App से होती थी बुकिंग, उज़्बेकिस्तान और दिल्ली की युवतियों के जरिए चल रहा था बड़ा सेक्स रैकेट; नागपुर में भंडाफोड़

 नागपुर

नागपुर पुलिस ने अंबाझरी थाना क्षेत्र में देह व्यापार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए विदेशी और दूसरे राज्यों की 5 पीड़ित महिलाओं को मुक्त कराया है. इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार हैं. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान सचिन माणिकराव महाजन के रूप में हुई है. कार्रवाई के दौरान उज़्बेकिस्तान की दो महिलाओं व पंजाब, दिल्ली और कोलकाता की 3 महिलाओं को मुक्त कराया गया। 

जांच में सामने आया कि आरोपी लॉग इन पर्सनल मीटिंग (Login Personal Meeting) नामक ऐप के माध्यम से ग्राहकों को महिलाओं की उपलब्धता कराते थे. महिलाओं को कम समय में अधिक पैसे कमाने का लालच देकर उनसे देह व्यापार कराया जाता था. सूचना के आधार पर सामाजिक सुरक्षा विभाग ने बोगस ग्राहक (डिकॉय ऑपरेशन) और पंचों की मौजूदगी में गोकुलपेठ स्थित होटल पेटल इन के सामने छापा मारा और कार्रवाई को अंजाम दिया। 

फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने मौके से करीब 5.18 लाख रुपये का माल जब्त किया. जिसमें एक स्विफ्ट डिजायर कार (कीमत लगभग ₹5 लाख), एक मोबाइल फोन (₹10 हजार) और ₹8 हजार नकद शामिल हैं. मामले में समीर उर्फ मनीष उर्फ गगन ठाकुर, राहुल और पूजा नामक महिला सहित तीन आरोपियों की तलाश जारी है। 

इस संबंध में अंबाझरी पुलिस थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2)(3) व अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धाराओं 3, 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है. वहीं पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। 

वियतनाम में बड़ा हादसा, 32 भारतीयों से भरी नाव पलटी; 15 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नई दिल्ली /हनोई 
वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास शनिवार को भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक नाव समुद्र में पलट गई. इस दर्दनाक हादसे में 15 भारतीयों की मौत हो गई, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन का राहत बचाव अभियान शुरू हो गया. फिलहाल भारतीय दूतावास पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, स्थानीय अधिकारियों के लगातार संपर्क में है. प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर भी बनाए गए हैं।  

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि नाव में कुल 36 लोग सवार थे. इनमें 32 भारतीय पर्यटक, 3 क्रू मेंबर और 1 अटेंडेंट शामिल थे. हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई, जबकि बाकी 21 लोगों को बचा लिया गया। 

हादसे की खबर मिलते ही वियतनाम में मौजूद भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करके इस बात की पुष्टि की. दूतावास ने अपने ट्वीट में लिखा, “एक बेहद दुखद घटना में, कुछ घंटे पहले वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई है. हादसे के सटीक विवरण का पता लगाया जा रहा है, स्थानीय अधिकारियों की तरफ से खोज और बचाव अभियान फिलहाल जारी है। 

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, नाव होन मे रुट द्वीप से एन थोई पोर्ट लौट रही थी. इसी दौरान तट से करीब 400 मीटर दूर समुद्र में नाव पलट गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उस समय समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही थीं, जिससे हादसा हुआ. हालांकि, घटना के सही कारणों की जांच अभी जारी है. बता दें कि फू क्वोक वियतनाम का सबसे बड़ा द्वीप है और पिछले कुछ वर्षों में यह भारतीय पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में भारतीय यहां छुट्टियां मनाने पहुंचते हैं। 

मदद के लिए बने कंट्रोल रूम, जारी हुए ये नंबर्स
प्रभावित परिवारों की मदद, जानकारी देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी में मौजूद भारतीय दूतावास (Consulate General) में एक कंट्रोल रूम तैयार कर दिया गया है. लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

+84 36 281 7930

+84 91 552 37 14

+84 33 452 0414

इसके अलावा हनोई में भी एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर +84 91 308 9165 है. दूतावास ने साफ कहा है कि वे किसी भी तरह की पूछताछ या मदद के लिए हर समय तैयार हैं।  

फिलहाल भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह स्थानीय अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक घटना के समय समुद्र में ऊंची लहरें थीं, हालांकि नाव पलटने की असली वजह का पता लगाने के लिए पड़ताल जारी है। 

परिवारों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
समंदर की उफनती लहरों के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है और हर गुजरते पल के साथ पीड़ितों के परिजनों की सांसें अटकी रही. इस भीषण हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दूतावास तुरंत एक्शन मोड में आ गया है. प्रभावित परिवारों की मदद और पल-पल की सटीक जानकारी साझा करने के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में विशेष इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं ताकि संकट की इस घड़ी में अपनों से दूर घबराए परिवारों को तुरंत राहत और सहायता पहुंचाई जा सके. हो ची मिन्ह सिटी में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में +84 36 281 7930, +84 91 552 3714 और +84 33 452 0414 पर संपर्क किया जा सकता है. वहीं, हनोई में बनाए गए कंट्रोल रूम के लिए +84 91 308 9165 नंबर जारी किया गया है। 

