सुशासन तिहार बना लोगों की राहत का जरिया, घर के पास ही सुलझ रहीं समस्याएं

रायपुर.

छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाने और जनता की समस्याओं को उनके घर के पास ही सुलझाने का महाअभियान ”सुशासन तिहार 2026” लगातार सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के विकासखंड नगरी के ग्राम पंचायत घठुला में आयोजित क्लस्टर स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते एक ही छत के नीचे 509 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई।

इस शिविर में घठुला, लटियारा, पाईकभाठा, रतावा, पोड़ागांव, लखनपुरी, फरसगांव, पांवद्वार, गिधावा, बोरई, घुटकेल, मैनपुर, बिरनासिली एवं लिखमा सहित कुल 14 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिविर में न केवल लोगों की शिकायतें सुनी गईं, बल्कि विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की लाइव जानकारियां भी साझा की गईं, जिससे लोगों को जागरूक होने का अवसर मिला। शिविर के दौरान कुल 528 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 523 आवेदन विभिन्न मांगों से संबंधित और 05 आवेदन जनता की शिकायतों से जुड़े थे। शासन और प्रशासन की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्राप्त आवेदनों में से 509 का मौके पर ही निपटारा कर हितग्राहियों को तत्काल राहत प्रदान की गई, जबकि शेष बचे आवेदनों के लिए उपस्थित आला अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समय-सीमा के भीतर त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए। 

हितग्राहियों को योजनाओं की  दी सौगात
शिविर स्थल पर ही हितग्राहियों को योजनाओं की सौगात दी गई, जिसके तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को सुपोषण किट, स्वास्थ्य विभाग द्वारा 03 ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण विभाग द्वारा 01 हितग्राही को दिव्यांग सहायक उपकरण और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को मनरेगा जॉब कार्ड का वितरण किया गया।

शासन और जनता के बीच का फासला हुआ कम
शिविर में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार का असली मकसद आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ तुरंत समाधान करना है, जिससे शासन और जनता के बीच का फासला कम हो रहा है और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल

नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य: मंत्री पटेल

अमरकंटक धाम में तीन दिवसीय ‘स्वच्छता व कुण्ड सेवा अभियान में स्वयं किया श्रमदान

भोपाल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि माँ नर्मदा केवल आस्था की प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और अस्तित्व का आधार हैं। हमारी नदियों के उद्गम स्थलों को स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध बनाए रखने में प्रत्येक नागरिक को अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए। मंत्री पटेल ने यह विचार अमरकंटक धाम स्थित माँ नर्मदा नदी के पावन उद्गम स्थल पर 29 से 31 मई तक आयोजित इस विशेष स्वच्छता अभियान में श्रमदान के दौरान व्यक्त कियें। मंत्री पटेल ने विशेष बल देते हुए कहा कि नदियों का संरक्षण केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन का आधार है, क्योंकि यदि आज हम जल स्रोतों और उद्गम स्थलों को संरक्षित करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ जल संकट से बच सकेंगी।

मंत्री पटेल ने स्वयं उपस्थित होकर जनभागीदारी के साथ सक्रिय रूप से श्रमदान किया। ‘मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन’ एवं ‘निर्विकार पथ’ के सेवाभावी कार्यकर्ताओं के सहयोग से संचालित इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर उद्गम और कुण्ड क्षेत्र की स्वच्छता, संरक्षण तथा सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया, जिससे यह अभियान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।

उल्लेखनीय है कि मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल लंबे समय से जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से पूरे प्रदेश में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन, नदियों की स्वच्छता और जनजागरण के कार्यों को व्यापक गति मिली है। अमरकंटक में माँ नर्मदा के उद्गम स्थल पर किया गया यह श्रमदान उसी पर्यावरण-संरक्षण के संकल्प का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा और जनसहभागिता से जल संरक्षण के इस प्रयास को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

 

बांग्लादेश बॉर्डर का 600 KM लंबा ‘डार्क जोन’, घुसपैठियों के लिए बना बड़ा रास्ता

 नई दिल्ली
भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा दुनिया की सबसे लंबी और जटिल सीमाओं में से एक है. कुल 4,096 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर लगभग 600 किलोमीटर का इलाका अभी भी डार्क जोन बना हुआ है. इन इलाकों में पर्याप्त बाड़बंदी नहीं है. रोशनी कम है. मोबाइल नेटवर्क कमजोर है. इलाका नदियों, दलदल और घने इलाकों से भरा है. यही जगह घुसपैठियों, तस्करों और अन्य संदिग्ध तत्वों के लिए आसान प्रवेश द्वार बन गई है। 

1947 के विभाजन के समय रेडक्लिफ लाइन से बनी यह सीमा 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद तय हुई.  सीमा का ज्यादातर हिस्सा घनी आबादी वाले इलाकों, खेतों, नदियों और गांवों से गुजरता है. दोनों तरफ परिवार बंटे हुए हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में लोग सीमा पार करते हैं. इससे सीमा पूरी तरह बंद करना मुश्किल हो जाता है. पहले चिटमहल (एन्क्लेव) की समस्या थी, जिसे 2015 के लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट से ज्यादातर सुलझा लिया गया. लेकिन अब भी सुरक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं। 

600 किलोमीटर डार्क जोन कहां है?

