उमरिया के पाली क्षेत्र के तिवनी गांव में दर्दनाक हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 5 की मौत

उमरिया

जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत तिवनी गांव के पास शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पुलिया पर पलट गई। हादसे में 5 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब दो दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जा रहे थे धार्मिक कार्यक्रम में

जानकारी के अनुसार पाली से लगे ग्राम गिंजरी के ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर बिजौरा गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान तिवनी गांव स्थित शनिधाम के पास पुलिया पर ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित हो गया और ट्रॉली पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना तेज था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। हालांकि संयोग से ट्रैक्टर पुलिया के नीचे नहीं गिरा, अन्यथा दुर्घटना और भी भयावह हो सकती थी।

 

मंत्री सारंग ने किया निर्माणाधीन 10 लेन करोंद बायपास प्रोजेक्ट का निरीक्षण

भोपाल

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को निर्माणाधीन 10 लेन करोंद बायपास परियोजना का एनएचएआई, नगर निगम, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, मेट्रो कॉर्पोरेशन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य की प्रगति, यातायात व्यवस्था, जनसुविधाओं एवं निर्माण कार्य के दौरान उत्पन्न हो रही समस्याओं का मौके पर जायजा लेकर संबंधित आधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से करें पानी की व्यवस्था

निरीक्षण में मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही के कारण पानी लाइन बार-बार क्षतिग्रस्त होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण नागरिकों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिये तत्काल एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि जहां भी पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, वहां तत्काल अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

अव्यवस्थाओं को लेकर की नाराजगी व्यक्त

मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य में सामने आ रही व्यवस्थागत कमियों एवं अव्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि करोंद बायपास परियोजना शहर के यातायात को सुगम बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्माण कार्य के कारण नागरिकों को अनावश्यक परेशानियां न उठानी पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात, आवागमन एवं दैनिक गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करें।

पानी एवं सीवेज लाइनों को व्यवस्थित रूप से करें शिफ्ट

मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण एजेंसियां खुदाई करने से पहले पानी एवं सीवेज लाइनों की स्थिति देख लें, जिससे भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न न हों। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरी योजना एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाए, जिससे परियोजना समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हो सके।

ठेकेदार से लिया जाएगा आर्थिक मुआवजा

मंत्री  सारंग ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही से पाइप-लाइन टूटने की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिये आर्थिक मुआवजा भी वसूला जाएगा। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो तथा निर्माण कार्य में आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

 

भारत को अक्षय ऊर्जा की वैश्विक महाशक्ति बना रही पीएम सूर्य घर योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ भारत को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। आत्मनिर्भर ऊर्जा के साथ सशक्त भारत की दिशा में केन्द्र सरकार के बढ़ते कदमों का ही सुपरिणाम है कि आज देश के 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित हो गए हैं। इनमें मध्यप्रदेश के 1 लाख 29 हजार 971 घर शामिल हैं। ये सभी घर-परिवार अब बिजली बिल की चिंता से हमेशा के लिए मुक्त होकर स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा से रौशन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में स्थापित इन सोलर संयंत्रों से 456 मेगावॉट से अधिक स्वच्छ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी हो रहा है।

केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के नेशनल पोर्टल के अनुसार इस योजना से अब तक प्रदेश के 1 लाख 34 हजार 436 परिवार लाभान्वित हो चुके हैं। प्रदेश के पीएम सूर्य घर योजना हितग्राहियों को अब तक 901.92 करोड़ रुपये की अनुदान (सब्सिडी) राशि रिलीज की जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा प्रदेश में 6 लाख घरों को ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ के तहत सौर ऊर्जा से रौशन करने का लक्ष्य लिया गया है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए तेजी से काम जारी है। विभाग को अब तक 2 लाख 4 हजार 601 आवेदन मिल चुके हैं।

 

 

परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए अंतर्विभागीय समन्वय और टीम भावना सर्वोपरि: सिंह

