मौसम का बड़ा अपडेट! भारत की ओर बढ़ रहे 2500 किमी चौड़े बादल, 5 राज्यों में होगी झमाझम बारिश

नई दिल्ली

भीषण गर्मी का सामना कर रहे उत्तर पश्चिम भारत को मौसम जल्द ही गुड न्यूज दे सकता है। खबर है कि भारत की ओर 2500 किलोमीटर चौड़े बादलों का समूह बढ़ रहा है। भारत के इनसैट-3डीएस उपग्रह ने ये तस्वीरें कैद की हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मौसम सैटेलाइट द्वारा ली गई यह तस्वीर इस उपमहाद्वीप के ऊपर बारिश लाने वाले सिस्टम के सक्रिय होने का संकेत है।

बादलों का यह समूह उत्तरी भारत में 2000 से 2500 किमी से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। मौसम विभाग ने इन तस्वीरों को शेयर किया है। तस्वीरों में उत्तर और मध्य भारत में फैला हुआ बादलों का विशाल झुंड दिख रहा है। बादलों का जमावड़ा आने वाले तूफानों व भीषण गर्मी के बाद राहत का संकेत है। बादलों का यह घना झुंड पाकिस्तान व उत्तर-पश्चिमी भारत से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक फैला है।

दिल्ली में झमाझम बारिश शुरू
दिल्ली के कई हिस्सों में गुरुवार शाम को तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश होने से शहर में जारी भीषण गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में गरज-चमक के साथ आंधी आई, जिस दौरान पालम में हवा की अधिकतम गति 61 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। गुरुवार को दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया।

गिरा राजधानी का तापमान
मौसम में यह बदलाव कई दिनों की भीषण गर्मी के बाद आया है, जिसके दौरान दिल्ली के विभिन्न केंद्रों पर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दिन की तुलना में गुरुवार को शहर भर में अधिकतम तापमान में करीब तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है।

31 मई तक होती रहेगी बारिश
मौसम कार्यालय ने कहा कि शहर में बारिश और गरज-चमक की यह मौजूदा गतिविधि 31 मई तक जारी रहने की उम्मीद है। स्काईमेट वेदर के महेश पालावत ने कहा, ‘राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में पहले ही गरज के साथ बारिश शुरू हो चुकी है और शाम तक इस मौसम प्रणाली के दिल्ली तक पहुंचने और रात भर जारी रहने की संभावना है।’

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को तूफान की तीव्रता बढ़ने की संभावना है और यह सिलसिला 30 मई तक जारी रहने के आसार हैं। इसके बाद मौसम प्रणाली के 30 और 31 मई के बीच गुजरात की ओर बढ़ने की संभावना है।

पालावत ने कहा, ‘मॉनसून पूर्व वर्षा के इस दौर के दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में और अप्रैल में हुई मॉनसून पूर्व वर्षा से अधिक तीव्र रहने की संभावना है, जिससे पूरे शहर में व्यापक वर्षा होगी।’ उन्होंने मौसम में आए इन बदलावों का कारण पर्वतों के ऊपर मौजूद पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान और आसपास के इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं को बताया, जिनसे शहर में नमी का स्तर बढ़ गया है।

लाखों शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, TET पास करने की समय सीमा बढ़ाई गई

 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी की पात्रता हासिल करने की समय सीमा को एक साल बढ़ा दिया है। शीर्ष अदालत ने कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए अब 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। पहले यह डेडलाइन 31 अगस्त 2027 थी। कोर्ट ने यह फैसला कई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया है। हालांकि अदालत ने उन याचिकाओं को फिर से खारिज कर दिया है जिसमें 2009 से पहले नियुक्त हुए सभी टीचर्स को अनिवार्य टीईटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि देश में काम कर रहे सभी टीचरों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। ऐसे में टीईटी अनिवार्यता मामले में देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा अभी भी कायम है।

