एक्सपो केवल मशीनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि नए अवसरों, हुनर और निवेश का बड़ा मंच है : राज्यमंत्री गौर

एक्सपो केवल मशीनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि नए अवसरों, हुनर और निवेश का बड़ा मंच है : राज्यमंत्री गौर

इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एक्सपो-2026 का किया शुभारंभ

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि “इस तरह के इंडस्ट्रियल एक्सपो सिर्फ मशीनों को दिखाने तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये उद्योगों, नए विचारों, नवाचारों, स्किल डेवलपमेंट और निवेश के नए अवसर देने का एक बड़ा माध्यम बनते हैं। हमारे स्थानीय उद्योगों की तकनीकी तरक्की मध्यप्रदेश के विकास को एक नई रफ्तार दे रही है।” राज्यमंत्री श्रीमती गौर भोपाल के गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ‘इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एक्सपो-2026’ के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर आधुनिक मशीनों की कार्यप्रणाली को करीब से देखा। उन्होंने गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में निर्मित मशीनों की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता और औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय उद्योगों की तकनीकी प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने का कार्य कर रही है।

प्रदर्शनी में ऑटोमेशन, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल उपकरणों और अत्याधुनिक मशीनरी से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित उद्योगों ने अपनी तकनीकों का प्रदर्शन किया। एक्सपो का आयोजन फ्यूचर कम्युनिकेशन और गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। कार्यक्रम में गोविंदपुरा एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गौड़ और फ्यूचर कम्युनिकेशन के लक्ष्मण दुबे मौजूद रहे।

 

महादेव ऐप केस का भोपाल कनेक्शन, टिकटों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप; आहूजा बंधुओं पर लुकआउट सर्कुलर जारी

भोपाल
 देश के बहुचर्चित महादेव बेटिंग ऐप मामले में भोपाल कनेक्शन एक बार फिर सामने आया है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में भोपाल के दो भाइयों विशाल आहूजा और धीरज आहूजा के खिलाफ चार्जशीट पेश की है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है. हालांकि इस पूरे मामले में सीबीआई ने कुल 11 चार्जशीट दाखिल की है. जिसमें 6 चार्जशीट महादेव ऐप से जुड़े करप्शन और बची 5 चार्जशीट सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े मामले में की है। 

भोपाल के 2 भाईयों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी
देश का चर्चित महादेव बेटिंग ऐप मामले में भोपाल के दो भाइयों पर सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है. इसके साथ ही उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. जानकारी के मुताबिक, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा राजधानी भोपाल के लालघाटी क्षेत्र में संचालित एक ट्रेवल्स के संचालक हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों को महादेव बेटिंग ऐप के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर का राइट हैंड माना जाता है. जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 

CBI ने लुकआउट सर्कुलर भी कराया जारी, किया जा सके गिरफ्तार
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी आहूजा बंधुओं के ठिकानों पर छापेमारी कर चुका है. बताया जाता है कि ईडी की कार्रवाई के बाद दोनों भाई देश छोड़कर विदेश फरार हो गए थे. इसके बाद से जांच एजेंसियां लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई हैं. अब सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के साथ ही दोनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तेज हो गई है. एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी कराया है, ताकि देश लौटने या किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। 

महादेव ऐप अवैध ऑनलाइन सट्टे का सिंडिकेट
बताया जा रहा है कि जांच में यह सामने आया है कि महादेव ऐप देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का सिंडिकेट है. इसका संचालन विदेश से किया जा रहा था. मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक इस नेटवर्क को पहुंचाया. सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार किया जा चुका है। 

देश का सबसे बड़ा सट्‌टेबाजी नेटवर्क का खुलासा
जांच में सामने आया है कि महादेव ऐप देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट है, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक इस नेटवर्क का विस्तार किया।

