मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की मंशानुरूप संचालित ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बैलाडीला क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 227 ग्रामीणों की जांच की गई। इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह, रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।

महिलाओं और गंभीर मरीजों पर विशेष ध्यान

शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की गई। एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ की जानकारी दी गई तथा सुरक्षित मातृत्व, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह अभियान न केवल उपचार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ा रहा है।

वन धन विकास केंद्र ने बदली आदिवासी महिलाओं की तकदीर

रायपुर

 छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उद्यमों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श बनकर उभरा है।

दिहाड़ी मजदूरी से सफल उद्यमिता तक का सफर 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री  केदार कश्यप की मंशानुरूप 

12 आदिवासी महिलाओं से गठित इस समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन शासन की वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

हर्बल उत्पादों की बढ़ी मांग

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय तथा संस्थागत बाजारों में अच्छी मांग बनी।
आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर

समूह को उस समय बड़ी सफलता मिली जब उन्हें आयुष विभाग से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ हुआ। इससे समूह की विश्वसनीयता बढ़ी और नए बाजारों के द्वार खुले।

38.90 लाख रूपए का लाभ, आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

वित्तीय वर्ष 2024-25 में समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे सदस्यों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा
जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया।

26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रूपए की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की निरंतर मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और प्रभावी विपणन रणनीति का परिणाम है।

हर सदस्य की आय पहुंची 1.7 लाख रुपए वार्षिक

इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड (TRIFED) तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
अन्य समूहों के लिए प्रेरणा

हरिबोल स्वयं सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। डोंगनाला की यह सफलता आज पूरे प्रदेश और देश के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई

पितृत्व विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, DNA टेस्ट को बताया न्याय के लिए जरूरी

महासमुंद.

महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पलसापाली से जुड़े एक चर्चित पितृत्व विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कहा कि जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका समाधान किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायहित में वैज्ञानिक जांच आवश्यक हो जाती है।

यह मामला कई वर्षों से न्यायालयों में लंबित था। विवाद उस युवक द्वारा दायर दीवानी वाद से जुड़ा है, जिसमें उसने स्वयं को संबंधित व्यक्ति का पुत्र बताते हुए संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया था। युवक की माता का कहना था कि वर्ष 1999 में दोनों के बीच संबंध बने थे, जिसके बाद युवक का जन्म हुआ। दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति लगातार पितृत्व से इंकार करता रहा। मामले में पहले भरण-पोषण को लेकर भी कई कानूनी कार्यवाहियां हुई थीं। निचली अदालतों और बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डीएनए परीक्षण कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पितृत्व का स्पष्ट निर्धारण डीएनए परीक्षण के बिना संभव नहीं है। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि किसी व्यक्ति को जबरन डीएनए सैंपल देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता तथा यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष की ओर से कहा गया कि लगातार पितृत्व से इंकार किए जाने के कारण सच्चाई सामने लाने का एकमात्र प्रभावी माध्यम डीएनए परीक्षण ही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई पुराने महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में डीएनए परीक्षण सामान्य रूप से आदेशित नहीं किया जाता, लेकिन जब पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का विषय हो और उसका उत्तर किसी अन्य साक्ष्य से संभव न हो, तब न्यायालय वैज्ञानिक जांच का आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि इस मामले में ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जो विवाद का अंतिम समाधान दे सके। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर कभी सामने नहीं आया, तो संबंधित युवक अपने वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों से वंचित हो सकता है।

निजता के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं होता और न्यायहित में उसका संतुलन दूसरे पक्ष के अधिकारों के साथ किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों के हितों का संतुलन डीएनए परीक्षण के पक्ष में जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः अपील खारिज करते हुए संबंधित दीवानी न्यायालय को डीएनए परीक्षण की तिथि निर्धारित कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से अभिनव श्रीवास्तव व स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल की पुत्री अधिवक्ता बरखा अग्रवाल ने पैरवी की। 

