पीथमपुर प्रदेश की औद्योगिक शक्ति का महत्वपूर्ण केन्द्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र मध्यप्रदेश की औद्योगिक शक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। किसान इरिगेशन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जैसी कंपनियां प्रदेश में निवेश, रोजगार और तकनीकी प्रगति को नई दिशा दे रही हैं। “मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। हमारी प्राथमिकता है कि उद्योगों से युवाओं को रोजगार मिले, किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध हो और प्रदेश आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंचाई और जल संरक्षण के क्षेत्र में आधुनिक पाइप, ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई इकाई कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में किसान इरिगेशन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की चौथी नवीन विनिर्माण इकाई के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फैक्ट्री परिसर में शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की। मुख्यमंत्री ने कंपनी प्रबंधन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उद्योगों का विस्तार केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का भी आधार है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई विनिर्माण इकाई के प्रारंभ होने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा प्रदेश में कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े आधुनिक उत्पादों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योग, कृषि और तकनीक के समन्वय से विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन इकाई का अवलोकन किया और पाइप निर्माण में उपयोग की जा रही अत्याधुनिक मशीनों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कंपनी द्वारा कृषि, सिंचाई और जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कंपनी प्रबंधन को बधाई दी।

कंपनी के एमडी कुणाल अग्रवाल ने जानकारी दी कि किसान इरिगेशन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की स्थापना लगभग 40 वर्ष पूर्व हुई थी। वर्तमान में कंपनी की कुल 5 इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से 4 इकाइयां पीथमपुर में स्थित हैं। कंपनी पीवीसी पाइप्स, एचडीपीई पाइप्स, सीपीवीसी एवं यूपीवीसी पाइप्स और फिटिंग्स के निर्माण के साथ-साथ वॉटर टैंक, ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम के निर्माण का कार्य करती है। चौथी नवीन इकाई में एचडीपीवी और डीडब्ल्यूसी पाइप्स का निर्माण किया जाएगा, जिससे कृषि, सिंचाई और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को आधुनिक उत्पाद उपलब्ध होंगे।

कार्यक्रम में धार विधायक  नीना वर्मा, जनप्रतिनिधिगण, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, आईजी अनुराग तथा धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा सहित कम्पनी के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 

पासपोर्ट सत्यापन को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के लिए संभाग स्तरीय पुलिस प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन

भोपाल

आमजन को पासपोर्ट संबंधी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपलब्ध कराने तथा पुलिस सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संभाग स्तर पर पुलिस प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम मेंअतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर के मार्गदर्शन एवं उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्‍यवस्‍था  तरूण नायक के निर्देशन में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में पहली बार इंदौर संभाग स्तरीय पुलिस प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तकनीकी एवं प्रक्रियागत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यशाला में पुलिस उपायुक्त (आसूचना/सुरक्षा)  अमन सिंह राठौड़, पुलिस मुख्यालय भोपाल की सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मती रश्मि मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (आसूचना) मती प्रियंका डुडवे, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भोपाल एवं इंदौर तथा टीसीएस की तकनीकी टीम के प्रतिनिधि, इंदौर संभाग के सभी आठ जिलों—इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी एवं बुरहानपुर—के पासपोर्ट सत्यापन कार्य से जुड़े पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल हुए, जबकि संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

इस अवसर पर पुलिस आयुक्त  संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पासपोर्ट सत्यापन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह नागरिकों के विश्वास, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण सत्यापन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

पासपोर्ट ऑफिसर  सुतांशु चौरसिया ने कहा कि पुलिस एवं पासपोर्ट विभाग के उत्कृष्ट समन्वय के परिणामस्वरूप वर्ष 2024 एवं 2025 में मध्यप्रदेश ने पासपोर्ट सत्यापन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए दक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ कार्य करने पर बल दिया।

अतिरिक्‍त पुलिस आयुक्त (अपराध/मुख्यालय)  आर.के. सिंह ने कहा कि समयबद्ध, निष्पक्ष एवं तथ्यपरक पुलिस सत्यापन ही नागरिकों को त्वरित एवं विश्वसनीय पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराने का आधार है।

कार्यशाला के दौरान एआईजी मती रश्मि मिश्रा, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भोपाल एवं इंदौर तथा टीसीएस की टीम द्वारा पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही पासपोर्ट कार्य को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाने के लिए विचार-विमर्श किया गया तथा सत्यापन के दौरान महत्वपूर्ण पहलुओं एवं सावधानियों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।

मध्यप्रदेश पुलिस का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यकुशलता को और अधिक सशक्त बनाते हुए आमजन को शीघ्र, सरल, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराना तथा पुलिस एवं पासपोर्ट विभाग के मध्य समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाना है। प्रदेश के अन्य संभागों में भी इसी प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, ताकि पूरे प्रदेश में पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक दक्ष, एकरूप एवं समयबद्ध बनाया जा सके। 

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के लिए योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पशुपालक तक पहुँचाएं : प्रमुख सचिव उमराव

भोपाल 

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, किसानों, पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पशुपालक तक आसानी से पहुंचे, इस उद्देश्य से बुधवार को पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव  उमाकांत उमराव ने संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी सभागार में किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक की। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उनके सुझाव भी प्राप्त किए। बैठक में  महेश चंद्र चौधरी सहित जिलों के किसान भी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रमुख सचिव  उमराव ने किसान संघ के पदाधिकारियों को प्रदेश में पशुपालन को बढ़ावा देने, प्रदेश को दूध की राजधानी बनाने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पशुओं के नस्ल सुधार, पशु पोषण, टीकाकरण एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी देने के लिए प्रदेश में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के दो चरण पूरे हो गए है। तीसरा चरण 13 जुलाई से शुरू होगा। इसके अंतर्गत विभाग के अधिकारी कर्मचारी पशुपालकों के घर जाएंगे और उन्हें नस्ल सुधार, पशु पोषण, टीकाकरण एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी देंगे। तीसरे चरण में 3 से 4 पशु (गौवंश एवं भैंसवंश) रखने वाले पशुपालकों के यहां प्रशिक्षित विभागीय अमले द्वारा घर जाकर भेंट की जाएगी।

तीसरे चरण में प्रदेश के 5 लाख 72 हजार पशुपालकों के घर जाकर भेंट करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख सचिव  उमराव ने 13 जुलाई से शुरू होने वाले इस अभियान में मंत्री, सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से सहभागिता करने का आग्रह किया। इसके साथ ही प्रमुख सचिव  उमराव ने प्रदेश में चलाई जा रही क्षीरधारा योजना सहित अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

