यूपी में INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव, कांग्रेस ने 50-50 हिस्सेदारी की मांग रखी

नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर अभी से शह और मात का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस के नवनियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने जिम्मेदारी संभालते ही समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने ‘बराबर-बराबर’ सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग रख दी है। गौतम ने न सिर्फ आधी सीटों पर दावा ठोका, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की जमकर तारीफ भी की जिसने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक गौतम ने साफ-साफ कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं चाहूंगा कि गठबंधन में दोनों पार्टियों की बराबर की हिस्सेदारी हो। हालांकि, जब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत होगी तब अंतिम फैसला होगा। मुझे पहले से कोई घोषणा करने का अधिकार नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से आधी सीटों के लिए अपनी बात मजबूती से रखेंगे।”

403 सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। अगर इतिहास पर नजर डालें तो ठीक 10 साल पहले भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय सपा ने 298 और कांग्रेस ने 105 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, कई सीटों पर दोनों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ भी हुई थी और अंततः बीजेपी की प्रचंड लहर में वह गठबंधन बिखर गया था।

इसके बाद दोनों दल लोकसभा चुनावों में साथ आए, जहां उन्हें बड़ी सफलता मिली। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से सपा ने 62 पर चुनाव लड़कर 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटों पर कब्जा जमाया।

दावों और उम्मीदों का टकराव
सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के उत्साह से लबरेज कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सपा से करीब 150 सीटों की मांग कर सकती है। शुरुआती संकेतों की मानें तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 70 से 80 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम का ‘बराबर हिस्सेदारी’ वाला बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब 2017 में सपा सत्ता में थी, तब भी उन्होंने कांग्रेस को 105 सीटें दी थीं तो इस बार उनका हिस्सा और बड़ा होना चाहिए। कांग्रेस रणनीतिकारों को लगता है कि चूंकि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं, इसलिए वे कांग्रेस को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएंगे। उनका मानना है कि यदि कांग्रेस को गठबंधन में मजबूत भूमिका मिलती है तो वह सपा के पाले में दलित और ब्राह्मण वोटों का ट्रांसफर आसानी से करवा सकती है।

मायावती पर डोरे और कांसीराम कार्ड
राजेंद्र पाल गौतम ने बातचीत के दौरान बसपा प्रमुख मायावती को भी साथ आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा, “संविधान और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बहुजन समाज के मुद्दों पर काम करने वाले सभी लोगों को इस दमनकारी मनुवादी सरकार के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।” मायावती की तारीफ करते हुए गौतम ने कहा, “बहनजी हमारे समाज की एक बड़ी और कद्दावर नेता हैं, हम उनका सम्मान करते हैं। वे हमेशा एक मजबूत नेता रही हैं। समझ नहीं आता कि आज उनकी क्या मजबूरियां हैं

दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने ही राजेंद्र पाल गौतम अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ बिना किसी तय कार्यक्रम के लखनऊ में मायावती के घर पहुंचे थे, हालांकि तब उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी।

चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते कद को रोकने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में दलित समुदाय से आने वाले सांसद चंद्रशेखर आजाद का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में दलित समुदाय के ही राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का जिम्मा सौंपकर कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साधना चाहती है। वह मायावती के छिटक रहे दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते प्रभाव को भी नियंत्रित करना चाहती है। यही वजह है कि अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में मान्यवर कांसीराम की तस्वीरें भी दिखाई देने लगी हैं।

भले ही राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर तालमेल की वजह से अंत में कोई बीच का रास्ता निकल आए, लेकिन नए प्रभारी के इन बयानों ने समाजवादी पार्टी के भीतर असहजता जरूर पैदा कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज 2 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि सपा ने 111 सीटें जीती थीं। अब देखना होगा कि जमीन पर कमजोर सांगठनिक ढांचे के बावजूद कांग्रेस का यह बराबर का दांव कितना कामयाब होता है।

रायपुर का निरीक्षण करने में स्कूटी से निकले उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने लगभग तीन घंटे तक स्कूटी से बिलासपुर शहर का भ्रमण कर नगर निगम, स्मार्ट सिटी तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।

उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि कार्यों में अनावश्यक विलंब या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी और नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे भी उनके निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।
उप मुख्यमंत्री साव ने आज बिलासपुर में मंगला स्थित 10 एमएलडी एवं 6 एमएलडी क्षमता के निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कोनी कन्वेंशन सेंटर, शिवघाट बैराज, रामसेतु के बाईं ओर अटल पथ निर्माण, अशोकनगर-बिरकोना सड़क गौरव पथ निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया।

उन्होंने अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने में आ रही बाधाओं का निराकरण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसटीपी निर्माण में विलंब पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ठेकेदार निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि अरपा नदी बिलासपुर की जीवनदायिनी है और शहरवासियों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। इसके संरक्षण एवं पुनरुद्धार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। उन्होंने अरपा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने और उसके पुनरुद्धार के लिए तैयार 250 करोड़ 93 लाख रुपये की परियोजना को सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए इसे शीघ्र धरातल पर उतारने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में शहर के लगभग 70 नालों का दूषित पानी सीधे अरपा नदी में गिर रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम द्वारा 250 करोड़ 93 लाखि रुपये की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया गया है। इसके तहत नगर निगम सीमा क्षेत्र में 17 किलोमीटर लंबाई में प्रवाहित 70 नालों के दूषित जल को उपचारित करने की व्यापक योजना बनाई गई है। परियोजना में 57 स्थानों पर इंटरसेप्शन एवं डाइवर्जन स्ट्रक्चर, 13 स्थानों पर डाइवर्जन वियर, 9.99 किलोमीटर डाइवर्जन सीवर, 2.77 किलोमीटर सीवरेज पंपिंग राइजिंग मेन, 3 सीवेज पंपिंग स्टेशन, 2 नए एसटीपी सहित विद्युतीकरण एवं इंस्ट्रूमेंटेशन कार्य शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से नालों का गंदा पानी नदी में जाने से पहले उपचारित किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण कर राज्य शासन स्तर पर त्वरित स्वीकृति की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अरपा नदी के संरक्षण का कार्य जल्द प्रारंभ हो सके। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शहर में बेतरतीब ढंग से लगे बिजली के खंभों एवं ट्रांसफार्मरों को व्यवस्थित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही भविष्य में नए बिजली खंभे अथवा ट्रांसफार्मर स्थापित करने से पूर्व नगर निगम की अनिवार्य सहमति लेने के निर्देश दिए। कोनी स्थित कन्वेंशन सेंटर के लिए पर्याप्त वाहन पार्किंग विकसित करने तथा उसके पीछे स्थित शासकीय भूमि का उपयोग पार्किंग के रूप में किए जाने के निर्देश भी उन्होंने अधिकारियों को दिए।

उन्होंने कहा कि जनहित के सभी काम समय पर पूर्ण हों, और लोगों को त्वरित रूप से इनका लाभ मिले। ठेकेदारों को पेनाल्टी अथवा सजा दिलाना हमारा उद्देश्य नहीं है। उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी विकास परियोजनाओं के समयबद्ध पूर्ण होने से बिलासपुर की आधारभूत संरचना मजबूत होगी और शहर की दशा एवं दिशा में व्यापक परिवर्तन आएगा।

उप मुख्यमंत्री साव के निरीक्षण के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला भी पूरे समय साथ थे। उन्होंने भी अधिकारियों को लम्बे समय से अधूरे पड़े इन कार्यों को जल्द पूर्ण करने का व्यवहारिक समाधान सुझाया। निरीक्षण के दौरान स्मार्ट सिटी परियोजना, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, सीएसईबी, जल संसाधन विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

उपमुख्यमंत्री साव ने एटीआर क्षेत्र के गांवों में लगाई जनचौपाल

रायपुर.

