मालवा की समृद्धि का नया द्वार बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मालवा अपनी बोली की मिठास और उद्यमशीलता के लिए जाना जाता है। यह कर्मयोगियों और उद्यमियों की भूमि है। हम मालवा के विकास के लिए हर जरूरी प्रबंध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड कॉरीडोर प्रोजेक्ट क्षेत्रीय विकास, समृद्धि और विश्वास का नया मार्ग है। इससे उज्जैन, जावरा और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरीडोर केवल उज्जैन और रतलाम के लिए विकास का हाइवे नहीं, यह पूरे मालवा क्षेत्र के समग्र विकास और अर्थव्यवस्था का नया स्पीड ट्रैक बनेगा। इस कॉरीडोर से यात्री परिवहन सुगम होगा, यात्रा समय में कमी एवं भाड़ा लागत न्यूनतम हो जाने से लॉजिस्टिक्स को भी उल्लेखनीय गति मिलेगी, जिसका लाभ उद्योग, व्यापार, कृषि और पर्यटन सभी क्षेत्रों को प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नागदा में उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर परियोजना के भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागदा में अस्थायी भवन में केंद्रीय विद्यालय के संचालन और सड़क सुरक्षा के जन-भागीदारी मॉडल के रूप में ‘जन सेवा प्रहरी अभियान’ का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन जिले में संचालित शासकीय योजनाओं के चयनित पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में यह कॉरीडोर एक महत्वपूर्ण परियोजना है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा के लिये बेहतर अधोसंरचना प्रबंधन करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह कॉरीडोर सिंहस्थ : 2028 से पहले (दिसम्बर 2027 तक) बनकर तैयार हो जाएगा।

प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर उज्जैन-जावरा के मध्य वर्तमान सड़क मार्ग के चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि नागदा और खाचरौद अब फोरलेन रोड से रतलाम शहर से कनेक्ट किया जाएगा। उन्होंने खाचरौद में नवीन मटर मंडी के लिए अतिरिक्त शासकीय भूमि देने और यहां एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा विधानसभा क्षेत्र में अटलावदा-निनावटखेड़ा चंबल नदी पर नया बांध बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नागदा में नया आईटीआई केन्द्र खोलने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक और विश्वस्तरीय अधोसंरचनात्मक के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट न केवल सिंहस्थ-2028 की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भविष्य में मालवा अंचल के विकास और प्रदेश की प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार भी सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यह कॉरीडोर क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिखेगा। करीब 100 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से यातायात की सुगमता के साथ औद्योगिकीकरण को भी नई रफ्तार मिलेगी। उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर पहले एक्सेस कंट्रोल्ड था, जिसे नॉन एक्सेस कंट्रोल किया गया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए यह मार्ग सोने पर सुहागा जैसा होगा। विश्व स्तरीय सिंहस्थ मेले के दौरान राजस्थान, गुजरात और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट अत्यंत सुगम और सुविधाजनक साबित होगा। उज्जैन क्षेत्र बदल रहा है। अब यहां साढ़े 8 करोड़ श्रद्धालु एक वर्ष में आ रहे हैं। राज्य सरकार ने 2 मेट्रोपोलिटन एरिया – इंदौर-उज्जैन-रतलाम और भोपाल-सीहोर-नर्मदापुरम घोषित कर इसमें डेवलपमेंट के काम भी शुरू कर दिए हैं। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपोलिटन रीजन बनाने का काम प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सबसे अधिक रोजगार देने वाला राज्य भी बना है। मालवांचल के पीथमपुर और विक्रम उद्योगपुरी में विश्व के बड़े कारोबारी अपने उद्योग स्थापित करने के लिए आ रहे हैं। विकास की रफ्तार में अब चंबल अंचल भी पीछे नहीं है। मध्यप्रदेश की धरती पर देशभर में सबसे अधिक सीमेंट प्लांट स्थापित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा निर्धारित की गई GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) सहित हर वर्ग के कल्याण और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। राज्य सरकार ने GYAN में 2 और श्रेणियां शामिल की हैं- औद्योगिकीकरण और अधोसंरचनात्मक विकास। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस 2025) में 30 लाख करोड़ का अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ, जिसमें से अब तक 10 लाख करोड़ निवेश जमीन पर उतर चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। किसान फसल लगाएं, सरकार समुचित दाम दिलवाएगी। मालवांचल में मटर की प्रोसेसिंग यूनिट और उज्जैन में पेप्सिको के फूड इंडस्ट्री पार्क का भूमि पूजन किया गया है। प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों को मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों के समान भाव बहुत जल्द उज्जैन में पेप्सिको के जरिए मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने कोई नया कर (टैक्स) नहीं बढ़ाते हुए भी 4.38 लाख करोड़ रुपए का बजट पारित किया है। हमने लाड़ली बहनों के लिए प्रतिमाह 1500 रुपए का प्रावधान किया है। रक्षाबंधन से पहले जल्द ही बहनों को जुलाई माह की राशि भी मिलेगी। राज्य सरकार ने अब तक लाड़ली बहनों को 60 हजार करोड़ रूपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा में डेढ़ साल पहले की गई इस सड़क निर्माण घोषणा को पूरा करते हुए आज इसका भूमि पूजन किया है। यह परियोजना दिसंबर 2027 तक पूरी होगी और इसका भव्य लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरीडोर से भी क्षेत्र की दिशा बदल जाएगी। इस कॉरिडोर से किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को लाभ मिलेगा। मालवा को नई-नई सड़क परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। सिंहस्थ में 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी के दृष्टिगत आवागमन की बेहतर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उज्जैन में शिप्रा के 30 किलोमीटर लंबे स्नान घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इंदौर से उज्जैन तक मेट्रो ट्रेन भी जल्द ही आएगी। नई रेलवे लाइनों से नागदा दो रूट से दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग से जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि उज्जैन संभाग देश का मध्य बिंदु है, बहुत जल्द यहां एक नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात भी मिलेगी।