भोपाल

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी (एमपीयूडीसी) की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त प्रबंध संचालक  दिव्यांक सिंह ने परियोजना प्रबंधकों एवं संविदाकारों को निर्देशित किया है कि समस्त जलप्रदाय एवं मलजल योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च तकनीकी गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रबंधन इकाई, क्रियान्वयन इकाई, स्थानीय निकाय और संविदाकार आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें जिससे जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हो सके।  सिंह ने वर्षा ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए संविदाकारों को कड़ी हिदायत दी कि वे प्राथमिकता के आधार पर सड़कों के जीर्णोद्धार (रोड रेस्टोरेशन) के शेष कार्यों को मानसून पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर जल प्रदाय के देयक वितरित करने और वाटर आईडी को प्रॉपर्टी आईडी से लिंक करने की प्रक्रिया को गति प्रदान करने के निर्देश दिए जिससे राजस्व प्रबंधन सुदृढ़ हो सके।

भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगर प्रबंधन संस्थान में आयोजित बैठक में पूर्ण तथा प्रगतिरत कुल 134 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की बिंदुवार एवं सूक्ष्म समीक्षा की गई। अतिरिक्त प्रबंध संचालक ने रेखांकित किया कि परियोजना क्रियान्वयन में उत्पन्न होने वाली तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्याओं से वरिष्ठ प्रबंधन को समय रहते अवगत कराया जाए जिससे उनके त्वरित निवारण में कोई विलंब न हो। उन्होंने परियोजना प्रबंधकों को अनुबंधों की शर्तों का गहन एवं सूक्ष्म अध्ययन करने का परामर्श भी दिया इससे संविदात्मक स्तर पर कोई गतिरोध उत्पन्न न हो। बैठक में विभिन्न बाह्य विभागों जैसे एमपीआरडीसी, एनएचएआई, जल संसाधन तथा एमपीआरडीए से लंबित अनुमतियों और अनापत्ति प्रमाण पत्रों से संबंधित प्रकरणों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिससे विकास कार्यों की गति निर्बाध बनी रहे।

समीक्षा बैठक के तकनीकी सत्र में परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का व्यापक प्रस्तुतीकरण प्रमुख अभियंता  आनंद सिंह एवं मुख्य अभियंता  शैलेन्द्र शुक्ला द्वारा किया गया, जिसमें प्रत्येक परियोजना की अद्यतन स्थिति और आगामी कार्ययोजना को रेखांकित किया गया। बैठक का समन्वय उप परियोजना संचालक प्रशासन  राजीव रंजन पांडे द्वारा निष्पादित किया गया। बैठक में सहभागिता के रूप में एमपीयूडीसी की समस्त 10 क्षेत्रीय इकाइयों के परियोजना प्रबंधक, सहायक परियोजना प्रबंधक, संबंधित संविदाकार तथा परियोजना सलाहकार फर्मों के विषय-विशेषज्ञ एवं तकनीकी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

मोदी सरकार की नई स्कीम का बड़ा तोहफा, मिलेगा कैश, आसान लोन और इंश्योरेंस का लाभ

नई दिल्ली

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी सुविधाओं के लिए स्कीम लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत सरकार एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी में है। यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) आशुतोष पेडनेकर ने दी है।

सरकार ने बढ़ाए कदम
पेडनेकर ने बताया कि सरकार गिग वर्कर्स को सुविधाएं देने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स को लागू करने की हरी झंडी दी गई है। यह बोर्ड इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर काम करेगा। इसके साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड भी बनाया जा रहा है।

इस फंड के जरिए सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, कैश, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए आर्थिक मदद करेगी। इन योजनाओं के स्वरूप को अंतिम रूप देने के लिए सरकार फंड मैनेजर्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। सरकार की ओर से इसके लिए प्लेटफॉर्म कंपनियों को अपने कर्मचारियों का डेटा 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने को कहा गया है। इससे कामगारों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सके।

कंपनियों के लिए क्या प्लान?
सरकार की योजना के तहत एग्रीगेटर कंपनियों का डेटा और ई-श्रम पोर्टल एक-दूसरे से सीधे जुड़ेंगे। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी। कामगार मोबाइल ऐप के जरिए अपने अधिकारों और इस्तेमाल की जानकारी भी देख सकेंगे।

गिग वर्कर्स कौन हैं?
गिग वर्कर्स ऐसे कर्मचारी होते हैं जो पारंपरिक कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से बाहर रहकर तय समय या प्रोजेक्ट के आधार पर काम करते हैं। इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र ठेकेदार और पार्ट-टाइम कर्मचारी आदि शामिल हो सकते हैं। वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे हैं जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे लोगों या कंपनियों को सेवाएं देते हैं। उदाहरण से समझें तो ओला-उबर के ड्राइवर या स्विगी-जोमैटो के डिलीवरी ब्वॉय प्लेटफॉर्म वर्कर की कैटेगरी में आते हैं।

