34 करोड़ लोगों के खाते में आएगी बड़ी रकम! सरकार ने बताई तारीख, तुरंत चेक करें अपना अकाउंट

नई दिल्ली

देश के करीब 34 करोड़ खातों में EPFO एक साथ ब्याज की राशि डिपॉजिट करने वाला है. सरकार की ओर तारीख भी तय कर दी गई है, यानी 33 करोड़ लोगों को खुशखबरी मिलने वाली है। 

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के अनुसार EPFO 15 जुलाई को देश के लगभग 34 करोड़ (कुल पंजीकृत एवं निष्क्रिय खातों सहित) लाभार्थियों के खातों में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज की राशि क्रेडिट करने जा रहा है. सरकार इस बार कुल 1.44 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम ब्याज राशि सीधे सब्सक्राइबर्स के खातों में ट्रांसफर करेगी। 

आप घर बैठे कर सकते हैं चेक

आज से ठीक एक हफ्ते बाद यानी अगले बुधवार को 34 करोड़ लोगों के पीएफ खातों में ब्याज क्रेडिट हो जाएगा. अगर आप भी एक पीएफ खाताधारक हैं, तो 15 जुलाई के बाद उमंग ऐप (UMANG App), EPFO पोर्टल या अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर से मिस-कॉल/एसएमएस भेजकर अपना पीएफ बैलेंस और क्रेडिट हुई ब्याज राशि की जांच कर सकते हैं। 

दरअसल केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अगुवाई में हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 फीसदी की वार्षिक ब्याज दर को बनाए रखने की सिफारिश की गई थी. वित्त मंत्रालय द्वारा इस दर को मंजूरी मिलने के बाद अब सब्सक्राइबर्स के खातों में सीधे पैसे भेजे जा रहे हैं. यह लगातार तीसरा वर्ष है, जब सरकार ने PF पर अपनी ब्याज दर को 8.25% पर स्थिर रखा है, जो बाजार के अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में काफी बेहतर रिटर्न प्रदान करता है। 

ब्याज क्रेडिट होने का नया सिस्टम
इस बार खाताधारकों को ब्याज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. EPFO द्वारा विकसित किए गए नए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम के माध्यम से सरकार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी होते ही ब्याज की राशि सब्सक्राइबर्स के खातों में तुरंत ट्रांसफर कर दी जाएगी. इससे पहले अक्सर पीएफ खाताधारकों को अपने खातों में ब्याज दिखने के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इस नई डिजिटल व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो गई है। 

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद EPFO खाता धारकों के ब्याज में कोई कटौती नहीं की गई है. संगठन को एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) और अपने मजबूत निवेश पोर्टफोलियो से बेहतरीन रिटर्न प्राप्त हुआ है, जिसके कारण वह बिना किसी वित्तीय दबाव के पिछले कई वर्षों से लगातार 8% से ऊपर ब्याज देने में सफल रहा है. इसके साथ ही, इस बैठक में निष्क्रिय पड़े खातों में जमा छोटी और लावारिस राशियों के निपटान के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है। 

छत्तीसगढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन, यातायात नियम तोड़ने पर 62 वाहन चालकों के चालान

बीजापुर.

सड़क सुरक्षा को लेकर बीजापुर पुलिस ने यातायात नियमों के उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया। विशेष जांच अभियान के दौरान यातायात नियमों का पालन नहीं करने वाले 62 वाहन चालकों के चालान काटे गए, जिनसे कुल ₹27,200 का समन शुल्क वसूला गया।

बता दें कि यह विशेष अभियान पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई डीएसपी एवं यातायात नोडल अधिकारी विनीत साहू के नेतृत्व में की गई। अभियान के दौरान यातायात प्रभारी केशव ठाकुर, सहायक उप निरीक्षक विजय मंडावी सहित यातायात शाखा के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए चालान जारी किए गए। पुलिस ने कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाया।

इस दौरान वाहन चालकों और आम नागरिकों को सड़क सुरक्षा के महत्व और यातायात नियमों की जानकारी दी गई। लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने तथा अन्य यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करने की शपथ भी दिलाई गई। बीजापुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन कर न केवल अपनी, बल्कि दूसरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह के विशेष जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

