महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज! शिंदे के दफ्तर पहुंचे शरद पवार, NCP विधायकों संग बैठक से NDA में शामिल होने की अटकलें

 मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार और उनकी पार्टी के विधायकों के बीच एक बैठक हुई। इस बैठक ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। यह बैठक किसी विपक्षी नेता के दफ्तर में नहीं, बल्कि राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक चेंबर के भीतर हुई। महाविकास अघाड़ी (MVA) के मुख्य स्तंभ शरद पवार को सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के प्रमुख नेता के केबिन में देख राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि बाद में दोनों पक्षों ने इसे महज एक संयोग और शिष्टाचार भेंट बताया।

आपको बता दें कि शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में भाग लेने के लिए विधान भवन परिसर पहुंचे थे।

क्यों चुना गया उपमुख्यमंत्री शिंदे का दफ्तर?
विपक्ष के दिग्गज नेता का सत्ता पक्ष के चेंबर में बैठक करना ही इस पूरे विवाद और चर्चा का केंद्र बना। इस पर सफाई देते हुए एनसीपी (SP) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने कहा कि इस जगह का चुनाव विशुद्ध रूप से व्यावहारिक कारणों से किया गया था और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।

जयंत पाटिल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “पार्टी के विधायक विधान भवन परिसर से जाने से पहले शरद पवार साहब से मिलना चाहते थे। पवार साहब की उम्र को देखते हुए उस कमरे तक वापस पैदल जाना उनके लिए काफी कठिन होता जहां विपक्षी दलों के अधिकांश विधायक बैठते हैं। चूंकि उपमुख्यमंत्री शिंदे का केबिन निकास द्वार के बिल्कुल पास स्थित है, इसलिए हमने सोचा कि पवार साहब के लिए लंबी दूरी तक पैदल चलने से बचने के लिए यह केबिन सबसे सुविधाजनक रहेगा।”

पाटिल ने यह भी साफ किया कि जब शरद पवार वहां पहुंचे तब एकनाथ शिंदे अपने दफ्तर में मौजूद नहीं थे। पाटिल ने कहा, “मैंने ही पवार साहब को हमारे विधायकों से मिलने के लिए वहां बैठने का सुझाव दिया था। जब शिंदे को पवार साहब की मौजूदगी का पता चला तो वे भी वहां आए और सम्मानपूर्वक 10 मिनट तक उनसे मुलाकात की।”

संजय राउत ने कहा- गद्दार नेताओं को इज्जत दे रहे…

NCP फाउंडर शरद पवार मीटिंग के लिए विधान भवन गए थे. उस समय उन्होंने डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे के ऑफिस में अपनी पार्टी की मीटिंग की थी. एकनाथ शिंदे भी कैबिनेट मीटिंग छोड़कर शरद पवार के स्वागत के लिए कैबिन में आ गए थे. अब इस बारे में बोलते हुए ठाकरे ग्रुप के MP संजय राउत ने कड़ी नाराजगी जताई. संजय राउत ने कहा, शरद पवार गद्दार नेताओं को इज्जत दे रहे हैं। 

संजय राउत ने कहा कि शरद पवार एक बड़े नेता हैं. लेकिन एकनाथ शिंदे, जिन्होंने महाराष्ट्र को करप्शन और धोखे के कीड़े से इंफेक्टेड कर दिया है, उनके कैबिन में मीटिंग करना ठीक नहीं है. क्या पूरा विधान भवन खाली नहीं था? विधान भवन एरिया के सामने एक राष्ट्रवादी भवन और एक शिवसेना भवन है. इससे राष्ट्रवादी शरद चंद्र पवार पार्टी की क्रेडिबिलिटी कम होती है। 

संजय राउत ने कहा, अगर हम अजित पवार के हॉल में जाकर मीटिंग करते, तो इसका मतलब होता कि हम MVA के खिलाफ गए. इसलिए, MVA के घटक दलों को नियमों का पालन करना चाहिए। 

शिंदे के केबिन में हुई बैठक से क्यों मची हलचल?

