मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5,017 करोड़ रुपये की उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना का करेंगे भूमि पूजन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सड़क अधोसंरचना विकास में 10 जुलाई को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। इस दिन उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन मार्ग परियोजना का भूमि पूजन होगा। लगभग 98.73 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण 5,017 करोड़ रुपये की लागत से मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना उज्जैन दक्षिण, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट एवं जावरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। दो वर्ष में पूर्ण होने वाली इस परियोजना से लगभग 35 लाख आबादी तथा 62 ग्राम प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीनफील्ड फोरलेन मार्ग के निर्माण से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा एवं तेज संपर्क मिलेगा। विशेष रूप से सिंहस्थ-2028 के दौरान राजस्थान, गुजरात तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए यह मार्ग अत्यंत सुगम और सुविधाजनक साबित होगा। साथ ही इंदौर, भोपाल एवं मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी और अधिक सुदृढ़ होगी। परियोजना के अंतर्गत 98.73 किलोमीटर ग्रीनफील्ड फोरलेन मार्ग, 3 रेल ओवरब्रिज, 9 वृहद पुल, 26 मध्यम पुल तथा 417 पुलियों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जावरा बायपास पर दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज से महू–नीमच फोरलेन मार्ग तक दोनों ओर सर्विस रोड का भी निर्माण प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक, व्यापारिक एवं कृषि विकास को नई गति प्रदान करेगी। किसानों को अपनी उपज विभिन्न कृषि उपज मंडियों तक शीघ्र पहुँचाने में सुविधा मिलेगी, वहीं उद्योगों, लॉजिस्टिक्स एवं निवेश गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रा समय एवं ईंधन की बचत होगी तथा सड़क सुरक्षा में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना मध्यप्रदेश की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक है, जिसके पूर्ण होने पर प्रदेश की आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक प्रगति को नई दिशा मिलेगी तथा मालवा क्षेत्र के समग्र विकास को महत्वपूर्ण गति प्राप्त होगी।

 

कृषि और कृषक कल्याण है सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आधारभूत विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में ‘कृषि और कृषक’ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। किसान कल्याण वर्ष में किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हैक्टेयर से अधिक पहुंच गया है, जिससे कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को शाजापुर जिले की कालापीपल तहसील में आयोजित किसान समृद्धि संकल्प सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 30.86 करोड़ रुपए के 12 विकास कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया। इनमें 01 करोड़ 45 लाख 56 हजार रूपये की लागत के 04 कार्यों का भूमि पूजन और 29 करोड़ 39 लाख 92 हजार रूपये लागत के 8 कार्यो का लोकार्पण शामिल है। सम्मेलन में किसान भाइयों ने भावांतर भुगतान योजना एवं केसीसी ऋण चुकाने की अवधि बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का गजमाला से साथ ही हल भेंटकर एवं महिला किसानों ने राखी बांधकर स्वागत एवं अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों को हितलाभ वितरण कर सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान अंतर्गत पौधा भी लगाया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं उपस्थित अतिथियों ने एक पेड़ मॉ के नाम, हर भरा कालापीपल अभियान अंतर्गत 04 लाख पौधे रोपण के लक्ष्य अन्तर्गत कृषि उपज मण्डी प्रांगण में पौध-रोपण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से अधिक से अधिक पौध-रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जनभागीदारी से पौध-रोपण अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कालापीपल क्षेत्र 04 लाख पौधे रोपित करने के लक्ष्य का यह वृक्ष गंगा अभियान का नया रिकॉर्ड बना रहा हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि देने तथा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए गौपालकों को विशेष सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहना योजना अन्तर्गत अब तक लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की राशि प्रदेश की बहनों के खातों में अंतरित की जा चुकी है। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना सहित विभिन्न नदी जोड़ो योजनाओं से लाखों हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इससे शाजापुर सहित अनेक जिलों के किसानों को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शाजापुर जिले के प्रत्येक गांव तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब सिंचाई के लिए रात में खेतों पर नहीं जाना पड़ेगा। सरकार चरणबद्ध तरीके से किसानों को दिन के समय ही सिंचाई के लिये विद्युत उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में किसानों को अब खरीफ और रबी फसल के लिए अलग-अलग ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें पूरे वर्ष के लिए एक ही फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसानों को आर्थिक सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार कृषि लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उद्योगों में बड़े निवेश के साथ युवाओं को सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश तेजी से बढ़ा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचनात्मक के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से विकास कार्यों में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार किसान, महिला, युवा और गरीब सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदरसिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में शाजापुर जिला प्रगति की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि शाजापुर जिला मेडिकल शिक्षा, आयुर्वेदिक और शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा का हब बनने जा रहा है। मंत्री  परमार ने कहा कि शाजापुर में मेडिकल कॉलेज व शुजालपुर में आयुर्वेदिक कॉलेज की सौगात तथा कई सांदीपनि विद्यालय शाजापुर जिले में बनाए जा रहे हैं, इससे शाजापुर जिले के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के लिए अन्य शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।

