मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर

मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के उत्थान, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. ताती के दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कार्यों के लिए समर्पित किया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. बुधरी ताती ने चार दशक से अधिक समय तक बस्तर अंचल सहित वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए सतत कार्य किया है। उन्होंने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती जैसे व्यक्तित्व हमारी समृद्ध जनजातीय विरासत, लोक संस्कृति और सेवा की परंपरा के सशक्त प्रतीक हैं। उनका जीवन नई पीढ़ी को समाज के प्रति संवेदनशीलता, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती के परिजन उपस्थित थे।

संभाग स्तरीय रोजगार मेले में युवाओं का बढ़ाया उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल बोले— प्रतिभा और कौशल को मिलेगा बेहतर अवसर

रायपुर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को अंबिकापुर स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित संभाग स्तरीय रोजगार मेले में सहभागिता कर क्षेत्र के युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने रोजगार के लिए पहुंचे युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता युवाओं को उनकी प्रतिभा, योग्यता और कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने युवाओं से निरंतर परिश्रम, कौशल विकास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि रोजगार मेले केवल नियुक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का सशक्त मंच हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योगों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की राह और अधिक मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में कौशल और दक्षता ही सफलता की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए युवाओं को अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करते हुए नए अवसरों के लिए स्वयं को तैयार रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। विभिन्न विभागों के माध्यम से कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सके।

इस अवसर पर मंत्री  राजेश अग्रवाल ने रोजगार मेले के माध्यम से चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रोजगार मेले के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। चयनित सभी युवाओं को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से अपने परिवार, समाज और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में युवा, अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न निजी प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रोजगार मेले में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न कंपनियों में रोजगार प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार एवं चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्रीशर्मा ने लगाई जनचौपाल

रायपुर

कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।
       
गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
    
ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।
    
जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे “भारत माता की जय” के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेरनिलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपीआकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओहरेश मंडावी, एडीएमएएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

भोपाल में वर्ष 2027 में होगी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को ग्लोबल चैम्पियन बना रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र दूसरों के जीवन को सुखद बनाते हैं। उद्यमी कर्म को पूजा और श्रम को साधना मानते हैं। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी और सुख का सूरज निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा। समिट में प्रधानमंत्रीमोदी को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवीन्द्र भवन में “विश्व एमएसएमई दिवस” पर हुई “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, कला शिल्पों की विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी सभी के लिए खुली रहेगी। शासन द्वारा कपास पर मंडी शुल्क आधा करने सहित उद्यमियों और किसानों के हित में अनेक निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बुरहानपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा अभिनंदन किया गया। समिट में लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, स्व-सहायता समूहों के सदस्यों सहित नीति निर्माताओं ने भागीदारी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं, जिसमें 25 लाख मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश की इकाइयां लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है। जीडीपी में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। निर्यात में 49 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत है। इस तरह एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का एमएमसएमई सेक्टर जनकल्याण का माध्यम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में रिमोट से एमएसएमई इकाइयों के साथ ही वृहद उद्योगों के लिए भी राशि जारी की। एमएसएमई इकाइयों को 225 करोड़ 19 लाख की राशि और विभिन्न स्टार्ट-अप के लिए लगभग 39 लाख की राशि प्रदान की गई। बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 1274 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई। इस तरह कुल 1500 करोड़ रुपए उद्योग क्षेत्र को प्रदान किए गए। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां मई 2026 तक की समस्त देनदारी का भुगतान उद्यमियों को निवेश सहायता के रूप में किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों के विकास में मध्यप्रदेश आगे है। राज्य सरकार द्वारा कपास के मंडी शुल्क को आधा करने के निर्णय का लाभ किसानों और उद्यमियों को प्राप्त होगा। एमएसएमई दिवस पर एमओयू और उद्योगों के लिए भूखंडों के आवंटन का कार्य हुआ है। राज्य में प्रत्येक जगह उद्योग लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश के सबसे इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट के रूप में पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रदेश में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस आदि क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। भोपाल में वर्ष 2025 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9 हजार 300 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतरा हैं।

