भोपाल गौरव दिवस पर याद किया विलिनीकरण आंदोलन का स्वर्णिम इतिहास

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भोपाल। भोपाल गौरव दिवस के अवसर पर सोमवार को धर्म संस्कृति समिति के तत्वावधान में न्यू मार्केट स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर प्रांगण में गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भोपाल के भारत संघ में विलय के ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों और आंदोलन से जुड़े परिवारों का सम्मान किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

ध्वजारोहण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण कर किया गया। ध्वजारोहण के पश्चात उपस्थित नागरिकों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का वाचन किया। राष्ट्रभक्ति के माहौल के बीच उपस्थित लोगों ने देश और शहर के गौरवशाली इतिहास को याद किया।

दो वर्षों के संघर्ष के बाद भोपाल बना भारत का अभिन्न अंग

अपने संबोधन में विधायक भगवानदास सबनानी ने भोपाल विलिनीकरण आंदोलन के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब हैदराबाद, जूनागढ़ और भोपाल के शासकों ने भारत में विलय से इंकार कर दिया था, तब भोपाल की जनता ने भाई उद्धव दास मेहता के नेतृत्व में दो वर्षों तक संघर्ष किया। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप 31 मई 1949 को नवाब ने विलय दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और 1 जून 1949 को पहली बार भोपाल में तिरंगा फहराया गया। यह दिन भोपाल के इतिहास में गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया।

वीर परिवारों का किया गया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान भोपाल विलिनीकरण आंदोलन से जुड़े वीर परिवारों को सम्मानित किया गया। वैद्य उद्धव दास मेहता के सुपुत्र वैद्य गोपालदास मेहता, स्वतंत्रता सेनानी लालसिंह की पोती श्रीमती हंसा ठाकुर तथा शिवमंगल उपाध्याय के सुपुत्र डॉ. प्रवीण उपाध्याय को विधायक भगवानदास सबनानी ने शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

धर्म संस्कृति समिति ने भी किया विशेष सम्मान

धर्म संस्कृति समिति के संस्थापक नरेंद्र भानु खण्डेलवाल ने सम्मानित परिजनों को माला पहनाकर तथा श्रीफल भेंट कर विशेष सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि ऐसे वीर परिवारों का सम्मान नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और देशभक्ति की भावना जागृत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

त्याग और संघर्ष को याद करने का दिन है भोपाल गौरव दिवस

कार्यक्रम का संचालन समिति के पूर्व सचिव अजय देवनानी ने किया। उन्होंने कहा कि 1 जून 1949 का दिन उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और जननायकों के त्याग एवं संघर्ष को स्मरण करने का अवसर है, जिनके अथक प्रयासों से भोपाल भारत संघ का हिस्सा बना। उन्होंने नागरिकों से शहर की ऐतिहासिक विरासत, विकास और गौरव को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में मुकेश गुप्ता, कमल गौड़, यशवंत गोलवलकर, राजू अनेजा, योगेन्द्र सिंह राजपूत, पंडित प्रदीप रथ, पंडित हिमांशु रथ, संतोष ब्रह्मभट्ट, राम नेता सहित अनेक सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का संदेश

वक्ताओं ने कहा कि भोपाल का भारत संघ में विलय केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह जनता के संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति की विजय थी। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को अपने शहर के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से परिचित कराया जा सकता है।

क्यों मनाया जाता है भोपाल गौरव दिवस?

1 जून 1949 को भोपाल राज्य का आधिकारिक रूप से भारत संघ में विलय हुआ था। इससे पहले भोपाल की जनता ने भारत में विलय के समर्थन में लंबा जनआंदोलन चलाया था। इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष 1 जून को भोपाल गौरव दिवस मनाया जाता है, ताकि स्वतंत्रता सेनानियों और आंदोलनकारियों के योगदान को याद किया जा सके।

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