महाराष्ट्र में UCC की तैयारी तेज, मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय समिति

मुंबई 
 महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया है। 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि समिति के सदस्यों के नाम भी तय कर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समिति समान नागरिक संहिता से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन करेगी। इसके अलावा विभिन्न हितधारकों के सुझावों और आवश्यक पहलुओं पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर समान नागरिक संहिता का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।

देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी नागपुर शीतकालीन विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक पेश करना है। सरकार की कोशिश रहेगी कि यह विधेयक विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाए और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर इसे पारित कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है, ताकि यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े कानूनों में सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करना है। महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब समिति की रिपोर्ट और आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

SC का अवैध कब्जों पर सख्त रुख, अधिकारियों की मिलीभगत पर जताई नाराजगी, पूछा- अब तक क्या कार्रवाई हुई?

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली- लखनऊ में हुए हालिया अग्निकांड की घटनाओं को लेकर कड़ा रख अपनाते हुए नगर निकायों को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में अवैध कब्जों को लेकर भी नाराजगी जताई और पूछा कि अवैध कब्जों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? अदालत ने नगर निकायों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर जमीन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट अवमानना की कार्रवाई करेगा। 

नगर निकाय के अधिकारियों को लगाई फटकार
कोर्ट ने अवैध कब्जों के मामलों में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने घटना के बाद अधिकारियों द्वारा इज्जत बचाने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों की भी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि घटनाओं के बाद सिर्फ बिल्डरों को ही गिरफ्तार किया जा रहा है, जबकि घटना वाले क्षेत्र के प्रभारी अधिकारियों को छोड़ दिया जा रहा है।  कोर्ट ने रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की सुनवाई अगली तारीख तक स्थगित कर दी। 

दिल्ली के मालवीय नगर में बीती 3 जून को एक होटल में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं लखनऊ में बीती 22 जून को एक व्यवसायिक परिसर में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई थी।अदालत ने दिल्ली नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे नगर निकाय के आचरण से चिंतित हैं। 

अवैध कब्जों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निकायों को दिया अल्टीमेटम
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अवैध कब्जों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान  मालवीय नगर की घटना, लखनऊ में लगी आग और साकेत में इमारत गिरने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमें उम्मीद थी कि अधिकारी कुछ कार्रवाई करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अदालत ने ये भी पूछा कि मालवीय नगर की घटना के बाद दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत और सरोजनी नगर जैसे इलाकों का सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है और इस संबंध में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है। इस विशेषज्ञ समिति में आईआईटी दिल्ली के सिविल विभाग के दो वरिष्ठ प्रोफेसर, आईआईटी के दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी के अधिकारी और कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी भी शामिल रहेंगे। विशेषज्ञ समिति अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 

अदालत ने पूछा- 20 मई के आदेश के बाद क्या कार्रवाई की?
अदालत ने बीती 20 मई को सुरक्षा अधिकारियों को सुरक्षा मानदंड पर निर्देश जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर भी संज्ञान लिया, जिनमें बताया गया कि गुरुग्राम की 93 प्रतिशत इमारतें अग्नि सुरक्षा ऑडिट में फेल रही हैं। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अधिकारियों को 20 मई को निर्देश दिए गए थे कि क्या करना है। लेकिन आदेश के बावजूद एनसीआर में अग्निकांड हुए। अदालत ने पूछा कि उनके आदेश के बाद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?

अदालत ने कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। अदालत ने माना कि एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत से अंधाधुंध अवैध निर्माण हुए हैं। 

 

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला, ₹800 करोड़ से अपग्रेड होगा स्टेट डेटा सेंटर, 24×7 मिलेंगी ऑनलाइन सेवाएं

भोपाल 
मध्य प्रदेश सरकार ने डिजिटल सेवाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं और पर्यावरण सुधार से जुड़े कई बड़े फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. कैबिनेट ने प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 800 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस परियोजना के तहत डेटा सेंटर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के अनुसार तैयार किया जाएगा. इसमें 630 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर पर और 170 करोड़ रुपये संचालन पर खर्च किए जाएंगे। 