यह डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में है. राज्य की कुल 2,217 किलोमीटर सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है, लेकिन लगभग 600 किलोमीटर अभी बिना बाड़ का है। 

क्या है यह 600 किलोमीटर का ‘डार्क जोन’ और यह कहां स्थित है?

भारत-बांग्लादेश सीमा पांच भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है…

    पश्चिम बंगाल: 2,217 किलोमीटर (सबसे लंबी सीमा)
    त्रिपुरा: 856 किलोमीटर
    मेघालय: 443 किलोमीटर
    असम: 262 किलोमीटर
    मिजोरम: 318 किलोमीटर

यह 600 किलोमीटर का डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में फैला हुआ है. पश्चिम बंगाल की 2217 किमी लंबी सीमा में से लगभग 1600 किमी पर किसी न किसी रूप में बाड़ लगाई जा चुकी है, लेकिन लगभग 550 से 600 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी पूरी तरह से खुला या असुरक्षित है। 

यह डार्क जोन विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों और जिलों में मौजूद है… 

    मुर्शिदाबाद और मालदा: इन जिलों में गंगा और पद्मा जैसी नदियां बहती हैं. नदी के बहाव के कारण यहां जमीन स्थिर नहीं रहती, जिससे पक्की बाड़ लगाना असंभव हो जाता है। 

    उत्तर और दक्षिण 24 परगना: सुंदरबन का दलदली इलाका और इछामती जैसी इकरूखी नदियां इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बनाती हैं। 

    कूचबिहार और जलपाईगुड़ी: उत्तरी बंगाल के इन जिलों में कई ऐसे गांव हैं जो ठीक जीरो लाइन (अंतर्राष्ट्रीय सीमा) पर बसे हैं, जहां बाड़ लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करना एक बड़ी चुनौती रहा है। 

इसे ‘डार्क जोन’ क्यों कहा जाता है?

इसे डार्क जोन कहने के पीछे केवल रात का अंधेरा ही एकमात्र कारण नहीं है. इसके कई तकनीकी और भौगोलिक कारण हैं… 

    नदी तटीय क्षेत्र (Riverine Terrain): जब नदियां अपना रास्ता बदलती हैं, तो पहले से लगाई गई बाड़ बह जाती है. पानी के बीच में खंभे गाड़ना व्यावहारिक नहीं होता। 

    खराब मोबाइल और संचार नेटवर्क: इन सुदूर इलाकों में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल बेहद कमजोर या न के बराबर हैं, जिससे सुरक्षा बलों को समय पर खुफिया जानकारी साझा करने में दिक्कत आती है। 

    फ्लडलाइट्स की कमी: कई दुर्गम और दलदली पैच ऐसे हैं जहां बिजली के खंभे और हाई-मास्ट फ्लडलाइट्स लगाना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पाया है। 
    सघन आबादी (Zero Line Villages): कई जगहों पर अंतरराष्ट्रीय सीमा लोगों के घरों के पीछे के आंगन या खेतों से होकर गुजरती है. ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन स्थानीय नागरिक है. कौन घुसपैठिया। 

नदियों और दलदलों वाले करीब 175 किलोमीटर इलाके में पारंपरिक बाड़ लगाना लगभग नामुमकिन है. यही जगह घुसपैठ और तस्करी के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। 

वहां किस तरह की घुसपैठ होती है?

डार्क जोन से कई तरह की अनधिकृत गतिविधियां होती हैं…

    अवैध प्रवासन (Illegal Migration): आर्थिक मजबूरियों या अन्य कारणों से लोग रात के अंधेरे में घुसते हैं. वे पश्चिम बंगाल, असम आदि में बस जाते हैं. जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। 

    तस्करी (Smuggling): सबसे बड़ा कारोबार. भारत से बांग्लादेश में गाय तस्करी, फेक इंडियन करेंसी (FICN), ड्रग्स (याबा, फेंसिडिल), सोना और हथियार. नदी वाले इलाकों में नावों से रात में तस्करी आसान होती है। 

    मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों को मजदूरी, जबरन शादी या शोषण के लिए ले जाया जाता है। 
    सुरक्षा खतरे: कभी-कभी चरमपंथी तत्व, जासूस या अपराधी भी घुसते हैं. डेमोग्राफिक चेंज और कट्टरपंथ की आशंका बढ़ रही है। 

    छोटी-मोटी घटनाएं: चोरी, अवैध व्यापार आदि.