​राजस्व सुधारों की नई इबारत लिखता छत्तीसगढ़: ‘ऑटो म्यूटेशन’ और ‘ऑटो डायवर्सन’ से जमीन संबंधी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

​राजस्व सुधारों की नई इबारत लिखता छत्तीसगढ़: ‘ऑटो म्यूटेशन’ और ‘ऑटो डायवर्सन’ से जमीन संबंधी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

​99.95 प्रतिशत ऑटो म्यूटेशन सफलता दर ने रचा रिकॉर्ड, ऑटो डायवर्सन में 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का हुआ निराकरण

​कोरिया बना नंबर-1, धमतरी ने टॉप-5 में दर्ज कराई दमदार मौजूदगी; जिलों के प्रदर्शन ने दिखाई जवाबदेह प्रशासन की तस्वीर

​NGDRS इंटीग्रेशन, मल्टीपल खसरा और रिकवरी मॉड्यूल से राजस्व सेवाओं को मिलेगा नया डिजिटल ढांचा

​आम नागरिक को दफ्तरों के चक्कर से राहत, पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण के साथ सुशासन का मजबूत मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़

​रायपुर
सुशासन के नए डिजिटल युग में राजस्व प्रशासन अब फाइलों और लंबित प्रकरणों के पारंपरिक चक्रव्यूह से बाहर निकल चुका है। राज्य शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने तकनीक को माध्यम बनाकर जमीन से जुड़ी सेवाओं का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। ‘ऑटो म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) और ‘ऑटो डायवर्सन’ (स्वतः व्यवर्तन) जैसी जन-हितैषी व्यवस्थाओं ने विभाग को तेज, पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त बनाया है। इससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर, लंबे इंतजार और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना से स्थायी मुक्ति मिली है।

     ​पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और भौतिक सत्यापन की थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति से अब यह स्वतः संपन्न हो रहा है। इसके साथ ही, भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के लिए आवेदन, प्रीमियम निर्धारण और शुल्क गणना को भी आधुनिक तकनीक से त्रुटिहीन बनाया गया है। छत्तीसगढ़ का यह डिजिटल गवर्नेंस मॉडल आज देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

​आंकड़ों की जुबानी: सफलता की एक नई गाथा

       ​राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रामाणिक आंकड़े इस ऐतिहासिक परिवर्तन की गवाही देते हैं। राज्य में अब तक कुल 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से रिकॉर्ड 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। संपूर्ण प्रदेश में केवल 71 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जिससे विभाग ने 99.95 प्रतिशत की अभूतपूर्व सफलता दर हासिल की है।

      ​वहीं दूसरी ओर, ‘ऑटो डायवर्सन’ व्यवस्था के तहत कुल 5 हजार 661 आवेदन दर्ज किए गए, जिनमें से 4 हज़ार 739 मामलों का त्वरित निराकरण किया गया। इस प्रकार 83.71 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण कर यह साबित कर दिया गया कि जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से सुगम और पारदर्शी बनाया जा सकता है। राजस्व सेवाएँ सीधे नागरिक के जीवन, संपत्ति और निवेश से जुड़ी होती हैं; अतः इनमें गति आने से राज्य की आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिली है।

​ऑटो म्यूटेशन ने बदली नामांतरण की तस्वीर

     ​किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद भू-अभिलेखों में नाम दर्ज होना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पुराने दौर में पटवारियों और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना, दस्तावेजों की जांच में महीनों गंवाना और अनिश्चितता का सामना करना आम बात थी, जिसने भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दिया।

      ​आज छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल चुकी है। 1 लाख 40 हज़ार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हज़ार 536 मामलों का स्वतः नामांतरण होना यह दर्शाता है कि अब नागरिक को अपने हक के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से समय और धन की भारी बचत हो रही है और रिकॉर्ड रीयल-टाइम अपडेट होने से जमीनी धोखाधड़ी पर लगाम लगी है।

     ​इस सफलता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा एक सख्त तकनीकी लॉक सिस्टम विकसित किया गया है। इसके तहत, यदि किसी संपत्ति का एक भी पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री तब तक नहीं हो पाएगी जब तक पिछला म्यूटेशन क्लियर न हो जाए। यह कदम निचले स्तर के प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाता है।