वियतनाम बोट हादसे से जुड़ी अहम बातें

• 15 पर्यटकों की मौत: वियतनाम की स्थानीय मीडिया और एन थोई पोर्ट बॉर्डर गार्ड स्टेशन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, स्पीडबोट पर सवार सभी 36 लोगों को समंदर से बाहर निकाल कर तट पर ला दिया गया है. इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों को जिंदा बचा लिया गया है, जबकि 15 पर्यटकों (13 पुरुष और 2 महिलाएं) की मौत हो गई है. सभी जीवित बचे घायलों को इलाज के लिए तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। 

दोपहर 1 बजे हुआ हादसा: फू क्वोक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन अथॉरिटी के मुताबिक, यह हादसा दोपहर करीब 1 बजे हुआ. ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की इस स्पीडबोट को 57 वर्षीय नगुयेन होंग है चला रहे थे जिसमें 32 भारतीय पर्यटकों के अलावा 3 क्रू मेंबर और 1 फ्लाइट अटेंडेंट सहित कुल 36 लोग सवार थे। 

• तकनीकी खराबी के कारण पलटी बोट: यह स्पीडबोट होन मे रुट से एन थोई पोर्ट (फू क्वोक एयरपोर्ट से लगभग 25 किमी दूर) जा रही थी. होन मे रुट नगोई द्वीप से करीब 400 मीटर दूर बोट में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण वह समंदर में पलट गई, जिससे सभी लोग पानी में गिर गए. हादसे में कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है लेकिन सटीक संख्या की पुष्टि होनी अभी बाकी है। 

• घटनास्थल के लिए रवाना हुए भारतीय राजदूत: वियतनाम में नियुक्त भारतीय राजदूत इस बेहद संवेदनशील मामले पर वहां के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे खुद भी दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होने वाले हैं। 

• हो ची मिन्ह और हनोई से दो टीमें भेजी गईं: प्रभावित भारतीयों की तुरंत मदद और रेस्क्यू के लिए भारतीय दूतावास की दो विशेष टीमें घटनास्थल के लिए रवाना की जा रही हैं. इनमें से पहली टीम आज शाम तक और दूसरी टीम देर रात तक दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभालेगी। 

• दूतावास ने जारी किए 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर: संकट की इस घड़ी में परिवारों को जानकारी और सहायता देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिए गए हैं. प्रभावित लोग हो ची मिन्ह सिटी के लिए +84 36 281 7930, +84 91 552 3714, +84 33 452 0414 और हनोई के लिए +84 91 308 9165 पर संपर्क कर सकते हैं। 

युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन 
हादसे के फौरन बाद वियतनाम के स्थानीय प्रशासन और तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने कमान संभाल ली है. समंदर की तेज धाराओं और मौसम की चुनौतियों के बीच लापता भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए गोताखोरों और आधुनिक नावों की मदद ली जा रही है. रेस्क्यू टीमें पल-पल समंदर की खाक छान रही हैं. हालांकि, अभी तक हादसे में हताहत हुए लोगों की सटीक संख्या और उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। 

 

INS महेंद्रगिरी नौसेना में शामिल, राजनाथ सिंह बोले- यह इलाका बनेगा देश का ड्रोन हब

विशाखापत्तनम 
 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज शनिवार को यहां विशाखापत्तनम डॉकयार्ड में INS महेंद्रगिरी को कमीशन किया. इससे इंडियन नेवी के बाड़े में एक और स्टेट-ऑफ-द-आर्ट वॉरशिप शामिल हो गया है. बता दें, यह एक स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट और प्रोजेक्ट 17A नीलगिरी-क्लास का छठा वॉरशिप है. कमीशनिंग सेरेमनी के दौरान राजनाथ सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर भी मिला। 

जानकारी के मुताबिक पूर्वी घाट में महेंद्रगिरी पहाड़ों के नाम पर रखा गया यह फ्रिगेट लचीलेपन, ताकत और पक्के इरादे का प्रतीक है. इस नाम वाला पहला भारतीय नेवी का वॉरशिप होने के नाते, महेंद्रगिरी सच में अपने आप में अनोखा है. उम्मीद है कि यह वॉरशिप एक खास पहचान बनाएगा और भारत के समुद्री इतिहास में एक और अध्याय जोड़ेगा। 

इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि मैंने पहले भी आठ ड्रोन कंपनियों के ग्रुप द्वारा कुरनूल में ‘ड्रोन सिटी’ बनाने के बारे में बात की थी. जैसे सूरत को ‘डायमंड सिटी’ और बेंगलुरु को देश की ‘सिलिकॉन वैली’ के नाम से जाना जाता है, मुझे विश्वास है कि एक दिन इस इलाके को देश के ‘ड्रोन हब’ के तौर पर पहचाना जाएगा. इस अनोखे इत्तेफाक पर गौर करें: आसमान में AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट), समुद्र की गहराई में BDL (भारत डायनेमिक्स लिमिटेड) के नेवल सिस्टम, बिना पायलट वाले इलाके में कुरनूल के ड्रोन, और आज, समुद्र की सतह पर INS महेंद्रगिरी. इसका मतलब है कि आज, आंध्र प्रदेश हर क्षेत्र – हवा, पानी, जमीन और बिना पायलट वाले इलाके में भारत की रक्षा क्षमताओं में योगदान दे रहा है. मैं इस कामयाबी पर आंध्र प्रदेश सरकार और लोगों को दिल से बधाई देता हूं। 

इंडियन नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने इसे इन-हाउस डिजाइन किया है और मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने इसे बनाया है. महेंद्रगिरी, प्रोजेक्ट 17A क्लास के स्टेल्थ फ्रिगेट का छठा जहाज है. यह जहाज देसी वॉरशिप डिजाइन और कंस्ट्रक्शन में भारत की बढ़ती एक्सपर्टीज को दिखाता है। 