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के अचानकमार क्षेत्र के सुदूर वनांचल ग्रामों- जमुनाही, जकड़बांधा, सुरही और बम्हनी, कटामी और अचानकमार में जनचौपाल आयोजित कर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लेकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने इस दौरान अनेक विकास कार्यों की घोषणाएं भी की।

ग्राम जमुनाही में उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिवतराई से केवची तक बहुप्रतीक्षित सड़क को स्वीकृति मिल चुकी है। वर्षा ऋतु समाप्त होते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। वहीं बिजराकछार से औरापानी सड़क को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।  ग्रामीणों द्वारा बिजली एवं पेयजल की समस्या उठाए जाने पर उन्होंने तत्काल अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने जमुनाही में सड़क की मरम्मत, गांव में 5 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण, देवभूमि में हैंडपंप स्थापना की घोषणा की तथा पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि महतारी वंदन योजना, पेंशन, राशन सहित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से प्राप्त आवेदनों के त्वरित निराकरण के निर्देश देते हुए मंच निर्माण के लिए 2 लाख रुपये तथा गणेश चौक में गणेश पंडाल हेतु शेड निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कोटरा-पथरा-मनियारी मार्ग पर पुल निर्माण का सर्वे पूरा हो चुका है और कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जाएगा। उन्होंने जनचौपाल के दौरान पेयजल समस्या के समाधान के निर्देश देने के साथ ही स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों को खेल सामग्री भी वितरित किए।

सुरही में उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वनांचल क्षेत्रों में बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सुरही में 5 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्राम बम्हनी में जनचौपाल के दौरान उप मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव के 111 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा 206 महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और सभी आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने निवासखार में पुलिया निर्माण के लिए भी शीघ्र प्रयास करने का भरोसा दिलाया।

उप मुख्यमंत्री ने ग्राम कटामी एवं छपरवा में हैंडपंप एवं पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम बिंदावल में सीसी रोड निर्माण के लिए 5 लाख रुपए की घोषणा की तथा पानी एवं बिजली की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। जनचौपालों में मुंगेली के कलेक्टर कुंदन कुमार और वनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

MP Police में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1 IPS और 64 SPS अधिकारियों के तबादले

भोपाल.

मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग ने 1 आईपीएस (IPS) और 64 राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों समेत कुल 65 पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर के आदेश जारी किए हैं।

नई सूची में एसडीओपी, नगर पुलिस अधीक्षक (CSP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), उप पुलिस अधीक्षक (DSP) और सहायक सेनानी जैसे पदों पर अधिकारियों की नई पोस्टिंग की गई है। 

सबसे ज्यादा SDOP और Assistant Commandant बदले
तबादला सूची में सबसे ज्यादा बदलाव 22 SDOP और 30 Assistant Commandant के पदों पर हुए हैं। बड़ी संख्या में अधिकारियों को हॉकफोर्स बालाघाट और विशेष सशस्त्र बल (विसबल) की अलग-अलग वाहिनियों में भेजा गया है। वहीं कई जिलों में नए SDOP की तैनाती की गई है। इसके अलावा 9 CSP, 7 ACP, 7 DSP और 1 ASP की भी नई पदस्थापना की गई है। इससे जिला और शहर स्तर पर पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई शहरों में नई जिम्मेदारी
तबादला आदेश के तहत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, धार, बुरहानपुर और पीथमपुर जैसे शहरों में नए CSP और ACP की तैनाती की गई है। वहीं कई अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय भोपाल में DSP के रूप में पदस्थ किया गया है। कुछ प्रशिक्षु अधिकारियों को पहली बार अलग-अलग जिलों में SDOP की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इन बदलावों से पुलिस व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कई जिलों में नए अधिकारी संभालेंगे कमान
मुरैना, शिवपुरी, अलीराजपुर, मंदसौर, सिवनी, दमोह, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बैतूल, नीमच, बड़वानी, धार, ग्वालियर, सिंगरौली और बालाघाट सहित कई जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा हॉकफोर्स और विशेष सशस्त्र बल की अलग-अलग इकाइयों में भी बड़ी संख्या में अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का मानना है कि समय-समय पर ऐसे प्रशासनिक बदलाव से पुलिस व्यवस्था में बेहतर समन्वय और कामकाज में तेजी आती है।

तुरंत प्रभाव से लागू होंगे आदेश
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों की नई पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। संबंधित अधिकारियों को जल्द अपनी नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने भी आदेश के पालन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और आम लोगों को बेहतर कानून व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं।