क्षेत्रीय सांसद  महेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में निरंतर विकास के कार्य किया जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को शाजापुर लोकसभा क्षेत्र में किये जा रहे नए-नए विकास कार्यों के लिए धन्यवाद दिया। कालापीपल विधायक  घनश्याम चंद्रवंशी एवं डॉ. रवि पांडे ने भी सभा को संबोधित किया।

विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को कालापीपल के सम्मेलन में शासकीय हायर सेकण्डरी स्कूल ग्राम भैसायागढ़ा में अतिरिक्त कक्ष 5, बॉयलॉजी, केमेस्ट्री एवं फिजिक्स लेब निर्माण लागत 01 करोड़ 07 लाख 31 हजार रुपए, वार्ड नं. 07 में टीन शेड निर्माण कार्य लागत 9 लाख 22 हजार रुपए, टीन शेड निर्माण वार्ड नं. 01 में कार्य लागत 17 लाख 52 हजार रुपए, वार्ड नं. 04 में सी.सी. रोड निर्माण कार्य लागत 11 लाख 51 हजार रुपए इस प्रकार कुल 01 करोड़ 45 लाख रुपए के कार्यों का भूमि पूजन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत के 06 ग्राम पंचायतों कुमेर, कोलबा, मोहम्मदपुर मछनई, कमालपुर, कांकरिया, गणेशपुर में अटल पंचायत भवन निर्माण, 25 लाख रूपये लागत के सामुदायिक भवन नांदनी, 2 करोड़ 95 लाख 45 हजार रूपये लागत के ग्राम खरदौनकलां ब्लॉक कालापीपल में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन मय जी-01 एवं 01 एच टाईप आदि आवासगृहों का निर्माण, 6 करोड़ा 89 लाख 08 हजार रूपये लागत के शुजालपुर आष्टा मार्ग से अवंतिपुर बड़ोदिया मार्ग (पुल कार्य चैनेज क्रमांक 5900 मीटर), 11 करोड़ा 69 लाख 61 हजार रूपये लागत के भैंसायागढ़ा से पिपल्या नगर मार्ग (पुल कार्य चैनेज क्रमांक 18700 मीटर), 2 करोड़ 95 लाख 45 हजार रूपये लागत के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खरदौनकलां, 2 करोड़ 31 लाख 17 हजार रूपये लागत के खेजड़िया स्टॉप डेम काम काजवे (बैराज), 9 लाख 16 हजार रूपये लागत के वार्ड में 03 आंगनवाड़ी भवन इस प्रकार कुल 29 करोड़ 39 लाख 92 हजार रूपये लागत के कार्यों का लोकार्पण किया।

सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिंह सिसोदिया, नगर परिषद कालापीपल अध्यक्ष  जयप्रकाश अग्रवाल, नगरपालिका शुजालपुर अध्यक्ष मती बबीता परमार, ऊर्जा विकास निगम पूर्व अध्यक्ष  विजेंद्र सिंह सिसोदिया,पूर्व विधायक  जसवंत सिंह हाड़ा, प्रसिद्ध कथावाचक संत  गोविंद जाने, कथावाचक रामस्वरूप मनावर,  महा मंडलेश्वर कल्याणदास जी महाराज,  अम्बाराम कराड़ा,  अशोक नायक,  श्याम टेलर,  विजय बैस, संभागायुक्त  आशीष सिंह, एडीजी  राकेश गुप्ता, डीआईजी  नवनीत भसीन, कलेक्टर सु ऋजु बाफना, पुलिस अधीक्षक मती प्रियंका शुक्ला सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण एवं जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया अभिवादन, हुआ जगह-जगह भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को कालापीपल में रोड शो कर जनता का अभिवादन किया। नगरवासियों ने उनका जगह-जगह ऐतिहासिक एवं भव्य स्वागत किया। पूरे मार्ग पर नागरिकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। रोड शो नायरा पेट्रोल पंप से प्रारंभ होकर  सभा स्थल तक पहुंचा। मार्ग में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों तथा आमजन ने जगह-जगह स्वागत मंच बनाकर मुख्यमंत्री का पुष्प गुच्छ भेंट, पुष्प हार एवं पारम्परिक साफा बांधकर हार्दिक अभिनन्दन किया। बैंड-बाजों की मधुर धुनों और जयघोष के बीच मुख्यमंत्री का नागरिकों ने गर्मजोशी से अभिनंदन किया।