जो जानकारी मिली है उसके अनुसार 75 परसेंट से ज्यादा स्वदेशी सामान के साथ, यह जहाज भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल की सफलता को दिखाता है और भारतीय जहाज बनाने के सिस्टम की बढ़ती क्षमता को दिखाता है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जहाज के कंस्ट्रक्शन में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (MSMEs) समेत कई भारतीय इंडस्ट्रीज शामिल हुई हैं, जिससे देश का डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस मजबूत हुआ है और काफी रोजगार पैदा हुए हैं। 

महेंद्रगिरी में स्वदेशी और स्टेट-ऑफ-द-आर्ट हथियार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का एक एडवांस्ड सेट लगा है, जिससे यह एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन अच्छे से करेगा. यह जहाज समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन, सर्च और रेस्क्यू मिशन, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR), और इंडियन ओशन रीजन (IOR) और उससे आगे लगातार तैनाती के लिए भी सक्षम है। 

INS महेंद्रगिरी की कमीशनिंग, प्रोजेक्ट 17A प्रोग्राम के सफल एग्जिक्यूशन में एक और अहम मील का पत्थर है. जैसे-जैसे इस क्लास के फ्रिगेट बेड़े में शामिल होंगे, वे इंडियन नेवी की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाते रहेंगे और साथ ही भारत को एक लीडिंग स्वदेशी वॉरशिप-बिल्डिंग देश के तौर पर अपनी जगह मजबूत करेंगे. इससे पहले रक्षा मंत्री शुक्रवार शाम विशाखापत्तनम पहुंचे, जहां उनका स्वागत नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने किया. इससे पहले, सिंह ने महेंद्रगिरि की कमीशनिंग को देश और भारतीय नौसेना के लिए गर्व का पल बताया। 

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि 11 जुलाई 2026 को 6वें प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट, महेंद्रगिरि की कमीशनिंग सेरेमनी के लिए, हमारे देश और भारतीय नौसेना के लिए गर्व के पल का गवाह बनने के लिए विशाखापत्तनम जा रहा हूं. इस वॉरशिप को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए, सिंह ने कहा कि यह देश में डिजाइन और बनाया गया स्टेट-ऑफ-द-आर्ट वॉरशिप हमारे आत्मनिर्भर भारत विज़न और हमारी घरेलू डिफेंस इंडस्ट्रीज और MSMEs की जबरदस्त क्षमताओं का सबूत है. उन्होंने आगे कहा कि महेंद्रगिरी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और एक सुरक्षित इंडो-पैसिफिक के हमारे इरादे को मज़बूत करने के लिए लड़ाई के लिए तैयार है। 

सरदार सरोवर समझौते पर उठे सवाल : मध्यप्रदेश के वैध अधिकारों और हजारों विस्थापितों के पुनर्वास से समझौता न हो – नर्मदा बचाओ आंदोलन

सरदार सरोवर समझौते पर उठे सवाल : मध्यप्रदेश के वैध अधिकारों और हजारों विस्थापितों के पुनर्वास से समझौता न हो – नर्मदा बचाओ आंदोलन

बड़वानी, 
 सरदार सरोवर परियोजना के कारण मध्यप्रदेश में जलमग्न हुई वन भूमि, शासकीय भूमि तथा अन्य सार्वजनिक संसाधनों की भरपाई को लेकर वर्षों से चले आ रहे अंतर्राज्यीय विवाद के बीच हाल ही में हुए समझौते पर नर्मदा बचाओ आंदोलन ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। आंदोलन का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की मध्यस्थता में हुए इस समझौते का अधिकृत विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जबकि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित खबरों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। ऐसे में पूरे समझौते की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है, ताकि मध्यप्रदेश शासन तथा विस्थापित परिवारों के वैधानिक अधिकारों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

बांध की ऊंचाई बढ़ने के साथ बढ़ी क्षति, बदला मुआवजे का दावा

नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर, राहुल यादव, राजकुमार सिन्हा, गोखरू मांगल्या, शोभाराम सोलंकी एवं ओमप्रकाश पाटीदार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जब वर्ष 2000 तक सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 90 मीटर तक सीमित थी, तब मध्यप्रदेश सरकार ने परियोजना से होने वाली क्षति के लिए 281.46 करोड़ रुपये की भरपाई का दावा किया था। इस दावे में 112.51 करोड़ रुपये वन भूमि, 157.61 करोड़ रुपये शासकीय भूमि तथा 11.34 करोड़ रुपये जलमग्न वन क्षेत्र के प्रतिकर के रूप में शामिल थे।

इसके बाद बांध की ऊंचाई क्रमशः 110 मीटर, 121.92 मीटर और अंततः वर्ष 2017 में 138.68 मीटर तक बढ़ा दी गई। बांध की ऊंचाई बढ़ने के साथ मध्यप्रदेश का डूब क्षेत्र भी लगातार विस्तारित होता गया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में वन भूमि, शासकीय भूमि, कृषि क्षेत्र तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन जलमग्न हुए, जिससे राज्य को होने वाली वास्तविक क्षति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई।

आंदोलन के अनुसार वर्ष 2019 तक नियोजन के अनुरूप 192 गांव और एक नगर प्रभावित घोषित हो चुके थे। वहीं वर्ष 2023 में पुनरीक्षित बैकवॉटर स्तर के आधार पर हजारों परिवारों को पुनर्वास के लिए अपात्र घोषित किए जाने से नई समस्याएँ उत्पन्न हुईं और अनेक परिवारों की आजीविका तथा पुनर्वास की स्थिति प्रभावित हुई।