कर्नाटक के राज्यपाल डॉ. थावरचंद गहलोत ने कहा कि उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर आगामी सिंहस्थ 2028 से पहले बनकर पूर्ण होगी। आज उज्जैन जिला प्रशासन के द्वारा जनसेवा प्रहरी की शुरुआत की गई है। यह एक सराहनीय पहल है। नागदा में खुले इस नए केंद्रीय विद्यालय में 30 जुलाई से कक्षाएं भी प्रारंभ हो जाएंगी। इसमें केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य लोग भी अपने बच्चों को प्रवेश दिला सकते हैं।

उज्जैन सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि उज्जैन-जावरा के बीच नई सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही थी। यह ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा संपर्क मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागदा को नए पीएम विद्यालय की भी सौगात दी है।

नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डेढ़ वर्ष में अपनी घोषणा को पूरा करते हुए उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट की नींव रखी है। यह परियोजना क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से नागदा-खाचरौद को मिलाकर नया जिला बनाने की मांग की।

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा और तेज संपर्क मिलेगा। साथ ही यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक, व्यापारिक और कृषि विकास को नई गति प्रदान करेगी। लगभग 5,017 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 98.73 किलोमीटर लंबा यह कॉरीडोर मध्यप्रदेश की सड़क अधोसंरचना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। साथ ही प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का नया आधार भी बनेगा। इससे उज्जैन जिले के 50 गांव और रतलाम जिले के 12 गांव लाभान्वित होंगे। इस कॉरीडोर से उज्जैन, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा के विकास को गति मिलेगी। साथ ही क्षेत्र के करीब 35 लाख नागरिकों को इसका लाभ मिलेगा। इस कॉरीडोर में 7 फ्लाई ओवर, 3 रेल ओवरब्रिज, 8 बड़े पुल, 22 मध्यम पुल, 36 अंडरपास, 2 ओवरपास तथा 430 पुलियाओं का निर्माण किया जाएगा।