सरकार के मुताबिक, डेटा सेंटर के अपग्रेड होने के बाद लोगों को सरकारी ऑनलाइन सर्विस 24 घंटे तेज, सुरक्षित और बिना रुकावट के मिल सकेंगी. इसके अलावा 75 करोड़ रुपये के एकल नागरिक डेटाबेस प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है. इसके लागू होने के बाद लोगों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा. एक ही डेटाबेस के जरिए पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। 

एक्सपर्ट डॉक्टरों की सीधी भर्ती
कैबिनेट ने सरकारी अस्पतालों में एक्सपर्ट डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव को भी मंजूरी दी है. अब एक्सपर्ट डॉक्टरों की नियुक्ति एमपी-पीएससी के बजाय विभागीय स्तर पर की जाएगी. हर महीने खाली पदों की जानकारी जारी की जाएगी और आवेदन के साथ-साथ इंटरव्यू के आधार पर डॉक्टरों का चुनाव होगा। 

नियुक्त डॉक्टरों को तीन साल तक उसी अस्पताल में सेवा देनी होगी और इस दौरान उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा. यह व्यवस्था फिलहाल एक साल के लिए लागू की जाएगी. सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि प्रदेश में एक्सपर्ट डॉक्टरों के काफी पद खाली हैं और एमपी-पीएससी प्रोसेस में देरी के कारण भर्ती पूरी नहीं हो पा रही थी। 

65 शहरों में बनेंगे अर्बन फॉरेस्ट
पर्यावरण सुधार के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये की नमो हरित नगर योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत साल 2031 तक प्रदेश के 65 नगरीय निकायों में अर्बन फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे. करीब 1911 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा। 

इस योजना के लिए हर साल 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. भोपाल समेत पांच बड़े शहरों को 5-5 करोड़ रुपये, नगर निगमों को 1.20 करोड़ रुपये और नगर परिषदों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे। 

केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों को बढ़ा मुआवजा
सरकार ने पन्ना जिले की केन-बेतवा, रूंज और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए 202.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की है. अब प्रभावित परिवारों को मिलने वाला मुआवजा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इससे विस्थापित परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी। 

भोपाल के बड़े तालाब के कैचमेंट पर बढ़ी प्लॉटिंग, 3 महीने में 11 हजार रजिस्ट्रियां, पर्यावरण पर बढ़ा खतरा

भोपाल
 राजधानी में बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया से लगे नीलबड़, रातीबड़, कलखेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ रही है। मास्टर प्लान में इन क्षेत्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिए लो-डेंसिटी जोन घोषित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद छोटे-छोटे प्लॉट काटकर उनकी रजिस्ट्री और बिक्री लगातार जारी है। पंजीयन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच हुई 19 हजार रजिस्ट्रियों में से 11,220 रजिस्ट्रियां अकेले इन्हीं क्षेत्रों में हुई हैं।

जानकारी के अनुसार लो-डेंसिटी क्षेत्र में आबादी का दबाव सीमित रखने के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर के भूखंड पर ही निर्माण की अनुमति है। ऐसे प्लाट पर भी अधिकतम 60 वर्गमीटर (करीब 600 वर्गफीट) तक निर्माण किया जा सकता है। इसके विपरीत मौके पर 500 से 2000 वर्गफीट तक के छोटे प्लाट काटकर बेचे जा रहे हैं और उनकी रजिस्ट्रियां भी हो रही हैं। इससे कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित बसाहट तेजी से बढ़ रही है।

प्रशासन का कहना है कि हाल ही में पंजीयन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल मास्टर प्लान के आधार पर रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में प्रशासन के पास रजिस्ट्री रोकने का अधिकार सीमित हो गया है, जबकि अवैध कालोनियों का विस्तार लगातार जारी है।

