8th Pay Commission से पहले कर्मचारियों को मिल सकता है बड़ा तोहफा, सामने आया नया अपडेट

 नई दिल्‍ली

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है। 

जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। 

क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद? 
दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है। 

अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा। 

नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है? 
आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है। 

फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई। 

कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है। 

अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है? 
केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।  

अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा? 
जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

Volkswagen का बड़ा फैसला: 4 प्लांट होंगे बंद, 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी से मचा हड़कंप

 नई दिल्‍ली

ऑडी और पोर्श जैसी लग्‍जरी कार बनाने वाली यूरोप की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी अब ग्‍लोबल स्‍तर पर लोगों को नौकरी से निकालने की तैयारी कर रही है. फॉक्सवैगन एजी को लग्‍जरी और स्‍पोर्ट्स कार बनाने के बारे में जाना जाता है. लैम्बोर्गिनी (Lamborghini), स्कोडा (Skoda) और डुकाटी (Ducati) को भी इसी कंपनी ने बनाया है। 

यह कंपनी करीब 1 लाख लोगों को नौकरी से निकालने पर विचार कर रही है और कई कारखानों को भी बंद किया जा सकता है. मैनेजर मैगजिन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी ज्‍यादा कम्‍प्‍टेटिव बनाने के लिए एक्‍स्‍ट्रा जॉब्‍स में कटौती की योजना बना रही है. छंटनी का ये प्‍लान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम के प्रयासों का हिस्‍सा है। 

एक लाख की जाएगी नौकरी
ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट कहा गया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में मैनेजिंग बोर्ड की बैठक के दौरान CEO ने एक प्रस्‍ताव पेश किया था, जिसके तहत कर्मचारियों की संख्या में दोगुनी कटौती करके 100,000 तक की छंटनी शामिल है. पोर्श और ऑडी की मालिक कंपनी फॉक्सवैगन ग्रुप में मौजूदा समय में लगभग 657,000 लोग काम करते हैं. सीईओ के इस नए प्रस्ताव को अगले महीने बोर्ड के सामने रखा जाएगा. ऐसे में फैसला अब सिर्फ बोर्ड के ऊपर है कि वह कितने लोगों की छंटनी पर मोहर लगाता है या फिर कोई अन्‍य रास्‍ता तलाश लेता है। 

4 प्‍लांट बंद करेगी कंपनी 
रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी रणनीति में इस दशक के अंत तक सामान्य खर्चों में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) की कटौती करना है, जिस कारण इतने बड़े स्‍तर पर छंटनी की तैयारी चल रही है. वहीं मिड टर्म में जर्मनी में चार कारखाने बंद करना भी शामिल है. इनमें नेकरसुलम में ऑडी का एक कारखाना और हनोवर, ज़्विकाऊ और एम्डेन में वीडब्ल्यू के प्‍लांट शामिल हैं। 

क्‍यों कंपनी पर आया संकट
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्‍सवैगन समूह को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए कंपोनेंट प्‍लांटों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वीडब्ल्यू ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं. यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहा है. कंपनी पर यह संकट तक आया है जब कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोर सेल और यूरोप में BYD और स्टेलेंटिस एनवी समेत कई कम्‍प्‍टेटिव प्‍लेयर आ गए हैं. जिस कारण कंपनी फाइनेंशियल दिक्‍कतों से जूझ रही है। 

कंपनी ने अभी तक ये कदम उठाए हैं 
अपने फाइनेंशियल कंडीशन को सुधारने के लिए ग्रुप ने कुछ खास कदम उठाए हैं. ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश जुटाने के लिए कंपनी ने अपनी एवरलेंस समुद्री इंजन इकाई में 51% हिस्सेदारी बेचा है. करीब 28,000 कर्मचारियों ने वीडब्ल्यू छोड़ने पर सहमति जताई है, जो 2030 तक पूरे समूह में 50,000 कर्मचारियों की छंटनी करने के पहले ही हुआ है. कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता को भी हर साल 12 मिलियन वाहनों से घटाकर 9 मिलियन कर दिया है। 

आसान नहीं होगी छंटनी की राह
श्रमिक नेताओं ने नई योजनाओं का तुरंत विरोध किया है. कंपनी की श्रमिक परिषद और आईजी मेटाल यूनियन के संयुक्त बयान के अनुसार, ये योजनाएं कर्मचारियों और उन क्षेत्रों में अशांति पैदा करती हैं जहां हम काम करते हैं. अगर ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाता है, तो हम उनका पूरी ताकत से विरोध करेंगे। 

खैर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्सवैगन में छंटनी करना मुश्किल है. कार निर्माता कंपनी के बोर्ड में आधी सीटें श्रमिक प्रतिनिधियों के पास हैं और जर्मनी के लोअर सैक्सोनी राज्य (जो आमतौर पर श्रमिक संघों का पक्ष लेता है ) के पास दो और सीटें हैं। 

