अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाये जाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाये जाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अतिथि विद्वानों की मांगों के संबंध में विचार के लिए सरकार ने गठित की है समिति
उच्च शिक्षा में हमारी सकल पंजीयन दर राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर
मप्र को 2029 तक नशामुक्त प्रदेश बनाने सभी एकजुट होकर करेंगे प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन में हुआ अभिनंदन

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि हम पूरी वसुधा को अपना कुटुंब समझते हैं। हम सबके कल्याण की कामना करते हैं। सदियों से गुरूकुल शिक्षा पद्धति हमारी पहचान रही है। गुरू-शिष्य परम्परा से हमारी कई पीढ़ियां शिक्षित-दीक्षित, पोषित और पल्लवित हुई हैं। हमारे महाविद्यालय उसी परम्परा के प्रतीक हैं। इनमें शिक्षा देने वाले अतिथि विद्वान युवा पीढ़ी का भविष्य संवारने वाले पावन मंदिर के पुजारी हैं, जो अनेक युवाओं के जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। अतिथि विद्वानों के परिश्रम का सम्मान करते हुए राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वानों की सभी मांगों पर विचार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इस समिति की अनुशंसाएं आना अभी शेष है। समिति की अनुशंसाएं प्राप्त होते ही सरकार उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालयों में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों द्वारा इनके हित में कई नवाचारी एवं सम्मानपूर्ण निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनदंन किया गया। अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं तुलसी का पौधा भेंटकर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अतिथि विद्वान हमारे परिवार के सदस्य हैं। इनके कल्याण के लिए हम हमेशा से प्रतिबद्ध हैं। अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति देश के दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी और मध्यप्रदेश में सबसे बेहतर मॉडल वाली व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के हर जिले में एक-एक पीएमएक्सीलेंस कॉलेज खोले हैं। खरगौन, गुना और सागर में नए शासकीय विश्वविद्यालयों की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। बेहतर स्कूल शिक्षा के लिए राज्य में सांदीपनि विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले राज्य के सकल पंजीयन दर और राष्ट्रीय दर में बड़ा अंतर था, परंतु आज प्रदेश का सकल पंजीयन दर (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर हो गई है। स्कूल शिक्षा में भी मध्यप्रदेश की ड्रॉप आउट दर शून्य पर आ गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति: 2020 लागू है। अब केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे आगे बढ़कर सोचने की आवश्यकता है। वर्तमान दौर में नई संभावनाएं, नवाचार, संवेदनाएं और नैतिक मूल्यों के आधार पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आगे लेकर जाने की जरूरत है। भारत दुनिया का सबसे युवा राष्ट्र है और इसमें भी मध्यप्रदेश सबसे युवा आबादी वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए 13 आकस्मिक और 3 ऐच्छिक अवकाश देने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही महिला अतिथि विद्वानों के लिए प्रसूति अवकाश भी सुनिश्चित किया गया है। अतिथि विद्वानों को उनके घर के पास ही कॉलेज चुनने की सुविधा भी दी गई थी। साथ ही मप्र लोक सेवा आयोग की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों के लिए 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए इन्हें आयु सीमा में 10 वर्ष की छूट भी दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में 117 और वर्ष 2024 में 48 अतिथि विद्वान सहायक प्राध्यापक के शासकीय नियमित पद पर नियुक्ति प्राप्त कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अतिथि विद्वानों के हित में अग्रणी भारतीय मजदूर संघ की सराहना करते हुए कहा कि इस संघ ने हमेशा सच्चाई और अच्छाई के लिए अपनी महती भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई प्रकार की चुनौतियों के बीच पारदर्शी और संवदेनशील सोच से निरंतर आगे बढ़ रही है। हम मध्यप्रदेश के समग्र विकास के लिए कटिबद्ध हैं। सभी क्षेत्रों में हर वर्ग के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। सरकार का काम तमाम बाधाओं को दूर करते हुए असरदार तरीके से होना चाहिए। हमारी सरकार ने शासकीय कामकाज को और भी जनहितैषी एवं असरकारी बनाया है।