प्रमुख सचिव  उमराव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाते हुए ‘मिल्क कैपिटल’ के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि विभाग की योजनाओं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

इस अवसर पर संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पी.एस. पटेल, सांची बोर्ड के एमडी  डॉ. संजय गोवाणी, कुक्कुट विकास निगम के एमडी  सत्यनिधि शुक्ला, नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय जबलपुर के कुल सचिव  एसएस तोमर, गौ-संवर्धन बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. अनुपम अग्रवाल उपस्थित रहे।

 

सरदार सरोवर परियोजना पर हुए ऐतिहासिक समझौते से सहकारी संघवाद होगा सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई बैठक में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लगभग तीन दशक से जारी पुनर्वास एवं पुनर्बसाहट व्यय विवाद का सर्वसम्मति से समाधान हुआ है। इस निर्णय से मध्यप्रदेश पर पड़ने वाले वित्तीय भार में उल्लेखनीय कमी आएगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निर्णय राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, संवाद और सहमति से जटिल विषयों के समाधान का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में दिए गए अभिमत के अनुसार पुनर्वास व्यय में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान गुजरात को करना पड़ता। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के बीच हुई बैठक में सर्वसम्मति से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत निर्धारित की गई। इसके परिणामस्वरूप अब मध्यप्रदेश को केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
  
चारों राज्यों की हिस्सेदारी हुई निर्धारित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बैठक में गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत की गई है। वहीं, महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 1.17 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इससे गुजरात को सहभागी राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा एवं सरदार सरोवर परियोजना से प्रदेश को उत्पादित कुल विद्युत का 57 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि अब तक मध्यप्रदेश को लगभग 3,900 करोड़ यूनिट विद्युत औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध हुई है। इसके अतिरिक्त लगभग 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई सुविधा मिल रही है। साथ ही जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर, धार सहित अनेक शहरों और पीथमपुर, देवास एवं विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को नर्मदा जल की आपूर्ति भी इसी परियोजना से की जा रही है।

मप्र का इंडस्ट्रियल ग्रोथ इंजन है पीथमपुर, हम यहां बना रहे मेक इन एमपी का इको-सिस्टम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम मध्यप्रदेश के लिए एक लक्ष्य की तरह है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार अगले ढाई सालों में अपने सभी लक्ष्य हासिल करेगी। हमारी सरकार ने देश में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए प्रोत्साहन के सभी द्वार खोल दिए हैं। पीथमपुर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का ‘ग्रोथ इंजन’ है। मेक इन इंडिया-मेक इन एमपी अन्तर्गत इन्वेस्टर्स को दिए जा रहे इंसेंटिव्स को धरातल पर उतारने में पीथमपुर का बड़ा योगदान है। प्रदेश में अधिक से अधिक निवेशक आयें, इसके लिए हम भरपूर प्रयास कर रहे हैं। हम पीथमपुर में मेक इन इंडिया-मेक इन एमपी के लिए एक पूरा सपोर्टिंग इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार पीथमपुर को भावी आवश्यकताओं के अनुरूप ग्रीन इंडस्ट्री, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग तथा वैश्विक निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। हम यहां ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रानिक्स, इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिल्स और टेक्सटाइल से लेकर टेक्नोलॉजी तक की पूरी चेन तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लिउगोंग इंडिया कंपनी के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट उदघाटन समारोह में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां लिउगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की मौजूदा उत्पादन ईकाई के विस्तारित कार्य का उद्घाटन किया। लिउगोंग कंपनी द्वारा यहां अपनी मौजूदा उत्पादन इकाई में 272 करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश कर नए प्रोडक्शन प्लांट की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लिउगोंग मशीनरी कंपनी लिमिटेड के प्रेसीडेंट (चेयरमैन) झ़ेंग ज़िन ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत-अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह केवल अनाउंसमेंट करने वाली नहीं, धरातल पर डेवलपमेंट लाने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि पीथमपुर मध्यप्रदेश का ही नहीं, पूरे देश का “मैन्युफैक्चरिंग गेटवे” बन चुका है। एक माह में पीथमपुर में दूसरी बड़ी वैश्विक कंपनी द्वारा नई औद्योगिक इकाई की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि निवेशकों का भरोसा मध्यप्रदेश पर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने लिउगोंग समूह और सभी कंपनी पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह नई इकाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” संकल्प को मध्यप्रदेश की धरती से एक नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में इन दिनों वर्षा के साथ-साथ हर दिन नई-नई सौगातों की भी बारिश हो रही है। मात्र 10 दिनों में प्रदेश में 5 ऐतिहासिक औद्योगिक आयोजन हुए हैं, जो यहां हो रहे औद्योगिक विकास की नई तस्वीर दिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में बीते 2 वर्षों में ही करीब 10 हजार करोड़ रूपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के यह आंकड़े विरोधी दलों को जवाब है। लिउगोंग कंपनी ने अपनी प्रोडक्शन यूनिट के विस्तार के लिए भी पीथमपुर को ही चुना।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि लिउगोंग कंपनी दुनिया के सबसे बड़े हैवी अर्थ मूवर्स प्रोड्यूसर्स में से एक है। लगभग 2 दशकों से पीथमपुर में कार्यरत लिउगोंग की इस नई उत्पादन इकाई से कंपनी की वार्षिक उत्पादन क्षमता 3,250 मशीनों से बढ़कर 7,500 मशीनों तक पहुंच जाएगी। इस विस्तार से 600 प्रत्यक्ष तथा सहायक उद्योगों एवं सप्लाई चेन के माध्यम से 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस प्लांट में उत्पादन प्रारंभ होते ही भारतीय उद्योगों से लिए जाने वाले कंपोनेंट्स में कंपनी की हिस्सेदारी भी 40 प्रतिशत से बढ़कर अब 60 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे प्रदेश के एमएसएमई, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट उद्योगों को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही मध्यप्रदेश को 76 हजार 862 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से 82 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिला। इसमें नर्मदापुरम में सबसे अधिक 11 हजार 500 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। पिछले छह महीने में ही मप्र में 41 हजार 950 करोड़ के निवेश से जुड़ी 166 नई औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन इकाइयों के बनने से लगभग 50 हजार नए रोजगार सृजित होंगे। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पीथमपुर ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री का भी प्रमुख केंद्र है। यहां लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है और 4 से 5 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल सितंबर में धार में ही देश के पहले पीएम मित्र पार्क की नींव रखी थी। टेक्सटाइल सेक्टर का यह पीएम मित्र पार्क मालवा और निमाड़ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में पीथमपुर से शुरू हो रही यह यूनिट नया अध्याय लिखेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया। प्रदेश में पहली बार जिला और संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थित‍ि में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) आयोजित की गई। नए भारत में मध्यप्रदेश भी निरन्तर प्रगति कर रहा है। जीआईएस : 2025 में मध्यप्रदेश में 30 लाख करोड़ रुपए के निवेश के प्रस्ताव मिले थे, जिसके 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर नजर आने लगा है। उन्होंने कहा कि राज्य में विदेशी निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका, इंग्लैंड, जापान और जर्मनी जैसे बड़े से बड़े देश आज मध्यप्रदेश में निवेश करना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में हमारी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, जो दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने बीते 6 माह में औद्योगिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। छह जुलाई को भोपाल के पास सतगढ़ी में नया स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि पूजन किया है, इससे 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। यहीं पर 150 करोड़ रूपए की लागत से 10 हजार से अधिक व्यक्तियों की बैठक क्षमता वाला वर्ल्ड क्लास कन्वेंशन सेंटर भी बनाया जा रहा है। पांच जुलाई को शिवपुरी में 2500 करोड़ लागत से डिफेंस सेक्टर की बड़ी निर्माण ईकाई की भी नींव रखी है। यहां बनीं मिसाइलें 1000 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम होंगी। इसके साथ ही भारत में पेप्सीको की 1250 करोड़ रूपए लागत की दूसरी अत्याधुनिक प्रोडक्शन यूनिट का काम भी तेजी से चल रहा है। कृषक कल्याण वर्ष में यह कंपनी आलू को प्रोसेस कर फूड प्रोडक्ट्स तैयार करेगी जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि नीमच जिले में भी 1554 करोड़ की लागत से 38 से अधिक औद्योगिक इकाई का भूमि पूजन और लोकार्पण किया गया है।       