BSF हर साल हजारों प्रयासों को नाकाम करता है, लेकिन कुछ सफल हो जाते हैं. हाल के वर्षों में प्रयास बढ़े हैं। 

भारत की तरफ: सीमा सुरक्षा बल (BSF)
भारत की ओर से इस सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कंधों पर है. BSF के जवान इस डार्क जोन में निम्नलिखित रणनीतियों के तहत काम करते हैं… 

चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग: पैदल गश्त के साथ-साथ नदी वाले इलाकों में BSF ‘वाटर विंग’ की स्पीड बोट और फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट्स (Floating BOPs) के जरिए गश्त करती है। 

तकनीकी समाधान (Smart Fencing): जहां पारंपरिक कंटीली बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां BSF अब Comprehensive Integrated Border Management System (CIBMS) का उपयोग कर रही है. इसमें लेजर दीवारें (Laser Walls), थर्मल इमेजर, अंडरवाटर सेंसर और इंफ्रा-रेड कैमरे शामिल हैं, जो अंधेरे या कोहरे में भी हलचल को पकड़ लेते हैं। 

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम: आसमान से निगरानी रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. साथ ही, सीमा पार से आने वाले संदिग्ध ड्रोनों को मार गिराने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक भी तैनात की जा रही है। 

स्थानीय प्रशासन से समन्वय: सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को तेज किया है, ताकि BSF को नई चौकियां (BOPs) बनाने और बचे हुए हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जमीन मिल सके। 

बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB)
बांग्लादेश की ओर से सीमा की निगरानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) (जिसे पहले बांग्लादेश राइफल्स या BDR कहा जाता था) करती है।

बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB)
बांग्लादेश की ओर से सीमा की निगरानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) (जिसे पहले बांग्लादेश राइफल्स या BDR कहा जाता था) करती है। 

समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP): BSF और BGB मिलकर ‘Coordinated Border Management Plan’ के तहत काम करते हैं. इसके तहत दोनों बल संयुक्त गश्त (Joint Patrolling) करते हैं ताकि तस्करों के ठिकानों को नष्ट किया जा सके। 

फ्लैग मीटिंग्स: सीमा पर होने वाली किसी भी अप्रिय घटना, अवैध क्रॉसिंग या गोलीबारी की स्थिति में दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडर तुरंत फ्लैग मीटिंग करते हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। 

डार्क जोन की समस्या अब तक अनसुलझी क्यों रही?
यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आजादी के इतने दशकों बाद भी 600 किलोमीटर का यह हिस्सा असुरक्षित क्यों छूटा हुआ है? इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं…

जटिल भूमि अधिग्रहण: पश्चिम बंगाल में आबादी का घनत्व बहुत अधिक है. बाड़ लगाने के लिए किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण करना पड़ता है, जिसके मुआवजे और पुनर्वास को लेकर लंबे समय तक राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक मतभेद रहे हैं। 

भौगोलिक बाधाएं: सुंदरबन के मैंग्रोव जंगल और मालदा-मुर्शिदाबाद की उफनती नदियां ऐसी हैं जहां कंक्रीट का कोई भी ढांचा टिक नहीं पाता. मानसून के दिनों में नदियां किनारों को काट देती हैं, जिससे करोड़ों की लागत से बनी बाड़ मलबे में तब्दील हो जाती है। 

स्थानीय अर्थव्यवस्था की निर्भरता: सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कई गांवों की अर्थव्यवस्था अनौपचारिक रूप से सीमा पार के व्यापार और छोटी-मोटी तस्करी पर टिकी हुई है. इसलिए स्थानीय स्तर पर भी कई बार बाड़ लगाने का विरोध देखने को मिलता है। 

आगे का रास्ता क्या है?

इस डार्क जोन को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए भारत सरकार को एक बहुस्तरीय और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाना होगा… 

शारीरिक बाधाओं के स्थान पर डिजिटल दीवार: जहां भौगोलिक कारणों से भौतिक बाड़ लगाना असंभव है, वहां 100% तकनीकी कवरेज सुनिश्चित किया जाना चाहिए. एआई-संचालित (AI-driven) कैमरे, ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग सेंसर और लगातार सैटेलाइट निगरानी के जरिए ‘डिजिटल फेंसिंग’ को मजबूत करना होगा। 

प्रशासनिक इच्छाशक्ति और त्वरित भूमि हस्तांतरण: केंद्र और राज्य सरकार को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर बचे हुए पैचों पर भूमि अधिग्रहण का काम युद्ध स्तर पर पूरा करना चाहिए ताकि BSF अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा कर सके। 

सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास: सीमा पर रहने वाले भारतीय नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें रोजगार के अवसर देने की जरूरत है, ताकि वे तस्करों के बहकावे में न आएं और देश की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों के ‘आंख और कान’ बन सकें। 

राजनयिक दबाव और सहयोग: बांग्लादेश की सरकार के साथ उच्च स्तरीय बातचीत के जरिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि BGB अपनी तरफ से घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. अपनी धरती का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे। 

भारत-बांग्लादेश सीमा का यह 600 किलोमीटर का डार्क जोन हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी है. जब तक इस खुली खिड़की को तकनीक, बुनियादी ढांचे और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के जरिए पूरी तरह से बंद नहीं किया जाता, तब तक घुसपैठ और तस्करी की चुनौतियों से पार पाना नामुमकिन होगा। 

 

 

पहाड़ों पर पर्यटकों का सैलाब, हिमाचल से उत्तराखंड तक महाजाम; 50 किमी में लग रहे 8 घंटे