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ ने ‘देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम’ के राष्ट्रहितैषी नारे के साथ सदैव मजदूर वर्ग की आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित में 5 बड़े निर्णय लेकर इनके हितों की रक्षा की गई है। सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में अतिथि विद्वानों को 25 प्रतिशत पदों पर आरक्षण हम दे रहे हैं। अतिथि विद्वानों को वर्ष में एक बार स्थान परिवर्तन करने और फॉल-आउट होने की स्थिति में प्रत्येक माह दो अवसर देकर दोबारा काम पर रखने की व्यवस्था की गई है।

अतिथि विद्वान सम्मेलन को कुलदीप सिंह गुर्जर ने भी संबोधित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योग-व्यापार को प्राथमिकता देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं। राज्य सरकार ने अतिथि विद्वानों के हित में इनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

सम्मेलन में मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ. अशोक कड़ेल, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा मनीष सिंह, राज्य अतिथि विद्वान संघ के बी.एल. दोहरे, डॉ. देवराज सिंह, डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया सहित बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आए उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश इस वर्ष नक्सलवाद जैसी समस्या से मुक्त हो गया है। अब हमारी लड़ाई समाज में व्याप्त हर प्रकार की नशाखोरी से है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नशामुक्त मध्यप्रदेश बनाने के लिए नया संकल्प लिया है। नशे से लड़ाई में पूरा देश एकजुट है। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने वर्ष 2029 तक नशामुक्त भारत का संकल्प लिया है। इसमें मध्यप्रदेश भी अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अतिथि विद्वानों सहित सभी युवाओं से अपील करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को वर्ष 2029 तक नशामुक्त प्रदेश बनाने के लिए हम सब कदम से कदम मिलाकर काम करें।

 

कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड केस में सजा बरकरार

दतिया

दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. वह मानकर चल रहे थे कि फैसला उनके हक में आएगा, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने भारती की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी. कल कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. भारती ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं. उन्हें ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया था और तीन साल की सजा सुनाई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में 3 साल की सजा सुनाई थी। राजेंद्र भारती ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजेंद्र भारती की याचिका खारिज कर दी है और ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। 

जब ट्रायल कोर्ट ने राजेंद्र भारती को दोषी माना था, तब उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई थी. इसके बाद चुनाव आयोग ने दतिया में उपचुनाव का ऐलान कर दिया था. यहां पर उम्मीदवारों के नामांकन की आखिरी तारीख 13 जुलाई है. जब भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है, तो इससे साफ हो गया है कि उपचुनाव होगा. बीजेपी और कांग्रेस ने अभी तक उपचुनाव के लिए अपने-अपने कैंडिडेट का ऐलान नहीं किया है, क्योंकि दोनों दल शायद इस फैसले का ही इंतजार कर रहे थे। 

दरअसल, राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने एक पुराने कॉपरेटिव बैंक एफडी घोटाले और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया था. अदालत ने 2 अप्रैल 2026 को उन्हें 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

हाई कोर्ट में क्या हुआ?
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले उनकी जेल की सजा को निलंबित कर दिया था. हालांकि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी मांग पर राहत नहीं मिली. अब अदालत ने उनकी अपील भी खारिज कर दी है. राजेंद्र भारती ने अदालत से चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी राहत मांगी थी, लेकिन उन्हें इसमें भी सफलता नहीं मिली। 

मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: केन-बेतवा परियोजना के हर विस्थापित को ₹12.50 लाख, मुआवजे के लिए ₹202 करोड़ अतिरिक्त मंजूर

पन्ना 
 मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने केन बेतवा लिंक परियोजना से जुड़ी मझगाय डैम और रुंझ डैम परियोजना के विस्थापितों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने विस्थापित के लिए अहम फैसला लेते हुए 202.50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि स्वीकृत कर दी है. इसका सीधा फायदा मुआवजा पाने वाले विस्थापितों को मिलेगा। 

कितना होगा विस्थापितों को फायदा?
रुंझ डैम परियोजना व मझगाय डैम परियोजना के विस्थापितों को सीधे तौर पर 7.5 लाख रु का अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा. पहले जहां ये राशि ₹5 लाख रु थी, तो वहीं अब इसमें 7.5 लाख रु और जोड़ दिए गए हैं. इससे विस्थापितों को मुआवजा राशि 12 लाख 50 हजार दिए जाएंगे. लंबे समय से विस्थापित यही मांग कर रहे थे कि उन्हें मुआवजे का पैकेज 12.50 लाख रु दिया जिसे मोहन यादव सरकार ने स्वीकार करते हुए पन्ना जिले के लिए 202.50 करोड रुपए का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है। 