 

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी की जमानत फिलहाल बरकरार, अब इस दिन होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

इंदौर 

इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले मे आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ दाखिल मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब मंगलवार को सुनवाई करेगा. तब तक यानी फिलहाल सोनम रघुवंशी की जमानत पर रिहाई बरकरार रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार 14 जुलाई को करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को सोनम की गिरफ्तारी के समय उसे दिए अरेस्ट मेमो और अन्य दस्तावेजों की कॉपी दायर करने को कहा है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि टाइपो एरर को कोर्ट ने जमानत का आधार बनाकर सोनम को जमानत पर रिहाई दे दी है। 

बता दें, भारतीय न्याय संहिता BNS की धारा 103 की जगह गलती से 403 टाइप हो गया था. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में खुद को बेगुनाह बताया है। 

पहले के दो फैसले देखने होंगे’
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को विस्तार से सुनेगी क्यों कि ये विचार करने का विषय है. अदालत ने कहा कि उसके पहले के दो फैसले हैं. देखना होगा कि दो फैसलों में मतभेद होने के कारण क्या इसे बड़ी बेंच को भेजा जाए. अदालत ने तुषार मेहता से कहा कि वह इसमें लिखित दलीलें दाखिल करें. इस पर तुषार मेहता ने कहा कि यहां ये मुद्दा नहीं है. यहां लिखित में आधार दिए गए थे. हमने सारे दस्तावेज दाखिल किए हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये देखना होगा कि जो आधार दिया गया वो टिकने वाला है या नहीं. अगर आधार गलत है तो जमानत आदेश चला जाएगा। 

आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता
इससे पहले सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है. अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है,जिन्हें अदालत में संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है. केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता इसीलिए अदालत के पास उसकी जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है. वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है. वहीं मेघालय सरकार ने उसकी जमानत रद्द करने की मांग की है। 

सोनम रघुवंशी ने कही सहयोग करने की बात
सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है और ट्रायल में यदि कोई देरी हुई है तो उसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है. सोनम ने अदालत से कहा कि उसे 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और 28 अप्रैल 2026 को वह जेल से रिहा हो गई थी. ऐसे में उसे दोबारा जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि जमानत रद्द करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार इस मामले में मौजूद नहीं हैं। 

जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया
 हलफनामे में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने यह आरोप नहीं लगाया है कि उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है. साथ ही, मामले में अब उससे कोई बरामदगी बाकी नहीं है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.इसलिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी नहीं है. वह फिलहाल जमानत की शर्तों के अनुसार शिलांग में रह रही है। 

‘मुझे झूठा फंसाया गया’
सोनम ने अपने बचाव में यह भी कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है. बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोनम बेल पर बाहर आ चुकी है तो वो उसकी जमानत रद्द करने को इच्छुक नहीं है. हालांकि कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 

सोनम ने अदालत से कहा है कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता। 

हलफनामे में सोनम ने कहा है कि उससे कोई बरामदगी बाकी नहीं है. कोर्ट की ओर से लगाई शर्तों के मुताबिक वो शिलांग में ही रह रही है. इस केस में चार्जशीट पहले ही दायर हो चुकी है. ऐसे में इस बात की कोई संभावना नहीं है कि वो सबूत के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं। 

OPS पर सरकार का बड़ा फैसला, इन सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा पुरानी पेंशन स्कीम चुनने का विकल्प

नई दिल्ली

पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) का इंतजार कर रहे कई कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। ओपीएस की बहाली की मांग लंबे समय कर्मचारी कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार अब तक इस पर राजी नहीं हुई है। अब सरकार के फैसले के बाद कुछ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम चुनने का मौका मिल रहा है। इसकी शुरुआत वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने कर दी है। माना जा रहा है कि अब दूसरे केंद्रीय स्वायत्त संस्थान (Central Autonomous Bodies) भी इसी रास्ते पर चल सकते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब दूसरे केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन का फायदा मिल सकता है?