देशभर में अलग-अलग बेटिंग पैनल संचालित कर अवैध कमाई की जाती थी, जिसे फर्जी बैंक खातों और अन्य माध्यमों से विदेश भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि (प्रोटेक्शन मनी) के रूप में दिया जाता था।

प्रमोटर और सहयोगी पश्चिम एशियाई देशों में बसे
सीबीआई ने बताया कि महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई सहयोगी वर्षों पहले पश्चिम एशियाई देशों में भाग गए थे और वहीं से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। मुख्य चार आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है। साथ ही उन्हें फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण की जांच
जांच एजेंसी का कहना है कि सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क, राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण तथा अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है। आने वाले समय में इस मामले में और भी चार्जशीट दाखिल की जाएंगी।

चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामला
गौरतलब है कि महादेव बेटिंग ऐप मामला देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में से एक है. इस मामले में करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन, हवाला नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित सट्टेबाजी सिंडिकेट की जांच सीबीआई और ईडी सहित कई केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं. भोपाल के आहूजा बंधुओं का नाम सामने आने के बाद मध्य प्रदेश से जुड़े इस नेटवर्क की जांच भी और गहन हो गई है। 

 

क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ के टिकट 47 हजार तक पहुंचे, फैंस में जबरदस्त क्रेज

 

हॉलीवुड फिल्म ‘द ओडिसी’ दुनिया भर में इस साल की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्मों में से एक है। क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म हमेशा चर्चा का विषय बनती है। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती हैं। यही वजह है कि ‘द ओडिसी’ को लेकर काफी क्रेज है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टिकट बेचने वाले (स्केल्पर्स) पहले दिन के टिकट 500 डॉलर (लगभग 47500 रुपये) तक में बेच रहे हैं।

फिल्म के लिए दीवाने हैं फैंस
क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ के लिए फैंस की दीवानगी चरम पर है। पिछले महीने जब इसके टिकट की बिक्री शुरू हुई, तो कई टिकटिंग साइट्स क्रैश हो गईं। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक न्यूयॉर्क में एएमसी लिंकन स्क्वायर और लॉस एंजिल्स में एएमसी सिटीवॉक जैसी मशहूर जगहों पर हफ्तों तक के टिकट लगभग बिक चुके हैं। इसके बावजूद लोग इन मशहूर जगहों पर सीट पाने की कोशिश कर रहे हैं। एपी के मुताबिक ईबे पर टिकट बेचने वाले 500 डॉलर (47500 रुपये) से ज्यादा कीमत पर टिकट बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
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भारत में कितनी है टिकटों की कीमत?
भारत में, ‘द ओडिसी’ के आइमैक्स टिकटों की बिक्री रिलीज से एक महीने पहले ही शुरू हो गई थी। फिल्म की रिलीज में एक हफ्ता बाकी है। मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में प्रीमियम टिकट की कीमत 3300 रुपये तक है। ज्यादातर थिएटरों में टिकट बिक चुके हैं

महाकाव्य पर आधारित है फिल्म
आपको बता दें कि फिल्म ‘द ओडिसी’ होमर की ग्रीक महाकाव्य पर आधारित है, जिसे 2500 साल से भी पहले लिखा गया था। बताया जाता है कि यह साहित्य की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली रचनाओं में से एक पर आधारित है।

कब रिलीज होगी फिल्म?
‘द ओडिसी’ में मैट डेमन, इथाका के पौराणिक राजा ओडिसियस की भूमिका में हैं। यह फिल्म ट्रोजन युद्ध के बाद उनके घर लौटने की खतरनाक यात्रा को दिखाती है। फिल्म में ऐनी हैथवे, टॉम हॉलैंड, जेंडया, रॉबर्ट पैटिनसन और चार्लीज थेरॉन भी अहम भूमिकाओं में हैं। ‘द ओडिसी’ 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

 

CBFC कैसे देता है फिल्मों को सर्टिफिकेट, जानिए पूरी प्रक्रिया और नियम

इंडिया में सेंसर बोर्ड (CBFC) को लेकर सबके मन में कुछ सवाल घूमते रहते हैं- किस बेसिस पर ये फिल्मों को सर्टिफिकेट देते हैं? आखिर सेंसर बोर्ड फिल्म में इतने कट्स क्यों लगा देता है? क्यों किसी डायलॉग को यूं ही बदल दिया जाता है? सबसे महत्वपूर्ण सवाल- क्यों किसी फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर देते हैं? ये आखिरी सवाल इन दिनों काफी चर्चा में बना हुआ है.

दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज, जो पहले पंजाब 95 थी उसे सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया था. वो इसमें करीब 120 कट्स लगाने की मांग कर रहे थे, जिसे मेकर्स ने नहीं स्वीकार किया. उन्होंने बिना सेंसर सर्टिफिकेट इसे सीधा ओटीटी पर चुपचाप रिलीज किया. इसके बाद से विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया. दिलजीत की फिल्म के अलावा सेंसर बोर्ड में तमिलनाडु के सीएम थलपति विजय की फिल्म जन नायगन भी अटकी हुई थी, जिसे अब करीब 7 महीने बाद जाकर सेंसर बोर्ड से A सर्टिफिकेट मिला.

विजय की जन नायगन के साथ भी कुछ मुद्दे थे जो सुलझ नहीं रहे थे. इसमें कुछ आपत्तिजनक सीन्स थे, जिससे कई लोगों की भावनाएं आहत हो सकती थी. इसलिए सर्टिफिकेट रोका गया था. अब थलपति तो सेंसर बोर्ड की परीक्षा में पास हो गए, मगर दिलजीत अभी तक अटके हुए हैं. अब किसी फिल्म को किस तरह सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट देती है, जान‍िए.

कैसे काम करता है CBFC?
CBFC का सदस्य राज मिश्रा ने एक इंटरव्यू में सेंसर बोर्ड की पूरी प्रक्रिया पर कहा- CBFC से सर्टिफिकेट लिए बिना किसी फिल्म को सार्वजनिक तौर पर दिखाना कानूनी अपराध है. ऐसा करने पर सजा हो सकती है. CBFC के चेयरमैन की नियुक्ति सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करता है. फिलहाल प्रसून जोशी CBFC के चेयरमैन हैं. हर फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले CBFC की 5 सदस्यों वाली एक कमेटी फिल्म देखती है. अगर इन 5 में से कम से कम 3 सदस्य फिल्म के पक्ष में फैसला देते हैं, तो फिल्म को सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है.

राज मिश्रा ने आगे तीन तरह के सर्टिफिकेट (A, U, U/A) की पूरी प्रक्रिया समझाई. उन्होंने बताया कि अगर कोई फिल्म पूरी तरह क्राइम और वॉइलेंस से भरी है, तो उसे A सर्टिफिकेट दिया जाता है जिसमें 18 साल से ऊपर के लोग ही वो फिल्म देख सकते हैं. वहीं अगर किसी फिल्म में थोड़ी बहुत मार-धाड़ और क्राइम है तो उसे U/A सर्टिफिकेट मिलता है जिसमें छोटे बच्चे भी माता-पिता की गाइडेंस में पिक्चर देख सकते हैं. U सर्टिफिकेट आमतौर पर उस फिल्म को दिया जाता है, जिसे हर उम्र का व्यक्ति देख सकता है. राज मिश्रा के मुताबिक, सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया सुरक्षा प्रावधान के कारण होती है.

फिल्म पास नहीं हुई, तो क्या होता है?
राज मिश्रा ने आगे ये भी बताया कि अगर कोई फिल्म पहली कमेटी की तरफ से पास नहीं होती है, तब फिल्ममेकर्स फिर से अपनी फिल्म को री-एग्जामिन करने की अर्जी डालते हैं. इसमें एक दूसरी कमेटी इसमें शामिल होती है जिसमें 11 सदस्य मौजूद रहते हैं. अगर इसमें भी फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट नहीं मिलता है, तब मेकर्स दिल्ली में द ट्रिब्यूनल को अप्रोच करते हैं. हालांकि उनके मुताबिक, ऐसे बड़े कम केस ही हुए हैं.