भारत में पहली बार नए श्रम कानूनों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। फिलहाल देश में करीब 1 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं और सरकार को उम्मीद है कि दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत का दबदबा, राजनाथ बोले- 4 दिन में ही पाकिस्तान ने मांगा युद्धविराम

नई दिल्ली 
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने मात्र चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर कर दिया। यह जानकारी शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि भारत की निर्णायक इच्छाशक्ति, आधुनिक सैन्य क्षमता और तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट तालमेल का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारत द्वारा अब तक लड़े गए युद्धों और अभियानों की तुलना में ऑपरेशन सिंदूर कई मायनों में अलग और अत्यंत प्रभावशाली रहा। दरअसल देश की सैन्य शक्ति, रणनीतिक क्षमता और सैनिकों के अदम्य साहस का प्रतीक बन चुके ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुक्रवार को एक विशेष अवसर देखने को मिला। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक सैन्य अभियान पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया। नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में भारतीय सेनाओं के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पूरा वातावरण गर्व, सम्मान तथा राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

 इस दौरान रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के सैन्य इतिहास की एक अभूतपूर्व सफलता बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि शुक्रवार को जारी किया गया स्मारक प्रकाशन केवल घटनाओं का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह उन सैनिकों की भावनाओं, संघर्षों और अनुभवों को भी सामने लाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों और रणनीतियों से नहीं जीते जाते, बल्कि उनमें नेतृत्व, साहस, मानसिक दृढ़ता और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। यह पुस्तक इन्हीं पहलुओं को बेहद मानवीय और प्रेरणादायक तरीके से प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि जब देश के सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की बाजी लगाते हैं, तब राष्ट्र के नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि वे देशहित को सर्वोपरि रखें। रक्षा मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस प्रकाशन से प्रेरणा लें और ऐसे जिम्मेदार नागरिक बनें जो देश की संप्रभुता और सुरक्षा के महत्व को गहराई से समझ सकें।

समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की रणनीतिक योजना, संयुक्त सैन्य समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर पर सैनिकों के साहसिक प्रदर्शन पर अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। इस अभियान ने न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। स्मारक प्रकाशन को सैनिकों के साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति को समर्पित एक जीवंत दस्तावेज माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का कार्य करेगा। 

वो पैंट उतारकर सामने खड़ा था, हैरेसमेंट की घटना याद कर छलका एक्ट्रेस आमना का दर्द

मुंबई 

शोबिज की दुनिया हो या आम जिंदगी- लड़कियों को अक्सर गंदी नजरों और मनचलों का सामना करना पड़ा है. टीवी एक्ट्रेस आमना शरीफ भी यंग ऐज में इस तरह की हरकतों का सामना कर चुकी हैं।आमना ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि उस दौरान वो समझ नहीं पाती थीं कि क्या हो रहा है. वो छोटी थीं तो डर जाती थीं. ये सभी इंसीडेंट्स मुंबई के ही हैं। 

आमना ने हॉटरफ्लाई से बातचीत में उस दौर को याद करते हुए कहा कि- मैं अपने मैथ्स के ट्यूशन के लिए गई थी. उनके साथ बाकी लड़कियां भी थीं। आमना ने कहा- तो जब हम सब जब ट्यूशन से बाहर निकलीं तो एक आदमी अपनी पैंट उतारे सामने खड़ा था।       

आमना ने बताया कि वो सभी डर के मारे कांपने लगे थे. वो बोलीं- हम सिर्फ लड़कियां थीं, डर के मारे हम सर के पास भागे. एक्ट्रेस ने बताया कि ऐसी चीजें होती रहती थीं। एक और इंसीडेंट याद करते हुए वो बोलीं- एक बार किसी ने मुझे बहुत गंदे तरीके से टच करने की भी कोशिश की थी. ऐसा बस और ट्रेन- दोनों में हो चुका है।     