नागदा में अस्थायी भवन में केन्द्रीय विद्यालय का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतत् प्रयासों के बाद नागदा में केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण की मंजूरी मिल गई है। अभी यह विद्यालय एक प्रायवेट कॉलेज के अस्थायी भवन में शुरू हो रहा है। अभी यहां पहली से पांचवीं कक्षा संचालित होंगी। राज्य सरकार ने इस विद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए 2.01 हैक्टेयर भूमि प्रदान की। इसमें प्राथमिक स्तर पर कुल 200 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत यहां एक-चौथाई यानी 50 सीटें आरक्षित रहेंगी। केंद्रीय विद्यालय में विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है।

जन सेवा प्रहरी अभियान का शुभारंभ

इस अभियान का उद्देश्य दुर्घटना होने के बाद के पहले 60 मिनट (गोल्डन ऑवर) में तत्काल प्राथमिक उपचार देकर घायल व्यक्ति की जान बचाना है। इसके लिए दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स पर मौजूद स्थानीय दुकानदारों, ढ़ाबा व पेट्रोल पंप कर्मियों को प्रहरी बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य, पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा इन प्रहरियों को फर्स्ट एड किट, सीपीआर देने और कानूनी अधिकारों का भी निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी बढ़ाते हुए अब तक क्षेत्र के 1,549 स्वयं सेवकों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें से 155 को जन सेवा प्रहरी होने का प्रमाण-पत्र भी वितरित कर दिए गए हैं। विगत 28 मई 2026 को उज्जैन जिले के खरसौद खुर्द में जन सेवा प्रहरियों द्वारा तीन घायलों को त्वरित उपचार व अस्पताल पहुंचाकर उनकी जीवनरक्षा की।

कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री  गौतम टेटवाल, राज्य सभा सांसद महंत  बाल योगी उमेशनाथ, विधायक घट्टिया  सतीश मालवीय, विधायक बड़नगर  जितेन्द्र पण्ड्या, विधायक जावरा डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, एमपी हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमेन  ओम जैन, महापौर उज्जैन  मुकेश टटवाल, जिलाध्यक्ष  राजेश धाकड़, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 

एबीडीएम विकसित भारत @ 2047 के लिए मजबूत और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र का आधार बनेगा : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

भोपाल

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) मिशन संचालन समूह के अध्यक्ष  जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में मिशन संचालन समूह की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि एबीडीएम के अंतर्गत मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना तैयार हुई है और अब देशभर में इसके व्यापक उपयोग, अंतरसंचालनीयता तथा नागरिकों की सहज पहुंच पर विशेष ध्यान देना होगा।

केंद्रीय मंत्री  नड्डा ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, उपचार की निरंतरता तथा नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हितधारकों से सुरक्षित, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।

बैठक में एबीडीएम की प्रगति, राज्यों में क्रियान्वयन तंत्र, स्वास्थ्य संस्थानों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीयन, सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से एकीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई। देश में अब तक 93.95 करोड़ से अधिक एबीएचए नंबर बनाए गए हैं, 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं, 5.33 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं तथा 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। लगभग 24 करोड़ स्कैन एंड रजिस्टर टोकन भी जारी किए जा चुके हैं।

बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा; मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल; आयुष, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री  प्रतापराव जाधव; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मती अनुप्रिया पटेल; वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री  जितिन प्रसाद; नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. निवास; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री  मुकेश महालिंग; केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव मती पुण्य सलीला वास्तव; आयुष मंत्रालय के सचिव  वैद्य राजेश कोटेचा; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नीति आयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आयुष मंत्रालय एवं अन्य सदस्य संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मध्यप्रदेश में एबीडीएम की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में लगभग 5.86 करोड़ आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री तथा लगभग 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। प्रदेश के 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सक्रिय है, जिसके माध्यम से 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित शेष कार्यों को मध्यप्रदेश प्राथमिकता से पूर्ण करेगा।

 

“नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दें – डीजीपी कैलाश मकवाणा

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक संचालित किए जाने वाले राज्यव्यापी नशामुक्ति जन-जागरूकता अभियान “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” के प्रभावी क्रियान्वयन एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, रेंज उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल एवं इंदौर के पुलिस आयुक्त, समस्त जिला पुलिस अधीक्षक, रेल पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक पीटीएसतथा समस्‍त सेनानी विसबल की बैठक ली।बैठक में अभियान की विस्तृत कार्ययोजना एवं दिन-प्रतिदिन आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी “Vision Document on Narcotics Control 2026-29” की भावना एवं उद्देश्यों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई (Enforcement), सिंथेटिक ड्रग्स एवं प्रीकर्सर के नियंत्रण, नशे की मांग में कमी (Demand Reduction), व्यापक जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को इस अभियान का प्रमुख आधार बनाया गया है। अभियान के माध्यम से कानून प्रवर्तन के साथ-साथ समाज में नशे के प्रति जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर भी विशेष बल दिया जाएगा।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में आयोजित “नशे से दूरी है जरूरी”अभियान को प्रदेशभर में अभूतपूर्व जनसमर्थन मिला था और लाखों नागरिकों की सहभागिता से यह एक सफल जनअभियान बना था। उन्होंने अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि”रिकॉर्ड टूटने के लिए ही बनते हैं। इस वर्ष हमें पिछले अभियान से भी अधिक प्रभावी, व्यापक और परिणामोन्मुखी अभियान चलाना है। प्रत्येक जिला अपने नवाचारों, जनसहभागिता और सकारात्मक प्रयासों से नए कीर्तिमान स्थापित करे।”उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना समाज में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिकाधिक लोगों को इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करना होगा।

 मकवाणा ने कहा कि अभियान के दौरान पुलिस, सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आबकारी विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, नगरीय निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर प्रत्येक जिले में साझा कार्ययोजना के अनुसार गतिविधियां आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौती भी है, इसलिए इसकी रोकथाम में पूरे समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि प्रत्येक पुलिस अधीक्षक जिला कलेक्टर के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान के सफल संचालन हेतु बहुविभागीयकोर कमेटीका गठन करें, जिसमें सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, श्रम, उद्योग, खाद्य, पंचायत, नगरीय निकाय, आबकारी, जनसंपर्क सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हों।

पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए कि नगर निगम, नगर पालिका एवं स्थानीय निकायों के सहयोग से प्रमुख चौराहों, सार्वजनिक स्थलों, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टेशनों पर नशामुक्ति संबंधी पोस्टर, बैनर एवं डिजिटल संदेशों का व्यापक प्रदर्शन कराया जाए। साथ ही सिनेमाघरों, एफएम रेडियो, सार्वजनिक परिवहन, एलईडी स्क्रीन तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से अभियान का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अभियान को समाज के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाने के लिए नवाचार, प्रभावी जनसंपर्क, अंतर्विभागीय समन्वय एवं सामुदायिक सहभागिता को प्राथमिकता दें, ताकि प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध यह अभियान केवल पुलिस का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा अभियान है और प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही इसके उद्देश्य सफल होंगे।

बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्‍स  डी निवास वर्मा ने बताया गया कि 15 दिवसीय अभियान के अंतर्गत प्रतिदिन अलग-अलग विषयों पर जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें नशामुक्ति रैली, ड्रग अवेयरनेस रन, शपथ ग्रहण, विद्यालय एवं महाविद्यालयों में व्याख्यान, लघु फिल्मों का प्रदर्शन, चित्रकला, निबंध, पोस्टर, स्लोगन एवं रंगोली प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, मानव श्रृंखला, मोटिवेशनल स्टोरी का प्रसारण, सार्वजनिक स्थलों पर जनसंवाद, बाजारों एवं मॉल में जागरूकता कार्यक्रम, धार्मिक स्थलों, कारखानों एवं जेलों में विशेष कार्यक्रम तथा खिलाड़ियों एवं खेल प्रशिक्षकों के माध्यम से जन-जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। अभियान का समापन 30 जुलाई को स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में किया जाएगा।

