भोपाल-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस नए रंग-रूप में दौड़ेगी, 7.30 घंटे में तय करेगी 708 किमी का सफर

ग्वालियर 
रानी कमलापति (भोपाल) से ग्वालियर होते हुए हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही बिल्कुल नए रंग-रूप में नजर आएगी। ट्रेन का बाहरी रंग पारंपरिक नीले-सफेद की जगह अब आकर्षक केसरिया होगा। इसके लिए ट्रेन को झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप भेजा गया है, जहां अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक से पेंटिंग और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे है। झांसी मंडल में पहली बार इस स्तर पर वंदे भारत का ऐसा मेकओवर किया जा रहा है।

रोबोटिक तकनीक से तैयार हो रहा नया लुक
झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप में वंदे भारत के कोचों की पेंटिंग अत्याधुनिक रोबोट कर रहे हैं। इससे पेंट की गुणवत्ता बेहतर होगी, पूरी ट्रेन को एक समान फिनिश रंग लंबे समय तक टिकेगा और मिलेगी। रेलवे के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के जरिए तेज और अधिक सटीक तरीके से पूरी की जा रही है।

7.30 घंटे में 708 किमी. का सफर
रानी कमलापति से हजरत निजामुद्दीन के बीच 708 किलोमीटर का सफर वंदे भारत महज 7 घंटे 30 मिनट में पूरा करती है। यही दूरी अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों को तय करने में करीब 9 से 10 घंटे लगते हैं। यह ट्रेन भोपाल, झांसी, ग्वालियर और आगरा कैंट स्टेशन पर ठहराव लेते हुए दिल्ली पहुंचती है।

मेक इन इंडिया की पहचान
वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित ट्रेन है। आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, बेहतर रफ्तार और यात्री सुविधाओं के कारण यह भारतीय रेलवे की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल है। रेलवे का मानना है कि नए स्वरूप और बेहतर सुविधाओं से यात्रियों का सफर और अधिक आरामदायक होगा।

क्या-क्या बदलेगा

-वॉश बेसिन की गहराई बढ़ाई गई है।
-टॉयलेट में अब अधिक रोशनी वाली एलईडी लाइटिंग।
-चार्जिंग पॉइंट तक आसान पहुंच।
-सीटों में अधिक कुशनिंग, लंबी यात्रा में आराम बढ़ेगा एग्जीक्यूटिव चेयर कार में बड़ा फुटरेस्ट।
अंदर भी बदलेगा…

केवल बाहरी रंग ही नहीं, ट्रेन के इंटीरियर में भी कई बदलाव किए जा रहे हैं ताकि यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा मिल सके।

अधिकारी बोले….. अब पहले से बेहतर अनुभव
रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत को केसरिया रंग में तैयार किया जा रहा है। झांसी कारखाने में रोबोटिक पेंटिंग के साथ यात्रियों की सुविधा से जुड़े कई तकनीकी सुधार भी किए जा रहे हैं, ताकि यात्रा का अनुभव पहले से बेहतर हो। – मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी रेल मंडल

पालतू कुत्ते के काटने पर मालिक को सजा, कोर्ट ने सुनाई कारावास और ₹1,000 जुर्माने की सजा

जबलपुर
 पड़ोसी के 8 वर्षीय बच्चे को पालतू कुत्ते के काटने के मामले में न्यायालय ने करीब छह साल बाद कुत्ते के मालिक को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) दीप्ती चौहान ने आरोपी को कोर्ट उठने तक के साधारण कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।

अभियोजन के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित कौशल्या अपार्टमेंट के पास रहने वाले सलीम रहमान 27 अक्टूबर 2020 को अपनी पंचर मोटरसाइकिल को पैदल मरम्मत के लिए ले जा रहे थे। उनका 8 वर्षीय बेटा अतौर रहीम रहमान पीछे-पीछे दौड़ रहा था। इसी दौरान पड़ोसी गैविन डिसूजा के पालतू कुत्ते ने बच्चे को काट लिया।

घटना के बाद आरोपी के घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चे का इलाज कराने और कुत्ते को बांधकर रखने की बात कही गई तो गैविन डिसूजा ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।