कैसे पास होती है पिक्चर?
राज मिश्रा ने एक फिल्म को सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने की प्रक्रिया भी बताई. उन्होंने कहा- फिल्म की कहानी और उसे दिखाने का तरीका आज के दौर के हिसाब से होना चाहिए. समय के साथ नियम भी बदलते रहते हैं. आज हल्के-फुल्के वॉइलेंस को लोग आम तौर पर स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन अगर किसी फिल्म में बहुत ही डरावने और खौफनाक हिंसक सीन हों, जैसे किसी का जबड़ा उखाड़ देना, तो हमें ये देखना पड़ता है कि ऐसे सीन्स दर्शकों पर बुरा असर ना डालें.

‘कोई भी फिल्म देश-विरोधी सोच को बढ़ावा नहीं देनी चाहिए और ना ही देश या उसकी नीतियों का अपमान करना चाहिए. फिल्म का मकसद सिर्फ एंटरटेन करना हो सकता है, लेकिन उसे लोगों को भड़काने या अशांति फैलाने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए. फिल्म बनाने वालों को अपनी बात कहने की पूरी आजादी है, लेकिन इस आजादी की कुछ सीमाएं भी होती हैं.’

राज मिश्रा से आगे एक और अहम सवाल पूछा गया कि क्या कभी सेंसर बोर्ड किसी नेता के बातों में आकर फिल्म के सर्टिफिकेशन में बदलाव करती है? तो इसपर उन्होंने सफाई देते हुए कहा- मैं अभी भी CBFC का सदस्य हूं. आज तक मुझे किसी भी फिल्म को लेकर किसी तरह का दबाव डालने वाला फोन नहीं आया है. हमें पहले से ये नहीं बताया जाता कि किस फिल्म की सेंसर स्क्रीनिंग करनी है या वो फिल्म किसकी है. ये जानकारी हमें स्क्रीनिंग के समय ही दी जाती है.

‘शायद हो सकता है किसी फिल्म को राजनीतिक समर्थन मिला हो, लेकिन उसकी जानकारी सेंसर बोर्ड तक नहीं पहुंचती. CBFC का काम सिर्फ ये देखना होता है कि फिल्म से किसी की भावनाएं एक तय सीमा से ज्यादा आहत ना हों. बोर्ड का काम इसी जिम्मेदारी तक सीमित रहता है.’

बिना सेंसर सर्टिफिकेट क्या है फिल्म रिलीज करने की सजा?
राज मिश्रा के मुताबिक, अगर कोई फिल्म बिना सेंसर से पास हुए रिलीज की जाती है, तो उसे कानूनी अपराध माना जाता है. दिलजीत की फिल्म सतलुज बिना सेंसर सर्टिफिकेट के रिलीज हुई. वैसे सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 7 के तहत ऐसा करना दंडनीय प्रावधान हैं जिसमें अपराधियों को तीन साल तक की कैद, भारी जुर्माना और फिल्म-स्क्रीनिंग से जुड़ी सभी चीजों को जब्त किए जाने का सामना करना पड़ सकता है. ये जुर्माना 1 लाख रुपये तक भी हो सकता है.

देखा जाए तो दिलजीत की फिल्म सतलुज सीधा ओटीटी पर रिलीज हुई, जहां कोई सेंसरशिप नहीं है. ऐसे में क्या इस फिल्म के खिलाफ कोई एक्शन लिया जाएगा? ये देखने वाली बात होने वाली है.