गुरु अर्जुन देव जी का बलिदान सत्य, सेवा और मानवता की रक्षा का अमर संदेश : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज  गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित गुरुद्वारा परिसर में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित विशाल छबील एवं छायाचित्र प्रदर्शनी में शामिल होकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके महान बलिदान को मानवता, सत्य तथा सेवा की रक्षा का अमर संदेश बताया। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने राहगीरों को शरबत एवं प्रसादी वितरित कर सेवा परंपरा में सहभागी बनते हुए समाज को परोपकार, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान सिक्ख समाज ने मुख्यमंत्री को पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुद्वारा परिसर में आयोजित  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में उनके दिव्य जन्म से लेकर शहादत तक की प्रेरक और गौरवपूर्ण यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया था। इसमें गुरु गद्दी की प्राप्ति, हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा के निर्माण, आदि ग्रंथ साहिब के संकलन, जहांगीर से वैचारिक संघर्ष, गिरफ्तारी, असहनीय यातनाओं के बीच अडिग आस्था का विस्तृत चित्रण शामिल था।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  गुरु अर्जुन देव जी त्याग, तपस्या, सत्य, सेवा और मानवता की महान प्रतिमूर्ति थे। उनका संपूर्ण जीवन समाज को प्रेम, समानता, करुणा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने अन्याय, अत्याचार और दमन के सामने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। असहनीय यातनाओं के बावजूद उनका धैर्य, साहस, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास आज भी संपूर्ण मानवता के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस पर आयोजित ‘छबील सेवा’ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, भाईचारे और मानवता की जीवंत अभिव्यक्ति है। भीषण गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा और मीठा शरबत पिलाना निस्वार्थ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिक्ख परंपरा में छबील सेवा मानवता के प्रति समर्पण, सह-अस्तित्व और परोपकार की भावना को जीवंत बनाए रखने का माध्यम रही है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज द्वारा आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी को  गुरु अर्जुन देव जी के जीवन, संघर्ष, आध्यात्मिक चेतना और महान बलिदान से परिचित कराने का अत्यंत सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इतिहास तभी जीवंत रहता है, जब नई पीढ़ी अपने महापुरुषों के विचारों, मूल्यों और त्याग से जुड़ी रहती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लोगों से गुरु अर्जुन देव जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा सत्य, सेवा, सद्भाव और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने इस गरिमामय एवं पुनीत आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज को साधुवाद भी दिया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव सहित छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश भवन में 2 दिवसीय समर वर्कशॉप का सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ समापन

भोपाल 

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित मध्यप्रदेश भवन में आयोजित 2 दिवसीय समर वर्कशॉप का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ गत दिवस हुआ। समापन समारोह में सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  शिवशेखर शुक्ला ने प्रतिभागियों के उत्साह और रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास में मदद मिलती है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्म कालूराम बामनिया द्वारा प्रस्तुत कबीर गायन तथा  महेश कुलश्रेष्ठ की मनमोहक ‘फूलपाती’ नृत्य प्रस्तुति रही। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। कार्यशाला में प्रतिभागियों के लिए हीटलेस कुकिंग (बिना आग के खाना बनाना), फैब्रिक पेंटिंग, मधुबनी पेंटिंग कला तथा डीआईवाई (DIY) क्रॉफ्ट सत्र जैसी रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

समारोह में ट्रेज़र हंट प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया। दो दिनों तक चली इस कार्यशाला ने प्रतिभागियों को सीखने, सृजनात्मकता विकसित करने और मनोरंजन के साथ नई गतिविधियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन उत्साह, उमंग और मधुर स्मृतियों के साथ हुआ।

 

NEET पेपर लीक के विरोध में भोपाल में उग्र प्रदर्शन, NSUI कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज

भोपाल

नीट (NEET) पेपर लीक मामले के विरोध में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने जा रहे एनएसयूआई (NSUI) कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वॉटर कैनन का उपयोग कर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज कर दिया। इस हिंसक झड़प में NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए ‘सिद्धांत’ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