 मनाली/नैनीताल/चमोली

उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए लाखों लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और जोशीमठ तक इस समय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। 

पहाड़ों में मौसम सुहावना है, कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोग लंबा सफर और घंटों का ट्रैफिक जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग रहे हैं। 

मनाली-रोहतांग मार्ग पर थमी रफ्तार
हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई का महीना खत्म होने के बावजूद रोहतांग में बर्फ मौजूद है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। भीड़ का असर सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने से लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में करीब 50 किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा हो जाता है, लेकिन इन दिनों यही दूरी तय करने में 7 से 8 घंटे लग रहे हैं। कोलकाता से आए पर्यटक एस. मित्रा ने बताया कि रास्ते में कई घंटे जाम में फंसे रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि कुछ वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे जाम और बढ़ जाता है। स्थानीय पर्यटन कारोबारी हीरालाल का कहना है कि पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं। इससे ट्रैफिक प्रभावित होता है और जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है।

नैनीताल में पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़
उत्तराखंड के नैनीताल में भी इस समय पर्यटकों की भारी भीड़ है। वीकेंड के दौरान शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। माल रोड, स्नो व्यू, केव गार्डन और चिड़ियाघर जैसे स्थानों पर दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। नैनी झील में बोटिंग के लिए लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से शाम तक झील के आसपास पर्यटकों की भीड़ बनी रहती है। ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसका फायदा स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा है। होटल, होमस्टे, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि लंबे समय बाद पर्यटन कारोबार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है। हालांकि बढ़ती भीड़ के कारण शहर की सड़कों पर लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों को शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने में काफी समय लग रहा है।

कैंचीधाम में भी बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या
बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंचीधाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में लगातार भीड़ बढ़ रही है। आने वाले दिनों में स्थापना दिवस कार्यक्रम को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है।

चारधाम यात्रा मार्गों पर बढ़ा दबाव
चारधाम यात्रा के चलते उत्तराखंड के चमोली जिले में भी वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, औली और माणा-नीति घाटी जाने वाले मार्गों पर लंबी वाहन कतारें देखी जा रही हैं। जोशीमठ क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर तक लंबा जाम लग रहा है। लोगों को घंटों तक सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया है, लेकिन यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।

बारिश और बर्फबारी भी नहीं रोक पा रही भीड़
ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम लगातार बदल रहा है। कई जगह हल्की बारिश हो रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी बर्फबारी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बद्रीनाथ धाम में लाखों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं हेमकुंड साहिब जाने वाले रास्तों पर भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ दिखाई दे रही है। कई बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी से बचने के लिए पहाड़ सबसे बेहतर विकल्प हैं। यही वजह है कि लोग लंबी यात्रा और जाम की परेशानी के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।

CG के थाने में नाबालिग से अभद्रता पर बड़ा एक्शन, TI और महिला हेड कांस्टेबल सस्पेंड

राजनांदगांव.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पुलिस कर्मियों की गंभीर लापरवाही पर एसपी ने सख्त एक्शन लिया है. रातभर थाने में नाबालिग बालिका और उसके परिवार को बैठाकर रखा गया. इस दौरान नाबालिग बालिका के साथ अभद्र व्यवहार किया गया. मामले में थाना प्रभारी और महिला हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर रक्षित केंद्र में भेज दिया गया है.

जानकारी के मुताबिक, सोमनी थाना में यह अमानवीय घटना हुई. जहां के टीआई  अरुण नामदेव ने एक नाबालिग बालिका को गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उसे गर्भवती बता दिया. इसके बाद नाबालिग और उसके परिवार को रातभर थाने में बैठाकर रखा. इतना ही नहीं ड्यूटी पर तैनात महिला प्रधान आरक्षण राजश्री सिंह ने नाबालिग से अभद्र व्यवहार किया. बताया जा रहा है कि जानकारी मिलने पर एसपी खुद मौके पर पहुंची और हड़काते हुए दोनों तत्काल निलंबित कर दिया.

आदेश जारी
एसपी कार्यालय से इस संबंध में आज जारी आदेश किया गया है. दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है. साथ ही बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता रहेगी.

CUET-UG परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी, NTA ने मांगी माफी; जारी किया नया शेड्यूल

नई दिल्ली
 देश में पहले से ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट  को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी चौतरफा विवादों से घिरी है. इसी बीच, आज यानी 30 मई 2026 को एनटीए की एक और परीक्षा सीयूईटी यूजी 2026 के परीक्षा केंद्रों पर भारी अव्यवस्था देखने को मिली. देश के कई परीक्षा केंद्रों पर सुबह की शिफ्ट का पेपर अपने तय समय पर शुरू नहीं हो सका, जिससे सेंटर्स के बाहर तपती धूप में खड़े उम्मीदवारों और उनके माता-पिता का गुस्सा फूट पड़ा. इस हंगामे के बाद आनन-फानन में एनटीए को आधिकारिक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देना पड़ा है। 

