जल जीवन मिशन 2.0 छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव नीति पर उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

जल जीवन मिशन 2.0 छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव नीति पर उच्च स्तरीय बैठक संपन्न

हर घर शुद्ध जल सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी, होगा सोशल ऑडिट

रायपुर,
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता और सुचारू संचालन को लेकर आज मंत्रालय (महानदी भवन) में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन के अधिकारियों के साथ संचालन एवं रखरखाव नीति पर व्यापक चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

पंचायतों को हस्तांतरित होगी व्यवस्था

         बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राज्य में निर्मित सभी नल-जल योजनाओं का सफल संचालन शासन के निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण घरों में प्रतिदिन नल से शुद्ध जल मिले, इसके लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जाए। पेयजल योजनाओं की संस्थागत व्यवस्था को पूरी तरह से ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाएगा, जिसके लिए पंचायतों को हर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इन योजनाओं का रखरखाव ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से होगा, जिससे जन-सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

सोशल ऑडिट और ग्राम सभाओं में चर्चा अनिवार्य

         पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि योजनाओं का सही संचालन और गुणवत्तापूर्ण पेयजल की आपूर्ति जांचने के लिए सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) कराया जाए। इसके साथ ही, प्रत्येक गाँव की ग्राम सभा में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति के मुद्दे पर अनिवार्य रूप से चर्चा सुनिश्चित की जाए।

वाटर मीटर लगाने और वित्तीय प्रबंधन पर विचार

       बैठक के दौरान योजना के दीर्घकालिक क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से मंथन हुआ। योजनाओं के रखरखाव के लिए बजट प्रबंधन और उचित जल शुल्क निर्धारण पर चर्चा हुई। जल की बर्बादी (क्षति) को कम करने और बेहतर राजस्व प्राप्ति के लिए भविष्य में बजट प्रावधानों के अनुसार वाटर मीटर लगाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। पेयजल की गुणवत्ता का मूल्यांकन, विभिन्न स्तरों पर मॉनिटरिंग व्यवस्था, अनुपालन और सामुदायिक भागीदारी लेखा परीक्षा को लेकर अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।

       बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ नीति के प्रारूप और उसके विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित जल जीवन मिशन, पीएचई और अन्य संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Bhilai Steel Plant में बड़ा हादसा, 50 फीट नीचे गिरा क्रेन का केबिन; ऑपरेटर गंभीर घायल

दुर्ग.

भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस एरिया में शुक्रवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। ब्लास्ट फर्नेस के रॉ मैटेरियल एरिया में संचालित ओवर ब्रिज क्रेन नंबर-4 का केबिन अचानक टूटकर 50 फीट नीचे गिर गया। हादसे में क्रेन ऑपरेटर ठेका मजदूर रविंद्र चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गया।

केबिन नीचे गिरते समय बीच में स्टील बीम से टकराता हुआ नीचे पहुंचा। इसी वजह से वह सीधे जमीन पर नहीं गिरा, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, केबिन के भीतर बैठे ऑपरेटर को अंदरूनी चोटें आई हैं।
हादसे के तुरंत बाद घायल रविंद्र चौधरी को मेन मेडिकल पोस्ट ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें सेक्टर-9 अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती कर निगरानी में रखा है। हादसे की सूचना मिलते ही बीएसपी के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

बताया जा रहा है कि संबंधित ओवर ब्रिज क्रेन का महज चार दिन पहले ही सेफ्टी इंस्पेक्शन करने के बाद संचालन के लिए सुरक्षित घोषित किया गया था। इसके बावजूद केबिन का टूटकर गिर जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब यह जांच का विषय होगा कि हादसा तकनीकी खराबी, रखरखाव में लापरवाही या किसी अन्य कारण से हुआ।

CG High Court: ऑयल कंपनी का अनुबंध रद्द करना सही, लेकिन देरी पर कोर्ट ने लगाया जुर्माना

बिलासपुर.

हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा एक महिला आवेदक का प्रारंभिक अनुबंध रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि ऑयल कंपनियों के नीतिगत नियमों के अनुसार राष्ट्रीय या राजकीय राजमार्गों पर ग्रामीण श्रेणी के रिटेल आउटलेट नहीं खोले जा सकते।

हालांकि, अधिकारियों की लापरवाही और देर से की गई जांच के कारण महिला को हुई मानसिक व आर्थिक परेशानी के लिए कोर्ट ने कंपनी पर 1 लाख रुपये का हर्जाना देने के निर्देश भी दिए हैं। एचपीसीएल ने 14 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रिटेल आउटलेट डीलरशिप के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता अनंता चौधरी ने सरायपाली-पदमपुर रोड स्थित ग्राम नवागांव के खसरा नंबर 339/1 की जमीन का प्रस्ताव देकर ”ओपन” कैटेगरी में आवेदन किया। स्क्रूटनी और मौका मुआयना के बाद कंपनी ने 29 दिसंबर 2020 को उनके पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिया। आशय पत्र मिलने के बाद महिला ने सुरक्षा निधि के रूप में 5 लाख और 3.60 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट जमा किए। इसके अलावा जिला कलेक्टर से एनओसी ली, जमीन का सीमांकन कराया, बैंक से लोन लेकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया और बिजली का ट्रांसफार्मर भी लगवा लिया।

पंप शुरू होने के ठीक पहले रद्द किया अनुबंध
कंपनी ने पेट्रोल पंप शुरू होने ही वाला था कि 31 दिसंबर 2021 को कंपनी ने उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी जमीन स्टेट हाईवे नंबर 16 पर स्थित है। महिला ने जवाब में कहा कि जमीन ग्रामीण क्षेत्र के भीतर ही आती है। लेकिन कंपनी ने उनके जवाब को अमान्य करते हुए 1 फरवरी 2022 को उनका आशय पत्र निरस्त कर दिया और उनके ड्राफ्ट वापस कर दिए। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

डीलर सिलेक्शन गाइडलाइंस का दिया हवाला
एचपीसीएल की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि ”डीलर सिलेक्शन गाइडलाइंस” के अनुसार, ग्रामीण पेट्रोल पंप कभी भी नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, एक्सप्रेस वे या नगर पालिका सीमा के भीतर नहीं खोले जा सकते। तेल कंपनी ने कहा, याचिकाकर्ता की जमीन स्टेट हाईवे-16 पर पाई गई। शुरुआती दौर में यह तथ्य सामने नहीं आ पाया था, इसलिए एलओआई रद्द करना पड़ा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि नियमों के खिलाफ जाकर पेट्रोल पंप बहाल करने का आदेश नहीं दिया जा सकता, इसलिए एलओआई रद्द करने का फैसला कानूनी रूप से सही है। लेकिन कंपनी की लेटलतीफी को अनुचित पाकर जुर्माना भी किया।

खरगोन की पहली महिला DIG बनीं सिमाला प्रसाद, पदभार संभालते ही अवैध हथियार और गांजा खेती पर सख्ती के संकेत

खरगोन

खरगोन में निमाड़ रेंज की पहली महिला डीआईजी सिमाला प्रसाद ने शुक्रवार को अपना पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर एसपी रवींद्र वर्मा और एएसपी बिट्टू सहगल ने उनका स्वागत किया। पदभार संभालने के बाद डीआईजी प्रसाद ने स्टाफ से शिष्टाचार भेंट की। 

डीआईजी सिमाला प्रसाद ने कहा कि निमाड़ के चारों जिलों – खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी में मजबूत कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने जनता को बेहतर पुलिसिंग प्रदान करने और लंबित मामलों के अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने पर जोर दिया।

अवैध काम करने वालों को डेटाबेस बनेगा उन्होंने अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की बात कही। डीआईजी ने विशेष रूप से अवैध देशी कट्टों और गांजे की खेती को पूरी तरह से खत्म करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने बताया कि इस दिशा में पहले भी कार्रवाई हुई है और यह आगे भी जारी रहेगी।

सिमाला प्रसाद ने कहा कि अब इंटीग्रेटेड कंबाइंड एफर्ट के साथ लगातार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि निमाड़ के तीन जिलों में अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों का डेटाबेस तैयार कर उनके पुनर्वास का प्रयास किया जाएगा, ताकि उन्हें अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि इस दिशा में पहले भी काम हुआ है, लेकिन अब और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।

 

धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण देने की मांग, तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

चेन्नई

अभिनेता से नेता बने विजय थलपति धर्मांतरण कराकर मुस्लिम बने लोगों को भी आरक्षण दिला के पक्ष में हैं। यही वजह है कि तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया था कि धर्मांतरण के बाद इस्लाम अपनाने वाला कोई भी व्यक्ति पिछड़ा वर्ग मुस्लिम के दर्जे का दावा नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी साल 2024 के एक आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