​ऑटो डायवर्सन से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया हुई तेज

     ​कृषि भूमि को आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग में बदलना (डायवर्सन) शहरीकरण, निवेश और रोजगार सृजन की रीढ़ है। पहले आवेदकों को शुल्क, आवश्यक दस्तावेजों और समय सीमा की स्पष्ट जानकारी नहीं होती थी।

      ​फरवरी से जून 2026 के बीच 5 हजार 661 आवेदनों में से 4 हजार 739 का त्वरित निस्तारण यह दिखाता है कि विभाग ने गाइडलाइन दरों के आधार पर प्रीमियम निर्धारण जैसी पेचीदा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर दिया है। वर्तमान में जो 922 लंबित मामले हैं, उनके पीछे अपूर्ण दस्तावेज, चालान राशि में तकनीकी अंतर या नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) के मास्टर प्लान से भिन्न प्रयोजन होना जैसे व्यावहारिक कारण हैं। इन चुनौतियों को सार्वजनिक करना विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

​जिला-वार प्रदर्शन ने दिखाई नई प्रशासनिक संस्कृति

     ​ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में जिलों के बीच एक स्वस्थ और परिणाम-उन्मुख प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जो यह प्रमाणित करती है कि सुधार जमीनी स्तर पर लागू हो चुके हैं। कोरिया जिला कुल 59 प्रकरणों में से सभी 59 का शत-प्रतिशत निराकरण कर 100 प्रतिशत सफलता दर के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर रहा।कोरबा जिला 98.46 प्रतिशत की सफलता दर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसी तरह ​मुंगेली जिला 94.16 प्रतिशत मामलों का निपटारा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।​बालोद जिला 93.72 प्रतिशत निस्तारण दर के साथ शीर्ष जिलों में शामिल रहा।​धमतरी जिला कुल 165 प्रकरणों में से 153 का वैधानिक निराकरण कर 92.73 प्रतिशत सफलता दर के साथ राज्य में पाँचवाँ (शीर्ष-5) स्थान प्राप्त किया। धमतरी का यह प्रदर्शन नियमित समीक्षा और जवाबदेह कार्यशैली का परिणाम है।

​तकनीकी सुधार और नए डिजिटल मॉड्यूल्स

      ​विभाग अपनी वर्तमान उपलब्धियों से आगे बढ़कर एक एकीकृत ‘डिजिटल इकोसिस्टम’ के निर्माण में जुटा है। ​NGDRS API Integration इसके माध्यम से सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं, जिससे प्रीमियम का निर्धारण मानवीय हस्तक्षेप के बिना पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी हो गया है।

​’Diverted to Diverted’ मॉड्यूल:

      यदि पहले से डायवर्टेड भूमि का आंतरिक उपयोग बदलना हो (जैसे आवासीय से वाणिज्यिक), तो इस मॉड्यूल के तहत निस्तारण के लिए 15 दिवस की समय सीमा तय की गई है।

​’मल्टीपल खसरा’ मॉड्यूल 

      एक से अधिक खसरों वाली भूमि के लिए अब एक ही आवेदन में अनेक खसरों का चयन, स्वतः शुल्क गणना और ई-चालान की सुविधा मिलेगी। इसके लिए समय सीमा जुलाई 2026 रखा गया है।

​’रिकवरी’ मॉड्यूल
 
    पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए पूर्व भुगतानों की प्रविष्टि, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व/उपकर की मांग और एक उच्च स्तरीय रिकवरी डैशबोर्ड की व्यवस्था की जाएगी।इसके लिए समय सीमा अगस्त 2026 निर्धारित किया गया है।

​सुशासन का नया मॉडल बनता छत्तीसगढ़

     ​यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ तकनीकी आंकड़ों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ नागरिकों के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने का माध्यम है। किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशक सभी को अब घर बैठे अपने मोबाइल पर पारदर्शी सेवाएँ मिल रही हैं।

     ​दिसंबर 2026 तक के लिए तय किए गए रोडमैप के अनुसार, राज्य के सभी क्षेत्रों की सैटेलाइट/ड्रोन मैपिंग, टीएनसीपी  से एनओसी लिंकिंग और मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का वृहद् अपग्रेडेशन किया जाना है। ये कदम छत्तीसगढ़ को डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय बेंचमार्क के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। तकनीक, संवेदनशीलता और जवाबदेही के इस बेजोड़ संगम से छत्तीसगढ़ ने जन-केंद्रित शासन की एक नई मिसाल पेश की है।