    महाराष्ट्र विधान भवन में शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे. समिति की बैठक खत्म होने के बाद वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे. यहीं एनसीपी (एसपी) के विधायक भी उनसे मिलने पहुंचे और बैठक हुई. इसी घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की अटकलों को जन्म दे दिया. इसके बाद एकनाथ शिंदे ने शरद पवार का शॉल और गुलदस्ता देकर स्वागत किया. हालांकि दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। 

    एनसीपी (एसपी) नेताओं ने बाद में साफ किया कि पहले पार्टी विधायकों की बैठक हुई और उसके बाद शिंदे वहां पहुंचे. उनका कहना था कि बैठक के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था. जयंत पाटिल ने बताया कि शरद पवार को विधानसभा परिसर के भीतर लंबी दूरी तक चलने में दिक्कत होती है. इसलिए विधायकों से मिलने के लिए शिंदे का केबिन सबसे सुविधाजनक स्थान था। 
    उन्होंने कहा, ‘पवार साहेब के लिए विपक्ष के विधायकों के कमरे तक वापस पैदल जाना मुश्किल होता. इसलिए हमने सोचा कि निकास द्वार के पास स्थित एकनाथ शिंदे का केबिन सुविधाजनक रहेगा, जिससे उन्हें ज्यादा चलना नहीं पड़े। 

    जयंत पाटिल ने आगे स्पष्ट किया, ‘जब पवार साहेब वहां पहुंचे, तब एकनाथ शिंदे अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे. मैंने पवार साहेब से कहा कि वे यहीं बैठकर हमारे विधायकों से मुलाकात कर लें. बाद में जब शिंदे को पता चला कि पवार साहेब आए हैं, तो वह करीब दस मिनट के लिए उनसे मिलने पहुंचे.’ बैठक की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। 

शिंदे खेमे ने बताया शिष्टाचार मुलाकात
    एकनाथ शिंदे खेमे ने भी किसी राजनीतिक संदेश से इनकार किया. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री उदय सामंत ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना राज्य की राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है. उन्होंने कहा, ‘शरद पवार देश के वरिष्ठ नेता हैं. यदि वे हमारे नेता एकनाथ शिंदे के कार्यालय आते हैं तो उनका सम्मान करना और स्वागत करना महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 
    उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुलाकात को महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद समिति की बैठक के बाद हुई ‘शिष्टाचार मुलाकात’ बताया गया। 

एनडीए में जाने की अटकलों पर एनसीपी (SP) का जवाब
बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की होने लगी कि क्या शरद पवार किसी नए राजनीतिक समीकरण की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि एनसीपी (एसपी) ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा, ‘शरद पवार साहेब महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर बनी समिति की बैठक में शामिल होने आए थे. इसके बाद हमने अपने विधायकों, सांसदों और नगरसेवकों के साथ बैठक की. विधानसभा सत्र के दौरान पवार साहेब यहां मौजूद हैं, इसलिए उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की. एनडीए में शामिल होने या किसी अन्य पार्टी में विलय की जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। 

उन्होंने कहा कि इस बैठक का किसी राजनीतिक बदलाव से कोई लेना-देना नहीं है और पार्टी महा विकास अघाड़ी का हिस्सा बनी हुई है। 

शिंदे गुट की क्या थी प्रतिक्रिया
इस मुलाकात के बाद उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में इसे केवल एक शिष्टाचार भेंट बताया गया। समिति की बैठक खत्म होने के बाद जब शरद पवार वहां पहुंचे तो एकनाथ शिंदे ने शॉल और बुके देकर वरिष्ठ नेता का स्वागत किया। महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने कहा, “शरद पवार देश के बेहद वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे नेता एकनाथ शिंदे के कार्यालय में आते हैं तो उनका सम्मान और स्वागत करना महाराष्ट्र की समृद्ध राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है। इसमें कुछ भी गलत या असामान्य नहीं है।”

एनडीए में शामिल होने की अटकलें खारिज
इस बैठक की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जाने लगे कि क्या विपक्षी दल सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ किसी नए राजनीतिक समीकरण या समझौते की संभावना तलाश रहा है। शरद पवार की एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इन तमाम अफवाहों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने किसी भी तरह से एनडीए (NDA) में शामिल होने या किसी अन्य दल में विलय की खबरों को पूरी तरह से झूठ बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “पवार साहब यहां विधानसभा सत्र के दौरान आए थे, इसलिए उन्होंने हमारे विधायकों, सांसदों और पार्षदों के साथ बातचीत की। एनडीए में जाने या पार्टी विलय की अटकलें पूरी तरह से निराधार और असत्य हैं।”