इन इलाकों को लो-डेंसिटी श्रेणी में रखा गया
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मास्टर प्लान में इन संवेदनशील इलाकों को आरजी-5 (लो-डेंसिटी) श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में बरखेड़ी कला, बरखेड़ी खुर्द, मेंडोरा-मेंडोरी, खुदागंज, चिचली, बैरागढ़ चिचली, गेहूंखेड़ा, दौलतपुर, चंदनपुरा, प्रेमपुरा, सेवनियां गौड़ सहित कई गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का प्रविधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं होने से बड़े तालाब का कैचमेंट और आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार दबाव में आता जा रहा है।

MP के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, नए टैरिफ में कंपनियों की मनमानी पर लगेगी लगाम

भोपाल

मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. राज्य सरकार और विद्युत नियामक आयोग ने नए रिटेल सप्लाई टैरिफ 2026-27 को मंजूरी दे दी है. इस नए टैरिफ में ‘प्रो-राटा’ (Proportional) बिलिंग व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया गया है. इस नए नियम के लागू होने से अब बिजली कंपनियों की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगेगी और मीटर रीडिंग में होने वाली देरी का खामियाजा उपभोक्ताओं को नहीं भुगतना पड़ेगा। 

अक्सर देखा जाता था कि बिजली कंपनियां 30 दिन के बजाय 35 या 40 दिन में मीटर रीडिंग लेती थीं, जिससे उपभोक्ताओं की यूनिट बढ़ जाती थी और वे महंगे स्लैब के दायरे में आ जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 

दिनों के अनुपात में बढ़ेगा स्लैब
अगर मीटर रीडिंग 30 दिन के बाद ली जाती है, तो 30 दिन वाले स्लैब को रीडिंग के दिनों के अनुपात में बढ़ा दिया जाएगा. अगर मीटर रीडिंग में 6 दिन की देरी होती है, तो स्लैब को 36 दिनों के अनुपात में बढ़ाकर लागू किया जाएगा। 

उपभोक्ताओं को अतिरिक्त यूनिट के कारण अब महंगे स्लैब का वित्तीय नुकसान नहीं सहना होगा. 30 दिन से ऊपर रीडिंग होने पर भी आपकी जेब ढीली नहीं होगी। 

गरीब उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
एलवी-1.1 (LV-1.1) कैटेगरी के ऐसे उपभोक्ता जिनका स्वीकृत लोड 100 वाट तक है और मासिक खपत 30 यूनिट से कम रहती है, उनका फिक्स्ड चार्ज पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है. अब इन उपभोक्ताओं से कोई फिक्स्ड चार्ज नहीं वसूला जाएगा। 

अस्थाई बिजली कनेक्शनों को लेकर दरें साफ:

*नए रिटेल सप्लाई टैरिफ में अस्थायी बिजली कनेक्शनों को लेकर भी दरें साफ कर दी गई हैं.

*सामान्य अस्थायी बिजली कनेक्शन पर अब घरेलू दर से 1.25 गुना अधिक ऊर्जा शुल्क (Energy Charge) देना होगा.

*शादी-ब्याह, सामाजिक या धार्मिक आयोजनों के लिए लिए जाने वाले अस्थायी कनेक्शन के लिए 8.94 रुपये प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा शुल्क तय किया गया है, जिसके साथ फिक्स्ड चार्ज अलग से देना होगा। 

10 साल बाद जेल विभाग में पदोन्नति का रास्ता साफ, अधिकारियों-कर्मचारियों के आदेश होंगे चरणबद्ध जारी

जेल विभाग में 10 वर्ष बाद पदोन्नति

विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश चरणबद्ध रूप से होंगे जारी

भोपाल
मध्यप्रदेश शासन के पदोन्नति संबंधी निर्णय के अनुपालन में जेल विभाग में लगभग 10 वर्षों के अंतराल के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जेल मुख्यालय द्वारा विभिन्न संवर्गों के पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। यह निर्णय विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मनोबल को सुदृढ़ करने के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता एवं कार्यकुशलता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