सलीम रहमान ने घटना की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 289, 294 और 506 (भाग-बी) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया।

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को धारा 294 और 506 (भाग-बी) के आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, जानवर को लापरवाही से छोड़ने (धारा 289) के अपराध में दोषी मानते हुए कोर्ट उठने तक के कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एसडीओपी रवि कुमार मौर्य ने पैरवी की।

 

होर्मुज पर अमेरिका का महाअटैक! ईरान के 80 सैन्य ठिकानों पर बरसे बम, केशम-बंदर अब्बास दहले

वाशिंगटन/ तेहरान 
होर्मुज में एक दिन पहले तीन जहाजों पर हुए हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए अमेरिका ने ईरान को गंभीरत नतीजे भुगतने की चेतावनी दी थी. होर्मुज में हुए इन हमलों ने पश्चिम एशिया में जंग की आग फिर से भड़का दी है. अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले फिर से शुरू कर दिए हैं. अमेरिकी सेना ने केशम द्वीप, बंदर अब्बास और सीरिक में हवाई हमले किए हैं। 

ईरानी मीडिया के मुताबिक, दक्षिणी ईरान के केशम द्वीप और बंदर अब्बास में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक सीरिक में भी सात विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं. ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक दक्षिणी पोर्ट सिटी सीरिक में कई धमाके हुए हैं. सीरिक के ताहेरुई पियर इलाके में छह् प्रोजेक्टाइल गिरे हैं। 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हमलों की पुष्टि की है. सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू कर दिए गए हैं. सेंटकॉम ने इन हमलों की वजह होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमले को बताया है. सेंटकॉम ने कहा है कि होर्मुज से गुजर रहे तीन जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में ये हमले किए जा रहे हैं। 

सेंटकॉम ने ईरान की ओर से जहाजों पर हुए हमलों को अनुचित, खतरनाक और सीजफायर का उल्लंघन बताया है. वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका हमलों को इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है. ईरानी विदेश मंज्ञालय ने इसके लिए अमेरिकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। 

ईरान ने कहा है कि हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे. गौरतलब है कि होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी तेल के उत्पादन और बिक्री के लिए जारी किया जनरल लाइसेंस रद्द कर दिया था। 

US ने ईरान में 80 ठिकानों पर बरसाए बम
एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. हॉर्मुज स्ट्रेट में तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए की गई. इन ताजा हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार करने की चेतावनी दी है। 

अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार स्टेशन, एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन लॉन्च साइट और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से ज्यादा तेज स्पीड बोट्स को निशाना बनाया गया. इसके अलावा बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और सीरिक के आसपास मौजूद कई सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए. बंदर अब्बास में शहीद हक्कानी पोर्ट पर भी हमला किया गया है। 

अमेरिका का कहना है कि कुछ घंटे पहले हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कॉमर्शियल जहाजों, मार्शल आइलैंड्स के एम/टी अल रेकय्यात, सऊदी अरब के एम/टी वेदयान और लाइबेरिया के एम/टी साइप्रस प्रॉस्पेरिटी पर हमला किया गया था. वॉशिंगटन ने इन हमलों के लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया और इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना। 

ईरान में अमेरिका ने कहां-कहां किए हमले?
हमलों के दौरान एक टैंकर में आग लग गई, जबकि बाकी दो जहाजों को भी नुकसान पहुंचा. हालांकि, किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, सभी हमले ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास हुए। 

उधर, ईरानी सरकारी मीडिया ने बंदर अब्बास, केश्म और सीरिक में जोरदार धमाकों की पुष्टि की है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरिम समझौते का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्रवाई के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। 

अमेरिका ने फिर ईरान के तेल बेचने पर लगाया बैन
तनाव बढ़ने के साथ ही अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री से जुड़ी अस्थायी अनुमति भी रद्द कर दी है, जिसे युद्धविराम समझौते के तहत दिया गया था. इसके अलावा अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (JMIC) ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘सीवियर’ कर दिया है। 