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने “जोहार जगन्नाथ रथ” को झंडा दिखाकर किया रवाना

रायपुर

श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी रथ

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने आज अपने नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय से “जोहार  जगन्नाथ रथ” को झंडा दिखाकर रवाना किया। विधायक  दीपेश साहू भी इस दौरान मौजूद थे।

श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी रथ

माय एफएम 94.3 और एटी ज्वेलर्स द्वारा तैयार यह रथ प्रदेश के श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी। श्रद्धालु अपनी मनोकामना व प्रार्थना लिखकर इस रथ के कलश में समर्पित कर सकेंगे, जिसे 94.3 माय एफएम की टीम  जगन्नाथ धाम तक लेकर जाएगी। यह अभिनव पहल भगवान  जगन्नाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और मनोकामनाओं को उनके पावन धाम तक पहुँचाने का सुंदर माध्यम बनेगी। 

बस्तर की मातृशक्ति आज समाज में बदलाव की सशक्त वाहक- वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर 

बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में गुरुवार को आयोजित ‘दीदी के गोठ’ के 12वें संस्करण में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और आजीविका संवर्धन की प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से आई हजारों महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान लखपति दीदियों की सफलता की कहानियों ने महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वरोजगार के प्रति नया उत्साह जगाया।

महिलाएं बन रही हैं बदलाव की ताकत : केदार कश्यप
       
वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की मातृशक्ति ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए आज समाज में परिवर्तन की सशक्त भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होता है, जब महिलाएं उन्हें अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना, मध्याह्न भोजन योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से बस्तर की महिलाएं आज आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हो रही हैं।

सरकारी योजनाओं से बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी          

बस्तर सांसद  महेश कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज का विकास महिलाओं के सशक्तिकरण पर निर्भर करता है। उन्होंने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), लखपति दीदी योजना, महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है।

स्वरोजगार से बदल रही महिलाओं की जिंदगी
       
चित्रकोट विधायक  विनायक गोयल ने कहा कि बस्तर की महिलाएं अब केवल परिवार की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं। वे मुर्गीपालन, बकरीपालन, मत्स्यपालन, सब्जी उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  वेदवती कश्यप ने भी महिलाओं की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

लखपति दीदियों का हुआ सम्मान
          
कार्यक्रम में चपका की  नीतू झा, सुलेंगा की  सुगनी कश्यप और इरपा की  हेमबती नाग सहित कई सफल लखपति दीदियों को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण-पत्र और सहायता राशि के चेक भी प्रदान किए गए।

बिहान योजना से मिली नई पहचान
           
कार्यक्रम में कोंडागांव जिले की  नम्रता पटेल ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज और 5 लाख रुपये के ऋण की सहायता से उन्होंने अपने ‘अमृत तुल्य’ चाय एवं नाश्ता कैफे का विस्तार किया। आज उनके कैफे से प्रतिदिन लगभग 5 हजार रुपये की आय हो रही है।

आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में मजबूत कदम       

कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने सरकारी योजनाओं से मिले लाभ और अपने अनुभव साझा किए। संवाद, सम्मान और प्रेरणा से भरपूर यह आयोजन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर बस्तर के संकल्प को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर  आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  प्रतीक जैन सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।

निर्माण कार्यों में मॉनीटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में लापरवाही पर सहायक अभियंता और उप अभियंता को तत्काल निलंबित करने के निर्देश

रायपुर

उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के निर्देश पर बोड़ला विकासखंड के दलदली मेन रोड खारिया से अगरी तक प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत निर्मित सड़क के धंसने की शिकायत के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराने के लिए कोर कटिंग कराई गई तथा विभिन्न तकनीकी मानकों पर सड़क की जांच की गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि नवनिर्मित सड़क हैवी लोड वाहनों के आवागमन के कारण क्षतिग्रस्त हुई। जिस सड़क पर केवल 10-12 टन क्षमता वाले वाहनों के संचालन की अनुमति है, वहां 60-70 टन क्षमता तक रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों के संचालन और शोल्डर निर्माण में तकनीकी खामी से सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।