राजपाल यादव को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, चेक बाउंस केस में जेल का रास्ता साफ; जुर्माना भी लगा

नई दिल्ली/ मुंबई 

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस केस में उन्‍हें 3 महीने जेल की सजा सुनाई है। शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए एक्‍टर पर जुर्माना भी लगाया है। साथ ही सजा बरकरार रखते हुए राजपाल यादव के व्यवहार को ‘संदिग्ध’ बताया और अधिकारियों से उन्हें वापस जेल भेजने को कहा। बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को अदालत ने चेक बाउंस मामले में उनकी सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें फिर से जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में एक्टर का रवैया संदिग्ध रहा है।

मामला साल 2010 का है, जब 5 करोड़ का कर्ज लिया था
यह मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और इसके बाद वह तय समय पर कर्ज नहीं चुका पाए। इसी वजह से मामला अदालत तक पहुंच गया।

2018 में छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी
अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को सही माना। फिर एक्टर ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां बता दें कि साल 2025 के आखिर तक, सात अलग-अलग मामलों में करीब 9 करोड़ रुपये का कर्ज़ बकाया था, जिसमें यादव को हर मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये चुकाने थे।

कोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे
जून 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगाई थी और बकाया करीब 9 करोड़ रुपये चुकाने के लिए उन्हें ईमानदारी से प्रयास करने का मौका दिया था। लेकिन अदालत के मुताबिक, राजपाल यादव बार-बार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे। इसी वजह से इस साल 2 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था और अब उनकी सजा को भी बरकरार रखा गया है।

कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास पाया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक मौके पर कहा था, ‘मेरे सवालों के जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। अंडरटेकिंग में जो बात कही गई थी, अब उससे अलग बातें सामने रखी जा रही हैं।’ कोर्ट के इस कॉमेंट से साफ था कि उसे राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों में विरोधाभास नजर आया।

जस्टिस ने कहा- राजपाल यादव को कई बार मौके मिले
 जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने अभिनेता राजपाल यादव द्वारा निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए दोषसिद्धि को कायम रखा. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव को अदालत में दिए गए अपने अंडरटेकिंग  का पालन करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बार-बार अवसर मिलने के बावजूद उसका पालन नहीं किया। 

कोर्ट ने कितना जुर्माना लगाया
अदालत ने हर मामले में 1.05 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है.  इस तरह सातों मामलों में कुल जुर्माना 7.35 करोड़ बनता है. अदालत के आदेश के अनुसार, प्रत्येक मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार शिकायतकर्ता  को और 25 हजार राज्य  को अदा किए जाएंगे। 

चेक बाउंस मामला क्या है?
 राजपाल यादव ने 2010 में एक फिल्म बनाई थी. इसका नाम था अता पता लापता. फिल्म के लिए राजपाल यादव ने 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था. हालांकि, राजपाल यादव का कहना था कि ये एक इंवेस्टमेंट था. राजपाल यादव ये लोन चुका नहीं पाए और ये बढ़कर 9 करोड़ हो गया. इसी केस में उन्होंने 5 फरवरी 2026 में तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था. उस मुश्किल दौर में सोनू सूद सहित कई एक्टर्स ने उनकी मदद की थी। 

राजपाल यादव ने कहा था- मेरे पास 1200 करोड़ का काम है
राजपाल यादव ने ये भी कहा था कि  ‘अगले साल सालों में मेरे पास ब्रांडिंग के लिए 1200 करोड़ रुपये का काम है. मेरे पास 4 एग्रीमेंट हैं, इसमें फिल्में शामिल नहीं हैं. कोई प्रोजेक्ट 200 करोड़ रुपये का है, कोई 2000 करोड़ रुपये का. इसमें से कुछ फीस है और कुछ प्रोजेक्ट्स में शेयर हैं. मेरी 10 फिल्में लाइन में हैं। 

मैं चलती फिरती चेकबुक हूं- राजपाल यादव
तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने कहा था, ‘मैं कहना चाहता हूं कि मैं पैसों से घिरा हुआ हूं, राजपाल चलती फिरती चेक बुक है. मैं पैसा कमाता हूं, मैं लोगों को पैसा कमाने में मदद करता हूं, और कई घर इस पर डिपेंड करते हैं। 