कुछ दिन पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने राहत की मांग कर रहे शिक्षकों को दो टूक कहा था कि वे स्वार्थी न बनें और केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में ही न सोचें, बल्कि उन बच्चों के बारे में भी विचार करें जिन्हें क्वालिटी वाली एजुकेशन की आवश्यकता है। अदालत ने यह कड़ी टिप्पणी तब की जब वह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों तथा पश्चिम बंगाल व केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई कईं टीईटी अनिवार्यता विरोधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में सितंबर 2025 के सर्वोच्छ न्यायालय के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें देशभर के गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले कार्यरत शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने का निर्देश दिया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या है पूरा मामला

आपको बता दें कि टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के हजारों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 3 साल ( सितंबर 2025 कोर्ट के फैसले की तिथि से ) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। यानी इन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु, यूपी, मध्य प्रदेश समेत कई राज्य पुनर्विचार याचिका दायर कर चुके हैं।

स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे
कुछ दिन पहले सुनावाई के दौरान तमिलनाडु ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अकेले उस राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। राज्य ने यह भी कहा था कि यदि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया गया, तो राज्य को शिक्षकों के बिना कक्षाएं चलानी पड़ेंगी। स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता ने कहा, ‘बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) बच्चों के लिए बनाया गया है। केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में सोचकर मतलबी मत बनिए और यह मत कहिए कि मुझे केवल अदालत से अपनी नौकरी की सुरक्षा के आदेश चाहिए और मैं बच्चों के बारे में नहीं सोचूंगा।’वे न्यायमूर्ति मनमोहन के साथ गठित पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे और समीक्षा याचिकाकर्ताओं पर जवाब दे रहे थे।

जस्टिस दत्ता ने याद दिलाई टीईटी वाली धारा
जस्टिस दत्ता ने शिक्षा का अधिकार 2009 अधिनियम की धारा 23(2) का जिक्र किया था, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और शिक्षक शिक्षा संस्थानों की अपर्याप्तता के मामलों में शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्य योग्यता हासिल करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया गया है। इसके बाद न्यायाधीश ने धारा 23(2) के दूसरे प्रावधान की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसे 2017 में अधिनियम में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था। इसमें 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत उन शिक्षकों को अतिरिक्त राहत दी गई थी, जिनके पास न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। उन्हें यह योग्यता प्राप्त करने के लिए चार वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया था।

ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, गिरिबाला और समर्थ सिंह 2 जून तक CBI रिमांड में; होगा वर्चुअल रीक्रिएशन

भोपाल 

एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने उसकी सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी के वकील ने दोनों की 5-5 दिन की रिमांड मांगी। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की। जिसके बाद स्पेशल कोर्ट की जज शोभना भलावे ने सीबीआई रिमांड को मंजूरी दे दी।

बता दें कि ट्विशा का पति समर्थ सिंह पहले से ही 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर था। शुक्रवार को ये रिमांड खत्म होने पर उसे कोर्ट में पेश किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान सीबीआई दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। समर्थ ने फरारी कहां और किसके साथ काटी, इसको लेकर भी सवाल-जवाब होंगे।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, अब जांच के लिए टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एजेंसी ट्विशा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की हर गतिविधि को मिनट-टू-मिनट समझा जा सके।

अदालत में पेशी, 5 दिन की रिमांड मंजूर
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिबाला और समर्थ शांत मुद्रा में नजर आए। 

वकीलों ने रिमांड का विरोध नहीं किया
गिरिबाला सिंह के वकीलों ने सीबीआई की रिमांड का विरोध नहीं किया, बल्कि यह कहा कि एसआईटी के पास जो भी सबूत हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से सीबीआई को सौंपा जाए. इस पर सीबीआई ने बताया कि उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज मिल चुके है। 

कोर्ट में हुई बहस, CBI ने रोका दखल
सुनवाई के दौरान कटघरे में खड़े गिरिबाला सिंह की सीबीआई अधिकारियों से बहस भी हुई. अधिकारी ने उन्हें वकीलों से अधिक बोलने और मामले से इतर विषय उठाने से रोका, जिससे कुछ देर के लिए अदालत का माहौल गर्म हो गया। 

