पुतिन के करीबी ‘स्पाई’ इवानोव की मौत पर रहस्य, आखिर क्या है पूरा मामला?

मॉस्को

 कभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के उत्तराधिकारी समझे जाने वाले सर्गेई इवानोव की मृत्यु हो गई है. सर्गेई इवानोव रूस के रक्षा मंत्री रह चुके थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वे 73 साल के थे। 

खास बात यह है कि क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव की मौत शुक्रवार को हुई, लेकिन मौत की वजह या अन्य कोई जानकारी नहीं दी. लेकिन क्रेमलिन इसके बारे में कोई डिटेल नहीं दे रहा है. हालांकि पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. रूस समेत सोशल मीडिया में इस बारे में चर्चा हो रही है। 

पुतिन ने 2001 में इवानोव को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. इवानोव भी रूस की खुफिया एजेंसी KGB के अधिकारी थे. इवानोव वे 2007 तक इस पद पर रहे और चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान कामकाज संभाला, जिसमें उस इलाके की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया गया था। 

द सोवियत जेम्स बॉन्ड
लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने KGB में नौकरी की. यहीं पर पुतिन के साथ उनकी दोस्ती हुई. दोनों KGB के लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में साथ काम करते थे. 1998 में जब पुतिन FSB के प्रमुख बने, तो इवानोव उनके डिप्टी बने. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव ने अहम पद संभाले। 

इन पदों में सुरक्षा परिषद सचिव, रक्षा मंत्री, प्रथम उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शामिल हैं. वे ‘सिलोविकी’ के प्रमुख चेहरे थे. सिलोविकी सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों के शक्तिशाली समूह को कहा जाता है. एक समय उन्हें पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता था. पुतिन के साथ उनका रिश्ता KGB के दिनों से गहरा और विश्वास-आधारित था. पुतिन उन्हें अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद साथियों में गिनते थे. लेकिन जैसा कि राजनीति में होता है जिससे नजदीकी होती है उसी से अविश्वास भी होता है।  

इवानोव को रूस के सर्कल में सोवियत जेम्स बॉन्ड कहा जाता था. इवानोव के करियर में हुई तरक्की का काफी हद तक श्रेय पुतिन के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को जाता है. दोनों दोस्त पहली बार 1970 के दशक के आखिर में KGB अफसरों के तौर पर मिले थे. दोनों ने सोवियत जासूसी केंद्रों में काम किया. पुतिन पूर्वी जर्मनी में थे और इवानोव की तैनाती फिनलैंड और केन्या में थी। 

पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब ‘ऑल द क्रेमलिन मेन्स’ में लिखा, “वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं. आप उन्हें भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह ‘द मैट्रिक्स’ के एजेंट स्मिथ जैसे हैं, नाम में भी और शक्ल में भी. “1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां FSB (फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस) और SVR (फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें पाने के लिए होड़ कर रही थीं। 

SVR में इवानोव को यूरोपीय विभाग का पहला डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और 40 साल की उम्र के शुरुआती दौर में ही वह सबसे कम उम्र के जनरलों में से एक बन गए. लेकिन इस एजेंट को पाने की होड़ में जीत FSB की हुई, जब पुतिन उसके प्रमुख बने. 1998 में उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया. जिससे एजेंसी का एनालिटिकल काम मज़बूत हुआ. जब पुतिन प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इवानोव को रूसी सुरक्षा परिषद का प्रमुख नियुक्त किया। 

इवानोव पुतिन के उत्तराधिकारियों में से थे
जब 2008 में पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फ़ैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था.  लेकिन पुतिन ने अपने एक और पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को अपनी जगह काम करने के लिए चुना ताकि 2012 में राष्ट्रपति पद पर वापसी कर सकें। 

इवानोव की महात्वाकांक्षा और पुतिन का डर
कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इवानोव बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं। 

इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन के साथ रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर काम किया। 

2016 में इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया; इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे ज़्यादातर लोग सम्मानजनक रिटायरमेंट के तौर पर देख रहे थे. उन्होंने इस साल की शुरुआत में यह पद छोड़ दिया। 

यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं। 

पेपर लीक के आरोपों के बाद महाराष्ट्र TET परीक्षा स्थगित, परीक्षा से पहले सवाल हुए वायरल