विष्णु प्रसाद वर्मा
  सहायक संचालक

स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पेयजल सुविधाओं को मिलेगा नया संबल, डीएमएफ से 4.13 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी

स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पेयजल सुविधाओं को मिलेगा नया संबल, डीएमएफ से 4.13 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयासों से रायगढ़ में आधारभूत सुविधाओं का लगातार हो रहा विस्तार

रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) द्वारा 4 करोड़ 13 लाख 82 हजार 400 रुपये से अधिक की लागत के विभिन्न विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले के ग्रामीण एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से धरमजयगढ़ क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घरघोड़ा के निर्माण एवं उन्नयन कार्य के लिए 2 करोड़ 80 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्रवासियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पांच पेयजल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। ग्राम गोरपार एवं नंदगांव में 25 केएल सम्पवेल आधारित पेयजल व्यवस्था के लिए 6 लाख 47 हजार 700 रुपये-रुपये, ग्राम शहपुर में नलकूप खनन, रॉ-वॉटर पंप एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 9 लाख 94 हजार रुपये, ग्राम नवापारा के लिए 5 लाख 32 हजार रुपये तथा ग्राम पुसल्दा के लिए 8 लाख 45 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन योजनाओं से संबंधित गांवों में स्वच्छ एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

युवाओं को बेहतर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए धर्मजयगढ़ स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) भवन के जीर्णोद्धार हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे संस्थान की अधोसंरचना मजबूत होगी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

शिक्षा के क्षेत्र में भी ग्राम पंचायत साम्हारसिंघा में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए 14 लाख 30 हजार रुपये की प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। नए भवन के निर्माण से विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधायुक्त और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा।

स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य संबंधी कार्य छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी), पेयजल योजनाएं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, आईटीआई भवन का जीर्णोद्धार छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड तथा प्राथमिक शाला भवन का निर्माण जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से कराया जाएगा।

डीएमएफ से स्वीकृत इन विकास कार्यों के पूरा होने से रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पेयजल सुविधाओं का दायरा और मजबूत होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर जनसुविधाएं उपलब्ध होने के साथ जिले के समग्र एवं संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।

तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

हेल्थ प्रोफेशनल और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन का कार्य समय से पूर्ण कर डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को करें मजबूत
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति की समीक्षा की

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अंतर्गत संचालित प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा आभा आईडी, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जाए। बैठक में सीईओ आयुष्मान अरविंद कुमार शाह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में एकीकृत एवं परस्पर जुड़ा हुआ डिजिटल स्वास्थ्य इको सिस्टम विकसित करना है। इसके माध्यम से नागरिकों को विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान आभा आईडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से प्राप्त एवं साझा कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सकों, नर्सों, आयुष चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का पंजीयन तेजी से कराया जाए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से मरीज, चिकित्सक, प्रयोगशाला, फार्मेसी, अस्पताल और बीमा सेवाओं के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का सुरक्षित एवं निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा। इससे उपचार की निरंतरता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।

सीईओ आयुष्मान शाह ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 5.86 करोड़ एबीएचए आईडी बनाई जा चुकी हैं। साथ ही लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं तथा लगभग 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।

हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से स्वास्थ्य पेशेवरों की डिजिटल पहचान

सीईओ आयुष्मान शाह ने बताया कि हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री के अंतर्गत चिकित्सक, नर्स, दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक तथा अन्य लाइसेंसधारी स्वास्थ्य पेशेवरों का सत्यापित डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवर को विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जाती है। इससे डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित प्रमाणीकरण, टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार तथा विश्वसनीय डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।

हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री से स्वास्थ्य संस्थानों का एकीकरण

हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के अंतर्गत शासकीय एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं, फार्मेसियों, इमेजिंग सेंटर और वेलनेस सेंटर का पंजीयन किया जा रहा है। प्रत्येक संस्थान को विशिष्ट हेल्थ फैसिलिटी आईडी प्रदान की जाती है। इससे संस्थानों की जानकारी का मानकीकरण होगा तथा उन्हें एबीएचए, स्कैन एंड शेयर एवं नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सकेगा।