इस पूरी घटनी के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे का कार्यक्रम भी जारी है. उनका पार्थिव शरीर तेहरान से क़ोम और फिर इराक के नजफ ले जाया गया, जहां हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. अंतिम संस्कार में ईरान और इराक के कई शीर्ष नेता शामिल हुए. ईरान की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, फॉरेन मिनिस्टर अब्बास अराकची, मरहूम लीडर के बेटे मुस्तफा खामेनेई, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के ससुर घोलामाली हद्दाद अदेल और सुप्रीम लीडर के एडवाइजर मोहसेन रेजाई शामिल थे। 

 

सिंहस्थ 2028 बनेगा ‘ग्रीन कुंभ’, उज्जैन में 114 किमी हरित कॉरिडोर होगा तैयार

उज्जैन
 सिंहस्थ-2028 को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की नई पहचान देने की दिशा में उज्जैन प्रशासन ने व्यापक हरित अभियान शुरू कर दिया है। पहली बार सिंहस्थ महापर्व को ‘ग्रीन कुंभ’ की अवधारणा के साथ आयोजित किया जाएगा। इसके तहत पूरे शहर और सिंहस्थ क्षेत्र में 10 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जबकि 114 किलोमीटर लंबी सड़कों को हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रशासन ने इस महाअभियान की शुरुआत कर दी है और अब तक तीन लाख से अधिक गड्ढों की खुदाई पूरी की जा चुकी है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले पूरे क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित कर श्रद्धालुओं को स्वच्छ, छायादार और पर्यावरण अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

84 हजार बड़े छायादार पेड़ों से सजेगा सिंहस्थ मार्ग
योजना के तहत सिंहस्थ क्षेत्र की प्रमुख सड़कों के दोनों ओर 84 हजार बड़े और छायादार पौधे लगाए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन सहित ऐसी प्रजातियों को शामिल किया गया है, जिनकी ऊंचाई 10 से 12 फीट होगी और जो कम समय में तेजी से विकसित होकर पर्याप्त छाया प्रदान कर सकें।

प्रशासन का मानना है कि बढ़ते तापमान और हीटवेव की चुनौती को देखते हुए यह पहल केवल सुंदरीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचना तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।

नीम, करंज और जामुन के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे श्रद्धालुओं को देंगे प्राकृतिक छाया
इनमें मुख्य रूप से नीम, करंज, जामुन और अन्य छायादार प्रजातियों के 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे। इन प्रजातियों का चयन इसलिए किया गया है कि ये कम समय में अच्छी वृद्धि कर सकें और सिंहस्थ-2028 तक श्रद्धालुओं को प्राकृतिक छाया उपलब्ध करा सकें। बढ़ते तापमान और हीटवेव को देखते हुए यह चयन केवल सुंदरीकरण के लिए नहीं, बल्कि जलवायु अनुकूल अधोसंरचना विकसित करने की रणनीति का हिस्सा है।

कितने हेक्टेयर मे फैलेगा वन क्षेत्र
उज्जैन की पहचान अब सिर्फ महाकाल नगरी तक सीमित नहीं रहेगी.शहर के नवलखी आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 हेक्टेयर में विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू विकसित किया जाएगा. यह आधुनिक जू पर्यटकों को वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में बेहद करीब से देखने का अनूठा अनुभव देगा. उज्जैन वन मंडल के डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार, यहां 300 से अधिक वन्यजीव प्रजातियों को बसाने की योजना है.परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि प्रशासनिक के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है. पहला चरण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

पहले चरण में लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र काम
यह फॉरेस्ट जू दो चरणों में तैयार होगा. पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित किया जाएगा, जहां केवल भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास जैसे माहौल में रखा जाएगा. यहां विशाल ड्राइव-थ्रू सफारी, खुले प्राकृतिक बाड़े और अत्याधुनिक विजिटर सुविधाएं होंगी. पर्यटक बिना जंगल जैसा रोमांचक अनुभव ले सकेंगे, जिससे वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी। 

दूसरे चरण मे दिखेंगे दुर्लभ वन्यजीव
फॉरेस्ट जू के दूसरे चरण में इसे ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ थीम के आधार पर विकसित किया जाएगा. इस चरण में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दुर्लभ वन्यजीवों को शामिल करने की योजना है. उद्देश्य यह है कि उज्जैन का यह फॉरेस्ट जू केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने। 