मुंबई 

सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर से पेपर लीक का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है. अब बेहद चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र से आया है. 28 जून 2026 को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया गया है. महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने भिवंडी में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया है. इस फैसले से राज्य के लाखों उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया है, जो इस रविवार को परीक्षा देने की पूरी तैयारी कर चुके थे। 

महाराष्ट्र टीईटी (Maha TET 2026) को लेकर छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ देखी जा सकती है. भिवंडी में कुछ संदिग्धों के पास से प्रश्नपत्र से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी बरामद हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा. महाराष्ट्री टीईटी परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इस खुलासे ने परीक्षा कराने वाली सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसियों की पोल खोल दी है. .भिवंडी पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया है. परिषद का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इसे टालना बेहद जरूरी था। 

भिवंडी में पुलिस की छापेमारी से हुआ खुलासा
भिवंडी पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और प्रश्नपत्र से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की गुप्त सूचना मिली थी. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद की. भिवंडी पुलिस के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लग गए, जिसने महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा कराने वाली परिषद के होश उड़ा दिए. इसके तुरंत बाद भिवंडी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। 

बरामद दस्तावेज और असली पेपर में निकली समानता
शुरुआती जांच में जब पुलिस की तरफ से बरामद की गई सामग्री का मिलान 28 जून को होने वाली असली TET 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र से किया गया तो अधिकारी हैरान रह गए. बरामद सामग्री और परीक्षा के कुछ प्रश्नों में गजब की समानता पाई गई. इसका साफ मतलब था कि पेपर लीक की पूरी तैयारी हो चुकी थी और कुछ चुनिंदा लोगों तक सवाल पहुंच चुके थे. इस गंभीर गड़बड़ी के सामने आते ही परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। 

पारदर्शिता के लिए टाली परीक्षा
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस रिलीज जारी की. परिषद ने साफ किया कि उनके लिए परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे ऊपर है. अगर इस स्थिति में परीक्षा कराई जाती तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता. इसलिए 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 2026 को फिलहाल रोकने का सख्त फैसला लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को दागदार होने से बचाया जा सके। 

उम्मीदवारों के भविष्य पर सस्पेंस, कब होगी परीक्षा?
इस अचानक आए फैसले से उन लाखों उम्मीदवारों को गहरा झटका लगा है जो महीनों से दिन-रात एक करके इस शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया पर छात्र अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. परीक्षा परिषद ने उम्मीदवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि इस रैकेट की गहराई से जांच की जा रही है. परीक्षा की नई तारीखों और आगे के शेड्यूल को लेकर जल्द ही परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। 

दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
परीक्षा परिषद की डिप्टी कमिश्नर प्रिया शिंदे ने बताया कि पुणे परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित यह परीक्षा राज्य के 37 शहरों के 1728 केंद्रों पर होने वाली थी. इसमें करीब 6 लाख 12 हजार 500 उम्मीदवारों को शामिल होना था. लेकिन ठाणे और भिवंडी में पेपर लीक होने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं है. इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा के लिए न तो रजिस्ट्रेशन कराना होगा और न ही कोई फीस देनी होगी. डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि एक परीक्षा आयोजित करने में करीब 3 हफ्ते लगते हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

 

प्रियदर्शन की फिल्म ‘हैवान’ का ऐलान, अक्षय कुमार–सैफ अली खान की जोड़ी 11 सितंबर 2026 को मचाएगी धमाल

प्रियदर्शन की अपकमिंग क्राइम थ्रिलर फिल्म हैवाल की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। फिल्म के लिए फैंस को 11 सितंबर, 2026 तक का इंतजार करना होगा। हैवान में एक बार फिर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी दमदार वापसी करेगी। फिल्म को लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। फिल्म के प्रोडक्शन हाउस ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक पोस्टर शेयर करते हुए रिलीज डेट का ऐलान किया है।

कब रिलीज होगी अक्षय कुमार की हैवान?
केवीएन प्रोडक्शन ने हैवान को प्रोड्यूस किया है। जो पोस्टर शेयर किया गया है उसपर लिखा है- सिनेमाघरों में 11 सितंबर, 2026 को। 60 ब्लॉकबस्टर्स , एक मास्टर स्टोरीटेलर। फिल्म बाय प्रियदर्शन- हैवान। हैवान पोस्टर पर बड़े-बड़े लाल रंग के अक्षरों से लिखा गया है।