ये कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन स्कीम
पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर अब वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने भी मुहर लगा दी है। इसके बाद ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलने का रास्ता खुल गया है, जिन्हें अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के तहत नौकरी मिली थी। अनुकंपा नियुक्ति वह नौकरी होती है, जो किसी सरकारी कर्मचारी की सर्विस के दौरान मृत्यु हो जाने या कुछ मामलों में स्थायी रूप से अक्षम होने पर उसके आश्रित परिवार के सदस्य को आर्थिक सहायता के मकसद से दी जाती है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए है, जिन्होंने 1 जनवरी 2004 से पहले अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनकी नौकरी 1 जनवरी 2004 के बाद लगी। क्योंकि उस समय तक नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लागू हो चुका था, इसलिए उन्हें NPS के तहत शामिल कर दिया गया था।

अब केंद्र सरकार ने ऐसे पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम चुनने का विकल्प देने का फैसला किया है। CSIR ने 7 जुलाई 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum) के जरिए इस फैसले को अपने सभी लैब, संस्थानों और इकाइयों में लागू करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, इस फैसले की शुरुआत 22 जून 2026 को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के एक पत्र से हुई थी। इसमें साफ कहा गया था कि जिन परिवार के सदस्य ने 12 दिसंबर 2003 या उससे पहले अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, उन्हें संबंधित मंत्रालय या विभाग पुरानी पेंशन स्कीम का विकल्प दे सकता है।

इससे पहले मार्च 2023 में केंद्र सरकार ने उन कर्मचारियों को एक बार के लिए ओपीएस चुनने का मौका दिया था, जिनकी भर्ती की प्रक्रिया 1 जनवरी 2004 से पहले शुरू हो गई थी, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई। हालांकि, उस समय अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिली थी।

अब CSIR के इस कदम को दूसरे केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों (CABs) के लिए भी मिसाल माना जा रहा है। हालांकि, यह फैसला अपने आप सभी संस्थानों पर लागू नहीं होगा। हर स्वायत्त संस्थान को अलग से केंद्र सरकार के इस आदेश को अपनाना होगा। इसके बाद ही वहां काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को OPS का विकल्प मिल सकेगा।

TMC में बड़ा सियासी मोड़! पार्टी गई, लेकिन खजाने का कंट्रोल फिर ममता बनर्जी के हाथ

कोलकाता
कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन का आदेश दिया है. साथ ही इन लेनदेनों की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया है. खास बात यह है कि बैंक खातों में लेन-देन का ये अधिकार तृणमूल कांग्रेस के ममता गुट को मिला है. TMC पर कब्जे की लड़ाई लड़ रही ममता बनर्जी के लिए ये बड़ी जीत मानी जा रही है. कोर्ट के इस फैसले से पूर्व सीएम ममता बनर्जी को टीएमसी के खाते में मौजूद करोड़ों रुपयों को अदालत की निगरानी में खर्च करने का अधिकार मिल जाएगा। 

कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुब्रता तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया है. जस्टिस सुब्रता तालुकदार कोर्ट के आदेशानुसार केवल तृणमूल कांग्रेस के दो पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित चेक के आधार पर ही खर्च को अधिकृत करेंगे। 

गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि यह अंतरिम उपाय 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट के अनुसार टीएमसी पार्टी को चलाने में होने वाले खर्चे को पूरा करने के लिए इस अकाउंट से पैसे की निकासी खर्च कर सकेगी. हाई कोर्ट के अनुसार विशेष अधिकारी किसी और तरह के खर्च की इजाजत नहीं देंगे। 

TMC के बैंक अकाउंट्स में सीमित लेन-देन की इजाजत देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि अकाउंट्स फ्रीज़ करने का आदेश देने के लिए पुलिस ने जो सबूत दिखाए अदालत उससे संतुष्ट नहीं था। 

हाई कोर्ट ने कहा कि इस अंतरिम चरण में उसे ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो FIR दर्ज होने के तुरंत बाद अकाउंट्स को फ्रीज़ करने के पुलिस के फ़ैसले को सही ठहरा सके। 

बेंच ने कहा, “FIR 18 जून को दर्ज की गई थी और 19 जून को जल्दबाज़ी में अकाउंट्स फ्रीज़ कर दिए गए। इस चरण में, कोर्ट को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि इतने अचानक उठाए गए कदमों का आधार क्या था। 

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस अंतरिम व्यवस्था का मतलब किसी गुट को “असली” तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता देना नहीं होगा; यह मामला अभी भी चुनाव आयोग के पास लंबित है। 

 एक रिपोर्ट के अनुसार TMC की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि डेबिट फ्रीज ने एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के कामकाज को लगभग ठप कर दिया और उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया। 

उन्होंने कहा कि शिकायत अस्पष्ट थी, उसमें खातों को अपराध से हुई कमाई से जोड़ने वाले कोई ठोस आरोप नहीं थे, और उन्होंने बताया कि पार्टी का सारा फंड चुनाव आयोग के नियमों और इनकम टैक्स एक्ट के तहत रेगुलेट होता है। 

