TCS धर्म परिवर्तन मामले में निदा खान को जमानत, कोर्ट ने ‘श्रीकृष्ण’ के उदाहरण के साथ सुनाया अहम फैसला

 नासिक

महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए टीसीएस (TCS) धर्म परिवर्तन मामले में गर्भवती आरोपी निदा खान को इसी सप्ताह जमानत मिल गई है. निदा खान पांच महीने की गर्भवती हैं. जमानत देते समय कोर्ट ने कहा कि जेल में बच्चे का जन्म होना किसी भी महिला और बच्चे के लिए बहुत मुश्किल स्थिति होती है. अदालत ने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के जन्म की परिस्थितियों से की। 

अदालत ने कहा, ‘भगवान कृष्ण की तरह जेल में बच्चे को जन्म देने का ट्रॉमा और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक किसी के लिए भी सहने योग्य नहीं है.’ स्पेशल जज के.जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि निदा खान पांच महीने की गर्भवती हैं. ऐसे में जेल में बच्चे का जन्म होने से मां और बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है. इसलिए नए बच्चे की भलाई को देखते हुए अदालत ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जमानत देने का फैसला किया। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. साथ ही अदालत ने अपने आदेश में यह भी लिखा कि जांच में सामने आया है कि निदा खान ने दूसरे आरोपियों की मदद से शिकायत करने वाली महिला का ब्रेनवॉश करने और उसके विचारों व धर्म को बदलने की कोशिश की। 

कोर्ट के अनुसार, निदा खान के खिलाफ सिर्फ एक मामले में चार्जशीट दाखिल हुई है. यह मामला देवलाली कैंप थाने में दर्ज है. वहीं इस केस के सात अन्य आरोपियों के खिलाफ 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं. निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने अपनी एक सहकर्मियों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाकर उन्हें बुर्का और धार्मिक किताबें दीं. साथ ही उसके मोबाइल फोन में धार्मिक ऐप भी इंस्टॉल किए। 

कैसे खुला TCS मामला? 
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई. एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस में शिकायत दी कि एक कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही है. इसके बाद पुलिस ने गुप्त जांच शुरू की. जांच के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी में भेजा गया. उन्होंने अंदर की गतिविधियों पर नजर रखी और सबूत जुटाए. जांच में पुलिस के मुताबिक कुछ टीम लीडर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर कर्मचारियों पर धर्म बदलने का दबाव बना रहे थे. इसके बाद सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया गया. इनपुट के मुताबिक, निदा खान को भी इस मामले में आरोपी बताया गया है। 

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से PM मोदी का बड़ा ऐलान, चेन्नई में होगा बिग बैश लीग का ओपनिंग मैच

मेलबर्न 
अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दुनिया के सबसे ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों में से एक, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पहुंचे. इस खास दौरे पर उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ऑस्ट्रेलियाई पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे। 

इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को बढ़ाने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक फैसला लिया गया. इस साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया की मशहूर टी-20 लीग ‘बिग बैश लीग’ (BBL) का शुरुआती मैच चेन्नई में आयोजित किया जाएगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब कोई विदेशी क्रिकेट लीग भारत की धरती पर अपना मैच खेलेगी। 

यह आयोजन दिसंबर में पूरे भारत में आयोजित होने वाले सप्ताह भर के ‘जी-डे नमस्ते’  उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति, व्यवसाय और खेल से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की झलक देखने को मिलेगी।  

अन्य खेलों में भी सहयोग मजबूत करेंगे
इस दौरान संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) की ऐतिहासिकता और दोनों देशों के क्रिकेट प्रेम का जिक्र करते हुए कहा, “MCG में आकर किसी भी भारतीय के मन में दो भावनाएं एक साथ आती हैं. एक भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच का रोमांच, और दूसरा यह एहसास कि दोनों देशों में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक साझा जुनून है.” पीएम ने हल्के-फुल्के अंदाज में आगे कहा, “लेकिन आज यहां कोई ‘लास्ट ओवर फिनिश’ का प्रेशर नहीं है. आज यहां केवल खेल की खुशी है, हमारी मित्रता की गर्मजोशी है और फ्यूचर चैंपियंस की एनर्जी है। 