हैवान की रिलीज डेट के ऐलान पर क्या बोले सोशल मीडिया यूजर्स
इस पोस्टर के साथ कैप्शन लिखा गया है – एक ऑब्सेशन। एक अटूट लगन। एक ऐसी तारीख जो आप याद रखना चाहेंगे। हैवान- प्रियदर्शन की फिल्म जिसमें सैफ अली खान और अक्षय कुमार नजर आएंगे। सिनेमाघरों में 11 सितंबर, 2026 को। अपने कैलेंडर में तारीख मार्क कर लीजिए।

इस पोस्टर पर तमाम लोगों के कमेंट्स आए हैं। एक ने लिखा- खिलाड़ी कुमार। अब इंतजार नहीं होता। एक ने लिखा- ये फिल्म अच्छी होगी। एक ने लिखा जेलर 2 से होगी क्लैश। बहुत सारे यूजर्स ने पोस्ट पर हार्ट और फायर इमोजी बनाकर रिएक्ट किया है।

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी सैफ अली खान की कर्तव्य
सैफ अली खान की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म कर्तव्य नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। सैफ अली खान की कर्तव्य एक क्राइम थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म में जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी विलेन के रोल में नजर आए हैं। सैफ अली खान ये क्राइम थ्रिलर लोगों पर अपना कमाल दिखा पाने से चूक गई है।

अक्षय कुमार की वेलकम टू द जंगल का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
अक्षय कुमार की बात करें तो उनकी फिल्म वेलकम बैक टू द जंगल 26 जून को ही सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। वेलकम बैक टू जंगल एक मल्टी-स्टारर फिल्म है। फिल्म लोगों को पसंद भी आ रही है। सोशल मीडिया पर फिल्म को पॉजिटिव रिव्यूज मिले हैं। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म का असर देखने को मिला है। sacnilk.com के मुताबिक, अक्षय कुमार की फिल्म ने अब तक (27 जून, दोपहर 2 बजे) 22.48 करोड़ की कमाई कर ली है। अक्षय कुमार की वेलकम बैक टू द जंगल अहमद खान ने डायरेक्ट की है।

रायपुर : नक्सल मुक्त बस्तर के नव निर्माण में समाज निभाए अग्रणी भूमिका : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर : नक्सल मुक्त बस्तर के नव निर्माण में समाज निभाए अग्रणी भूमिका : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक में सामाजिक एकता, वन संरक्षण और देवस्थलों के संरक्षण पर दिया जोर

रायपुर

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर के नव निर्माण में समाज की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। विकास, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के लिए समाज को संगठित होकर आगे आना होगा। उन्होंने यह बात आज नारायणपुर के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए कही।

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक

       उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद कुछ लोग यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि अब जंगलों की कटाई होगी या बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने समाज प्रमुखों से ऐसे भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने और लोगों को सही जानकारी देने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर के नवनिर्माण का जिम्मा अब बस्तर के युवाओं के मजबूत कंधों पर टिका है और सरकार विकास के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

नारायणपुर में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक

          उन्होंने कहा कि समाज के भीतर आदिवासी परंपरा का पालन करने वाले लोगों और उससे अलग हो चुके लोगों के बीच अनावश्यक द्वंद की स्थिति बन रही है। यह समाज के हित में नहीं है। समाज प्रमुखों को आगे आकर आपसी वैमनस्य समाप्त करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

        उप मुख्यमंत्री ने सामाजिक स्थलों एवं देवस्थलों का राजस्व अभिलेखों में चिन्हांकन कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शासन और प्रशासन के सहयोग से देवभूमियों का सफलतापूर्वक चिन्हांकन कराया जा रहा है। इसी तर्ज पर नारायणपुर में भी सभी समाज प्रमुख मिलकर एक समिति का गठन करें, ताकि सामाजिक एवं धार्मिक स्थलों का चिन्हांकन शीघ्र पूरा हो सके और भविष्य में उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