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीथमपुर में आज 272 करोड़ रुपए के निवेश से 20 एकड़ क्षेत्र में हेवी अर्थ मूवर्स कंपनी की नई यूनिट शुरू होगी। इससे प्रदेश को निर्माण उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। यह यूनिट शुरूआती चरण में प्रतिवर्ष 6,500 निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित करेगी, जिसमें मुख्य रूप से एस्केवेटर का निर्माण किया जाएगा। यहां बनने वाली मशीनें मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे घरेलू आयात पर निर्भरता घटेगी और कुल 5000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

लिउगोंग कंपनी के ग्लोबल वाइस प्रेसीडेंट ल्यो ग्योबिंग ने कहा कि हमारे लिए यह बड़ा ही सौभाग्यशाली दिन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीथमपुर में लिउगोंग इंडिया लिमिटेड के नए विनिर्माण संयंत्र की शुरूआत की है। कंपनी का नया प्लांट स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा। साथ ही देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। उन्होंने बताया कि हमारा यह प्लांट रिसर्च और मशीनरी निर्माण के मामले प्रमुख ग्लोबल सेंटर बनकर उभरेगा। 

लिउगोंग इंडिया के कंट्री हेड वरुण विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक विकास की धारा तेज गति से आगे बढ़ रही है। लिउगोंग इंडिया कंपनी ने वर्ष 2009 में पहला प्रोडक्शन किया था। आज हमारी कंपनी बेहतर भविष्य के लिए निर्माण उपकरण तैयार कर रही है। कंपनी मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य में सहयोग प्रदान कर रही है।

कार्यक्रम में धार विधायक  नीना विक्रम वर्मा, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, कंपनी के  पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। 

बड़वानी में युवती को 25-30 युवक बाइक पर उठाकर ले गए! वायरल VIDEO से हड़कंप, जांच में ‘देजा’ प्रथा का एंगल

बड़वानी

बड़वानी जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जलगोन में एक युवती को कुछ युवकों द्वारा जबरन बाइक पर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो 7 जुलाई का है। वीडियो सामने आने के बाद राजपुर पुलिस ने तत्काल गांव पहुंचकर युवती के परिजनों से बातचीत की और मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब 25 से 30 युवक युवती को अपने साथ ले गए थे। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि पुलिस ने मामले की सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

राजपुर थाना प्रभारी माधवसिंह ठाकुर ने बताया कि परिजनों और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में मामला आदिवासी समाज में प्रचलित ‘देजा प्रथा’ से जुड़ा होने की आशंका सामने आई है। इस परंपरा के तहत विवाह के दौरान लड़के पक्ष की ओर से लड़की पक्ष को पूर्व निर्धारित राशि दी जाती है।

बेजा प्रथा को लेकर बताया जा रहा विवाद
जानकारी के अनुसार, युवती का रिश्ता निहाली गांव निवासी हुकुम रावत से तय हुआ था. आदिवासी समाज में प्रचलित बेजा प्रथा के अनुसार, युवक पक्ष ने युवती के परिजन को करीब 2 लाख रुपए दिए थे. आरोप है कि इसके बावजूद लड़की पक्ष युवती को लड़के के घर नहीं भेज रहा था. इसी विवाद के चलते हुकुम रावत अपने 25 से 30 साथियों के साथ इंद्रपुर गांव पहुंचा और युवती को खेत से जबरन अपने साथ ले गया। 

वीडियो में मौजूद कुछ लोगों की बातचीत भी सुनाई दे रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि बेजा हो चुका है, रुपए भी ले लिए हैं, फिर भी लड़की को नहीं भेज रहे थे, इसलिए उसे ले जाया गया. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। 

पुलिस ने शुरू की जांच, अभी तक नहीं मिली शिकायत
राजपुर थाना प्रभारी माधव सिंह ठाकुर ने बताया कि, ”मामले में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. इसके बावजूद वीडियो को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम को गांव भेजा गया है. पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और दोनों पक्षों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। 

आदिवासी विकास परिषद ने उठाए गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि राहुल सोलंकी ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि, ”यदि वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना सही है तो यह कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है.” उन्होंने पुलिस प्रशासन से 24 घंटे के भीतर निष्पक्ष जांच कर पूरे मामले की सच्चाई सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न फैले और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके। 