तमिलनाडु की सरकार के सचिव की ओर से दायर इस अपील में मूल याचिकाकर्ता समीर अहमद एन, जिला कलेक्टर, राजस्व मंडल अधिकारी और तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया है। इन प्रतिवादियों ने शीर्ष अदालत में पहले ही कैविएट दाखिल कर रखी है।

क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद साल 2022 में थूथुकुडी जिले के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था। हिंदू माता-पिता के घर जन्मे इस व्यक्ति ने इस्लाम धर्म अपना लिया था और अपना नाम बदलकर समीर अहमद एन रख लिया था। साल 2015 में जारी एक प्रमाण पत्र में पुष्टि की गई थी कि याचिकाकर्ता ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने कयातुर के तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर मुस्लिम लेब्बाई समुदाय का प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की। उनका दावा है कि वह इसी उप-जाति की प्रथाओं का पालन करते हैं। हालांकि, तहसीलदार ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

क्या था सरकार का 2024 का आदेश?
इस मामले के लंबित रहने के दौरान ही तमिलनाडु सरकार ने साल 2024 में एक सरकारी आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया कि यदि पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, विमुक्‍त जनजातियों या अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाता है तो उसे आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी BC (Muslim) के रूप में माना जाना चाहिए।

मद्रास हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क और आदेश को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि जब कोई हिंदू व्यक्ति इस्लाम में परिवर्तित होता है तो वह अपनी पिछली हिंदू जाति या उप-जाति के लाभों को आगे नहीं ले जा सकता है। इस्लाम में किसी व्यक्ति की स्थिति इस बात से तय नहीं होती कि धर्मांतरण से पहले वह किस जाति का हिस्सा था। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “ईसाई मिशनरियों और इस्लामी प्रचारकों का हमेशा से यह रुख रहा है कि उनके धर्म हिंदू धर्म के विपरीत सामाजिक समानता प्रदान करते हैं।”

हाईकोर्ट ने आगे कहा, “धर्मांतरण कराने के लिए ऐसा स्टैंड लेने के बाद अब यह दावा करना पूरी तरह से कपटपूर्ण है कि इस्लाम में भी जातिगत पदानुक्रम मौजूद है। हमारी नजर में कुछ संप्रदायों को पिछड़ा और शेष को अगड़ा के रूप में वर्गीकृत करना कुरान के आदेशों के विपरीत है। इस्लाम एक समतावादी समाज की स्थापना करना चाहता है, जहां ईश्वर की नजर में हर कोई समान है और वहां कोई सामाजिक पदानुक्रम नहीं है।”

हाईकोर्ट के इसी फैसले के बाद अब तमिलनाडु सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जहां इस बात पर अंतिम फैसला होना है कि क्या धर्मांतरित मुस्लिमों को पिछड़ी जाति के तहत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या नहीं।

TMC फंड से लग्जरी जेट खरीदने का आरोप, ममता पर ED की जांच में बड़ा खुलासा!

कलकत्ता

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने पार्टी के तीन बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं. ED का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं, जिनसे यह संदेह पैदा हुआ है कि पार्टी के पैसों से एक लग्जरी बिजनेस जेट और एक वीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदा गया, लेकिन बाद में उन्हीं विमानों को किराए पर लेकर इस्तेमाल किया गया। 

यह पहली बार है जब ED किसी राजनीतिक दल की फंडिंग की स्वतंत्र रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है. इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के अकाउंट की जांच दिल्ली आबकारी नीति मामले के तहत की गई थी। 

कोलकाता की एविएशन कंपनी पर छापे से खुला मामला

यह पूरा मामला कोलकाता स्थित एविएशन मैनेजमेंट और लीजिंग कंपनी Carewell Aviation India Pvt Ltd पर ED की छापेमारी के बाद सामने आया. एजेंसी के मुताबिक, यह कंपनी सितंबर 2021 में बनाई गई थी. इसी साल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी। 

ED के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच TMC के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन को ट्रांसफर किए गए. जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने इनमें से 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को भेज दिए। 

112 करोड़ रुपये में खरीदे गए जेट और हेलिकॉप्टर
ED का आरोप है कि TMC से मिले पैसों का इस्तेमाल कर केयरवेल एविएशन ने करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से एक Embraer Legacy 600 बिजनेस जेट और एक Agusta 109 SP हेलिकॉप्टर खरीदा। 

Embraer Legacy 600 ब्राजील की कंपनी Embraer द्वारा निर्मित एक मिड-साइज लग्जरी बिजनेस जेट है, जिसमें फ्लैट बेड में बदलने वाली सीटें और वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध हैं. वहीं Agusta 109 SP इटली की कंपनी Leonardo (पूर्व में AgustaWestland) का हाई-स्पीड ट्विन इंजन वीआईपी हेलिकॉप्टर है। 