  आमना ने बताया कि वो बहुत यंग थीं तब, एक बार तो इस तरह का इंसीडेंट तब हुआ था जब वो अपनी आंटी के साथ थीं. ऐसे वक्त में आप रियलाइज नहीं कर पाते कि क्या हुआ। आमना ने बताया कि अब एक मां होने के नाते ये बहुत डरा देने वाला होता है. मैं सोचती हूं कभी-कभी कि मैं इतनी ओवर-प्रोटेक्टिव क्यों हूं कभी-कभी, तो ये इंसीडेंट्स की वजह से। क्योंकि ऐसे हादसे आपके जहन में हमेशा रहते हैं. आपके मन में डर बना रहता है. भले ही अब मुझे समझ है, लेकिन बचपन में नहीं थी. तो मैं हमेशा अपने बच्चे को प्रोटेक्ट करना चाहती हूं। 

LIC शेयर में एक दिन में 50% गिरावट! निवेशकों में मची हलचल, जानिए वजह

मुंबई 
 ग्लोबल टेंशन की वजह से एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार बिकवाली मोड में आ गया है। इस माहौल के बीच शुक्रवार को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयर में अचानक 50% तक की गिरावट देखी गई। बुधवार को एलआईसी के शेयर 830 रुपये पर बंद हुए थे तो शुक्रवार को कीमत 410 रुपये के स्तर पर थी। वहीं, गुरुवार को बकरीद की वजह से बाजार में ट्रेडिंग नहीं हुई थी। अब सवाल है कि एलआईसी के शेयर में आखिर एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई है। आइए इसका भी गणित समझ लेते हैं।

बोनस शेयर की वजह से दिखी गिरावट
दरअसल, सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के 1:1 बोनस इश्यू एडजस्ट होने की वजह से यह शेयर अब पहले के मुकाबले 50 पर्सेंट से ज्यादा सस्ता हो गया है। बता दें कि अप्रैल के महीने में LIC ने एक प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके तहत रिकॉर्ड डेट तक हर योग्य शेयरहोल्डर के पास मौजूद 10 रुपये के हर पूरी तरह से पेड-अप इक्विटी शेयर के बदले, 10 रुपये का एक और पूरी तरह से पेड-अप इक्विटी शेयर जारी किया जाएगा। कंपनी ने बताया था कि वह 31 दिसंबर, 2025 तक उपलब्ध अपने रिजर्व और सरप्लस (जो लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये था) में से 6,325 करोड़ रुपये तक की पूंजी का इस्तेमाल करके बोनस शेयर जारी करेगी।

कंपनी ने अपने 1:1 बोनस इश्यू के लिए 29 मई (शुक्रवार) को रिकॉर्ड डेट तय की थी। बता दें कि यह LIC का अपने 21 लाख से ज्यादा शेयरहोल्डर्स के लिए पहला बोनस इश्यू है। मई 2022 में शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से इस सरकारी बीमा कंपनी ने अब तक 5 अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है।

कौन है बोनस शेयर के लिए योग्य?
सिर्फ वही शेयरहोल्डर बोनस शेयर पाने के योग्य होंगे, जिनके डीमैट अकाउंट में शुक्रवार तक LIC के शेयर मौजूद होंगे। सेबी के T+1 सेटलमेंट नियम के कारण, निवेशकों को कंपनी के शेयर रिकॉर्ड डेट से कम से कम एक ट्रेडिंग दिन पहले खरीदने होंगे ताकि यह पक्का हो सके कि उस तारीख तक शेयर उनके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाएं और इस तरह वे कॉर्पोरेट एक्शन के लिए योग्य हो सकें। बता दें कि 28 मई (गुरुवार) को बकरी ईद के कारण बाजार बंद थे। ऐसे में LIC के शेयर खरीदने की असल में आखिरी तारीख 27 मई (बुधवार) थी।

बोनस इश्यू क्या होता है?
बोनस इश्यू में कंपनी अपने रिजर्व में से फ्री शेयर बांटती है। इसे आमतौर पर कंपनी की मजबूत वित्तीय सेहत और विकास की संभावनाओं का संकेत माना जाता है। बोनस शेयर जारी करने से कुल बकाया शेयरों की संख्या तो बढ़ जाती है लेकिन इससे कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कोई बदलाव नहीं आता है। इससे शेयरों की लिक्विडिटी और खरीदने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

गांव-गांव पहुंच रही सुशासन की योजनाएं – उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