लोहगढ़ किले मर्डर केस: आरोपियों ने हत्या से पहले Google पर तरीका सर्च करने का खुलासा

मुंबई
महाराष्ट्र के मशहूर लोहगढ़ किले में कारोबारी केतन अग्रवाल की पहाड़ी से धकेलकर हत्या करने के मामले में हर दिन रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले बाकायदा गूगल पर हत्या करने के तरीके सर्च किए थे। इतना ही नहीं दोनों ने हत्या की जगह का चुनाव करने और पकड़े जाने पर पुलिस को क्या जवाब देना है, इसकी बाकायदा रिहर्सल भी की थी।

इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस रविवार को दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच लोहगढ़ किले लेकर पहुंची, जहां पूरे क्राइम सीन को री-क्रिएट किया गया।

पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाया था प्लान B
जांच अधिकारियों के मुताबिक, सिया और चेतन ने इस खौफनाक हत्याकांड को किसी मंझे हुए अपराधियों की तरह अंजाम दिया था। वारदात से पहले दोनों अकेले लोहगढ़ किले गए थे ताकि उस सटीक जगह की पहचान कर सकें जहां से केतन को नीचे धकेला जा सके। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए उन्होंने भेष बदलने की भी योजना बनाई थी।

चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सिर्फ एक ही योजना नहीं बनाई थी, बल्कि अगर मुख्य प्लान फेल हो जाता तो उनके पास ‘प्लान सी’ भी तैयार था। पकड़े जाने की सूरत में पुलिस के सामने क्या कहानी सुनानी है इसकी स्क्रिप्ट उन्होंने पहले ही रट ली थी। सबूत मिटाने के लिए दोनों ने मोबाइल की पूरी चैट हिस्ट्री और रीसायकल बिन को भी साफ कर दिया था, जिसे रिकवर करने के लिए फोन फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।

पहली बार झाड़ियों ने बचाई जान, सांप का बहाना बनाया
पुलिस फाइलों से पता चला है कि 18 जून को केतन की हत्या करने से पहले भी सिया ने उसे मारने की कोशिश की थी। बीती 14 जून को सिया केतन को लेकर इसी किले पर आई थी और उसने केतन को धक्का दे दिया था। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि केतन ने पहाड़ी के किनारे उगी एक झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई।

उस समय अपनी साजिश पर पर्दा डालने के लिए सिया ने तुरंत नाटक रचा। वह ‘सांप-सांप’ चिल्लाने लगी और केतन को गले लगा लिया, जिससे केतन को लगा कि सिया सचमुच डर गई थी और सांप से बचाने के चक्कर में उसका संतुलन बिगड़ा था।

जन्मदिन के बहाने दोबारा बुलाया
14 जून को नाकाम होने के बाद सिया ने हार नहीं मानी। 18 जून को अपने जन्मदिन का बहाना बनाकर वह केतन को दोबारा ट्रेकिंग के लिए लोहगढ़ किला ले आई। इस बार उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी को भी वहां बुला लिया था। पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत जैसे ही सिया पहाड़ी के किनारे एक तय जगह पर बैठी वैसे ही पीछे से छिपकर आ रहे चेतन चौधरी ने केतन को जोरदार धक्का दे दिया। केतन संभल पाता उससे पहले ही वह 300 फीट गहरी खाई में जा गिरा और उसकी मौत हो गई।

17 करोड़ का महल, 2 प्राइवेट प्लेन
केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और आगामी नवंबर में दोनों की बेहद भव्य शादी होने वाली थी। केतन के परिवार ने राजस्थान के जयपुर में एक आलीशान महल को 17 करोड़ रुपये में बुक किया था। यही नहीं बारात और मेहमानों को ले जाने के लिए दो प्राइवेट विमानों की व्यवस्था भी की जा चुकी थी। लेकिन सिया अपने परिवार के सामने चेतन से प्यार की बात स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। पुलिस हिरासत में उसने बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि परिवार से बगावत करने और सगाई तोड़ने से ज्यादा आसान केतन को रास्ते से हटाना था।