आपको बता दें कि हाल ही में राजपाल यादव फिल्म ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टु द जंगल’ में नजर आए थे. दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। 

‘राजपाल यादव अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते’
शिकायतकर्ता कंपनी की तरफ से पेश वकील अवनीत सिंह सिक्का ने कोर्ट में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में अब वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।

हाई कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की
मामले को खत्म करने के लिए हाई कोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश की। कोर्ट के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर मामले का पूरा और अंतिम निपटारा करने के लिए भी तैयार हो गई थी लेकिन पिछली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके
राजपाल यादव ने कोर्ट में कहा कि उन्हें अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी रकम चुका चुके हैं। इसके बाद अदालत ने 3 करोड़ रुपये तय समय के भीतर चुकाने का एक तरीका भी सुझाया। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक न्यायिक सुझाव है, कोई अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

ट्रैवल एंड ट्रेड फेयर कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन का दमदार प्रदर्शन, वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत हुई पहचान

ट्रैवल एंड ट्रेड फेयर कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन का दमदार प्रदर्शन, वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूत हुई पहचान

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स के समक्ष राज्य की पर्यटन संभावनाओं का प्रभावी प्रदर्शन, बी2बी बैठकों से निवेश और पर्यटकों की नई संभावनाओं को मिला बल

ट्रेड फेयर में छत्तीसगढ़ पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र

रायपुर

देश के पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले प्रतिष्ठित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ)-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने प्रभावी और आकर्षक सहभागिता दर्ज कराते हुए राज्य की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। 10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विशेष थीम पर आधारित भव्य पवेलियन स्थापित किया गया है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक एवं जनजातीय पर्यटन, इको-टूरिज्म तथा आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के प्रभावशाली प्रदर्शन के कारण आगंतुकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

टीटीएफ-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के स्टॉल का उद्घाटन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष, थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुसिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया। अतिथियों ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों, जनजातीय संस्कृति तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की ओर से सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

भारत के सबसे बड़े बी 2 बी ट्रैवल ट्रेड आयोजनों में शामिल टीटीएफ पर्यटन उद्योग से जुड़े राज्यों, देशों, ट्रैवल एजेंसियों, होटल, एयरलाइंस, टूर ऑपरेटर्स तथा पर्यटन विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है। इस मंच के माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध स्थापित होते हैं, पर्यटन पैकेज विकसित किए जाते हैं तथा घरेलू और विदेशी पर्यटकों तक पर्यटन स्थलों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है। पूर्वी भारत के सबसे बड़े पर्यटन बाजार में आयोजित यह आयोजन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी एवं पूर्वाेत्तर भारत से बड़ी संख्या में पर्यटक धार्मिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वन्यजीव पर्यटन की ओर आकर्षित होते हैं।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ इस वर्ष बोर्ड में पंजीकृत छत्तीसगढ़ तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालक, होम-स्टे संचालक एवं पर्यटन उद्यमी भी सहभागिता कर रहे हैं। पवेलियन में चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, बस्तर की जनजातीय संस्कृति, राज्य के पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा विभिन्न पर्यटन परिपथों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शनी में आने वाले आगंतुकों एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ के पर्यटन उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई जा रही है।

आयोजन में प्रत्यक्ष बी2बी बैठकों तथा पर्यटन निवेश एवं सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों और पर्यटन विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग तथा पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की रणनीतियों पर सार्थक चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि वे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल का संदेश लेकर इस आयोजन में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और जनजातीय पर्यटन का अद्भुत संगम है। टीटीएफ जैसा राष्ट्रीय मंच राज्य को देश और दुनिया के पर्यटन उद्योग से सीधे जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य अधिक से अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ तक लाना, स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करना है। उन्होंने सभी टूर ऑपरेटर्स, पर्यटन उद्यमियों और यात्राप्रेमियों को छत्तीसगढ़ भ्रमण कर यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने अपने प्रस्तुतीकरण में राज्य की पर्यटन संभावनाओं, पर्यटन बोर्ड की योजनाओं तथा पर्यटन व्यवसाय से जुड़ने के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीयन कर टूर ऑपरेटर्स राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकते हैं। बोर्ड पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिक से अधिक टूर ऑपरेटर्स से अपने पर्यटन पैकेजों में छत्तीसगढ़ को शामिल करने तथा स्वयं राज्य का भ्रमण कर इसकी संभावनाओं से परिचित होने का आग्रह किया।