जेल मुख्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार सहायक ग्रेड-1, स्टेनो टाइपिस्ट, लेखापाल, उप अधीक्षक (उद्योग), वरिष्ठ बुनाई प्रशिक्षक, वरिष्ठ बढ़ईगिरी प्रशिक्षक, दफ्तरी तथा जमादार के पदों पर पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति आदेश जारी होने के साथ ही संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके नवीन पदों के अनुरूप दायित्व सौंपने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

जेल विभाग द्वारा पदोन्नति की संपूर्ण प्रक्रिया शासन के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध ढंग से संचालित की जा रही है। विभाग पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति प्रकरणों का निरंतर परीक्षण एवं निराकरण कर रहा है। आगामी समय में अन्य पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश भी चरणबद्ध रूप से जारी किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक पात्र अधिकारी एवं कर्मचारी को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।

महानिदेशक जेल वरूण कपूर ने सभी पदोन्नत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पदोन्नति केवल अधिकार नहीं, बल्कि अधिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने का अवसर भी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी पदोन्नत अधिकारी एवं कर्मचारी अपने नवीन दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

 

MP में सरकारी बसों की वापसी! 40 रूट तय, ई-टिकट और हर 10 सेकेंड में मिलेगी लाइव लोकेशन

भोपाल
 मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में सरकारी बस सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 40 प्रमुख लंबी दूरी के बस रूट चिन्हित कर लिए हैं। राज्य सड़क परिवहन योजना के तहत इन प्रस्तावित रूटों और बस सेवा व्यवस्था पर आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके बाद बसों के संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
नई सरकारी बस सेवा में यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक टिकट (E-Ticket) की सुविधा मिलेगी। जिन मार्गों पर यात्रियों की संख्या अधिक होगी, वहां जरूरत के अनुसार अधिक बसों का संचालन किया जाएगा। साथ ही सभी बसों में आधुनिक जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे, जिससे हर 10 सेकेंड में बस की लाइव लोकेशन वेबसाइट पर अपडेट होती रहेगी।

PPP मॉडल पर होगा बसों का संचालन
परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मध्यप्रदेश यात्री बस परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा अधिसूचित रूटों पर बसों का संचालन किया जाएगा। इन मार्गों के लिए राज्य परिवहन उपक्रम के नाम से परमिट जारी किए जाएंगे। साथ ही पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी बस संचालकों के साथ समझौते किए जाएंगे। नई परिवहन नीति का उद्देश्य सार्वजनिक बस परिवहन को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना है। योजना लागू होने के सात दिन बाद बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।

नई बसों में मिलेंगी ये सुविधाएं

    यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक टिकट जारी किए जाएंगे।
    अधिक ट्रैफिक वाले रूट्स पर अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी।
    सभी बसों में GPS ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे, जो हर 10 सेकंड में बस की लोकेशन को वेबसाइट पर अपडेट करेंगे।

परिवहन विभाग के नोटिफिकेशन के अनुसार, इन रूट्स पर राज्य परिवहन उपक्रम के नाम पर परमिट जारी किए जाएंगे। साथ ही सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी बस ऑपरेटरों के साथ समझौते भी किए जाएंगे। नई परिवहन नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बस सेवा को व्यवस्थित, सुरक्षित और समयबद्ध बनाना है। योजना लागू होने के सात दिन बाद बसों का नियमित संचालन शुरू हो जाएगा।

किन जिलों को जोड़ेंगे नए रूट्स?
योजना के तहत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर, नरसिंहपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 40 महत्वपूर्ण इंटरसिटी मार्ग शामिल किए गए हैं।

इन जिलों से अलग-अलग मार्गों पर चलेगी बसें
योजना के अंतर्गत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर, नरसिंहपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख इंटरसिटी मार्ग नोटिफाई किए गए हैं।

ऐसे होगी बसों की सीट संख्या
योजना के अनुसार सामान्य मार्गों पर मिडी बस (23–34 सीट) चलेंगी जो साधारण, सेमी डीलक्स और डीलक्स कैटेगरी की होंगी। इसके साथ ही इंटरसिटी मार्गों पर स्टैंडर्ड बस (35–70 सीट) संचालित की जाएंगी जो एसी डीलक्स, एसी लग्जरी, एसी सुपर लग्जरी कैटेगरी की होंगी।