बैठक में पीएसओ टू डीजीपी डॉ विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, सहायक पुलिस महानिरीक्षक  संजीव कुमार कंचन,  अमृत मीणासहित अन्‍य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

E85 पेट्रोल की कीमत पर बड़ा खुलासा, केंद्रीय मंत्री ने बताया कितना सस्ता मिलेगा नया ईंधन

नई दिल्ली
 E20 को लेकर मचे बवाल के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E85 के संबंध में बड़ा ऐलान कर दिया है. उन्होंने इसकी कीमत के बारे में एक हिंट दे दी है. पुरी ने E20 से हुए फॉरेक्स रिजर्व के बारे में बताते हुए यह कहा कि E85 पर भी काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि इसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा. हालांकि, इसे अभी भी खरीदा जा सकता है लेकिन यह बहुत लिमिटेड लोकेशन पर ही मिलता है. बहरहाल, हरदीप पुरी ने साफ कहा है कि E85 की कीमत E20 से 20 रुपये कम होगी. मतलब यह फ्यूल 80-85 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर मिल सकता है। 

बता दें कि सरकार का लॉन्ग टर्म टारगेट एथेनॉल ब्लेंड को 85 फीसदी तक लेकर जाने का है. हालांकि, E85 फ्यूल केवल उन्हीं गाड़ियों में इस्तेमाल हो सकता है जिनका इजंन फ्लेक्स फ्यूल कंपेटिबल हो. इसके लिए वाहन कंपनियों को नई गाड़ियों का ही निर्माण करना होगा, जिसमें फिलहाल कुछ टाइम लगेगा. लेकिन उससे पहले ही हरदीप पुरी ने ऐलान कर दिया है कि 85 फीसदी ब्लेंड वाला फ्यूल E20 से भी 20 रुपये सस्ता बेचा जाएगा।

कितना पैसा बचा
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से क्रूड के आयात में कितनी आई है. बकौल हरदीप पुरी, “पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से भारत को अब तक 309.98 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल बाहर से कम मंगाना पड़ा है.” यानी एथेनॉल ने इतने कच्चे तेल की जगह ले ली, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है. उन्होंने यह भी बताया E20 की वजह से वातावरण में 931.502 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाय-ऑक्साइड (सीओ2) का कम उत्सर्जन हुआ है. इससे प्रदूषण घटाने में काफी मदद मिली है। 

सुजूकी नहीं मिली शिकायत
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, “सुजूकी (मारुति-सुजूकी) ने 1.5 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग की है. किसी भी गाड़ी में एथेनॉल के कारण किसी डैमेज की रिपोर्ट नहीं है. काफी अफवाह फैलाई जा रही है. कई कंपनियों ने कहा कि वह इंश्योरेंस कवर नहीं देंगी लेकिन अब वह मसला भी सुलझा लिया गया है.” गाड़ी की माइलेज और एफीशिएंसी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में हरदीप पुरी ने कहा है कि इससे गाड़ियों का इंजन नहीं खराब हो रहा. उनका कहना है, “जब आप माइलेज की बात करते हैं तो आपको बड़ी तस्वीर देखनी होती है. आपको बेहतर एक्सेलरेशन मिल रहा है. बेहतर ऑक्टेन काउंट मिल रहा है. इंजन को कोई डैमेज नहीं हो रहा है. आपको समय के साथ ऐसी टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ना होता है जो पर्यावरण के लिए बेहतर हो. एथेनॉल इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। 

वाहन चालक कर रहे शिकायत
जब से E20 फ्यूल को पूरी तरह से लागू किया गया है तब से कई चालक सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ अपना गुस्सा दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि इससे उनकी गाड़ी का इंजन खराब हो रहा है. कई लोगों की शिकायत है कि उनकी गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो गया है. कुछ ने यह भी कि उनकी नई गाड़ियों का इंजन पूरी तरह बैठ गया और उन्हें कई हजारों की चपत लगी. हालांकि, सरकार ने इस तरह की किसी भी परेशानी को नकार दिया है। 

 

संवेदनशील पुलिस, सुरक्षित नागरिक: डॉयल-112 की त्वरित कार्रवाई से सर्पदंश पीड़ित महिला को मिला जीवनदान