स्कैन एंड शेयर से आसान एवं पेपरलेस ओपीडी पंजीयन

समीक्षा में स्कैन एंड शेयर पहल की प्रगति की भी जानकारी दी गई। प्रदेश में वर्तमान में 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सक्रिय है। इसके माध्यम से अब तक 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार 164 से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। स्कैन एंड शेयर सुविधा के अंतर्गत मरीज अस्पताल पहुंचकर एबीएचए एप अथवा अन्य एबीडीएम सक्षम एप के माध्यम से अस्पताल का क्यूआर कोड स्कैन करता है। मरीज की सहमति से उसकी मूलभूत जानकारी अस्पताल के डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रूप से साझा होती है और उसे डिजिटल ओपीडी टोकन प्राप्त हो जाता है। इससे मरीजों को लंबी पंजीयन कतारों से राहत मिलती है तथा कागजरहित और त्वरित पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होती है।

 

कियारा का ‘तबाही’ अवतार वायरल! यश संग रोमांटिक केमिस्ट्री ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

मुंबई 

यश और कियारा आडवाणी की फिल्म ‘टॉक्सिक’ का पहला गाना ‘तबाही’ रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. 4 मिनट 28 सेकंड के इस गाने में दोनों के बीच जबरदस्त केमिस्ट्री, रोमांस और कई इंटीमेट मोमेंट्स देखने को मिलते हैं. लेकिन इसी गाने ने अब सोशल मीडिया पर नई बहस भी छेड़ दी है। गाने में यश का रफ-एंड-टफ लुक और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस लोगों को खूब पसंद आ रही है. वहीं कियारा आडवाणी अपने ग्लैमरस और ड्रीमी अवतार में नजर आ रही हैं. सोशल मीडिया पर फैंस लगातार दोनों की तारीफ करते हुए लिख रहे हैं कि ‘ये जोड़ी स्क्रीन पर आग लगा रही है। 

पूरे गाने में यश और कियारा एक-दूसरे के प्यार में डूबे नजर आते हैं. कभी बारिश में भीगते हुए, कभी बीच पर रोमांटिक पल बिताते हुए, कभी कार या सर्कस में तो कभी एक-दूसरे की बाहों में खोए हुए. दोनों की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को देखकर फैंस इसे साल की सबसे हॉट स्क्रीन पेयरिंग बता रहे हैं। जहां एक तरफ गाने को खूब प्यार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स सवाल भी उठा रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसा लग रहा है जैसे पूरे गाने में कियारा को सिर्फ खूबसूरत दिखाने और रोमांटिक फ्रेम्स तक ही सीमित रखा गया है. न सिर्फ गाना बल्कि ट्रेलर में भी कियारा एक आई कैंडी की तरह नजर आई हैं। कुछ दिन पहले रिलीज हुए टीजर ने भी दर्शकों के बीच सनसनी-सी मचा दी थी. जहां कई लोग इसके हाई-ऑक्टेन विजुअल्स को पसंद कर रहे थे, वहीं कई ने इसे एडल्ट प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों जैसा बताकर खिल्ली उड़ा दी थी। 

‘तबाही’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी विजुअल स्टाइल है. पूरे गाने में लगभग हर फ्रेम यश और कियारा के रोमांटिक और सेंशुअस पलों के इर्द-गिर्द घूमता है. गाना कहानी से ज्यादा दोनों के रिश्ते की मजबूती और केमिस्ट्री को दिखाने पर फोकस करता नजर आता है। दिलचस्प बात ये है कि इतने रोमांटिक और इंटीमेट विजुअल्स के बावजूद गाने में एक भी लिपलॉक सीन नहीं है. कई फिल्म एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि मेकर्स ने बहुत कुछ दर्शकों की इमेजिनेशन पर छोड़ दिया है. इसी वजह से कई लोग इसे स्टाइलिश और सिनेमैटिक मास्टरपीस भी बता रहे हैं।              