बसों की क्षमता और कैटेगरी
    सामान्य मार्गों पर मिडी बसें (23-34 सीट) चलाई जाएंगी, जो साधारण, सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणी की होंगी।

    इंटरसिटी मार्गों पर स्टैंडर्ड बसें (35-70 सीट) संचालित होंगी, जिनमें एसी डीलक्स, एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी उच्च श्रेणी की बसें शामिल होंगी।

 

इन प्रमुख शहरों और जिलों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर और नरसिंहपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख इंटरसिटी रूट अधिसूचित किए गए हैं।

बसों की सीट क्षमता और श्रेणियां
योजना के अनुसार सामान्य मार्गों पर 23 से 34 सीटों वाली मिडी बसें संचालित की जाएंगी, जिन्हें साधारण, सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणियों में रखा जाएगा। वहीं इंटरसिटी रूटों पर 35 से 70 सीटों वाली स्टैंडर्ड बसें चलाई जाएंगी, जिनमें एसी डीलक्स, एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

TMC में बढ़ा सियासी घमासान! नेता प्रतिपक्ष पद, पार्टी दफ्तर के बाद अब बैंक खाते पर भी विवाद

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी का सियासी किला पूरी तरह से ढह गया है. विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद से ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन में सबसे बड़े मुश्किल दौर से गुजर रही हैं. ममता के पैरों के नीचे से पूरी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है. विधायक और सांसदों के बाद एक-एक कर सारी चीजें ममता के हाथों से निकलती जा रही हैं। 

साल 1998 में जिस टीएमस की स्थापना ममता बनर्जी ने खुद की थी, आज पूरी तरह उनके नियंत्रण से बाहर हो चुकी है. दो महीने में टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है. टीएमसी पर नियंत्रण, वफादार नेता और यहां तक कि पार्टी का बैंक खाता भी ममता बनर्जी के हाथों से निकलता दिख रहा है। 

बंगाल की सियासत में टीएमसी की टूट महज महज़ एक राजनीतिक टूट नहीं, बल्कि पूरी पार्टी पर कब्जे की क्रोनोलॉजी के रूप में देखा जा रहा है. बंगाल चुनाव के बाद से एक-एक करके सब कुछ छिन गया है और टीएमसी का कन्ट्रोल भी ममता के हाथ से निकल गया हैं। 

पहले ममता से  ‘नेता प्रतिपक्ष’ का पद छिना
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भले ही टीएमसी को करारी हार के बाद सत्ता से बाहर और विपक्ष में बैठना पड़ा था. टीएमसी के 80 विधायक के के सहारे ममता बनर्जी ने शोभन देव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित करने के लिए स्पीकर को पत्र भेजा था, लेकिन विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने सारे गेम को बिगाड़ दिया। 

टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह ने आरोप लगाया कि इस पत्र पर विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं और यह सब अभिषेक बनर्जी के इशारे पर हुआ. ममता बनर्जी ने तुरंत ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह को पार्टी से निष्कासित कर दिया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी टीएमसी के 58 से अधिक विधायकों को अपने मिला लिया। 

टीएमसी बागी गुट ने 58 विधायकों के समर्थन का पत्र विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस को सौंपा, जिसे स्पीकर ने मंजूर कर लिया. नतीजा यह हुआ कि ममता बनर्जी की मर्जी के खिलाफ ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष बन गए और उन्हें एलओपी का कमरा अलॉट कर दिया गया. इस तरह ममता बनर्जी के हाथों से नेता प्रतिपक्ष का पद छिन गिया। 

MLA-MPs भी ममता के हाथ से निकले
टीएमसी के 80 में से करीब 64 विधायक फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी के साथ हैं. इसके अलावा टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई में विलय कर लिया है. बंगाल की सियासत में ‘तृणमूल कांग्रेस’ तीन गुटों में बंट गई. एक तरफ ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट है जिसके पास दो-तिहाई से ज्यादा 64 विधायक हैं और जो खुद को ‘असली टीएमसी’ कह रहा है तो ममता बनर्जी के साथ करीब  16 विधायको हैं। 