रायपुर

गांव-गांव पहुंच रही सुशासन की योजनाएं – उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिले के कवर्धा विकासखंड के ग्राम जेवड़नखुर्द तथा बोड़ला विकासखंड के ग्राम मिनमीनिया में आयोजित सुशासन तिहार में ग्रामीणों के बीच पहुंचे एवं आमजनों से सीधे संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच सादगी और आत्मीयता के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं तथा कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने शिविर में दिव्यांगजनों की मांग पर त्वरित रूप से ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को नए आवास की चाबी भी सौंपी तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत अनेक हितग्राहियों को लाभान्वित किया।
          
इस दौरान उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सुशासन तिहार में शासन की योजनाएं अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। उन्होंने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यो की जानकारी देते हुए बताया कि बरपेलाटोला से सिंघनपुरी तक 2.5 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण, मुख्य सड़क पोड़ी से उसलापुर नहर होते हुए बोधईकुंडा तक 4.5 करोड़ रुपए की सड़क, चरडोंगरी – कोठार मार्ग से सारंगपुरखुर्द नहर पार तक 2.6 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण तथा सूरजपुर से मोहगांव तक 3.58 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य किया जाएगा।
 
गांवों तक पहुंची प्रधानमंत्री आवास, शिविर में मिल रही निःशुल्क दस्तावेज सुविधा
           
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए लंबे समय तक आंदोलन चलाया गया था और  सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक के पहले ही प्रस्ताव में प्रधानमंत्री आवास योजना को शामिल किया गया और पहली कैबिनेट में ही 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए। उन्होंने बताया कि ग्राम मिनमीनिया में 21 गांवों और ग्राम जेवड़नखुर्द में 15 गांवों के लिए शिविर आयोजित किया गया है और सभी गांवों में आवास की भी स्वीकृति की जा चुकी है। 
         
उन्होंने बताया कि नए हितग्राहियों को भी जोड़ने के लिए नया सर्वे भी कराया गया है, ताकि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि सुशासन तिहार शिविर में बी-1, खसरा और ऋण पुस्तिका जैसी आवश्यक दस्तावेज निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे है।

अटल डिजिटल सेवा केंद्र, स्मार्ट क्लास, महतारी सदन और मिनी स्टेडियम से गांवों में बढ़ रहीं सुविधाएं
          
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के अनेक गांवों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण अपने गांव में ही विभिन्न योजनाओं की राशि निकाल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 27 किस्तों में 27 हजार रुपए महिलाओं के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं, जिनकी राशि अब ग्रामीण अपने गांव में ही निकाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांवों के स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई है, जहां डिजिटल माध्यम और 3डी एनिमेशन से बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है।  दिव्यांगजनों को गतिशील बनाने के लिए स्कूटी प्रदान की जा रही है। महिलाओं की बैठकों के लिए महतारी सदन और युवाओं में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है।

सिंचाई परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ
          
उप मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 8.10 करोड़ रुपए की लागत से छीरपानी जलाशय से जुड़ी राम्हेपुर वितरक नहर एवं संबद्ध माइनर नहरों के सीसी लाइनिंग कार्य का भूमिपूजन कर निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के पूरा होने पर 1540 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और मानिकपुर, सिल्हाटी, बघर्रा, सारंगपुर कला, सिंधनुपरी एवं राम्हेपुर कला सहित 6 गांवों के किसान सीधे लाभान्वित होंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा छिरपानी नहर विस्तार के लिए 50 करोड़ रुपए की घोषणा भी की गई है। इसके साथ ही भोरमदेव फीडर, दियाबार जलाशय, नेवारी और कोठार जलाशय में करोड़ों रुपए की लागत से नहर विस्तार और उन्नयन कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना एजेंसी, अधिकारियों और हम सभी की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों से उन्होंने स्वयं निगरानी रखने और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तत्काल देने की अपील की।

उप मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
        
उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सुशासन तिहार शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से हितग्राहियों को मिल रहे लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा निर्देशित किया कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम में शामिल होकर दिया शुभाशीष
          
सुशासन तिहार शिविर के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा अन्नप्राशन एवं गोदभराई कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने शिशुओं को अन्नप्राशन कराकर उन्हें शुभाशीष प्रदान किया तथा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म संपन्न कराई।
          