नई नीतियां और नियम बने लाभकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत 2 वर्ष में बनाई गई 18 नई नीतियों और नए नियमों का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। प्रदेश में ओडीओपी क्षेत्र में भी प्रगति है। वर्ष 2025- 26 में मध्यप्रदेश को 20 जीआई टैग प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष की थीम पर मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का जिम्मा माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 क्लस्टर्स का निर्माण किया है और 14 नए क्लस्टर्स पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य सरकार सभी की कठिनाइयों को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, शुचिता और पारदर्शी निर्णयों के बलबूते आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए नई सौगात दी गई है। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में ऋण भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है। इसके दृष्टिगत वर्ष 2024 को गरीब कल्याण और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया।

मध्यप्रदेश औद्योगिक सुधारों को लागू करने में आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा तय 23 औद्योगिक सुधारों को शत-प्रतिशत लागू करने में मध्यप्रदेश टॉप अचीवर है। औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है। आज प्रदेश के 13 जिलों में 14 औद्योगिक केंद्र और भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। इसी तरह 7 नए औद्योगिक क्षेत्र इंडस्ट्री सेक्टर को नया आकार प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में भारत एमएसएमई सेक्टर के अतिरिक्त कई सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, क्लस्टर्स स्कीम जैसी अनेक योजनाएं शामिल हैं। पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार से उद्यमी निरंतर जुड़ रहे हैं।

उद्यमियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले से प्राप्त होने वाले राजस्व के मॉडल तैयार करने का कार्य करेगी, जिससे जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए समृद्धि का पूरा लाभ मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के उद्यमियों से संवाद के दौरान यह बात कही। विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कपास पर मंडी शुल्क आधा करने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गजमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में लघु उद्योग निगम के अध्यक्षसत्येंद्र भूषण सिंह, उद्योग आयुक्तदिलीप कुमार, सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

एमएसएमई मंत्रीचेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि प्रदेश में आज उद्योगों के विकास का नया वातावरण बना है और यह सब संभव हुआ है गतिशील और प्रबल इच्छा शक्ति के धनी नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से। पिछले 2 वर्षों में ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग के बजट को 1100 करोड़ से 3100 करोड़ तक पहुंचा दिया है। नई एमएसएमई और स्टार्ट-अप पॉलिसी से उद्यमियों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ लगभग 1100 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन मिला है। मंत्रीकाश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के परिश्रम की पराकाष्ठा का ही परिणाम है कि विभाग ने पिछले 2 सालों में 1200 औद्योगिक भूखंड दिए हैं और आगामी वर्षों में 3000 भूखंड उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रदेश में 34 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। प्रदेश में किसान,कृषि और उद्योग क्षेत्र के विकास का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

मुख्य सचिवअनुराग जैन ने कहा कि सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों की महत्ता पूरे विश्व ने पहचानी है। मध्यप्रदेश भी एमएसएमई के क्षेत्र में पीछे नहीं है। प्रदेश में होने वाले मैन्युफैक्चरिंग में एमएसएमई का योगदान 45 प्रतिशत और निर्यात 49 प्रतिशत होना ऐतिहासिक है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश ने रोजगार देने में महत्वपूर्ण काम किया है और हम एक साल में देश में 14 से 11 वे स्थान पर पहुंच गए हैं। मुख्य सचिवजैन ने कहा कि “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” के तहत नई पॉलिसी बनाई गई है, सैकड़ों कानून खत्म किए गये हैं। लगभग 100 कानूनों में जेल भेजने जैसी सजा के स्थान पर अर्थ दंड लगाने का प्रावधान किया गया है। सब मिलाकर उद्यमियों के लिये मध्यप्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण मौजूद है। इसके साथ ही आज बैंक से वित्तीय संसाधन भी आसानी से उपलब्ध करवाये जा रहे है। यही वजह है कि कुल 21 प्रतिशत वित्त में से एक लाख 45 हजार करोड़ यानि 11 प्रतिशत एमएसएमई को उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए आगे आकर नेतृत्व करने का आव्हान किया।