12.50 लाख हर विस्थापित के खाते में
कैबिनेट के इस फैसले के बार में बताते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री व पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, ” मुख्यमंत्री द्वारा केन बेतवा लिंक परियोजना एवं रुन्झ डैम परियोजना और मझगाय डैम परियोजना के लिए अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया गया है. यह राहत भरी राशि है क्योंकि बहुत दिनों से ग्रामीण इसकी मांग कर रहे थे. अब उन्हें 5 लाख रु की जगह 12.50 लाख रु का पैकेज दिया जाएगा. भूमि अधिकरण की धारा 11 के तहत मुआवजा पन्ना जिले में 2022 में लागू हुआ था और छतरपुर जिले में 2024 में लागू हुआ था यह विसंगति केन बेतवा लिंक परियोजना में थी इसलिए इसमें सुधार कर अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है. यह बहुत ही हर्ष का विषय है. मैं पन्ना की जनता की तरफ से मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं। 

पानी की सप्लाई रोक दी
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने विरोध स्थल पर पीने के पानी की सप्लाई रोक दी है, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजर्गों को नदी का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पानी पीने के बाद कई लोग बीमार पड़ गए हैं। उन्होंने अधिकारियों पर उनकी शिकायतों को दूर करने के बजाए उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

पात्र परिवारों को मिलेंगे 12.5 लाख रुपए मिलेंगे एकमुश्त
इस बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री और पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार ने मझगवां, रुंज और केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्टस से विस्थापित परिवारों के लिए एक विशेष पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी है। इस पैकेज के तहत पात्र परिवारों को 12.5 लाख रुपए तक एकमुश्त पुनर्वास अनुदान मिलेगा।

दोषियों पर कार्रवाई तक आंदोलन चलेगा सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने बताया कि यह केवल मुआवजे की नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि आंशिक सफलता मिली है, लेकिन जब तक हर प्रभावित परिवार को न्याय नहीं मिलता और कथित दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

वर्तमान में धरना स्थल पर आमरण अनशन, मिट्टी सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और चिता आंदोलन एक साथ चल रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी सभी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

आंदोलन वापस नहीं लेंगे
वहीं, उफनदी नदी में कमर तक पानी में खड़े प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। जय किसान संगठन के बैनर तले हो रहे इस विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में मिट्टी सत्याग्रह भी चल रहा है।

‘काला हिरण’ विवाद के बीच मेकर्स का ऐलान, 17 जुलाई को टीजर

फिल्म ‘काला हिरण’ इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है. फिल्म को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, लेकिन इसके बावजूद मेकर्स के हौसले पस्त नहीं हुए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कानूनी सुनवाई के बीच मेकर्स ने अब इस फिल्म का दूसरा पोस्टर जारी कर दिया है. इस नए पोस्टर के सामने आने के बाद फिल्म को लेकर चर्चा और तेज हो गई है.

इसके अलावा मेकर्स ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और इसी सिलसिले में अब आने वाली 17 जुलाई को फिल्म का धमाकेदार वीडियो टीजर भी रिलीज किया जाएगा. फिल्म के फर्स्ट लुक को लेकर पहले ही काफी विवाद हो चुका है.

मेकर्स पीछे हटने को तैयार नहीं
फिल्म ‘काला हिरण’ को बनाने वाले मेकर्स के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है. फिल्म के प्रोड्यूसर ने अपनी बात खुलकर सामने रखते हुए कहा कि इस वक्त वे एक बेहद अजीब और मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. उन्हें एक तरफ जहां दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंडरवर्ल्ड और गैंगस्टर्स की ओर से लगातार धमकियां भी मिल रही हैं. प्रोड्यूसर का कहना है कि वे इस समय कानून और अपराधियों, दोनों के निशाने पर हैं, लेकिन इसके बावजूद वे कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं हैं.

दबाव में झुकने से इनकार
प्रोड्यूसर ने इस बात का भी खुलासा किया कि फिल्म का पहला लुक जारी होने के बाद से ही उन पर इसे हटाने का भारी दबाव बनाया जा रहा था. कई तरह की कोशिशें की गईं ताकि फिल्म को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए. लेकिन मेकर्स ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. उन्होंने साफ कहा कि पहले लुक को हटाने के दबाव का जवाब वे अब चुप रहकर नहीं, बल्कि आने वाली 17 जुलाई को फिल्म का दूसरा वीडियो टीजर रिलीज करके देंगे.