इस दौरान पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य  भगत पटेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत  कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट,  विजय पटेल,  मनीराम साहू,  लोकचंद साहू,  नितेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण और ग्रामवासी उपस्थित रहे।

 

राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला संपन्न

​रायपुर       

छत्तीसगढ़ में नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं में विश्वसनीयता और डेटा गवर्नेंस को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) एवं भारत सरकार के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय डिजिटल इंडिया परामर्श कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न शासकीय विभागों को ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023’ के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीकी अनुपालन को लेकर कड़े व स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए।

​नागरिकों की डेटा सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता:  मयंक अग्रवाल     

कार्यशाला को संबोधित करते हुए CHiPS के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO)  मयंक अग्रवाल ने राज्य सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना शासन की मुख्य प्राथमिकता है।
​”DPDP अधिनियम केवल एक विधिक या कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में ‘Privacy by Design’ (डिजाइन में ही गोपनीयता) एवं ‘Citizen-Centric Data Governance’ (नागरिक-केंद्रित डेटा गवर्नेंस) की दिशा में एक क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण परिवर्तन है।   ​

अग्रवाल ने राज्य की तकनीकी प्रगति साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘सेवा सेतु’ प्लेटफॉर्म का डिजिलॉकर, उमंग और माय स्कीम (My Scheme) जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ सफलतापूर्वक एकीकरण (Integration) किया जा चुका है। इसके जरिए नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्र और सरकारी सेवाएँ डिजिटल रूप से आसानी से मिल रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आगामी चरण में सभी विभागों को “Digital-by-Default” दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि अधिक से अधिक सेवाओं को राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) से जोड़ा जा सके।

​पारदर्शिता, जवाबदेही और साइबर सुरक्षा को मिलेगा बल:  सुनील जैन
     
​नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), नई दिल्ली के संचालक  सुनील जैन ने कार्यशाला में विभागीय दायित्वों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि DPDP अधिनियम, 2023 सभी सरकारी संस्थाओं के लिए डेटा प्रबंधन की नई और सख्त जवाबदेहियों को परिभाषित करता है। इस अधिनियम के कड़ाई से अनुपालन से न केवल विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी, बल्कि राज्य की साइबर सुरक्षा प्रणाली को भी अभूतपूर्व बल मिलेगा।

​साइबर खतरों से निपटने के लिए ‘डेटा न्यूनतमकरण’ जरूरी
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राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक  पी. रामाराव ने डिजिटल युग में डेटा की सुरक्षा को लेकर विभागों को सचेत किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारियां आजकल साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने पर होती हैं। इससे बचने के लिए उन्होंने सभी विभागों को डेटा न्यूनतमकरण (Data Minimization), लॉग मॉनिटरिंग तथा नियमित अंतराल पर सुरक्षा समीक्षा (Security Audit) अपनाने की महती सलाह दी।

​राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने दी तकनीकी प्रस्तुतियाँ
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कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। NeGD के  नितीश कालरा ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, डेटा फिड्यूशियरी (Data Fiduciary) की भूमिका, सहमति प्रबंधन (Consent Management) और नागरिक शिकायत निवारण तंत्र पर प्रस्तुति दी। चिप्स के  आशीष जायसवाल और NeGD के  विशाल विरमानी ने डिजिलॉकर के साथ विभागों के एकीकरण, सुरक्षित दस्तावेज़ साझाकरण और डिजिटल प्रमाण-पत्रों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। ​सु कीर्ति गुप्ता एवं  महेश कुमार ने उमंग और माय स्कीम प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक नागरिक सेवाओं की पहुँच बढ़ाने की रणनीतियों को साझा किया।

​30, 60 और 90 दिनों का बनेगा एक्शन प्लान
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कार्यशाला के समापन पर CHiPS के संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अनुपम आशीष टोप्पो ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने घोषणा की कि इस कार्यशाला से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों के आधार पर सभी विभागों के लिए 30, 60 और 90 दिनों की एक चरणबद्ध विभागीय कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाएगी। इस योजना के माध्यम से राज्य में DPDP अधिनियम का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं के विस्तार को गति दी जाएगी।      ​

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में CHiPS सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के 180 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम में डेटा संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एकीकरण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर गहन मंथन किया गया।

 

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