उद्यमियों ने कहा – मध्यप्रदेश उद्योगों को बढ़ाने वाला राज्य

समिट में उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सिर्फ उद्योग स्थापित करने नहीं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ाने वाला राज्य है। किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान अनेक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उद्योग अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बहुत पारदर्शी हैं। राज्य सरकार की ओर से हमें मिला सहयोग सफलता की पूंजी है। हमारी कंपनी राज्य में 200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। आगामी दो वर्षों में मेडिसिन रिसर्च के लिए हमारी कंपनी राज्य में 50 करोड़ का नया निवेश करेगी। मध्यप्रदेश तेजी से फॉर्मा सेक्टर में अनुसंधान का हब बन रहा है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्षराजेश मिश्रा ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विभाग में निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार ने 31 मई 2026 तक की सभी देनदारियां क्लियर की हैं। निश्चित ही यह उद्यमियों और निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेशराघवेंद्र सिंह ने कहा कि गत ढाई वर्ष में सभी तरह के उद्योगों को 11 हजार 500 करोड़ की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गयी है। मध्यप्रदेश में नए उद्योगों में भरपूर निवेश हो रहा है। ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट : 2025 में 30 लाख 77 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत धरातल पर आ गाए हैं। मध्यप्रदेश की एमएसएमई ने अपने उत्पादों की क्वालिटी को बेहतर किया है और 19 हजार प्रमाणन इसका उदाहरण है। प्रमुख सचिवसिंह ने प्रदेश में बदलते उद्योग परिवेश के बारे में भी जानकारी दी। कैंसर के उपचार की दवा के निर्माण और रिसर्च में संलग्न फार्मा कंपनी भी मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों के सहयोग से आज दुनिया के अनेक देशों तक पहुंच गई है।

समिट की प्रमुख गतिविधियां

  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 750 से अधिक इकाइयों को प्रोत्सान राशि वितरित की।
  •          मध्यप्रदेश के सफल उद्यमियों की विकास गाथा पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 137 स्टार्ट-अप को 1.5 करोड़ की सहायता राशि अंतरित की।
  •          मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वृहद उद्योगों को 1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटन आशय पत्र एवं लोन स्वीकृति-पत्र वितरित किए। इनमें विदिशा, मंदसौर की तीन-तीन इकाइयां शामिल हैं।
  •          प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमएसएमई विभाग के बीच स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू किया गया।
  •          मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में कटनी, खरगोन और रायसेन जिले के 4 हितग्राहियों को एक करोड़ 57 लाख रुपए की ऋण राशि प्रदान की गई।
  •          मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत 30 लोगों को रोजगार देने वाली इकाई को सहायता राशि प्रदान की गई।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिल स्टेशन कुकरू में लगाई रात्रि चौपाल, ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से सहज भाव से संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के कामों में यदि किसी भी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार से परेशान किया जाता है, तो वे निसंकोच होकर उन्हें बतायें। रात्रि चौपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मिलनसारिता और आत्मीयता से ग्रामीणों ने अभिभूत होकर मुख्यमंत्री के समक्ष खुलकर अपनी बातें रखीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहजता और प्रेम से प्रभावित होकर रात्रि चौपाल में ग्रामीणों ने स्थानीय कोरकू भाषा में पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” भजन सुनाकर सभी का मन मोह लिया। रात्रि चौपाल में गंदलो सुसुम कोरकू दल के 21 सदस्यीय तथा होलेरा नृत्य दल के 19 सदस्यीय दल द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती शिपा शनवारे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर भाई के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठकर संवाद किया तथा बच्चों को स्नेहपूर्वक दुलार भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों से विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्चों से बचने तथा सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को भी समाज में हतोत्साहित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहा है। सरकार के प्रयास हैं कि समृद्ध खेती के साथ-साथ पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 25 भैंस अथवा 25 गायों के लिए 40 लाख रुपए तक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 10 लाख रुपए का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोदो-कुटकी की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर निरंतर की जाएगी। ग्राम कुकरू में पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने तथा पशुशेड निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महिलाओं ने बताया कि आजीविका मिशन के माध्यम से ग्राम में कृषि सखी, जेंडर सखी, बकरी पालन, भैंस पालन, मुर्गी पालन सहित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जुड़कर समूह की अनेक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए किसान सम्मान निधि एवं लाड़ली बहना योजना के लाभों की जानकारी ली। उन्होंने किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों की ई-केवाईसी शीघ्र कराने के निर्देश प्रशासन को देते हुए कहा कि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 79 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तालाब निर्माण कराने के निर्देश प्रशासन को दिए। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने बालिका छात्रावास की स्वीकृति एवं निर्माण, जामूखेड़ी मार्ग तथा बुंदियाखुर्द पुलिया निर्माण के निर्देश भी दिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि स्वयं सहायता समूहों के बड़े समूहों को सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जोड़कर रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। समूह की महिलाओं की मांग पर आजीविका भवन तथा कोदो-कुटकी प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास तथा शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग ठकिया गायन की रोजगार संबंधी मांग पर उन्हें ट्राइसिकल उपलब्ध कराने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसददुर्गादास उइके, प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायकहेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायकमहेंद्र सिंह चौहान, उपाध्यक्ष जन अभियान परिषदमोहन नागर, संभागायुक्तश्रीकांत बनोठ, आईजीमिथलेश कुमार शुक्ला, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षकवीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

