छत्तीसगढ़ में एआई (AI) तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा फैसला

रायपुर

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों की मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने पीएमजीएसवाई के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस एआई आधारित सड़क निरीक्षण प्रणाली को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांच
        
समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस नई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।

सर्वाधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को मिलेगी प्राथमिकता
       
उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि एआई तकनीक से प्राप्त आंकड़ों (डेटा) के आधार पर राज्य की सबसे ज्यादा खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी। इसके बाद उनके संधारण (रखरखाव) की बजट कार्ययोजना तैयार कर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम व सुरक्षित बनेगा।

कल से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
        
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कल से ही प्रायोगिक तौर पर (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक चयनित सड़क का एआई आधारित निरीक्षण शुरू किया जाए। इन शुरुआती निरीक्षणों से मिलने वाले परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस उपयोग से सड़कों की आयु बढ़ेगी और समय पर मरम्मत होने से जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
        
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा, सचिव  भीम सिंह, सचिव  धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक  तारन प्रकाश सिन्हा तथा संचालक एनआरएलएम  अश्वनी देवांगन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना अभूतपूर्व गति से हो रही सशक्त – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं के निर्माण हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति प्रदान किए जाने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना अभूतपूर्व गति से सशक्त हो रही है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह परियोजना राज्य के रेल नेटवर्क को और अधिक सक्षम एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से रायपुर में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही माल एवं यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और रेलवे परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख रेल, औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति प्रदान करेगी।

डिजिटल सुशासन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी

रायपुर

 शासन की महत्वाकांक्षी श्सेवा सेतुश् पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन की मजबूत मिसाल बन रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से लोगों को अब शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। आय, जाति, निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक प्रमाण-पत्र अब सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रहे हैं।

डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया होने के कारण अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी
        
बीजापुर जिले के ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर की निवासी अंकिता ओयम को भी सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से समय पर विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने तहसील कार्यालय उसूर स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका शीघ्र निराकरण किया गया और उन्हें समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया। प्रमाण-पत्र का वितरण सेवा सेतु केन्द्र की मैनेजर श्रीमती मंजुलता दुर्गम एवं श्री शंकर मोडियम द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होने के कारण अंकिता को किसी प्रकार की अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी।

सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधाजनक
      
अंकिता बताती हैं कि पहले विवाह पंजीयन जैसे कार्यों के लिए कई बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन करना आसान रहा और निर्धारित समय के भीतर उन्हें प्रमाण-पत्र मिल गया। इससे उनके जरूरी कार्य भी बिना किसी परेशानी के पूरे हो सके। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधा है। इससे शासकीय सेवाएं घर के नजदीक, पारदर्शी और समय पर मिल रही हैं, जिससे लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा भी बढ़ा है।

डिजिटल प्रशासन को मजबूत और पारदर्शी बनाने प्रभावी
        
राज्य शासन द्वारा संचालित सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आय, जाति, स्थानीय निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक शासकीय सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिकों को सरल, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।

हितग्राही की प्रतिक्रिया
        
अंकिता ओयम, ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर निवासी ने बताया कि सेवा सेतु केन्द्र में विवाह पंजीयन की पूरी प्रक्रिया बहुत आसान रही। मुझे समय पर प्रमाण-पत्र मिल गया, जिससे मेरे सभी जरूरी काम बिना किसी परेशानी के पूरे हो गए। इसके लिए मैं शासन-प्रशासन और सेवा सेतु केन्द्र की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद देती हूँ।

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने किया कृषि विश्वविद्यालय का दौरा

रायपुर

कृषि उत्पादन आयुक्त  सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की अनुसंधान प्रयोगशालाओं, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं, एवं इन्क्यूबेशन सुविधाओं का अवलोकन भी किया।

 इस अवसर पर संचालक कृषि  राहुल देव भी उनके साथ मौजूद थे।  परदेशी ने इंदिरा गांधी  कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं किसानों की समृद्धि के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा कृषि विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। गौरतलब है कि  परदेशी के कृषि उत्पादन आयुक्त का दायित्व संभालने के पश्चात कृषि विश्वविद्यालय में यह उनका पहला दौरा था।