प्रदर्शन के दौरान लगाए गए बैरिकेड्स

नीट परीक्षा में हुई विसंगतियों और पेपर लीक के खिलाफ एनएसयूआई द्वारा आयोजित इस उग्र प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही मजबूत बैरिकेड्स लगा रखे थे। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने के लिए इन बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर किए गए लाठीचार्ज में प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार को गंभीर चोटें आईं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की गिरफ्तारी

इस बड़े विरोध-प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पुलिस ने विधिक हिरासत में लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के इस आंदोलन को वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का पूरा विधिक समर्थन मिल रहा था, जिसके चलते पेपर लीक मामले के विरोध में हुई इस गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है।

 

मध्य भारत की हृदयस्थली में नई संभावनाओं को साकार करने वाला राजमार्ग : बोरगांव से शाहपुर तक

भोपाल 

मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे कृषि क्षेत्र और मध्य भारत के केले के प्रमुख केन्द्र खंडवा और बुरहानपुर में प्रतिवर्ष 1.7 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। यहां से प्रतिदिन 140 भारी-भरकम ट्रक घरेलू बाजारों और अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक केले पहुंचाते हैं। वर्षों से इन ट्रकों को संकरी और जर्जर सड़कों से होकर गुजरना पड़ता था। इससे आवागमन धीमा हो जाता था, यात्रा का समय बढ़ जाता था और परिवहन एक कठिन कार्य बन जाता था। लेकिन महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत एनएच-753एल के बोरगांव से शाहपुर खंड के आधुनिक चार-लेन वाले राजमार्ग गलियारे के रूप में विकसित होने से अब यह स्थिति बदलने वाली है।

एनएच-753एल का बोरगांव से शाहपुर तक का खंड रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यह महाराष्ट्र में बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक फैले एक बड़े गलियारे का हिस्सा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित इस गलियारे से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर-राज्यीय संपर्क को नया रूप मिलने की उम्मीद है। लगभग 944 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा यह गलियारा लगभग 47 किलोमीटर लंबा है और इसका 85 प्रतिशत निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। पूर्ण रूप से निर्मित होने के बाद, यह मार्ग इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के बीच एक तेज, सुरक्षित एवं  अधिक कुशल वैकल्पिक संपर्क के रूप में उभरेगा और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करते हुए अंतर-राज्यीय परिवहन की एक प्रमुख धुरी बन जाएगा।

खेत से बाजार तक के संपर्क को मजबूती

यह परियोजना केले, कपास, सोयाबीन और गेहूं जैसी फसलों के लिए प्रसिद्ध कृषि प्रधान क्षेत्रों से होकर गुजरती है। स्थानीय किसानों और ट्रांसपोर्टरों के लिए, इन बेहतर सड़कों का सीधा लाभ यह होगा कि उनकी बाजार तक तेजी से पहुंच संभव होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी।

इस क्षेत्र के गांवों के लिए, यह राजमार्ग पहले से ही दैनिक जीवन में एक बड़ा सुधार साबित हो रहा है। बुरहानपुर जिले की झीरी पंचायत की सरपंच आशा कैथवास बताती हैं कि पुरानी सड़क की खराब हालत के कारण परिवहन कितना कठिन हो गया था। उनके अनुसार, क्षतिग्रस्त सतहों और गड्ढों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पहले बेहद चुनौतीपूर्ण थी। नए राजमार्ग के बनने से ट्रकों की आवाजाही काफी सुगम हो गई है। इससे किसानों और ट्रांसपोर्टरों, दोनों को कृषि उपज को अधिक कुशलता से ले जाने में मदद मिल रही है।

इस गलियारे में 1 रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी), 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 3 हल्के वाहनों के लिए अंडरपास (एलवीयूपी), 5 छोटे वाहनों के लिए अंडरपास (एसवीयूपी) और 6 वाहनों के लिए अंडरपास (वीयूपी) शामिल हैं। इनमें से कई संरचनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि स्थानीय संपर्क बाधित न हो और गांवों, खेतों एवं आसपास के इलाकों के बीच आवागमन सुचारू व निर्बाध बना रहे।

