर यह स्ट्रेट ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धमनियों में गिना जाता है. पश्चिम एशिया से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस बड़ी मात्रा में इसी रास्ते से पूर्वी एशियाई देशों तक पहुंचता है। 

Strait of Malacca से हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 2,800 अरब डॉलर का माल हर वर्ष गुजरता है.

चीन के लिए क्या अहमियत है?
चीन के लिए मलक्का जलडमरूमध्य उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन है. हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक रास्तों में से एक है. चीन के आयातित तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और अफ्रीका से इसी रास्ते होकर चीन पहुंचता है. इसके अलावा चीन के निर्यात-आधारित व्यापार का भी बड़ा हिस्सा मलक्का स्ट्रेट पर निर्भर है।  

पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 2003 में “मलक्का दुविधा” का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि किसी संकट या युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बाधित हो जाए, तो चीन की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। 

अब समझिए इसी मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर सबांग द्वीप है और इसकी द्वीप को भारत इंडोनेशिया के साथ मिलकर विकसित करेगा। 

रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह समझौता केवल एक बंदरगाह विकास परियोजना नहीं, बल्कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री उपस्थिति का संकेत है। 

सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित है और मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी मुहाने पर नजर रखता है. यहां से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर निगरानी रखना अपेक्षाकृत आसान है. भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. 2018 में भी भारत और इंडोनेशिया के बीच सबांग पोर्ट को लेकर सहयोग की रूपरेखा बनी थी, लेकिन अब दोनों देशों के संबंधों और इंडो-पैसिफिक की बदलती भू-राजनीति को देखते हुए इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है। 

एक और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट दूसरी ओर सबांग बंदरगाह
बता दें कि भारत अंडमान निकोबार में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यह भारत की एक महत्वाकांक्षी बहु-आयामी विकास योजना है, इसमें एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और आधुनिक टाउनशिप का निर्माण शामिल है, ताकि भारत मलक्का जलडमरूमध्य के पास एक प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब बन सके।  

यह परियोजना भारत की व्यापारिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

अब भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर सबांग पोर्ट को डेवलप करने की योजना बनाई है। 
विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाओं का संयुक्त प्रभाव भारत को मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर रणनीतिक पहुंच प्रदान कर सकता है.  ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के अंडमान-निकोबार समूह का सबसे दक्षिणी हिस्सा है और वहां विकसित हो रहा ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा माना जाता है. दूसरी ओर सबांग पोर्ट में भारत की भागीदारी उसे इंडोनेशिया के साथ मिलकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर देगी। 

चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स को भारत का जवाब
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू भी है. पिछले एक दशक में चीन ने “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव” और “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में कई बंदरगाहों और समुद्री परियोजनाओं में निवेश किया है. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हम्बनटोटा और म्यांमार का क्याउकफ्यू बंदरगाह अक्सर इसी संदर्भ में चर्चा में रहते हैं. ऐसे में सबांग पोर्ट का विकास भारत को क्षेत्रीय संतुलन बनाने और अपने समुद्री हितों की रक्षा करने में मदद कर सकता है। 

भारत और इंडोनेशिया दोनों ही मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था के समर्थक हैं. समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं. सबांग पोर्ट परियोजना इसी साझा दृष्टिकोण का विस्तार मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में यदि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाएं पूरी क्षमता से विकसित होती हैं, तो भारत को हिंद महासागर से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक एक मजबूत रणनीतिक श्रृंखला मिल सकती है. यह न केवल व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शक्ति-संतुलन राजनीति में भी अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा। 

उच्च शिक्षा विभाग ने 29 अंशकालीन जिला संगठकों की सूची की जारी

​रायपुर

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों को और अधिक सुचारू, प्रभावी और गतिशील बनाने के लिए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 29 अंशकालीन जिला संगठकों  की नियुक्ति की गई है, जिसमें संबंधित प्राध्यापकों व व्याख्याताओं को उनके वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ आगामी 02 वर्षों के लिए जिला संगठक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

कलेक्टरों के समन्वय से गठित होगी ‘जिला स्तरीय सलाहकार समिति’

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची में राज्य के सभी प्रमुख जिलों और अंचलों को शामिल किया गया है। सभी नवनियुक्त जिला संगठकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के कलेक्टर से तत्काल संपर्क स्थापित कर ‘जिला स्तरीय सलाहकार समिति’ का गठन सुनिश्चित करें और नियमानुसार बैठकों का आयोजन करें। सभी संगठकों को हर महीने अपना दौरा कार्यक्रम, कार्यों का संकलित प्रतिवेदन और निरीक्षण रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में संबंधित विश्वविद्यालयीन रासेयो प्रकोष्ठ और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।  