एनटीए ने अपने ऑफिशियल नोटिस में स्वीकार किया है कि सीयूईटी यूजी परीक्षा कराने वाली टेक्निकल पार्टनर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (M/s TCS) के एंड पर एक बड़ी तकनीकी खराबी आ गई थी. इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण सुबह की शिफ्ट की परीक्षा में देरी हुई. इस बड़ी चूक का सीधा असर अब दोपहर की शिफ्ट पर भी पड़ा है, जिसके चलते एनटीए को दोपहर के सत्र के समय में बड़ा बदलाव करना पड़ा है. एजेंसी ने इस असुविधा के लिए छात्रों और अभिभावकों से खेद जताया है और भरोसा दिया है कि किसी भी उम्मीदवार का समय का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। 

TCS के सर्वर में खराबी: अटकी सीयूईटी परीक्षा!
भारत की ज्यादातर यूनिवर्सिटीज में सीयूईटी यूजी स्कोर के आधार पर एडमिशन मिलता है. आज, 30 मई को सीयूईटी परीक्षा शुरू होते ही टीसीएस के सिस्टम ने जवाब दे दिया. एनटीए ने बताया कि टीसीएस की तरफ से आई इस तकनीकी खराबी के कारण कुछ चुनिंदा सेंटर्स पर परीक्षा समय से शुरू नहीं हो सकी. कंप्यूटर स्क्रीन और सर्वर डाउन होने की वजह से छात्र अपनी सीटों पर बैठे इंतजार करते रहे. हालांकि, एनटीए का दावा है कि अब इस तकनीकी खराबी को पूरी तरह से ठीक कर लिया गया है और प्रभावित सेंटर्स पर परीक्षा दोबारा सुचारू रूप से शुरू करा दी गई है। 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोपहर के सत्र के समय में बदलाव किया है और छात्रों के लिए एक जरूरी नोटिस जारी किया है।

दोपहर के सत्र की परीक्षा 4 बजे से होगी शुरू
एनटीए ने दोपहर के सत्र की परीक्षा को एक घंटा आगे बढ़ा दिया है। अब रिपोर्टिंग और एंट्री का समय दोपहर 2:30 बजे से तय किया गया है। परीक्षा शुरू होने का समय दोपहर 4:00 बजे से (पहले यह परीक्षा दोपहर 3:00 बजे शुरू होने वाली थी) निर्धारित किया गया है।

शनिवार सुबह से ही देश के कई परीक्षा केंद्रों से छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें आ रही थीं कि कंप्यूटर स्क्रीन काम नहीं कर रही हैं और लॉगिन करने में दिक्कत आ रही है।

टीसीएस ने आधिकारिक तौर पर माना है कि उनकी तरफ से एक तकनीकी खराबी हुई थी, जिसकी वजह से सुबह का सत्र समय पर शुरू नहीं हो सका।

सुबह की पाली के छात्रों को दिया जा रहा पूरा समय
एनटीए ने आश्वासन दिया है कि सुबह के सत्र के जिन छात्रों की परीक्षा देरी से शुरू हुई थी, उन्हें पूरा समय दिया जा रहा है। छात्र अपना पूरा पेपर खत्म करने के बाद ही परीक्षा केंद्र से बाहर आ सकेंगे, ताकि किसी भी छात्र का नुकसान न हो।

NTA ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
एनटीए ने छात्रों और अभिभावकों को हुई इस असुविधा के लिए खेद जताया है और कहा है कि अब इस तकनीकी समस्या को पूरी तरह सुलझा लिया गया है।

यदि किसी छात्र को परीक्षा से जुड़ी कोई अन्य समस्या आ रही है, तो वे हेल्पलाइन नंबर +91-11-40759000 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

दोपहर की शिफ्ट का समय बदला: अब 3 नहीं, 4 बजे से शुरू होगा पेपर
सुबह की शिफ्ट में हुई इस देरी का सीधा असर दोपहर के सत्र पर पड़ा है. एनटीए ने तुरंत एडवाइजरी जारी कर दोपहर की शिफ्ट के समय को री-शेड्यूल कर दिया है. नए टाइमिंग के मुताबिक:

    रिपोर्टिंग और एंट्री का समय: दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगा.
    परीक्षा शुरू होने का समय: अब दोपहर 3:00 बजे के बजाय शाम 4:00 बजे से परीक्षा शुरू होगी.

एनटीए ने सभी संबंधित परीक्षा केंद्रों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे नए टाइमिंग के हिसाब से ही उम्मीदवारों को एंट्री दें, जिससे सेंटर्स पर अफरा-तफरी का माहौल न बने। 

सुबह वाले छात्रों को मिलेगा पूरा समय, बीच में निकलने पर रोक
देरी से परेशान सुबह की शिफ्ट के उम्मीदवारों को राहत देते हुए एनटीए ने साफ किया है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ नाइंसाफी नहीं होगी. तकनीकी खराबी के कारण जितना भी समय बर्बाद हुआ है, उसकी पूरी भरपाई ‘कंपनसेटरी टाइम’ (Compensatory Time) देकर की जा रही है. छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए निर्धारित पूरा समय दिया जाएगा. इसके साथ ही एनटीए ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए सख्त नियम लागू किया है कि सुबह की शिफ्ट का कोई भी उम्मीदवार अपना पेपर पूरा किए बिना या निर्धारित समय से पहले एग्जाम हॉल से बाहर नहीं निकल सकेगा। 