इस वर्ष टीटीएफ-2026 में पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार, अनेक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संस्थानों तथा पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, गोवा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, सिक्किम, असम, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों एवं पर्यटन बोर्डों की सक्रिय सहभागिता रही। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पूर्वी भारत सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने, नए पर्यटन साझेदार विकसित करने, निवेश आकर्षित करने तथा राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।

Bhilai Steel Plant: स्क्रैप चोरी मामले में GM समेत दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच तेज

दुर्ग.

भिलाई स्टील प्लांट से संगठित रूप से लौह स्क्रैप चोरी का मामला में गिरफ्तारी अब बीएसपी के अधिकारियों तक पहुंच गई है. थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने चोरी में संलिप्त आईएमएस-3 के जीएम हिमांशु भूषण मलिक और एजीएम मनोज कुमार देवांगन को गिरफ्तार कर लिया है.

दुर्ग पुलिस इस मामले में लगातार जांच को आगे बढ़ाते हुए एक-एक कर आरोपियों तक पहुंच रही है. इसी कड़ी में पुलिस ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के जीएम हिमांशु भूषण मलिक (54) और एजीएम मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार किया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि अफसरों की मिलीभगत से ही पिछले 6 महीने से बीएसपी का स्क्रैप व्यवस्थित तरीके से चोरी कर बेचा जा रहा था. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
जानकारी के अनुसार आरोपी फ्लू डस्ट परिवहन के दौरान बीएसपी से लौह स्क्रैप चोरी कर उसे बाहर खपाते थे. 26 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित ए. के. ट्रेडर्स, प्लॉट क्रमांक-18, एच.आई.ए. हथखोज में छापा मारा.

कार्रवाई के दौरान हाईवा वाहनों और ट्रकों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री भरी मिली. गोदाम मे बड़ी मात्रा में स्क्रैप रखाया था. जांच में पता चला कि आरोपी बीते 6 माह से इसी तरीके से चोरी कर रहे थे. मौके से लगभग 250 टन लौह सामग्री जब्त की गई. साथ ही स्क्रैप लोडिंग में लगे हाईवा, ट्रक, जेसीबी, हाईड्रा और 5 मशीनें भी सीज की गईं. इन कार्रवाई के बाद मुख्य आरोपी संजय सिंह के गिरफ्तारी के बाद 3 करोड़ 50 लाख की सम्पत्ति भी जप्त की जा चुकी है.

Bhilai Steel Plant: स्क्रैप चोरी मामले में GM समेत दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच तेज

दुर्ग.

भिलाई स्टील प्लांट से संगठित रूप से लौह स्क्रैप चोरी का मामला में गिरफ्तारी अब बीएसपी के अधिकारियों तक पहुंच गई है. थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने चोरी में संलिप्त आईएमएस-3 के जीएम हिमांशु भूषण मलिक और एजीएम मनोज कुमार देवांगन को गिरफ्तार कर लिया है.

दुर्ग पुलिस इस मामले में लगातार जांच को आगे बढ़ाते हुए एक-एक कर आरोपियों तक पहुंच रही है. इसी कड़ी में पुलिस ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के जीएम हिमांशु भूषण मलिक (54) और एजीएम मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार किया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि अफसरों की मिलीभगत से ही पिछले 6 महीने से बीएसपी का स्क्रैप व्यवस्थित तरीके से चोरी कर बेचा जा रहा था. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
जानकारी के अनुसार आरोपी फ्लू डस्ट परिवहन के दौरान बीएसपी से लौह स्क्रैप चोरी कर उसे बाहर खपाते थे. 26 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित ए. के. ट्रेडर्स, प्लॉट क्रमांक-18, एच.आई.ए. हथखोज में छापा मारा.