मैहर बैंड भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में सम्मिलित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गहरी सांस्कृतिक अभिरुचि और प्रदेश की अनमोल धरोहरों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप मध्यप्रदेश की संगीत विरासत को एक और ऐतिहासिक गौरव प्राप्त हुआ है। माँ शारदा की नगरी की धरोहर और विश्वविख्यात ‘मैहर वाद्यवृंद’ (मैहर बैंड) को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की सूची में सम्मिलित कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की लोक-संस्कृति और कलाओं को अक्षुण्ण रखने की नीति के अंतर्गत संस्कृति विभाग द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों का ही यह सुखद परिणाम है। अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासनशिव शेखर शुक्ला ने मैहर बैंड के प्रतिभावान कलाकारों एवं शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों में से ‘भगोरिया नृत्य’ और ‘गोंड चित्रकला’ को भी इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सूची में स्थान मिल चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की कला-संस्कृति के प्रति अनुराग के अनुरूप प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग की इस सांस्कृतिक यात्रा में पूर्व में सात ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ भी प्राप्त हो चुके हैं। मैहर बैंड की इस अनूठी संगीत परंपरा को जीवंत रखने और आगामी पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के माध्यम से एक ‘गुरुकुल’ की स्थापना भी की जा रही है। इस गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षित होकर युवा कलाकार मैहर बैंड के अनूठे संगीत, रागों और इसकी गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को और अधिक समृद्ध कर सकेंगे।