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम नागरिकों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में डॉयल-112 की सतर्क एवं त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर मानव जीवन की रक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया है। डॉयल-112 टीम ने सर्पदंश की शिकार एक महिला को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जानकारी के अनुसार, रात्रि लगभग एक बजे डॉयल-112 गौरेला फाल्कन-1 को ग्राम जमुनिया टोला, धनौली से एक महिला के सर्पदंश की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डॉयल-112 में तैनात आरक्षक  रामदयाल आयाम एवं चालक  गोपाल पुरी तत्काल आपातकालीन वाहन लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हुए। टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि ग्राम जमुनिया टोला, धनौली निवासी 55 वर्षीय मती सोनकुंवर पनिका को रात्रि में जमीन पर सोने के दौरान जहरीले सर्प ने काट लिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉयल-112 टीम ने बिना किसी विलंब के पीड़िता को परिजनों के साथ ईआरवी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार प्रारंभ किया। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से महिला की जान बच गई और वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित आपातकालीन सहायता प्रणाली केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की प्रत्येक घड़ी में नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। डॉयल-112 की प्रशिक्षित टीमों की त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक संचार व्यवस्था और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिल रही है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम धनौली में सर्पदंश की शिकार एक युवती को डॉयल-112 की तत्परता से समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसका जीवन बचाया गया था। लगातार दूसरी सफल कार्रवाई ने जिले में डॉयल-112 के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।

जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस ने वर्षा ऋतु के दौरान नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे जमीन पर सोने के बजाय चारपाई या बिस्तर का उपयोग करें, रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा घर एवं आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें ताकि सर्पों के प्रवेश की संभावना कम हो। यदि किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए तो झाड़-फूंक, टोने-टोटके अथवा घरेलू उपचार में समय न गंवाते हुए तत्काल डॉयल-112 अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को संकट की घड़ी में तत्काल सहायता उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से डॉयल-112 सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी आपातकालीन सहायता शीघ्रता से पहुंच सके। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की यह घटना दर्शाती है कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से न केवल आपात स्थितियों का प्रभावी प्रबंधन हो रहा है, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना

रायपुर

छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रदेश के उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में पूर्णतः निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

इन माध्यमों से कर सकते हैं आवेदन
         
श्रम विभाग के ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप एवं आधिकारिक वेब पोर्टल द्वारा पात्र विद्यार्थी और उनके अभिभावक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन जमा कर सकते हैं। अपने निकटतम विकासखंड की जनपद पंचायत में स्थित श्रम संसाधन केंद्र में जाकर या नजदीकी चॉइस सेंटर  के माध्यम से, जिला कार्यालय के श्रम पदाधिकारी के पास जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
       
आवेदन करते समय विद्यार्थियों को निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार श्रमिक पंजीयन कार्ड (लेबर कार्ड), छात्र-छात्रा का मूल निवास प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। आधार कार्ड (नियमों के तहत सुरक्षित रूप से आवश्यक), कक्षा 5वीं की उत्तीर्ण अंकसूची (मार्क्सशीट), वर्तमान कक्षा में अध्ययनरत होने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।

योजना की प्रमुख शर्तें और पात्रता
         
योजना का लाभ केवल उन पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिलेगा, जिनका श्रमिक पंजीयन आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो। यह लाभ श्रमिक परिवार की प्रथम दो संतानों को ही देय होगा। विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश लेना अनिवार्य है।

चयन के बाद मिलेंगी ये विश्वस्तरीय सुविधाएं
        
प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्र-छात्राओं को कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक की पूरी पढ़ाई निःशुल्क कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें उत्कृष्ट विद्यालयों में मुफ्त आवास (हॉस्टल), पौष्टिक भोजन तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि श्रमिक परिवारों के बच्चों को एक बेहतर और प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल मिल सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नवा रायपुर के विकास को नई गति: मंत्रिपरिषद् ने OTS योजना-2026 को दी मंजूरी