पुनर्मूल्यांकन के बाद 7,669 करोड़ रुपये का दावा

बढ़े हुए डूब क्षेत्र तथा वर्तमान परिसंपत्ति मूल्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 के आधार पर जलमग्न भूमि एवं अन्य प्रभावित परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन कराया। इस पुनर्मूल्यांकन के आधार पर राज्य सरकार ने अपने भरपाई दावे को बढ़ाकर 7,669 करोड़ रुपये निर्धारित किया।

यह संशोधित दावा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तैयार कर 10 फरवरी 2022 को विधिवत गुजरात सरकार को भेजा गया। आंदोलन का कहना है कि यह दावा बढ़े हुए डूब क्षेत्र तथा वास्तविक क्षति के आधार पर तैयार किया गया था और इसका उद्देश्य राज्य को हुए नुकसान की न्यायसंगत भरपाई सुनिश्चित करना था।

गुजरात ने संशोधित दावा स्वीकार करने से किया इनकार

नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनुसार लगभग दो वर्ष बाद 21 मार्च 2024 को गुजरात सरकार ने स्पष्ट किया कि वह केवल 281.46 करोड़ रुपये के मूल दावे पर ही विचार करेगी तथा 7,669 करोड़ रुपये के संशोधित दावे को स्वीकार नहीं करेगी।

आंदोलन का कहना है कि यह रुख मध्यप्रदेश शासन द्वारा आंकी गई वास्तविक क्षति की उपेक्षा करने वाला है तथा परियोजना से प्रभावित राज्य के वैधानिक अधिकारों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। मध्यप्रदेश शासन ने भी इस रुख को स्वीकार नहीं किया और विवाद नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठकों में लगातार उठता रहा।

कानूनी प्रावधानों के अनुरूप भरपाई और पुनर्वास आवश्यक

आंदोलन ने कहा कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के वर्ष 1979 से लागू प्रावधानों के अनुसार परियोजना से प्रभावित राज्यों के बीच वन भूमि, शासकीय भूमि तथा पुनर्वास से जुड़े दायित्वों का निर्वहन किया जाना अनिवार्य है। इसी प्रकार वर्ष 2000 से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों में भी प्रभावित राज्यों तथा विस्थापित परिवारों के अधिकारों को संरक्षित करने पर बल दिया गया है।

इन प्रावधानों के अनुसार मध्यप्रदेश को उसके डूब क्षेत्र की वास्तविक क्षति के अनुरूप भरपाई मिलना तथा विस्थापन से प्रभावित प्रत्येक परिवार का न्यायपूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना आवश्यक था। आंदोलन का कहना है कि आज भी मध्यप्रदेश के हजारों विस्थापित परिवार पूर्ण पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक परिवारों को भूमि, आजीविका तथा पुनर्वास से जुड़े वैधानिक अधिकार अभी तक पूरी तरह प्राप्त नहीं हुए हैं।

इसी कारण मध्यप्रदेश सरकार ने शेष पुनर्वास कार्यों को पूरा करने के लिए गुजरात सरकार से 2,900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग भी की थी।

विवाद सुलझाने के लिए कई दौर की बैठकें

इस विवाद के समाधान के लिए मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अनेक बैठकें आयोजित की गईं। विवाद के निराकरण हेतु एक मध्यस्थता समिति का भी गठन किया गया, जिसमें सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया। समिति ने गुजरात के प्रतिनिधियों के साथ मध्यप्रदेश के डूब क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण भी किया।

इसी दौरान विभिन्न स्तरों पर समझौते को लेकर अलग-अलग जानकारियाँ सामने आती रहीं। प्रारंभिक खबरों में कहा गया कि मध्यप्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों के बीच हुई बैठक में गुजरात द्वारा मध्यप्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपये देने पर सहमति बनी है। बाद में प्रत्यक्ष वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ।

इसके बाद 6 जून 2026 को पुनः समाचार सामने आए कि गुजरात द्वारा मध्यप्रदेश को 7,388 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया है तथा 30 जून 2026 तक इसे अंतिम रूप दिए जाने की बात भी कही गई।

‘वन टाइम सेटलमेंट‘ पर उठे गंभीर सवाल

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री तथा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की उपस्थिति में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बैठक में सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबित विवादों के समाधान के लिए “वन टाइम सेटलमेंट” किया गया। इसे संघीय व्यवस्था के अंतर्गत राज्यों के बीच समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है, लेकिन आंदोलन का कहना है कि इस समझौते की वास्तविक शर्तें अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

आंदोलन के अनुसार उपलब्ध खबरों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है कि इस समझौते के तहत मध्यप्रदेश को गुजरात को 550 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस तथ्य ने अनेक गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अब तक मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र दोनों ही राज्य परियोजना से हुई क्षति, डूब क्षेत्र की भरपाई तथा पुनर्वास के लिए गुजरात से वित्तीय सहायता की मांग करते रहे हैं।

परियोजना लागत निर्धारण पर भी स्पष्टता आवश्यक

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि यदि यह निर्णय सरदार सरोवर परियोजना की संशोधित लागत और राज्यों की हिस्सेदारी के आधार पर लिया गया है, तो परियोजना की वास्तविक लागत और उसके निर्धारण की प्रक्रिया को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