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ मिलकर ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट कोलैबोरेशन रोडमैप’ लॉन्च किया. उन्होंने कहा कि इसके तहत हम क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में भी सहयोग मज़बूत करेंगे. इस पर खुशी जताते हुए पीएम ने कहा, “स्पोर्ट्स भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों की एक मजबूत कड़ी है. ऑन-फील्ड के साथ-साथ हम आउट-फील्ड पार्टनरशिप भी मजबूत करेंगे. अब हम स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी मिलकर आगे बढ़ेंगे. इस रोडमैप के तहत क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में भी सहयोग मजबूत किया जाएगा। 

इससे पहले मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पहुंचने पर पीएम मोदी का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया गया. इस दौरान उन्होंने मैदान पर मौजूद युवा क्रिकेटरों से मुलाकात की. पीएम मोदी ने खेल को लेकर उनका उत्साह बढ़ाया और मुस्कुराते हुए युवा खिलाड़ियों की जर्सी पर अपने ऑटोग्राफ भी दिए। 

इस दौरे की एक और खास तस्वीर तब सामने आई जब पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय मस्कट ‘रूबी द रू’ से मिले. पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज और स्टीव वॉ की मौजूदगी में इस मस्कट के साथ काफी देर तक मजेदार अंदाज में बातचीत की। 

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट के गहरे जुड़ाव को देखते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों की इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और खेल के स्तर पर भी मजबूत होते रिश्तों की गवाही दे रही है। 

सरकार गठन के बाद 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण

सरकार गठन के बाद 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण

मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान के उत्कृष्ट कार्यों पर आधारित कॉम्पेंडियम का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया विमोचन

11 हितग्राहियों को मुख्यमंत्री साय ने दी नए आवास की चाबी

रायपुर,
रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आज आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश में सरकार गठन के बाद 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण होने तथा ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान की उल्लेखनीय उपलब्धियों से संबंधित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 11 लाख आवास पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 11 हितग्राहियों को उनके नए आवास की प्रतीकात्मक चाबी प्रदान कर सम्मानित किया तथा “मोर गांव मोर पानी “महाअभियान के उत्कृष्ट कार्यों पर आधारित कॉम्पेंडियम का विमोचन किया।

       उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने गठन के तुरंत बाद अपनी प्रथम कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों के लिए राशि जारी करने का निर्णय लिया था। इसके बाद निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। इनमें से विगत वित्तीय वर्ष में लगभग 6 लाख आवास पूर्ण किए गए, जो एक वर्ष में देश में सर्वाधिक आवास पूर्ण करने की उपलब्धि है। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष के प्रथम 100 दिनों (1 अप्रैल से 9 जुलाई) में ही 1 लाख 51 हजार आवास पूर्ण किए गए हैं। अर्थात प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 1,500 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं।

        कार्यक्रम में ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान के उत्कृष्ट कार्यो पर एक पुस्तिका विमोचित की गई। उल्लेखनीय है कि यह महाअभियान 24 अप्रैल 2025 को पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किया गया था। जनभागीदारी आधारित इस अभियान के अंतर्गत पूर्ववर्ती महात्मा गांधी नरेगा एवं वर्तमान वीबी- जीरामजी के माध्यम से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्य स्वीकृत एवं क्रियान्वित किए जा रहे हैं। अभियान के तहत आजीविका डबरी, नवा तरिया, कंटूर ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण कर जल संरक्षण, भूजल संवर्धन एवं ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी जा रही है।

         कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा  सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे।