एक तरफ फैंस गाने की सिनेमैटोग्राफी, म्यूजिक, यश की स्क्रीन प्रेजेंस और कियारा की खूबसूरती की जमकर तारीफ कर रहे हैं. दूसरी तरफ कुछ लोग इसे सिर्फ विजुअल ग्लैमर बताते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या फिल्म में कियारा का किरदार इससे कहीं ज्यादा दमदार होगा? फिलहाल इस पर सिर्फ अटकलें ही हैं। एक बात तो तय है कि ‘तबाही’ ने रिलीज होते ही फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर एक्साइटमेंट कई गुना बढ़ा दी है. यश और कियारा की नई जोड़ी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है. अब फैंस की नजर ट्रेलर पर है, जहां पता चलेगा कि पर्दे पर दिख रही ये रोमांटिक केमिस्ट्री कहानी में कितना बड़ा रोल निभाने वाली है। 

गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बनी टॉक्सिक 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली हैं. फिल्म में यश के साथ न सिर्फ कियारा आडवाणी बल्कि नयनतारा, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत भी होंगी. फिल्म का ट्रेलर अगस्त में जारी किया जा सकता है. लेकिन रिलीज से पहले ही उन्होंने ‘तबाही’ जरूर मचा दी है। 

CG के मुख्य सचिव ने PM आवास 2.0 टास्क फोर्स की बैठक ली, पात्र आवासहीनों को जल्द पक्का घर देने के निर्देश

रायपुर.

मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास 2.0 भूमि टाक्स फोर्स की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय प्रोजेक्ट के लिए भूमि के सर्वेक्षण एवं चिन्हांकन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।

मुख्य सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों को प्रधानमंत्री आवास 2.0 के लिए हितग्राही की पहचान कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। उन्होंने आबादी भूमि पर रहने वाले पात्र हितग्राहियों को ढूंढकर सत्यापन करना एवं उन्हें आवास उपलब्ध कराने के लिए समूचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नगरीय निकायों मेें वर्तमान और भविष्य की आवासीय आवश्यकता का आंकलन कर कार्ययोजना बनाने कहा है। जिससे समय पर हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराये जा सकें।

इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनांतर्गत हितग्राहियों की पहचान कर आवश्यकतानुसार आवास बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है। बैठक में नगरीय एवं प्रशासन विकास विभाग की सचिव आर.शंगीता, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

भोपाल में रिश्तों की मिसाल! बेटे के निधन के बाद सास-ससुर ने विधवा बहू का कराया पुनर्विवाह, पिता बनकर किया कन्यादान

 भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से रिश्तों को नई परिभाषा देने वाली एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बेटे के असमय निधन के बाद एक परिवार ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा देते हुए उसका पुनर्विवाह कराया। इतना ही नहीं, ससुर ने स्वयं पिता की भूमिका निभाते हुए कन्यादान किया और पूरे सम्मान के साथ उसे नए जीवन की ओर विदा किया। इस भावुक पल ने विवाह समारोह में मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

बहू का भविष्य संवारने का लिया संकल्प
यह मार्मिक घटना  रात संत हिरदाराम नगर के समीप ग्राम भौंरी स्थित एक विवाह समारोह में देखने को मिली। सभी वैवाहिक रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुईं। सबसे भावुक क्षण तब आया, जब किसान दिनेश बैरागी ने अपनी बहू प्रियंका का कन्यादान कर उसे बेटी की तरह आशीर्वाद देते हुए नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।

परिवार के अनुसार, वर्ष 2018 में दिनेश बैरागी के पुत्र कपिल का विवाह कुलूखेड़ी गांव निवासी प्रियंका से हुआ था। उस समय प्रियंका की पढ़ाई चल रही थी, इसलिए उसकी विदाई नहीं हुई। वर्ष 2023 में वह ससुराल आई और अपने व्यवहार से पूरे परिवार का दिल जीत लिया।

कैंसर से बेटे की मौत के बाद लिया बड़ा फैसला
इसी बीच कपिल को कैंसर होने का पता चला। लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन वर्ष 2024 में उनका निधन हो गया। बेटे को खोने के गहरे दुख के बावजूद परिवार ने प्रियंका का भविष्य संवारने का निर्णय लिया। सोमवार को प्रियंका का विवाह विदिशा जिले के ग्राम अरारी खेजड़ा निवासी गोबिंद बैरागी के साथ संपन्न कराया गया। विवाह की सभी तैयारियों से लेकर हर रस्म तक का दायित्व दिनेश बैरागी और उनके परिवार ने निभाया।