आंदोलन के अनुसार वर्ष 1983 में परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4,200 करोड़ रुपये थी। योजना आयोग द्वारा 1988 में इसे लगभग 6,400 करोड़ रुपये के स्तर पर स्वीकृति दी गई। बाद के वर्षों में यही लागत बढ़ते-बढ़ते गुजरात सरकार के अनुसार 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक तथा गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व जल संसाधन मंत्री सुरेश मेहता के अनुसार लगभग 90 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।

आंदोलन का कहना है कि लागत में इतनी बड़ी वृद्धि के कारणों पर आज तक स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। मूल परियोजना नियोजन की कमियों का उल्लेख गुजरात में हुई विभिन्न समीक्षाओं, विश्व बैंक द्वारा नियुक्त अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र समीक्षा आयोग की रिपोर्ट तथा सर्वोच्च न्यायालय के 18 अक्टूबर 2000 के निर्णय में दिए गए अल्पमत निर्णय में भी किया गया था।

क्या स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लागत भी परियोजना में जोड़ी गई?

आंदोलन ने यह भी प्रश्न उठाया है कि गुजरात विधानसभा में विभिन्न वर्षों के बजट संबंधी चर्चाओं के दौरान स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तथा उसके आसपास विकसित पर्यटन परियोजनाओं की लागत को भी कई बार सरदार सरोवर परियोजना की लागत के साथ जोड़े जाने की चर्चा सामने आई।

कभी 1,055 करोड़ रुपये तो कभी वर्ष 2015 में लगभग 915 करोड़ रुपये की राशि परियोजना लागत के संदर्भ में सामने आई। आंदोलन ने पूछा है कि क्या इन व्ययों को वास्तव में बांध परियोजना की लागत का हिस्सा माना गया है? यदि ऐसा है तो इसकी वैधता क्या है और क्या मध्यप्रदेश शासन ने इस विषय पर आवश्यक स्पष्टता प्राप्त की है?

हजारों विस्थापित परिवार आज भी पुनर्वास की प्रतीक्षा में

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि सबसे गंभीर प्रश्न आज भी हजारों विस्थापित परिवारों के अधूरे पुनर्वास का है। मध्यप्रदेश में अभी भी बड़ी संख्या में परिवारों को वैकल्पिक कृषि भूमि, पुनर्वास भूखंड, भूखंडों का पंजीयन, शेष भूखंडों का आवंटन तथा वर्ष 2017 से स्वीकृत आवास निर्माण सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी है।

इसी प्रकार अनेक पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं का विकास भी अधूरा है। इन शेष कार्यों के लिए ही मध्यप्रदेश सरकार ने गुजरात से 2,900 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की थी। आंदोलन का प्रश्न है कि यदि यह राशि उपलब्ध नहीं होती, तो अधूरे पुनर्वास कार्यों को किस प्रकार पूरा किया जाएगा?

आंदोलन ने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2003 में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण के दौरान तत्कालीन अटॉर्नी जनरल ने भी स्पष्ट किया था कि भूमि अर्जन और पुनर्वास पर होने वाला पूरा व्यय गुजरात सरकार द्वारा प्रभावित राज्यों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। यह व्यवस्था नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय पर आधारित थी और इसे किसी भी स्तर पर नकारा नहीं जा सकता।

महाराष्ट्र के दावे भी अब तक लंबित

आंदोलन के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने भी डूबग्रस्त 6,488 हेक्टेयर वन भूमि के बदले लगभग 1,313 करोड़ रुपये तथा शेष पुनर्वास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक की मांग गुजरात सरकार के समक्ष रखी है।

इसके अतिरिक्त सरदार सरोवर परियोजना से नियोजित विद्युत उत्पादन का पूरा लाभ नहीं मिलने के कारण मध्यप्रदेश ने लगभग 900 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र ने लगभग 450 करोड़ रुपये की भरपाई की मांग भी समय-समय पर उठाई है। हालांकि जनवरी 2026 की बैठक में बिजली उत्पादन से जुड़े इन दावों को नई विद्युत योजना के संदर्भ में स्वीकार नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया।

जल नियोजन और आदिवासी अधिकारों पर भी चिंता

नर्मदा बचाओ आंदोलन ने कहा कि महाराष्ट्र में नर्मदा जल के उपयोग तथा नई जल योजनाओं को लेकर भी अनेक गंभीर प्रश्न बने हुए हैं। आंदोलन के अनुसार घाटी के आदिवासी गांवों के जल अधिकार सुनिश्चित किए बिना नर्मदा के जल को आठ परियोजनाओं के माध्यम से तापी घाटी की ओर ले जाने की योजना का संबंधित ग्रामसभाओं ने वर्ष 2018 से लगातार विरोध किया है।

इसके बावजूद यदि ऐसी योजनाओं को पुनः आगे बढ़ाया जाता है, तो यह स्थानीय समुदायों के अधिकारों की अनदेखी होगी। महाराष्ट्र में भी अनेक पात्र आदिवासी परिवारों का पुनर्वास पर्याप्त वित्तीय सहायता के अभाव में वर्षों से लंबित है।

राज्य के अधिकारों से समझौता न करने की मांग

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के वैध वित्तीय दावों तथा पुनर्वास संबंधी अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता प्रभावित राज्यों और लाखों विस्थापित नागरिकों के हितों के प्रतिकूल नहीं होना चाहिए।

आंदोलन का मानना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि हाल में हुआ समझौता किसी भी रूप में मध्यप्रदेश अथवा महाराष्ट्र के वैधानिक अधिकारों को प्रभावित न करे।