जिला संगठक अपने क्षेत्र में आने वाले सभी प्रकार के रासेयो इकाईयों, जिसमें कृषि व तकनीकी शिक्षा से संबंधित इकाईयां भी शामिल हैं,के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे और इसकी रिपोर्ट संबंधित विश्वविद्यालयीन प्रकोष्ठ को देंगे।

रायपुर विकास प्राधिकरण की संपत्तियों की बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन

रायपुर

रायपुर विकास प्राधिकरण (आर.डी.ए.) ने नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए अपनी संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इच्छुक नागरिक बिना कार्यालय आए घर बैठे ही प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्तियों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन एवं बुकिंग कर सकेंगे।

प्राधिकरण ने प्रथम चरण में लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया है। इनमें कमल विहार तथा रावभाटा सहित प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं की संपत्तियां शामिल हैं। कमल विहार में आवासीय फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध हैं, जबकि रावभाटा में व्यावसायिक संपत्तियां बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

प्राधिकरण द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के लिए भी आवासीय संपत्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि प्रत्येक वर्ग के नागरिकों को उनकी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जा सके।

ऑनलाइन बुकिंग सुविधा के साथ अब हितग्राही घर बैठे ही वेबसाइट के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकेंगे। इससे नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी और सेवाएं अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनेंगी।

रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदे साहू ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रक्रिया सरल बनेगी तथा संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा से हितग्राहियों को त्वरित एवं बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस ऑनलाइन व्यवस्था का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने बताया कि लंबे समय से संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया बंद थी। अब उपलब्ध सभी संपत्तियों को एक साथ ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जिससे नागरिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक तरीके से संपत्तियों की बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य अधिकाधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण कर नागरिकों को सहज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑनलाइन आवेदन, बुकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधा से संपत्तियों के आवेदन, भुगतान एवं आवंटन की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के कर्मचारियों को उपहार

रायपुर

स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के नवा रायपुर स्थित मुख्यालय भवन में निगम के अध्यक्ष  चंदूलाल साहू, की उपस्थिति में स्टेट वेयरहाउसिंग एवं ऐक्सिस बैंक के मध्य सैलरी एम ओ यू (समझौता ज्ञापन) निष्पादित किया गया। इस अवसर पर निगम के प्रबंध संचालक  आषीष कुमार टिकरिहा साथ ही निगम एवं ऐक्सिस बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।      

एम ओ यू (समझौता ज्ञापन) के तहत ऐक्सिस बैंक में निगम कर्मियों के सैलरी एकाउंट खोलने पर निगम के नियमित कर्मचारियों एवं दैनिक वेतन श्रमिकों को 1.10 करोड़ रूपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा तथा 10 लाख का प्राकृतिक मृत्यु बीमा निःशुल्क कवर किया जाएगा। निगम कर्मचारियों की मृत्यु की स्थिति में परिवार को 8 लाख रूपये तक की शिक्षा सहायता राशि प्रदान की जायेगी। साथ ही मात्र रूपये 2499/- के वार्षिक प्रीमियम पर रूपये 30 लाख तक का हेल्थ टॉप-अप कवर एवं 30 लाख का पर्सनल ऐक्सिडेंट कवर की सुविधा का लाभ भी मिलेगा। निगम के अध्यक्ष  चंदूलाल साहू ने बताया की इस एम ओ यू से कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर बैंकिंग, बीमा सुरक्षा तथा वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होगी। 

इस एम ओ यू से निगम कर्मियों में हर्ष की लहर व्याप्त है तथा कर्मचारियों ने अध्यक्ष  चंदूलाल साहू का आभार व्यक्त किया है। आज ही निगम मुख्यालय में अध्यक्ष  चंदूलाल साहू द्वारा बैकुण्ठपुर (जिला-कोरिया) निवासी मती पूनम कूजुर को सी0सी0एच0 (चतुर्थ श्रेणी) पद पर अनुकम्पा निुयक्ति आदेश प्रदान किया गया।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने बदली सोमारी बाई की जिंदगी

रायपुर

अपने सिर पर पक्की छत होना हर परिवार का सपना होता है। बस्तर जिले के विकासखंड तोकापाल के ग्राम पंचायत सिंगनपुर की रहने वाली सोमारी बाई के लिए यह सपना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से साकार हुआ है। कभी कच्ची झोपड़ी में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाला उनका परिवार आज एक सुरक्षित और सुविधायुक्त पक्के घर में सम्मान के साथ रह रहा है।

