इंदौर के शख्स का बड़ा दावा! NASA के फॉर्मूले और गायत्री मंत्र से बंद कमरे में उगाई ₹5 लाख किलो वाली केसर

इंदौर
 क्या बिना मिट्टी और बिना खेत के घर के एक छोटे से बंद कमरे में ₹5 लाख किलो वाली कश्मीरी केसर उगाई जा सकती है? देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के एक किसान ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया है।

इंदौर के रहने वाले अनिल जायसवाल ने अपने घर की दूसरी मंजिल के महज 320 वर्ग फीट के कमरे को हाईटेक कश्मीरी लैब में बदल दिया है। कश्मीरी वादियों जैसा माहौल देने के लिए इस कमरे में इन दिनों केसर के पर्पल फूलों की बहार आई हुई है।

नासा की एयरोपॉनिक्स तकनीक का कमाल
अनिल ने इस खेती के लिए पारंपरिक तरीका छोड़कर नासा द्वारा विकसित ‘एयरोपॉनिक्स’ तकनीक को अपनाया है। इसमें पौधों को मिट्टी की जरूरत नहीं होती, बल्कि जड़ें हवा में लटकती हैं और उन पर पोषक तत्वों का स्प्रे किया जाता है। कश्मीर के पंपोर से करीब 8 लाख रुपये के बीज लाकर इंदौर के इस बंद कमरे में चिलर और खास लाइटिंग के जरिए कश्मीर जैसा कड़ाके की ठंड वाला तापमान मेंटेन किया गया है।

शुरुआत में लोग इसे पागलपन कह रहे थे क्योंकि एमपी की गर्मी में केसर उगाना मजाक लगता है। लेकिन हमने रिस्क लिया, तापमान और नमी को हर सेकंड मॉनिटर किया। पौधों को लाइव फील देने के लिए हम इन्हें रोज सुबह-शाम गायत्री मंत्र और पक्षियों की चहचहाहट की आवाजें सुनाते हैं, जिससे इनकी ग्रोथ नेचुरल होती है।

अनिल जायसवाल, प्रगतिशील किसान, इंदौर

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केसर प्रोजेक्ट का पूरा गणित

    आइडिया की शुरुआत: परिवार के साथ कश्मीर के पंपोर टूर के दौरान केसर के खेत देखकर विचार आया।

    शुरुआती सेटअप: 320 वर्ग फीट के कमरे में वर्टिकल रैक, चिलर और स्पेशल ग्रोथ लाइटिंग लगाई गई।

    टोटल इन्वेस्टमेंट: इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹6.5 लाख और कश्मीर से बीज मंगाने में ₹7 से ₹8 लाख का खर्च आया।

    रोजाना की मेहनत: शुरुआत में जायसवाल परिवार रोज 3-4 घंटे देता था, अब सिर्फ 2 घंटे की निगरानी काफी है।

    मुनाफे का अनुमान: पिछले साल 3 किलो केसर हुई थी, इस साल करीब 4 किलो उत्पादन की उम्मीद है।

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए 8 से 15 जुलाई तक महाविद्यालयों में लगेगा प्रवेश मेला

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए 8 से 15 जुलाई तक महाविद्यालयों में लगेगा “प्रवेश मेला”

अतिरिक्त सीएलसी राउंड में रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए मिशन मोड में चलेगा अभियान

भोपाल

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में रिक्त सीटों पर अधिक से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 8 से 15 जुलाई 2026 तक “प्रवेश मेला” आयोजित किया जा रहा है। अतिरिक्त सीएलसी राउंड के दौरान प्रवेश प्रक्रिया को गति देने एवं पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए यह विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।

प्रवेश मेले के दौरान महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पंजीयन, चॉइस फिलिंग एवं संशोधन, दस्तावेज सत्यापन, सीट आवंटन संबंधी मार्गदर्शन तथा शुल्क भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पात्र विद्यार्थी उसी दिन अपनी प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। महाविद्यालयों में प्रवेश मेला प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होगा।

महाविद्यालयों द्वारा पोर्टल पर उपलब्ध लंबित पंजीयन, सत्यापन, प्रवेश प्रस्ताव प्राप्त करने के बाद भी शुल्क जमा नहीं करने वाले विद्यार्थियों की सूची का परीक्षण कर उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जाएगा। विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिन पाठ्यक्रमों एवं संकायों में रिक्त सीटों की संख्या अधिक है, वहां विशेष प्रयास किए जाएंगे। विद्यार्थियों को उपलब्ध पाठ्यक्रमों, विषय चयन एवं चॉइस संशोधन के संबंध में आवश्यक परामर्श प्रदान किया जाएगा। साथ ही स्थानीय विद्यालयों, जनप्रतिनिधियों, पालकों एवं पूर्व विद्यार्थियों के सहयोग से प्रवेश जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