सरकार उपलब्ध सभी वैधानिक उपाय अपनाए

आंदोलन ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि वह 7,669 करोड़ रुपये के वैध भरपाई दावे, वन एवं शासकीय भूमि के उचित प्रतिकर तथा हजारों वंचित विस्थापित परिवारों के पूर्ण और न्यायसंगत पुनर्वास के लिए अपने पक्ष को दृढ़ता से रखे।

साथ ही, यदि आवश्यक हो तो राज्य सरकार उपलब्ध सभी वैधानिक एवं संवैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए राज्य और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

वियतनाम में बड़ा हादसा, कई भारतीयों को लेकर जा रही नाव डूबी; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

हनोई
 वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास बड़ा हादसा हो गया है, जहां भारतीय नाविकों से भरी नाव समुद्र में पलट गई है। हनोई में भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा हादसे की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। डूबे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

खोज और बचाव अभियान जारी रहने के बीच भारतीय मिशन ने कंट्रोल रूम बनाए हैं। दूतावास ने कहा कि स्थानीय अधिकारी घटना की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं।

दूतावास ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, “एक दुखद घटना में शनिवार को वियतनाम में फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई है।”

हेल्पलाइन नंबर जारी
आपातकालीन स्थिति में पीड़ितों की मदद और जानकारी के लिए हो ची मिन्ह सिटी में भारतीय महावाणिज्य दूतावास और हनोई स्थित दूतावास में 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित कर हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए हैं।

पहले कंट्रोल रूम से इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है- +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14 और +84 33 452 0414।

हनोई वाले दूसरे कंट्रोल रूम से इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है- +84 91 308 9165

प्रभावित परिवारों के लिए बनाया गया कंट्रोल रूम
दूतावास ने बताया कि प्रभावित परिवारों को सूचना और सहायता प्रदान करने के लिए, हो ची मिन्ह सिटी में भारतीय वाणिज्य दूतावास में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। किसी भी मदद के लिए इन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

वियतनाम बोट हादसे से जुड़ी 5 अहम बातें
• दोपहर 1 बजे हुआ हादसा
: फू क्वोक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन अथॉरिटी के मुताबिक, यह हादसा दोपहर करीब 1 बजे हुआ. ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की इस स्पीडबोट को 57 वर्षीय नगुयेन होंग है चला रहे थे जिसमें 32 भारतीय पर्यटकों के अलावा 3 क्रू मेंबर और 1 फ्लाइट अटेंडेंट सहित कुल 36 लोग सवार थे। 

• तकनीकी खराबी के कारण पलटी बोट: यह स्पीडबोट होन मे रुट से एन थोई पोर्ट (फू क्वोक एयरपोर्ट से लगभग 25 किमी दूर) जा रही थी. होन मे रुट नगोई द्वीप से करीब 400 मीटर दूर बोट में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण वह समंदर में पलट गई, जिससे सभी लोग पानी में गिर गए. हादसे में कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है लेकिन सटीक संख्या की पुष्टि होनी अभी बाकी है। 

• घटनास्थल के लिए रवाना हुए भारतीय राजदूत: वियतनाम में नियुक्त भारतीय राजदूत इस बेहद संवेदनशील मामले पर वहां के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे खुद भी दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होने वाले हैं। 

• हो ची मिन्ह और हनोई से दो टीमें भेजी गईं: प्रभावित भारतीयों की तुरंत मदद और रेस्क्यू के लिए भारतीय दूतावास की दो विशेष टीमें घटनास्थल के लिए रवाना की जा रही हैं. इनमें से पहली टीम आज शाम तक और दूसरी टीम देर रात तक दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभालेगी। 

• दूतावास ने जारी किए 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर: संकट की इस घड़ी में परिवारों को जानकारी और सहायता देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिए गए हैं. प्रभावित लोग हो ची मिन्ह सिटी के लिए +84 36 281 7930, +84 91 552 3714, +84 33 452 0414 और हनोई के लिए +84 91 308 9165 पर संपर्क कर सकते हैं। 

युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन 
हादसे के फौरन बाद वियतनाम के स्थानीय प्रशासन और तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने कमान संभाल ली है. समंदर की तेज धाराओं और मौसम की चुनौतियों के बीच लापता भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए गोताखोरों और आधुनिक नावों की मदद ली जा रही है. रेस्क्यू टीमें पल-पल समंदर की खाक छान रही हैं. हालांकि, अभी तक हादसे में हताहत हुए लोगों की सटीक संख्या और उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। 

 

न्यूजीलैंड में भावुक हुए PM मोदी, बोले- ‘कीवी मित्र का दिया मफलर आज भी मेरे पास है’

ऑकलैंड 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शिरकत की और संबोधित भी किया. कम्युनिटी इवेंट में भारतीय समुदाय के सामने अपनी खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘आज, 40 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड आया है. यह मेरा बहुत बड़ा सौभाग्य है कि मैं आपके लिए 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। 

इस दौरान पीएम मोदी ने मंच से अपनी एक ऐसी याद साझा की जो हर किसी के दिल को छू गई. पीएम मोदी ने करीब 25 से 30 साल पुरानी उस याद के पन्नों को पलटा, जब वे भारत की सक्रिय राजनीति या सरकार का हिस्सा नहीं थे और उन्हें सार्वजनिक जीवन में कोई नहीं जानता था। 