हर वर्ष मकान की मरम्मत का अतिरिक्त खर्च थी बड़ी परेशानी      

अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंध रखने वाली सोमारी बाई का पांच सदस्यीय परिवार वर्षों तक कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। बरसात में टपकती छत, गर्मी और सर्दी की मार के साथ हर वर्ष मकान की मरम्मत का अतिरिक्त खर्च उनके लिए बड़ी परेशानी थी। वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें तीन किश्तों में 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इस राशि से उन्होंने 27 वर्गमीटर क्षेत्रफल में अपना पक्का मकान तैयार किया।

जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना अवसम स्वच्छ भारत मिशन का भी मिला लाभ
         
सोमारी बाई के घर को विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से ‘पूर्ण घर’ के रूप में विकसित किया गया। जल जीवन मिशन के तहत नल से स्वच्छ पेयजल की सुविधा, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत निःशुल्क एलपीजी कनेक्शन तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण कराया गया। वहीं, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से मकान निर्माण के लिए 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान भी किया गया, जिससे परिवार को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिला।

बचत से हो रही बच्चों की पढ़ाई
         
नए पक्के घर ने सोमारी बाई के परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। अब उन्हें हर वर्ष मकान की मरम्मत पर खर्च नहीं करना पड़ता, जिससे होने वाली बचत का उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक कार्यों में कर पा रहे हैं। सुरक्षित आवास मिलने से परिवार को मौसम की मार और बीमारियों से भी राहत मिली है, साथ ही सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है।अपनी खुशी साझा करते हुए सोमारी बाई ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उनके परिवार का वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। उन्होंने सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत हो रहा पेयजल अधोसंरचना का नेटवर्क

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 छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के संकल्प को तेजी से धरातल पर उतार रही है। इसी दिशा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा गौरेला-पेंड्रा-मारवाही जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य मद से 25 नए हैंडपंपों का सफलतापूर्वक खनन किया गया है। इससे लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रहे ग्रामीण क्षेत्रों में राहत पहुंची है और हजारों लोगों को घर के समीप स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने लगा है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए प्रत्येक परिवार को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसी सोच के अनुरूप लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जिले के ऐसे गांवों और बस्तियों को प्राथमिकता दी गई, जहां पेयजल की आवश्यकता अधिक थी। नए हैंडपंपों के संचालन से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा तथा उनके समय और श्रम की भी बचत होगी।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यपालन अभियंता श्रीमती प्रिया सोनी ने बताया कि जिले में गौरेला विकासखंड में 14, मरवाही विकासखंड में 7 तथा पेंड्रा विकासखंड में 4 नए हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। इन हैंडपंपों के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर ऐसे स्थानों का चयन किया गया, जहां पेयजल की समस्या सबसे अधिक थी।

नवस्थापित हैंडपंपों का लाभ बस्ती, लमना, कोटमीखुर्द, सधवानी, उमरखोही, धनगंवा, अंजनी, पीपरखुटी, खोडरी, तेंदुमुड़ा, धनौली, देवरगांव, पड़वनिया, ठाडपथरा, कोडगार, बम्हनी, अमारू, भर्रीडांड, बंधौरी, कटरा, निमधा, मड़वाही, दानिकुंडी सहित अनेक ग्राम पंचायतों तथा पेंड्रा नगर क्षेत्र में विद्यालय के समीप रहने वाले नागरिकों को मिल रहा है। इससे विद्यार्थियों, ग्रामीण परिवारों और स्थानीय समुदाय को स्वच्छ पेयजल की बेहतर सुविधा उपलब्ध हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण विकास को जनकल्याण का आधार मानते हुए पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष बल दे रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इन प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करते हुए प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक पेयजल सुविधाओं का निरंतर विस्तार कर रहा है। विभाग की योजनाओं का उद्देश्य केवल जल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना और जलजनित बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित करना भी है।

जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले में पेयजल संबंधी अधोसंरचना लगातार मजबूत हो रही है। नई जल सुविधाओं के विकसित होने से ग्रामीणों का विश्वास शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति और सुदृढ़ हुआ है। आने वाले समय में भी आवश्यकता आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से पेयजल संकट वाले अन्य क्षेत्रों में इसी प्रकार के कार्य किए जाएंगे, ताकि जिले का कोई भी गांव स्वच्छ पेयजल सुविधा से वंचित न रहे।

ग्रामीणों ने नए हैंडपंप स्थापित किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नए हैंडपंपों के खनन से उनका दैनिक जीवन अधिक सुगम, सुरक्षित और स्वस्थ हुआ है। साय सरकार की यह पहल ग्रामीण विकास, जनस्वास्थ्य और सुशासन के प्रति उसकी संवेदनशील एवं जनहितैषी सोच का प्रभावी उदाहरण है।

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