सहायक अभियंता और उप अभियंता को तत्काल निलंबित किए जाने के दिए निर्देश 

सचिव  सिंह ने दलदली मेन रोड खारिया से अगरी तक निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने के कारण ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों में मॉनीटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे रितेश नायडू को तत्काल निलंबित किया गया। वहीं कार्यपालन अभियंता संतोष कुमार ठाकुर को निलंबित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सड़क का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त है उसे उखाड़कर पुनः बनवाने के निर्देश अधिकारियों को दिये गये हैं। वहीं पूरी सड़क के शोल्डर को गुणवत्तापूर्ण निर्माण के साथ सुधार करवाने के निर्देश दिये गये हैं।

ओवरलोड वाहन और शोल्डर निर्माण में खामी बना सड़क धंसने का मुख्य कारण     

जांच के दौरान अन्य तकनीकी मानकों का परीक्षण भी किया गया, जिसमें कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाया गया। जीएसबी एवं डब्ल्यूबीएम परतों के परीक्षण में ग्रेडेशन तथा कम्पैक्शन संतोषजनक रहा। वहीं बीटी कार्य के तहत पीएमसी एवं सील कोट के लिए किए गए बाइंडर कंटेंट  परीक्षण में 6 प्रतिशत परिणाम प्राप्त हुआ, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप है। तकनीकी जांच के दौरान यह पाया गया कि सड़क के शोल्डर का कॉम्पैक्शन निर्धारित मापदंड (100 प्रतिशत) से कम था। आर.डी. 1400 मीटर पर यह 95 प्रतिशत और आर.डी. 2100 मी. पर केवल 94.68 प्रतिशत पाया गया, जो कि मानकों से कम है। जांच में आर.डी. 1400 मी. पर निर्मित पुलिया के एप्रोच में बैकफिलिंग (मिट्टी भराई) का कार्य भी मापदंड के अनुसार नहीं किया गया था। इस वजह से वर्षाऋतु में बारिश का पानी शोल्डर से होते हुए सड़क के सब-बेस (निचली सतह) में घुस गया, जिससे सड़क के अंदरूनी हिस्से कमजोर हो गए।

पीएम जनमन की सड़क पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित किया जाएगा

सचिव  भीम सिंह ने कहा कि पीएम जनमन की सड़क पर भारी वाहनों का संचालन प्रतिबंधित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सड़क की क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के चलने से सड़क को नुकसान पहुंचा है। ऐसे वाहनों के आवागमन को रोकने के लिए परिवहन, पुलिस और राजस्व विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे। इस अवसर पर अधिक्षण अभियंता  अखिलेश तिवारी,  बलवंत पटेल,  अमित गुलहरे कार्यपालन अभियंता  संतोष ठाकुर, सहायक अभियंता  सौरभ देशमुख  मुरारी साहू, उप अभियंता जे रितेश नायडू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की हुई समीक्षा

रायपुर

छत्तीसगढ़ में नवीन श्रम संहिताओं (New Labour Codes) के प्रभावी क्रियान्वयन और श्रमिक कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. महेन्द्र कुमार ने गुरुवार को राज्य में चल रही प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। नया रायपुर स्थित ‘छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ के सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में श्रम कानूनों को धरातल पर उतारने को लेकर गंभीर मंथन किया गया।

चारों प्रमुख श्रम संहिताओं पर हुई चर्चा 
             
बैठक के दौरान केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित चारों नवीन श्रम संहिताओं के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा अब तक जारी की गई अधिसूचनाओं और उनके अनुपालन की बिंदुवार समीक्षा की गई, वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019)औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020)सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020)व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य-परिस्थितियाँ संहिता, 2020 (OSH Code, 2020)।  बैठक में राज्य के अधिकारियों ने केंद्र सरकार को अवगत कराया कि इन नवीन संहिताओं को छत्तीसगढ़ में सुचारू रूप से लागू करने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। 

श्रमिक हितों और डिजिटल पहलों पर विशेष जोर 
     
समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग के अधिकारियों ने राज्य में श्रमिकों के हित में चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा के विस्तार की जानकारी दी। संयुक्त सचिव को विभाग द्वारा अपनाई गई आधुनिक डिजिटल पहलों और तकनीकी नवाचारों (Digital Initiatives) से भी रू-ब-रू कराया गया। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि नई व्यवस्था के आने से श्रम प्रशासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनेगा, जिससे श्रमिकों के हितों का बेहतर संरक्षण हो सकेगा।