घटना के दिन के हालात पर होगी पूछताछ
सीबीआई अब घटना के दिन की परिस्थितियों को लेकर अहम सवाल करेगी. इसमें यह जानने की कोशिश होगी कि कटारा हिल्स स्थित घर में उस समय कौन-कौन मौजूद था और अंदर क्या घटनाक्रम हुआ था। 

शादी के 5 महीने बाद मौत पर सवाल
जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो शादी के महज 5 महीने बाद ऐसी स्थिति कैसे बनी कि ट्विशा शर्मा की मौत हो गई. साथ ही परिवार के भीतर चल रहे विवादों और उत्पीड़न के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी। 

सबूतों और पुलिस जांच पर संदेह
सीबीआई पुलिस जांच के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाएगी. जैसे- मौत की सूचना देने में देरी क्यों हुई, शव को नीचे लाकर CPR देने का फैसला किसने लिया और पुलिस रिकॉर्ड में लंबाई जैसी जानकारी गलत कैसे दर्ज हुई। 

40 मिनट की घटनाओं पर फोकस
जांच का सबसे अहम हिस्सा वह 40 मिनट का समय है, जब ट्विशा जिम एरिया में गईं और फिर उनकी मौत हुई. सीबीआई यह जानने की कोशिश करेगी कि उस दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में उन्हें नीचे लाया गया। 

वायरल वीडियो पर भी सवाल
जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि केवल छत से नीचे लाने का वीडियो ही क्यों वायरल हुआ, उसके पहले या बाद का कोई फुटेज क्यों सामने नहीं आया. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। 

समर्थ सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीबीआई समर्थ सिंह की भूमिका की भी गहराई से जांच करेगी. उनके बयानों में विरोधाभास, फरार रहने के दौरान मदद और पूरे घटनाक्रम में उनकी संलिप्तता की जांच की जाएगी। 

परिजनों के आरोपों की पड़ताल
ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप भी जांच में अहम होंगे. इनमें कथित उत्पीड़न, जबरन गर्भपात और चरित्र पर सवाल उठाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। 

जांच में खुल सकती हैं नई परतें
सीबीआई की इस पूछताछ से मामले के कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठने की संभावना है. अब सबकी नजर 2 जून तक की रिमांड अवधि पर टिकी है, जहां से इस हाई-प्रोफाइल केस में अहम खुलासे हो सकते हैं। 

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न

रायपुर
छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। 

               बैठक में कटघोरा- डोंगरगढ़ रेल लाइन सहित प्रदेश में चल रही अन्य रेल परियोजनाओं की प्रगति और बोर्ड के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और समयसीमा पर चर्चा की।

           बैठक में सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग एवं रेल परियोजनाएं श्री रजत कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय एवं आयुक्त जनसंपर्क तथा संचालक खनिज विकास निगम श्री रजत बंसल सहित वित्त विभाग एवं रेलवे कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में नकली खाद पर बड़ी कार्रवाई, कृषि विभाग ने 180 क्विंटल खाद किया जब्त

बिलासपुर.

अमानक खाद पर कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रतनपुर की दुकानों से 180 क्विंटल अमानक खाद जब्त किया है। साथ ही दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर की गई, जिससे बाकी दुकानदारों में हड़कंप मच गया है।

किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद-बीज उपलब्ध कराने बिलासपुर क्षेत्र में अभियान चलाया गया। कृषि विभाग की टीम ने रतनपुर क्षेत्र की कई दुकानों और समितियों की जांच की। सेवा सहकारी समिति चपोरा में रिकॉर्ड और भंडारण में अनियमितताएं पाई गई। मेंसर्स गुप्ता ग्रेन मर्चेंट रतनपुर में भी गड़बड़ियां उजागर हुई। सेवा सहकारी समिति रतनपुर में अभिलेखों में खामियां पाई गई। उन्नत कृषि सेवा केंद्र रतनपुर में भी नियमों का उल्लंघन सामने आया।

यहां खाद विक्रय और भंडारण संबंधी कई अनियमितताएं मिलने से कृषि विभाग ने संबंधित संस्थाओं और विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