‘मैहर बैंड’ का गौरवशाली इतिहास

स्वर और साधना के अद्भुत संगम ‘मैहर बैंड’ का इतिहास बेहद गौरवशाली और अनूठा है। इसकी स्थापना वर्ष 1918 में महान संगीत मनीषी उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब ने मैहर रियासत के तत्कालीन महाराजा बृजनाथ सिंह जूदेव की प्रेरणा से की थी। भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में यह विश्व का पहला ऐसा शास्त्रीय वाद्यवृंद (ऑर्केस्ट्रा) है, जिसने संगीत प्रेमियों को एक नए वितान से परिचित कराया। बीते 108 वर्षों के अपने सुदीर्घ और यशस्वी सफर में इस बैंड ने अपनी मौलिकता और शास्त्रीय गरिमा को जीवंत रखा है। धरोहर के रूप में इसके कलाकारों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस अनमोल वाद्यवृंद की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ संजोकर रखा है। मैहर बैंड की सबसे बड़ी विशेषता इसके दुर्लभ वाद्ययंत्र और उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब द्वारा तैयार की गई विशेष शास्त्रीय बंदिशें हैं। इस वाद्यवृंद में सितार, सरोद, इसराज, वायलिन, चेलो, सितार-बैंजो, हारमोनियम और तबला जैसे पारंपरिक एवं पाश्चात्य वाद्यों का अनूठा मेल है। इनमें सबसे अनोखा और मुख्य आकर्षण ‘नलतरंग’ है। खाँ साहब ने बंदूक की नालियों (बैरल) को काटकर, उन्हें कलात्मक ढंग से स्वरबद्ध कर ‘नलतरंग’ जैसे अद्भुत और मधुर शास्त्रीय वाद्य का आविष्कार किया था। पूरी दुनिया में मैहर बैंड के अलावा यह वाद्य कहीं और नहीं पाया जाता, जो वैश्विक संगीत जगत में कौतूहल और आकर्षण का केंद्र है।

मैहर वाद्यवृंद की राष्ट्रीय ख्याति का शंखनाद वर्ष 1924 में लखनऊ के केसर बाग में आयोजित प्रतिष्ठित ‘भातखंडे समारोह’ से हुआ था, जहाँ इसकी अद्वितीय प्रस्तुति ने समूचे भारतवर्ष को चमत्कृत कर दिया था। तब से लेकर आज तक इस बैंड ने देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित संगीत मंचों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। संगीत और कला के प्रति इसके अमूल्य योगदान को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2016 में इसे सर्वोच्च ‘शिखर सम्मान’ से भी विभूषित किया जा चुका है। वर्तमान में संस्कृति विभाग के संरक्षण में यह वाद्यवृंद भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनवरत बहती रसधारा के रूप में विश्व पटल पर मध्यप्रदेश का मस्तक ऊंचा कर रहा है।

 

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह ने जीता रजत पदक

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के प्रतिभावान खिलाड़ी समरदीप सिंह ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रतियोगिता के चौथे दिन सायंकालीन सत्र में आयोजित पुरुष शॉट पुट स्पर्धा में समरदीप सिंह ने 20.40 मीटर का प्रभावशाली थ्रो करते हुए रजत पदक अर्जित किया।

एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

समरदीप सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर एशियाई खेल 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफिकेशन मानक भी प्राप्त कर लिया है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल पदक हासिल किया, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी सुनिश्चित किया। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त पहचान

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह का यह प्रदर्शन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं की निरंतर प्रगति और खेल अकादमियों में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है। राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने के साथ एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने समरदीप सिंह को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समरदीप आगामी एशियाई खेलों में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

समरदीप सिंह की यह सफलता प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की जा सकती है।

 

अमेरिका ने बिना रडार वाले F-35 फाइटर जेट किए डिलीवर, भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

वाशिंगटन
अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गई है. पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को छह F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवर कर दिए हैं. नया एएन/एपीजी-85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रोडक्शन शुरू नहीं होगा। 

F35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा कि बिना रडार वाले ये जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते. यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता. दुनिया का सबसे महंगा फाइटर प्रोग्राम, जो अब तक 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है, अब बिना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है। 

ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को बुलाकर मिसाइल स्टॉक की कमी पर सवाल किए. उसी समय पेंटागन F35 जैसे जेट्स बिना मुख्य हिस्से के दे रहा है. भारत के संदर्भ में यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने भारत की यात्रा के दौरान और पहले कई बार भारतीय वायुसेना (IAF) को F35 ऑफर किया था। 

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के समय ट्रंप ने कहा था कि वे भारत को F35 स्टेल्थ फाइटर उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार कर रहे हैं. यह ऑफर भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को ऊंचाई देने वाला था लेकिन अब इस प्रोग्राम की समस्याएं भारत के लिए सोचने वाली बात हैं। 