बिलखते पिता की भावुक अपील
इस बीच शनिवार रात केतन अग्रवाल के गहुंजे स्थित निवास की हाउसिंग सोसाइटी में समाज के लोगों ने एक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल बेहद भावुक हो गए। उन्होंने 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद रहे पर्यटकों से सामने आने की अपील की। विशाल अग्रवाल ने कहा, “कुछ लोग हमें सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर कह रहे हैं कि वे उस दिन किले पर मौजूद थे और उन्होंने कुछ संदिग्ध देखा था, लेकिन वे पुलिस के पास जाने से कतरा रहे हैं। मैं उन सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि कृपया आगे आएं और मेरे बेटे को न्याय दिलाने में पुलिस की मदद करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपको किसी कानूनी पचड़े या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले हर उस रास्ते और लोकेशन की वीडियोग्राफी कर रही है, जिसका इस्तेमाल इस वीभत्स हत्याकांड में किया गया था।

दुर्ग में 100 साल पुराने DEO कार्यालय भवन का होगा नवनिर्माण, जल्द शुरू होगा काम

दुर्ग.

दुर्ग जिला मुख्यालय स्थित लगभग 100 वर्ष पुराने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय भवन का शीघ्र ही नवनिर्माण किया जाएगा। लंबे समय से जिले की शिक्षा व्यवस्था के संचालन का केंद्र रहे इस ऐतिहासिक भवन को आधुनिक सुविधाओं युक्त नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।

जर्जर हो चुके वर्तमान भवन के स्थान पर बनने वाला नया कार्यालय शिक्षा प्रशासन को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी, पारदर्शी एवं जनसुविधा के अनुरूप बनाएगा। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि जिले की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र होता है। यहीं से विद्यालयों के संचालन, शिक्षकों की व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों के हितों, शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचारों तथा शासन की शिक्षा संबंधी योजनाओं का प्रभावी संचालन और अनुश्रवण किया जाता है।

इसलिए इस कार्यालय का आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित होना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नया भवन राशि स्वीकृति होने के बाद निर्माण प्रारंभ होगा। आज इंजीनियर के साथ पुराना भवन का निरीक्षण कर जल्द ही ड्राइंग डिज़ाइन तैयार करने निर्देश दिए।

दुर्ग में BSP कार्मिकों का सम्मान, 119 कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मिले पुरस्कार

भिलाई नगर.

सेल – भिलाई इस्पात संयंत्र की ऐतिहासिक नेहरू अवार्ड योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 के लिए नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह का प्रथम चरण शनिवार को आयोजित किया गया। दो दिवसीय इस पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिन संयंत्र के कुल 119 पुरस्कारों को तीन श्रेणियों-जवाहर पुरस्कार, नेहरू पुरस्कार तथा जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि कार्यकारी निदेशक प्रभारी (बीएसपी) एवं कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) अजय कुमार चक्रवर्ती रहें व विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) प्रवीण निगम, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार, कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (संकार्य) तुषार कांत, कार्यपालक निदेशक (माइंस) कमल भास्कर तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ। विनीता द्विवेदी उपस्थित रहीं। नेहरू पुरस्कार वितरण समारोह के प्रथम दिवस जवाहर पुरस्कार श्रेणी में 33 अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत योगदान के लिए सम्मानित किया गया। नेहरू पुरस्कार श्रेणी में 63 कमर्चारियों को व्यक्तिगत उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि जवाहर लाल नेहरू समूह पुरस्कार श्रेणी में 23 समूहों को उनके सामूहिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

प्रथम चरण में कुल 119 पुरस्कारों से अधिकारियों एवं कमर्चारियों को संयंत्र की प्रगति एवं उत्कृष्ट कार्य निष्पादन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में ए।के। चक्रवर्ती ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि ये पुरस्कार उनके समर्पण, प्रतिबद्धता तथा संगठन की प्रगति में दिए गए उत्कृष्ट योगदान का सम्मान हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि ये पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से प्रदान किए जाते हैं, किंतु वे पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों के भी प्रतीक हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) जे एन ठाकुर ने अतिथियों, पुरस्कार विजेताओं एवं उपस्थित जनों का स्वागत करते हुए नेहरू पुरस्कार योजना की रूपरेखा एवं वर्ष 2025 के पुरस्कारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने संयंत्र की सतत प्रगति एवं उत्कृष्ट निष्पादन के लिए निरंतर योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री प्रियंका मीणा ने किया व धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) श्री निवेश विजयन ने दिया। प्रशस्ति पत्र हेतु विजेताओं के नाम का वाचन सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) मिहिर मनोहर तथा उप प्रबंधक (मानव संसाधन) समायला अंसारी ने किया। इस अवसर पर इस्पात बिरादरी के सदस्य एवं पुरस्कार विजेताओं के परिजन उपस्थित रहे।