बस्तर और जनजातीय समाज के लिए चार दशक का समर्पण मानवता की असाधारण मिसाल : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

बस्तर और जनजातीय समाज के लिए चार दशक का समर्पण मानवता की असाधारण मिसाल : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

पद्मडॉ. सुनीता गोडबोले एवं डॉ. रामचंद्र गोडबोले द्वारा बस्तर में किए गए सेवा कार्यों की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की सराहना

बस्तर में सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसेवा पहुंचाने पर सरकार का फोकस : मुख्यमंत्री

रायपुर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में पद्मसे सम्मानित समाजसेवी दंपति डॉ. सुनीता गोडबोले और डॉ. रामचंद्र गोडबोले से आत्मीय मुलाकात कर उनके द्वारा बस्तर और जनजातीय समाज के बीच चार दशकों से अधिक समय से किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। मुलाकात के दौरान गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री को बताया कि “बस्तर और बस्तरवासियों से हमें गहरा प्रेम है। हम गोंडी और हल्बी में उनसे संवाद करते हैं, यही हमारी संस्कृति है और अब हम बस्तर नहीं छोड़ना चाहते हैं।” मुख्यमंत्री साय ने इस आत्मीय भावना को बस्तर, उसकी संस्कृति और जनजातीय समाज के प्रति गहरे समर्पण का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल सेवा का विषय नहीं, बल्कि मानवीय आत्मीयता, संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता की दुर्लभ मिसाल है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोडबोले दंपति को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका पद्मसम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश, विशेष रूप से बस्तर, जनजातीय समाज और बस्तरवासियों के सम्मान का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल बने गोडबोले दंपति का सम्मानित होना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि डॉ. सुनीता गोडबोले और डॉ. रामचंद्र गोडबोले ने चार दशकों से अधिक समय तक बस्तर और अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि सेवा का वास्तविक अर्थ समाज के सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक अपनत्व, विश्वास और मानवीय संवेदना पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति ने जनजातीय समाज तक पहुंचकर निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया, कुपोषण, टीबी, मलेरिया, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलायी तथा शिक्षा और नशामुक्ति जैसे विषयों पर उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद जनजातीय समाज के बीच बने रहना और सेवा करते रहना असाधारण समर्पण का उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति केवल चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के आत्मीय सहयोगी के रूप में कार्य करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद के कठिन दौर में भी गोडबोले दंपति ने सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा और मानवता को सर्वोपरि रखते हुए जनजातीय समाज के बीच लगातार कार्य करते रहे। उन्होंने कहा कि जब भय और असुरक्षा का वातावरण था, तब भी इनका बस्तर और उसके लोगों के प्रति विश्वास और प्रतिबद्धता कमजोर नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दर्शाता है कि इस प्रदेश, इसकी संस्कृति और जनजातीय समाज के प्रति उनका प्रेम कितना गहरा और आत्मीय है। उन्होंने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ कठिन परिस्थितियों में समाज के साथ खड़े रहने से सिद्ध होता है और गोडबोले दंपति ने इसे अपने जीवन से प्रमाणित किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्हें यह देखकर विशेष प्रसन्नता हुई कि गोडबोले दंपति को बस्तर और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की गहरी समझ है। उन्होंने कहा कि वे केवल यहां कार्य नहीं कर रहे, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली में पूरी तरह रच-बस गए हैं तथा उसे आत्मसात किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय भाषाओं में संवाद स्थापित करना इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने लोगों के बीच विश्वास, अपनत्व और आत्मीयता का मजबूत रिश्ता बनाया है। यही कारण है कि आज वे स्वयं कहते हैं कि अब बस्तर छोड़ने का उनका मन नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम से उनका स्वयं का जुड़ाव रहा है और वे जानते हैं कि आश्रम के संस्कार सेवा, समर्पण और समाज के प्रति आत्मीयता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम की यात्रा और उसके मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशीलता और आत्मीय सहयोग पहुंचाने के विचार से जुड़े हैं तथा यह कार्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार करता है।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोडबोले दंपति से संवाद करते हुए बस्तर के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सूक्ष्म स्तर के प्रयासों और कार्ययोजना की जानकारी भी साझा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में विकास और विश्वास की नीति पर गंभीरता से कार्य कर रही है ताकि सुरक्षा के साथ-साथ लोगों तक शासन, सेवाएं और अवसर भी पहुंचें। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा व्यवस्था को केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे जनसेवा से जोड़ते हुए व्यापक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार सुरक्षा कैंपों को “सेवा डेरा” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि वहां सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, जनसेवा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित हो सके।  मुख्यमंत्री ने “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित कर रही है और वहां विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में विकास, सुरक्षा और विश्वास का जो नया वातावरण बना है, वह संवेदनशील शासन और सतत प्रयासों का परिणाम है।