कार्रवाई के दौरान हाईवा वाहनों और ट्रकों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री भरी मिली. गोदाम मे बड़ी मात्रा में स्क्रैप रखाया था. जांच में पता चला कि आरोपी बीते 6 माह से इसी तरीके से चोरी कर रहे थे. मौके से लगभग 250 टन लौह सामग्री जब्त की गई. साथ ही स्क्रैप लोडिंग में लगे हाईवा, ट्रक, जेसीबी, हाईड्रा और 5 मशीनें भी सीज की गईं. इन कार्रवाई के बाद मुख्य आरोपी संजय सिंह के गिरफ्तारी के बाद 3 करोड़ 50 लाख की सम्पत्ति भी जप्त की जा चुकी है.

Raipur News: स्पा सेंटरों पर पुलिस का छापा, नियमों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

रायपुर.

शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने, अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने एवं स्पा सेंटरों का संचालन निर्धारित नियमों एवं वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने पश्चिम क्षेत्र में विशेष आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया।

इस दौरान स्पा सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई। पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) संदीप पटेल के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पश्चिम क्षेत्र) राहुल देव शर्मा के नेतृत्व में पश्चिम क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्तों, थाना प्रभारी सरस्वती नगर, आजाद चौक एवं डीडी नगर सहित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने थाना सरस्वती नगर, आजाद चौक एवं डीडी नगर क्षेत्र अंतर्गत संचालित विभिन्न स्पा सेंटरों का आकस्मिक चेकिंग किया। अभियान के दौरान कुल 10 स्पा सेंटरों की गहन जांच की गई।

चेकिंग के दौरान स्पा सेंटरों में संचालित गतिविधियों, कर्मचारियों के पहचान संबंधी दस्तावेज, आगंतुकों का रिकॉर्ड, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशील स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, वैधानिक अभिलेखों एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि स्पा सेंटरों का संचालन निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुरूप किया जा रहा है तथा किसी प्रकार की अवैध अथवा संदिग्ध गतिविधि संचालित न हो।

सीसीटीवी कैमरों को नियमित रूप से चालू रखने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे सभी आवश्यक अभिलेख अद्यतन रखें, कर्मचारियों का सत्यापन कराएं, सीसीटीवी कैमरों को नियमित रूप से चालू रखें तथा शासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों एवं दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। नियमों के उल्लंघन अथवा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पाए जाने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई।

14 आरोपियों को उम्रकैद सुनाने वाली महिला जज को मिली सुरक्षा, DGP ने कोर्ट में पेश किया हलफनामा

नर्मदापुरम

 नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में कथित गो तस्करी के बाद उग्र भीड़ की हिंसा में हुई हत्या के मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली सेशन जज तबस्सुम खान को इंटरनेट मीडिया पर मिली धमकियों के मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ के समक्ष पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से हलफनामा पेश कर महिला न्यायाधीश की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा दिया गया।

महिला न्यायाधीश को धमकियां मिलने की घटना को न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।

युगलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग से हलफनामा प्रस्तुत कर यह बताने के निर्देश दिए थे कि न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि महिला जज को सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है तथा आपत्तिजनक इंटरनेट मीडिया पोस्ट के संबंध में भी आवश्यक कार्रवाई की गई है।

पूर्व सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि फैसले का जवाब अपील है, जज को धमकी नहीं। अदालत ने कहा कि कानून के शासन में असहमति का अधिकार है, लेकिन न्यायाधीश को डराने या दबाव बनाने का अधिकार किसी को नहीं है।

 

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