        बैठक के दौरान समाज प्रमुखों द्वारा गढ़िया बाबा के देवस्थल के संरक्षण का विषय उठाए जाने पर उप मुख्यमंत्री शर्मा ने तत्काल बाउंड्री वॉल, नलकूप तथा सोलर लाइट की व्यवस्था कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों का संरक्षण समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

        उप मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण को समाज का साझा दायित्व बताते हुए कहा कि जंगलों को बचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से लघु वनोपजों का संग्रहण एवं दोहन किया जाए तो वन भी सुरक्षित रहेंगे और ग्रामीणों को खेती की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है। उन्होंने समाज प्रमुखों से इस विषय पर गांव-गांव लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया।

       उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। शर्मा ने कहा कि जैविक कृषि अपनाने से लोगों का खुद का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, भूमि की उर्वरता बनी रहेगी और जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार बस्तर में सहकारी रूप से दुग्ध उत्पादन करने के लिए लोगों को प्रेरित किया।

       उप मुख्यमंत्री शर्मा ने अबूझमाड़ की पहाड़ी क्षेत्रों में स्थाई कृषि को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अबूझमाड़ के 10-10 युवाओं का दल बनाकर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों का शैक्षणिक भ्रमण कराकर ऊंचाइयों पर खेती के आधुनिक कृषि तकनीक सिखाने को कहा। उन्होंने अबूझमाड़ के ग्रामों में पर्यटन को विकसित करने के लिए होम स्टे विकसित करने को कहा ताकि ग्रामीणों को स्थायी आय का नया माध्यम प्राप्त हो सके।

       बैठक में समाज प्रमुखों ने क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकास संबंधी समस्याओं और सुझावों से उप मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी की बातों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना तथा संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से ही नक्सल मुक्त बस्तर का समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य तैयार किया जा सकेगा।

       इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, ओरछा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष मंगलूराम नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, छोटे डोंगर की सरपंच श्रीमती संध्या पवार, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

रायपुर : नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर की ओर बढ़ रहा-मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर की ओर बढ़ रहा-मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े

कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रेस-वार्ता में कहा— सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं से बदलेगी जिले की तस्वीर, सरकार समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध

रायपुर
दो दिवसीय प्रवास पर बीजापुर पहुंचीं  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने शनिवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से अब जिले में विकास का नया दौर शुरू हो चुका है और शासन की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बीजापुर वासियों को दी बधाई

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जिलेवासियों को सशस्त्र माओवाद से मुक्ति के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे बस्तर अंचल और देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में माओवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अब बीजापुर सहित बस्तर संभाग शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

अब विकास की रफ्तार होगी और तेज

प्रेस-वार्ता में मंत्री ने कहा कि वर्षों तक माओवादी गतिविधियों के कारण जिले के कई अंदरूनी क्षेत्रों तक विकास कार्य पूरी गति से नहीं पहुंच पाए थे। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और शासन-प्रशासन पूरी क्षमता एवं प्रतिबद्धता के साथ उन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, संचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाएगा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगी शासन की योजनाएं

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी है। महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की व्यक्ति-मूलक योजनाओं से जिले के अंतिम व्यक्ति को जोड़कर समावेशी विकास का मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे हर परिवार विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन सके।

शांति और विकास साथ-साथ चलेंगे

मंत्री ने कहा कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। अब जब बीजापुर में शांति का वातावरण स्थापित हुआ है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का दायरा लगातार बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासन, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों से बीजापुर आने वाले समय में विकास, सुशासन और जनकल्याण का एक नया उदाहरण बनेगा। सरकार जिले के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ कार्य कर रही है।

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

रायपुर ,
 छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार तथा विनय कुमार उपस्थित रहे।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में इस प्रकार की सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

सागर में ‘लुटेरी दुल्हन’ का खेल! शादी के तीसरे दिन ₹1.20 लाख नकद और जेवर लेकर फरार

सागर/ जैसीनगर
 जैसीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा पेगवार में शादी के तीसरे ही दिन दुल्हन घर से 30 हजार रुपये नकद व जेवर लेकर भाग गई। पीड़ित की शिकायत पर जैसीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार महुआखेड़ा पेगवार निवासी 36 वर्षीय नोनीराम पटेल ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वह दोबारा विवाह करना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से हुई, जिसने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी निवासी रुक्मणी चतुर्वेदी से विवाह कराने का भरोसा दिलाया।