समझौते की कोई गुंजाइश नहीं
फिल्म के भविष्य और इस पूरे विवाद पर अपना स्टैंड पूरी तरह साफ करते हुए प्रोड्यूसर ने कहा कि ‘काला हिरण’ के मुद्दे पर किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. वे अपनी फिल्म की कहानी और इसके कॉन्सेप्ट के साथ खड़े हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे अदालत के भीतर पूरी मजबूती और सम्मान के साथ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और मिल रही धमकियों का भी डटकर मुकाबला करेंगे. मेकर्स के इस बेबाक अंदाज ने साफ कर दिया है कि ‘काला हिरण’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अभी और लंबा चलने वाला है.

राजपाल यादव को बड़ा झटका, चेक बाउंस मामले में फिर जेल भेजने का आदेश

एक्टर राजपाल यादव पर चेक-बाउंस का केस कुछ महीने पहले बहुत चर्चा में था. बॉलीवुड सेलेब्रिटीज से राजपाल को इस मामले से निकालने के लिए काफी फाइनेंशियल मदद मिली थी और फरवरी में वो जेल से जमानत पर बाहर भी आ गए थे. लेकिन अब राजपाल को बड़ा झटका लगा है और उनके एक्शंस को ‘संदिग्ध’ बताते हुए प्रशासन से उन्हें फिर जेल भेजने को कहा है.

हाई कोर्ट ने राजपाल को फिर भेजा जेल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने राजपाल को दोषी मानते हुए सेशंस कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा में संशोधन किया. अदालत ने राजपाल यादव को सातों मामलों में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये की पेमेंट करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा शिकायतकर्ता को 1.04 लाख रुपये और 75 हजार रुपये, जबकि राज्य को 25 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया.

हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी हर मामले में शिकायतकर्ता को 5,51,380 रुपये की पेमेंट करने को कहा है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजपाल की ओर से पहले ही जमा किए जा चुके 2.25 करोड़ रुपये फाइनल पेमेंट में एडजस्ट कर दिए जाएंगे.

चेक बाउंस मामले में पहले भी जेल जा चुके हैं राजपाल
2010 में राजपाल ने अपने प्रोडक्शन में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए 5 करोड़ का उधार लिया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई और राजपाल समय पर उधार चुकता नहीं कर पाए थे. बार-बार पेमेंट्स के लिए दिए चेक बाउंस होने के बाद ये मामला एक लंबी कानूनी लड़ाई बन गया.

इस मामले में हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को पहली बार 2013 में, 10 दिन के लिए जेल भेजा था. लेकिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील के बाद वो 4 दिन में जेल से बाहर आ गए थे. नवंबर 2018 में वो फिर से तीन महीनों के लिए जेल गए और फरवरी 2019 में बाहर आए थे.

फरवरी 2026 में राजपाल एक बार फिर इस मामले में कुछ दिनों के लिए जेल में रहे थे. बाहर आने के बाद उन्होंने अथॉरिटीज के सामने एक इमोशनल अपील में कहा था कि उनके पास न पैसा है और न ऐसे दोस्त जो इस क्राइसिस में उनकी मदद कर सकें. इस अपील के बाद फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें बहुत सपोर्ट मिला था और कई लोग उनकी आर्थिक मदद के लिए भी आगे आए थे.

मगर इसके बाद भी राजपाल अपना उधार नहीं चुकता पर पाए. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने सुनवाई के दौरान अभिनेता के रवैए को ‘संदिग्ध’ बताया और कहा कि उन्हें रकम चुकाने के कई मौके दिए गए, लेकिन वो अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव को अदालत में दिए गए अपने अंडरटेकिंग का पालन करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बार-बार अवसर मिलने के बावजूद उसका पालन नहीं किया.

बकाया रकम के भुगतान को लेकर किए गए समझौते के बार-बार उल्लंघन के कारण कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है. इसी कोर्ट ने राजपाल को राहत भी दी थी. लेकिन राजपाल इस दलील पर अड़े रहे कि जब कुछ दिन जेल काट ली तो अब कैसे पैसे? कौन सा बकाया और कैसी वापसी? कोर्ट ने उन्हें पहले भी चेतावनी दी थी.