शहरों को करीब लाना

शाहपुर-बुरहानपुर इलाके के कोल्ड स्टोरेज संचालक गोपाल कडुतेमकर बताते हैं कि जलगांव लगभग 90 किलोमीटर दूर है, जबकि महाराष्ट्र की सीमा यहां से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है। उनका मानना ​​है कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इसके पूरा होने के बाद इंदौर और मालवा क्षेत्र एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करेंगे। तेज यात्रा, परिवहन की लागत में कमी और सुगम आवागमन से स्थानीय व्यवसायों, आपातकालीन यात्रा तथा दैनिक आवागमन को लाभ होने की उम्मीद है।

शाहपुर और बुरहानपुर के आसपास रहने वाले कई निवासियों के लिए, महाराष्ट्र से संपर्क हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की सीमा के निकट है। पूरा होने पर, यह नया राजमार्ग आसपास के शहरों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को काफी आसान बना देगा।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण: एनएच-753एल का बोरेगांव-शाहपुर खंड

  •     परियोजना की लागत: 944 करोड़ रुपये
  •     कुल लंबाई: लगभग 47 किलोमीटर
  •     निर्माण में प्रगति: लगभग 85 प्रतिशत पूर्ण
  •     जुड़ने वाले प्रमुख राज्य: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र
  •     प्रमुख संपर्क मार्ग: इंदौर – खंडवा – बुरहानपुर – जलगांव – छत्रपति संभाजीनगर
  •     प्रमुख अवसंरचना: 1 आरओबी, 7 बड़े पुल, 20 छोटे पुल, 98 पुलिया, 14 अंडरपास
  •     कस्बों और शहरी क्षेत्रों में भीड़ कम करने के लिए लगभग 26 किलोमीटर का बाईपास
  •     सुरक्षित स्थानीय आवागमन हेतु 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड तेज और सुरक्षित आवागमन हेतु डिजाइन किया गया

इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में से एक इसका सुनियोजित भविष्योन्मुखी अवसंरचना विकास है। इसमें लगभग 26 किलोमीटर लंबी एक व्यापक बाईपास प्रणाली का विकास शामिल है, जो कुल मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारी एवं द्रुत यातायात को शहरों और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर मोड़ना है। इससे शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़, प्रदूषण और यात्रा में होने वाली देरी में कमी आएगी। साथ ही, स्थानीय यातायात की सुरक्षित और सुगम आवाजाही के लिए 19 किलोमीटर लंबी सर्विस रोडों का निर्माण किया जा रहा है। ये सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों और छोटी बस्तियों को जोड़ेगी। इससे स्थानीय यात्री मुख्य राजमार्ग पर आए बिना सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकेंगे।

अंतर-राज्यीय संपर्क को बढ़ावा

यह मार्ग महाराष्ट्र के मुक्तईनगर क्षेत्र की ओर आगे बढ़ता है, जिससे एक मजबूत अंतर-राज्यीय संपर्क स्थापित होता है। यह गलियारा स्थानीय संपर्क से कहीं आगे बढ़कर इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर को जोड़ने वाले एक सुव्यवस्थित परिवहन नेटवर्क के निर्माण में योगदान देता है।

इस परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एक सशक्त वैकल्पिक आर्थिक गलियारे के रूप में इसकी भूमिका है। वर्तमान में, इंदौर और छत्रपति संभाजीनगर के बीच यातायात काफी हद तक पारंपरिक मार्गों पर निर्भर करता है, जहां अक्सर जाम, संकरी सड़कें और लंबी यात्रा अवधि जैसी समस्याएं होती हैं। इससे यात्री और माल ढुलाई, दोनों प्रभावित होती हैं। बोरगांव बुजुर्ग से मुक्तईनगर तक के पूरे मार्ग को आधुनिक चार-लेन वाले गलियारे के रूप में विकसित करने से एक तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, विशेष रूप से भारी वाहनों और माल परिवहन के लिए।

इस गलियारे के विकास से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवाओं जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी।

आशा की एक नई किरण

शाहपुर-बुरहानपुर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए, एनएच-753एल का बोरगांव-शाहपुर खंड कंक्रीट और डामर की एक पट्टी से कहीं अधिक मायने रखता है। स्थानीय कोल्ड स्टोरेज संचालक कडुतेमकर बताते हैं कि यह सड़क अस्पतालों, बाजारों, उद्योगों और अवसरों को उन समुदायों के करीब लाएगी जो लंबे समय से बुनियादी जरूरतों के लिए भी दूर के संपर्कों पर निर्भर रहे हैं।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संबंधों को मजबूत करते हुए और इंदौर तथा मालवा क्षेत्र को पहले से कहीं अधिक करीब लाते हुए, यह गलियारा रोजमर्रा की जिंदगी को नया रूप देने के लिए तैयार है – यह लंबी व अनिश्चित यात्राओं को तेज, सुरक्षित एवं अपेक्षाकृत अधिक जुड़ाव वाली यात्राओं में बदल रहा है।

 

20 साल बाद MP में लौटेगी सरकारी बस सेवा, केसरिया रंग की बसें दौड़ेंगी सड़कों पर

भोपाल

 सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत प्रदेश में केसरिया रंग की बसें दौड़ेंगी। बीच में सफेद रंग की पट्टी होगी। पीएम ई-बस सेवा की बसों का रंग भी लगभग इसी तरह का है। सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेश भर में 10 हजार से अधिक बसें चलेंगी।

पहले चरण में शहरी, उपनगरीय और दूसरे राज्यों के लिए एक साथ बसें चलाने की तैयारी है। इसकी शुरुआत जुलाई से इंदौर संभाग से करने का प्रयास है। शीघ्र ही बोर्ड की मीटिंग होने वाली है। इसके बाद कंपनी में भर्ती शुरू होगी। सरकार निजी बसों को अनुबंधित कर अपने नियंत्रण में संचालित करेगी। संचालन के लिए संभागीय स्तर पर सात कंपनियां बनाई गई हैं।

मप्र राज्य सड़क परिवहन सेवा की बसें चलती थीं

बता दें कि प्रदेश में मप्र राज्य सड़क परिवहन सेवा की बसें चलती थीं। घाटे के चलते तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने दिसंबर 2002 में सेवा बंद करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2005 से यह बसें बंद हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सत्ता संभालने के दो माह के भीतर फिर शासकीय नियंत्रण में सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

लगभग दो वर्ष की तैयारी के बाद अब बसों का संचालन शीघ्र प्रारंभ होने जा रहा है, जिनका किराए को लेकर निर्णय अभी होना है। बस संचालक किराया बढ़ाने की लगातार मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वर्ष 2021 से किराया नहीं बढ़ाया गया है, जबकि डीजल की कीमतें व अन्य खर्च बढ़े हैं।

पहले चरण में दो वर्ष में 5206 बसें चलेंगी

योजना के पहले चरण में प्रदेश के कुल 1,164 मार्गों पर लगभग 5,206 बसों का संचालन अगले दो वर्षों में किया जाएगा। इनमें इंदौर क्षेत्र के कुल 121 मार्गों पर कुल 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र के 120 मार्गों पर 371 बसें, भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों पर 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र के 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र के 92 मार्गों पर 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र के 65 मार्गों पर 298 बसें और रीवा क्षेत्र के 35 मार्गों पर 184 बसें चलाई जाएंगी। क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित मार्ग स्वीकृति के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। बसों की निगरानी के लिए इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैंनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) स्थापित किया जा रहा है।

‘उकसाओगे तो जवाब मिलेगा’, ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर आर्मी चीफ ने दुश्मनों को दी चेतावनी