अनोखी डिजाइन मे दिखेगा जू 
उज्जैन में बनने वाला विश्वस्तरीय फॉरेस्ट जू अपनी अनोखी डिजाइन के कारण खास होगा. जू का क्षेत्र फोरलेन और पंचकोशी मार्ग से दो हिस्सों में बंटा होने के बावजूद, 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और अंडरपास दोनों हिस्सों को जोड़ेंगे. ओवरब्रिज पर बैटरी संचालित इलेक्ट्रिक सफारी और पैदल पर्यटकों के लिए अलग रास्ते होंगे, जबकि घने पेड़-पौधे वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण का एहसास कराएंगे. परियोजना के पहले चरण में 60 हेक्टेयर में ‘इंडिया ज़ोन’ विकसित होगा, जहां केवल भारत के वन्यजीव प्राकृतिक आवास जैसे खुले वातावरण में नजर आएंगे. ड्राइव-थ्रू सफारी और आधुनिक सुविधाएं पर्यटकों को असली जंगल जैसा रोमांचक अनुभव देंगी। 

घाट, उद्यान और जलाशय भी होंगे अभियान का हिस्सा
निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और संपर्क मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के तट, शासकीय परिसरों और विभिन्न संस्थागत क्षेत्रों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।

पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि उनके संरक्षण, देखभाल और जीवित रहने की नियमित निगरानी की जा सके।

आस्था और प्रकृति संरक्षण का साझा संकल्प
सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे वृक्षों को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। धार्मिक ग्रंथों में पौधारोपण को पुण्य और यज्ञ के समान बताया गया है। ऐसे में सिंहस्थ-2028 के लिए प्रस्तावित यह 10 लाख पौधों का अभियान केवल हरियाली बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर प्राकृतिक विरासत तैयार करने का सामूहिक संकल्प भी माना जा रहा है।

प्रशासन निर्माणाधीन 29 किलोमीटर लंबे घाटों और मार्गों के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण करेगा। इसके अलावा शहर के 400 से अधिक उद्यान, प्रमुख जलाशयों के किनारे, शासकीय परिसरों और संस्थागत क्षेत्रों को भी इस हरित अभियान से जोड़ा गया है।

पौधों की होगी जियो-टैगिंग, सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प
पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी, ताकि संरक्षण और जीवित रहने की भी लगातार निगरानी की जा सके। सनातन परंपरा में पीपल, बरगद, नीम और बेल जैसे पेड़ों को देवतुल्य माना गया है। पुराणों में पौधारोपण को यज्ञ और पुण्य का कार्य बताया गया है।

ऐसे में सिंहस्थ-2028 के लिए 10 लाख पौधों का अभियान केवल हरियाली बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण का सामूहिक संकल्प भी है।

फैक्ट फाइल

    3 लाख से ज्यादा गड्ढों की खोदाई पूरी।
    10 से 12 फीट ऊंचे होंगे लगाए जाने वाले पौधे। 
    29 किमी निर्माणाधीन घाट और मार्गों पर भी पौधारोपण होगा। 
    400 से ज्यादा उद्यान भी हरित अभियान से जुड़ेंगे। 

 

कृति सेनन ने बॉयफ्रेंड और एग फ्रीजिंग पर की खुलकर बात, बोलीं- ‘प्रेग्नेंट जैसा महसूस कर रही थी’

मुंबई 

बॉलीवुड डीवा कृति सेनन इन दिनों कई वजहों से सुर्खियों में हैं. एक ओर थिएटर में उनकी फिल्म कॉकटेल 2 छाई हुई है. दूसरी ओर उनकी डेटिंग चर्चा में है। कृति सेनन यूके स्थित भारतीय बिजनेसमैन कबीर बहिया के प्यार में हैं. उन्होंने ऑफिशियली रिश्ते पर कुछ नहीं कहा, लेकिन तस्वीरें-वीडियो रिश्ते की गवाही देते हैं। कृति 35 साल की हो गई हैं. अब उन्होंने वेडिंग और मदरहुड को लेकर बात की है. ह्यूमन ऑफ बॉम्बे के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया कि वो अपने एग्स फ्रीज करा चुकी हैं। 