जल्द पूरे होंगे राज्य के नियमों के निर्माण कार्य
     
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की संहिताओं के अनुरूप राज्य के स्तर पर नियमों (Rules) के निर्माण की प्रक्रिया को शीघ्र ही अंतिम रूप देकर इन्हें प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा। इस पहल से छत्तीसगढ़ के लाखों श्रमिकों के साथ-साथ नियोजकों (Employers) को भी नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों का लाभ समयबद्ध, सरल और सुगम तरीके से मिलना शुरू हो जाएगा। 

           
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग की ओर से  एस.एल. जांगड़े, सविता मिश्रा,  गिरीश रामेटेके,  अजीतेश पाण्डेय,  एस.एस. पैकरा,  डी.पी. तिवारी,  बी.एस. बरिहा,  मनीष वास्तव,  विवेक चेलकर, श्रद्धा केशरवानी एवं  देवेन्द्र देवांगन उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के प्रतिनिधि के रूप में  साकेत कुमार पाण्डेय,  भूपेन्द्र कुमार,  रोहित गुप्ता,  गौरव डोगरा,  अखिलेश राय,  सौरभ त्यागी, सु जयंती सिंह सहित केंद्र व राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी सम्मिलित हुए।

एक वर्ष में 12 एपिसोड के माध्यम से हजारों महिलाओं तक पहुँची सफलता की कहानियां

रायपुर

‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए प्रेरणा का सशक्त माध्यम बन गया है। इस कार्यक्रम के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भरता, आजीविका, नवाचार और स्वरोजगार से जुड़ी अत्यंत रोचक एवं प्रेरक जानकारियां मिल रही हैं। एक सफल दीदी की कहानी हजारों अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है और यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘दीदी के गोठ’ वार्षिकोत्सव-2026 एवं संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर ‘दीदी के गोठ’ कॉफी टेबल बुक, ‘बिहान वाणी’ त्रैमासिक पत्रिका तथा ‘मोर गांव मोर पानी’ पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा करने वाली दीदियों को सम्मानित किया तथा ‘दीदी के गोठ’ के 12 एपिसोड पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन कर महिलाओं से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ऑडिटोरियम परिसर में आयोजित ‘दीदी के गोठ’ फोटो गैलरी का अवलोकन किया तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद कर उनके नवाचारों एवं आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दुर्ग जिले से वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं लखपति दीदी  विद्या निषाद से चर्चा की।  निषाद ने बताया कि कोरोना काल में पति के निधन के बाद उन्हें बिहान समूह से प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कपड़े एवं फैंसी स्टोर का व्यवसाय शुरू किया और आज प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘दीदी के गोठ’ ने एक वर्ष का सफल सफर पूरा कर लिया है और अब तक 12 एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को एक सफल दीदी अपनी संघर्ष एवं सफलता की कहानी स्वयं अपनी बोली में साझा करती है, जिससे प्रदेशभर की महिलाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप माना गया है। वेदों में कहा गया है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।” आज महिलाएं बिहान से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। कोई ड्रोन दीदी बनी है, कोई राजमिस्त्री, कोई ऑर्गेनिक खेती कर रही है, तो कोई सेटरिंग प्लेट , पशुपालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की लखपति दीदियां आने वाले समय में करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान आरंग क्षेत्र के भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां मातृशक्ति द्वारा संचालित ‘गोट यूनिट’ में बकरी, मुर्गी एवं मछली पालन का एकीकृत मॉडल विकसित किया गया है, जिससे वह लखपति बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को ढाई वर्षों में पूरा किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश को 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली, जिनमें से 11 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। अब तक 28 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 प्रारंभ की है, जहां नागरिक बिजली, पानी, राजस्व, पुलिस सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लगभग 8 हजार अधिकारी कार्य कर रहे हैं तथा वे स्वयं इसकी नियमित समीक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से दो वर्षों से बकाया बिजली उपभोक्ताओं को सरचार्ज में राहत प्रदान की जा रही है, जिसके तहत अब तक 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि माफ की जा चुकी है।

उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि ‘दीदी के गोठ’ महिलाओं के लिए ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का मंच बन चुका है। राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में बिहान समूहों की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश में 11 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा इसके लिए राज्य सरकार ने 26 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से ‘36 कला’ ब्रांड विकसित किया गया है। राज्य सरकार सभी समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे महिलाएं अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकें और उन्हें अपने परिश्रम का पूरा लाभ मिले। उन्होंने खैरागढ़ की ड्रोन दीदी का उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाएं बेहतर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बैंक सखी, पशु सखी, सीएससी संचालन तथा अन्य गतिविधियों के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की भूमिका और अधिक बढ़ेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं समूहों के माध्यम से आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बन रही हैं। महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज, प्रदेश और राष्ट्र के विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को लखपति से करोड़पति बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘दीदी के गोठ’ के माध्यम से प्रदेशभर की महिलाओं तक नवाचार, सफलता और स्वरोजगार की प्रेरक कहानियां पहुंच रही हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

एक वर्ष में 12 एपिसोड, प्रेरणा और नवाचार का सशक्त मंच

‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम का प्रसारण 31 अगस्त 2025 से प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को किया जा रहा है। कार्यक्रम से प्रदेश के 25 जिलों की 38 दीदियां जुड़ी हुई हैं, जो अपनी स्थानीय बोली में नवाचार, आजीविका और सफलता की कहानियां साझा करती हैं। आज 9 जुलाई को कार्यक्रम का 12वां एपिसोड प्रदेशभर में प्रसारित किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत अब तक प्रसारित 12 एपिसोड में लखपति दीदी, नियद नेल्ला नार, वनोपज संग्रहण, प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं की भागीदारी, सरस मेला, ड्रोन दीदी, कृषि सखी एवं पशु सखी, नई चेतना 4.0, वित्तीय समावेशन, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, जनप्रतिनिधि बनीं महिलाओं की सफलता की कहानियां, लाइवस्टॉक, साइबर अपराध एवं बैंकिंग फ्रॉड से बचाव, ‘छत्तीसगढ़ कला’ ब्रांड तथा ‘दीदी के गोठ’ की एक वर्ष की प्रेरणादायी यात्रा जैसे विषयों पर जानकारी प्रसारित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष  संदीप यदु, गुरु सौरभ साहेब, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव  ऋचा शर्मा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के संचालक  तारन प्रकाश सिन्हा,  छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के मिशन संचालक  अश्वनी देवांगन सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में बिहान की दीदियां उपस्थित थीं।

शिक्षा में निवेश, आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

​​रायपुर

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में जिला खनिज न्यास निधि से विभिन्न विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत बलौदाबाजार, पलारी और सिमगा विकासखंड के कई स्कूलों में नए किचन शेड, अतिरिक्त कक्षाएं और प्रार्थना शेड बनाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर होगी। 

जिले के कई सरकारी स्कूल लंबे समय से बैठक व्यवस्था (स्थान की कमी), मध्याह्न भोजन पकाने के लिए सुरक्षित जगह और खराब मौसम जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। डीएमएफ से स्वीकृत ये नए कार्य न केवल इन कमियों को दूर करेंगे, बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

​विकास कार्यों का लेखा-जोखार- कहां, क्या और कितना हुआ स्वीकृत
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बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जिला खनिज न्यास निधि से विकास कार्यों की सिलसिलेवार स्वीकृतियां दी गई हैं। इसकी शुरुआत 12 जून 2026 को सिमगा विकासखंड के अंतर्गत परसवानी और भालेसुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में प्रार्थना शेड निर्माण के लिए क्रमशः 10-10 लाख रुपये जारी किए गए, जबकि इसी विकासखंड की फूलवारी और तिल्दाबांधा प्राथमिक शालाओं में दो-दो अतिरिक्त कमरों के लिए भी 20 लाख रुपये (10-10 लाख रुपये प्रति स्कूल) की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।

इसके बाद 18 जून 2026 को बलौदाबाजार विकासखंड के प्राथमिक शाला चिचोली, मगरवाय, केशडबरी, और पूर्व माध्यमिक शाला खम्हरिया-चापा व धवई में 5-5 लाख रुपये की लागत से कुल पांच किचन शेड मंजूर किए गए। इसी तारीख को करमनडीह और खम्हरिया यदु की प्राथमिक शालाओं में दो-दो अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए 10-10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।