वहीं, काकोली घोष के अगुवाई में टीएमसी सांसदों ने बगावत किया तो ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका था. सांसदों के बगावत से ममता की सियासत दिल्ली में भी कमजोर पड़ गई है. 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी हो चुके हैं और सिर्फ 8 सांसद ममता के साथ है. इसके अलावा 13 राज्यसभा सांसदों में से 3 सांसदों ने पार्टी और अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। 

पार्टी दफ्तर और अध्यक्ष पद से ममता बेदखल
टीएमसी में केवल विधायक और सांसदों के स्तर पर ही बगावत नहीं हुई, बल्कि संगठन पर बागी गुट ने पूरी तरह कब्जा कर लिया. कोलकाता में बागी नेताओं, पूर्व पार्षदों और जिला अध्यक्षों की एक बड़ी बैठक में ममता बनर्जी को पद से हटा दिया गया. टीएमसी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुआ कि ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. बागी गुट ने अरूप रॉय को टीएमसी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। 

ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी के पद से सस्पेंड कर दिया गया और उनकी जगह संदीपन शाह और जावेद खान जैसे नेताओं को कमान सौंप दी गई. नए संगठन के दफ्तरों से ममता बनर्जी की तस्वीरें हटा दी गईं. हालांकि, बागी गुट सीधे ममता पर हमला करने से बच रहा है और उन्हें ‘मुख्य सलाहकार’ का पद ऑफर कर रहा है, लेकिन सक्रिय नेतृत्व से उन्हें पूरी तरह बेदखल कर दिया गया है. इतना ही नहीं टीएमसी के दफ्तर पर बागी गुटों का पूरी तरह से कब्जा हो गया है। 

टीएमसी का बैंक खात हुआ फ्रीज 
पार्टी और पद छिनने के बाद ममता बनर्जी गुट को सबसे बड़ा झटका आर्थिक मोर्चे पर लगा. बागी गुट ने टीएमसी के आधिकारिक बैंक खातों में अवैध फंडिंग और पैसों की हेराफेरी की शिकायत केंद्रीय एजेंसियों से कर दी. इसके चलते  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बिधाननगर पुलिस की कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस के तीन मुख्य बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया, जिनमें लगभग ₹440 करोड़ जमा थे। 

आरोप मनी लॉन्ड्रिंग का लगया है.जांच में सामने आया कि चुनावों के दौरान चार्टर्ड फ्लाइट्स और एविएशन कंपनियों को ₹160 करोड़ से ज्यादा ट्रांसफर किए गए थे. खाता फ्रीज के कारण ममता बनर्जी के पास पार्टी चलाने और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए संसाधन जुटाना मुश्किल हो सकता है. टीएमसी के के् दोनों गुट अब इन खातों और पैसों पर अपना मालिकाना हक जता रहे हैं. इस तरह ममता बनर्जी के हाथों से टीएमसी का खजाना भी निकलता दिख रहा है। 

 

रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! DA 50% पार होते ही बढ़ी हॉस्टल सब्सिडी, हर महीने मिलेंगे ₹8,437

नई दिल्ली

रेलवे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा को सुगम बनाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रेल मंत्रालय ने अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं में बड़ा बदलाव किया है। मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही ‘चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस’ (CEA) और ‘हॉस्टल सब्सिडी’ योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ को बढ़ा दिया गया है। व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए रेल प्रशासन ने नई दरों को प्रभावी कर दिया है, जिससे दूर-दराज के आवासीय विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।

DA 50 फीसदी होने का मिला सीधा लाभ
इस कल्याणकारी योजना का मुख्य लक्ष्य उन रेलकर्मियों के वित्तीय बोझ को कम करना है, जिनके बच्चे अपने माता-पिता से दूर हॉस्टल या आवासीय संस्थानों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में देश में महंगाई भत्ता (DA) बढ़कर 50 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है।