केमैन आइलैंड्स से भी आया पैसा
ED की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए केमैन आइलैंड्स स्थित एक कंपनी से लगभग 16 करोड़ रुपये (करीब 17 लाख अमेरिकी डॉलर) का असुरक्षित कर्ज (Unsecured Loan) लिया गया था। 

केमैन आइलैंड्स दुनिया भर में ऑफशोर कंपनियों के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है. एजेंसी अब इस विदेशी फंडिंग के सोर्स और उद्देश्य की भी जांच कर रही है। 

सबसे बड़ा सवाल- अपने पैसों से खरीदा विमान, फिर उसी का किराया क्यों?
ED की जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि जिन विमानों को कथित तौर पर TMC के फंड से खरीदा गया, बाद में वही विमान पार्टी को किराए पर दिए गए. एजेंसी का कहना है कि विमान खरीदने के बाद केयरवेल एविएशन ने उन्हें TMC को चार्टर सेवा के रूप में उपलब्ध कराया और विमान इस्तेमाल करने के नाम पर पार्टी से लगातार भुगतान लिया गया। 

सरल शब्दों में समझें तो यह ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति अपने ही पैसे से कार खरीदे, लेकिन बाद में उसी कार का इस्तेमाल करने के लिए हर बार किराया भी देता रहे. ED को शक है कि यह पूरा सिस्टम असली लेनदेन को छिपाने और पार्टी के फंड को दूसरी जगह ट्रांसफर करने (Siphoning of Funds) के उद्देश्य से बनाई गया हो सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 

VVIP चार्टर सेवा देती थी कंपनी
बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, केयरवेल एविएशन पश्चिम बंगाल के कई वीवीआईपी नेताओं को चार्टर विमान उपलब्ध कराती थी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इस कंपनी की चार्टर सेवाओं का इस्तेमाल करते थे. ED का कहना है कि यही वजह है कि विमान खरीद और उसके बाद हुए भुगतान की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। 

कैसे दर्ज हुई FIR
यह जांच बिधाननगर पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR के आधार पर शुरू हुई. शिकायत तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक बिश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी. बिश्वनाथ दास मई महीने में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे. इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर वित्तीय जांच शुरू की। 

TMC ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस ने ED की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है. पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि उसके सभी वित्तीय लेनदेन पूरी पारदर्शिता के साथ किए गए हैं. पार्टी का कहना है कि सभी चंदों और दान की जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग और आयकर विभाग को दी गई है. इसके अलावा इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां भी पहले ही भारतीय स्टेट बैंक के जरिये सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। 

TMC ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। 

एक सवाल, जिसने उलझा दी जांच
फिलहाल ED की जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर विमान और हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए धन पार्टी की ओर से दिया गया था, तो फिर उन्हीं विमानों के इस्तेमाल के लिए पार्टी को दोबारा किराया क्यों देना पड़ा? एजेंसी इसी वित्तीय मॉडल और पैसों के सोर्स की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. वहीं तृणमूल कांग्रेस सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बता रही है। 

राज्यसभा में BJP का बड़ा दांव! उपचुनाव के बाद वही रहेंगे तीनों सांसद, बदलेगी सिर्फ पार्टी

 नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने खाली हुई राज्यसभा की तीन सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है. इस हादसे की सबसे दिलचस्प बात ये है कि उपचुनाव के बाद भी संसद के उच्च सदन में भेजने वाले चेहरे वही रहने की उम्मीद है, बस उनकी पार्टी का रंग बदल चुका है। 

BJP इन तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है. दूसरी तरफ, आपसी गुटबाजी और बिखराव से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस के सामने राज्यसभा में अपनी ताकत और कम होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। जून में टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों- सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपनी ही पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद इन नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। 

बीजेपी में शामिल होते ही उम्मीदवार घोषित
सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक अब ये बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. उन्होंने आज ही बीजेपी जॉइन की और पार्टी ने आज ही उन्हें ही अपना उम्मीदवार बना दिया है। 

संसदीय नियमों के मुताबिक, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बड़ाइक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था. अब इन खाली सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहे हैं और यही तीनों नेता एक बार फिर उम्मीदवार होंगे. सिर्फ उनकी पार्टी नई होगी। 

विधानसभा का गणित: बीजेपी का पलड़ा भारी
बंगाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो नंबर गेम पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में झुका हुआ है. 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास अपने 208 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव के सिस्टम के मुताबिक, तीन सीटों वाले इस उपचुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 70 वोटों की जरूरत होगी।