एनटीए ने जताया खेद, हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी
पहले से ही विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही एनटीए ने इस घटना के तुरंत बाद उम्मीदवारों और अभिभावकों को हुई मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए खेद प्रकट किया है. इसके साथ ही, किसी भी तरह की शंका, शिकायत या मदद के लिए एनटीए ने हेल्पलाइन नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी भी जारी की है. उम्मीदवार और पेरेंट्स किसी भी अपडेट के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाए रख सकते हैं:

    हेल्पलाइन नंबर: +91-11-40759000
    ऑफिशियल ईमेल: cuet-ug@nta.ac.in
    ऑफिशियल वेबसाइट: https://cuet.nta.ac.in

कई केंद्रों से परीक्षा रद्द होने की सूचना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एनटीए के ट्वीट के नीचे कमेंट सेक्शन में कई उम्मीदवार आज की सीयूईटी यूजी परीक्षा रद्द होने की जानकारी दे रहे हैं. इन उम्मीदवारों ने कमेंट में लिखा है कि नोएडा के सेक्टर 64 समेत कई केंद्रों में परीक्षा शुरू ही नहीं हुई। 

कई अभिभावकों का कहना है कि जो सीयूईटी यूजी परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होकर 10.30 बजे खत्म होनी थी, वो शायद अब तक शुरू ही नहीं हुई है. 1 बज चुका है और उनके बच्चे अभी तक सीयूईटी यूजी परीक्षा केंद्र से बाहर ही नहीं निकले हैं। 

 

टॉम हॉलैंड ने स्पाइडर-मैन छोड़ने के दिए संकेत, ‘ब्रांड न्यू डे’ बन सकती है आखिरी फिल्म

फिल्म ‘स्पाइडर मैन- ब्रांड न्यू डे’ का फैंस को बेसब्री से इंतजार है। यह फिल्म किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी ही रहती है। अब इसके मुख्य अभिनेता टॉम हॉलैंड को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जो फैंस के लिए चौंकाने वाली है।  

पीटर के किरदार को कहेंगे अलविदा?
अभिनेता टॉम हॉलैंड स्पाइडर मैन सीरीज की चार फिल्मों का हिस्सा रहे हैं। मगर हाल ही में एम्पायर मैगजीन से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, ‘अगला किरदार चाहे माइल्स मोरालेस हो, स्पाइडर-ग्वेन हो, स्पाइडर-वुमन हो या ऐसा ही कोई और, मैं उसके अगले अध्याय की नींव रखने में अपना योगदान देना चाहूंगा। मैं नहीं जानता कि किस तरह मैं इसमें शामिल रहूंगा। मगर स्पाइडर मैन के किरदार को किसी और को सौंपने के बारे में सोच रहा हूं।’

आखिरी बार निभाएंगे स्पाइडर मैन के किरदार?
इसके साथ ही ‘स्पाइडर मैन- ब्रांड न्यू डे’ की रिलीज अब टॉम हॉलैंड और स्पाइडर मैन फ्रेंचाइजी के फैंस के लिए खास हो गई है। टॉम के इस बयान से फैंस अंदाजा लगा रहे हैं कि इस फिल्म में वो आखिरी बार स्पाइडर मैन और पीटर पार्कर के रूप में दिखाई देगें।
टॉम ने साल 2016 में ‘कैप्टन अमेरिका’ से मार्वल की दुनिया में कदम रखा था। अब तक उन्हेंने तीन बार स्पाइडर-मैन फिल्मों में अभिनय किया है।

जुलाई में रिलीज होगी फिल्म
‘स्पाइडर मैन: ब्रांड न्यू डे’ जल्द सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का ट्रेलर मार्च में रिलीज किया गया था। फिल्म में टॉम हॉलैंड के अलावा जेंडाया और मार्क रफ्लो भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसका निर्देशन डेस्टिन डेनियल क्रेटन ने किया है।
इस बार फिल्म की कहानी इसी नाम की एक कॉमिक से प्रेरित होगी। इसके साथ ही ये स्पाइडर मैन सीरीज की पिछली फिल्म ‘नो वे होम’ से आगे की कहानी बयां करेगी। यह 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

छत्तीसगढ़ की बेटियों का नेशनल बास्केटबॉल में जलवा, स्वर्ण जीतने पर CM साय ने दी बधाई

रायपुर.