चुनाव हारने के बाद ममता के हाथ से पार्टी गई
बता दें कि 4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी में टूट हुई है. पार्टी के 20 सांसदों ने TMC से अलग होकर NCPI में अपना विलय कर लिया है. कोलकाता में TMC के 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग हो गए हैं. ऋतब्रत बनर्जी ही इस TMC का नेतृत्व कोलकाता में कर रहे हैं. ऋतब्रत बनर्जी गुट के TMC ने पार्टी के मुख्यालय पर भी अपना हक जता लिया है. ऐसे में पार्टी खाते से खर्च करने का अधिकार ममता बनर्जी को मिलता बड़ी बात है। 
 

 

श्रम मंत्री की बैठक में बड़ा फैसला- असंगठित श्रमिकों के लिए बनेंगी नई योजनाएं

रायपुर

छत्तीसगढ़ के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा दायरे का विस्तार करने और उनके कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल की प्रथम बैठक संपन्न हुई, जिसमें श्रमिकों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

ई-रिक्शा सहायता योजना का अनुदान दोगुना किया गया

बैठक में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया। इसके तहत ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत वर्तमान में दी जा रही 50 हजार रुपये की अनुदान राशि को बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे श्रमिक आसानी से अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकेंगे      

डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों (गिग वर्कर्स), चरवाहों और मेधावी बच्चों के लिए बनेंगी नई योजनाएं असंगठित क्षेत्र के अलग-अलग वर्गों को सुरक्षा देने के लिए मंडल ने अपने दायरे का विस्तार किया है।  डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों को अब मंडल के दायरे में शामिल करते हुए उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजना तैयार की जाएगी। चरवाहों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक पृथक (अलग) योजना बनाई जाएगी। असंगठित कर्मकारों के प्रतिभावान व मेधावी बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी। श्रमिकों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवर देने के लिए एक व्यापक बीमा योजना तैयार करने पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

*शत-प्रतिशत ई-केवाईसी (e-KYC) और आधार आधारित पंजीयन के निर्देश      

मंत्री लखनलाल देवांगन ने पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों का अनिवार्य रूप से ई-केवाईसी और आधार आधारित पंजीयन किया जाए, ताकि योजनाओं का सीधा और वास्तविक लाभ केवल पात्र श्रमिकों को ही मिल सके। उन्होंने पाम्पलेट और चित्रमय बुकलेट के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा हितग्राहियों के आवेदनों का त्वरित निराकरण करने के भी निर्देश दिए।

इस महत्वपूर्ण प्रथम बैठक में मंडल के सदस्य एवं विधायक चैतराम अटामी, विधायक सुशांत शुक्ला, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, अपर श्रमायुक्त एवं नोडल अधिकारी एस.एल. जांगड़े, श्रम विभाग के उप सचिव विपुल गुप्ता सहित वित्त विभाग एवं भारतीय जीवन बीमा निगम के महाप्रबंधक तथा उप श्रमायुक्त व प्रभारी अधिकारी एस.एस. पैकरा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

43 शिक्षकों से करोड़ों की लोन ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार, लैपटॉप और चेकबुक बरामद

कोंडागांव.

जिले के फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार अब तक इस गिरोह ने 43 शिक्षकों को अपना शिकार बनाया है और उनसे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। हालांकि कुछ पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि बदनामी और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग अब भी सामने नहीं आए हैं। उनका दावा है कि जिले में 150 से 200 शिक्षक इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं।

शिकायतों से खुला करोड़ों की ठगी का राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब फरसगांव निवासी संजय कोडोपी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उन्हें और उनके साथियों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की गई। इसी तरह बड़ेडोंगर निवासी अनंत कुमार निर्मलकर ने करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। वहीं केशकाल क्षेत्र के देवेन्द्र किशोर खवास, योगेश्वर बैद्य सहित अन्य शिक्षकों ने भी करोड़ों रुपये की ठगी की रिपोर्ट पुलिस को दी। इन शिकायतों के आधार पर फरसगांव और केशकाल थानों में कुल चार अलग-अलग अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

ऐसे फंसाए जाते थे शिक्षक
जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। गिरोह पहले शिक्षकों से संपर्क करता और कम समय में कई बैंकों से बड़ी राशि का पर्सनल लोन दिलाने का भरोसा देता। इसके बाद बैंक कर्मचारियों और लोन एजेंटों के माध्यम से अलग-अलग बैंकों में लोन आवेदन करवाए जाते। लोन स्वीकृत होने के बाद शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत राशि दी जाती, जबकि शेष 60 प्रतिशत रकम आरोपियों और उनके सहयोगियों के विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली जाती थी। आरोपी पीड़ितों को भरोसा दिलाते थे कि दो से तीन वर्षों के भीतर पूरा लोन, ब्याज और एचआरए सहित चुका दिया जाएगा। लेकिन कुछ समय बाद आरोपी रकम लेकर फरार हो जाते थे और पूरा कर्ज शिक्षकों के सिर पर छोड़ देते थे।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों से कराया लोन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। कई शिक्षकों के पते में बदलाव कर नकली आधार कार्ड बनवाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों से लोन स्वीकृत कराया गया।

तीन महीने चली तकनीकी और वित्तीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा (आईपीएस) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा के मार्गदर्शन में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय और एसडीओपी केशकाल अरुण नेताम के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ितों और आरोपियों के बैंक खातों का विस्तृत विश्लेषण किया। मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। लगातार तीन महीने तक अलग-अलग जिलों में दबिश देने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार –

  • शिवशंकर दास (अंबिकापुर)
  • दिलीप कुमार सोनी (अंबिकापुर)
  • विरेंद्र तिर्की (जशपुर)
  • श्यामसुंदर जांगड़े (सारंगढ़)
  • अंशुमान सिंह (अंबिकापुर)

जब्त किए गए सामान
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, बैंक चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी और रजिस्टर, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर समेत अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच जारी है।

अन्य जिलों तक नेटवर्क फैले होने की आशंका
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक एजेंटों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की ठगी को अंजाम दे चुका है। इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने बैंकिंग प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार एक बैंक से लिया गया लोन क्रेडिट रिकॉर्ड (CIBIL/Loan Database) में अपडेट होने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लग जाता है। इसी अंतराल का फायदा उठाकर आरोपी पीड़ितों के नाम पर दो से तीन दिनों के भीतर अलग-अलग बैंकों से कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा लेते थे। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सभी बैंकों के बीच रियल-टाइम क्रेडिट वेरिफिकेशन और लोन हिस्ट्री की तत्काल जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि एक ही व्यक्ति को कम समय में कई बैंकों से समानांतर लोन मिलने की संभावना समाप्त हो सके।

महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए बनेगा विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल – मंत्री भूरिया

भोपाल 

मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराधों से संरक्षण तथा उनके कल्याण के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के भोपाल स्थित शासकीय निवास पर गूगल (Google) और ‘अहान फाउंडेशन-रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म’ के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। तकनीक के सकारात्मक उपयोग और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में गूगल की सर्च और जेनरेटिव एआई ट्रस्ट एंड सेफ्टी की डायरेक्टर श्रीमती स्निग्धा भारद्वाज, गूगल के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर (ट्रस्ट एंड सेफ्टी ग्लोबल एंगेजमेंट-APAC) श्री समीर जाधव, अहान फाउंडेशन की फाउंडर व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीमती सोनाली पाटणकर और मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) श्री उन्मेष जोशी उपस्थित रहे।

डिजिटल सुरक्षा हमारा नैतिक दायित्व

महिला एवं बाल विकास मंत्री भूरिया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिला एवं बाल विकास विभाग प्रदेश की आधी से ज्यादा आबादी (महिलाओं और बच्चों) का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में उन्हें इंटरनेट सेफ्टी के प्रति जागरूक करना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुरक्षा और एआई (AI) आधारित महिला एवं बाल संरक्षण वर्तमान समय के बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। आज के युग में मोबाइल और सोशल मीडिया हमारे जीवन को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। हमें एक सकारात्मक और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाकर तकनीक के इस बढ़ते दखल को सही दिशा देनी होगी।  मंत्री भूरिया ने आगामी बैठक में एक विस्तृत संयुक्त कार्ययोजना प्रस्तुत करने का सुझाव भी दिया, ताकि विभाग और गूगल के बीच समन्वय स्थापित कर इंटरनेट को महिलाओं और बच्चों के लिए आसान, सुलभ और उपयोगी बनाया जा सके।

कुपोषण निवारण, साइबर सेफ्टी और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता

इस बैठक में विभाग और गूगल के बीच एक बेहतरीन कार्ययोजना पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसके तहत तकनीक के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए चलाई जा रही शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे और पारदर्शी तरीके से पात्र हितग्राही तक पहुँचाया जाएगा। इसके साथ ही, प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे। इन मॉड्यूल्स में कुपोषण निवारण के आधुनिक तौर-तरीकों के साथ साइबर सिक्योरिटी के बुनियादी नियम भी होंगे, ताकि वे ग्रामीण स्तर पर माताओं और बहनों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए जागरूक कर सकें।