पुलिस के मुताबिक, प्राथमिक जानकारी यह भी मिली है कि विवाह के बाद युवती अपने ससुराल नहीं जा रही थी। इसी कारण कथित तौर पर ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश की। हालांकि इस दावे की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने एसडीओपी समेत अन्य अधिकारियों को भी मौके पर भेजा है। एसपी ने बताया कि फिलहाल सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है बेजा प्रथा?
निमाड़ अंचल के कुछ आदिवासी समुदायों में बेजा प्रथा लंबे समय से प्रचलित सामाजिक परंपरा मानी जाती है. इसके तहत युवक-युवती की सहमति से विवाह या साथ रहने की प्रक्रिया को समाज की मान्यता दी जाती है. बाद में दोनों परिवारों और समाज के पंचों की मौजूदगी में आपसी समझौते के जरिए रिश्ते को स्वीकार किया जाता है. कई मामलों में आर्थिक लेन-देन या सामाजिक दंड (जुर्माना) भी तय किया जाता है। 

हालांकि किसी भी परंपरा या सामाजिक प्रथा के नाम पर किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन ले जाना या बलपूर्वक बंधक बनाना कानूनन अपराध है. यदि जांच में जबरदस्ती या अन्य अपराध साबित होते हैं, तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 

जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी. यह स्पष्ट होना बाकी है कि युवती की सहमति थी या नहीं, वायरल वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया और घटना के पीछे वास्तविक तथ्य क्या हैं. प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

 

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में अधोसंरचनात्मक विकास और पुनर्वास कार्यों के लिये दी 2,300 करोड़ रूपये की स्वीकृति

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को संपन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में अनेक निर्णय लिए गए है। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास और पुनर्वास कार्यों को 2300 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसी तरह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव अनुसार राज्य डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आई.टी एवं डिजास्टर रिकवरी सहित अन्य कार्यों के लिए मंत्रि-परिषद ने 800 करोड़ की मंजूरी दी है। विभाग के ही तीन अन्य प्रस्तावों पर विज्ञान पार्क- एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं संचालन के लिए वर्ष 2031 तक निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

मंत्रि-परिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक और प्रस्ताव अनुसार ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत स्वामित्व योजना के निष्पादित हस्तांतरण अभिलेखों पर अतिरिक्त स्टांप शुल्क से छूट दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा प्रस्तुत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक :2026 को भी मंत्रि-परिषद ने मंजूरी दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव अनुसार मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इसी तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूँ, चना, ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति : 2026 को भी मंत्रि-परिषद ने स्वीकृति दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रस्ताव अनुसार मध्यप्रदेश के 65 नगरीय निकायों और उनके आस-पास के वन क्षेत्रों में नगरीय वन विकसित करने के लिए नमो हरित नगर योजना को 100 करोड़ की स्वीकृति दी है।

जल संसाधन विभाग द्वारा पृथक-पृथक 3 सिंचाई परियोजनाओं में पुनर्वास और पुन: विस्थापन के लिए 3 प्रस्ताव अनुसार मंत्रि-परिषद ने पन्ना जिले की केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज सिंचाई परियोजना और मझगांव सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और विस्थापन के लिए अतिरिक्त रूप से 202 करोड़ 50 लाख रूपये की राशि स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राजपत्रित सेवा भर्ती नियम : 2022 के तहत भर्ती प्रक्रिया को स्वीकृति दी। इसी तरह मंत्रि-परिषद द्वारा लीगल और डिफेंस काउंसिल सिस्टम योजना की वर्ष 2031 तक निरंतरता के लिए 42 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। वित्त विभाग के प्रस्ताव अनुसार विभिन्न लिखतों पर देय उपकार में छूट देने का निर्णय लिया गया है। मंत्रि-परिषद ने शिक्षा विभाग की लोक-वित्त पोषित कार्यक्रमों योजनाओं एवं परियोजनाओं के परिक्षण की योजना को 1 अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 543 करोड़ रूपये की मंजूरी दी है।

स्टेट डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आईटी एवं डिजास्टर रिकवरी सहित अन्य कार्यों के लिए 800 करोड़ रूपये की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने एमपीएसईडीसी द्वारा संचालित एवं संग्रहीत म.प्र. स्टेट डाटा सेंटर के विस्तार और अद्यतन डाटा सेंटर 3.0 परियोजना के लिए 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार म.प्र. स्टेट डाटा का आधुनिकीकरण, आईटी एवं डिजास्टर रिकवरी क्षमता विस्तार तथा संबंधित नॉन-आईटी अवसंरचना विकास किया जाएगा।

प्रदेश में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस परियोजना अंतर्गत सरकार की सेवाओं को संगठित करने व दक्ष इलेक्ट्रॉनिक सर्विस प्रदान करने के लिए भारत सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं मध्यप्रदेश शासन की संयुक्त भागीदारी से भोपाल में स्टेट डाटा सेंटर की स्थापना की गई है। प्रदेश स्टेट डाटा सेंटर 12 दिसंबर 2012 से सफलतापूर्वक संचालित है।

परियोजना अंतर्गत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के आई.टी. एप्लीकेशन्स के लिए होस्टिंग सेवाएं प्रदान की जाती है। स्टेट डाटा सेंटर ई-गवर्नेंस क्षेत्र की बहु-उपयोगी एवं डिजिटल भारत की अवधारणा को साकार करने हेतु डिजीटल मध्यप्रदेश के लिये अति आवश्यक अधोसंरचना है। उक्त अधोसंरचना पूर्णतः सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी आधारित है, जो 365 दिन 24 घंटे निरंतर संचालित रहती है। स्टेट डाटा सेंटर के माध्यम से ही प्रदेश में विभिन्न विभागों द्वारा प्रदत्त की जाने वाली नागरिक सेवाओं को नागरिकों को उनके निकटतम स्थल पर सुगमता पूर्वक ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है।

बदलते तकनीकी परिदृश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कम्प्यूटिंग आदि इमर्जिंग फ्रंटियर टेनोलॉजीज़ के परिप्रेक्ष्य में ऐसी नवीन अधोसंरचना स्थापित किये जाने की आवश्यकता है, जो राज्य शासन को नागरिक सेवाओं को अधिक दक्षतापूर्वक प्रदान करने हेतु इन तकनीकों को अपनाने में सक्षम बनाए। अधोसंरचना में वृद्धि के फलस्वरूप विद्युत आपूर्ति, कूलिंग अधोसंरचना आदि संबंधित नॉन-आईटी अधोसंरचना के संवर्द्धन की आवश्यकता भी होगी। उक्त परिप्रेक्ष्य में डाटा सेंटर के विस्तार के लिए एसडीसी 3.0 परियोजना का अनुमोदन प्रदान किया गया।