कृति कहती हैं कि मैंने बहुत पहले ही स्मार्ट तरीके से अपने एग्स फ्रीज करा लिए थे. मैंने ये तब किया जब मुझे ‘मीमी’ के लिए वजह बढ़ाना था। एक्ट्रेस ने कहा कि क्योंकि उस वक्त शरीर में होने वाली सूजन और बदलाव आसानी से नजरअंदाज किए जा सकते थे. मैंने उस वक्त एक करीबी से बात की.उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम ऐसा करोगी, तो खुद को सबसे अच्छा तोहफा दोगी। 

‘मेरे दिमाग में यही चल रहा था. इस दौरान मुझे मीमी के लिए दो महीने घर रहकर वजन बढ़ाना था. दो महीने मेरा कोई शूट नहीं था. ये फिल्म भी सेरोगेसी पर थी। कृति कहती हैं कि मैंने सोचा कि ये कर लेती हूं, क्योंकि एक पॉइंट आता है जब आप हार्मोनली डिस्टर्ब लगते हैं. ये सब एक प्रेग्नेंट महिला की तरह फील कराता है। उन्होंने कहा कि इसमें मूड स्विंग होते हैं. हां मैंने एग्स फ्रीज करा लिए हैं. क्योंकि मैं अपने सिर पर कोई बोझ नहीं रखना चाहती थी. नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘मीमी’ 2021 में रिलीज हुई थी. फिल्म के लिए एक्ट्रेस ने 15 किलो वजन बढ़ाया था। 
 

भारत में ‘तेल वाली दिवाली’! होर्मुज के बाद सऊदी अरब से आई बड़ी खुशखबरी, पेट्रोल-डीजल पर मिल सकती है राहत

नई दिल्ली

ग्‍लोबल एनर्जी मार्केट में सऊदी अरब के एक बड़े फैसले ने हलचल मचा दी है. दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अपने प्रमुख अरब लाइट (Arab Light) कच्चे तेल की आधिकारिक बिक्री कीमत (Official Selling Price-OSP) में अगस्त की आपूर्ति के लिए प्रति बैरल 11 डॉलर की भारी कटौती की है. यह पिछले 26 वर्षों में एशिया के लिए की गई सबसे बड़ी मंथली कटौती मानी जा रही है. इतना ही नहीं साल 2020 के बाद पहली बार सऊदी अरब ने अपने इस प्रमुख ग्रेड को ओमान-दुबई बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर उपलब्ध कराया है. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह फैसला केवल कीमत घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एशियाई बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है. खासकर ऐसे समय में जब रूस रियायती दरों पर तेल बेचकर भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है. सऊदी अरब के इस ‘प्राइस वॉर’ से भारत के ऑयल इंपोर्ट बिल पर पॉजिटिव असर तय माना जा रहा है. भारत अपनी कुल जरूरतों का 85 फीसद तक आयात करता है. ‘मनीकंट्रोल’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत ने 35.5 अरब डॉलर (₹337970 करोड़) मूल्‍य का कच्‍चा तेल आयात किया था. सऊदी अरब की ओर से किए गए प्राइस कट और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सुचारू होने के बाद इंपोर्ट बिल में कमी आने की संभावना है. आगे चलकर कंज्‍यूमर को भी इसका फायदा मिलना तय माना जा रहा है। 

दरअसल, कुछ सप्ताह पहले तक वैश्विक तेल बाजार में चिंता का माहौल था. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग प्रभावित होने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार का रास्ता इसी स्‍ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में किसी भी तरह के खलल से ग्‍लोबल सप्‍लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था. हालांकि, अब हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही फिर से सुचारु हो गई है, खाड़ी देशों का निर्यात सामान्य स्तर पर लौट आया है और बाजार में तत्काल आपूर्ति संकट की आशंका काफी कम हो गई है. इसके साथ ही तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस (OPEC+) ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य उत्पादक देशों ने भी उत्पादन बढ़ाया है। 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सऊदी का फैसला?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम रहती हैं तो भारत का इंपोर्ट बिल घट सकता है, चालू खाते का घाटा नियंत्रित रह सकता है और महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. कम कीमतों का लाभ केवल सरकार तक सीमित नहीं रहेगा. विमानन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और पेट्रोकेमिकल जैसे उद्योगों की लागत भी घट सकती है, क्योंकि ये सभी क्षेत्र पेट्रोलियम उत्पादों पर काफी हद तक निर्भर हैं. इससे उत्पादन लागत कम होने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना रहती है. इसका सीधा फायदा आम उपभोक्‍ताओं को मिलने की संभावन है। 