सिंहस्थ 2028 के लिए विशेष AI कार्ययोजना

बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ महापर्व रहा। सिंहस्थ जैसे विशाल जनसमुदाय वाले आयोजन में खोए हुए बच्चों को त्वरित रूप से खोजने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकी समाधानों के उपयोग पर विस्तार से रणनीति बनाई गई। गूगल के सहयोग से एक ऐसी उन्नत ट्रैकिंग और मैपिंग कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों को सुरक्षित और जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुँचाया जा सके।

महाराष्ट्र के सफल मॉडल की तर्ज पर मध्यप्रदेश में काम

गूगल की डायरेक्टर (सर्च और जेनरिटिव AI ट्रस्ट एंड सेफ्टी) श्रीमती स्निग्धा भारद्वाज ने बताया कि गूगल ने पूर्व में महाराष्ट्र में शिक्षकों के लिए बड़े स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एआई के बढ़ते उपयोग के कारण होने वाले अपराधों, जैसे डीपफेक और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से मानसिक प्रताड़ना को रोकने के लिए गूगल निरंतर तकनीकी समाधान और ट्रेनिंग प्रोवाइड करा रहा है। अहान फाउंडेशन की सीईओ श्रीमती सोनाली पाटणकर और सीओओ श्री उन्मेष जोशी ने भी अपने जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र के कई जिलों में महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर काम कर रहे हैं। इस जागरूकता अभियान के कारण कई महिलाएं अपने साथ होने वाले साइबर अपराधों को समय रहते रोकने और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने में सफल रही हैं। मध्यप्रदेश में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। भविष्य में महिला एवं बाल विकास विभाग, गूगल और अहान फाउंडेशन की यह त्रिपक्षीय डिजिटल साझेदारी मध्यप्रदेश की महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित, सशक्त और डिजिटल रूप से साक्षर भविष्य का निर्माण करेगी।

 

शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी और एनीमिया के प्रभावी नियंत्रण के लिए यूनीसेफ के साथ मिलकर करेंगे कार्य : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी और एनीमिया के प्रभावी नियंत्रण के लिए यूनीसेफ के साथ मिलकर करेंगे कार्य : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

जनभागीदारी और विभागीय समन्वय से एनीमिया, शिशु एवं मातृ मृत्यु तथा बाल विवाह जैसी चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण की योजना
यूनीसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की

भोपाल

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल से वल्लभ भवन में यूनीसेफ इंडिया के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में यूनीसेफ इंडिया के उप प्रतिनिधि (कार्यक्रम) श्री जैस्पर मिलर, यूनीसेफ इंडिया की चीफ फील्ड सर्विसेज सुश्री सोलेदाद हेरेरो, यूनीसेफ मध्यप्रदेश के प्रमुख श्री विलियम हैनलोन और मध्यप्रदेश के कम्यूनिकेशन स्पेशलिस्ट श्री अनिल गुलाटी उपस्थित रहे। बैठक में शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी, एनीमिया नियंत्रण, कुपोषण, बाल विवाह की रोकथाम तथा उच्च जोखिम गर्भावस्था के प्रभावी प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को कम करने तथा एनीमिया की चुनौती से निपटने के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। राज्य सरकार जिला स्तर पर विशेषज्ञों की भर्ती कर मानव संसाधन की कमी दूर करने की दिशा में कार्य कर रही है। हीमोग्लोबिन जांच की सुविधा सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने इस कार्ययोजना के निर्माण में यूनीसेफ से तकनीकी सहयोग का आग्रह किया।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यूनीसेफ राज्य के मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता निर्माण में सहयोग कर सकता है, ताकि वे जिलों में प्रशिक्षण देकर उच्च जोखिम गर्भावस्था की समय पर पहचान, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु देखभाल को मजबूत कर सकें। उन्होंने पंचायतों के सहयोग से राज्य स्तरीय जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने यूनीसेफ से ऐसे सरल एवं प्रभावी मुख्य संदेश उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिन्हें जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेतृत्व के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी और विभागीय समन्वय से एनीमिया, शिशु एवं मातृ मृत्यु तथा बाल विवाह जैसी चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता की यूनिसेफ प्रतिनिधि श्री मिलर ने की सराहना

यूनीसेफ इंडिया के उप प्रतिनिधि (कार्यक्रम) श्री मिलर ने शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने इस दिशा में राज्य द्वारा लागू किए जा रहे ‘सुमन रोडमैप’ की प्रशंसा की। साथ ही, राज्य में मदर एंड न्यूबॉर्न चाइल्ड केयर यूनिट्स (एमएनसीयू) की स्थापना की पहल के लिए भी मध्यप्रदेश को बधाई दी। सुश्री सोलेदाद हेरेरो ने कुपोषण और बाल विवाह के परस्पर संबंधों पर चर्चा की।

 