माननीय उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मनोकामना रथ को हरी झंडी दिखाकर किया जोहार जगन्नाथ कार्यक्रम का शुभारंभ

माननीय उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मनोकामना रथ को हरी झंडी दिखाकर किया जोहार जगन्नाथ कार्यक्रम का शुभारंभ

रायपुर 

भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर कोतवाली चौक स्थित अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स प्रा. लि. (ए.टी. पैलेस) में आयोजित “जोहार जगन्नाथ” कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के माननीय उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा भगवान जगन्नाथ के मनोकामना रथ को हरी झंडी दिखाकर किया गया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि “जोहार जगन्नाथ” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ की भक्ति, आस्था और सेवा का पावन अभियान है। उन्होंने कहा कि मनोकामना रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ प्रभु के श्रीचरणों तक पहुँचेंगी तथा जगन्नाथ पुरी धाम से लाया गया पावन महाप्रसाद जन-जन तक पहुँचेगा।

उन्होंने भगवान जगन्नाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, शांति एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक एकता से जोड़ने का कार्य करते हैं।

इस अवसर पर चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया, डायरेक्टर नितिन बरड़िया एवं निकेश बरड़िया सहित बरड़िया परिवार एवं संस्था के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

ए.टी. पैलेस में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की भव्य स्थापना, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ पूजन

ए.टी. पैलेस में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की भव्य स्थापना, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुआ पूजन

रायपुर 

भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स प्रा. लि. (ए.टी. पैलेस), कोतवाली चौक के प्रांगण में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हुई।

इस पावन अनुष्ठान में चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजू बरड़िया, समस्त बरड़िया परिवार तथा अनोपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना, महाआरती एवं पुष्पांजलि अर्पित कर भगवान जगन्नाथ से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विगत वर्ष की भाँति इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ के दिव्य दरबार को आकर्षक पुष्प एवं पारंपरिक सज्जा से अलंकृत किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया ने बताया गया कि 09 से 16 जुलाई तक श्रद्धालु ए.टी. पैलेस में भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ लिख सकेंगे। इन मनोकामनाओं को जगन्नाथ पुरी धाम में समर्पित किया जाएगा तथा प्रतिदिन पुरी धाम से लाए गए पावन महाप्रसाद का वितरण भी किया जाएगा।

नारायणपुर जिला प्रशासन की अनूठी पहल- दुर्गम वनांचल गांवों तक ट्रैक्टर से पहुंचाया गया

रायपुर

 छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न और पोषण सामग्री पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष रणनीतियां लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश है कि राज्य के पहुच विहीन क्षेत्रों में वर्षा व भौगोलिक बाधाओं को पार करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर राशन दुकानें खोलना, ट्रैक्टर के माध्यम से डोर-स्टेप डिलीवरी और मॉनसून से पहले तीन महीने का अग्रिम राशन भंडारण करने के निेर्दश दिए हैं।        

मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में नारायणपुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक विशेष और सराहनीय पहल की है। बारिश के मौसम और कठिन रास्तों को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैक्टरों के माध्यम से अंदरूनी गांवों तक तीन माह का खाद्यान्न सुरक्षित पहुंचाया है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित छह गांवों मुरुमवाड़ा, गुडेकोर, दिवालूर, धोबे, बोटेर और हरबेल के राशनकार्डधारी हितग्राहियों को जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह का राशन एक साथ वितरित किया गया।

6 गांवों के 151 परिवारों को मिला ला      

खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम क्षेत्रों में बसे कुल 151 राशनकार्डधारी परिवारों को उनकी निर्धारित मात्रा में तीन महीने का खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। लाभान्वित गांवों और परिवारों में मुरुमवाड़ा के 98 परिवार, दिवालूर के 32 परिवार, गुडेकोर के 13 परिवार, धोबे के 03 परिवार, हरबेल के 03 परिवार, बोटेर के 02 परिवार शामिल हैं।

बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को दी मात       

इन वनांचल गांव घने जंगलों, कच्चे रास्तों और नदी-नालों से घिरे होने के कारण सामान्य दिनों में भी परिवहन के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को राशन के लिए कई किलोमीटर की पैदल और जोखिमभरी यात्रा करनी पड़ती थी। इस समस्या को भांपते हुए जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान राशन सामग्री को सीधे ट्रैक्टर के जरिए गांवों तक भिजवाया, जिससे ग्रामीणों को अपने घर के पास ही राशन मिल गया।

बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को मिली बड़ी राहत

खाद्यान्न वितरण की पूरी प्रक्रिया स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में अत्यंत पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई गई। गांव में ही राशन मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस पहल से उनके समय और श्रम दोनों की बचत हुई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग हितग्राहियों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं रही, क्योंकि उन्हें अब राशन के लिए कठिन रास्तों से होकर नहीं गुजरना पड़ा।

अंतिम छोर के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना लक्ष्य 

इस संबंध में जिला प्रशासन का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य जिले के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक पात्र और जरूरतमंद परिवार तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना है। इसके लिए दुर्गम क्षेत्रों में विशेष परिवहन व्यवस्था की कार्ययोजना पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन की इस मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि भौगोलिक कठिनाइयां भी जनता तक उनका हक पहुंचाने में बाधा नहीं बन सकतीं।

50 वर्षों से प्रदेश की धड़कन: समय को मात देने वाला सारंगपुर का स्वदेशी पॉवर ट्रांसफार्मर

50 वर्षों से प्रदेश की धड़कन: समय को मात देने वाला सारंगपुर का स्वदेशी पॉवर ट्रांसफार्मर

भोपाल

मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के राजगढ़ जिले के सारंगपुर स्थि‍त सब-स्टेशन में भारत की सरकारी कंपनी एनजीईएफ (न्यू गवर्नमेंट इलेक्ट्रिक फैक्‍ट्री) द्वारा 1976 का निर्मित 20 एमवीए क्षमता का एक पावर ट्रांसफार्मर आज केवल विद्युत उपकरण नहीं, बल्कि मालवा क्षेत्र के विकास, तकनीकी उत्कृष्टता और समर्पित रखरखाव की एक जीवंत मिसाल बन चुका है। वर्ष 1976 में पहली बार ऊर्जीकृत हुआ यह ट्रांसफार्मर पिछले 50 वर्षों से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति कर रहा है।

आधी शताब्दी की अपनी गौरवशाली यात्रा में इस ट्रांसफार्मर ने मौसम, तकनीक, विभिन्न क्षेत्र और विद्युत तंत्र के अनेक बदलाव देखे हैं, लेकिन सत्तर के दशक में निर्मित इसकी उच्च गुणवत्ता और मजबूत अभिकल्पना के कारण इसकी कार्यक्षमता एवं विश्वसनीयता आज भी उल्लेखनीय बनी हुई है। यह उस दौर का साक्षी है जब मालवा क्षेत्र औद्योगिक विकास की गति तेज हो रही है, यह आज भी उसी निष्ठा के साथ विकास की ऊर्जा का आधार बना हुआ है।

संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग का प्रेरक उदाहरण

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि आज जब ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग में आने वाले उपकरणों और तेजी से बदलती तकनीकों के बीच संसाधनों के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है, तब सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह केवल लोहे, तांबे और तेल से निर्मित मशीन नहीं, बल्कि उन हजारों अभियंताओं, तकनीशियनों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिन्होंने पांच दशकों तक इसकी कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को बनाए रखा।

निर्धारित आयु से दोगुनी सेवा दे रहा है ट्रांसफार्मर

विद्युत क्षेत्र के मानकों के अनुसार किसी पॉवर ट्रांसफार्मर की सामान्य उपयोगी आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है। इसके विपरीत सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित आयु से दोगुना अर्थात 50 वर्षों तक सफलतापूर्वक सेवा प्रदान कर रहा है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि है।