अब अधिकारियों को भी लगानी होगी ऑनलाइन हाजिरी, सरकारी स्कूलों में लागू हुआ नया नियम

भोपाल.

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने उपस्थिति व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब तक ई-अटेंडेंस (E-Attendance Mandatory) केवल शिक्षकों के लिए लागू थी, लेकिन अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे।

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी हमारे शिक्षक प्रणाली के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करेंगे। इसके साथ ही अवकाश संबंधी जानकारी भी ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य होगा।

सभी स्तरों पर लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था
नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि E-Attendance प्रणाली अब स्कूल शिक्षा विभाग के सभी स्तरों पर समान रूप से लागू होगी। इसका उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों की उपस्थिति की बेहतर निगरानी करना है। एक जुलाई 2026 से पूरी व्यवस्था डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

इन कार्यालयों में लागू होगा नया नियम
DPI के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यालयों में लागू रहेगी। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), राज्य शिक्षा केंद्र, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय, जिला शिक्षा केंद्र और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को नियमित रूप से हमारे शिक्षक एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी। साथ ही अवकाश से जुड़ी जानकारी भी इसी प्रणाली में अपडेट करनी होगी।

कार्यालय प्रमुखों की तय की गई जिम्मेदारी
डीपीआई ने आदेश में संबंधित कार्यालय प्रमुखों और प्रशिक्षण संस्थान प्रमुखों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत सभी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करें। यदि किसी स्तर पर व्यवस्था के पालन में लापरवाही सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

शिक्षक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
इस निर्णय का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि संगठन लंबे समय से मांग कर रहा था कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होगी।

कटनी के जंगल में तालाब में जहर घोलने से 14 चीतल-सांभरों की मौत, बाघों पर भी मंडराया खतरा

कटनी.

जिले में वन्य प्राणियों की लगातार संख्या बढ़ रही है। वन्य प्राणियों से जहां आमजन को खतरा है तो वहीं वन्य प्राणी भी आमजन से सुरक्षित नहीं है। इसका एक उदाहरण सामने आया है कि विजयराघगढ़ क्षेत्र में करौंदी-घुघरी के पास तालाब में जहर मिलाकर 14 निर्दोष वन्य प्राणियों (चीतल व सांभर) का शिकार किया गया।

जिले के बरही क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में बाघों का ठिकाना है, तो इसके साथ ही शाहडार के जंगल में बाघ और तेंदुए सहित वन्य प्राणियों की उपस्थिति लगातार बनी हुई है। घटना सामने आने के बाद अब बाघों और अन्य प्राणियों के जीवन को भी खतरा बना हुआ है।

जलस्त्रोतों की बढ़ा दी गई है सुरक्षा
जिले में सक्रिय शिकारी वन विभाग के जल स्रोतों के आसपास निगरानी न रखने का फायदा उठाकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना से पहले भी जिले में एक बार जलस्त्रोत में जहर मिलाने की घटना हो चुकी है। ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में कुंड में जहर मिलाने से तेंदुए सहित अन्य वन्यप्राणियों की जान गई थी। घटना सामने आने के बाद अब वन विभाग अलर्ट हुआ है। जिले में जलस्त्रोतों के आसपास सुरक्षा व गश्त बढ़ाई गई है। दूसरी ओर शिकार करने वाले पकड़े गए तीनों आरोपियों को वन विभाग ने 14 दिन की रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है कि घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह तो शामिल नहीं है।