बीजेपी के पास विधायकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वो बिना किसी बाहरी समर्थन के अपने तीनों उम्मीदवारों को आसानी से 70, 69 और 69 वोट दिला सकती है. इस गणित के कारण बीजेपी की तीनों सीटों पर जीत पूरी तरह पक्की मानी जा रही है। 

दो गुटों में बंटी टीएमसी, चुनौती बड़ी
बीजेपी के इस बड़े ‘खेले’ के सामने टीएमसी बेबस नजर आ रही है. किसी भी विरोधी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 70 वोटों की जरूरत होगी. वैसे तो टीएमसी के टिकट पर जीते विधायकों की कुल संख्या अभी भी करीब 80 है. लेकिन पार्टी के भीतर मचे घमासान ने इसे कमजोर कर दिया है. टीएमसी के विधायक अब दो धड़ों में बंट चुके हैं- एक खेमा ममता बनर्जी के साथ है, तो दूसरा बागी गुट विधानसभा में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में काम कर रहा है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर टीएमसी एकजुट होती, तो वह कम से कम एक सीट के लिए मुकाबला कड़ा कर सकती थी. लेकिन अंदरूनी लड़ाई इतनी बढ़ चुकी है कि दोनों गुटों के बीच किसी आम सहमति की गुंजाइश खत्म हो गई है. बागी गुट का दावा है कि टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पहले ही रीताब्रत बनर्जी का समर्थन किया था और अब उनके साथ करीब 65 विधायक हैं। 

‘विश्वासघात’ बनाम ‘नेतृत्व का संकट’
ममता बनर्जी का खेमा इस नुकसान को कम आंकने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि ये उन नेताओं का ‘विश्वासघात’ है जिन्होंने संकट के समय पार्टी को छोड़ दिया. टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘ये सीटें टीएमसी की थीं, जो पिछले चुनाव में पार्टी की ताकत के दम पर जीती गई थीं. कुछ लोगों ने मुश्किल समय में पार्टी छोड़ दी, बंगाल की जनता सब देख रही है। 

दूसरी तरफ, बागी गुट के नेताओं का कहना है कि ये कोई आम इस्तीफा नहीं है, बल्कि ये पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लेकर अविश्वास का नतीजा है. उन्होंने कहा, ‘नेतृत्व ने संगठन के भीतर से मिल रही चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. असली मुद्दा राज्यसभा सीट का नहीं, बल्कि ये है कि चुने हुए प्रतिनिधियों का अब मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा क्यों नहीं रहा। 

फिलहाल, दोनों गुटों के बीच टीएमसी के नाम, सिंबल और संगठन पर कब्जे की लड़ाई चुनाव आयोग के सामने लंबित है. अगर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव में बीजेपी इन तीनों सीटों पर जीत हासिल करती है, तो राज्यसभा में उसकी ताकत बढ़ेगी और टीएमसी का कद घटेगा। 

Bastar News: अंतिम चरण में गोंचा महापर्व की तैयारियां, उत्सव को लेकर बढ़ा उत्साह

बस्तर.

बस्तर में ऐतिहासिक गोंचा महापर्व की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं. सदियों पुरानी परंपरा को सहेजे यह महापर्व एक बार फिर पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंगने जा रहा है. चंदन यात्रा की रस्म के साथ पर्व का विधिवत शुभारंभ हो चुका है.

सिरहासार भवन परिसर में करीब 32 फीट ऊंचे विशाल रथ का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. रथ के चारों पहिए तैयार हो चुके हैं और कारीगर अंतिम स्वरूप देने में जुटे हैं. श्री जगन्नाथ मंदिर और सिरहासार भवन में रंग-रोगन व सजावट का कार्य जारी है. 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ का नेत्रोत्सव मनाया जाएगा. 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ यात्रा के साथ सिरहासार भवन पहुंचेंगे..इसके बाद नौ दिनों तक श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे. लगभग 619 वर्षों से मनाया जा रहा यह पर्व बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है. रियासतकाल से चली आ रही इस परंपरा का आज भी वैभव बरकरार है. प्रदेश सहित देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इस आयोजन के साक्षी बनते हैं. गोंचा पर्व एक बार फिर बस्तर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगा.