क्या सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल?
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत कम होने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ते हो जाएंगे. भारत में खुदरा ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं. इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग मार्जिन, मालभाड़ा, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कर तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के मूल्य निर्धारण संबंधी निर्णय शामिल हैं. इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है और तेल कंपनियां इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना होगी। 

भारत और चीन पर फोकस
एशिया दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक क्षेत्र है. भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश सऊदी अरब के सबसे बड़े ग्राहक हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस बाजार में रूस की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है. यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने रियायती कीमतों पर अपना तेल एशियाई देशों को बेचना शुरू किया. भारत और चीन रूस के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे. ऐसे में सऊदी अरब पर दबाव बढ़ा. विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में इतनी बड़ी कटौती का उद्देश्य एशियाई रिफाइनरियों को आकर्षित करना और उन्हें रूस या अन्य सप्‍लायर्स की बजाय सऊदी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है. इसके अलावा चीन की धीमी आर्थिक वृद्धि के कारण वहां तेल की मांग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जिससे भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 

गैर-मुस्लिम से निकाह पर नई शर्त, वक्फ बोर्ड की अनुमति होगी अनिवार्य; जानें कहां लागू हुआ नियम

रायपुर
 छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह व्यवस्था में पारदर्शिता लिए एक नई पहल करने जा रहा है, जिसमें अगर कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, आवश्यक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. बिना अनुमति निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन भी होगा. नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. केवल रजिस्टर्ड मौलाना ही निकाह करा सकेंगे। 

बोर्ड का कहना है कि इससे फर्जी पहचान, दस्तावेज छिपाकर विवाह कराने और विवादित मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी. हर निकाह का पूरा रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रखा जाएगा. निकाह के बाद जारी होने वाला प्रमाणपत्र भी बोर्ड के माध्यम से जारी किया जाएगा. वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़े कुछ मामलों की शिकायतें मिली हैं, इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है। 

वक्फ बोर्ड के पास रहेगा रिकॉर्ड
बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के अनुसार, वर्तमान में कई स्थानों पर निकाह का कोई केंद्रीकृत रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, जिससे बाद में वैवाहिक स्थिति, पहचान और कानूनी मामलों में विवाद पैदा होते हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक निकाह का रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के पास सुरक्षित रहेगा और प्रमाणपत्र भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी किया जाएंगे। 

वक्फ बोर्ड क्या होता है?
वक्फ बोर्ड एक वैधानिक संस्था है, जो मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक, सामाजिक या जनकल्याण के उद्देश्य से दान की गई संपत्तियों का प्रबंधन और संरक्षण करती है. इसका गठन वक्फ अधिनियम, 1995 (बाद में संशोधित) के तहत किया जाता है। 

भारत में वक्फ बोर्ड
लगभग हर राज्य का अपना राज्य वक्फ बोर्ड होता है.इनके अलावा एक केंद्रीय वक्फ परिषद भी है, जो केंद्र सरकार के अधीन सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करती है। 

पश्चिम बंगाल राज्यसभा चुनाव: क्या ममता से 3 सीटें छीन पाएगी BJP? जानें NDA का पूरा गणित

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की सत्ता परिवर्तन के बाद अब तीन राज्यसभा पर चुनाव की बारी है. निर्वाचन आयोग ने तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है. ये तीनों सीटें बंगाल के सत्ता बदलने के बाद टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई हैं. अब सवाल है कि बीजेपी क्या टीएमसी के बागियों पर दांव खेलेगी या फिर अपने किसी नए चेहरों पर जताएगी भरोसा? 