एमपीएसडीसी 3.0 डाटा सेंटर एक्पैंशन परियोजना को चरणबद्ध रूप से लागू किया जायेगा। प्रत्येक चरण के अंतर्गत डेटा सेंटर के विभिन्न घटकों का क्रमिक विकास एवं सुदृढ़ीकरण किया जायेगा। पहले चरण में डाटा सेंटर साइट के लिए कोर नॉन आईटी एवं आईटी इंफ्रॉस्ट्रक्चर, कंप्यूटर स्टोरेज और नेटवर्क, दूसरे चरण में डीआर साइट का निर्माण एवं डिजास्टर रिकवरी क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण और तीसरे चरण में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा।

यह स्वीकृति राज्य में बढ़ती डिजिटल सेवाओं, डेटा प्रोसेसिंग मांग एवं भविष्य की उन्नत तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित किया गया है, जिससे एक स्केलेबल, सुरक्षित एवं उच्च दक्षता युक्त डेटा सेंटर वातावरण का विकास सुनिश्चित किया जा सके।

विज्ञान पार्क- एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं संचालन की निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत विज्ञान पार्क, एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए संचालन की निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार विज्ञान पार्क की स्थापना संबंधी योजना के लिए 39 करोड़ 39 लाख रूपये, एकल नागरिकता डाटाबेस के लिए 75 करोड़ और बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना और संचालन संबंधी योजनाओं के लिए 8 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

उज्जैन स्थित आचार्य वराह मिहिर न्यास परिसर में अत्याधुनिक तारामंडल एवं खगोलीय वेधशाला स्थापित की जा रही है। इसमें 1 मीटर ऑप्टिकल टेलीस्कोप एवं 4.5 मीटर रेडियो टेलीस्कोप जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं युवाओं को उच्चस्तरीय अध्ययन एवं अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। विज्ञान पार्क संबंधी योजना खगोल विज्ञान के अध्ययन, अनुसंधान एवं जन-जागरुकता को बढ़ावा देने के साथ समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अंधविश्वासों के निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख खगोलीय अनुसंधान एवं विज्ञान प्रसार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

समय एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के नागरिकों का एकीकृत डेटाबेस विकसित किया जा रहा है, जिससे शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ अधिक त्वरित, पारदर्शी एवं सुगम रूप से उपलब्ध कराया जा सके।

परियोजना से नागरिकों की मूलभूत जानकारी का एकल एवं समेकित स्रोत उपलब्ध होगा, जिससे विभागीय स्तर पर पृथक-पृथक पंजीयन की आवश्यकता कम होगी तथा सेवाओं का प्रदाय अधिक सरल, समयबद्ध एवं नागरिक-केंद्रित बन सकेगा। डेटाबेस में उपलब्ध प्रमाणित जानकारी के आधार पर विभिन्न सेवाएँ एवं योजनाओं का लाभ नागरिकों को “सिंगल क्लिक” पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

एस.सी.डी परियोजना के साथ-साथ “परिचय” परियोजना के माध्यम से आधार आधारित ऑथेंटिकेशन एवं ई-केवाईसी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे डी.बी.टी प्रक्रियाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। दोनों परियोजनाएँ डेटा समेकन, आधार प्रमाणीकरण एवं विभागीय डेटा साझाकरण के माध्यम से राज्य की ई-गवर्नेंस व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं तथा भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस प्रणाली एवं विजन@2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

मध्यप्रदेश बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना तथा संचालन से संबंधित योजना का उद्देश्य प्रदेश में बॉयो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास, नवाचार एवं उ‌द्यमिता को बढ़ावा देना है। भारत सरकार के जैव प्रौ‌द्योगिकी विभाग की नेशनल बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क स्कीम के अंतर्गत संचालित इस योजना के तहत स्टार्ट-अप, नवोन्मेषकों तथा सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यमियों को इन्क्यूबेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रूपये की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्रथम स्थान पाने वाली बालिकाओं एवं बालक को मुख्यमंत्री स्कूटी योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-2031 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की है।

प्रदेश मे स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्रथम प्रयास में नियमित परीक्षार्थी के रूप में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान पाने वाली बालिका एंव बालक को मुख्यमंत्री स्कूटी प्रदाय योजना के अन्तर्गत लाभांवित किया जाएगा। प्रदेश में संचालित मुख्यमंत्री स्कूटी प्रदाय किये जाने के लिए संचालित योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए राशि 495 करोड रूपये पर मंत्रि-परिषद् की स्वीकृति प्रदान की गई ।

मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूँ, चना, ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति : 2026 को स्वीकृति

भारत सरकार द्वारा राज्य में गेहूँ, धान (चावल), ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन खाद्य विभाग द्वारा किया जाता है। विक्रय कार्य व्यवस्थित रूप से किये जाने एवं उपज का अधिकतम मूल्य दिलाये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश उपार्जित खाद्यान्न (गेहूँ, धान, ज्वार एवं बाजरा) निस्तारण नीति 2026 को मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी गई है।

नीति अनुसार एक राज्य स्तरीय कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित होगी। समिति द्वारा उपज के मात्रा निर्धारण के बाद प्रस्तावित उक्त मात्रा विक्रय करने के पूर्व रिजर्व प्राईज अपसेट मूल्य तय करना एवं ई-निविदा/ई-ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से दरें आमंत्रित करना, प्राप्त दरों का परीक्षण के बाद अनुमोदन तथा निस्तारण की कार्यवाही का अनुमोदन किया जाएगा।

मध्यप्रदेश आईटी, आईटीइएस एंड ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी : 2023 का संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश आईटी, आईटीइएस एंड ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी : 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। नीति की कंडिका 15, 12.6 और 12.11 में नए प्रावधान प्रतिस्थापित किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नीति को निवेश प्रोत्साहन विभाग की मध्यप्रदेश इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी अनुरूप बनाकर ईएसडीएम इकाइयों के लिए अधिक आकर्षक एवं अनुकूल बनायी गई है। ताकि इस नीति के तहत निवेशकर्ता एवं प्रदेश को लाभ प्राप्त हो सके।

स्वीकृति अनुसार, अगर कोई पुरानी आईटी या डेटा सेंटर कंपनी अपना काम बढ़ाना चाहती है, तो उसे अपने मौजूदा निवेश में कम से कम 30% और पैसा लगाना होगा या अपनी जगह का एरिया 30% बढ़ाना होगा। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली (ईएसडीएम) कंपनियों को अपनी मशीनों में कम से कम 30% (न्यूनतम 15 करोड़ रूपये) या 50 करोड़ रूपये (जो भी कम हो) का नया निवेश करना होगा और उत्पादन क्षमता 20% बढ़ानी होगी। ऐसा करने पर इन सभी कंपनियों को नई कंपनी की तरह ही सरकारी मदद मिलेगी।