सरकारी क्षेत्र का प्रतिष्ठित उपक्रम था एनजीईएफ

इस ट्रांसफार्मर का निर्माण एनजीईएफ (न्यू गवर्नमेंट इलेक्ट्रिकल फैक्ट्री) द्वारा किया गया था। कर्नाटक सरकार ने वर्ष 1956 में बेंगलुरु में इस सरकारी उपक्रम की स्थापना की थी। जर्मनी की एईजी कंपनी के तकनीकी सहयोग से प्रारंभ हुए इस उपक्रम ने देश और विदेश में अनेक बड़े पावर ट्रांसफार्मरों की सफल आपूर्ति की। लगभग 46 वर्षों तक उत्कृष्ट श्रेणी के विद्युत उपकरणों का निर्माण करने के बाद वर्ष 2002 में यह उपक्रम बंद हो गया।

विद्युत कंपनियों के समन्वित रखरखाव का परिणाम

इस असाधारण सफलता के पीछे तत्कालीन मध्यप्रदेश विद्युत मंडल, मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल तथा वर्तमान एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों की दशकों की मेहनत, दूरदर्शिता और प्रभावी रखरखाव नीति रही है। नियमित परीक्षण, समयबद्ध मेंटेनेंस, संतुलित लोड प्रबंधन तथा तकनीकी मानकों के कठोर अनुपालन ने इस ट्रांसफार्मर को निरंतर सक्षम बनाए रखा।

इसके साथ ही विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संबंधित फीडरों के उत्कृष्ट रखरखाव ने भी इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाह्य फाल्ट और नेटवर्क व्यवधानों को न्यूनतम रखने के प्रयासों से ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले विद्युत एवं यांत्रिक तनाव में कमी आई, जिससे इसकी विश्वसनीयता और सेवा अवधि दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

मालवा की ऊर्जा गाथा का स्वर्णिम अध्याय

सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर केवल बिजली उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि यह सिद्ध कर रहा है कि समर्पित रखरखाव, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्मनिष्ठा के बल पर किसी भी संसाधन की उपयोगिता और सेवा अवधि को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है। यह मालवा की ऊर्जा गाथा का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों के अभियंताओं को प्रेरित करता रहेगा।

एमपी ट्रांसको नेटवर्क में आज भी क्रियाशील हैं एनजीईएफ के 20 ट्रांसफार्मर

एमपी ट्रांसको के नेटवर्क में वर्तमान में एनजीईएफ द्वारा निर्मित कुल 20 ट्रांसफार्मर क्रियाशील हैं। इनमें एक 160 एमवीए क्षमता का, पांच 40 एमवीए क्षमता के तथा 14 ट्रांसफार्मर 20 एमवीए क्षमता के हैं। ये सभी ट्रांसफार्मर 30 से 50 वर्ष तक की सफल सेवा दे चुके हैं और आज भी प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

 

अगले वेतन समझौते की तैयारी तेज, AIBOC की चार्टर ऑफ डिमांड्स समिति के सह-अध्यक्ष बने के. रवि कुमार

भोपाल। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों के आगामी वेतन समझौते (बाइपार्टाइट सेटलमेंट) की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC) ने नवंबर 2027 से प्रभावी होने वाले अगले वेतन समझौते के लिए चार्टर ऑफ डिमांड्स (Charter of Demands) तैयार करने हेतु गठित उच्चस्तरीय समिति में कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (CBOA) के महासचिव के. रवि कुमार को सह-अध्यक्ष (Co-Chairman) नियुक्त किया है। बैंकिंग क्षेत्र में इस नियुक्ति को अधिकारी वर्ग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