ममता बनर्जी के सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दे दिया था. राज्यसभा सदस्यता के साथ टीएमसी को भी अलविदा कह दिया था, जिसके चलते खाली हुई तीनों राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग ने 24 जुलाई को मतदान कराने का फैसला किया है। 

बंगाल के बदले हुए सियासी समीकरण के बाद राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के पास 207 विधायक हैं तो टीएमसी दो गुटों में बंट चुकी है. इस लिहाज से बीजेपी तीनों राज्यसभा सीटें ममता बनर्जी के हाथों से छीन लेगी, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में ममता बनर्जी को उनके ही बागियों के जरिए मात देगी या फिर नए चेहरों को सांसद भेजेगी?

बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. चुनाव आयोग के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के लिए मंगलवार से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है और 14 जुलाई तक नॉमिनेशन किए जाएंगे. इसके बाद नामांकन पत्रों की  स्क्रूटनी 15 जुलाई को होगी और 17 जुलाई नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है. इसके बाद अगर सीटों की संख्या से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो फिर 24 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी और उसी दिन पांच बजे के बाद नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। 

राज्यसभा की ये तीन सीटें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं, लेकिन तीनों सीटों का कार्यकाल अलग-अलग हैं. सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल 18 अगस्त 2029 तक था तो सुष्मिता देव का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक था. इस लिहाज से दो सीटें के एक साथ मतदान होंगे तो एक सीट के लिए अलग से वोटिंग होगी। 

ममता बनर्जी से तीनों सीटें छीन लेगी बीजेपी
राज्यसभा की तीनों ही सीटों पर टीएमसी का कब्जा था, लेकिन अब ममता बनर्जी के हाथों से तीनों ही राज्यसभा सीटें बीजेपी छीन लेगी. बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों में से बीजेपी के पास इस समय 207 विधायक हैं, जबकि ममता बनर्जी की टीएमसी महज 80 विधायक हैं, लेकिन दो गुटों में बंटे हुए हैं. टीएमसी के 80 में से 60 से 65 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ हैं और 15 विधायक ममता बनर्जी के साथ हैं।  

राज्यसभा उपचुनाव के लिए अलग-अलग वोटिंग होनी, इसलिए बहुमत के आंकड़े के लिहाज से बीजेपी बिना किसी अड़चन के तीनों राज्यसभा सीटों पर कब्जा करने की स्थिति में है. यह ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि उच्च सदन में उनकी पार्टी की ताकत सीधे तौर पर कम होने जा रही है. यही नहीं टीएमसी के विधायक अगर एकजुट भी हो जाते हैं तो भी नहीं जीत पाएंगे. इसकी वजह यह है कि प्रथम वारियता के आधार पर भी बीजेपी की संख्या टीएमसी से ज्यादा हो रही है। 
 
टीएमसी के ‘बागियों’ पर दांव खेलेगी भाजपा?
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिन तीन नेताओं ने टीएमसी नेतृत्व से नाराज होकर राज्यसभा से इस्तीफा दिया है, क्या बीजेपी उन्हें ही राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाएगी. सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी का एक बड़ा और अनुभवी चेहरा रहे हैं तो सुस्मिता देव असम की कद्दावर महिला नेता के रूप में जानी जाती हैं. माना जा रहा है कि जिस तरह से टीएमसी के नेताओं ने बीच कार्यकाल में इस्तीफा दिया है, उसके चलते माना जा रहा है कि बीजेपी बागियों पर भरोसा जता सकती है। 

सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने टीएमसी छोड़ दी है, लेकिन अधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन नहीं थामा है. ऐसे में अब सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में किसे उम्मीदवार बनाएगी. सूत्रों की माने तो सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक पर बीजेपी दांव खेल सकती है, लेकिन सुष्मिता देव को राज्यसभा के बजाय असम से लोकसभा उपचुनाव लड़ाया जा सकता है।  