प्रत्येक महाविद्यालय में प्राचार्य की निगरानी में प्रतिदिन प्रवेश की समीक्षा की जाएगी तथा विभागवार एवं संकायवार लक्ष्य निर्धारित कर कार्यवाही की जाएगी। जिला नोडल अधिकारी अधिक रिक्त सीट वाले महाविद्यालयों की विशेष निगरानी करेंगे और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएंगे। समस्त महाविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि प्रवेश मेला केवल औपचारिक आयोजन न होकर “अधिकतम प्रवेश, उसी दिन प्रवेश” की कार्यपद्धति पर संचालित किया जाए, जिससे अतिरिक्त सीएलसी राउंड में अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश का लाभ मिल सके।

 

भारतीय रेलवे की एमपी के यात्रियों को बड़ी सौगात, मात्र ₹850 में 5 धामों के दर्शन

 इंदौर

भारतीय रेलवे और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और ‘देखो अपना देश’ के तहत भारत गौरव पर्यटक ट्रेन के माध्यम से पंच महातीर्थ दर्शन यात्रा (जगन्नाथ पुरी, कामाख्या, गया, बनारस, अयोध्या) के लिए विशेष आध्यात्मिक दौरे की आधिकारिक शुरुआत की है। आईआरसीटीसी पश्चिम क्षेत्र अहमदाबाद की क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि यह 13 दिनी आध्यात्मिक यात्रा 29 अगस्त से भारत गौरव पर्यटक ट्रेन के तहत गुजरात और मप्र से भारत के पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा कराते हुए 10 सितंबर को संपन्न होगी।
देश के इन प्रसिद्ध और पवित्र दार्शनिक स्थलों के होंगे दर्शन

इसके तहत ओडिशा में जगन्नाथ पुरी, कोणार्क और लिंगराज मंदिर, गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर, नवग्रह मंदिर, गया/बोधगया में विष्णुपद मंदिर, मां सर्वमंगला गौरी मंदिर, महाबोधि मंदिर, बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, गंगा घाट और अयोध्या में रामजन्म भूमि, हनुमानगढ़ी आदि दार्शनिक स्थल सम्मिलित हैं। इस टूर के तहत मध्य प्रदेश के यात्री रतलाम, उज्जैन और संत हिरदाराम नगर से चढ़ और उतर सकते हैं।

मात्र 850 रुपये की ईएमआई पर बुकिंग, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगी एलटीसी की सुविधा

इस टूर के लिए पैकेज की कुल कीमत (कर सहित) स्लीपर क्लास के लिए 24 हजार 200 रुपये, थर्ड एसी टियर के लिए 40 हजार 100 रुपये और सेकंड एसी क्लास के लिए 49 हजार 500 रुपये है। इस टूर के तहत सरकारी कर्मचारी एलटीसी सुविधा का लाभ भी उठा सकते हैं। इस टूर को ईएमआई सुविधा के साथ मात्र 850 रुपये प्रतिमाह के भुगतान में भी बुक कर सकते हैं।

इस टूर में आपकी बुकिंग के अनुसार सेकंड एसी, थर्ड एसी और स्लीपर क्लास में ट्रेन यात्रा, रहने की व्यवस्था, दर्शनीय स्थलों की सैर के लिए स्थानीय परिवहन, शुद्ध शाकाहारी भोजन, यात्रा बीमा, सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

 

ATM हैक करने का नया तरीका? वायरल VIDEO से मची सनसनी, जानिए क्या है पूरा सच

 नई दिल्ली

कुछ दिन पहले BAT-BMS ऐप को लेकर ई-रिक्शा बंद होने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे. अब उसी तरह का एक नया वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है. इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक शख्स मोबाइल ऐप की मदद से ATM मशीन को बंद और फिर चालू कर देता है। 

वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब ATM भी मोबाइल ऐप से हैक किए जा सकते हैं? क्या किसी आम इंसान के लिए फोन से ATM को कंट्रोल करना मुमकिन है? आइए जानते हैं इस वायरल दावे की सच्चाई। 

वीडियो में क्या दिख रहा है?

वायरल वीडियो में एक शख्स अपने मोबाइल फोन में एक ऐप खोलता है. ऐप में मौजूद बटन दबाते ही सामने खड़ी ATM मशीन बंद होती हुई दिखाई देती है. कुछ सेकंड बाद वह फिर दूसरा बटन दबाता है और ATM दोबारा चालू हो जाती है। 

वीडियो में दिखने वाले ऐप का इंटरफेस काफी हद तक BAT-BMS ऐप जैसा नजर आता है, जो हाल ही में ई-रिक्शा विवाद के कारण चर्चा में आया था। 

क्या सच में मोबाइल से ATM कंट्रोल किया जा सकता है?
फिलहाल इसका कोई सबूत नहीं है, अब तक किसी बैंक, ATM नेटवर्क ऑपरेटर या सरकारी एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि किसी नॉर्मल मोबाइल ऐप से ATM मशीन को बंद या चालू किया जा सकता है. इसलिए वायरल वीडियो में किया गया दावा साबित नहीं हुआ है। 

साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जानकारों का कहना है कि ATM मशीनें नॉर्मल Bluetooth या ओपन वायरलेस नेटवर्क पर काम नहीं करतीं. ये बैंक के सुरक्षित नेटवर्क, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और कई लेवल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी होती हैं. ऐसे में किसी आम मोबाइल ऐप से इन्हें कंट्रोल करना बेहद मुश्किल माना जाता है। 

वीडियो में ऐसा कैसे दिख रहा है?
इसका जवाब अभी साफ नहीं है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वीडियो पहले से प्लान किया गया हो सकता है. यह भी संभावना जताई गई है कि ATM नॉर्मल तरीके से रीस्टार्ट हो रहा हो और उसी समय मोबाइल ऐप का इस्तेमाल दिखाकर ऐसा माहौल बनाया गया हो कि मशीन ऐप से कंट्रोल हो रही है. कुछ जगहों पर AI या वीडियो एडिटिंग की भी आशंका जताई गई है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

BAT-BMS ऐप से क्या है कनेक्शन?
हाल ही में BAT-BMS ऐप चर्चा में आया था. इस ऐप का इस्तेमाल कुछ ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से कनेक्ट होकर उन्हें दूर से बंद करने के लिए किए जाने के आरोप लगे थे. इसके बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू की और BAT-BMS समेत कुछ ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश भी दिए। 

यही वजह है कि अब ATM वाले वायरल वीडियो को भी लोग उसी विवाद से जोड़कर देख रहे हैं. कुछ लोगों को ये सच भी लग रहा है, क्योंकि वीडियो इस तरह से तैयार किया गया है कि ये किसी को भी सही लगे। 

किराए की THAR पर लगेगा बैन? हादसों के बाद सरकार की बड़ी तैयारी, जानिए पूरा प्लान

पणजी 

गोवा का नाम सुनते ही दिमाग में बीच, छुट्टियां और किराये पर दौड़ती महिंद्रा थार की तस्वीर बनती है. लेकिन यही THAR सरकार की नज़र में आ गई है, जिसकी रफ्तार पर राज्य सरकार ब्रेक लगाने की तैयारी में है. वजह हैं लगातार सामने आ रहे सड़क हादसे. गोवा सरकार ने नई रेंटल महिंद्रा थार और थार रॉक्स के लाइसेंस पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है. अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह सिर्फ एक गाड़ी पर फैसला नहीं होगा, बल्कि पूरे रेंटल कार कारोबार और टूरिज़्म से जुड़े समीकरण भी बदल सकते हैं। 

ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या हादसों की वजह सिर्फ गाड़ी है, या फिर उसे चलाने का तरीका? यही बहस अब गोवा से निकलकर पूरे देश में शुरू हो सकती है. आइये जानें क्या है पूरा मामला- 

गोवा के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो (Mauvin Godinho) ने हाल ही में राज्य परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े कई नए प्रस्तावों पर चर्चा हुई. मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि ज्यादा जोखिम वाली रेंटल महिंद्रा थार गाड़ियों को लेकर नए नियम बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. दरअसल सरकार महिंद्रा थार को (हाई-रिस्क रेंट-कार) मान रही है और और इस मीटिंग में थार गाड़ियों को रेगुलेट करने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई. इसे अब स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। 

सरकार ने साफ किया है कि बड़े सड़क हादसों में शामिल रेंटल कार चालकों के साथ-साथ गाड़ी मालिकों और ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई होगी. इसके अलावा प्राइवेट गाड़ियों का अवैध तरीके से कमर्शियल और रेंटल इस्तेमाल करने वालों पर भी शिकंजा कसा जाएगा. रेंटल गाड़ियों की पार्किंग को लेकर भी अलग नियम बनाए जा सकते हैं। 

अभी नहीं लगी है रोक
यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि, फिलहाल महिंद्रा थार पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है. यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिस पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की अगली बैठक में वोटिंग होगी. मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. महिंद्रा थार और थार रॉक्स देश के कई टूरिस्टम प्लेसेज पर सबसे ज्यादा किराये पर ली जाने वाली SUVs में शामिल हैं। 

शानदार ऑफ-रोडिंग कैपेसिटी, दमदार इंजन और बोल्ड रोड प्रेजेंस इस एसयूवी को टूरिस्ट के बीच लोकप्रियम बनाती हैं. इसके अलावा टफ टेरेन (खराब रास्तों) पर चलने की क्षमता के कारण पर्यटक इन्हें काफी पसंद करते हैं. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि गोवा सरकार ने किन आंकड़ों के आधार पर इन्हें दूसरी गाड़ियों की तुलना में ज्यादा जोखिम वाला माना है। 

पहले भी आ चुके हैं ऐसे प्रस्ताव
यह पहली बार नहीं है जब गोवा सरकार ने रेंटल गाड़ियों को लेकर बड़ा कदम उठाने की कोशिश की है. साल 2023 में भी प्रस्ताव आया था कि 2024 से राज्य में सभी कार और बाइक रेंटल ऑपरेटर सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही किराये पर दें. हालांकि यह योजना लागू नहीं हो सकी. वहीं उबर और ओला जैसी टैक्सी एग्रीगेटर सेवाओं को राज्य में शुरू करने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हुई हैं। 

बैठक में रोड सेफ्टी को बेहतर करने के लिए AI बेस्ड ट्रैफिक कैमरे, स्पीड गवर्नर और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम लगाने पर भी चर्चा हुई. मंत्री के मुताबिक, राज्य के 26 स्थानों पर लगाए गए AI ट्रैफिक कैमरों ने एक ही दिन में 56,500 से ज्यादा ट्रैफिक वॉयलेशन के केस पकड़े हैं. फिलहाल लोगों को चेतावनी दी जा रही है. 15 जुलाई के बाद मौके पर ही चालान काटे जाएंगे. सितंबर तक कैमरों की संख्या 52 औ    र दिसंबर तक 90 स्थानों तक बढ़ाने की योजना है। 

क्या THAR है दोषी?
हालांकि, अभी रेंटेड थार के रोक पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या सड़क पर होने वाले हादसों के लिए गाड़ी जिम्मेदार है? इससे पहले भी थार को लेकर इस तरह की कई बातें सामने आ चुकी हैं. कुछ दिनों पहले हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) ओपी सिंह ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि, “अब थार गाड़ी है, इसे छोड़ने का क्या मतलब है… सारे बदमाश इसी से चलते हैं. मतलब जिस तरह की गाड़ी का च्वॉइस है… वो आपका माइंडसेट शो करता है। 

ब्रह्मोस से आकाश तक! दुनिया में बढ़ी भारतीय हथियारों की धाक, इन स्वदेशी मिसाइलों की विदेशों में जबरदस्त मांग

 नई दिल्ली

भारत अब डिफेंस सेक्टर में सिर्फ खरीदार नहीं बल्कि विश्व स्तर पर सप्लायर के रूप में उभर रहा है. ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश और आकाशतीर जैसे स्वदेशी हथियार अब विदेशी देशों की पहली पसंद बन रहे हैं. इन हथियारों का युद्धक्षेत्र में सफल प्रदर्शन, विश्वसनीयता और लागत प्रभावी होने की वजह से कई देश इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है. इन हथियारों ने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। 

ब्रह्मोस: दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
ब्रह्मोस भारत और रूस का ज्वाइंट प्रोजेक्ट है. यह विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो समुद्र, जमीन और हवा से लॉन्च की जा सकती है. फिलीपींस पहले विदेशी खरीदार के रूप में ब्रह्मोस को खरीद चुका है, जहां यह तटीय सुरक्षा के लिए तैनात है. हाल ही में वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी ब्रह्मोस की खरीद के लिए समझौते किए हैं। 

वियतनाम के साथ सौदा करीब 700 मिलियन डॉलर का बताया जा रहा है, जबकि इंडोनेशिया ने भी सैकड़ों मिलियन डॉलर का ऑर्डर दिया है. UAE, थाईलैंड, सऊदी अरब, ब्राजील और चिली जैसे देश भी ब्रह्मोस में रुचि दिखा रहे हैं. इस मिसाइल की गति और सटीकता इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाती है। 

अस्त्र: स्वदेशी बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल
अस्त्र मिसाइल DRDO द्वारा विकसित की गई स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVRAAM) एयर-टू-एयर मिसाइल है. यह Su-30 MKI जैसे फाइटर जेट्स पर आसानी से फिट होती है. हाल ही में इंडोनेशिया ने अस्त्र मिसाइल खरीदने का फैसला किया है, जो भारत के लिए बड़ा ब्रेकथ्रू है। 

ब्राजील अपने ग्रिपेन फाइटर जेट्स के लिए और आर्मेनिया Su-30 के लिए अस्त्र में दिलचस्पी दिखा चुका है. वियतनाम, मलेशिया, अल्जीरिया और अन्य कई देश भी इस मिसाइल को खरीदने पर विचार कर रहे हैं. अस्त्र की लंबी रेंज, आधुनिक सर्च और ट्रैक रडार तथा इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स से लैस होने के कारण यह विदेशी बाजार में लोकप्रिय हो रही है। 

आकाश: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम
आकाश सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (SAM) भारतीय सेना की एयर डिफेंस का मजबूत स्तंभ है. यह 25 किलोमीटर तक दुश्मन के विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है. आर्मेनिया पहले ही आकाश सिस्टम खरीद चुका है, जो भारत का सफल एक्सपोर्ट ऑर्डर है। 

फिलीपींस भी 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा के सौदे के लिए बातचीत कर रहा है. वियतनाम, UAE, मलेशिया और मिस्र जैसे देश आकाश में गहरी रुचि दिखा रहे हैं. इसकी मोबाइल क्षमता, रडार सिस्टम और बहु-टारगेट एंगेजमेंट की क्षमता इसे आकर्षक बनाती है। 

आकाशतीर: एयर डिफेंस का कमांड और कंट्रोल सिस्टम
आकाशतीर (Akashteer) भारत का स्वदेशी AI आधारित एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है. यह BEL द्वारा विकसित किया गया है. कई रडार तथा हथियारों को जोड़कर एकीकृत एयर डिफेंस बनाता है। 

UAE समेत कई देश इस सिस्टम में रुचि दिखा रहे हैं क्योंकि यह आधुनिक खतरों (ड्रोन, मिसाइल स्वार्म) से निपटने में बेहद प्रभावी है. हाल के ऑपरेशन सिंदूर ने आकाशतीर की साख और बढ़ा दी है। 

विदेशी देशों में बढ़ती मांग के कारण
भारत के इन हथियारों की मांग बढ़ने के कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण इनका युद्ध में सिद्ध प्रदर्शन है. साथ ही ये हथियार विश्वसनीय, लागत प्रभावी और आसानी से मेंटेनेंस किए जा सकते हैं।  

कई देश रूस और पश्चिमी हथियारों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं. भारत उन्हें विश्वसनीय विकल्प दे रहा है. भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल और मजबूत डिप्लोमेसी ने भी इन एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा दिया है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट और बढ़ेगा. ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश और आकाशतीर जैसे सिस्टम न सिर्फ राजस्व बढ़ाएंगे बल्कि भारत को वैश्विक डिफेंस प्लेयर के रूप में स्थापित करेंगे. इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को भी मजबूत करेगी। 

मोबाइल रिचार्ज होगा महंगा! Jio, Airtel और Vi 15% तक बढ़ा सकते हैं प्लान की कीमतें

नई दिल्ली
 देश की दूरसंचार कंपनियां अगले तीन से चार महीनों के भीतर मोबाइल रिचार्ज में 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। माना जा रहा है कि टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने और 4जी और 5जी सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना आसान हो गया है।

टेलीकॉम और इंटरनेट पर ब्रोकरेज फर्म सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टेलीकाम बाजार में अब सीमित बड़ी कंपनियां बची हैं, जिससे टैरिफ बढ़ाने की संभावना मजबूत हुई है। अगर ऐसा होता है तो प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के ग्राहकों को ज्यादा भुगतान रना पड़ सकता है।

प्रति यूजर कमाई में 1.5% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद
रिपोर्ट में टेलीकॉम सेक्टर के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का भी अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार जून तिमाही में देश की तीनों बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों यानी जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया के प्रति यूजर होने वाले औसत रेवेन्यू यानी एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) में तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर 1 से 1.5% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

2G से 4G-5G पर शिफ्ट हो रहे हैं ग्राहक
कंपनियों के ARPU में सुधार की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का तेजी से 2G नेटवर्क छोड़कर 4G और 5G नेटवर्क पर जाना है। इसके अलावा, पोस्टपेड ग्राहकों की बढ़ती संख्या से भी प्रति यूजर कमाई में बढ़ोतरी हो रही है।

जियो और एयरटेल के बढ़ेंगे ग्राहक
सेंट्रम की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के यूजर लगातार बढ़ रहे हैं। जून तिमाही में रिलायंस जियो के करीब 70 लाख नए ग्राहक जोड़ने की उम्मीद है। वहीं भारती एयरटेल के ग्राहकों में लगभग 50 लाख की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके मुकाबले वोडाफोन-आइडिया केवल 2 लाख ग्राहक ही जोड़ पाएगी।

अगले 3-4 महीनों में लग सकता है झटका
हाल ही में वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए टेलीकॉम और इंटरनेट सेक्टर पर सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च (Centrum Institutional Research) ने एक प्रीव्यू रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में एक बड़ा दावा किया गया है कि प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर्स अपने प्रीपेड प्लान्स की कीमतों में सीधे 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकते हैं। ग्राहकों के लिए चिंता की बात यह है कि यह बढ़ोतरी लागू होने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा; रिपोर्ट के मुताबिक अगले 3 से 4 महीनों के भीतर ही नए और महंगे प्लान्स बाजार में आ सकते हैं।

आखिर क्यों महंगे हो रहे हैं प्लान्स?
इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह टेलीकॉम कंपनियों की कमाई का गणित है। पिछले एक या दो तिमाहियों से कंपनियों के प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU – Average Revenue Per User) में कोई खास और ठोस उछाल नहीं देखा गया है। इसके अलावा, रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में पिछले दो वर्षों से कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है।

रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि बाजार में अब केवल 3 प्राइवेट और 1 सरकारी खिलाड़ी ही बचे हैं, जिससे प्राइसिंग का माहौल कंपनियों के काफी अनुकूल हो गया है। ऐसे में हमें पूरी उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में टैरिफ में 12 से 15% का इजाफा होगा।

मौजूदा समय में कंपनियों के ARPU में जो थोड़ा-बहुत सुधार दिख रहा है, वह सिर्फ 2G ग्राहकों के 4G/5G नेटवर्क पर शिफ्ट होने और डेटा की खपत बढ़ने की वजह से है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर टेलीकॉम कंपनियों को अपने मुनाफे और ARPU में वास्तविक वृद्धि चाहिए, तो उनके पास टैरिफ बढ़ाने के अलावा कोई और मजबूत विकल्प नहीं है।

सिर्फ महंगा रिचार्ज नहीं, बदल सकता है पूरा सिस्टम
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि इस बार टैरिफ बढ़ोतरी सिर्फ रिचार्ज महंगा करने तक सीमित नहीं रह सकती। कंपनियां प्राइसिंग स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव कर सकती हैं। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग तरह के इस्तेमाल के बावजूद कई यूजर्स एक जैसी कीमत चुकाते हैं। भविष्य में कंपनियां यूसेज-आधारित प्राइसिंग मॉडल अपना सकती हैं। 

5G कवरेज बढ़ने से डेटा का इस्तेमाल बढ़ा
देशभर में 4G और 5G नेटवर्क का दायरा बढ़ने के कारण ग्राहकों का डेटा यूसेज लगातार मजबूत बना हुआ है। रिलायंस जियो और एयरटेल ने देश के 90% से ज्यादा जिलों में अपनी 5G सर्विस पहुंचा दी है। अब इन कंपनियों का पूरा फोकस अपने नेटवर्क पर ज्यादा से ज्यादा 5G स्मार्टफोन को जोड़ने पर है।

इसके साथ ही दोनों कंपनियां 5G FWA (फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस) और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेगमेंट में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, क्योंकि इस बाजार में अभी ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं।

वोडाफोन आइडिया भी बढ़ा रही है दायरा
कमजोर ग्राहक ग्रोथ के बावजूद वोडाफोन आइडिया (VIL) भी देश में अपना 5G नेटवर्क बढ़ा रही है। फिलहाल वोडाफोन आइडिया का 5G नेटवर्क करीब 100 शहरों में पहुंच चुका है और कंपनी इसे तेजी से बढ़ा रही है।

एआरपीयू में ग्रोथ
रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में ग्राहक अब 5जी नेटवर्क की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इसके अलावा पोस्टपेड ग्राहकों की संख्या भी बढ़ रही है। यही वजह है कि दूरसंचार कंपनियों की औसत प्रति ग्राहक आय (एआरपीयू) में जून तिमाही के दौरान 1 से 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नेटवर्क सेवाओं और ज्यादा डेटा इस्तेमाल के कारण कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ रही है। सेंट्रम ने कहा है कि वोडाफोन आइडिया की कीमत पर भारती एयरटेल और रिलायंस जियो बाजार हिस्सेदारी हासिल करना जारी रखेंगे।

अनुमान है कि जून तिमाही में रिलायंस जियो करीब 70 लाख नए ग्राहक जोड़ सकती है। वहीं भारती एयरटेल के साथ लगभग 50 लाख नए ग्राहक जुड़ सकते हैं। वहीं वोडाफोन आइडिया से केवल 2 लाख नए ग्राहक जुड़ने का अनुमान है।

ब्रॉडबैंड सेवाओं की मांग में आई तेजी
ब्राडबैंड सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो और एयरटेल अब देश के 90 प्रतिशत से अधिक जिलों में 5जी सेवाएं उपलब्ध करा चुके हैं। कंपनियां अब ज्यादा से ज्यादा 5जी स्मार्टफोन यूजर्स को अपने नेटवर्क से जोड़ने पर ध्यान दे रही हैं। इसके अलावा 5जी आधारित फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) और ब्राडबैंड सेवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। वोडाफोन आइडिया अपने 5जी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और यह बढ़कर 100 शहरों तक पहुंच गया है। साथ ही कंपनी का एजीआर बकाया भी कम हुआ है।

 

18-19 जुलाई को BJP की बड़ी बैठक! वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक रणनीति पर होगा मंथन

भोपाल
 मध्यप्रदेश की राजनीति में से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। 18 और 19 जुलाई को भाजपा मध्यप्रदेश कार्यसमिति की बड़ी बैठक होगी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा संगठन की यह दो दिवसीय बैठक निवाड़ी के ओरछा में आयोजित होगी। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं समेत पदाधिकारी शामिल होंगे। इस दौरान संगठन को मजबूत बनाने, बूथ स्तर पर काम तेज करने, संगठन के विस्तार समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।

जानकारी के अनुसार, 18 और 19 जुलाई को ओरछा में भाजपा की मध्यप्रदेश प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित होगी। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं समेत प्रदेशभर के पदाधिकारी और कार्यसमिति सदस्य शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में बैठक आयोजित होगी। बैठक में पार्टी संगठन को मजबूत बनाने, बूथ स्तर पर काम तेज करने, संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

इसके अलावा आने वाले संगठनात्मक कार्यक्रमों और राजनीतिक रणनीति पर भी मंथन किया जाएगा। बैठक में 106 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, 41 स्थायी आमंत्रित सदस्य, प्रदेश पदाधिकारी, संभाग और जिला प्रभारी, विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष तथा प्रकोष्ठों के संयोजक भाग लेंगे।

राज्यसभा में BJP का बड़ा गेमप्लान! 3 सीटों पर क्लीन स्वीप कैसे संभव, जानिए 2/3 बहुमत से NDA कितनी दूर

नई दिल्ली

राज्यसभा में NDA का कुनबा और बढ़ सकता है। पश्चिम बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर हो रहे उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत अब लगभग तय हो गई है। इसकी वजह यह है कि मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस से बागी हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया है। उनके मुताबिक टीएमसी किसी भी सीट को जीतने की स्थिति में नहीं है और इसीलिए पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। ऐसे में अब भाजपा का इन सीटों पर क्लीन स्वीप तय है।

गौरतलब कि चुनाव आयोग ने बीते सोमवार को बंगाल की 3 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इन सीटों पर 24 जुलाई को वोटिंग होगी। इससे पहले 14 जुलाई तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे और नाम वापसी की अंतिम तिथि 17 जुलाई है। इससे पहले बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच जून में तृणमूल कांग्रेस के 3 सांसदों, सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने उच्च सदन और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद ये तीनों सीटें खाली हुई थीं।

क्यों उम्मीदवार नहीं उतार रही टीएमसी?
पश्चिम बंगाल में चुनाव के समीकरणों की बात की जाए तो 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 208 विधायकों का समर्थन है। अगर उसके सभी विधायक पार्टी के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उसके पास तीन राज्यसभा सदस्यों को आसानी से चुनने के लिए पर्याप्त संख्या है। इसके अलावा विपक्ष की ओर से किसी भी तरह का क्रॉस-वोटिंग होने से भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी।

उधर, टीएमसी के दोनों गुटों को मिला भी दिया जाए तो उनके विधायकों की संख्या 80 है। लेकिन किसी भी गुट के पास अकेले राज्यसभा सांसद को चुनने के लिए जरूरी न्यूनतम संख्या नहीं है। इसका नतीजा यह है कि आंतरिक विद्रोह के बाद 2 गुटों में बंटी तृणमूल कांग्रेस के चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। इसीलिए टीएमसी ने उम्मीदवार न उतारने का फैसला लिया है।

लगभग 65 विधायकों वाले बागी गुट का नेतृत्व कर रहे विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को उम्मीदवार उतारने से इनकार कर दिया है। ऋतब्रत ने एक बयान में कहा, “ विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए तृणमूल इन तीनों में से कोई भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। हमारे पास उम्मीदवार उतारने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं।”

राज्यसभा में कितनी बढ़ जाएगी ताकत?
वर्तमान में पश्चिम बंगाल की 13 राज्यसभा सीटों में से 3 पर बीजेपी का कब्जा है। अगर भाजपा उम्मीद के मुताबिक उपचुनाव की तीनों सीटें भी जीत लेती है, तो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में उसकी ताकत 3 से बढ़कर 6 हो जाएगी। वहीं तीन सीटें जुड़ते ही उच्च सदन में भाजपा की संख्या 117 और NDA की संख्या 145 तक पहुंच जाएगी। बता दें कि 245 सीटों वाली राज्यसभा में 2 तिहाई बहुमत के लिए 162 वोट जरूरी हैं। NDA के पास खुद 150 से ज्यादा सांसदों का सीधा समर्थन माना जा रहा है। इसके अलावा बीजू जनता दल के पांच, चार निर्दलीय और 7 मनोनीत सांसदों के समर्थन से NDA 2-तिहाई बहुमत का आंकड़ा आसानी से छू सकती है।

विधानसभा मानसून सत्र में BJP का बड़ा गेमप्लान! रणनीति जान विपक्ष भी रहेगा सतर्क

रायपुर
विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने मंत्रियों और विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बार सदन में केवल उपस्थिति दर्ज कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर सदस्य को तथ्यों, आंकड़ों और अपने विधानसभा क्षेत्र की पूरी जानकारी के साथ तैयार रहना होगा।

नवा रायपुर में आयोजित विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों ने करीब डेढ़ घंटे तक संभावित राजनीतिक और विधानसभा की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विपक्ष के किसी भी सवाल या आरोप का जवाब सरकार की ओर से तथ्यों और प्रमाणों के साथ दिया जा सके।

पार्टी नेतृत्व ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं की प्रगति, स्थानीय समस्याओं और उनके समाधान से जुड़ी अद्यतन जानकारी लेकर सदन में पहुंचें। यदि विपक्ष किसी योजना, विभाग या क्षेत्र को लेकर सवाल उठाता है तो उसका जवाब पूरी तैयारी और विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर दिया जाए।

बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। नेताओं को यह संदेश दिया गया कि सदन के भीतर और बाहर सरकार का पक्ष एक समान और स्पष्ट तरीके से रखा जाए, ताकि किसी मुद्दे पर विरोधाभासी बयान सामने न आएं। मीडिया से बातचीत के दौरान भी केवल तथ्यात्मक और प्रमाणित जानकारी साझा करने की सलाह दी गई।

सूत्रों के अनुसार, कानून-व्यवस्था, किसानों के हित, आदिवासी क्षेत्रों का विकास, सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं और राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं रणनीति के केंद्र में रहीं। माना जा रहा है कि विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा, इसलिए पहले से विस्तृत तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

13 से 17 जुलाई तक प्रस्तावित मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस पहले ही कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं, बुलडोजर कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने के संकेत दे चुकी है। ऐसे में भाजपा की कोशिश केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से सदन में प्रस्तुत करने की भी है।

इस बीच रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर बना विवाद भी मानसून सत्र में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। इस प्रकरण पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

हालांकि रणनीतिक बैठक में कुछ वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हो सके। जानकारी के अनुसार, कुछ मंत्री और विधायक पारिवारिक कार्यक्रमों तथा पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण बैठक में उपस्थित नहीं रहे।अब सबकी नजरें मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां सत्ता पक्ष अपनी तैयारियों की परीक्षा देगा और विपक्ष सरकार को विभिन्न जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा।

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