अधोसंरचना विकास की इस कड़ी में 07 जुलाई 2026 को मिली, जिसमें सिमगा और बलौदाबाजार विकासखंड के 10 गांवों चंडी, फरहदा, केसली, मटिया,रवेली,भाटागांव, खैरघटा, कोलियारी, कुकुरदी और मगरवाय के स्कूलों को शामिल किया गया। इन सभी 10 शिक्षण संस्थानों में दो-दो अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए प्रति स्कूल 10 लाख रुपये के मान से कुल 1करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है, जिससे बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर और पर्याप्त स्थान मिल सकेगा।

शिक्षा को आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना हमारा संकल्प- मंत्री टंक राम वर्मा

​इस महत्वपूर्ण सौगात पर प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का विजन सिर्फ भवनों का निर्माण करना नहीं, बल्कि सुदूर गांवों तक ऐसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना ह,ै जो बच्चों के लिए शिक्षा के मार्ग को सुगम, सुरक्षित और सम्मानजनक बना सकें। ​उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि का असली हकदार स्थानीय समाज है। हमारी सरकार खनिज प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए इस पैसे का सीधा लाभ वहां के बच्चों तक पहुंचा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में किया जा रहा यह निवेश आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के निर्माण में निवेश है। जब बच्चों को बैठने के लिए अच्छे कमरे, मध्याह्न भोजन के लिए स्वच्छ किचन और प्रार्थना के लिए व्यवस्थित शेड मिलेगा, तो स्कूलों की उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों में सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा।

खरीदे गए गेहूँ में पायी गई कमी के कारणों की पहचान करने के लिये जिला उपार्जन समितियों दिये निर्देश

भोपाल 

रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं खरीदी के बाद खरीदे गये गेहूं में कमी की जानकारी सामने आने पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत द्वारा अपर मुख्‍य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी को गेहूं की खरीदी में पाई गई कमी की गहन समीक्षा करने एवं कमी के कारणों की पहचान कर संबंधित समितियों एवं परिवहनकर्ताओं से उसकी पूर्ति कराने के निर्देश दिये गये हैं।

इन निर्देशों के अनुक्रम में अपर मुख्‍य सचिव खाद्य ने सभी जिला कलेक्‍टरों को निर्देश दिये हैं कि कमी के संबंध में जिला उपार्जन समिति कारणों का पता लगाये एवं कमी की पूर्ति के लिए संबंधित समितियों अथवा परिवहनकर्ताओं से वसूली की कार्यवाही सुनिश्चित करे।

समर्थन मूल्‍य पर गेहूं की खरीदी में तुलाई, परिवहन, भंडारण आदि के हैंडलिंग कार्य में उपार्जित किये गये गेहूं की मात्रा में प्रति क्विंटल कुछ कमी आना एक सामान्‍य प्रक्रिया है। पिछले वर्षों में प्रति क्विंटल औसतन 176 ग्राम कमी देखने में आती थी। जबकि इस वर्ष गेहूं की खरीदी में 70 ग्राम प्रति क्विंटल की कमी देखने में आई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। यह भी गौरतलब है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गेहूं की खरीदी लगभग 30 प्रतिशत अधिक होने के बाद भी प्रति क्विंटल गेहूं की खरीद में कमी की मात्रा काफी कम रही है।

प्रदेश में समर्थन मूल्‍य पर गेहूं खरीदी का कार्य पंजीकृत सहकारी समितियों के साथ पंजीकृत स्‍व-सहायता समूह के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम के माध्‍यम से होता है। गेहूं खरीदी का कार्य सीधे तौर पर नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा नहीं किया जाता है।

प्रदेश में समर्थन मूल्‍य पर गेहूं की खरीदी का समस्‍त कार्य जिला कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता के गठित जिला स्‍तरीय उपार्जन समिति के माध्‍यम से किया जाता है। यह एक सामान्‍य प्रक्रिया है कि गेहूं की खरीद में पाई गई कमी की प्रतिपूर्ति जिला स्‍तरीय उपार्जन समिति द्वारा ही संबंधित समितियों/परिवहनकर्ताओं से वसूली कर की जाती है। जिला स्‍तरीय समिति द्वारा यह सुनिश्‍चित किया जाता है कि जिले में उपार्जित गेहूं में शासन को किसी प्रकार की आर्थिक क्षति न होने पाये।