छत्तीसगढ़ की बालिका बास्केटबाल टीम ने नेशनल टूर्नामेंट के फाइनल मे शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 14 साल बाद विजेता होने का गौरव हासिल किया है। चार साल पूर्व जूनियर बालिका वर्ग की टीम ने रजत पदक प्राप्त किया था। बालिका टीम की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बधाई दी है।

छत्तीसगढ़ की बालिका बास्केटबॉल टीम ने पुद्दुचेरी में बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा पुद्दुचेरी बास्केटबॉल एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में केरल को 55-51 अंकों से परास्त कर स्वर्ण पदक जीता। टीम की ओर से दिव्या रंगारी ने 22 अंक, अंजली कोडापे कप्तान 14, रूमी कोनवर और अंजनी ने 7-7 अंक, अदिति कोडापे 3 अंक, सारा सिंह 2 अंक लगा कर अपनी टीम को विजयी होने में शानदार भूमिका निभाई। वहीं सोफी सिका एवं नंदनी माधो प्रधान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। टीम ने सेमीफाइनल में कर्नाटक की टीम को 67-62 को परास्त कर फाइनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल मैच में छत्तीसगढ़ की टीम ने महाराष्ट्र की टीम को 56-44 अको से परास्त किया था। छत्तीसगढ़ प्रदेश बास्केटबॉल संघ में विवाद होने के कारण बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ टीम के चयन के लिए एड हॉक कमेटी बनाई है, जो छत्तीसगढ़ के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की टीम चयनीत कर विभिन्न राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भेजती है।

बेटियों ने प्रदेश का मान बढ़ाया –
पुडुचेरी में आयोजित 76वीं जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की बेटियों ने पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। यह उपलब्धि उनकी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और समर्पण का गौरवपूर्ण प्रतिफल है। पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए हमारी बेटियों…
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) May 30, 2026

बेटियों ने प्रदेश को गौरवान्वित किया –
पुद्दुचेरी में आयोजित 76वीं जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की बेटियों ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। फाइनल मुकाबले में केरल को पराजित कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली सभी खिलाड़ियों, कोच एवं सहयोगी दल को हार्दिक…
— Dr Raman Singh (@drramansingh) May 29, 2026

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी, समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी, समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पत्रकारिता ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में निभाई ऐतिहासिक भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 
पत्रकार लोकतंत्र के सच्चे सेनानी हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हुए सूचनाओं को जन-जन तक पहुंचाते हैं और समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मीडिया की सकारात्मक आलोचना केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि प्रशासन और सरकार को भी आत्ममंथन और बेहतर कार्य की दिशा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर परिसर के सुंदर सदन में आयोजित पत्रकारिता गौरव मार्तंड उत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माता कौशल्या की धरती और भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा पर आधारित ऐसा अद्भुत आयोजन निश्चित रूप से अभिनंदनीय है। उन्होंने आयोजन के लिए रायपुर प्रेस क्लब को बधाई देते हुए कहा कि रायपुर प्रेस क्लब देश के पुराने और प्रतिष्ठित प्रेस क्लबों में से एक है, जिसका इतिहास समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और पत्रकारों के सम्मान में आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब की प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का सशक्त प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शहर ने पत्रकारिता जगत को अनेक शिखर पुरुष दिए हैं। उन्होंने मधुकर खेर, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, रमेश नैय्यर और बबन प्रसाद मिश्र सहित अनेक प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों का स्मरण करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने पत्रकारिता की सशक्त और वैचारिक परंपरा को समृद्ध किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की आधारशिला है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तक पत्रकारिता ने हमेशा परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ने भारतीय पत्रकारिता की मजबूत नींव रखी। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा देशवासियों के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवर्षि नारद को आदि पत्रकार माना जाता है और इसी कारण पत्रकार बंधु नारद जयंती को सम्मानपूर्वक मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत रोचक और प्रेरक तथ्य है कि उदंत मार्तंड का प्रकाशन भी नारद जयंती के दिन आरंभ हुआ, जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय पत्रकारिता की जड़ें हमारी सांस्कृतिक चेतना और सनातन मूल्यों से गहराई से जुड़ी रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता ने राष्ट्रवादी चेतना को स्वर देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, माधवराव सप्रे और सुभाषचंद्र बोस सहित अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पत्रकारिता को सामाजिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के माध्यम के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास लिखा जाएगा, तब छत्तीसगढ़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। 

उन्होंने मां भारती के सपूत माधवराव सप्रे का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ मित्र का संपादन कर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों को जागृत और संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पत्रकारिता की चर्चा जब भी होगी, तब भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण स्वाभाविक रूप से होगा। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय चेतना की जो अलख जगाई, उसने स्वतंत्र भारत में लाखों लोगों को प्रेरित किया। स्वदेश और राष्ट्रधर्म जैसे प्रकाशनों ने राष्ट्र चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मोदी की गारंटियों को धरातल पर उतारने का कार्य किया है और प्रदेश की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विशेष रूप से नक्सलवाद उन्मूलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा जनसहभागिता के साथ-साथ पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रदेश में शांति और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा और भटकाव के रास्ते पर जाने वाले लोगों को शांति, विकास और मुख्यधारा की ओर प्रेरित करने में पत्रकारों ने बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज जब मीडिया बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव, विकास, पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ती संभावनाओं की खबरें सामने लाता है, तब देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनती है। जो बस्तर कभी बंदूक और हिंसा की खबरों से पहचाना जाता था, आज वही बस्तर पर्यटन, प्रकृति और विकास की नई संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा अत्यंत गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि 1826 में जब उदंत मार्तंड की शुरुआत हुई, तब देश अंग्रेजी शासन के कठिन दौर से गुजर रहा था। ऐसे समय में पत्रकारिता ने अंधकार को सामने लाने के साथ समाज को उजाले की दिशा दिखाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. के.जी. सुरेश ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत तक पत्रकारिता ने राष्ट्रधर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने समय के साथ बदलती तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है, किंतु सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और नागरिक पत्रकारिता की अवधारणा ने कई नई चुनौतियां भी उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को शोधपरक, तथ्यात्मक और साक्ष्य आधारित बनाए रखना समय की आवश्यकता है, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक भूमिका और मजबूत हो सके।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित नवप्रदेश के विशेष अंक, रायपुर प्रेस क्लब की पत्रकार डायरेक्टरी तथा दिनेश यदु की पुस्तक ‘मैं अगहन हूं’ का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, राम मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सुनील रामदास, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, प्रेस क्लब के पदाधिकारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