बरही, शाहडार का जंगल स्थाई ठिकाना
जिले के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी है, जिसमें विशेष रूप से बड़वारा वन परिक्षेत्र के बरही के करौंदीकला, खितौली, झिरिया, सलैया, कुआं सहित अन्य कई गांवों हैं, जिनके जंगलों में वनराज का ठिकाना है। विशेष रूप से कुआं बीट में बाघों की स्थाई मौजूदगी है और लगभग आठ बाघों का मूवमेंट यहां रहता है। इसके साथ ही बगल से लगे बांधवगढ़ के जंगल से भी बाघों का आना-जाना रहता है। दूसरी ओर ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र का शाहडार का घना जंगल भी वन्य प्राणियों का पसंद का ठिकाना है। यहां पर भी बाघ का स्थाई ठिकाना है और उसके साथ तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणी बड़ी संख्या में हैं। गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी रात को प्यास बुझाने के लिए जंगल के किनारे से लगे गांवों के जलस्त्रोतों तक पहुंचते रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना सामने आने के बाद अब बड़े वन्य प्राणियों पर जान का खतरा मंडराने लगा है।

ढीमरखेड़ा में सामने आई थी घटना
विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में तालाब के पानी में जहर मिलाकर वन्य प्राणियों के शिकार की घटना जिले में पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2010-11 में भी जिले के ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के करौंदी बीट के पास ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें एक प्राकृतिक जलस्त्रोत में शिकारियों ने जहर मिलाया था। उसका पानी पीने से तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणियों की मौत हुई थी। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ही इस साल अप्रैल माह में वन विभाग की टीम ने तीन शिकारियों को वन्य प्राणियों को मारने लगाए गए करंट के तार के साथ पकड़ा था तो उमरियापान, ढीमरखेड़ा, बड़वारा क्षेत्र में करंट लगाकर शिकार करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

घटना के बाद जागा वन अमला
विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में शुक्रवार की सुबह तालाब के किनारे 12 चीतल व दो सांभर मृत अवस्था में मिले थे। बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत से वन विभाग सकते में आ गया था। आनन-फानन में डॉग स्क्वाड बुलाकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई, जिसमें वन विभाग ने शिकार करने वाले तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद सामने आया कि जंगल की सीमा से लगे जलस्त्रोतों के आसपास शिकारी सक्रिय न हों, इसको लेकर वन विभाग का फील्ड का अमला नजर नहीं रख रहा है और उसी का नतीजा था कि 14 निर्दोष वन्य प्राणियों की जान चली गई। घटना के बाद विभाग ने जहां तालाब का पानी खाली करा दिया है तो वहीं जलस्त्रोतों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और अब नजर रखी जा रही है।

अमले को दिया प्रशिक्षण
वन्य प्राणियों की मौत के बाद अब वन विभाग के वनरक्षकों व अधिकारियों को जिले भर में ऐसे जलस्त्रोत जहां पर वन्य प्राणियों का आना-जाना रहता है, वहां पर तैनात करने के साथ गश्त करने और निगरानी रखने को लगाया गया है। शनिवार को डीएफओ सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड के अमले को पानी में जहर की जांच करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया, जिससे गश्त करते समय कर्मचारी पता लगा सकें कि पानी कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं घोला गया है। वन विभाग की टीम बड़वारा के बांधवगढ़ की सीमा से लगे गांवों, बाघ, तेंदुए सहित अन्य वन्य प्राणियों के ठिकानों के आसपास, ढीमरखेड़ा के शाहडार व अन्य वन क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी कर रही है।

इनका कहना है
विजयराघवगढ़ की घटना के बाद आरोपितों को पकड़ा गया है और उनसे रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जा रही है। जिले में बाघों का ठिकाना है और ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी कराई जा रही है। जंगलों से लगे जलस्त्रोतों के आसपास गश्त बढ़ाने के साथ ही अमले को पानी की जांच करने के लिए भी जानकारी दी गई है।
– गर्वित गंगवार, जिला वनमंडल अधिकारी

वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही, 1430 मौतों और हजारों लोगों के लापता होने की आशंका

नई दिल्ली
दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है।

खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग
वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है।

जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें
बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

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