अन्‍य जिलों की तरह सागर जिले में भी वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्‍य पर लगभग 49 हजार से अधिक किसानों से लगभग 36 लाख 20 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी की गई है । यद्यपि सागर जिले में पिछले वर्षों में औसतन रूप से प्रति क्विंटल 510 ग्राम गेहूं की कमी देखी गई है, जबकि इस वर्ष 318 ग्राम प्रति क्विंटल कमी देखने में आई है। जो गतवर्ष की तुलना में लगभग 192 ग्राम प्रति क्विंटल कम रही है। वर्तमान में प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्‍तरीय उपार्जन समिति द्वारा कमी की पहचान एवं सत्‍यापन की कार्यवाही की जा रही है। तदोपरांत वास्‍तविक कमी से संभावित आर्थिक क्षति की वसूली सहकारी समितियों एवं स्‍व-सहायता समूहों तथा परिवहनकर्ताओं से की जायेगी।

 

पुलिस सैलरी पैकेज योजना से दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को मिला आर्थिक संबल

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कल्याण तथा उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित पुलिस सैलरी पैकेज (PSP) योजना के अंतर्गत जिला दमोह में पदस्थ दिवंगत दो पुलिसकर्मियों के आश्रित परिवारों को 1-1 करोड़ रूपए की दुर्घटना बीमा दावा राशि प्रदान की गई।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय दमोह में आयोजित विशेष कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक  आनंद कलादगी ने दिवंगत प्रधान आरक्षक  शमीम खान एवं दिवंगत आरक्षक  भूपेंद्र ठाकुर के आश्रित परिजनों को 1-1 करोड़ रूपए की सहायता राशि के चेक प्रदान किए।

दिवंगत प्रधान आरक्षक  शमीम खान एवं आरक्षक  भूपेंद्र ठाकुर का जून 2025 में दुर्घटना के उपरांत उपचार के दौरान दुखद निधन हो जाने पर उनके वेतन खाते भारतीय स्टेट बैंक में पुलिस सैलरी पैकेज योजना से संबद्ध होने के कारण उनके नामांकित उत्तराधिकारी को दुर्घटनावश मृत्यु बीमा के रूप में 1-1 करोड़ रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सभी पुलिस कर्मियों को पुलिस वेतन पैकेज खाता के जरिए अनेक वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें एक करोड़ रुपये का आकस्मिक मृत्यु बीमा, होम लोन पर विशेष ब्याज दरें, मुफ्त डेबिट कार्ड और बीमा परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा कवच शामिल हैं।

पुलिस परिवहन शोध संस्थान का प्रदेशव्यापी विशेष स्कूल बस चेकिंग अभियान

भोपाल 

प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित एवं व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस एवं परिवहन विभाग के समन्वय से 08 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक “विशेष स्कूल बस चेकिंग अभियान” संचालित किया जा रहा है। दस दिवसीय इस अभियान के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में स्कूल बसों, वैन एवं अन्य स्कूली वाहनों का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य स्कूली वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई करना है।

अभियान के अंतर्गत वाहनों की फिटनेस, वैध परमिट, पंजीयन, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र (PUC), चालक का वैध ड्राइविंग लाइसेंस, परिचालक की उपलब्धता,  जीपीएस, फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, आपातकालीन निकास, सीसीटीवी (जहां लागू हो), निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों का परिवहन तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही चालक के आचरण, वाहन संचालन की सुरक्षित पद्धति एवं मोटरयान अधिनियम तथा केंद्रीय एवं राज्य सरकार द्वारा स्कूल वाहनों के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की जाएगी।

जांच के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार चालानी कार्रवाई सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि स्कूली बच्चों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।

बस संचालकों से अपील

मध्यप्रदेश पुलिस ने सभी बस संचालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों में निर्धारित सभी सुरक्षा उपकरण सदैव क्रियाशील एवं अद्यतन रखें तथा मोटरयान अधिनियम एवं यातायात नियमों का पूर्णतः पालन करें। प्रदेशवासियों से भी आग्रह किया गया है कि वे केवल वैध एवं सुरक्षित लोक परिवहन सेवाओं का ही उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार की सुरक्षा संबंधी अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की सूचना तत्काल निकटतम यातायात पुलिस अथवा परिवहन कार्यालय को दें, जिससे समय पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

 

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