कृषि विभाग की सख्त कार्रवाईःवैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाले उर्वरक की 11 बोरियां जब्त,

रायपुर

 किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरक विक्रय केंद्रों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज से उड़ीसा प्रिंट वाली पीआरओएम (PROM) उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की हैं।

महासमुंद जिले के कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम ने बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में सालेपाली, पाइकमाल, जिला बरगढ़ (उड़ीसा) प्रिंट वाली उर्वरक की 11 बोरियां मिलीं, जिन्हें नियमानुसार जब्त कर लिया गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उर्वरकों की गुणवत्ता एवं वैध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक के भंडारण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्यभर में यह निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा और उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

 रायपुर
 राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी।

इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है।

आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण
जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा।

उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर
उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ”रूढ़िवादी प्रथाओं” द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ”अपवाद” या ”छूट” का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी।

गोवा के यूसीसी में लिंग समानता
गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता ‘सामुदायिक संपत्ति” है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है।

उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान
उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है।

सक्रिय है राज्य सरकार
    संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।

    – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

 

Al-Niño Effect: केरल में कमजोर पड़ा मानसून, 33% कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली
केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं। 

IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे ‘बारिश की कमी’ (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है। 

खेती पर कम बारिश का असर
बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है। 

मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर?
सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है। 

पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित
केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप ‘तिरुवाथिरा नजट्टुवेला’ कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है। 

IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 

सूरज नांबियार संग अनबन की खबरों पर टूटीं मौनी रॉय की चुप्पी, सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

मुंबई 
 अभिनेत्री मौनी रॉय इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में छाई हैं। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके और पति सूरज नांबियार के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बुधवार को अभिनेत्री ने अफवाहों के बीच पोस्ट किया है। अभिनेत्री ने बुधवार को गंभीर रुख अपनाते हुए इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक नोट जारी किया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से आग्रह किया कि वे उनकी निजी जिंदगी के बारे में गलत खबरें न फैलाएं। अभिनेत्री ने लिखा, “सभी मीडिया हाउस से विनम्र निवेदन है कि कृपया गलत खबरें और अफवाहें फैलाने से बचें। हमें थोड़ा समय और प्राइवेसी दें। हर कहानी के पीछे असली भावनाएं और लोग होते हैं। 

कृपया संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पेश आएं।” बता दें कि मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार के बीच अनबन की खबरें तब तेज हुईं, जब अभिनेत्री ने पति को इंस्टाग्राम से अनफॉलो करने के साथ-साथ उनके साथ पोस्ट की गई तस्वीरें डिलीट कर दी थीं, जब सोशल मीडिया पर दोनों के अलग होने की खबरें तेज हुईं, तो सूरज ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया था। वहीं, मौनी की सबसे करीबी दोस्त दिशा पाटनी ने भी सूरज के सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट होने से पहले ही उसे अनफॉलो कर दिया था।

दिशा, सूरज और मौनी कई जगहों पर साथ में घूमने, पार्टियों और सोशल प्रोग्राम में साथ जाया करते थे और कृति की बहन नूपुर सेनन की शादी में तीनों को साथ में देखा गया था।

मौनी रॉय ने तीन साल तक डेट करने के बाद 22 जनवरी 2022 को बिजनेसमैन सूरज नांबियार से गोवा में शादी की थी। इस जोड़े ने मलयाली और बंगाली दोनों रीति-रिवाजों का पालन करते हुए शादी की, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार के सदस्य शामिल हुए। यह शादी गोवा के हिल्टन गोवा रिसॉर्ट में हुई थी। सुबह मलयाली रीति-रिवाजों से और शाम को बंगाली रीति-रिवाजों से शादी संपन्न हुई थी।

शहडोल की रॉयल अरहर वेरायटी बनेगी किसानों की कमाई का नया जरिया, मिलेगा बेहतर दाम

शहडोल 
 खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के कई जिलों में धान की खेती जमकर की जाती है पर इन दिनों किसानों का झुकाव अरहर की फसल की ओर भी बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण है अरहर दाल की डिमांड. अरहर दाल खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, यही वजह है कि इस दाल को नगद वाली फसल या खटाखट पैसे दिलाने वाली फसल भी कहा जाता है. इस आर्टिकल में जानें कि कैसे इस दाल को उगाकर आप भी जमकर कमाई कर सकते हैं। 