अवैध खनन पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, पूर्व सरपंच समेत 8 लोगों पर 5 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना

पांढुर्ना 

पांढर्णा में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए छह प्रकरणों में कुल 5 करोड़ 44 लाख 27 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस कार्रवाई में एक पूर्व सरपंच, तत्कालीन सचिव, ठेकेदार सहित आठ लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया है। 

कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देश पर खनिज विभाग और राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई जांच में अवैध रेत, मिट्टी और मुरम उत्खनन के मामलों का खुलासा हुआ, जिसके बाद मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियम-2022 के तहत कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में अवैध खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है। लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में अवैध उत्खनन की शिकायतें मिल रही थीं, जिनकी जांच के बाद संबंधित व्यक्तियों पर करोड़ों रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया है।

रंगारी में सबसे बड़ा घोटाला, 5.26 करोड़ का अर्थदंड
सबसे बड़ा मामला सौंसर तहसील के ग्राम रंगारी में सामने आया। जांच के दौरान पाया गया कि स्वीकृत खदान लीज क्षेत्र की सीमा से बाहर जाकर करीब 3510 घनमीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया था। यह उत्खनन नियमों और स्वीकृत शर्तों के विपरीत पाया गया। मामले में तत्कालीन सरपंच प्रतिभा आनंदराव ठाकरे, तत्कालीन ग्राम सचिव तथा संबंधित ठेकेदार की भूमिका सामने आने पर तीनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए 5 करोड़ 26 लाख 50 हजार रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। यह जिले में अवैध खनन से जुड़े मामलों में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई मानी जा रही है।

जांच में सामने आई राजस्व हानि
अधिकारियों के अनुसार लीज क्षेत्र से बाहर खनिज निकालने के कारण शासन को भारी राजस्व हानि हुई। साथ ही नदी और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद अंतिम आदेश पारित किया गया।

निजी भूमि पर भी नहीं मिली राहत
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध उत्खनन चाहे शासकीय भूमि पर हो या निजी भूमि पर, नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में जिले के विभिन्न गांवों में निजी भूमि से मिट्टी, मुरम और रेत निकासी के मामलों में भी दंडात्मक कार्रवाई की गई। घोतकी निवासी तीरथ पेमचंद काहार पर सावंगा स्थित भूमि में अवैध उत्खनन पाए जाने पर 2 लाख 73 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं रामाकोना निवासी अशोक भाउराव उपासे पर सुरिया बुरिया क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में 4 लाख 8 हजार रुपये का जुर्माना किया गया।

इसी प्रकार बोरगांव निवासी विजय देवीलाल प्रजाति पर खैरीतायगांव क्षेत्र में अवैध उत्खनन के लिए 2 लाख 73 हजार रुपये, जबकि काजलवानी में भूमि स्वामी असलमबी हबीबउल्ला और भट्टा संचालक नासिर हबीबउल्ला पर संयुक्त रूप से 4 लाख 35 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। काजलवानी क्षेत्र में ही भूमि स्वामी अजीजउल्ला हबीबउल्ला पर 2 लाख 73 हजार रुपये व रामाकोना निवासी विजय बलवंत वानखेड़े पर 4 लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया है।

एक माह की मोहलत, फिर होगी राजस्व वसूली
प्रशासन ने सभी आरोपितों को निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा करने के लिए एक माह का समय दिया है। आदेश में कहा गया है कि तय अवधि में राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे भू-राजस्व बकाया मानकर वसूला जाएगा। इसके लिए राजस्व वसूली की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

जिलेभर में बढ़ेगी निगरानी
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अब जिले के अन्य खनन क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों की भी समीक्षा कर रहा है। अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर नजर रखने के लिए राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग के संयुक्त दलों को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सख्त कार्रवाई से अवैध खनन पर अंकुश लगेगा और शासन को होने वाले राजस्व नुकसान को रोका जा सकेगा। जिले में हुई इस बड़ी कार्रवाई को प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है। करोड़ों रुपए के अर्थदंड ने साफ संकेत दे दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब कठोर कदम उठाए जाएंगे। 

 

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