बीजेपी क्या नए और युवा चेहरों को देगी मौका
बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से बीजेपी के हौसले बुलंद है. बीजेपी ने आलाकमान का एक धड़ा यह मान रहा है कि विधानसभा चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद अब पार्टी को किसी बैसाखी या बाहरी नेताओं की जरूरत नहीं है. ऐसे में बीजेपी किसी स्थानीय नेताओं को मौका दे सकती है. सूत्रों के मुताबिक आरएसएस और भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी इस पक्ष में है कि जिन्होंने संकट के दिनों में बंगाल में भाजपा का झंडा थामे रखा, उन्हें पुरस्कृत किया जाए। 

 पार्टी उत्तर बंगाल से किसी मजबूत राजवंशी या आदिवासी चेहरे और दक्षिण बंगाल से किसी मतुआ समुदाय या सांगठनिक पृष्ठभूमि के नेता को मौका दे सकती है. इस तरह बीजेपी नए चेहरों को उतारकर 2029 के आम चुनाव के लिए राज्य में अपनी एक नई और कड़क लीडरशिप लाइन तैयार करना चाहती है. अब देखना है कि बीजेपी अपनी जीत के लिए कन्फर्म है, लेकिन किस चेहरे पर दांव खेलती है, यह देखना होगा? 

दो-तिहाई बहुमत के कितनी दूर बीजेपी
राज्यसभा की इन तीन सीटें जीतने के बाद मॉनसून सत्र के बीच में यानी जुलाई के आखिरी सप्ताह में ही उच्च सदन में बीजेपी की संख्या में इजाफा हो जाएगा. सरकार यदि मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लाती है तो राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत हासिल करने में आसानी रहेगी. जुलाई के आखिरी सप्ताह में राज्यसभा में 245 सदस्यों के सदन में दो तिहाई बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत होगी। 

बीजेपी तीन राज्यसभा सीटें जीतने के बाद उसका आंकड़ा 117 हो जाएगा. एनजीए के पास राज्यसभा सांसदों की संख्या 145 हो जाएगी.  इस तरह दो तिहाई के लिए 17 राज्यसभा सांसदों के अतरिक्त समर्थन की जरूरत होगी. ऐसे में वाईएसआरसीपी के चार, मनोनीत सात और चार निर्दलीय सांसदों का समर्थन मिल सकता है। 

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : अरपा-बिहान के विष्णुभोग चावल को मिला जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का भरपूर समर्थन

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : अरपा-बिहान के विष्णुभोग चावल को मिला जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का भरपूर समर्थन

महज 30 मिनट में 45 हजार रुपये से अधिक के विष्णुभोग चावल की हुई बिक्री

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा उत्पादित एवं प्रसंस्कृत अरपा-बिहान विष्णुभोग चावल को जिले में लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के जिले के प्रवास एवं असेंबली हॉल पेण्ड्रा में आयोजित स्थानीय जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं नागरिकों ने विष्णुभोग चावल की सराहना करते हुए उत्साहपूर्वक इसकी खरीदी की।

           कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपची, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं से विष्णुभोग चावल खरीदकर उनका उत्साहवर्धन किया। स्थानीय निवासी पंकज तिवारी ने 200 किलोग्राम विष्णुभोग चावल खरीदकर अब तक के सबसे बड़े खरीदार बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके अलावा रायपुर एवं जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों ने भी चावल खरीदकर महिलाओं के उत्पादों को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम के दौरान मात्र 30 मिनट में महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) द्वारा 45 हजार रुपये से अधिक मूल्य के विष्णुभोग चावल की बिक्री की गई, जिसे महिलाओं के आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

           उल्लेखनीय है कि विष्णुभोग धान का उत्पादन स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा जैविक पद्धति से किया जाता है। बिहान के अंतर्गत गठित महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से धान का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन किया जाता है, जिससे उत्पाद को बेहतर बाजार और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मुकेश रावटे द्वारा जिले के विभिन्न कार्यक्रमों एवं मंचों पर विष्णुभोग चावल को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे इसकी मांग और उत्पादन दोनों में वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि मिशन के अंतर्गत 179 सीएमएसए ग्रामों का चयन किया गया है। इस वर्ष 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विष्णुभोग धान का उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें।

कृत्रिम पैर से बबीता के जीवन को मिली नई दिशा, प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी सहारा

रायपुर

 संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका।

रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।

विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।

बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu