पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल ने की शिष्टाचार भेंट

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल ने की शिष्टाचार भेंट

मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचारों, सेफ क्लिक 2.0 एवं नशे से दूरी है जरूरी अभियान पर हुई सार्थक चर्चा

भोपाल

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के मुंबई स्थित कॉन्सुल जनरल (Consul General) नबील ताउआती ने आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कॉन्सुल जनरल के साथ मुंबई के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार कौस्तुभ परिहार एवं कृषि सलाहकार प्रसाद पारते भी उपस्थित रहे।

भेंट के दौरान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण, आधुनिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार एवं नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से संचालित राज्यव्यापी ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अभियान के माध्यम से नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं विभिन्न संस्थानों तक व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता पहुंचाई जा रही है।

पुलिस महानिदेशक ने प्रदेश सरकार एवं मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान की भी जानकारी देते हुए बताया कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने, समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से नशामुक्त एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस निरंतर कार्यरत है।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच जनसुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, जागरूकता अभियानों तथा आपसी सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जनहित में संचालित नवाचारों एवं व्यापक जन-जागरूकता अभियानों की सराहना करते हुए भविष्य में पारस्परिक सहयोग एवं संवाद को और सुदृढ़ बनाने की इच्छा व्यक्त की।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रकार के सौहार्दपूर्ण संवाद से आपसी समझ एवं सहयोग को नई दिशा मिलेगी तथा जनहित एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।

 

Europe Heatwave: 40°C के पार पहुंचा तापमान, जानें भारतीयों के मुकाबले यूरोप में हीटवेव क्यों बनती है ज्यादा जानलेवा

लंदन /पेरिस 

यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, रेल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में फ्रांस की सड़कों की ऊपरी परत भीषण गर्मी के कारण नरम पड़ती और पिघलती नजर आ रही है. वहीं जर्मनी में अत्यधिक तापमान की वजह से ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गईं, जिसके कारण कई जगह सेवाएं रोकनी पड़ीं या उनकी रफ्तार कम करनी पड़ी। 

रॉयटर्स के मुताबिक, यह हीटवेव 20 जून के आसपास शुरू हुई और कुछ इलाकों में सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान दर्ज किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति ‘ओमेगा ब्लॉक’ नाम के मौसमीय पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त असर का परिणाम है. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो यूरोप में गर्मी की भयावह स्थिति को दिखाते हैं। 

भारतीयों से ज्यादा यूरोपीय लोगों को क्यों सताता है?
जब यूरोप में तापमान 40 डिग्री पहुंचता है तो लोग कहते हैं कि जीवन रुक गया है. अस्पताल भर जाते हैं. मौतें बढ़ जाती हैं. वहीं भारत में कई इलाकों में 40-45 डिग्री आम बात है, लोग काम करते रहते हैं. यह फर्क सिर्फ तापमान का नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों की वजह से है. आइए समझते हैं दोनों में अंतर… 

नमी का असर – सबसे बड़ा अंतर
सबसे महत्वपूर्ण अंतर ह्यूमिडिटी (नमी) का है. भारत में गर्मी के मौसम में नमी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोग इससे अभ्यस्त हैं. यूरोप में जब 40 डिग्री आता है तो अक्सर सूखी गर्मी होती है, लेकिन कई बार नमी भी बढ़ जाती है. जब नमी ज्यादा होती है तो पसीना सूखता नहीं है. शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता. इसे वेट बुल्ब टेम्परेचर कहते हैं. यूरोप में 40 डिग्री के साथ अगर नमी 60-70% हो जाए तो इंसान के लिए खतरनाक हो जाता है. भारत में लोग लंबे समय से गर्मी झेल रहे हैं, इसलिए उनका शरीर बेहतर तरीके से ढल जाता है। 

ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एयर कंडीशनर (AC) खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं. दुकान के बाहर इतनी भीड़ है कि मानो खरीदारी नहीं, बल्कि होड़ मची हो। वहीं एक अन्य वीडियो में भीषण गर्मी के कारण सड़क का डामर नरम पड़ता और पिघलता नजर आ रहा है। 

एक और वीडियो में यूरोप के समुद्र तटों (बीच) पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. गर्मी से राहत पाने के लिए हजारों लोग समुद्र किनारे पहुंच गए, जिससे वहां मेले जैसा माहौल बन गया। फ्रांस में गर्मी के कारण अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि गर्म नदियों के कारण कुछ परमाणु बिजली संयंत्रों का उत्पादन भी घटाना पड़ा. इटली, जर्मनी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप में कभी ‘सदी में एक बार’ आने वाली ऐसी भीषण हीटवेव अब जलवायु परिवर्तन की वजह से कहीं ज्यादा बार देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं.

इमारतें और घर कैसे बने हैं?
यूरोप की इमारतें ठंड के लिए बनाई गई हैं. दीवारें मोटी, इंसुलेशन अच्छा पर गर्मी निकालने की व्यवस्था कम. जब 40 डिग्री की गर्मी पड़ती है तो घर के अंदर भी तापमान बहुत बढ़ जाता है. वहां एयर कंडीशनर कम घरों में हैं। 

भारत में घरों में छतें ऊंची, खिड़कियां बड़ी, पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल आम है. लोग दोपहर में आराम करते हैं. शाम को काम करते हैं. यूरोप में ऐसी आदत नहीं है. स्कूल, ऑफिस और अस्पताल भी गर्मी के लिए तैयार नहीं होते। 

सूर्य की तीव्रता
यूरोप हाई एल्टीट्यूड पर स्थित है, इसलिए वहां गर्मियों में दिन बहुत लंबे (15 से 17 घंटे) हो जाते हैं. साफ आसमान और कम वायु प्रदूषण के कारण सीधी धूप बहुत तेज और चुभने वाली लगती है। 

रात का तापमान और आराम
यूरोप की हीटवेव में रात का तापमान भी बहुत ऊंचा रहता है. शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता. लगातार गर्मी से थकान, दिल का दौरा और मौतें बढ़ जाती हैं. भारत में दिन में गर्मी ज्यादा होती है लेकिन रात में तापमान काफी गिर जाता है. इससे शरीर को राहत मिलती है. यही वजह है कि भारत में 40 डिग्री सहन करना यूरोप की तुलना में आसान पड़ता है। 

लोगों की आदत और स्वास्थ्य
भारतीय शरीर गर्मी के लिए ज्यादा तैयार रहता है. बचपन से गर्मी में खेलना, काम करना सिखाया जाता है. पसीना आना, ज्यादा पानी पीना, छाछ-निम्बू पानी जैसी चीजें आम हैं। 

यूरोप में ज्यादातर लोग ठंडे मौसम में रहते हैं. उनकी त्वचा पतली, शरीर गर्मी सहने के लिए कम तैयार होता है. खासकर बुजुर्ग और बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं. फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसी जगहों पर 40 डिग्री में हजारों अतिरिक्त मौतें हो जाती हैं। 

तैयारियां और सरकारी व्यवस्था
भारत में हीटवेव एक्शन प्लान है. स्कूलों की छुट्टी, पानी की व्यवस्था, जागरूकता अभियान चलते हैं. लोग जानते हैं कि दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर कम निकलना चाहिए। 

यूरोप में अचानक गर्मी आने पर सरकारें भी हैरान रह जाती हैं. अस्पताल तैयार नहीं होते, बिजली की मांग बढ़ने से ग्रिड फेल हो जाते हैं. ट्रेनें रुक जाती हैं, सड़कें पिघल जाती हैं। 

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन यूरोप को तेजी से गर्म कर रहा है. पहले वहां 40 डिग्री बहुत दुर्लभ था, अब लगभग हर साल हो रहा है. यूरोप अब भी अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया में है 

भारत गर्म देश है, इसलिए 40-45 डिग्री नया नहीं. लेकिन भारत को भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि गर्मी और बढ़ रही है. दिल्ली, राजस्थान में 48-50 डिग्री भी पहुंच रहा है। 

क्या सीख सकते हैं दोनों देश?

    यूरोप को भारत से सीखना चाहिए- हल्के कपड़े, दिन की आदतें बदलना, पानी की व्यवस्था और सस्ते कूलिंग सिस्टम. 
    भारत को यूरोप से सीखना चाहिए- बेहतर मौसम पूर्वानुमान, हेल्थ अलर्ट सिस्टम और लंबे समय का प्लानिंग.

दोनों को गर्मी से निपटने के लिए हरे-भरे शहर, अच्छी इमारतें और जागरूकता बढ़ानी होगी। 

40 डिग्री तापमान हर जगह एक समान नहीं होता. यूरोप में यह आपातकाल जैसा है क्योंकि वहां की जलवायु, इमारतें, आदतें और तैयारियां ठंड के हिसाब से हैं. भारत में यह चुनौती है लेकिन सहनशक्ति ज्यादा है. जलवायु परिवर्तन के युग में दोनों देशों को अपनी रणनीति बदलनी होगी. गर्मी अब सामान्य हो रही है. इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. सही तैयारियों से हम इस चुनौती से निपट सकते हैं और जानें बचा सकते हैं। 

छत्तीसगढ़ के सभी 813 हज यात्रियों की स्वदेश वापसी पूरी, अंतिम जत्था मुंबई पहुंचा

 राज्य के सभी 813 हज यात्रियों  की स्वदेश वापसी पूर्ण-मिर्ज़ा एजाज बेग

छत्तीसगढ़ के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा 

रायपुर 
 छत्तीसगढ़ राज्य से हज कमेटी के माध्यम से हज यात्रा पर गए सभी हज यात्री हज की इबादत सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकुशल स्वदेश लौट आए हैं । राज्य के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा । मुंबई में एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने अगवानी करते हुए समस्त हाजियों की गुलपोशी की । छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि, हज 2026 के लिए राज्य गठन उपरांत से अब तक की सर्वाधिक संख्या में राज्य के 29 जिलों से हज यात्री प्रस्थान किये  कुल 813 हज यात्रियों की स्वदेश वापसी पूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि, इस वर्ष राज्य से 417 पुरुष एवं 396 महिला हज यात्रियों ने हज 2026 की सआदत  हासिल की।

राज्य के हज यात्रियों द्वारा चुने गये विकल्प अनुसार मुम्बई ईम्बारकेशन प्वाइंट से 451, नागपुर से 290, दिल्ली से 14, अहमदाबाद से 02, बैंगलोर से 06, हैदराबाद से 42, जयपुर से 01, लखनऊ से 05 एवं कोलकाता से 02 हाजियों की सकुशल स्वदेश वापसी संपन्न हुई। राज्य के हज यात्रियों का मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पर आज अंतिम जत्था दिनांक 29/06/2026 को मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पहुंचा। हज यात्रियों की वापसी के अवसर पर राज्य हज कमेटी द्वारा हाजियों का एयरपोर्ट में गुलपोशी से इस्तकबाल किया गया एवं लगेज उपरांत प्रत्येक हाजी को पवित्र जल ज़म ज़म उपलब्ध कराया गया।  सभी हाजियो ने राज्य हज कमेटी के द्वारा की गई बेहतरीन व्यवस्था के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी,प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी, डॉ. श्याम बिहारी जायसवाल कैबिनेट मंत्री छ.ग.शासन का आभार व्यक्त किया।

हज कमेटी के चेयरमैन श्री  बेग ने बताया कि, हज यात्रियों की सुविधाओं में वृद्धि करते हुए हज कमेटी द्वारा हज 2026 के हज यात्रियों को, 20 दिवस शाॅर्ट हज पैकेज, ऑनलाइन डाक्यूमेंट अपलोडिंग, पासपोर्ट जमा नहीं करने की सुविधा, प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण की सुविधा, संभाग स्तरीय विशेष हज प्रशिक्षण की सुविधा,  हज के दौरान बुलेट एवं मेट्रो ट्रेन से यात्रा की सुविधा, मीना में प्रत्येक हाजी का नाम एवं कवर नंबर युक्त सोफा कम बेड की सुविधा  उपलब्ध कराई गई जिससे हज यात्रियों की यात्रा  आरामदायक रही।
राज्य के  हज यात्रियों के मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट के अंतिम जत्थे की वापसी के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग, हज कमेटी के सदस्य मौलाना अमीर बेग, कार्यपालन अधिकारी/सचिव डॉ. खुशबू उस्मान उपस्थित रहें।

बस्तर में सड़कों की सुरक्षा के लिए सख्ती, आयरन केज व्हील वाले ट्रैक्टरों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन

जगदलपुर.

बस्तर जिले में अब लोहे के केजव्हील वाले ट्रैक्टरों के सड़क पर संचालन पर कड़ी निगरानी रखी
जाएगी. कलेक्टर के निर्देश पर ऐसे ट्रैक्टरों के खिलाफ चालानी और कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं.

खेतों में उपयोग होने वाले लोहे के पहिए सड़क पर चलने से डामर और सीमेंट सड़कें तेजी से क्षतिग्रस्त होती हैं. इसके कारण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है. उच्च न्यायालय के निर्देशों और लोक निर्माण विभाग के आदेशों के पालन में यह कदम उठाया गया है. प्रशासन ने खेतों से निकलते ही केजव्हील हटाकर रबर टायर लगाने को अनिवार्य बताया है. परिवहन और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से निगरानी अभियान चलाएंगे. इसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों में मोटरयान नियमों को लेकर जनजागरूकता अभियान भी संचालित होगा. किसानों को नियमों की जानकारी देकर सुरक्षित परिवहन के लिए प्रेरित किया जाएगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. इस पहल का उद्देश्य सड़कों की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण सुनिश्चित करना है. जिला प्रशासन ने सभी किसानों से नियमों का पालन करने की अपील की है.

CM विष्णुदेव साय का बड़ा ऐलान, बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत, सरचार्ज माफ

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल लंबे समय से बकाया हैं, उन्हें भुगतान के लिए तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत दी जाएगी।

इस विशेष अवधि के दौरान बकाया बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार का सरचार्ज नहीं वसूला जाएगा, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश में ऐसे कई उपभोक्ता हैं, जिनका बिजली बिल लंबे समय से बकाया है। ऐसे सभी उपभोक्ता अब अगले तीन महीने के भीतर अपना बकाया बिल जमा कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य लोगों पर आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें राहत प्रदान करना है।

10 प्रतिशत की विशेष छूट भी मिलेगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि केवल सरचार्ज माफ ही नहीं किया जाएगा, बल्कि निर्धारित अवधि के भीतर बकाया बिजली बिल का भुगतान करने वाले पात्र उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत की विशेष छूट भी दी जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा और वे कम राशि में अपना लंबित बिल जमा कर सकेंगे।

उपभोक्ताओं से समय पर योजना का लाभ लेने की अपील
राज्य सरकार ने पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस विशेष राहत योजना का लाभ उठाते हुए अगले तीन महीने के भीतर अपना बकाया बिजली बिल जमा करें। सरकार का मानना है कि इस फैसले से जहां उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं बिजली वितरण कंपनियों को भी बकाया राशि की वसूली में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री के इस फैसले को बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से बकाया बिल के कारण सरचार्ज का बोझ झेल रहे हजारों उपभोक्ता अब बिना अतिरिक्त शुल्क के भुगतान कर सकेंगे और 10 प्रतिशत की छूट का लाभ भी उठा पाएंगे।

CM विष्णुदेव साय कबीर जयंती महोत्सव में हुए शामिल, बोले- मेरी वाणी और जीवन पर कबीर साहब का गहरा प्रभाव

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सोनपैरी स्थित असंग देव कबीर आश्रम पहुंचे, जहां वे आयोजित कबीर जयंती महोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में उनके साथ कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी मौजूद रहे। साथ ही राज्यपाल गहलोत और मुख्यमंत्री साय ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

CM साय ने कार्यक्रम को किया संबोधित
CM साय ने महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर कबीर साहब का विशेष आशीर्वाद है और पूरे प्रदेश में कबीरपंथ के अनुयायी बड़ी संख्या में हैं। उन्होंने कहा मेरा बचपन भी कबीरपंथ के करीब बीता है। मेरे जीवन और मेरी वाणी पर कबीर जी के विचारों का गहरा प्रभाव है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व की रमन सरकार के समय ही कवर्धा का नाम बदलकर कबीरधाम रखा गया था। मुख्यमंत्री ने कबीरदास जी की निडरता की भी सराहना की।

27 लाख लोगों को मिला पीएम आवास का लाभ
CM साय ने आगे कहा कि हमारी सरकार को अभी ढाई साल हुए हैं। पीएम मोदी का प्रदेश की जनता से वादा था मोदी की गारंटी, जिसे पूरा करने की कोशिश कर रहे है। पीएम आवास के तहत लोगों को आवास दिया गया है और 27 लाख लोगों को इसका फायदा मिला है। हमारी सरकार के समय 18 लाख स्वीकृति हुई और पीएम आवास का निर्माण सबसे अधिक छत्तीसगढ़ में हो रहा है।

CM साय ने गिनाई उपलब्धी
उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि नक्सलवाद का खात्मा किया गया, 3 हजार से ज्यादा आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी पीएम आवास की सुविधा दी जाएगी। विशेष अनुसूचित जनजाति के लोगों को 32 हजार आवास मिला, गरीबों को मकान, महिलाओं को महतारी वंदन के तहत किश्त दी जा रही है। हम विकास और विरासत के स्लोगन के साथ काम कर रहे हैं।

मठ मंदिरों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही राम लला अयोध्या दर्शन योजना भी चला रहे हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी मौजूद रहे।

राज्यपाल पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सौजन्य भेंट

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक भवन पहुंचकर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल पटेल को मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त होने, यूसीसी को लेकर मिल रहे व्यापक जन समर्थन एवं इस संदर्भ में राज्य सरकार की आगामी कार्य योजना से भी अवगत कराया।

प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के सफल क्रियान्वयन, गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा में प्रस्तावित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, 4 कृषि उपजों को हाल ही में मिले जीआई टैग से संबंधित किसानों को मिलने वाले लाभ, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन से जुड़े विभिन्न प्रयासों एवं सरकार को मिली उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

 

छिंदवाड़ा में सियासी हलचल तेज, जैतपुर में कमलनाथ के ‘लापता’ पोस्टर लगे, BJP-Congress आमने-सामने

छिंदवाड़ा
पूर्व मुख्यमंत्री और छिंदवाड़ा विधायक कमलनाथ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में हैं। छिंदवाड़ा के ग्राम जैतपुर में ग्रामीणों ने कमलनाथ के लापता होने के पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा गया है।

भाजपा ने साधा निशाना
भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू ने आरोप लगाया है कि छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में कई समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन विधायक कमलनाथ जनता के बीच नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने पेयजल संकट, ग्रामीण इलाकों में अधूरी व्यवस्थाओं और बारिश की कमी से बढ़ रही परेशानियों को लेकर कमलनाथ पर सवाल उठाए हैं।

2 अप्रैल को हुआ था आखिरी दौरा
कमलनाथ आखिरी बार 2 अप्रैल को छिंदवाड़ा दौरे पर आए थे। इसके बाद उनकी क्षेत्र में सक्रियता को लेकर भाजपा लगातार सवाल उठा रही है।

छिंदवाड़ा की राजनीति में बढ़ी हलचल
लोकसभा चुनाव के बाद छिंदवाड़ा की राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भाजपा जिले में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय है, जबकि कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक को बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में जैतपुर में लगाए गए पोस्टरों को आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

खंडवा में 200 एकड़ जंगल से हटाया अतिक्रमण, 30 JCB और 600 कर्मचारियों की बड़ी कार्रवाई

खंडवा 

खंडवा में सोमवार को आमाखुजरी जंगल की करीब 200 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाया गया। अतिक्रमणकारियों ने यहां पेड़-झाड़ियां काटकर मक्के की फसल बोई थी। वन, राजस्व और पुलिस विभाग के 600 अधिकारी-कर्मचारी 30 जेसीबी मशीनों के साथ कार्रवाई में जुटे, जो करीब 6 घंटे तक कार्रवाई चली।

गुड़ी वन परिक्षेत्र के आमाखुजरी जंगल में अतिक्रमणकारियों ने झोपड़ियों तान दी है, बारिश के समय यहां बोवनी की तैयारी की जा रही थी।गश्त कर रही फ्लायंग स्क्वाड की टीम पर महिलाओं को आगे कर अतिक्रमणकारियों ने हमला कर दिया था।जिसमें आठ वनकर्मी बुरी तरह घायल हो गए थे।

अतिक्रमणकारियों के इस हमले के बाद पुलिस-प्रशासन सोमवार को हरकत में आया और बड़ी संख्या में फोर्स लेकर कलेक्टर-एसपी आमाखुजरी जंगल में पहुंचे है। 30 जेसीबी के माध्यम से सुबह से चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 70 प्रतिशत से ज्यादा अतिक्रमण हटाकर यहां से अतिक्रमणकारियों को खदेड़ा गया है। जंगल में पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई जारी है।

 किसी भी तरह के विरोध से निपटने के लिए 60 महिला पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहीं। टीम अपने साथ आंसू गैस लेकर पहुंची थी। जंगल में गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर झटका लगने से गैस का गोला फट गया। इसकी चपेट में कुछ पुलिसकर्मी आ गए। बाद में पेटी को खोलकर पूरी गैस बाहर की गई।

इस दौरान कलेक्टर ऋषभ गुप्ता, एसपी अगम जैन, एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर और डीएफओ राकेश कुमार डामोर भी आमाखुजरी में रहे। इससे पहले रविवार को जंगल में बुआई रोकने गए 40 वनरक्षकों की टीम पर अतिक्रमणकारियों ने पथराव कर दिया था। इसमें 8 कर्मचारी घायल हो गए थे।

600 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी रहे तैनात
पुलिस-प्रशासन के साथ संयुक्त अभियान चलाकर अतिक्रमणकारियों द्वारा पेड़-झाड़ियां काटकर बोई गई मक्के की फसल को 30 जेसीबी मशीनों की मदद से हटाया गया। करीब छह घंटे तक चले अभियान में 600 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहे। अभियान के दौरान किसी भी संभावित विरोध से निपटने के लिए 60 महिला पुलिसकर्मियों सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

आंसू गैस के गोले भी साथ लाए थे
सुरक्षा के मद्देनजर आंसू गैस के गोले भी साथ लाए गए थे, हालांकि जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्ते में झटका लगने से एक गैस गोला अनजाने में फट गया, जिसकी चपेट में कुछ पुलिसकर्मी आ गए। बाद में पेटी खोलकर शेष गैस बाहर निकाली गई। कार्रवाई के दौरान कलेक्टर ऋषभ गुप्ता, पुलिस अधीक्षक अगम जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारणेकर और डीएफओ राकेश कुमार डामोर लगातार मौके पर मौजूद है।

प्रशासन के अनुसार आमाखुजरी में दूसरे दिन भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रही और अब तक लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। जंगल में अभी भी बड़ी संख्या में पुलिस और वन अमला तैनात है।

महिलाओं को आगे कर वन अमले पर बरसाए थे पत्थर

रविवार को आमाखुजरी जंगल में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर करीब 400 अतिक्रमणकारियों ने महिलाओं को आगे कर गोफन से पत्थर फेंके। लाठियों से भी हमला किया। किसी वनकर्मी का सिर फूट गया तो किसी का कान कट गया। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

3 साल की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास, बनीं दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर, मिला वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सम्मान

भोपाल 

जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे खिलौनों और रंग-बिरंगी किताबों में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में भोपाल की सान्वी नाहर और समन्वी नाहर ने अपनी ड्रमिंग से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

महज 3 साल 9 महीने की उम्र में दोनों बहनों ने ‘यंगेस्ट फीमेल ड्रमर’ का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन में अपना नाम दर्ज कराया। उनकी इस उपलब्धि के बाद ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित भी किया गया।

21 मार्च 2026 को दोनों बच्चियों ने ड्रम सेट पर तय ट्रैक को लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक बिना रुके सफलतापूर्वक बजाया। रिकॉर्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संस्था ने उनके प्रदर्शन की जांच की और फिर उन्हें आधिकारिक तौर पर प्रमाण-पत्र, मेडल और ट्रॉफी से सम्मानित किया।

उनकी उपलब्धि को संस्था के आधिकारिक रिकॉर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी शामिल किया गया है। इतनी कम उम्र में संगीत के कठिन वाद्य यंत्र पर ऐसा नियंत्रण हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

छोटी उम्र में कैसे रचा इतिहास?
ड्रमिंग को संगीत की सबसे चुनौतीपूर्ण विधाओं में गिना जाता है। इसमें दोनों हाथों और दोनों पैरों का एक साथ सही तालमेल होना जरूरी होता है। यही वजह है कि आमतौर पर बच्चों को पांच साल या उससे अधिक उम्र के बाद ही ड्रम सीखने की सलाह दी जाती है। लेकिन सान्वी और समन्वी ने इस सोच को बदल दिया।

उनकी मां डॉ. निकिता नाहर के मुताबिक, दोनों ने करीब सवा तीन साल की उम्र में ड्रम सीखना शुरू किया था। शुरुआत आसान नहीं थी। परिवार कई संगीत शिक्षकों के पास पहुंचा, लेकिन लगभग सभी ने इतनी छोटी उम्र का हवाला देकर सिखाने से इनकार कर दिया।

इसके बाद भोपाल की योगी म्यूजिक वैली एकेडमी के प्रशिक्षक युग नामदेव ‘योगी’ ने यह चुनौती स्वीकार की। उन्होंने बच्चियों को बिल्कुल शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण दिया। लगातार अभ्यास, सही तकनीक और परिवार के सहयोग की बदौलत दोनों ने कुछ ही महीनों में ऐसी पकड़ बना ली कि उनका प्रदर्शन वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंच गया।

मेहनत, परिवार का साथ और सही मार्गदर्शन
रिकॉर्ड बनाने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अनुशासन भी जरूरी था। प्रशिक्षक युग नामदेव के अनुसार, रिकॉर्ड की शर्त थी कि दोनों बच्चियों को लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक एक तय ट्रैक बिना किसी गलती के पूरा करना होगा।

इसके लिए उन्होंने लगभग एक महीने तक हर दिन उसी ट्रैक का नियमित अभ्यास किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और रिकॉर्ड के लिए भेजा गया वीडियो और जरूरी दस्तावेज मंजूर कर लिए गए। सान्वी और समन्वी एक डॉक्टर परिवार से हैं।

उनके दादा डॉ. अक्षय नाहर, पिता डॉ. सक्षम नाहर और मां डॉ. निकिता नाहर सभी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटियों की रुचि को कभी नजरअंदाज नहीं किया और उन्हें सीखने का पूरा मौका दिया।

 

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