जमीन मिलने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ऑनलाइन और आसान बनाया गया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। अगर एक ही जमीन के लिए एक से ज्यादा कंपनियां आवेदन करेंगी, तो ऑनलाइन बोली (ई-बिडिंग) लगाई जाएगी। हालांकि, बहुत बड़े प्रोजेक्ट्स (मेगा प्रोजेक्ट) को इस बोली से छूट मिलेगी और उन्हें ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर सीधे जमीन मिल सकेगी। कंपनियां एमपीआइडीसी या अन्य सरकारी विभागों की जमीन भी ले सकती हैं, लेकिन किराया और बाकी शर्तें उसी विभाग के नियमों के मुताबिक ही तय होंगी।

स्वामित्व योजना के अंतर्गत अभिलेख पंजीयन पर उपकर और अतिरिक्त स्टॉम्प ड्यूटी से छूट को मंजूरी

मंत्रि-परिषद द्वारा राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना अंतर्गत अभिलेखों के पंजीयन पर देय उपकर और अतिरिक्त स्टॉम्प ड्यूटी से छूट प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है।

“भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक : 2026” का अनुमोदन

मंत्रि-परिषद द्वारा “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक : 2026” का अनुमोदन दिया गया है।

कमजोर वर्गों को प्रभावी और कुशल विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए 42 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा कमजोर वर्गों को प्रभावी और कुशल विधिक सेवाएं प्रदान करने की लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम योजना को निरंतर रखे जाने के लिए राज्य की बढ़ती निर्भरता के क्रम में वर्ष-2026 से 2028 की अवधि में व्यय का 25%, वर्ष 2028 से 2030 में व्यय का 50%, वर्ष 2030-2031 में व्यय का 75 प्रतिशत तथा वर्ष 2031 व्यय का 100 प्रतिशत की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है।

वर्ष 2026 से 2028 की अवधि में राज्य शासन इसके व्यय का 25% वहन करेगा जिसकी अनुमानित राशि रूपये प्रतिवर्ष 4 करोड़ 20 लाख, वर्ष 2028 से 2030 तक राज्य शासन इसके व्यय का 50% वहन करेगा जिसकी अनुमानित राशि रुपये प्रतिवर्ष 8 करोड़ 40 लाख इसी प्रकार वर्ष 2030-2031 में राज्य शासन इसके व्यय का 75% वहन करेगा जिसकी अनुमानित राशि रुपये प्रति वर्ष 12 करोड़ 60 लाख अंत में पूर्ण निर्भरता वर्ष 2031 से राज्य शासन पर 100% होगी जिसकी अनुमानित राशि रुपये 16 करोड़ 80 लाख होना संभावित है।

मंत्रि-परिषद ने स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया अंतर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की गयी है। एनसीसी से सम्बंधित इस योजना वरिष्ठ संभाग-3755 के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को वेतन का भुगतान, एनसीसी कार्यालय को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्य किया जाता है साथ ही एनसीसी कैडेट्स के प्रशिक्षण देने संबंधित समस्त कार्य किया जाता है। इस योजना के संचालन के लिए1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए राशि रूपए 543 करोड़ 9 लाख की निरंतरता के लिए मंत्रि-परिषद् ने स्वीकृति प्रदान की है।

”नमो हरित नगर योजना” को 100 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की नगरीय निकायों में आगामी 5 वर्षों में 65 नगरीय निकाय क्षेत्रों में नगर वन विकास के लिए “नमो हरित-नगर योजना” कुल राशि 100 करोड़ रूपये की स्वीकृ‌ति प्रदान की गयी है। योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में नगरवासियों को स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए वातावरण प्रदाय करना, पर्यावरण सौंदर्यीकरण करना, स्वच्छ वायु प्रदाय करना, जैव विविधता सृजित करना एवं अनुकूल जलवायु बनाना आदि है। योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक निकाय में कम से कम एक नगर वन न्यूनतम आधा एकड़ क्षेत्रफल में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए निकायों को राशि 3 किश्तों में दी जाएगी।

पन्ना जिले के केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज सिंचाई परियोजना और मझगांव सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और विस्थापन के लिए अतिरिक्त 202 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत

मंत्रि-परिषद द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना जिले के 08 ग्रामों में विशेष विस्थापन पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन पैकेज के संबंध में कटऑफ दिनांक की वृद्धि को स्वीकृति देते हुए नवीन संभावित 313 परिवारों को विशेष पैकेज की कुल अनुदान राशि रू. 39.125 करोड़ को सम्मिलित करते हुये परियोजना के लिए कुल व्यय 439 करोड़ 325 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है।

पूर्व में डूब प्रभावित ग्रामों के कृषि भूमि अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा-11 की प्रकाशन तिथि 21 जनवरी 2022 को कट-ऑफ मानते हुए कुल 1890 परिवारों की गणना की गई थी। इन्हीं ग्रामों के आबादी भूमि/निजी भूमि पर स्थित मकानों के मुआवजा निर्धारण हेतु धारा-11 अंतर्गत म.प्र. के राजपत्र में प्रकाशन 15 मार्च 2024 को हुआ।

प्रभावित परिवारों/जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही मांग तथा परियोजना का निर्माण कार्य सुचारू एवं त्वरित गति से क्रियान्वयन के दृष्टिगत आबादी भूमि एवं मकान के लिए धारा-11 के प्रकाशन 15 मार्च 2024 को आधार मानकर कट-ऑफ दिनांक में वृद्धि की स्वीकृति देते हुए 313 परिवारों को विशेष पुनर्वास पैकेज दिया जाना निर्णीत हुआ।

मंत्रि-परिषद द्वारा रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से 730 डूब प्रभावितों को पूर्व में एक मुश्त पुनर्वास अनुदान राशि 5 लाख रूपये प्रति परिवार के मान से स्वीकृत की गई राशि के स्थान पर, डूब प्रभावित परिवारों द्वारा पन्ना जिले की ही केन-बेतवा लिंक परियोजना से डूब प्रभावितों को विस्थापन हेतु स्वीकृत राशि रु.12.50 लाख प्रति परिवार के समान की जा रही मांग एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा भी केन-बेतवा लिंक परियोजना से डूब प्रभावितों को विस्थापन के लिए स्वीकृत पुनर्वास पैकेज के समान राशि दिए जाने की मांग की जाती रही है। डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत रखते हुए, केन-बेतवा लिंक परियोजना के समान, रूंज मध्यम परियोजना से प्रभावित 730 विस्थापित परिवार के लिए प्रति परिवार अतिरिक्त रू. 7.5 लाख (साढ़े सात लाख) की राशि का विशेष पुनर्वास पैकेज कुल रू. 54 करोड़ 75 लाख की स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया। यह राशि रूज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति राशि 269 करोड़ 79 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।