       चर्चा के दौरान गोडबोले दंपति ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से संत गहिरा गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेरणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कैलाश गुफा, वहां संचालित संस्कृत विद्यालय, आश्रम तथा सरगुजा अंचल की यात्राओं का अनुभव साझा करते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपने जुड़ाव की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि गोडबोले दंपति ने केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, जनजातीय जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं को भी आत्मसात किया है। 

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि गोडबोले दंपति की समर्पण और सेवा की भावना पूरे छत्तीसगढ़ में जनसेवा और सामाजिक जागरूकता की नई चेतना को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

3,540 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हाई-स्पीड कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया मानक स्थापित करेगा
114 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिलेगी जाम से राहत, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को मिलेगा नया आधार
जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना से आवागमन होगा तेज

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत

विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण

परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार

परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक

परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

व्यापक अधोसंरचना निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है।

यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।

महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार

आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर विकसित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा पौधरोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकास, संपर्क और समृद्धि का नया अध्याय

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली विकास यात्रा है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, कम ईंधन खपत, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर मध्य भारत के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा।

 

पंकज चौधरी के बाद हर्ष मल्होत्रा को बड़ी जिम्मेदारी, क्या मोदी कैबिनेट में होने वाला है बड़ा फेरबदल?

नई दिल्ली

बीजेपी ने एक बार फिर चौंकाते हुए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्‍होत्रा को प्रदेश की कमान सौंप दी है. उन्‍हें द‍िल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया गया है. दिल्ली से पहले बीजेपी ने यूपी में भी भाजपा ने यही फॉर्मूला अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी. यानी अब दो-दो केंद्रीय मंत्री सीधे राज्यों में संगठन की कमान संभाल रहे हैं. इस बदलाव के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है क‍ि क्या अब मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होगा. क्‍योंक‍ि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’के सिद्धांत को मानतीहै. ऐसे में मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने का सीधा मतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण कुर्सियां खाली होने वाली हैं। 

हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. दिल्ली में अगले कुछ समय में होने वाले एमसीडी चुनाव को देखते हुए उनकी न‍ियुक्‍त‍ि काफी मायने रखती है. द‍िल्‍ली में बीजेपी को एक ऐसे जमीन से जुड़े पंजाबी और वैश्य चेहरे की जरूरत थी, जिसकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हो. केंद्रीय मंत्री को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ने वाली. इसके साथ ही बीजेपी ने पंजाबी चेहरे को मौका देकर पंजाब में भी पैठ बनाने की कोश‍िश की है। 

‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत
बीजेपी की कार्यशैली दूसरी पार्टियों से थोड़ी अलग है. बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का नियम बेहद कड़ाई से लागू करती है. पार्टी का इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी नेता को संगठन से सरकार में या सरकार से संगठन में लाया गया है, उसने बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया है। 

जेपी नड्डा का उदाहरण
जब जेपी नड्डा को मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी से दूरी बनाई और पार्टी ने सांगठनिक निरंतरता के लिए नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना. ठीक यही नियम अब राज्यों के स्तर पर भी लागू होने जा रहा है। 

उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी
कुछ समय पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था. तब भी यह सवाल उठा था कि क्या वे दोनों पद संभालेंगे? भाजपा की नीति के अनुसार, जब कोई मंत्री संगठन के पूर्णकालिक काम में उतरता है, तो उसे सरकारी जिम्मेदारी से मुक्त किया जाता है ताकि वह शत-प्रतिशत समय संगठन को दे सके। 

अब हर्ष मल्‍होत्रा
अब यही इतिहास दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा के साथ दोहराया जा रहा है. हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी दोनों केंद्रीय मंत्रालयों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. चूंकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संगठन का काम 24 घंटे और 365 दिन का होता है, इसलिए इन दोनों मंत्रियों का कैबिनेट से बाहर होना तय माना जा रहा है. यह कदम ही इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि मोदी कैबिनेट में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री होने वाली है। 

जब-जब संगठन बदला, तब-तब बदली कैबिनेट
यदि हम मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के इतिहास और उससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी के दौर के इतिहास पर नजर डालें, तो काफी कुछ क्‍ल‍ियर हो जाता है। 

    साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब राजनाथ सिंह सरकार में गृहमंत्री बने. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ा और अमित शाह को संगठन की कमान मिली. इसके बाद संगठन का पूरी तरह कायाकल्प हुआ और कैबिनेट का भी विस्तार हुआ। 

    जुलाई 2021 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया था. उस समय रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन और रमेश पोखरियाल निशंक जैसे 12 बड़े मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई थी. इनमें से कई नेताओं को बाद में संगठन के काम में लगाया गया था, जबकि भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नए चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिली थी। 

    अटल जी के समय भी कुशाभाऊ ठाकरे और जन कृष्णमूर्ती जैसे संगठन के दिग्गजों को सरकार के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. प्रमोद महाजन और वेंकैया नायडू जैसे नेताओं को कई बार संगठन से सरकार और सरकार से संगठन में भेजा गया। 

 

रिश्वत के नोट गिनते पटवारी का VIDEO वायरल, कोरबा SDM ने तुरंत किया सस्पेंड

कोरबा.

एक और पटवारी का किसान से रिश्वत लेते वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है. मामला कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के पसान तहसील के पिपरिया हल्के का मामला है.

जानकारी के अनुसार, पिपरिया व सिर्री हल्के के पटवारी विनोद अग्रवाल ने जमीन का वन पट्टा ऑनलाइन करने के लिए 5 हजार और फौती नामांतरण के लिए 10 हजार की रिश्वत मांगी थी. मजबूर किसान ने पटवारी को रिश्वत देने के साथ-साथ टेबल के नीचे नोट गिनते हुए उसका वीडियो भी बना लिया. वीडियो वायरल होने के बाद पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने पटवारील विनोद अग्रवाल को निलंबित कर दिया है. 

आंधी-पानी से हुए नुकसान का जायजा लेने मैदान में उतरे ऊर्जा मंत्री तोमर

आंधी-पानी से हुए नुकसान का जायजा लेने मैदान में उतरे ऊर्जा मंत्री तोमर

ग्वालियर

गुरुवार रात आई आंधी और बारिश से उप नगर ग्वालियर में कई क्षेत्रों में वृक्ष गिरने से विद्युत लाइनों तथा खंभों के क्षतिग्रस्त होने से बिजली संबंधी गंभीर समस्या उत्पन्न हुई। सूचना प्राप्त होते ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने तत्काल ग्राउंड पर पहुँचकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा राहत एवं मरम्मत संबंधी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने देर रात 1 बजे 4 फीडरों पर विद्युत व्यवस्था का जायजा लिया। मंत्री तोमर ने माँ वैष्णोंपुरम , चंदनपुरा, श्याम बाबा का मंदिर, राठौर चौक, गदाईपुरा पहुंचकर विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आंधी-पानी के कारण जिन इलाकों में विद्युत आपूर्ति बाधित हुई है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्युत आपूर्ति बहाल करें।

प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से संवाद करते हुए ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिजली विभाग की टीमें पूरी तत्परता और तेजी से कार्य कर रही हैं। शीघ्र ही सभी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

 

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