रेलवे के नियमों के मुताबिक, जैसे ही महंगाई भत्ता इस तय सीमा को पार करता है, वैसे ही अन्य भत्तों की दरों में भी स्वतः ही संशोधन हो जाता है। इसी नियम के तहत अब हॉस्टल सब्सिडी की दरों को बढ़ाकर ₹8,437.50 प्रति माह प्रति बच्चा तय कर दिया गया है।

वास्तविक खर्च से इतर निर्धारित दर पर ही मिलेगा भुगतान
इस वित्तीय सहायता की सबसे अहम खूबी यह है कि रेल कर्मचारी को यह राशि सीधे तौर पर विभाग द्वारा तय की गई फिक्स दर के अनुसार ही मिलती है। हॉस्टल का वास्तविक खर्च चाहे इस निर्धारित रकम से कम हो या फिर ज्यादा, कर्मचारी को ₹8,437.50 प्रति महीने के हिसाब से ही भुगतान किया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे (सेवारत) रेलवे कर्मचारियों को ही मिलेगा। साथ ही, एक कर्मचारी अधिकतम अपने दो बच्चों की शिक्षा के लिए ही इस सब्सिडी का दावा करने का पात्र होगा।

नर्सरी से लेकर तकनीकी डिप्लोमा तक की पढ़ाई शामिल
शैक्षणिक दायरे की बात करें तो यह योजना नर्सरी (यानी पहली कक्षा से पहले की तीन शुरुआती क्लासेस) से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के लिए पूरी तरह वैध है। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई छात्र 10वीं पास करने के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई (ITI), पॉलिटेक्निक या किसी भी इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेता है, तो ऐसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के शुरुआती दो वर्षों के लिए भी कर्मचारी हॉस्टल सब्सिडी क्लेम कर सकते हैं।

एक साथ दो भत्तों पर रोक, वर्ष में एक बार होगा क्लेम
रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी एक ही बच्चे के लिए चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल सब्सिडी दोनों का लाभ एक साथ नहीं उठा सकता है। हॉस्टल में रहने वाले बच्चे के लिए केवल हॉस्टल सब्सिडी ही देय होगी। इस राशि का दावा सामान्य रूप से शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति पर साल में केवल एक बार किया जाता है। दिव्यांग बच्चों के मामले में रेलवे बोर्ड ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके लिए शिक्षा भत्ते की दरें सामान्य बच्चों से काफी अधिक रखी हैं।

आवेदन के लिए देने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
इस योजना का लाभ लेने के लिए रेलकर्मियों को अपने संबंधित विभाग में आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। इनमें निर्धारित प्रारूप में भरा हुआ आवेदन पत्र, स्कूल या कॉलेज द्वारा जारी प्रामाणिक सर्टिफिकेट और हॉस्टल वार्डन या मैनेजमेंट द्वारा हस्ताक्षरित वैध सर्टिफिकेट शामिल है, जो छात्र के हॉस्टल में रहने की पुष्टि करता हो। इसके साथ ही कर्मचारी को एक स्व-घोषणा पत्र (Self-Declaration) भी देना होगा, जिसमें बच्चों की सही संख्या और हॉस्टल में रहने की समयावधि की स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

₹39,000 करोड़ का डिफेंस प्रोग्राम! एयर डिफेंस सिस्टम भी होगा बेअसर, जानें क्यों माना जा रहा है गेमचेंजर

बेंगलुरु 

भारत ने फ्रांस के साथ हाल में 114 राफेल फाइटर जेट खरीद को लेकर करार किया है. यह डील 3.25 लाख करोड़ रुपये की है. इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में पहले से ही 36 राफेल फाइटर जेट मौजूद हैं. 114 नए जेट आने से यह संख्‍या 150 तक पहुंच जाएगी. इसका मतलब यह है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल जेट के 8 से भी ज्‍यादा स्‍क्‍वाड्रन होंगे. इसके साथ ही स्‍वदेशी तकनीक से तेजस फाइटर जेट भी डेवलप किए जा रहे हैं. इन सबके बीच रक्षा वैज्ञानिक ऐसा ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने में जुटे हैं, जो रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को भी बाइपास करने में सक्षम होंगे. इस स्‍टील्‍थ ड्रोन के ऑपरेशन में आने से हवाई युद्ध का स्‍वरूप बदल सकता है. घातक स्‍टील्‍थ ड्रोन प्रोजेक्‍ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 