कृषि उत्पादन आयुक्त  परदेशी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय स्थित विभिन्न अधोसंरचनाओं, सुविधाओं, अनुसंधान योजनाओं एवं गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया तथा इसमें गहरी रूचि दिखाई। उन्होंने टिशू कल्चर लैब में केला, गन्ना, बांस आदि फसलों के ऊतक प्रवर्धित पौधों में भी रूचि दर्शायी। उन्होंने कृषि संग्रहालय में प्रदर्शित प्रारूपों का भी अवलोकन किया।  परदेशी ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में भारत सरकार द्वारा स्थापित आधुनिक मौसम वेधशाला का भी अवलोकन किया तथा इसके बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वहां कृषि संग्रहालय तथा विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय हेतु स्थापित विक्रय केन्द्र का भी अवलोकन किया। 

कृषि उत्पादन आयुक्त ने डाॅ. आर. एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा बायोटेक पार्क का भी अवलोकन किया और वहां संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने वहां भारत के सबसे बड़े तथा विश्व के दूसरे सबसे बड़े धान जनन द्रव्य संग्रह का अवलोकन किया। कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने उन्हें बताया कि इस जर्मप्लाजम सेन्टर में चावल की 23 हजार 250 परंपरागत किस्मों के जनन द्रव्य को संग्रहित तथा संरक्षित किया गया है। इनमें से कई किस्में औषधीय तथा पोषक गुणों से भरपूर हैं। इन किस्मों का उपयोग धान की नई उन्नत किस्मों के विकास के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां अन्य फसलों की 6 हजार से अधिक किस्मों का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने क्रॉप बायोफोर्टिफिकेशन लैब के अवलोकन के दौरान संजीवनी राइस, जिंको राइस, न्यूट्री रिच राइस जीनोटाइप सहित बम्बू टिश्यू कल्चर को लेकर किए जा रहे नए प्रयोगों को देखा। उन्होंने वहां स्थापित फाइटोसेनेटरी लैब का भी अवलोकन किया।

इसके पूर्व इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में कुलपति डाॅ गिरीश चंदेल ने एक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से कृषि उत्पादन आयुक्त के कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न घटकों, अधोसंरचनाओं, शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने किसानों की बेहतरी हेतु विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। बैठक में कुलसचिव, संचालक अनुसंधान, निदेशक शिक्षण, निदेशक विस्तार सेवांए, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

शिक्षा ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव – राजेश अग्रवाल

रायपुर

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज सरगुजा जिले के पी. एम.  स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर, अध्ययन सामग्री वितरित कर तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए नवीन शैक्षणिक सत्र के सफल एवं प्रेरणादायी होने की मंगलकामना की।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आज का विद्यार्थी ही कल के सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माता बनेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का विस्तार कर रही है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, परिश्रम और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करती है।

पी. एम.  स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री  राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

इसके पश्चात शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में मंत्री  राजेश अग्रवाल ने छात्राओं को साइकिल वितरित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साइकिल वितरण जैसी योजनाएं बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंत्री  राजेश अग्रवाल ने अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।

कार्यक्रम के अंत में मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Raipur News: पंडरी कपड़ा मार्केट की सबसे पुरानी होलसेल दुकान से हटाया गया अवैध कब्जा

रायपुर.

राजधानी रायपुर के पंडरी कपड़ा मार्केट में नगर निगम ने अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम की टीम शुक्रवार को पंडरी स्थित सबसे पुराने प्रकाश होजियरी होलसेल शॉप पहुंची, जहां नाली को ढंककर किए गए अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, दुकान संचालक ने नाली को कवर करने के लिए पाटा बनाकर उस पर कब्जा कर लिया था। इस मामले की शिकायत स्थानीय बस्तीवासियों ने नगर निगम से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नाली ढंकी होने के कारण उसकी नियमित सफाई नहीं हो पाती, जिससे बारिश के दौरान जल निकासी बाधित होती है और बस्ती में पानी भर जाता है।

शिकायत के आधार पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की। निगम अधिकारियों का कहना है कि नाली पर किया गया यह निर्माण पूरी तरह अवैध था, जिसे हटाया जा रहा है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक नालियों और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