महिला को विधवा बताकर की ठगी
पुलिस के अनुसार पीड़ित को बताया गया कि रुक्मणी के पति की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। रिश्ता तय कराने के एवज में रामनारायण दुबे को एक लाख 20 हजार रुपये दिए गए। नोनीराम के अनुसार ने बताया कि 19 जून को सागर में दोनों की कोर्ट मैरिज और अगले दिन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान रुक्मणी के साथ ओडिशा निवासी अरविंद विभार भी मौजूद था, जिसे उसने अपना जीजा बताया था।

सुबह नींद खुली तो महिला फरार हो चुकी थी
नोनीराम ने बताया कि 21 जून की रात रुक्मणी घर की अलमारी से 30 हजार रुपये नकद, करीब आधा किलो चांदी की करधोनी, लगभग 250 ग्राम चांदी की पायल और एक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गई। सुबह परिवार की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली।

तलाश के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि देर रात एक कार गांव में आई थी और उसमें सवार युवक घर का पता पूछ रहा था। फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने उसकी पहचान शादी में आए अरविंद विभार के रूप में की।

बिचौलिए से की जा रही पूछताछ
पीड़ित ने जैसीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शुक्रवार को वह दोबारा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने बताया कि मामले में रिश्ता तय कराने वाले कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार महिला और उसके सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

 

छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मंजूरी, अब अलग-अलग फ्लेवर की फ्रेश क्राफ्ट बीयर मिलेगी

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में अब स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर का दौर शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी (Micro Brewery) स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में पहली बार निवेशकों को माइक्रो ब्रुअरी संचालित करने के लिए लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से पर्यटन, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति मिलेगी, निजी निवेश आकर्षित होगा और आबकारी विभाग के राजस्व में भी वृद्धि होगी।छत्तीसगढ़ में बीयर पसंद करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब राज्य में अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश (क्राफ्ट) बीयर का स्वाद मिल सकेगा। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा।

रेस्तरां में बनेगी फ्रेश बीयर :
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी ऐसे रेस्तरां या होटल परिसर में स्थापित की जा सकेगी, जहां सीमित मात्रा में बीयर तैयार कर उसी स्थान पर ग्राहकों को परोसी जाएगी। यहां तैयार होने वाली बीयर को क्राफ्ट बीयर कहा जाता है, जो अपने ताजे स्वाद, गुणवत्ता और विभिन्न फ्लेवर के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय मानी जाती है। अभी तक छत्तीसगढ़ में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी और उपभोक्ताओं को केवल बड़े ब्रांडों की औद्योगिक स्तर पर बनी बीयर ही उपलब्ध होती थी।

सरकार का कहना है कि इससे लोगों को नया विकल्प मिलेगा और होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है और उसे उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाता है।

कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से चल रही हैं। खासकर बेंगलुरु को देश की ‘क्राफ्ट बीयर कैपिटल’ माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है। लाइसेंस के लिए 10 लाख फीस होगी। 4 हजार वर्गफीट परिसर जरूरी होगा।

छोटे बैच में होगी तैयार :
माइक्रो ब्रुअरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बीयर छोटे-छोटे बैच में तैयार की जाती है। उत्पादन सीमित होने के कारण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स, यीस्ट और अन्य प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है। चूंकि यह बीयर तैयार होने के तुरंत बाद ग्राहकों को परोसी जाती है, इसलिए इसका स्वाद सामान्य बीयर की तुलना में अधिक ताजा और बेहतर माना जाता है। साथ ही उपभोक्ताओं को विभिन्न फ्लेवर और विशेष किस्मों की बीयर का विकल्प भी मिलता है।

नए मानक तैयार :
राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए कुछ अनिवार्य मानक भी तय किए हैं। इसके अनुसार लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कम से कम 4,000 वर्गफीट क्षेत्रफल वाला परिसर होना आवश्यक होगा। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और अन्य वैधानिक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित रेस्तरां और माइक्रो ब्रुअरी एक ही परिसर में संचालित किए जा सकेंगे, जिससे ग्राहकों को ताजा तैयार की गई क्राफ्ट बीयर का अनुभव मिल सके।