ईरान की शर्तों पर ही खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य, संसद अध्यक्ष ग़ालिबाफ के बयान से बढ़ी वैश्विक चिंता

मॉस्को
 ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका की धमकियों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही दोबारा खोला जाएगा।प्रेस टीवी के अनुसार,  ग़ालिबाफ ने कहा, “अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि धौंस जमाने और अपनी प्रतिबद्धताएं तोड़ने की अब कीमत चुकानी पड़ती है। मैं स्पष्ट कर दूं कि यदि आप हमला करेंगे, तो जवाबी हमला झेलेंगे। व्यर्थ संघर्ष मत कीजिए, इससे आप और गहरे संकट में फंसेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य केवल ईरानी व्यवस्था के तहत खुलेगा, अमेरिकी धमकियों से नहीं।”

 इससे पहले ईरानी मीडिया ने फारस की खाड़ी स्थित अबू मूसा द्वीप तथा ईरान के ईरानशहर, चाबहार, कोनारक, सिरिक, जास्क और बंदर अब्बास शहरों में विस्फोटों की सूचना दी। मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार बंदर अब्बास में वायु रक्षा बलों ने शहर के आसमान में अमेरिकी लक्ष्यों पर गोलीबारी की।
 
अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान पर कई हमले किये थे। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गयी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके बाद कहा कि युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा।

ईरान ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किये।

अल मायदीन टीवी के अनुसार हवाई हमले की चेतावनी के बीच बहरीन में विस्फोटों की आवाजें सुनी गयीं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, “सायरन बजा दिया गया है। नागरिकों और निवासियों से शांत रहने तथा निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने का आग्रह किया जाता है।”

ईरान ने दी नई जानकारी, बढ़ने वाली है भारत की टेंशन!

ईरान ने धमकी दी है कि वह अमेरिकी हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर सकता है। ईरान की सरकारी टीवी ने कहा है कि इस जलडमरूमध्य को अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत कड़ी निगरानी में खोला गया था। तब से होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। हालांकि, मंगलवार को तीन जहाजों पर ईरान के हमलों के बाद हालात बिगड़ गए। बुधवार सुबह अमेरिका ने होर्मुज से सटे ईरान के कम से कम 80 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें रडार साइट, ईरानी नौसेना के ठिकाने, हथियार भंडार जैसे महत्वपूर्ण मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। अगर होर्मुज फिर से बंद होता है तो भारत की टेंशन बढ़ सकती है।

होर्मुज को बंद करेगा ईरान?
सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने एक सूत्र के हवाले से बताया, ईरान केवल अपनी व्यवस्थाओं के तहत ही जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा, जैसा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) में तय किया गया है। सूत्र ने आगे कहा कि अमेरिका के किसी भी हमले के जवाब में ईरान कम से कम दोगुने लक्ष्यों पर हमला करेगा। सूत्र ने बताया, “पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम से पता चलता है कि ईरान होर्मुज नदी के प्रबंधन से पीछे नहीं हटेगा।”

ईरान बोला- करारा जवाब देंगे
इस बीच एक अनाम ईरानी अधिकारी ने कहा है कि किसी भी खतरे का करारा जवाब दिया जाएगा। उस ने कहा कि शासन अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के बीच कोई भेद नहीं करता है। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ दी गई धमकियों का सीधा जवाब देते हुए कहा कि ऐसी धमकियां देने से उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होगा। अधिकारी ने आगे कहा कि वह (ट्रंप) निश्चित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और अंतिम समझौते पर बातचीत दोनों में हार जाएंगे। अब फैसला उनका है।”

ईरानी सेना के 8 जवानों की मौत
ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना के आठ जवान मारे गए। इसमें आगे कहा गया है कि मारे गए सैनिक वायुसेना और नौसेना से संबंधित थे और बंदर अब्बास और बुशहर में हुए हमलों के कारण उनकी मृत्यु हुई। इस बीच नाटो शिखर सम्मेलन के बाद बुधवार को तुर्की के अंकारा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह “शायद आज रात ईरान पर हमला करेंगे”। ट्रंप ने कहा, “मैं थोड़ी चेतावनी दे रहा हूं। हम आज रात उन पर कड़ा प्रहार करने वाले हैं।

होर्मुज के बंद होने से भारत को कितना नुकसान

  •     भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी ज्यादा निर्भर है।
  •     यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक हितों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
  •     भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% से अधिक कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते आयात करता है।
  •     सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, ईरान और कतर से आने वाला तेल और गैस का बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर ही गुजरता है।
  •     होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते में किसी भी रुकावट के आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  •     इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटा पर पड़ता है।
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