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों के आबंटितियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय पात्र आबंटितियों को ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने के साथ-साथ लंबित प्रकरणों के समाधान, रुकी हुई परियोजनाओं को गति देने तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रत्येक निर्णय विकास को गति देने और जनहित में व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने की सोच से प्रेरित है। OTS योजना-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा, लंबित प्रकरणों का निराकरण होगा और नवा रायपुर के समग्र एवं नियोजित विकास को नई गति मिलेगी।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, भरोसेमंद और विकासोन्मुख वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। OTS योजना-2026 ऐसे आबंटितियों के लिए एक सकारात्मक अवसर है, जो अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिलेगी, अनावश्यक न्यायालयीन विवाद कम होंगे, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। यह निर्णय नवा रायपुर को देश के अग्रणी नियोजित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

योजना के अंतर्गत जो आबंटी परियोजना का विकास करने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें आबंटित भूमि समर्पित कर अनुबंध से बाहर होने का विकल्प भी मिलेगा। इससे अनावश्यक न्यायालयीन विवादों में कमी आएगी तथा भूमि का प्रभावी एवं शीघ्र उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

योजना लागू होने की तिथि से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में प्राप्त आवेदनों पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाएगा। वर्तमान में विभिन्न भू-उपयोगों के अंतर्गत बड़ी संख्या में लंबित प्रकरण इस योजना से लाभान्वित हो सकेंगे।

एनआरडीए के अनुसार, योजना के अंतर्गत भूमि प्रीमियम में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी तथा किसी भी भूमि का सेटलमेंट वर्तमान रिजर्व प्रीमियम मूल्य से कम पर नहीं किया जाएगा। इससे प्राधिकरण को कोई वित्तीय हानि नहीं होगी, जबकि पात्र आबंटितियों को ब्याज एवं अधिभार में लगभग 61.96 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।

OTS योजना-2026 के क्रियान्वयन से नवा रायपुर में रुकी हुई विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी, निवेशकों का विश्वास और सुदृढ़ होगा, मुकदमेबाजी में कमी आएगी तथा भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। यह निर्णय नवा रायपुर के नियोजित, संतुलित और तीव्र शहरी विकास को नई दिशा प्रदान करेगा।

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के खातों में पहुंचने लगी बोनस राशि

रायपुर

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की पहल और वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का वितरण शुरू हो गया है। राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत धरमजयगढ़ जिला वनोपज सहकारी यूनियन के संग्राहकों के बैंक खातों में 17 करोड़ 43 लाख रुपये ऑनलाइन अंतरित किए जा रहे हैं।

58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस

वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ ने बताया कि जिला यूनियन की 58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में जिला यूनियन की 59 समितियों के माध्यम से 70,945.485 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया था। इसके लिए 46,840 संग्राहकों को कुल 17.43 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
जिला यूनियन की प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो को सबसे अधिक 4,710.58 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से बोनस मिला है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4,616.76 रुपये प्रति मानक बोरा का प्रोत्साहन पारिश्रमिक प्राप्त हुआ है।

ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

वन विभाग द्वारा बोनस राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनी है तथा संग्राहकों को समय पर राशि मिल रही है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों ने बताया कि इस बोनस राशि से वे खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। समय पर मिली आर्थिक सहायता से न केवल संग्राहकों को राहत मिली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

सेवा सेतु’ केंद्र से 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, समय पर हुआ छात्रा का कॉलेज प्रवेश

रायपुर

छत्तीसगढ़ राज्य शासन की डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह पोर्टल शासकीय सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले से एक सुखद मामला सामने आया है, जहां सेवा सेतु केंद्र की तत्परता से मात्र 24 घंटे के भीतर एक छात्रा का आय प्रमाण पत्र बन गया और उसका कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित हो सका।

अंतिम तिथि पास होने से चिंतित था परिवार
            
राजनांदगांव जिले के विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम आयबांधा निवासी  तोरण लाल अपनी पुत्री निकिता के उच्च शिक्षा (कॉलेज) में प्रवेश को लेकर काफी चिंतित थे। कॉलेज में दाखिले के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य था और प्रवेश की अंतिम तिथि बेहद नजदीक आ चुकी थी। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने की आशंका से पूरा परिवार परेशान था।