10 लाख का लाइसेंस :
नई व्यवस्था के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर वर्ष 10 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। प्रत्येक इकाई को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। तैयार बीयर पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित उत्पाद शुल्क भी लागू होगा। उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि अंतिम कीमत स्थान, ब्रांड और फ्लेवर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

पर्यटन को बढ़ावा :
सरकार का मानना है कि यह नीति केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे राज्य के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलेगा। देश के कई राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी मॉडल पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी होटल, रेस्तरां और पर्यटन स्थलों पर इस तरह की इकाइयों के खुलने से नए निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। 

साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आबकारी विभाग का कहना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति लागू होने से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। लाइसेंस शुल्क, उत्पाद शुल्क और इससे जुड़े अन्य करों के माध्यम से सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। वहीं होटल और रेस्तरां उद्योग को अपने कारोबार का विस्तार करने का नया अवसर मिलेगा।

कमाई बढ़ाने की स्कीम :
नई आबकारी नीति के इस फैसले को राज्य में आतिथ्य और पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि राज्य में कितने निवेशक माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने में रुचि दिखाते हैं और छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर लोगों के बीच कितनी लोकप्रिय हो पाती है।

सामान्य बीयर से कैसे अलग होगी क्राफ्ट बीयर
क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, इसलिए इसके स्वाद, गुणवत्ता और ताजगी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होता है। इसमें अलग-अलग फ्लेवर भी मिलते हैं और इसे ताजा परोसा जाता है।

4 हजार वर्गफीट जगह होना जरूरी
सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4 हजार वर्गफीट होना चाहिए। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा और अन्य सभी जरूरी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

सालाना 10 लाख रुपए देनी होगी लाइसेंस फीस
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर साल 10 लाख रुपए लाइसेंस फीस देनी होगी। एक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1 हजार लीटर क्राफ्ट बीयर बनाने की अनुमति होगी। पहले जहां सालाना लाइसेंस फीस 25 लाख रुपए थी, उसे घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है।हालांकि, लाइसेंस लेने के साथ ही कारोबारियों को लाइसेंस फीस का 25% हिस्सा सुरक्षा राशि के रूप में पहले से जमा करना होगा।

एक गिलास की कीमत 250 से 300 रुपए तक
सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपए प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क तय किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपए के बीच हो सकती है।

सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी शुरू होने से होटल, रेस्तरां और पर्यटन क्षेत्र को फायदा मिलेगा। नए निवेश आएंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य को लाइसेंस फीस और उत्पाद शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।

उत्पादन की सीमा तय
नई नीति के तहत एक माइक्रो ब्रुअरी सालभर में अधिकतम 3 लाख 65 हजार बल्क लीटर क्राफ्ट बीयर का ही उत्पादन कर सकेगी। यानी रोजाना औसतन 1,000 बल्क लीटर उत्पादन की सीमा तय की गई है।सरकार ने इस बार माइक्रो ब्रुअरी के संचालन पर निगरानी भी बढ़ा दी है। उत्पादन, बिक्री और टैक्स भुगतान पर लगातार नजर रखी जाएगी। यानी कारोबार शुरू करना भले आसान हुआ हो, लेकिन नियमों का पालन पहले से ज्यादा सख्ती से करना होगा।

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

गांवों के विकास में सहभागी बनने का किया आह्वान, सिंचाई व्यवस्था के दिए निर्देश

रायपुर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा  नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी  

        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील  

         गृह मंत्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।

पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश  

         उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की। 

सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं

        चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें।

पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार  

       उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप  

            वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।

            इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

उज्जैन से भोपाल तक डीपफेक का जाल, MBBS छात्रा और मां-बेटी बने निशाना; रिश्तेदार और प्रेमिका पर आरोप

उज्जैन / भोपाल

मध्यप्रदेश के उज्जैन में MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का फेक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार छात्रा और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा तरक्की से जलन रखने वाले रिश्तेदारों ने ही उसे बदनाम करने की साजिश रची थी. आरोपियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान जमा कराई गई छात्रा की तस्वीर हासिल की और तकनीकी माध्यमों से उसका आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। 

पिता की शिकायत के बाद सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार मक्सी रोड क्षेत्र के एक किसान ने 20 जून की रात पंवासा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो आया, जिसमें उनकी नाबालिग बेटी के नाम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो दिनों तक गोपनीय रूप से जांच की और वीडियो के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया। 