मंत्रि-परिषद द्वारा मझगाँव मध्यम सिंचाई परियोजना से 1450 डूब प्रभावितों को पूर्व में एक मुश्त पुनर्वास अनुदान राशि 5 लाख रुपये प्रति परिवार के स्थान पर, (पन्ना जिले की ही केन-बेतवा लिंक परियोजना से डूब प्रभावितों को विस्थापन के लिए स्वीकृत राशि 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार के मान से) डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत प्रति परिवार अतिरिक्त रू. 7.5 लाख (साढ़े सात लाख) रुपये की राशि का विशेष पुनर्वास पैकेज कुल 108 करोड़ 75 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान किये जाने का निर्णय लिया गया है। यह राशि मझगाँय मध्यम सिंचाई परियोजना के ‍लिए भूमि एवं परिसंपत्ति अधिग्रहण के लिए कुल स्वीकृत राशि 364 करोड़ 56 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।

मप्र लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पर्दो की पूर्ति के लिए वर्तमान प्रचलित प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से पर्याप्त संख्या में चयनित अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे विशेषज्ञों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं एवं स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम : 2022 के नियम 6 (4) के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विभागीय स्तर से सीधी भर्ती की कार्यवाही किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने अनुमति प्रदान की है। अब इसके तहत प्रत्येक माह की एक तारीख को एम.पी. ऑनलाईन पर विभाग की रिक्तियां प्रदर्शित की जायेंगी, जिनके आधार पर 15 तारीख तक आवेदन आमंत्रित किये जायेंगे। उक्त दिनांक तक प्राप्त सभी आवेदनों पर विभागीय समिति आगामी द्वितीय बुधवार को बैठक करेगी, जिसमें सभी अभ्यर्थियों को साक्षात्‌कार के लिये बुलाया जायेगा। साक्षात्कार के बाद इनकी उपयुक्तता का निर्धारण करते हुए विभागीय समिति चयन की अनुशंसा राज्य शासन को करेगी। समिति द्वारा जिस वर्ग से जितने अभ्यर्थियों की अनुशंसा की जायेगी, उस वर्ग से उतनी रिक्तियाँ एमपी ऑनलाईन में प्रदर्शित की जा रही रिक्तियों से आगामी माह के लिये कम कर दी जायेगी। विभागीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य शासन ऐसे चिकित्सकों के नियुक्ति आदेश सीधे जारी करेगा और उन अभ्यर्थियों को सूची में प्रदर्शित रिक्त स्थानों पर पदस्थ करेगा। यह नियुक्तियां प्रथम 3 वर्ष के लिये उन्हीं स्थानों पर की जायेंगी, जिन स्थानों को रिक्तियों में प्रदर्शित किया गया है। प्रथम 3 वर्ष तक ऐसे चिकित्सकों का स्थानांतरण नहीं किया जायेगा।

 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने रेलवे ओवर-ब्रिज एवं रेलवे अंडर-ब्रिज कार्यों की समीक्षा की

रायपुर

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने विभाग के सेतु परिक्षेत्र और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेश में रेलवे ओवर-ब्रिज (ROB) और रेलवे अंडर-ब्रिज (RUB) के निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आज हुई बैठक में रेलवे ओवर-ब्रिज और रेलवे अंडर-ब्रिज के कार्यों में तेजी लाने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को बेहतर समन्वय से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों की बाधाओं को तत्परता से दूर कर अप्रारंभ कार्यों को जल्दी शुरू करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के प्रधान मुख्य अभियंता अवनीश कुमार पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
 
लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में विभागीय और रेलवे के अधिकारियों को आपसी समन्वय को और मजबूत करते हुए निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें शीघ्र पूरा करने को कहा, ताकि लोगों को जाम और रेलवे फाटकों पर होने वाली असुविधा से राहत मिल सके। इससे माल परिवहन भी अधिक सुगम और तेज होगा। 

विभागीय सचिव ने नए आरओबी और आरयूबी के कार्यों को जल्द शुरू करने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर बाधाओं का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों से अतिक्रमण हटाने, भूमि व्यपवर्तन, नामांतरण तथा भू-अर्जन जैसी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रगतिरत परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश में आवागमन को अधिक सुरक्षित, सुगम, सुव्यवस्थित और तेज बनाना राज्य शासन की प्राथमिकता में है। 

बंसल ने कार्यस्थलों पर यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित परियोजनाओं के प्राक्कलन तथा ड्राइंग-डिजाइन तैयार करने के लिए जहां भी लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण की जरूरत हो, वहां तत्काल संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही पूर्ण करने को कहा।

उन्होंने रेलवे ओवर-ब्रिज और रेलवे अंडर-ब्रिज परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करने नियमित और कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को हर तीन महीने में बैठक कर कार्यों की प्रगति का आकलन करने और लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी, अधीक्षण अभियंता डी.के. माहेश्वरी, दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के मुख्य अभियंता मनोज कुमार सिंह, सीपीएम-बिलासपुर राजीव कुमार और सीपीएम-रायपुर तत्वदर्शी साहू भी बैठक में मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला: 7 आरोपियों को कोर्ट से सशर्त अग्रिम जमानत

बिलासपुर.

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने धमतरी जिले की वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी ग्रेड-3 भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े 18 साल पुराने मामले में सात आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी है.

जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बैंच ने कहा कि इसी मामले में समान आरोपों वाले अन्य सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, इसलिए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी जमानत का लाभ दिया जाना उचित है. कोर्ट ने सात अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है.

क्या था शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला ?
दरअसल, वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मगरलोड में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 172 पदों पर भर्ती प्रक्रिया हुई थी. आरोप है कि चयन समिति के सदस्यों और अन्य आरोपियों ने साजिश के तहत कुछ अभ्यर्थियों के फर्जी या अमान्य दस्तावेजों के आधार पर अंक बढ़ाकर उन्हें चयनित करा दिया, इसके चलते पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली और वे बाहर हो गए. इस संबंध में वर्ष 2011 में पुलिस थाना मगरलोड में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(9)(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया था.

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत कई समितियों और स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बाद हुई थी. करीब 5,000 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी अलग-अलग स्तर पर जांच के बाद अंतिम चयन सूची बनाई गई थी. अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, पुलिस ने ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ताओं ने किसी आपराधिक षड्यंत्र में भाग लिया था. फर्जीवाड़ा की शिकायत, किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से कई वर्ष बाद की गई और इसी मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.