IBA को सौंपा जाएगा अधिकारियों की मांगों का प्रारूप

जानकारी के अनुसार, यह समिति बैंक अधिकारियों की सेवा शर्तों, वेतन संरचना, भत्तों, कार्य परिस्थितियों और अन्य सेवा संबंधी मांगों का विस्तृत प्रारूप तैयार करेगी। इसके बाद इस चार्टर ऑफ डिमांड्स को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को आगामी वेतन वार्ता के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह समिति आगामी वेतन समझौते की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इसी दस्तावेज के आधार पर IBA और अधिकारी संगठनों के बीच औपचारिक वार्ताएं आगे बढ़ेंगी।

सीबीओए ने जताया गर्व, अधिकारियों के हितों को मिलेगी मजबूती

कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (CBOA) के उपाध्यक्ष के. के. त्रिपाठी ने कहा कि के. रवि कुमार की इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति न केवल सीबीओए बल्कि पूरे बैंकिंग अधिकारी वर्ग के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्री रवि कुमार के अनुभव और नेतृत्व क्षमता का लाभ देशभर के बैंक अधिकारियों को मिलेगा तथा वे आगामी वेतन समझौते में अधिकारियों के हितों को प्रभावी ढंग से सामने रखेंगे।

दो दिवसीय भोपाल दौरे पर रहेंगे रवि कुमार

के. के. त्रिपाठी ने बताया कि के. रवि कुमार 12 और 13 जुलाई को दो दिवसीय भोपाल प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे विभिन्न संगठनात्मक बैठकों में भाग लेंगे तथा बैंक अधिकारियों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं पर चर्चा करेंगे।

इस दौरे के दौरान बैंकिंग क्षेत्र के समसामयिक विषयों, संगठन को मजबूत बनाने और आगामी वेतन समझौते से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

वेतन समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदें

बैंक अधिकारी संगठनों के बीच यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब नवंबर 2027 से लागू होने वाले नए वेतन समझौते की प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि चार्टर ऑफ डिमांड्स में वेतन संशोधन के साथ-साथ कार्य-जीवन संतुलन, पदोन्नति, कार्यस्थल की सुविधाओं और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों का मानना है कि अनुभवी नेतृत्व के साथ तैयार होने वाला मांग-पत्र आगामी वार्ताओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने में मदद करेगा।

क्या है चार्टर ऑफ डिमांड्स?

चार्टर ऑफ डिमांड्स वह आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें बैंक अधिकारी संगठनों द्वारा वेतन वृद्धि, भत्तों, सेवा शर्तों, पदोन्नति, कार्य परिस्थितियों और अन्य कर्मचारी हितों से जुड़ी मांगों को शामिल किया जाता है। इसी दस्तावेज के आधार पर भारतीय बैंक संघ (IBA) और अधिकारी संगठनों के बीच वेतन समझौते की औपचारिक वार्ता होती है।

मुख्य बिंदु

  • AIBOC ने आगामी नवंबर 2027 वेतन समझौते की तैयारी शुरू की।
  • CBOA के महासचिव के. रवि कुमार बने चार्टर ऑफ डिमांड्स समिति के सह-अध्यक्ष
  • समिति भारतीय बैंक संघ (IBA) को मांग-पत्र प्रस्तुत करेगी।
  • 12-13 जुलाई को भोपाल प्रवास पर रहेंगे के. रवि कुमार।
  • बैंक अधिकारियों के साथ संवाद और संगठनात्मक बैठकों में करेंगे भागीदारी।
  • बैंक अधिकारी वर्ग ने नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

MP UCC: अब लिव-इन रिलेशन में रहना आसान नहीं, शादी जैसा रजिस्ट्रेशन और अलग होने पर तलाक जैसी प्रक्रिया

भोपाल

मध्य प्रदेश सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा लगभग तैयार हो गया है. इसमें लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई नए नियम शामिल किए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लिव-इन में रहने वाले कपल्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, इस रिश्ते को खत्म करने की प्रक्रिया भी शादी और तलाक की तरह तय की जाएगी। 