प्रधानमंत्री ने उस दौर को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा, “यह प्रधानमंत्री के रूप में मेरी पहली यात्रा हो सकती है, लेकिन 25-30 वर्ष पहले, जब मैं किसी सरकार का हिस्सा नहीं था और सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई नहीं जानता था, तब मुझे न्यूज़ीलैंड आने का अवसर मिला था. उस समय मुझे एक मफलर, एक टोपी और एक जोड़ी दस्ताने उपहार में मिले थे. आज मैं उन्हीं में से यह मफलर पहनकर आपके बीच आया हूं. इसे मुझे 25-30 वर्ष पहले न्यूज़ीलैंड के एक साथी ने भेंट किया था. मैंने वर्षों तक इसका उपयोग किया है और आज भी इसे उसी तरह संभालकर रखा है, जैसे मैं आप सभी के प्यार को संभालकर रखता हूं। 

भारत और न्यूजीलैंड के मजबूत कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस रिश्ते की बुनियाद बहुत गहरी है. उन्होंने कहा, “भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। 
 
पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच संबंध दोस्ती, साझा मूल्यों और आपसी प्रतिबद्धता पर आधारित हैं. न्यूज़ीलैंड की संस्कृति का एक सुंदर शब्द इस रिश्ते के सार को दर्शाता है-‘वाका’. सदियों से, यह शब्द लोगों को एक साथ लाने का प्रतीक रहा है.’वाका’ केवल एक नाव नहीं है. यह एक साझा यात्रा का प्रतीक है. आज, भारत-न्यूज़ीलैंड ‘वाका’ एक नई यात्रा पर साथ निकलने के लिए तैयार है। 

न्यूजीलैंड के महिलाओं की तारीफ
पीएम मोदी ने कहा, ‘हर युग में, हर दौर में भारत ने खुद को TRANSFORM किया है और इसका कारण है हमारी सीखने की ललक.भारत सबसे सीखता है, हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं बल्कि जनकल्याण की भावना मायने रखती है. इसलिए हमने न्यूजीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है. न्यूजीलैंड दुनिया का वो देश है, जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था.आज हम देखते हैं कि न्यूजीलैंड की सोसाइटी में महिलाएं बहुत बड़े पैमाने पर कंट्रीब्यूट कर रही हैं.भारत भी आज women led development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है। 

पीएम मोदी ने कहा, ‘न्यूजीलैंड वो जगह है, जहां सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है. कहीं खंडाला है, कहीं बॉम्बे हिल्स है, कहीं कोरोमंडल है, कलकत्ता स्ट्रीट है, दिल्ली क्रिसेंट है, अमृतसर स्ट्रीट है… ऐसे कितने ही नाम हैं, जहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे कीवी हो गए हैं और न्यूजीलैंड के लीडर से जब भी मैं मिला हूं आप सभी की प्रशंसा करते हैं.प्रशंसा आपकी होती है और सिर मेरा ऊंचा होता है। 

इस मौके पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने पीएम मोदी के शुरुआती जीवन का जिक्र करते हुए कहा, ‘वह (पीएम मोदी) बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करने पहुंचे हैं. उन्होंने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है. वह हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक हैं और न्यूजीलैंड के एक सच्चे दोस्त हैं। 

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा का अवसर: मुख्यमंत्री साय के निर्णय का छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन ने किया स्वागत

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा का अवसर: मुख्यमंत्री साय के निर्णय का छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात कर खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए जताया आभार

रायपुर,
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के महासचिव श्री विक्रम सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने राज्य सरकार द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ियों के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विशेष रूप से 20 विभिन्न खेलों के 156 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जाने तथा उन्हें शासकीय सेवा में लाभ का अवसर प्रदान करने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने इसे खेल प्रतिभाओं के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता का सर्वोत्तम प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन, संसाधन और सम्मान मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर प्रदान करने का निर्णय युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा तथा प्रदेश में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा देगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का गौरव निरंतर बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का सशक्त आधार हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास तथा खिलाड़ियों के हित में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है महतारी वंदन योजना : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है महतारी वंदन योजना : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने जारी की महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त, 66 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डीबीटी से 626.25 करोड़ रुपये अंतरित

29 किश्तों में अब तक 18,805.83 करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के खातों में पहुंचे

‘लखपति दीदी’ सहित विभिन्न योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को मिल रही नई मजबूती

रायपुर 
 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की किश्त के साथ योजना के अंतर्गत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में नारी शक्ति के सशक्तिकरण का जो व्यापक अभियान चल रहा है, छत्तीसगढ़ सरकार उसी संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतार रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान माताएं और बहनें स्वयं उन्हें बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अनेक महिलाओं ने इस राशि से छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, कई ने सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया है, जबकि बड़ी संख्या में परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में इसका उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के ये अनुभव इस योजना की वास्तविक सफलता और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभाव के प्रमाण हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ ‘लखपति दीदी’ जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर शत-प्रतिशत पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश भी दिए।

उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू की गई है। योजना के तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार जैसी गतिविधियों को भी नई मजबूती मिली है।

दतिया बवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने तोड़ी चुप्पी, पत्थरबाजी और 15 KM जाम पर दिया बड़ा बयान

दतिया 

मध्य प्रदेश के दतिया ज़िले में शनिवार को हिंसा भड़क गई. बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को 30 जुलाई को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने पुलिस से झड़प की और नेशनल हाईवे जाम कर दिया. वहीं अब इस पूरे मामले पर नरोत्तम मिश्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। 

हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी है।

प्रशासन के आदेश के अनुसार, अब बिना अनुमति किसी भी सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक आयोजन पर रोक रहेगी। साथ ही पांच या उससे अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश उपचुनाव के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

नरोत्तम ने समर्थकों से कहा कि मैंने कल भी विस्तार से कहा था, आज भी कह रहा हूं. ये पार्टी का निर्णय है. मैं अपील कर रहा हूं, ऐसा कुछ न करिए. पार्टी के फोरम पर अपनी बात कही जाती है, ऐसे आक्रोश नहीं किया जाता है. वहीं अधिकारियों ने बताया कि NH-44 पर 3000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने लगभग 12 घंटे तक जाम लगाए रखा, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. बाद में सुरक्षा बलों ने हाईवे को खाली कराया और कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया। 

हाईवे पर 15 किलोमीटर तक लग गया था जाम
सत्ताधारी BJP ने शुक्रवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की, जिससे मिश्रा के समर्थक नाराज़ हो गए. दतिया के कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने पत्रकारों को बताया कि नाराज़ कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे पर लगभग 11-12 घंटे तक जाम लगाए रखा. सड़क खाली करने के कहने के बावजूद उन्होंने पुलिस पर पथराव किया, जिससे पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. दतिया के SP, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों को चोटें आईं, लेकिन साथ ही यह भी साफ़ किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज नहीं किया. वानखेड़े ने कहा कि नाराज़ भीड़ ने पुलिस और अन्य गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन बाद में सड़क खाली करा ली गई और स्थिति अब नियंत्रण में है। 

एसपी ने क्या कहा?
दतिया SP मयूर खंडेलवाल ने बताया कि 3000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने दतिया शहर में शांति भंग की, बाज़ार बंद कराने की कोशिश की और 12 घंटे तक सड़क जाम कर दी. उन्होंने कहा कि पत्थरबाज़ी में छह से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए. हमने उन्हें शांत करने की कोशिश की और बताया कि शहर में आदर्श आचार संहिता लागू है. लेकिन जब वे पीछे नहीं हटे और पत्थरबाज़ी करने लगे, तो हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। 

SP ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया गया और चेतावनी दी गई कि अगर वे हिंसा करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को हुई राजनीतिक घटनाक्रम के बाद ज़िला इकाई के अध्यक्ष और स्थानीय पार्षदों समेत पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने विरोध में पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. आशुतोष तिवारी का नामांकन पूर्व मंत्री मिश्रा के लिए एक झटका था, जिन्हें पार्टी सूत्रों के अनुसार टिकट मिलने की उम्मीद थी और उन्होंने नामांकन फ़ॉर्म भी ख़रीद लिया था। 

दतिया के सेवढ़ा शहर के रहने वाले तिवारी राज्य BJP संगठन में सक्रिय रहे हैं. राज्य BJP ऑफ़िस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उत्साहित तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की और उनका आभार जताया. तिवारी ने कहा, “मिश्रा बहुत वरिष्ठ नेता और मेरे अभिभावक हैं, और उन्होंने कहा है कि वे पार्टी और मेरे लिए प्रचार करेंगे। 

इस वजह से दतिया में हो रहा है उपचुनाव
मिश्रा के समर्थकों में से एक ने बताया कि कुछ लोगों ने अपनी शर्ट उतार दी और सड़क पर लेट गए, जबकि अन्य ने धरना दिया. एक अन्य समर्थक ने कहा कि जब तक “नरोत्तम दादा” को टिकट नहीं मिल जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे और ज़रूरत पड़ने पर भगवा पार्टी छोड़ भी देंगे. आपको बता दें कि कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनावों में दतिया से तत्कालीन गृह मंत्री मिश्रा को 7,500 से ज़्यादा वोटों से हराया था। 

हालांकि, दिल्ली की एक अदालत ने इस साल अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन साल की सज़ा सुनाई. जिसके कारण उन्हें विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया और उपचुनाव की ज़रूरत पड़ी. बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई. चुनाव आयोग ने हाल ही में देश की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया, जिनमें दतिया भी शामिल है. बाकी दो सीटें बिहार और गुजरात में हैं. शेड्यूल के अनुसार, वोट 30 जुलाई को डाले जाएंगे और नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। 

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ में एआई (AI) तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा फैसला

रायपुर : छत्तीसगढ़ में एआई (AI) तकनीक से होगा पीएमजीएसवाई सड़कों का निरीक्षण- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का बड़ा फैसला

हर माह वीडियो आधारित निरीक्षण से गड्ढों, दरारों और पॉटहोल की होगी पहचान, त्वरित मरम्मत की बनेगी कार्ययोजना

रायपुर, 

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों की मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन में पीएमजीएसवाई के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस एआई आधारित सड़क निरीक्षण प्रणाली को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांच

        समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस नई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।

सर्वाधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को मिलेगी प्राथमिकता

        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि एआई तकनीक से प्राप्त आंकड़ों (डेटा) के आधार पर राज्य की सबसे ज्यादा खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी। इसके बाद उनके संधारण (रखरखाव) की बजट कार्ययोजना तैयार कर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम व सुरक्षित बनेगा।

कल से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

        इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कल से ही प्रायोगिक तौर पर (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक चयनित सड़क का एआई आधारित निरीक्षण शुरू किया जाए। इन शुरुआती निरीक्षणों से मिलने वाले परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस उपयोग से सड़कों की आयु बढ़ेगी और समय पर मरम्मत होने से जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

        इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव भीम सिंह, सचिव धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा तथा संचालक एनआरएलएम अश्वनी देवांगन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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