हाई कोर्ट ने सातों याचिकाकर्ताओं को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ताओं को शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक-एक जमानतदार पर रिहा किया जाए. हाई कोर्ट ने यह भी शर्त लगाई है, सभी आरोपी जांच में सहयोग करेंगे, गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे, ट्रायल में नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे और भविष्य में इसी तरह का कोई अपराध नहीं करेंगे. साथ ही उन्हें 25 जुलाई 2026 को विवेचना अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार अथवा शिकायतकर्ता जमानत निरस्त कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे.

भारत पर लगाए आरोप निकले बेबुनियाद! कनाडा पुलिस की जांच ने खोली पूर्व PM ट्रूडो के दावों की पोल

 नई दिल्ली

लगभग तीन साल पहले कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता का आरोप लगाया था. लेकिन अब कनाडा की पुलिस का कहना है कि हमारी जांच में निज्जर की हत्या में भारत सरकार के अधिकारियों की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं मिले हैं। 

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने निज्जर हत्याकांड में भारतीय मूल के गैंगस्टर्स के खिलाफ आरोप तय किए हैं. कनाडाई पुलिस का यह बयान ट्रूडो सरकार के उस पुराने रुख से बिल्कुल अलग है, जिसने भारत और कनाडा के बीच दशकों का सबसे गंभीर कूटनीतिक संकट खड़ा कर दिया था। 

ट्रूडो के आरोपों को भारत ने शुरू से ही बेतुका और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था. इन आरोपों के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था, द्विपक्षीय वार्ताएं ठप हो गई थीं और रिश्तों में गहरी तल्खी आ गई थी। 

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) का यह खुलासा अमेरिकी अधिकारियों द्वारा एक आरोपपत्र सार्वजनिक किए जाने के कुछ घंटों बाद आया है. इस आरोपपत्र में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बरार पर 2023 में कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का निर्देश देने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी आरोपपत्र में भी भारतीय सरकार की किसी भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। 

बता दें कि कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर को भारत ने 2020 में आतंकवादी घोषित किया था. वह प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का प्रमुख था. जून 2023 में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सर्रे शहर में एक गुरुद्वारे की पार्किंग में दो नकाबपोश हमलावरों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। 

जस्टिन ट्रूडो के पद छोड़ने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और कनाडा ने वर्षों की कड़वाहट के बाद अपने संबंधों को फिर से सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और राजनयिक संवाद दोबारा शुरू हुए। 

RCMP की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच अभी भी जारी है. उन्होंने कहा कि संगठित अपराध सिंडिकेट की इस जांच और अब तक लगाए गए आरोपों के आधार पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि भारतीय सरकार के अधिकारी इस मामले में शामिल थे या उनके खिलाफ आरोप लगाए जाएंगे. अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है जो भारतीय सरकार को इस मामले से जोड़ती हो। 

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियों और जब्ती की कार्रवाई के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है. मोरलैंड ने कहा कि भारतीय सरकार इस जांच में सहयोग कर रही थी. RCMP का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सितंबर 2023 में कनाडाई संसद में ट्रूडो द्वारा किए गए दावों से अलग है. उस समय ट्रूडो ने कहा था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां निज्जर की हत्या और भारतीय एजेंटों के बीच संभावित संबंध के विश्वसनीय आरोपों की जांच कर रही हैं। 

भारत ने लगातार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कनाडा ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत साझा नहीं किया. वहीं, कनाडा पुलिस का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत कई आरोपपत्र सार्वजनिक किए हैं। 

आरोपपत्र में बिश्नोई को निज्जर की हत्या के लिए जिम्मेदार बताया गया है. बिश्नोई अगस्त 2023 से गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है. न्याय विभाग के अनुसार, ऑपरेशन हार्ड बॉल का उद्देश्य ऐसे भारतीय संगठित अपराध सिंडिकेटों पर कार्रवाई करना था जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार रंगदारी, टारगेटेड किलिंग, गोलीबारी, बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। 

ट्रूडो के जाने के बाद पटरी पर लौट रहे भारत-कनाडा संबंध?
लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ आरोपपत्र इस पूरे मामले को संगठित अपराध के दायरे में रखता है, जबकि RCMP का ताजा बयान भारतीय सरकार की संलिप्तता वाले पुराने राजनीतिक दावे को कमजोर करता है। 

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ओटावा और नई दिल्ली ट्रूडो काल के कूटनीतिक गतिरोध से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क फिर से शुरू हुए हैं और संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। 

मई 2026 के पहले सप्ताह में कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की 2025 की रिपोर्ट में खालिस्तानी उग्रवादियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था. रिपोर्ट में कहा गया कि एक छोटा लेकिन सक्रिय नेटवर्क कनाडा की जमीन का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए धन जुटाने और समर्थन देने के आधार के रूप में कर रहा है. इसमें फंडिंग, प्रभाव नेटवर्क और भारत से जुड़े उग्रवादी संगठनों के साथ संबंधों पर चिंता जताई गई थी। 

कनाडा के रुख में बड़ा बदलाव
कनाडा के शीर्ष पुलिस अधिकारी की यह टिप्पणी देश के रुख में एक बड़ा बदलाव दिखाती है, जो कनाडा के पूर्व प्रधनमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में लगाए गए आरोपों के उलट है। साल 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि उनके पास खालिस्तानी चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के संबंधों के विश्वसनीय सबूत हैं।

ट्रूडो के दौर में बिगड़े रिश्ते
भारत में आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल कनाडाई नागरिक निज्जर की जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भारत ने हत्या में शामिल होने के ट्रूडो के आरोपों को खारिज कर दिया और इसे मनगढ़ंत और बेबुनियाद कहा था। भारत ने कनाडा से इस बारे में सबूत की भी मांग की थी, जिसे कभी उपलब्ध नहीं कराया गया। ट्रूडो के कार्यकाल में इस मामले ने कूटनीतिक विवाद का रूप लिया और दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को वापस बुला लिया। 

मार्क कार्नी ने की नई शुरुआत
हालांकि, ट्रूडो के उत्तराधिकारी मार्क कार्नी के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्तों ने गति पकड़ी, जब ओटावा ने इसे सुधारने की पहल की। उच्चायुक्तों को उनके पदों पर बहाल किया गया। वीजा सेवाएं शुरू की गईं। इसी साल फरवरी के आखिर में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत का दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों ने एक नई रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।

 

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