ऑनलाइन आवेदन के बाद 24 घंटे में समाधान
       
इसी दौरान तोरण लाल को डोंगरगांव में स्थित ‘सेवा सेतु केंद्र’ की जानकारी मिली। वे तुरंत आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचे। केंद्र संचालक ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और 22 जून 2026 को उनका ऑनलाइन आवेदन दर्ज किया। डिजिटल प्रक्रिया के त्वरित निराकरण (Fast-track Processing) के चलते मात्र 24 घंटे के भीतर ही आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके चलते निकिता का कॉलेज में प्रवेश बिना किसी बाधा के समय-सीमा के भीतर हो गया।

समय और धन दोनों की हो रही बचत          

अपनी खुशी साझा करते हुए हितग्राही तोरण लाल ने कहा, “पहले शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए विभिन्न दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की डिजिटल व्यवस्था से हमारा काम बेहद सरल और कम समय में हो गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मेरी बेटी का भविष्य सुरक्षित हुआ है।”

घर बैठे मिल रहीं 400 से अधिक सेवाएं

‘सेवा सेतु पोर्टल’ के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएं, राशन कार्ड और पेंशन सहित 400 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ आसानी से उठा रहे हैं। यह व्यवस्था आम जनता को समयबद्ध सेवाएं देने के साथ-साथ उनके समय और धन की बड़ी बचत कर रही है, जिसके लिए नागरिकों ने राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

छत्तीसगढ़ की इकलौती छात्रा, महासमुंद की बेटी का कमाल

रायपुर
 
महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की होनहार छात्रा रागनी साहू का चयन अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन ‘शक्तिसैट’ (ShaktiSat) के लिए ‘नेशनल फाइनलिस्ट’ के रूप में हुआ है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक अभियान की सूची में जगह बनाने वाली रागनी पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चुनी गईं इकलौती छात्रा हैं।

देशभर से चुनी गईं सिर्फ 20 प्रतिभाएं
           
इस वैश्विक अभियान के तहत पूरे भारत से कड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के बाद ‘केवल 20 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट’ का चयन किया गया है, जिसमें रागनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए अपना स्थान पक्का किया है। रागनी ने वर्ष 2025 में अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से इस मिशन में पंजीयन कराया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला के अंतर्गत 21 विस्तृत मॉड्यूल तथा 550 से अधिक स्पेस, सैटेलाइट, विज्ञान, नवाचार (इन्नोवेशन) और इंजीनियरिंग आधारित लेसन सफलतापूर्वक पूरे किए।

108 देशों के छात्र मिलकर बनाएंगे चंद्र उपग्रह
       
‘मिशन शक्तिसैट’ एक अंतर्राष्ट्रीय चंद्र सैटेलाइट मिशन है, जिसमें भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित विश्व के 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह (Moon Satellites) विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा (Orbit) में स्थापित होकर परिक्रमा करेगा। दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह (Surface) पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।

इसरो (ISRO) द्वारा 11 अक्टूबर को हरिकोटा से लॉन्चिंग
         
विद्यार्थियों द्वारा विकसित किए जा रहे इन उपग्रहों का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो (ISRO) द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, रागनी साहू 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में भाग लेंगी। इस कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर होगा। यहाँ रागनी को इसरो व IN-SPACe के वैज्ञानिकों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों से सीधा संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा।

नीति आयोग से सम्बद्ध है मिशन
     
यह मिशन अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग से सम्बद्ध है। इस वैश्विक पहल का संचालन ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मती केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि विंग कमांडर जाया तारे (रिटायर्ड) इस मिशन की भारत की राष्ट्रीय राजदूत हैं।

कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई
     
 इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर  विनय कुमार लंगेह ने छात्रा रागनी साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा तथा अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश के सतत मार्गदर्शन को दिया। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी रागनी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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