‘बहू नहीं, बेटी का कन्यादान किया’
विवाह के बाद दिनेश बैरागी ने कहा कि उन्होंने हमेशा प्रियंका को बहू नहीं, बेटी माना और उसका कन्यादान करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनका मानना है कि जीवन कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना चाहिए और परिवार का दायित्व है कि वह अपने सदस्यों का साथ निभाए।

वहीं, प्रियंका के पिता रामबाबू बैरागी भी इस अवसर पर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के ससुराल वाले ही उसके पुनर्विवाह की पूरी जिम्मेदारी उठाकर समाज के सामने इतनी बड़ी मिसाल पेश करेंगे।

 

तीस वर्षों से लंबित सरदार सरोवर परियोजना का सर्वसम्मति से समाधान होना बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

तीस वर्षों से लंबित सरदार सरोवर परियोजना का सर्वसम्मति से समाधान होना बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश को अब डेढ़ हजार करोड़ रूपए के स्थान पर केवल 217 करोड़ रूपए ही देना होंगे
मध्यप्रदेश बना वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य
ज्ञान भारतम् योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम
34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण और 12 लाख से अधिक का हुआ सत्यापन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से विगत 30 वर्षों से सरदार सरोवर परियोजना को लेकर लंबित जटिल मुद्दे का सर्वसम्मति से समाधान हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विषय मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबित था। भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में अभिमत दिया कि पुनर्वास की लागत भागीदार राज्यों के मध्य विभाजित होनी चाहिए। अभिमत के अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए का भुगतान करने की स्थिति बन रही थी। नई दिल्ली में हुई बैठक में तय किया गया कि 50% के स्थान पर 75% का खर्चा गुजरात द्वारा ही दिया जाए, और इस प्रकार मध्यप्रदेश को अब केवल रूपये 217 करोड़ की राशि देना होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में दी।

टीकमगढ़ से मिला 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का नक्शा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में में नये अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड का गठन कर लिया गया है। वक्फ बोर्ड का पुर्नगठन करने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए चलाए जा रही ज्ञान भारतम् योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर आया है। अब तक 34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण और 12 लाख से अधिक का सत्यापन किया जा चुका है। टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा ‘जम्बू द्वीप का नक्शा, पन्ना से ‘रसिक प्रिया’, बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना हस्तलिखित ‘श्रीमद्भागवत’ और दतिया से ऐतिहासिक ताम्रपत्र जैसी अमूल्य धरोहरें प्राप्त हुई हैं।

जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्यप्रदेश ने नया इतिहास रचा है। प्रदेश में गत तीन वर्षों में 15 हजार 819 करोड़ रूपये लागत के 5 लाख 20 हजार 400 से अधिक कार्य हुए हैं। वर्ष 2024 में 1 हजार 367 करोड़ रूपये लागत से 60 हजार 428 कार्य कराए गए। वर्ष 2025 में 4 हजार करोड़ रूपये लागत के 1 लाख से अधिक कार्य सम्पन्न हुए। वर्ष 2026 में 10 हजार 452 करोड़ रूपये लागत के 3 लाख 60 हजार, कार्य प्रदेश में सम्पन्न हुए। वर्ष 2026 में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रथम 5 जिले बड़वानी, खण्डवा, नीमच, उज्जैन और खरगोन रहे।

प्रदेश को खेलों में मिली बड़ी सफलता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश को खेलों में बड़ी सफलता मिली है। जापान में आयोजित अंडर-18 पुरुष और महिला हॉकी एशिया कप-2026 टूर्नामेंट में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण और 4 कांस्य पदक जीते। भारतीय बालक एवं बालिका हॉकी टीम में प्रदेश के कुल 10 खिलाड़ी शामिल रहे। ये खिलाड़ी भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम, सिवनी और बड़वानी जिले के साधारण परिवारों से हैं। राज्य सरकार ने हॉकी स्वर्ण पदक विजेता टीम के खिलाड़ियों को 3 लाख रूपए प्रति खिलाड़ी और कांस्य पदक विजेता टीम के खिलाड़ियों को एक लाख रूपए प्रति खिलाड़ी प्रोत्साहत राशि प्रदान की है।