F35 प्रोग्राम की महंगाई और समस्याएं 
F35 लाइटनिंग II को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टेल्थ फाइटर माना जाता है. इसमें एक से ज्यादा रोल हैं – जमीन पर हमला, हवा में लड़ाई और टोही. लेकिन इसका कुल खर्च अब 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो इसे इतिहास का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम बनाता है. एक जेट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है, लेकिन रखरखाव, अपग्रेड और लाइफ साइकिल कॉस्ट इसे और महंगा बनाती है। 

अब नया AN/APG-85 रडार पुराने APG-81 की जगह लेने वाला था. यह ज्यादा पावरफुल AESA रडार है, जो बेहतर टारगेट डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता देता है. लेकिन नाक के अंदर माउंटिंग सिस्टम में बदलाव की वजह से पुराना रडार फिट नहीं हो पा रहा। 

इसलिए लॉकहीड मार्टिन ने कुछ जेट्स नाक में बैलास्ट लगाकर डिलीवर किए. मरीन कॉर्प्स ने इंतजार किया, लेकिन अब छह जेट्स बिना रडार के उनके पास हैं. जनरल मासिएलो ने माना कि ये जेट्स ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई में पूरी क्षमता नहीं दिखा सकते। 

यह समस्या सिर्फ रडार तक सीमित नहीं. F35 प्रोग्राम लंबे समय से देरी, कॉस्ट ओवररन और कम तैयार दरों से जूझ रहा है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि तैयार जेट्स का छोटा प्रतिशत ही पूरी तरह मिशन तैयार रहता है. ट्रंप ने कॉन्ट्रैक्टर्स से मिसाइल स्टॉक की कमी पर जवाब मांगा, जो दिखाता है कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन की दिक्कतों से गुजर रही है। 

ट्रंप का भारत दौरा और F35 ऑफर 
ट्रंप ने भारत यात्रा के दौरान और इससे पहले मोदी के व्हाइट हाउस दौरे पर F35 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचेगा और F35 का रास्ता भी खोलेगा. यह ऑफर भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ मजबूत बनाने का संकेत था. भारत के पास अभी राफेल, Su-30MKI जैसे जेट्स हैं, लेकिन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर IAF को नई ताकत दे सकता था। 

भारत ने हालांकि इस ऑफर को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रेड टेंशन और टैरिफ की वजह से भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत Make in India पर जोर देता है. रूस, फ्रांस के साथ लंबे संबंध रखता है. F35 खरीदने पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रखरखाव और इस्तेमाल पर सख्त शर्तें लगती हैं, जो भारत को पसंद नहीं आतीं. ट्रंप का ऑफर दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक पार्टनर मानता है। 

भारत अगर F35 खरीदता तो क्या होता? 
एक तरफ यह IAF को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता. पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता. लेकिन दूसरी तरफ, बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था. भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. F35 जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना जरूरी है। 

F35 प्रोग्राम की समस्याएं अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों को उजागर करती हैं. सप्लाई चेन, प्रोडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में दिक्कतें हैं. ट्रंप इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन समाधान आसान नहीं. भारत के लिए यह सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता. रडार, सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है। 

F35 2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है. भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर. संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील जरूरी है। 

यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है. भारत जैसे देश को मजबूत एयर फोर्स चाहिए, लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं. ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नए द्वार खोले, लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा. F35 की कहानी जारी है – महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सही नहीं। 

 

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर हुए विशेष सत्र

भोपाल

अंतराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश थीम पर रवींद्र भवन में शनिवार को हुई समिट के दौरान नये बाज़ार, नई उड़ान और पूंजी की व्यवस्था सत्रों मे निवेशको, उद्यमियों और विभिन्न व्यावसायिक तथा बैंकिंग संस्थाओं के बीच सार्थक संवाद हुआ।