यूसुफ पठान के कदम से बढ़ीं अटकलें, शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी को लग सकता है डबल झटका

नई दिल्ली

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। इस मीटिंग के बाद से ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, उन्होंने या भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर आधिकारिक रूप से बैठक के एजेंडा को लेकर कुछ नहीं कहा है। गुरुवार को उन्होंने नाबन्न में सीएम से मुलाकात की थी।

बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय ने भी मुख्यमंत्री से हाल के समय में अलग-अलग मुलाकात की है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि किस मुद्दे को लेकर मुलाकात हुई थी। ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब हाल ही में भाजपा ने राज्यसभा उपचुनाव की तीन सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान किया है।

यूसुफ पठान भी हो चुके हैं बागी
जून में तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों ने अलग होकर NCPI यानी नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर दिया था। खास बात है कि इस लिस्ट में पठान का नाम भी शामिल था। इनमें सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंदोपाध्याय जैसे बड़े नाम भी थे। इसके अलावा टीएमसी के 60 से ज्यादा विधायक भी बागी होकर अलग गुट बना रहे हैं।

सुपरस्टार प्रसनजीत चटर्जी की भी मुलाकात
बंगाली फिल्मों के सुपरस्टार प्रसनजीत चटर्जी भी गुरुवार को सीएम अधिकारी से मिलने पहुंचे थे। दोनों के बीच करीब 2 घंटे तक मुलाकात हुई। उनकी इस मुलाकात को लेकर हालांकि नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं, क्योंकि यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाल में राज्य के दौरे के दौरान अभिनेता के आवास पर जाने के कुछ दिनों बाद हुई।

उन्होंने कहा, ‘राजनीति पर कोई चर्चा नहीं हुई।’ उन्होंने कहा, ‘हमने साथ में कॉफी पी और कुछ देर बातचीत की। राजनीति पर कोई चर्चा नहीं हुई। बाहर कई तरह की अटकलें हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर सही नहीं हैं।’

अलग बैठने मांगी थी जगह
बीते महीने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपे पत्र में 20 सदस्यों ने अलग बैठने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। तब दस्तीदार ने कहा था कि अध्यक्ष से मिले इस समूह में 20 सदस्य है और उनकी संख्या, सदन में पार्टी के सदस्यों की कुल संख्या के दो-तिहाई से अधिक है। साथ ही एनसीपीआई में भी विलय की बात कही थी।

इन सांसदों ने की बगावत
लिस्ट में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदार, डॉ शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष,खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक भी हैं।

CG News: चलती स्कूल वैन का गेट खुला, सड़क पर गिरा मासूम; बड़ा हादसा टला

दुर्ग.

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक मासूम बच्चा चलती स्कूल वैन से सड़क पर गिर गया। गनीमत रही कि वैन के पीछे कोई वाहन नहीं था। वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। यह मामला छावनी थाना क्षेत्र का है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना 8 जुलाई की दोपहर करीब डेढ़ बजे की है। खुर्सीपार स्थित फॉरबेल्स स्कूल की वैन बच्चों को उनके घर छोड़ने निकली थी। नंदिनी रोड पर वैन एक बच्चे को उतारकर आगे बढ़ रही थी इसी दौरान पीछे बैठा एक मासूम का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे सड़क पर गिर पड़ा।

खुले गेट से बाहर गिरा बच्चा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वैन के पीछे का गेट ठीक से बंद नहीं था। ड्राइवर ने जल्दबाजी में बच्चे को उतारने के बाद गेट लॉक नहीं किया। जैसे ही उसने वाहन की रफ्तार बढ़ाई, खुले गेट से बच्चा बाहर गिर गया। बच्चे के सड़क पर गिरने के बाद आसपास के दुकानदारों ने वैन चालक को रोकने के लिए आवाज लगाई, लेकिन वह करीब 300 मीटर आगे निकल चुका था। इसके बाद पीछे चल रहे कुछ बाइक सवारों ने वैन का पीछा कर उसे रोका।

बाद में वहां मौजूद एक महिला ने घायल बच्चे को फिर से स्कूल वैन में बैठाकर आगे भेजा। बताया जा रहा है कि घटना के समय स्कूल वैन में केवल ड्राइवर मौजूद था। उसमें कोई कंडक्टर या सहायक नहीं था, जो बच्चों पर नजर रख सके। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्कूल वैन की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों के परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