मसौदे के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराया है और वह बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी करना चाहता है, तो पहले उसे अपना लिव-इन रजिस्ट्रेशन रद्द कराना होगा. रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी नहीं होगी. एक पक्ष भी आवेदन देकर इसे निरस्त करा सकेगा. हालांकि, दूसरा पक्ष इस फैसले से असहमत होने पर अदालत में चुनौती दे सकता है। 

सरकार और विधि विभाग मसौदे को अंतिम रूप दे चुके हैं. अब गुरुवार को दिल्ली में यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई के साथ अंतिम चर्चा होगी. इसके बाद सरकार मानसून सेशन में यूसीसी विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 

पहले क्या थे प्रावधान?
ड्राफ्ट में उत्तराधिकार (संपत्ति के अधिकार) से जुड़े प्रावधानों को भी पहले के मुकाबले काफी कम किया गया है. पहले जहां ऐसे करीब 100 प्रावधान थे, अब उन्हें घटाकर लगभग 30 कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इन बदलावों के बाद मध्य प्रदेश की यूसीसी, गुजरात और उत्तराखंड की यूसीसी से अधिक सरल और संक्षिप्त होगी. आदिवासी, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों को पहले की तरह इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। 

मसौदे के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन केवल बालिग (18 साल या उससे अधिक उम्र) लोग ही करा सकेंगे. इसके लिए दोनों पक्षों को अपनी उम्र से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे. रजिस्ट्रेशन जिले के रजिस्ट्रार के पास होगा। 

लिव-इन को लेकर प्रावधान
अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी के साथ लिव-इन में रह रहा है और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ नया रजिस्ट्रेशन कराता है, तो ऐसी स्थिति की जानकारी रखने की व्यवस्था फिलहाल साफ नहीं है. इसलिए इस प्रावधान को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। 

सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन नहीं कराता, तो उसके खिलाफ अलग से कोई आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं होगा. यह व्यवस्था काफी हद तक लोगों की जागरूकता और आपसी सहमति पर आधारित रहेगी. वहीं, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन में रहता है, तो ऐसे मामलों में पहले से लागू आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। 

सूत्रों के मुताबिक, अगर यह विधेयक मानसून सत्र में पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े कुछ प्रावधानों को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना भी है। 

होर्मुज स्ट्रेट फिर संकट में! US हमलों के बाद तेल-गैस सप्लाई पर खतरा, धीमा पड़ा समुद्री ट्रैफिक

 नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. भारत समेत लगभग आधी दुनिया को तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस इलाके में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। 

होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक अब लगभग रुक गया है. फिलहाल ज्यादातर जहाज सिर्फ उस उत्तरी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ईरान ने मंजूरी दी है. वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के घंटों में सिर्फ एक अमेरिकी मंजूरी वाले सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज को स्ट्रेट पार करते देखा गया। 

डेटा फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजर रहे थे. 24 जून को यह संख्या 59 तक पहुंच गई थी. लेकिन ताजा सैन्य टकराव के बाद यह आंकड़ा तेजी से गिर गया है. युद्ध के दौरान अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर पाए। 

होर्मुज पर कंट्रोल के लिए कोई भी नुकसान उठाने को तैयार ईरान!
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है. उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी बातचीत में इसे दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। 

वहीं अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर भी दबाव है कि वे यह सुनिश्चित करें कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। 

अमेरिका ने ईरान में किए कई बड़े स्ट्राइक, रेलवे पुल भी ध्वस्त
इस बीच ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों पर हमला किया और इसे होर्मुज में जहाजों पर हमलों के जवाब के रूप में पेश करना “झूठा बहाना” है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। 

अमेरिका के हमले के बाद कतर, कुवैत और बहरीन पर हमला
उधर ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का भी दावा किया है. वहीं होर्मुज के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप समेत कई इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं. अगर दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट पर लंबा असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, गैस सप्लाई, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। 

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