कैसे करें अरहर दाल की खेती?
शहडोल के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, ” अगर आप अरहर की खेती करना चाहते हैं, तो यह प्रमुख तौर पर खरीफ के सीजन में इसे बोया जाता है. अरहर की फसल ऐसे क्षेत्र में बोई जाती है, जहां उचहन वाली जमीन हो, जल निकासी की खेत में अच्छी व्यवस्था हो और जल जमाव बिल्कुल भी न हो रहा हो, क्योंकि ज्यादा जल जमाव से फसल खराब हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इस फसल के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए। 

वे आगे कहते हैं, ” अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, हालांकि, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उपजाऊ जमीन हो वहां इसकी खेती की जा सकती है. अरहर की खेती के लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच में उपयुक्त समय माना जाता है। 

अरहर की खेती के लिए सबसे पहले ये करें
कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, ” सबसे पहले कल्टीवेटर से अच्छी तरह से खेतों की जुताई कर लें, और फिर उसके बाद रोटावेटर चला दें, जिससे खेत में जो खरपतवार हैं पूरी तरह से कट जाएगा, नष्ट हो जाएगा, और मिट्टी एकदम समतल हो जाएगी. इसके बाद 10 से 15 किलोग्राम के लगभग प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई के लिए जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से अच्छी तरह से उपचारित कर लें, और कतार से 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें, जिससे फायदा होगा। 

खाद, खरपतवार और कीट प्रबंधन
वे आगे बताते हैं कि अरहर दाल एक ऐसी किस्म की फसल है, जिसमें ज्यादा देख रेख की जरूरत नहीं पड़ती, ना ही ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की कम ही जरूरत पड़ती है. इसके लिए सड़ा हुआ गोबर खाद हो तो अच्छी मात्रा में खेतों में डाल दें. इसके अलावा इसको ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है। 

खरीफ के सीजन में बोई जाती है अरहर दाल की फसल 
ये कम पानी में पकने वाली फसल है, लेकिन एक बात का जरूर ध्यान रखें कि फूल आने और फली बनने के समय नमी जरूर बनाए रखें. इस फसल में खरपतवार पर भी बहुत ज्यादा नियंत्रण नहीं करना पड़ता. जहां तक कीट और रोग प्रबंधन की बात करें तो अरहर में उकठा रोग की समस्या आती है, और फली भेदक कीट की समस्या आती है, जिससे कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से संपर्क करके जो भी रोग लगे उसके हिसाब से समाधान कर लें। 

इतनी होती है अरहर की पैदावार
कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, ” जहां तक उपज की बात करते हैं तो फसल की कटाई के बाद 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इसमें पैदावार मिल सकती है. अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से खेती कर रहे हैं और कितना ध्यान दे रहे हैं.और उस समय मौसम का बर्ताव कैसा रहा। 

मालवा में किसानों का बढ़ा इंतजार, बारिश की कमी से अटकी सोयाबीन की बुवाई; बीज ₹10 हजार के पार

नागदा 
 अब तक दो इंच बरसात हुई है। हालांकि कृषि विज्ञानियों का कहना है कि सोयाबीन फसल की बोवनी के लिए अभी और वर्षा की दरकार है। 6 से 7 इंच वर्षा के बाद बोवनी अच्छी रहेगी। इस बीच दावा किया जा रहा है कि इस बार किसानों को खाद के लिए दुकानदारों के यहां लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। किसान द्वारा घर बैठे खाद बुक करने पर तीन दिन में खाद मिल जाएगी।

दुकानदार गड़बड़ करता है तो उसके लायसेंस निरस्त करने व पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। नागदा क्षेत्र में दो बार हुई झमाझम बरसात में अभी तक 56.2 एमएम लगभग 2 इंच से कुछ ज्यादा बरसात हुई है। पिछले वर्ष अभी तक लगभग 5 इंच बरसात हो गई थी।

क्षेत्र के किसानों द्वारा बोवनी की पूरी तैयारी की जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पर्याप्त बरसात हो गई है, वहां बोवनी हो सकती है। नागदा-खाचरौद क्षेत्र में अभी बरसात का इंतजार है।

सोयाबीन बीज के भाव 10 से 12 हजार रुपये तक
सोयाबीन बीज के भाव इस बार 10 से 12 हजार रुपये तक हैं। ऐसे में दुकानदार तो ठीक, कई किसान भी पिछले वर्ष की रखी सोयाबीन को ग्रेडिंग कराकर बीज के नाम पर बेचने रहे हैं। कृषि अधिकारी द्वारा दुकानों से सोयाबीन के 52 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। उनकी रिपोर्ट आना बाकी है।

अधिकारियों के अनुसार किसान घर से बेचता है तो इस पर कार्रवाई करना आसान नहीं है। अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन की बीज कंपनी का टैग देखकर ही खरीदें। बिना टैग के सोयाबीन बीज के लिए नहीं खरीदें। दुकानदार बिना टैग के बीज बेचता है तो उसकी शिकायत विभाग के अधिकारी से करें।