BLO से हासिल की गई छात्रा की तस्वीर
जांच में सामने आया कि छात्रा की तस्वीर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जमा दस्तावेजों से हासिल की गई थी. पुलिस के अनुसार बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी ने एसआईआर फॉर्म में लगी छात्रा की फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी. बाद में यह तस्वीर अन्य आरोपियों तक पहुंची. इसी तस्वीर का उपयोग कर AI और डीपफेक जैसी डिजिटल एडिटिंग के जरिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। 

MBBS की पढ़ाई और परिवार की तरक्की बनी वजह
पंवासा थाना प्रभारी गमर सिंह मंडलोई के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता अपने गांव और समाज की पहली लड़की है जो MBBS की पढ़ाई कर रही है. पुलिस का दावा है कि छात्रा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से कुछ रिश्तेदार नाराज थे. परिवार की बढ़ती प्रतिष्ठा को देखते हुए आरोपियों ने उसे बदनाम करने की साजिश रची. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का उद्देश्य कथित तौर पर परिवार पर सामाजिक दबाव बनाना था ताकि छात्रा की पढ़ाई प्रभावित हो सके। 

उज्जैन: MBBS कर रही छात्रा बनी रिश्तेदार की साजिश का शिकार
उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक MBBS छात्रा के फोटो को अश्लील वीडियो से जोड़कर सोशल मीडिया और गांव के वॉट्सएप ग्रुप पर वायरल कर दिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि यह साजिश छात्रा के ही रिश्तेदार ने रची थी। उसका मकसद छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि छात्रा का फोटो सरकारी रिकॉर्ड से एक महिला BLO ने आरोपियों को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद फोटो को एडिट कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया और गांव के ग्रुपों पर वायरल कर दिया गया।

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। महिला BLO को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।

सरकारी रिकॉर्ड से मिला फोटो
पुलिस के मुताबिक, छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी फोटो जुटाना आसान नहीं था। आरोपी को पता चला कि छात्रा ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान BLO को अपना फोटो दिया था। वहीं से फोटो हासिल कर उसे डीपफेक वीडियो में इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में चुनावी और पारिवारिक रंजिश को घटना की वजह माना जा रहा है।

भोपाल: शादी से इनकार पर मां-बहन को बनाया निशाना
भोपाल के करोंद इलाके में एक युवक को अपनी प्रेमिका से शादी से इनकार करना भारी पड़ गया। आरोप है कि युवती ने बदला लेने के लिए युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की AI से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल कर दिए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी बेटी तनाव में है और पूरा परिवार बदनामी झेल रहा है।

परिवार ने थाने में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
पीड़ित परिवार ने पहले छोला थाना में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी युवती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इन दोनों मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि AI और डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल लोगों की प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर निजी फोटो साझा करने में सावधानी बरतने और संदिग्ध कंटेंट दिखने पर तुरंत पुलिस से शिकायत करने की सलाह दे रहे हैं।

चार महीने पहले तैयार किया गया था फेक वीडियो
पुलिस जांच में पता चला कि कथित फेक वीडियो करीब चार महीने पहले तैयार किया गया था. बताया जा रहा है कि छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी तस्वीर जुटाना आसान नहीं था. आरोपियों को जब पता चला कि छात्रा की फोटो सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध है, तो उसी का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार किया गया. कुछ समय बाद यह वीडियो छात्रा के पिता तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने पुलिस की शरण ली। 

तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आबिद पटेल, एहसान पटेल और मुजफ्फर पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार बताया जा रहा है। 

मोबाइल जब्त, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
जांच एजेंसियों ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इन उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि वीडियो बनाने, एडिट करने और प्रसारित करने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाया जा सके. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और इसके प्रसार में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। 

BLO के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस जांच में बीएलओ की भूमिका सामने आने के बाद प्रशासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है. पंवासा थाना पुलिस ने संबंधित बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के संबंध में कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा है. प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी। 

परिवार को बदनाम करने की साजिश का खुलासा
पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर अपराध के साथ-साथ किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कथित साजिश से भी जुड़ा है. फिलहाल फरार आरोपी की तलाश जारी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। 

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