नई दिल्ली

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह तय कर दिया है कि उकसावे पर भारत किस तरह जवाब देता है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पासिंग आउट कैडेटों से अपील की कि वे अपने सैन्य करियर की शुरुआत करते हुए इस उच्च मानक को हमेशा बनाए रखें। पुणे के खडकवासला स्थित त्रि-सेवा अकादमी परिसर में एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “आज के समय में खतरे हमेशा वर्दी में या किसी घोषित मोर्चे पर नहीं आते। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया और एक बेंचमार्क स्थापित किया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और संकल्प के साथ व्यक्त किया जाता है तो भारत उकसावे का कैसा जवाब देता है। अब इस मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी आपकी है।”

तीनों सेनाओं के तालमेल पर दिया जोर
सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता उसी एकीकृत दृष्टिकोण का परिणाम थी, जिसकी नींव एनडीए में रखी जाती है। उन्होंने कैडेट्स से कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में आपने जो एकीकृत प्रतिक्रिया देखी, वह ठीक उसी नींव पर बनी थी जो एनडीए तैयार करता है। यहां संयुक्तता केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि पहले दिन से ही तीनों सेनाओं के सैनिकों के साथ मिलकर जीने की एक प्रवृत्ति है।”

42 साल बाद अकादमी लौटे सेना प्रमुख
जनरल द्विवेदी ने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में परेड की समीक्षा की, जहां 355 कैडेटों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया। इस पासिंग आउट बैच में 12 मित्र विदेशी देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सेना प्रमुख भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह अवसर उनके लिए बेहद खास है क्योंकि चार दशक से भी पहले वह खुद इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। आपको बता दें कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र और चार्ली स्क्वाड्रन के कैडेट रह चुके हैं।

उन्होंने कहा, “42 साल से अधिक समय पहले मैं इसी क्वार्टर डेक से पास आउट हुआ था। आज समीक्षा अधिकारी के रूप में अपनी मातृ संस्था में लौटना मेरे लिए गर्व की बात है। इसी संस्थान ने मेरे मूल्यों, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को आकार दिया है।”

जबलपुर में ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगी आग, बड़ा हादसा टला

जबलपुर

 शक्ति भवन स्थित तरंग ओडिटोरियम शनिवार की शाम करीब सात बजे उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब ‘हमारे राम’ कार्यक्रम के मंचन के दौरान शार्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। आग लगते हैं लाइट बंद हो गई और ओडिटोरियम सहित परिसर में अंधेरा छा गया।

आग लगने और कक्ष से धुआं निकलता देख दर्शक और कलाकार बाहर की तरफ भागने लगे। आयोजकों ने मोबाइल के टार्च की रोशनी अभिनेता आशुतोष राणा सहित मंडली के अन्य कलाकारों को सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं नगर निगम के फायर बिग्रेड को भी सूचना दी गई।

ग्रीन रूम में लगी आग

प्रत्यक्षदर्शियों के दौरान शनिवार की ‘ हमारे राम’ कार्यक्रम के मंचन के दौरान शाम करीब सात बजे ग्रीन के पास पास शार्ट सर्किट से आग लग गई। बिजली भी बंद हो गई। आग धीरे-धीरे भड़कने लगी और पूरे ग्रीन सहित आस-पास धुआं का गुबार छा गया। बिजली गुल होने आग लगने से आयोजन स्थल में अफरातफरी मच गई। दर्शक सीट छोड़कर बाहर आ गए।

पर्याप्त नही थे अग्नि सुरक्षा के इंतजाम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तरंगा ओडिटोरियम में आग से बचाव के सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त नही थे। आयोजक व ओडिटोरियम के कर्मचारियों ने मौजूद अग्निशमन संयंत्रों से आग बुझाने की कोशिश की परंतु सफलता नही मिली। नगर निगम के फायर बिग्रेड ने सूचना मिलते ही एक दमकल वाहन रवाना किया। दमकल कर्मियों कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। गनीमत रही कि आग भड़की नही वरना बड़े हादसे भी इंकार नही किया जा सकता।

 

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