किसानों को खाद के लिए नहीं होगी परेशानी
प्रतिवर्ष किसानों को खाद के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। किसानों को दो-तीन गुना भाव में खाद की बोरी लेना पड़ती थी। इस बार शासन ने ऑनलाइन सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई है, घर बैठकर ही ऑनलाइन खाद बुक करवा सकते हैं और जिस दुकान से खाद लेना है, वहां से तीन दिन में खाद मिल जाएगा।

दुकानदार देने में आना-कानी करता है तो इसकी शिकायत कृषि विभाग अधिकारी से करने पर दुकानदार के खिलाफ लायसेंस निलंबित व निरस्त करने के अलावा पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

‘तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं’, पत्नी की टिप्पणी को कोर्ट ने माना उकसाने वाला; पति की सजा में दी राहत

छिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या मामले में पति की सजा कम कर दी है। कोर्ट ने अपने पति पर पत्नी की इस टिप्पणी, कि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं को उकसावा माना है। इस केस में पति ने तैश में आकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में पति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट ने इस सजा को बदलकर सात साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने इस तरह की टिप्पणी, दिखाती है कि पति की कोई वैल्यू नहीं है। यह न सिर्फ पति बल्कि उसके इंसानी अस्तित्व के लिए भी खतरा है। ऐसी टिप्पणी सुनकर पति ने आपा खो दिया और घटना को अंजाम दिया।

क्या है मामला
यह मामला, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला स्थित चौरई का है। यहां पर 18-19 जुलाई की रात शिवा और उसकी पत्नी किरण के बीच झगड़ा हुआ। यह झगड़ा कुलबहेरी नदी के खर्रा घाट के पास हुआ। आरोप के मुताबिक झगड़े के दौरान किरण ने अपने पति पर कटाक्ष करते हुए कहाकि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं। इसके बाद शिवा ने गुस्से में पत्थर उठाकर अपनी पत्नी के ऊपर दे मारा और उसकी मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक बाद में शिवा ने फोन करके पुलिस और पत्नी के परिजनों को घटना के बारे में पूरी जानकारी दी। शिवा की तरफ से पेश वकील ने पक्ष रखते हुए कहाकि शिवा के खिलाफ भरोसे लायक सबूत नहीं हैं। इसके अलावा, साक्ष्यों में विरोधाभास भी है। इस आधार पर उसने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करने की मांग उठाई थी।

हाई कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई
के दौरान डिवीजन बेंच ने माना कि शिवा ने अपनी पत्नी को चोट पहुंचाई और इससे उसकी मौत हुई। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहाकि यह घटना अचानक झगड़े के चलते हुई। कहीं से भी यह सिद्ध नहीं होता कि आरोपी हत्या की योजना बनाकर वहां पहुंचा था। इसके अलावा कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी ने पुलिस और अपनी पत्नी के रिश्तेदारों को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा कोर्ट ने पत्नी की टिप्पणी को गंभीर और अचानक उकसावे वाला मामला बताया।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने मामले में यह भी कहाकि अगर आरोपी अपनी पत्नी की हत्या के इरादे से वहां गया होता तो वह घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो जाता। वह इसके बारे में पुलिस या पत्नी के रिश्तेदारों को जानकारी नहीं देता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके मुताबिक अगर कोई शख्स अचानक उकसावे के चलते खुद पर से नियंत्रण खो देता है तो अपराध का आंकलन उसी आधार पर होना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहाकि यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने बार-बार पत्नी के ऊपर पत्थर से हमला किया। कुछ चोटें घटनास्थल पर मौजूद पत्थरों पर गिरने के चलते भी लग सकती हैं।

MP के 14 जिलों को बड़ी सौगात, केन-मंदाकिनी लिंक प्रोजेक्ट से 6 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ेगा

भोपाल
 मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और अगले छह माह में इनके लोकार्पण के साथ लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी।

वहीं, केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है और स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी जल्द किया जाएगा।इससे 93 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का विकास होगा। वहीं, नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी शीघ्र किया जाएगा।

14 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसकी तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। अब इनका लोकार्पण होना है।

अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना पर फोकस
केन-मंदाकिनी लिंक अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। 20 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जाएगी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होगा।

परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है।

संशोधित पार्वती काली सिंध चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण के काम पूरा हो गया है।

सिंहस्थ को लेकर तैयारी
सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत काम हो चुका है। कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत काम प्रगति पर है। शिप्रा तट पर 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य भी 60 प्रतिशत पूरा हो गया है।

जल्द होगा स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन
बरगी नहर से ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी बैठक में मुख्यमंत्री ने नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी के निर्देश दिए।

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी। टनल का काम डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है।

 

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