एमएसएमई एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए नवीन बाज़ार अवसर

इस सत्र में एमएसएमई के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों, विशेषकर सीमित बाजार पहुंच, पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा निर्यात, डिजिटल कॉमर्स, शोध एवं विकास, जोखिम कम करने तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।

सुश्री अंकिता पांडे, सीनियर प्रोजेक्ट कंसल्टेंट एंड यंग एलएलपी (मॉडरेटर) एवं विशेषज्ञों ने संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें फियो (FIEO) ने प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को दस्तावेजीकरण, बाजार चयन तथा वैश्विक व्यापार गतिकी के संबंध में मार्गदर्शन देकर निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने पर बल दिया। सीएसआईआर-एएमपीआरआई के डॉ. भास्कर ने कच्चे एवं अपशिष्ट पदार्थों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने में नवाचार तथा सतत प्रक्रियाओं की भूमिका पर बल दिया तथा शोध एवं उद्योग के मध्य सुदृढ़ सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। ओएनडीसी (ONDC) तथा ईसीजीसी (ECGC) के प्रतिनिधियों ने बाजार पहुंच विस्तार हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तथा विशेष रूप से छोटे एवं नवीन निर्यातकों के लिए भुगतान जोखिमों से सुरक्षा हेतु निर्यात्त ऋण बीमा के लाभों को रेखांकित किया। चर्चा में इंडिया पोस्ट के विस्तृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक विश्वसनीय एवं किफायती समाधान के रूप में उजागर किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई डिजिटल उपकरणों, नवाचार, वित्तीय संरक्षण तथा सुदृढ़ सप्लाई चेन सहायता का लाभ उठाकर प्रभावी रूप से अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।

पूंजी तक पहुंच सत्र से एमएसएमई को मिला नया क्षेत्र

नई पीढ़ी के एमएसएमई के लिए वित्त-पोषण सत्र में मॉडरेटर सुश्री ऋचा सिंह, सीनियर मैनेजर, अन्र्स्ट एंड यंग एलएलपी ने तकनीकी सत्र का संचालन किया।विकसित हो रहे वित्त पोषण परिदृश्य पर चर्चा की गई तथा डिजिटल एवं वैकल्पिक वित्त-पोषण माध्यमों के द्वारा ऋण प्राप्ति में आने वाली बाधाओं को कम करने पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के बावजूद, एमएसएमई को समय पर एवं सुलभ वित प्राप्त करने में कोलैटरल की कमी, अपूर्ण दस्तावेज़ीकरण तथा सीमित क्रेडिट इतिहास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चर्चा में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया, जिसमें यूपीआई डेटा को नकद प्रवाह तथा साख-योग्यता के आकलन हेतु एक उपयोगी उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बैंकिंग दृष्टिकोण से एमएसएमई द्वारा वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, दस्तावेजीकरण में सुधार करने तथा ऋण पात्रता बढ़ाने हेतु सुदृढ साख प्रोफाइल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इनवॉइस डिस्काउंटिंग के माध्यम से कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ट्रेड्स (TReDS) की भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिससे त्वरित नकदी प्रवाह तथा औपचारिक क्रेडिट ट्रेल स्थापित करने में सहायता मिलती है। सत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई को विकास के लिए पूंजी तक पहुंच तथा सतत विस्तार सक्षम बनाने में डिजिटल अंगीकरण, वित्तीय साक्षरता, वैकल्पिक वित्त पोषण तथा सुदृढ़ संस्थागत सहयोग को समाहित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। दोनों सत्रों में नव उद्यमियों के प्रश्नों और शंकाओं का समाधान भी किया गया।   

बिना सुनवाई 1 साल तक हिरासत का प्रावधान! शुभेंदु सरकार के प्रस्तावित कानून पर छिड़ा सियासी घमासान

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में शु
भेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।

अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है।

विधेयकों पर होने लगा बवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है।

सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश
पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी।

विधेयक में क्या प्रावधान है
इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में ‘गुंडा’ ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा।

इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।

 

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