भारत भविष्य के हवाई युद्ध की तैयारियों को नई गति देने के लिए अपने महत्वाकांक्षी स्टील्थ मानव रहित लड़ाकू विमान (UCAV) कार्यक्रम ‘घातक’ को नए स्वरूप में आगे बढ़ा रहा है. अब इस परियोजना को रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (RPSA) पहल के तहत विकसित किया जा रहा है. करीब 39 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह कार्यक्रम केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि इसे पूर्ण सैन्य अधिग्रहण कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके सफल होने पर भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता और भविष्य के युद्ध लड़ने की रणनीति में बड़ा बदलाव आएगा। 

SWIFT बना आधार
इस परियोजना की नींव SWIFT (Stealth Wing Flying Testbed) जेट के जरिए रखी गई थी. SWIFT ने फ्लाइंग-विंग स्टील्थ डिजाइन, ऑटोनोमस फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम और आंतरिक हथियार कक्ष (Internal Weapons Bay) जैसी कई अहम तकनीकों का सफल परीक्षण किया. इन तकनीकों का उद्देश्य विमान की रडार पर पहचान को बेहद कम करना और दुश्मन के अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्र में गहराई तक प्रवेश करने की क्षमता विकसित करना है. हालांकि, RPSA केवल इन तकनीकों तक सीमित नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर उत्पादन और भारतीय वायुसेना के मौजूदा तथा भविष्य के लड़ाकू विमानों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना है. यही कारण है कि इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है। 

राफेल-तेजस से ज्‍यादा खतरनाक?
इस परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DCPP) मॉडल को अपनाना है. इसके तहत निजी रक्षा कंपनियों को भी परियोजना के विकास और निर्माण में बड़ी भूमिका दी जाएगी. इससे उन्नत कंपोजिट सामग्री, आधुनिक एवियोनिक्स, AI और सेंसर तकनीक जैसे क्षेत्रों में निजी उद्योग की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा. यह कदम रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई मजबूती देगा. राफेल और तेजस जैसे फाइटर जेट स्‍टील्‍थ नहीं हैं, जब‍कि घातक प्रोगाम के तहत डेवलप किए जाने वाले ड्रोन नेक्‍स्‍ट जेनरेशन के होंगे, जिन्‍हें रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम से इंटरसेप्‍ट करना कतई आसान नहीं होगा। 

फोर्स मल्‍टीप्‍लायर
सैन्य दृष्टि से देखा जाए तो ‘घातक’ को अकेले लड़ने वाले प्लेटफॉर्म के बजाय फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में तैयार किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल उन मिशनों में किया जाएगा, जहां पायलट वाले विमानों के लिए खतरा अधिक होता है. इनमें दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करना (SEAD), रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमले करना और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) जैसे मिशन शामिल हैं. इसकी ऑटोनोमस कैपेबिलिटी इसे न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ मिशन पूरा करने में सक्षम बनाएंगी, जिससे पायलटों की सुरक्षा भी बढ़ेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, ‘घातक’ की सबसे बड़ी ताकत इसका मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (MUM-T) सिद्धांत होगा. इस व्यवस्था में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और भविष्य के AMCA जैसे लड़ाकू विमान कमांड प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाएंगे, जबकि उनके साथ उड़ने वाले कई UCAV सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक डिकॉय या हमला करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेंगे. इससे एक ही मिशन में कई टार्गेट्स पर एक साथ एक्‍शन संभव होगा और दुश्मन के लिए वास्तविक खतरे की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाएगा। 

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