उद्योगों के वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

उद्योगों के वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

12 जुलाई को रायपुर में प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के साथ होगी बैठक

मानसून-2026 के वृक्षारोपण अभियान, निगरानी व्यवस्था एवं उद्योगवार एक्शन प्लान पर होगी चर्चा

रायपुर,
 राज्य में मानसून-2026 के दौरान प्रमुख औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित वृक्षारोपण गतिविधियों की समीक्षा तथा आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की अध्यक्षता में 12 जुलाई 2026 को दोपहर 2:00 बजे बेबीलॉन कैपिटल, जी.ई. रोड, रायपुर में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।

बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में मानसून-2026 के दौरान किए जा रहे वृक्षारोपण कार्यक्रमों की प्रगति, उनके प्रभावी क्रियान्वयन, पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव, निगरानी व्यवस्था तथा उद्योगवार एक्शन प्लान की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 08 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में औद्योगिक इकाइयों को व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण, पौधों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय दायित्वों के प्रभावी निर्वहन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। उसी क्रम में अब विभागीय मंत्री ओ.पी. चौधरी स्वयं उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर वृक्षारोपण अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे तथा आगामी कार्ययोजना पर आवश्यक मार्गदर्शन देंगे।

बैठक का उद्देश्य उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से राज्य में हरित आवरण का विस्तार करना, पर्यावरण संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाना तथा वृक्षारोपण कार्यक्रमों के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करना है।

MP Weather: मध्य प्रदेश में बारिश ने पूरा किया 25% कोटा, 32 जिलों में सामान्य से ज्यादा बरसात; पन्ना-सतना में भारी बारिश का अलर्ट

भोपाल
मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश में अब तक निर्धारित बारिश का 25 प्रतिशत कोटा पूरा हो चुका है। अब तक 234.4 मिमी (9.4 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 212.3 मिमी (8.3 इंच) की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन सहित 32 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। अगले 24 घंटों में पन्ना और सतना जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई माह में बारिश का सिलसिला लगातार जारी रहेगा, जिससे बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश की संभावना जताई गई है। पन्ना और सतना जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहां अगले 24 घंटे में 4 इंच या उससे अधिक वर्षा हो सकती है।

मौसम विभाग ने 4 दिन तक प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हलकी बारिश का अनुमान जताया है। पन्ना और सतना जिले में भारी बारिश का अलर्ट है। 24 घंटे के दौरान यहां 4 इंच या इससे ज्यादा पानी गिर सकता है।

इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश का अनुमान है।

गुरुवार को भी कई जिलों में बरसे बादल
गुरुवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मंडला में लगभग पौन इंच वर्षा हुई, जबकि सिंगरौली में आधा इंच से अधिक और बालाघाट में करीब आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बैतूल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना और सीधी में भी बारिश हुई।

जुलाई के नौ दिनों में बदली तस्वीर
जून महीने में आंधी और बारिश का दौर रहने के बावजूद प्रदेश में सामान्य से 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में हुई अच्छी बारिश ने यह कमी पूरी कर दी। अब प्रदेश में औसत से 10 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब भी सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 29 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

मंडला में पौन इंच बारिश, ग्वालियर-जबलपुर समेत 11 जिलों में गिरा पानी
प्रदेश में गुरुवार को भी बारिश का दौर रहा। मंडला में पौन इंच पानी गिर गया। सिंगरौली में आधा इंच से अधिक और बालाघाट में आधा इंच बारिश हुई। बैतूल, ग्वालियर, नर्मदापुरम, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सीधी में भी पानी गिरा।

प्रदेश में 10 प्रतिशत बारिश ज्यादा
प्रदेश में इस बार पूरे जून महीने आंधी-बारिश का दौर रहा। इसके बावजूद कोटे से 30 प्रतिशत पानी कम बरसा, लेकिन जुलाई के 9 दिन ने यह कोटा न सिर्फ पूरा कर दिया, बल्कि 10 प्रतिशत ज्यादा पानी बरसा दिया।

आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 234.4 मिमी यानी, 9.4 इंच पानी गिर चुका है। यह सामान्य बारिश 212.3 मिमी (8.3 इंच) से 10 प्रतिशत ज्यादा है। पूर्वी हिस्से में 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 29 प्रतिशत पानी ज्यादा गिरा है।