सपेरा बस्ती के बच्चो ने खेली बाल अधिकारों पर सांप सीढ़ी

रायपुर 

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में तिल्दा-नेवरा के सिनोधा स्थित सपेरा बस्ती में बाल चौपाल का आयोजन किया गया। बाल चौपाल के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घुमंतू जीवनशैली एवं मुख्यधारा से अलग निवास करने के कारण सपेरा बस्ती के अनेक बच्चे शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। अधिकांश बच्चों का जन्म अस्पताल में न होने के कारण उनका जन्म प्रमाण पत्र, नियमित टीकाकरण, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पाए हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चे शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी मूलभूत अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्थानीय नागरिकों से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेज तैयार होने पर बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार को भी शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए प्रशासन के साथ सहयोग का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम में सिनोधा के शासकीय मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी तथा बाल श्रम, बाल विवाह और गुड टच-बैड टच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। यह भी ज्ञात हुआ कि सपेरा समुदाय के कुछ परिवारों में बाल विवाह की परंपरा अब भी प्रचलित है। इस पर संज्ञान लेते हुए आयोग अध्यक्ष ने उपस्थित संबंधित अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम, आवश्यक जांच तथा विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बजरंगी मरावी ने हिप-हॉप नृत्य, जानवी यादव ने जस गीत और चार वर्षीय सुनीता ने कहानी सुनाकर सभी का मन मोह लिया। इस बाल चौपाल का मुख्य आकर्षण बाल अधिकारों की जागरूकता पर आधारित  सांप-सीढ़ी गतिविधि रही। सपेरा बस्ती में उनकी जीवनप्रणाली से जोड़कर  सांप सीढ़ी का खेल बनाकर खिलाया गया । इस खेल के माध्यम से बच्चों को सरल एवं रोचक तरीके से उनके अधिकारों, अच्छी आदतों, शिक्षा के महत्व तथा बाल संरक्षण से जुड़े संदेश दिए गए। बच्चों को समझाया गया कि जिस प्रकार खेल में अच्छी चाल आगे बढ़ाती है और बुरी चाल पीछे ले जाती है, उसी प्रकार वास्तविक जीवन में भी अच्छे संस्कार, शिक्षा और सही निर्णय उन्हें सफलता की ओर ले जाते हैं, जबकि बुरी आदतें उनके भविष्य को प्रभावित करती हैं। डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा है कि बाल चौपाल 2.0 का आयोजन निरंतर जारी रहेगा और इसके माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने और जमीनी समस्याओं को जानने की यात्रा आगे बढ़ती रहेगी।

म.प्र. में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारेगी एम्स की तकनीक

भोपाल 

प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के गाँवों तक मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तस्वीर बदलने वाली है। महिला बाल विकास विभाग और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मध्य एमओयू किया जायेगा। एमओयू से एम्स की हाईटेक तकनीक और विशेषता का लाभ सीधे फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलेगा। महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने गुरूवार को मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक में इस साझेदारी को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आंगवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की सटीक पहचान और त्वरित इलाज के लिए एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा स्पेशल क्लिनिकल ट्रेंनिंग दी जाएगी।

डेटा-संचालित निर्णय और फ्रंटलाइन वर्कर्स का सशक्तिकरण

मंत्री भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों और महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य व संपूर्ण पोषण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। एम्स भोपाल की तकनीकी विशेषज्ञता से हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स और आंगनवाड़ी केंद्रों को नई मजबूती मिलेगी, जिससे नीतिगत स्तर पर सटीक और डेटा-संचालित निर्णय लिये जा सकेंगे। यह एमओयू महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित ‘स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ व ‘स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट’ के बीच होगा।

जनजातीय क्षेत्रों से हुई शुरुआत, विशेष प्रशिक्षण पर ज़ोर

इस साझेदारी के तहत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी टीम द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर्स और परियोजना अधिकारियों को विशेष तकनीकी और चिकित्सा प्रशिक्षण दिया जाएगा।मंत्री भूरिया ने जानकारी दी कि राज्य के जनजातीय बाहुल्य जिलों—झाबुआ और धार में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की जा चुकी है, जिसके आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

कुपोषण पर शोध और व्यवहार परिवर्तन (BCC)

एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टर वर्तमान में गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही, आईसीएमआर (ICMR) और एनसीओई (NCOE) नई दिल्ली के सहयोग से बेहतर अनुपूरक आहार (THR) और परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘व्यवहार परिवर्तन संचार’ पर भी शोध किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक डेटा के माध्यम से सही समय पर गंभीर बीमार या कुपोषित बच्चों को उचित उपचार देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। यह साझेदारी दीर्घकालिक रूप से मध्यप्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के कन्वरजेंस (एकीकरण) को बढ़ावा देगी।

समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त श्रीमती निधि निवेदिता, एम्स भोपाल के सीएफएम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण एम. कोकने (PI & HOD), नोडल अधिकारी डॉ. अभिजीत पाखरे और राज्य समन्वयक श्री दीपक पाण्डेय सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

शेख हसीना का बड़ा ऐलान, दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की कही बात; बोलीं- ‘मुझे मार देंगे’

नई दिल्ली

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी. मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, लेकिन वह अपने देश लौटने का फैसला नहीं बदलेंगी। रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोनिक इंटरव्यू में 78 वर्षीय हसीना ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटेंगे और न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे. शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं, जिसके बाद भारत ने उन्हें शरण दी। 

इसके बाद नवंबर 2025 में, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए दमन और मौतों के मामले में शेख हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में ही मौत की सजा सुना दी थी. हालांकि, हसीना इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हैं। 

वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मुझे मार भी सकते हैं. लेकिन फिर भी मैं लौटूंगी.’ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह दिसंबर-2026 के आसपास बांग्लादेश वापस जाएंगी और अदालत में सरेंडर करेंगी. यह पहली बार है जब उन्होंने एक टाइमलाइन बताई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोन इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा पता है, लेकिन यह भी पता है कि अब अपने देश लौटने का समय आ गया है. उन्होंने कहा, ‘वे मेरे लौटते ही मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं. लेकिन मुझे जाना ही होगा। 

अपने देश की मिट्टी में मरने की ख्वाहिश
बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को फांसी की सजा दे रखी है. शेख हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनकी मौत होती है तो वह अपने देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरदस्त दमन हो रहा है. अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी धरती पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था। 

शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा
शेख हसीना को 2024 में सरकार विरोधी छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा था. वह तब भारत आ गई थीं. बाद में बांग्लादेश के युद्ध अपराध कोर्ट ने छात्र आंदोलन पर कथित कार्रवाई के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई. यह सजा तब सुनाई गई जब वह कोर्ट में मौजूद भी नहीं थीं. हसीना इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही हैं. इतना ही नहीं तख्तापलट के बाद उनके पिता से जुड़े स्मारक तोड़ गए. साथ ही उनकी पार्टी को पूरी तरह बैन कर दिया गया। 

‘मेरा फैसला जनता करे’
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें जेल से डर नहीं लगता, क्योंकि वह पहले भी जेल जा चुकी है. उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार से गलतियां हुई हैं तो उसका फैसला अदालत या विरोधी नहीं, बल्कि जनता को करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘कोई भी सरकार जब लंबे समय तक काम करती है तो पूरी तरह गलतियों से मुक्त नहीं होती. लेकिन किसी सरकार ने अच्छा काम किया या बुरा, इसका फैसला जनता को करना चाहिए। 

मध्य प्रदेश के इकलौते यहूदी कब्रिस्तान पर अतिक्रमण का आरोप, तोड़फोड़ से भू-माफियाओं पर उठे सवाल

जबलपुर
 मध्य प्रदेश का एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान अब वैश्विक चर्चा में है। जबलपुर स्थित लगभग सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर कथित अतिक्रमण, तोड़फोड़ और भूमि कब्जे के आरोपों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

इसी बीच इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने भी विरासत बचाने के लिए अपनी सरकार और राजनयिक मिशनों से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह विवाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय बन गया है।

रानीताल की खामोश जमीन पर दफन इतिहास आज अदालत में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है। यह लड़ाई केवल कुछ कब्रों की नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की है, जिसने कभी जबलपुर को विविध आस्थाओं का सम्मान करने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचान दिलाई है। अब निगाहें हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और विरासत संरक्षण संबंधी याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है।

ब्रिटिश शासनकाल में जबलपुर में करीब 200 यहूदी परिवार रहते थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन ने लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि आवंटित की थी। आज इस परिसर में 100 से अधिक कब्रें हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे यहूदियों की कब्रें भी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी। आजादी के बाद अधिकांश परिवार इजराइल चले गए और अब शहर में केवल तीन-चार परिवार शेष हैं। उनका आरोप है कि भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जे की कोशिश कर रहा है।

 

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