रथयात्रा के लिए श्रद्धालुओं को रेलवे का तोहफा
बस्तर.
पुरी रथयात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है. जगदलपुर और पुरी के बीच विशेष ट्रेन सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया है. यह सुविधा रथयात्रा के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उपलब्ध कराई जा रही है. 15 और 23 जुलाई को विशेष ट्रेन जगदलपुर से पुरी के लिए रवाना होगी. वहीं 16 और 24 जुलाई को वापसी में पुरी से जगदलपुर के लिए संचालित की जाएगी. ट्रेन कोरापुट, रायगढ़ा, विजयनगरम, श्रीकाकुलम रोड, ब्रह्मपुर और खुर्दा रोड सहित प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी. कुल 12 कोच वाली इस ट्रेन में जनरल और स्लीपर दोनों वर्ग की सुविधा उपलब्ध रहेगी. दिव्यांग यात्रियों के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है. रेलवे का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है. हर वर्ष बड़ी संख्या में बस्तर से श्रद्धालु पुरी रथयात्रा में शामिल होने जाते हैं. ऐसे में यह विशेष ट्रेन धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगी. यात्रियों से यात्रा से पहले आरक्षण और समय सारिणी की जानकारी लेने की अपील की गई है. रेल सुविधा से इस बार रथयात्रा का सफर और अधिक सहज होने की उम्मीद है.

CG Politics: CM साय आज BJP की अहम बैठक में होंगे शामिल, डिप्टी CM साव का बेमेतरा दौरा

रायपुर.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज भाजपा प्रदेश कार्यालय के लिए रवाना होंगे. यहां आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में वे शामिल हो रहे हैं. यह बैठक करीब दो घंटे तक चलेगी, जिसमें संगठन और विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा होने की संभावना है. बैठक समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री अपने निवास लौट आएंगे.

करीब दो घंटे चलेगी बैठक
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित यह बैठक लगभग दो घंटे तक चलेगी। इसमें पार्टी संगठन को मजबूत करने, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा और वर्तमान राजनीतिक व प्रशासनिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रमुख नेता भी मौजूद रहेंगे।

बैठक के बाद निवास लौटेंगे मुख्यमंत्री
प्रदेश स्तरीय बैठक समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने सरकारी निवास लौट जाएंगे। इस बैठक को संगठन और सरकार के समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बेमेतरा दौरा
रायपुर. उपमुख्यमंत्री अरुण साव आज बेमेतरा जिले के दौरे पर रहेंगे. वे रायपुर से रवाना होकर जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 1 बजे विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. सभी कार्यक्रमों के बाद वे दोपहर 3 बजे बेमेतरा से रायपुर लौटेंगे.

CG Jobs 2026: छत्तीसगढ़ में 1000+ पदों पर होगी भर्ती, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी

दुर्ग.

अगर आप भी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका बन सकता है. दुर्ग जिले में शुक्रवार को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय नया भवन परिसर में रोजगार मेला लगने वाला है. इसमें 1000 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए अलग-अलग कंपनियां आएंगी. इस रोजगार मेले में 10वीं पास भी शामिल हो सकते हैं.  

रोजगार मेले में अब तक 15 कंपनियां शामिल होंगी. 10वीं, 12वीं, स्नातक, स्नातकोत्तर, आईटीआई, डिप्लोमा इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग स्नातक, एमबीबीएस, बीएएमएस, नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम, डिप्लोमा पैरामेडिकल सहित अन्य योग्यताधारी अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं. इच्छुक उम्मीदवार रोजगार विभाग की वेबसाइट www.erojgar.cg.gov.in या छत्तीसगढ़ रोजगार ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के लिए रोजगार पंजीयन अनिवार्य होगा.

बालोद में भी लगेगा प्लेसमेंट कैंप
बालोद में आज शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, गुण्डरदेही में रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा. इस रोजगार मेले में 10वीं, 12वीं, बीएससी एग्रीकल्चर, स्नातक, स्नातकोत्तर, पीजीडीसीए, बीएससी नर्सिंग, मेडिकल कोर्स सहित अन्य योग्यताधारी अभ्यर्थियों के लिए तीन निजी कंपनियों द्वारा कुल 851 तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती की जाएगी. इनमें एसआर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, दुर्ग में 575 पद, सेफ इंटेलीजेंट सिक्यूरिटी सर्विसेस, भिलाई में 206 पद और पुस्कल एग्रोटेक लिमिटेड, रायपुर में 70 पदों पर भर्ती की जाएगी. विभाग ने बताया कि भर्ती से संबंधित रिक्तियों और अन्य जानकारी रोजगार विभाग की वेबसाइट एवं मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, दुर्ग से संपर्क कर सकते हैं.

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