पूर्व IAS नियाज खान का विवादित बयान, बोले- मुस्लिम तुर्की जैसा पहनावा अपनाएं; मॉब लिंचिंग का किया जिक्र

भोपाल
अपने बयानों और किताबों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी नियाज खान ने एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट से नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बार उन्होंने देश में होने वाली ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा हिंसा) की घटनाओं को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय को एक अजीबोगरीब और बड़ी सलाह दी है। नियाज खान ने मुसलमानों से अपील की है कि वे भीड़ की हिंसा का शिकार होने से बचने के लिए अपना पहनावा और पारंपरिक हुलिया बदल लें।

‘कुर्ता, पैजामा, दाढ़ी और टोपी’ के कारण आसानी से होती है पहचान
पूर्व IAS नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत में अब तक मुस्लिमों की जितनी भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं, उनमें से अधिकतर मामलों में पीड़ित कुर्ता, पैजामा, दाढ़ी और टोपी वाले पारंपरिक पहनावे में थे। नियाज खान के मुताबिक, इस खास पहनावे के कारण उनकी पहचान बहुत आसानी से हो जाती है और वे उपद्रवियों या हिंसक भीड़ के निशाने पर आ जाते हैं।

तुर्की के मुसलमानों की तरह ड्रेसअप रखने की सलाह
नियाज खान ने भारतीय मुसलमानों को इस स्थिति से बचने के लिए ‘तुर्की मॉडल’ अपनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने लिखा-मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से सुरक्षित रहने के लिए मुस्लिम समुदाय को अपना ड्रेस कोड और हुलिया बदल लेना चाहिए। भारतीय मुसलमानों को तुर्की के मुसलमानों की तरह आधुनिक कपड़े (ड्रेसअप) पहनने चाहिए, ताकि भीड़ के बीच उनकी धार्मिक पहचान छिपी रहे और वे सुरक्षित रह सकें।

लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल
एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कई आजाद देशों ने लोकतंत्र तो अपनाया, लेकिन उसके मूल सिद्धांत नहीं अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के नाम पर नेता और अफसर जमकर पैसा लूटते हैं, जबकि जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है।

भौतिकवाद और राजनीति पर भी पोस्ट
9 जुलाई को किए गए अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लिखा कि भौतिकवाद ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम और ईमानदार लोगों को राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के चुने जाने से लोकतंत्र कमजोर होता है।

दृष्टिकोण से एक व्यावहारिक उपाय बताया
पूर्व आईएएस ने सुझाव दिया कि भारतीय मुसलमानों को तुर्की के मुसलमानों की तरह आधुनिक और सामान्य ड्रेस पहनने पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि धार्मिक पहचान पहली नजर में स्पष्ट नहीं होगी तो भीड़ द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंका कम हो सकती है। उन्होंने इसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक व्यावहारिक उपाय बताया।

सांस्कृतिक परंपराओं से समझौता करने वाली सलाह बताया है
हालांकि, नियाज खान की इस सलाह पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से एक व्यवहारिक सुझाव दिया है। वहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं से समझौता करने वाली सलाह बताया है।

नियाज खान इससे पहले भी अपने बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है, जिस पर कई बार विवाद भी हुआ है।

विपक्ष में अपनी-अपनी राय रख रहे
फिलहाल, उनके इस नए बयान ने मॉब लिंचिंग, व्यक्तिगत सुरक्षा, धार्मिक पहचान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग पक्ष और विपक्ष में अपनी-अपनी राय रख रहे हैं, जबकि इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

पहले भी बयानों से बटोर चुके हैं सुर्खियां
यह कोई पहली बार नहीं है जब नियाज खान ने इस तरह का कोई बड़ा या लीक से हटकर बयान दिया हो। इससे पहले भी वे ब्राह्मण समुदाय, बॉलीवुड फिल्मों और मुस्लिम समाज की आंतरिक कुरीतियों पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं, जिस पर काफी राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ चुकी है।

अब पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा सीधे तौर पर पहनावा बदलने और पहचान छिपाने की इस सलाह के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। जहां कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिहाज से व्यावहारिक सुझाव मान रहे हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और संस्कृति से समझौता करने की बात कहकर इसका विरोध भी कर रहा है।

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