चंबल क्षेत्र में 10 हजार और सतगढ़ी में 15 हजार लोगों को मिलेंगे रोज़गार के नए अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब मध्यप्रदेश की धरती पर रक्षा उपकरण, मिसाइल और हथियार भी बनेंगे। शिवपुरी जिले के पाली में 103 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस यूनिट का शिलान्यास हुआ है। यहाँ हथियारों में प्रयुक्त होने वाले सिंगल बेस, डबल बेस और ट्रिपल बेस प्रोपेलेन्ट का निर्माण होगा। चंबल क्षेत्र के 10 हजार से भी अधिक लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क, सतगढ़ी का गत दिवस भूमि-पूजन किया गया। यह पुनीत कार्य भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सम्पन्न हुआ। सतगढ़ी पार्क 150 करोड़ रुपए की लागत से 70 हैक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। इससे 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। सतगढ़ी में 25 एकड़ में 10 हजार क्षमता का कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर भी बनेगा। यह परियोजना ‘वर्क-लिव-ग्रो’ मॉडल पर आधारित है। इसमें गारमेंट, टॉयज, आईटी, एआई, लॉजिस्टिक्स आदि से जुड़े उद्योगों को स्थापित किया जाएगा।

 

E20 पेट्रोल पर गडकरी का खुला चैलेंज! बोले- ‘एक भी गाड़ी खराब हुई तो नाम बताइए’

 नई दिल्ली

E20 पेट्रोल पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही. कोई कह रहा है माइलेज घट रही है, कोई इंजन की लाइफ पर सवाल उठा रहा है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक चर्चा गर्म है. अब इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने बहस को और तेज कर दिया है. गडकरी ने साफ कहा, अगर E20 पेट्रोल से किसी एक भी कार में खराबी आई है, तो उसका नाम बताइए. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि E20 के खिलाफ झूठी और पेड मुहिम चलाई जा रही है। 

दरअसल, E20 पेट्रोल को लेकर कई लोग दावा कर रहे हैं कि 20 फीसदी इथेनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और गाड़ियों के कंपोनेंट पर भी असर पड़ रहा है. इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आलोचकों को सीधी चुनौती दे दी. उन्होंने कहा कि, “अगर E20 पेट्रोल से किसी कार, बाइक या स्कूटर में दिक्कत आई है तो उसका सिर्फ एक उदाहरण सामने लाकर दिखाइए। 

‘E20 से किसी गाड़ी में दिक्कत नहीं आई’
नितिन गडकरी ने साफ कहा कि देश में अब तक ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है, जिसमें E20 पेट्रोल की वजह से किसी कार में खराबी आई हो. उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास ऐसा कोई मामला है तो उसका नाम बताया जाए. गडकरी ने यह भी आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल को लेकर झूठी बातें फैलाई जा रही हैं और इसके खिलाफ पेड कैंपेन चलाए जा रहे हैं। 

गडकरी ने कहा कि भारत हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का फॉसिल फ्यूल आयात करता है. इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ पड़ता है. साथ ही प्रदूषण भी बढ़ता है. उनका कहना है कि ग्रीन फ्यूल और दूसरे ऑप्शनल फ्यूल को अपनाना देश की जरूरत है. इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। 

गडकरी ने कहा कि देश में इथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से किसानों को भी बड़ा लाभ मिला है. उन्होंने बताया कि जब सरकार ने मक्के से इथेनॉल बनाने का फैसला लिया था, तब मक्के की बाजार में कीमत करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी (MSP) 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था. इसके बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई. उन्होंने दावा किया कि इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की आय करीब 45,000 करोड़ रुपये बढ़ी है। 

परिवार की कंपनियों पर क्या बोले गडकरी
इथेनॉल उत्पादन में परिवार की कंपनियों के शामिल होने के आरोपों पर गडकरी ने कहा कि उनके परिवार के पास चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनकी कंपनियां इथेनॉल के कारोबार पर निर्भर नहीं हैं. उन्होंने कहा कि E20 को बढ़ावा देने का फैसला देश और किसानों के हित में लिया गया है, किसी निजी लाभ के लिए नहीं। 

सरकार अब E20 के बाद और ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को बढ़ाने की तैयारी कर रही है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत E85, E100, B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-CNG जैसे ऑप्शनल फ्यूल के इस्तेमाल का रास्ता साफ किया जाएगा. इससे भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल और बायो-फ्यूल से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। 

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